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Rare Ivory comb returns to Westphalia for exhibition

A finely carved ivory double comb from the 12th century has gone on display at the LWL Museum of Archaeology and Culture in Herne, Germany. One of only 60 known examples, the comb is what is known as a liturgical comb, and the only one ever found in the region of North Rhine-Westphalia.

The comb was discovered in a 2017 excavation at the Holsterburg octagonal castle near Warburg. It has a rectangular central panel on both sides, each decorated with a different intricately carved pictorial motifs. One side features a hunting scene of a dog attacking a hare in mid-leap. The other features to peacocks facing each other, chests together, wings and tails pointed backwards. It has two sets of teeth, long, wide-set ones on the bottom, short fine ones on the top.

Made from elephant ivory, the comb could have been made in the Byzantine Empire or one of the major workshops north of the Alps (Metz, Liège and Cologne all produced fine carved ivory). The material and craftsmanship mark it as a “liturgical” comb, so called because the few that have been recovered were found in church treasuries, not in secular collections. Liturgical combs were produced between 800 and 1200 A.D. and there are written accounts of these types of combs being used from the 10th century onwards to neaten the hair of prelates after they pulled on their vestments.

A recent microscopic study has found the remains of gold in the eye of the hare and on the handle above the peacocks, suggest it was originally chryselephantine, so even more precious and rare than other liturgical combs. It was also not found in a sacred context and given the pictorial subjects, archaeologists believe the comb likely belonged to the lords of Holthusen who built the castle and was lost in the third quarter of the 12th century.

Holsterburg unusual octagonal design and the high quality of its construction including amenities like a warm-air heating system indicate it was high-end even for a castle from the period, so the owners clearly spared no expense. Their belongings were therefore exceptional as well, and they were sought to represent their importance and ambitions by acquiring artifacts emblematic of high-ranking clergy and aristocracy.

The comb was conserved by LWL experts and then was displayed in special exhibitions in Berlin, Münster, and Paderborn. It has now settled into its permanent home, the LWL Museum in Herne.



* This article was originally published here

आर माधवन@56; शराब पीकर फिल्माया 3 इडियट्स का सीन:इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला तो पिता रोए, रॉकेट्री के लिए दांत टेढ़े करवाए

‘3 इडियट्स’, ‘धुरंधर’, ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’, ‘तनु वेड्स मनु’ और ‘रहना है तेरे दिल में’ जैसी कई फिल्मों में दमदार एक्टिंग करने वाले आर माधवन की गिनती बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के सबसे टैलेंटेड, सिंपल और वर्सेटाइल एक्टर्स में होती है। आर माधवन का ‘3 इडियट्स’ में निभाया गया फरहान का किरदार और उसका डायलॉग ‘अब्बा नहीं मानेंगे’ आज भी सोशल मीडिया पर बने मीम्स में लोकप्रिय है। हालांकि यह कम लोग जानते हैं कि फरहान का किरदार माधवन की रियल लाइफ से काफी जुड़ा हुआ था। असल जिंदगी में भी उन्होंने अपने पिता से कहा था कि उन्हें नहीं पता वह क्या बनना चाहते हैं, लेकिन वह इंजीनियर नहीं बनना चाहते। यही वजह थी कि फरहान के किरदार की भावनाएं और संघर्ष पर्दे पर इतने नेचुरल लगे। आज आर माधवन 56 साल के हो चुके हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से- सेना में शामिल होना चाहते थे आर माधवन का जन्म 1 जून 1970 को झारखंड के जमशेदपुर (तब बिहार) में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता टाटा स्टील में मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव थे और मां बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर थीं। कॉलेज के दौरान माधवन ने एनसीसी में हिस्सा लिया और भारत की तरफ से कई कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने ब्रिटिश आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के साथ ट्रेनिंग भी की। वे भारतीय सेना में शामिल होना चाहते थे, लेकिन जब तक वे ट्रेनिंग पूरी कर लौटे, तब तक शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की तय उम्र सीमा से वे सिर्फ 6 महीने बड़े हो चुके थे और नियमों के कारण वे सेना में शामिल नहीं हो पाए। माधवन ने पिता से कहा था- मैं इंजीनियरिंग नहीं करना चाहता आर माधवन एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज, एनसीसी और कम्युनिकेशन में बेहद तेज, लेकिन पढ़ाई के मामले में एवरेज स्टूडेंट थे। माधवन ने रणवीर अलाहबादिया को दिए इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं 8वीं में फेल हो गया था। मैथ्स में 39% आए थे। स्कूल ने मुझे अगली क्लास में जाने नहीं दिया।’ एक्टर ने बताया था कि उनके पैरेंट्स इस बात से बेहद दुखी थे। दक्षिण भारतीय परिवार से आने वाले उनके पैरेंट्स चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बने, टाटा स्टील में नौकरी करे और एक स्थिर जिंदगी जिए। उन्होंने कहा था, ‘मेरे पैरेंट्स को लगता था कि मैं जिंदगी में कुछ नहीं कर पाऊंगा। उन्हें डर था कि मेरी शादी तक नहीं होगी।’ बाद में जब माधवन को इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला, तब उनके पिता टूट गए थे। माधवन ने बताया था कि उनके पिता की आंखों में आंसू थे। माधवन ने कहा था, ‘पिता ने मुझसे पूछा- मैंने तुम्हारे साथ क्या गलत किया है? तुम करना क्या चाहते हो?’ इस पर उन्होंने कहा, उन्हें नहीं पता वो क्या करना चाहते हैं, लेकिन वो इंजीनियरिंग नहीं करना चाहते। अपनी स्टूडेंट से शादी की आर माधवन और उनकी पत्नी सरिता बिरजे की लव स्टोरी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। दिलचस्प बात ये है कि जिस लड़की से आगे चलकर माधवन ने शादी की, वो कभी उनकी स्टूडेंट हुआ करती थीं। माधवन जब कोल्हापुर में बीएससी में ग्रेजुएशन कर रहे थे, इसी दौरान उन्होंने पब्लिक स्पीकिंग का कोर्स शुरू किया। उन दिनों कोल्हापुर में उनकी क्लासेस काफी मशहूर थीं। माधवन और सरिता की पहली मुलाकात भी इन्हीं क्लासेस के दौरान हुई थी। ‘द बॉम्बे जर्नी’ में माधवन ने कहा था, ‘वो (सरिता) अपनी कजिन से मिलने कोल्हापुर आई थीं। उनकी कजिन मेरी क्लासेस में पढ़ती थीं।’ इसके बाद सरिता भी आर माधवन की स्टूडेंट बनीं और उनसे पब्लिक स्पीकिंग की क्लासेस लीं। कोर्स खत्म होने के बाद सरिता एयर होस्टेस बन गईं। इसके पीछे वो माधवन की क्लासेस को ही वजह मानती थीं। इसके बाद उन्होंने माधवन को डिनर पर बुलाया। इसके बाद दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई और बाद में दोनों ने शादी की। मणिरत्नम का फोन आया तो लगा दोस्त मजाक कर रहे हैं आर माधवन ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टीवी सीरियल्स से की। उन्होंने ‘बनेगी अपनी बात’, ‘घर जमाई’, ‘सी हॉक्स’ और ‘आहट’ जैसे शो में काम किया। फिल्मों में उनका बड़ा ब्रेक डायरेक्टर मणिरत्नम की फिल्म ‘अलैपायुथे’ से मिला। मणिरत्नम से जुड़ा भी दिलचस्प किस्सा है। दरअसल, 90 के दशक में माधवन सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन के साथ एक विज्ञापन शूट कर रहे थे। उसी दौरान संतोष ने उनकी कुछ तस्वीरें मणिरत्नम को दिखाई थीं। इसके बाद मणिरत्नम ने माधवन को अपनी फिल्म ‘इरुवर’ के लिए फोन किया। जब उन्हें कॉल में कहा गया कि वो मणिरत्नम बोल रहे हैं, तो माधवन को लगा कि उनके दोस्त मजाक कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने फोन काट दिया। इसके बाद मणिरत्नम ने एक बार फिर कॉल किया। इस बार वो तमिल में बात करने लगे। तब उन्हें यकीन हुआ कि मणिरत्नम ही हैं, क्योंकि उनके दोस्त तमिल में बात नहीं कर सकते थे। मणिरत्नम ने माधवन से बात की, ऑडिशन के लिए बुलाया, लेकिन उन्हें फिल्म के लिए रिजेक्ट कर दिया। यह कहते हुए कि उनकी आंखें बहुत कम उम्र की लगती हैं, इसलिए वो उस रोल में फिट नहीं बैठते। हालांकि, उन्होंने वादा किया कि भविष्य में वो जरूर साथ काम करेंगे। मणिरत्नम ने माधवन को अपनी फिल्म ‘अलैपायुथे’ में कास्ट किया। इसी फिल्म से लीड रोल के तौर आर माधवन का करियर शुरू हुआ। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और वो स्टार बन गए। इस फिल्म का हिंदी रीमेक ‘साथिया’ के नाम से बनाया गया था। शराब वाला सीन असली दिखाने के लिए शराब पी फिल्म ‘3 इडियट्स’ की गिनती आर माधवन की सबसे फेमस फिल्मों में होती है। उनका रोल फरहान आज की पीढ़ी में भी बहुत फेमस है और इस पर कई मीम भी बने। इस फिल्म के शराब वाले सीन को असली दिखाने के लिए तीनों एक्टर्स आमिर खान, आर माधवन और शरमन जोशी ने सचमुच शराब पी ली थी। माधवन ने रणवीर अलाहबादिया के पॉडकास्ट में बताया था कि ये आइडिया आमिर खान का था। उनका मानना था कि नशे की एक्टिंग करने से बेहतर है थोड़ा सचमुच पी लिया जाए, क्योंकि असली नशे में इंसान नॉर्मल बनने की कोशिश करता है। माधवन ने कहा था, ‘आमिर का कहना था कि कभी शराबी बनने की एक्टिंग मत करो। शराब पीकर नॉर्मल बनने की कोशिश करो, तभी वो असली लगेगा।’ तीनों ने प्लान बनाया कि शूटिंग से पहले 3-4 पेग लेंगे और फिर सीन शूट करेंगे, लेकिन तभी शूटिंग में तकनीकी दिक्कत आ गई और शूट 2 घंटे लेट हो गया। माधवन ने हंसते हुए बताया था, ‘हमने सोचा कि शरीर में उतना ही अल्कोहल बनाए रखना है, इसलिए पीते रहे, लेकिन हमें नहीं पता था कि बैंगलोर की ठंडी हवा शराब का असर इतना बढ़ा देगी।’ उन्होंने कहा था, ‘जब शूट शुरू हुआ तो हमें लग रहा था कि हम बिल्कुल नॉर्मल हैं, लेकिन असल में एक-एक डायलॉग बोलने में घंटों लग रहे थे।’ ‘रॉकेट्री’ के लिए दांत तक तुड़वा लिए थे माधवन ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ सिर्फ आर माधवन की फिल्म नहीं थी, यह उनका पैशन था। माधवन ने फिल्म में साइंटिस्ट नांबी नारायणन का रोल करने के लिए खुद को पूरी तरह बदल लिया था। आजकल फिल्मों में उम्र बदलने के लिए ज्यादातर एक्टर्स प्रोस्थेटिक मेकअप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन माधवन ने आसान रास्ता नहीं चुना। उन्होंने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म में 29 साल से लेकर 80 साल तक का लुक दिखाना था और इसके लिए उन्होंने कोई प्रोस्थेटिक इस्तेमाल नहीं किया। माधवन ने कहा था, ‘हमने कोई प्रोस्थेटिक यूज नहीं किया। मैंने सच में वजन बढ़ाया, वजन घटाया, बाल बढ़ाए।’ सबसे दर्दनाक बदलाव उनके दांतों का था। माधवन ने बताया था कि नांबी नारायणन जैसा दिखने के लिए उन्होंने अपने दांतों की बनावट तक बदलवा दी थी। उन्होंने कहा था- 'मैंने अपने दांत टेढ़े करवाए। उन्हें वापस ठीक होने में डेढ़ साल लगे।' ‘रॉकेट्री’ में शाहरुख खान ने फ्री में काम किया था फिल्म ‘रॉकेट्री’ में शाहरुख खान ने कैमियो किया था और इसके लिए उन्होंने कोई फीस नहीं ली थी। माधवन ने बताया था कि उस समय वो शाहरुख के साथ फिल्म ‘जीरो’ में काम कर रहे थे। उसी दौरान शाहरुख के जन्मदिन पर उन्होंने ‘रॉकेट्री’ की कहानी सुनाई। लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में माधवन ने कहा था, ‘शाहरुख ने मुझसे कहा- मैडी, मैं तुम्हारी फिल्म का हिस्सा बनना चाहता हूं।’ माधवन को पहले लगा कि शाहरुख मजाक कर रहे हैं। उन्होंने उन्हें गले लगाया और धन्यवाद कहकर बात खत्म कर दी। लेकिन शाहरुख सीरियस थे। माधवन ने बताया था, ‘उन्होंने कहा- नहीं यार, मैं सीरियस हूं। मुझे कुछ भी करा लो, बैकग्राउंड में खड़ा कर दो, लेकिन मैं तुम्हारी फिल्म का हिस्सा बनना चाहता हूं।’ कुछ दिन बाद माधवन की पत्नी सरिता ने उन्हें टोका कि शाहरुख ने इतनी प्यार से बात कही थी, कम से कम उन्हें मैसेज तो करना चाहिए। इसके बाद माधवन ने शाहरुख के मैनेजर को मैसेज किया। एक्टर ने कहा था, ‘तुरंत जवाब आया- शाहरुख पूछ रहे हैं, डेट्स कब देनी हैं?’ माधवन को तब भी यकीन नहीं हो रहा था। उन्होंने सोचा था कि शायद सिर्फ दिल रखने के लिए कहा गया होगा, लेकिन शाहरुख ने पूरा समय निकालकर शूटिंग की। माधवन ने बताया था, ‘शाहरुख अपनी पूरी टीम के साथ आए थे। उन्होंने डायलॉग समझने के लिए अलग से राइटर तक रखा था। उन्होंने मुझसे एक पैसा नहीं लिया।’ बेटे के करियर के लिए दुबई शिफ्ट हो गए थे माधवन आर माधवन के बेटे वेदांत माधवन ने स्विमिंग को अपना करियर चुना है। नेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने 5 गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल जीते। माधवन ने बेटे वेदांत के करियर के चलते दुबई में शिफ्ट होने का फैसला किया। दरअसल, वेदांत प्रोफेशनल स्विमिंग की ट्रेनिंग ले रहे थे। तभी कोविड आ गया और भारत में स्विमिंग पूल बंद हो गए। रणविजय सिंह के साथ बातचीत में माधवन ने बताया था, ‘मैंने बहुत पहले पढ़ा था कि 9 से 15 साल की उम्र बच्चों का ग्रोथ स्पर्ट पीरियड होता है। उसी समय उन्हें सबसे ज्यादा एक्सरसाइज और फिजिकल ट्रेनिंग की जरूरत होती है।’ उन्होंने कहा था, ‘दुर्भाग्य या सौभाग्य से वेदांत का ग्रोथ स्पर्ट कोविड के दौरान आया। भारत में सारे पूल बंद थे, तो हम बहुत परेशान थे।’ माधवन ने बताया था कि एक दिन उनकी पत्नी सरिता ने फैसला लिया कि अब इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा था, ‘मेरी पत्नी ने कहा- बस बहुत हो गया। दुबई में पूल खुले हैं। वो अगस्त 2020 में अकेले ही वेदांत को लेकर दुबई चली गईं।’ माधवन ने बताया था कि कुछ समय बाद वो भी दुबई जाकर परिवार के साथ बस गए। वहां वेदांत ने जमकर ट्रेनिंग की और उसी दौरान उसने भारत के लिए मेडल जीतने शुरू किए। आर माधवन ने पान मसाला विज्ञापन ठुकरा दिया था आज जहां कई बड़े सितारे पान मसाला और गुटखा ब्रांड्स का प्रचार करते नजर आते हैं, वहीं माधवन ने करोड़ों रुपए का ऑफर सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वो अपने दर्शकों के सामने गलत संदेश नहीं देना चाहते थे। दरअसल, एक बड़ी पान मसाला कंपनी अपने ब्रांड के लिए नया चेहरा तलाश रही थी। कंपनी चाहती थी कि माधवन उसका प्रचार करें। इसके लिए उन्हें बड़ी रकम ऑफर की गई, लेकिन माधवन ने साफ इनकार कर दिया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, माधवन का मानना था कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते उनकी जिम्मेदारी सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि लोगों पर पड़ने वाले असर को समझना भी है। …………………………………… फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरी भी पढ़ें… करण जौहर@54; लड़कियों जैसा कहकर उड़ा मजाक:अमिताभ को डायरेक्ट करने के डर से बेहोश हुए, 'मेट गाला' में शामिल एकमात्र भारतीय डायरेक्टर बचपन से ही करण जौहर की चाल, बोलने का तरीका और बॉडी लैंग्वेज मजाक का कारण बनी। जिसके चलते करण धीरे-धीरे इतने डर गए कि लोगों के बीच जाने से कतराने लगे। पूरी खबर यहां पढ़िए…

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आर माधवन@56; शराब पीकर फिल्माया 3 इडियट्स का सीन:इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला तो पिता रोए, रॉकेट्री के लिए दांत टेढ़े करवाए

‘3 इडियट्स’, ‘धुरंधर’, ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’, ‘तनु वेड्स मनु’ और ‘रहना है तेरे दिल में’ जैसी कई फिल्मों में दमदार एक्टिंग करने वाले आर माधवन की गिनती बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री के सबसे टैलेंटेड, सिंपल और वर्सेटाइल एक्टर्स में होती है। आर माधवन का ‘3 इडियट्स’ में निभाया गया फरहान का किरदार और उसका डायलॉग ‘अब्बा नहीं मानेंगे’ आज भी सोशल मीडिया पर बने मीम्स में लोकप्रिय है। हालांकि यह कम लोग जानते हैं कि फरहान का किरदार माधवन की रियल लाइफ से काफी जुड़ा हुआ था। असल जिंदगी में भी उन्होंने अपने पिता से कहा था कि उन्हें नहीं पता वह क्या बनना चाहते हैं, लेकिन वह इंजीनियर नहीं बनना चाहते। यही वजह थी कि फरहान के किरदार की भावनाएं और संघर्ष पर्दे पर इतने नेचुरल लगे। आज आर माधवन 56 साल के हो चुके हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से- सेना में शामिल होना चाहते थे आर माधवन का जन्म 1 जून 1970 को झारखंड के जमशेदपुर (तब बिहार) में एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता टाटा स्टील में मैनेजमेंट एग्जीक्यूटिव थे और मां बैंक ऑफ इंडिया में मैनेजर थीं। कॉलेज के दौरान माधवन ने एनसीसी में हिस्सा लिया और भारत की तरफ से कई कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने ब्रिटिश आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के साथ ट्रेनिंग भी की। वे भारतीय सेना में शामिल होना चाहते थे, लेकिन जब तक वे ट्रेनिंग पूरी कर लौटे, तब तक शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की तय उम्र सीमा से वे सिर्फ 6 महीने बड़े हो चुके थे और नियमों के कारण वे सेना में शामिल नहीं हो पाए। माधवन ने पिता से कहा था- मैं इंजीनियरिंग नहीं करना चाहता आर माधवन एक्स्ट्रा-करिकुलर एक्टिविटीज, एनसीसी और कम्युनिकेशन में बेहद तेज, लेकिन पढ़ाई के मामले में एवरेज स्टूडेंट थे। माधवन ने रणवीर अलाहबादिया को दिए इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं 8वीं में फेल हो गया था। मैथ्स में 39% आए थे। स्कूल ने मुझे अगली क्लास में जाने नहीं दिया।’ एक्टर ने बताया था कि उनके पैरेंट्स इस बात से बेहद दुखी थे। दक्षिण भारतीय परिवार से आने वाले उनके पैरेंट्स चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बने, टाटा स्टील में नौकरी करे और एक स्थिर जिंदगी जिए। उन्होंने कहा था, ‘मेरे पैरेंट्स को लगता था कि मैं जिंदगी में कुछ नहीं कर पाऊंगा। उन्हें डर था कि मेरी शादी तक नहीं होगी।’ बाद में जब माधवन को इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला, तब उनके पिता टूट गए थे। माधवन ने बताया था कि उनके पिता की आंखों में आंसू थे। माधवन ने कहा था, ‘पिता ने मुझसे पूछा- मैंने तुम्हारे साथ क्या गलत किया है? तुम करना क्या चाहते हो?’ इस पर उन्होंने कहा, उन्हें नहीं पता वो क्या करना चाहते हैं, लेकिन वो इंजीनियरिंग नहीं करना चाहते। अपनी स्टूडेंट से शादी की आर माधवन और उनकी पत्नी सरिता बिरजे की लव स्टोरी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। दिलचस्प बात ये है कि जिस लड़की से आगे चलकर माधवन ने शादी की, वो कभी उनकी स्टूडेंट हुआ करती थीं। माधवन जब कोल्हापुर में बीएससी में ग्रेजुएशन कर रहे थे, इसी दौरान उन्होंने पब्लिक स्पीकिंग का कोर्स शुरू किया। उन दिनों कोल्हापुर में उनकी क्लासेस काफी मशहूर थीं। माधवन और सरिता की पहली मुलाकात भी इन्हीं क्लासेस के दौरान हुई थी। ‘द बॉम्बे जर्नी’ में माधवन ने कहा था, ‘वो (सरिता) अपनी कजिन से मिलने कोल्हापुर आई थीं। उनकी कजिन मेरी क्लासेस में पढ़ती थीं।’ इसके बाद सरिता भी आर माधवन की स्टूडेंट बनीं और उनसे पब्लिक स्पीकिंग की क्लासेस लीं। कोर्स खत्म होने के बाद सरिता एयर होस्टेस बन गईं। इसके पीछे वो माधवन की क्लासेस को ही वजह मानती थीं। इसके बाद उन्होंने माधवन को डिनर पर बुलाया। इसके बाद दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई और बाद में दोनों ने शादी की। मणिरत्नम का फोन आया तो लगा दोस्त मजाक कर रहे हैं आर माधवन ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत टीवी सीरियल्स से की। उन्होंने ‘बनेगी अपनी बात’, ‘घर जमाई’, ‘सी हॉक्स’ और ‘आहट’ जैसे शो में काम किया। फिल्मों में उनका बड़ा ब्रेक डायरेक्टर मणिरत्नम की फिल्म ‘अलैपायुथे’ से मिला। मणिरत्नम से जुड़ा भी दिलचस्प किस्सा है। दरअसल, 90 के दशक में माधवन सिनेमैटोग्राफर संतोष सिवन के साथ एक विज्ञापन शूट कर रहे थे। उसी दौरान संतोष ने उनकी कुछ तस्वीरें मणिरत्नम को दिखाई थीं। इसके बाद मणिरत्नम ने माधवन को अपनी फिल्म ‘इरुवर’ के लिए फोन किया। जब उन्हें कॉल में कहा गया कि वो मणिरत्नम बोल रहे हैं, तो माधवन को लगा कि उनके दोस्त मजाक कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने फोन काट दिया। इसके बाद मणिरत्नम ने एक बार फिर कॉल किया। इस बार वो तमिल में बात करने लगे। तब उन्हें यकीन हुआ कि मणिरत्नम ही हैं, क्योंकि उनके दोस्त तमिल में बात नहीं कर सकते थे। मणिरत्नम ने माधवन से बात की, ऑडिशन के लिए बुलाया, लेकिन उन्हें फिल्म के लिए रिजेक्ट कर दिया। यह कहते हुए कि उनकी आंखें बहुत कम उम्र की लगती हैं, इसलिए वो उस रोल में फिट नहीं बैठते। हालांकि, उन्होंने वादा किया कि भविष्य में वो जरूर साथ काम करेंगे। मणिरत्नम ने माधवन को अपनी फिल्म ‘अलैपायुथे’ में कास्ट किया। इसी फिल्म से लीड रोल के तौर आर माधवन का करियर शुरू हुआ। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और वो स्टार बन गए। इस फिल्म का हिंदी रीमेक ‘साथिया’ के नाम से बनाया गया था। शराब वाला सीन असली दिखाने के लिए शराब पी फिल्म ‘3 इडियट्स’ की गिनती आर माधवन की सबसे फेमस फिल्मों में होती है। उनका रोल फरहान आज की पीढ़ी में भी बहुत फेमस है और इस पर कई मीम भी बने। इस फिल्म के शराब वाले सीन को असली दिखाने के लिए तीनों एक्टर्स आमिर खान, आर माधवन और शरमन जोशी ने सचमुच शराब पी ली थी। माधवन ने रणवीर अलाहबादिया के पॉडकास्ट में बताया था कि ये आइडिया आमिर खान का था। उनका मानना था कि नशे की एक्टिंग करने से बेहतर है थोड़ा सचमुच पी लिया जाए, क्योंकि असली नशे में इंसान नॉर्मल बनने की कोशिश करता है। माधवन ने कहा था, ‘आमिर का कहना था कि कभी शराबी बनने की एक्टिंग मत करो। शराब पीकर नॉर्मल बनने की कोशिश करो, तभी वो असली लगेगा।’ तीनों ने प्लान बनाया कि शूटिंग से पहले 3-4 पेग लेंगे और फिर सीन शूट करेंगे, लेकिन तभी शूटिंग में तकनीकी दिक्कत आ गई और शूट 2 घंटे लेट हो गया। माधवन ने हंसते हुए बताया था, ‘हमने सोचा कि शरीर में उतना ही अल्कोहल बनाए रखना है, इसलिए पीते रहे, लेकिन हमें नहीं पता था कि बैंगलोर की ठंडी हवा शराब का असर इतना बढ़ा देगी।’ उन्होंने कहा था, ‘जब शूट शुरू हुआ तो हमें लग रहा था कि हम बिल्कुल नॉर्मल हैं, लेकिन असल में एक-एक डायलॉग बोलने में घंटों लग रहे थे।’ ‘रॉकेट्री’ के लिए दांत तक तुड़वा लिए थे माधवन ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ सिर्फ आर माधवन की फिल्म नहीं थी, यह उनका पैशन था। माधवन ने फिल्म में साइंटिस्ट नांबी नारायणन का रोल करने के लिए खुद को पूरी तरह बदल लिया था। आजकल फिल्मों में उम्र बदलने के लिए ज्यादातर एक्टर्स प्रोस्थेटिक मेकअप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन माधवन ने आसान रास्ता नहीं चुना। उन्होंने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म में 29 साल से लेकर 80 साल तक का लुक दिखाना था और इसके लिए उन्होंने कोई प्रोस्थेटिक इस्तेमाल नहीं किया। माधवन ने कहा था, ‘हमने कोई प्रोस्थेटिक यूज नहीं किया। मैंने सच में वजन बढ़ाया, वजन घटाया, बाल बढ़ाए।’ सबसे दर्दनाक बदलाव उनके दांतों का था। माधवन ने बताया था कि नांबी नारायणन जैसा दिखने के लिए उन्होंने अपने दांतों की बनावट तक बदलवा दी थी। उन्होंने कहा था- 'मैंने अपने दांत टेढ़े करवाए। उन्हें वापस ठीक होने में डेढ़ साल लगे।' ‘रॉकेट्री’ में शाहरुख खान ने फ्री में काम किया था फिल्म ‘रॉकेट्री’ में शाहरुख खान ने कैमियो किया था और इसके लिए उन्होंने कोई फीस नहीं ली थी। माधवन ने बताया था कि उस समय वो शाहरुख के साथ फिल्म ‘जीरो’ में काम कर रहे थे। उसी दौरान शाहरुख के जन्मदिन पर उन्होंने ‘रॉकेट्री’ की कहानी सुनाई। लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में माधवन ने कहा था, ‘शाहरुख ने मुझसे कहा- मैडी, मैं तुम्हारी फिल्म का हिस्सा बनना चाहता हूं।’ माधवन को पहले लगा कि शाहरुख मजाक कर रहे हैं। उन्होंने उन्हें गले लगाया और धन्यवाद कहकर बात खत्म कर दी। लेकिन शाहरुख सीरियस थे। माधवन ने बताया था, ‘उन्होंने कहा- नहीं यार, मैं सीरियस हूं। मुझे कुछ भी करा लो, बैकग्राउंड में खड़ा कर दो, लेकिन मैं तुम्हारी फिल्म का हिस्सा बनना चाहता हूं।’ कुछ दिन बाद माधवन की पत्नी सरिता ने उन्हें टोका कि शाहरुख ने इतनी प्यार से बात कही थी, कम से कम उन्हें मैसेज तो करना चाहिए। इसके बाद माधवन ने शाहरुख के मैनेजर को मैसेज किया। एक्टर ने कहा था, ‘तुरंत जवाब आया- शाहरुख पूछ रहे हैं, डेट्स कब देनी हैं?’ माधवन को तब भी यकीन नहीं हो रहा था। उन्होंने सोचा था कि शायद सिर्फ दिल रखने के लिए कहा गया होगा, लेकिन शाहरुख ने पूरा समय निकालकर शूटिंग की। माधवन ने बताया था, ‘शाहरुख अपनी पूरी टीम के साथ आए थे। उन्होंने डायलॉग समझने के लिए अलग से राइटर तक रखा था। उन्होंने मुझसे एक पैसा नहीं लिया।’ बेटे के करियर के लिए दुबई शिफ्ट हो गए थे माधवन आर माधवन के बेटे वेदांत माधवन ने स्विमिंग को अपना करियर चुना है। नेशनल लेवल पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने 5 गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल जीते। माधवन ने बेटे वेदांत के करियर के चलते दुबई में शिफ्ट होने का फैसला किया। दरअसल, वेदांत प्रोफेशनल स्विमिंग की ट्रेनिंग ले रहे थे। तभी कोविड आ गया और भारत में स्विमिंग पूल बंद हो गए। रणविजय सिंह के साथ बातचीत में माधवन ने बताया था, ‘मैंने बहुत पहले पढ़ा था कि 9 से 15 साल की उम्र बच्चों का ग्रोथ स्पर्ट पीरियड होता है। उसी समय उन्हें सबसे ज्यादा एक्सरसाइज और फिजिकल ट्रेनिंग की जरूरत होती है।’ उन्होंने कहा था, ‘दुर्भाग्य या सौभाग्य से वेदांत का ग्रोथ स्पर्ट कोविड के दौरान आया। भारत में सारे पूल बंद थे, तो हम बहुत परेशान थे।’ माधवन ने बताया था कि एक दिन उनकी पत्नी सरिता ने फैसला लिया कि अब इंतजार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा था, ‘मेरी पत्नी ने कहा- बस बहुत हो गया। दुबई में पूल खुले हैं। वो अगस्त 2020 में अकेले ही वेदांत को लेकर दुबई चली गईं।’ माधवन ने बताया था कि कुछ समय बाद वो भी दुबई जाकर परिवार के साथ बस गए। वहां वेदांत ने जमकर ट्रेनिंग की और उसी दौरान उसने भारत के लिए मेडल जीतने शुरू किए। आर माधवन ने पान मसाला विज्ञापन ठुकरा दिया था आज जहां कई बड़े सितारे पान मसाला और गुटखा ब्रांड्स का प्रचार करते नजर आते हैं, वहीं माधवन ने करोड़ों रुपए का ऑफर सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वो अपने दर्शकों के सामने गलत संदेश नहीं देना चाहते थे। दरअसल, एक बड़ी पान मसाला कंपनी अपने ब्रांड के लिए नया चेहरा तलाश रही थी। कंपनी चाहती थी कि माधवन उसका प्रचार करें। इसके लिए उन्हें बड़ी रकम ऑफर की गई, लेकिन माधवन ने साफ इनकार कर दिया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, माधवन का मानना था कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते उनकी जिम्मेदारी सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि लोगों पर पड़ने वाले असर को समझना भी है। …………………………………… फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरी भी पढ़ें… करण जौहर@54; लड़कियों जैसा कहकर उड़ा मजाक:अमिताभ को डायरेक्ट करने के डर से बेहोश हुए, 'मेट गाला' में शामिल एकमात्र भारतीय डायरेक्टर बचपन से ही करण जौहर की चाल, बोलने का तरीका और बॉडी लैंग्वेज मजाक का कारण बनी। जिसके चलते करण धीरे-धीरे इतने डर गए कि लोगों के बीच जाने से कतराने लगे। पूरी खबर यहां पढ़िए…

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वायरल गर्ल बोली- सनोज मिश्रा ने मेरा शोषण किया:डायरेक्टर समेत 4 के खिलाफ केरल में FIR कराई; मिश्रा की सफाई- ये साजिश

वायरल गर्ल ने डायरेक्टर सनोज मिश्रा और तीन अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) में FIR कराई है। केरल की एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस ने केस दर्ज जांच शुरू कर दी है। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- 29 अप्रैल को चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब वह नाबालिग थी, तब डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने फिल्म 'द डायरी ऑफ मणिपुर' की शूटिंग के दौरान उसके साथ दुर्व्यवहार किया था। मिश्रा ने उसे एक्टिंग के मौके देने का झांसा देकर उसका शोषण किया। अधिकारी ने बताया कि कथित घटना केरल के बाहर मध्य प्रदेश में हुई थी। यह मामला संबंधित पुलिस स्टेशन को सौंप दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दर्ज कराया है। आरोपियों में केरल के विहिप नेता और वकील अनिल विलायल भी शामिल हैं। पीड़िता ने उन पर सोशल मीडिया पर बदनामी करने का आरोप लगाया है। दो अन्य आरोपियों के नामों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है। मिश्रा बोले- आरोप सोची-समझी साजिश उधर, फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने इन आरोपों को सोची-समझी साजिश बताया है। दावा किया कि उन्हें 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। बोले- नाबालिग से फर्जी कागजों के आधार पर शादी की डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनकी फिल्म की अभिनेत्री को बहला-फुसलाकर केरल पहुंचाया गया। नाबालिग लड़की से फर्जी कागजों के आधार पर शादी की गई। अब मामले में आवाज उठाने पर उन्हें ही झूठे केस में फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा- जिन लोगों पर अपहरण, दुष्कर्म और गलत जानकारी देने जैसे आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। उल्टा मेरे खिलाफ ही पॉक्सो जैसी गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर दी गई। लड़की का परिवार मेरे साथ है। उसका दावा है कि लड़की से दबाव में बयान दिलवाए जा रहे हैं। सनोज ने कहा कि केरल पुलिस उन्हें तलाश रही है जबकि मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहा है। उसे शासन-प्रशासन का संरक्षण मिला हुआ है। कहा- मेरा परिवार परेशान, फिल्म का भविष्य भी संकट में सनोज मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा कि इस लड़ाई के कारण उनका परिवार परेशान है। वे भारी कर्ज में हैं और उनकी फिल्म का भविष्य भी संकट में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि उनकी मां बीमार हैं और घर में निराशा का माहौल है। मिश्रा ने कहा, “मैं अकेला लड़ रहा हूं, लेकिन सच एक दिन सामने आएगा। मुझे साधु-संतों का आशीर्वाद और लोगों की दुआएं मिल रही हैं।” वायरल गर्ल प्रेग्नेंट, पति ने कहा- पुलिस के सामने पेश नहीं हो सकती बता दें कि पीड़िता इन दिनों प्रेग्नेट है। उसके पति फरमान खान ने दावा किया है ऐसी हालत में वह यात्रा नहीं कर सकती और पुलिस के सामने पेश नहीं हो सकती। कोच्चि पहुंची मध्य प्रदेश पुलिस से फरमान ने कहा- डॉक्टरों ने स्वास्थ्य और गर्भावस्था को देखते हुए बेड रेस्ट की सलाह दी है। फिलहाल पुलिस दावे की जांच कर रही है। पुष्टि के लिए स्थानीय प्रशासन से मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा जा सकता है। इस बयान से साफ है कि वायरल गर्ल लापता नहीं है और पति के साथ रह रही है। एमपी पुलिस अब तक नाबालिग होने के मामले में दोनों से पूछताछ नहीं कर सकी है। जन्मतिथि के दो अलग-अलग प्रमाण पत्र मिले थे वायरल गर्ल की शादी शुरू से विवाद में है। पहले इसे ‘लव जिहाद’ बताया गया, फिर परिवार ने नाबालिग होने का दावा किया। जांच में महेश्वर नगर परिषद के जन्म प्रमाण पत्र में विसंगतियां मिली थीं। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार उसका जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था। 11 मार्च 2026 को शादी के समय उसकी उम्र 16 साल, 2 महीने और 12 दिन थी। इसके बाद प्रशासन ने 1 जनवरी 2008 वाले पुराने प्रमाण पत्र को निरस्त करने के निर्देश दिए थे। परिजन ने कहा था- फरमान ने बहला-फुसलाकर शादी की वायरल गर्ल के माता-पिता की शिकायत है कि फरमान ने उसे बहला-फुसलाकर शादी के लिए राजी किया था। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) जांच में सामने आया कि शादी के समय वह नाबालिग थी। इसके बाद फरमान खान पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ। इस मामले में बयान के लिए उसे पुलिस के सामने पेश होना था। फिलहाल, केरल हाई कोर्ट ने फरमान की गिरफ्तारी पर 20 मई तक रोक लगा रखी है। वायरल गर्ल ने माता-पिता पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे वायरल गर्ल ने केरल के थंपानूर पुलिस स्टेशन में बयान देकर माता-पिता पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। उसने कहा था कि परिजन चाचा के लड़के से शादी का दबाव बना रहे थे, जबकि वह उसे भाई मानती है। मानसिक तनाव के दौरान फरमान ने उसका साथ दिया। नजदीकियां प्रेम में बदलीं तो दोनों ने केरल के एक मंदिर में स्थानीय लोगों की मौजूदगी में शादी कर ली।

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Two Bronze Age neck rings found in Sweden

Photo courtesy Arkeologerna.Two 2,500-year-old Bronze Age neck rings have been found in Marby outside Norrköping in southeastern Sweden. They were discovered crammed between two stones on the edge of a burial, an unusual context that suggests they were placed as offerings.

The two rings are different in design: the larger one is thinner, the smaller thicker with much more deeply profiled twists. Made of cast bronze and twisted into spirals, this type of necklace is known as a Wendel ring. They were produced in the late Bronze Age and are typically found in bogs and marshes deposited as part of a group of artifacts. Finding two Wendel rings sandwiched between stones is unprecedented.

They were on the outskirts of a central block grave, a circle of small stones with a large block in the center. Cremated human bones were found in an urn and in several small pits dug into the ground. There were also bone fragments scattered around the stone setting.

Previously known to contain Bronze Age burials, settlement remains and stone shard mounds, the Marby site is being excavated this spring in connection with new construction planned for the area. Archaeologists hope to discover new information about the settlement pattern, what livestock was raised there, who was buried there, what rituals were performed and other aspects of Bronze Age community life.

The focus of the investigation are the two shard mounds, man-made piles of broken stones dating back to the Early Bronze Age. They are often found in settlements, and archaeologists first believed they were midden piles, piles of waste accumulated from cooking and general life. Excavations have found human bones and bronze objects in the stone shard mounds, however, and the Marby site has an unusual combination of a block grave with a circular stone edge that was actually built on top of shard mound.



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An unhealthy focus on sex - Married at First Sight UK insiders on show's 'toxic' culture

Fresh revelations come after two women told the BBC they had been raped on the Channel 4 reality show.

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कॉमेडियन सुनील ग्रोवर ने पत्नी के साथ ताजमहल देखा, VIDEO:पत्नी के साथ डायना बेंच पर तस्वीर खिंचवाईं, हाथ पकड़कर घूमे

कॉमेडियन सुनील ग्रोवर अपनी पत्नी के साथ आगरा पहुंचे। रविवार सुबह सनराइज के समय ताजमहल का दीदार किया। उन्होंने ताजमहल की खूबसूरती को करीब से निहारा। उन्होंने पत्नी के साथ डायना बेंच पर बैठकर तस्वीर खिंचवाई। ताजमहल कैंपस में आने के बाद सुनील ग्रोवर शुरुआत में मास्क लगाए हुए थे, लेकिन जैसे ही पर्यटकों ने उन्हें पहचाना, उनके साथ फोटो और सेल्फी लेने वालों की भीड़ लग गई। सुनील ग्रोवर ने भी अपने चाहने वालों का अभिवादन किया और मुस्कुराते हुए उनके साथ फोटो खिंचवाईं। इस दौरान वह पत्नी का हाथ थामे ताजमहल परिसर में घूमते नजर आए। वह करीब 1 घंटे तक रहे। इस दौरान गाइड अंसार अली से ताजमहल की नक्काशी, वास्तुकला के बारे में पूछा।

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तान्या मित्तल को अमीर पति नहीं चाहिए:बोलीं- मेरा पार्टनर रोज मुझसे 10-15 लाख रुपए मांगे और मैं दे सकूं

इन्फ्लुएंसर और पूर्व बिग बॉस कंटेस्टेंट तान्या मित्तल ने कहा कि वह अमीर पार्टनर नहीं चाहतीं। वह खुद इतनी आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहती हैं कि अपने पार्टनर की हर बड़ी पैसों से जुड़ी जरूरत को आसानी से पूरा कर सकें। पिंकविला को दिए इंटरव्यू में तान्या मित्तल ने कहा, 'मैं जिससे प्यार करती हूं या जिसके साथ हूं, उसके लिए अपना सब कुछ देने को हमेशा तैयार रहती हूं। मैं ऐसा पहले भी कर चुकी हूं और आगे भी करूंगी। मैं नहीं चाहती कि मुझे कोई अमीर पति मिले। अगर मेरे पति के पास कुछ भी न हो, तब भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।' इन्फ्लुएंसर ने आगे कहा, 'मैं चाहती हूं कि वह रोज सुबह उठकर मुझसे 10-15 लाख रुपए मांगे और मेरी इतनी क्षमता हो कि मैं उसे हर दिन 10-15 लाख रुपए दे सकूं। मतलब, मैं ऐसी गर्लफ्रेंड/पत्नी बनना चाहती हूं।' तान्या जल्द रियलिटी शो में दिखेंगी तान्या मित्तल जल्द कॉमेडी और कुकिंग रियलिटी शो 'मां है ना' में नजर आएंगी। इसमें तान्या मां सुनीता मित्तल के साथ जोड़ी में दिखेंगी। हाल ही में 'मां है ना' के प्रमोशनल इवेंट्स के दौरान तान्या और स्प्लिट्सविला X6 विनर गुल्लू उर्फ कुशल तंवर के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक देखने को मिली थी। जब गुल्लू के बारे में पूछा गया, तो तान्या ने कहा कि दूसरों को हराने के लिए उनका खाना खराब करना गलत है। जब आप खुद पर कॉन्फिडेंट नहीं होते, तब आप दूसरों के साथ ऐसा करते हैं। तान्या ने यह भी कहा था कि वह उन लोगों को पसंद नहीं करतीं जो लाइन क्रॉस करते हैं। दोनों की बातचीत का वीडियो वायरल हो गया। तान्या ने 'मेल ईगो' तोड़ने की बात कही इसके बाद बिना किसी का नाम लिए तान्या ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, 'एक बार फिर पुरुषों के अहंकार को चुनौती देकर खुशी हुई। जलन हो रही है? मैं समझ सकती हूं। कुछ पुरुष मजबूत और आत्मनिर्भर महिलाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ सिर्फ उनके बारे में बातें ही कर पाते हैं।' उन्होंने आगे लिखा, ‘जब कुछ लोग एक ऐसी महिला से असहज महसूस कर रहे हैं जो खुद को किसी के लिए छोटा नहीं करती, तब मैं अपनी मेहनत से आगे बढ़ रही हूं, सफलता हासिल कर रही हूं और लोगों का प्यार व आशीर्वाद बटोर रही हूं। जलते रहिए, देखते रहिए और बातें करते रहिए। मैं अपनी पहचान और काम से हमेशा याद रखी जाऊंगी।’

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आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं

1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी। सवाल: फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ किस बारे में है? जवाब: यह सिर्फ एक आरबीआई गवर्नर नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी की कहानी है। आर्थिक संकट के समय हर नजर आप पर हो तो कितना दबाव होता है, फिल्म यही दिखाती है। ऐसे समय परिवार और निजी जिंदगी पीछे छूट जाती है। फिल्म उसी संघर्ष और दबाव को दिखाती है। सवाल: फिल्म में इकोनॉमिक्स और आरबीआई जैसे कठिन विषय हैं। आम दर्शक इसे कैसे समझ पाएंगे? जवाब: फिल्म में जीडीपी, फिस्कल डेफिसिट और इन्फ्लेशन जैसे शब्द हैं, लेकिन उन्हें आसान तरीके से दिखाया गया है। यह क्लासरूम वाली फिल्म नहीं, बल्कि ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ है। यहां कम समय में देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने की चुनौती ही रोमांच पैदा करती है। सवाल: इस किरदार की तैयारी कैसे की? जवाब: मैंने स्क्रिप्ट कई बार पढ़ी और जो बातें समझ नहीं आईं, उन्हें डायरेक्टर व राइटर्स से समझा। डायरेक्टर पढ़ने का मटेरियल और वीडियो भेजते थे। किरदार का लुक और बोलने का तरीका तय किया गया। करीब ढाई महीने तैयारी चली। टेक्निकल शब्दों को समझकर उन्हें आसान तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे मुश्किल था। सवाल: एक तरफ आप राम गोपाल वर्मा की फिल्म कर रहे थे, जहां माहौल बिल्कुल अलग था, जबकि ‘गवर्नर’ के सेट पर लोग आपको बहुत शांत और गंभीर इंसान के तौर पर देखने लगे थे। ऐसा क्या था इस किरदार में? जवाब: यह किरदार कम बोलने वाला इंसान है, जो ज्यादातर अपने विचारों में व्यस्त रहता है। नंबर, गणित और बड़ी जिम्मेदारियों से जुड़े लोग अक्सर शांत होते हैं और लगातार चुनौतियों पर सोचते रहते हैं। आरबीआई गवर्नर भी हर समय संकट सुलझाने में लगा रहता है, इसलिए यह गंभीर नहीं बल्कि भीतर से लगातार सोचने वाले व्यक्ति का किरदार है। सवाल: क्या फिल्म में गंभीरता के साथ ह्यूमर भी देखने को मिलेगा? जवाब: बिल्कुल। फिल्म में फैमिली बॉन्डिंग है। मधु मेरी पत्नी का रोल कर रही हैं। उनकी फिल्म ‘रोजा’ देखकर पागल हो गए थे। उनके साथ के सीन हल्के और प्यारे हैं। ऑफिस के कुछ हिस्सों में भी ह्यूमर है। थ्रिलर होने के कारण दर्शक कहानी से जुड़े रहेंगे। सवाल: आप इतिहास के छात्र भी रहे हैं। 1991 के आर्थिक संकट और आज के हालात में क्या समानता देखते हैं? जवाब: 1991 में गल्फ वॉर के दौरान तेल के दाम बढ़ रहे थे और भारत आर्थिक संकट से जूझ रहा था। आज भी यूएस-ईरान जैसे तनावों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होता है, डॉलर मजबूत होता है और भारत जैसे देशों पर दबाव बढ़ता है। इतिहास पूरी तरह नहीं दोहराता, लेकिन उसकी झलक जरूर दिखती है। सवाल: ऐसे संकट के समय आम आदमी क्या कर सकता है? जवाब: बड़े आर्थिक फैसले एक्सपर्ट्स और सरकारों का काम हैं। आम आदमी अपने खर्च नियंत्रित कर सकता है। मुश्किल समय में लोग फिजूल खर्च, घर खरीदने, घूमने और बड़े खर्चों से बचते हैं। लोग संभलकर चलते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आगे का समय कठिन हो सकता है। सवाल: क्या आम आदमी सिस्टम बदल सकता है? जवाब: सिस्टम तभी तक मजबूत रहता है, जब तक आम आदमी सवाल नहीं पूछता। समस्याएं नहीं सुनी जाएं तो लोग आवाज उठाते हैं। इतिहास में कई बार आम आदमी ने बदलाव लाया है। इमरजेंसी और 1991 के संकट जैसे दौरों में भी लोगों की ताकत सामने आई है। सवाल: फिल्म की रिलीज के साथ दूसरी बड़ी फिल्में भी आ रही हैं। क्या ऐसी फिल्मों को सोलो रिलीज मिलनी चाहिए? जवाब: भारत में सबसे बड़ी समस्या थिएटर की कमी है। सरकार और इंडस्ट्री ज्यादा सिनेमाघर बनवाएं तो छोटी-बड़ी सभी फिल्मों को बराबर मौका मिलेगा। हर फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने का अधिकार है। सवाल: क्या कुछ बड़े प्रोडक्शन हाउस की मोनोपोली भी खत्म होनी चाहिए? जवाब: हां। यह तय होना चाहिए कि किस बजट की फिल्म को कितने शो मिलें। छोटी फिल्मों को बड़ी फिल्मों के ज्यादा स्क्रीन लेने से नुकसान नहीं होना चाहिए। हर फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने का बराबर मौका मिलना चाहिए। सवाल: ओटीटी ने इस तरह की फिल्मों को कितना फायदा पहुंचाया? जवाब: ओटीटी ने बहुत फायदा पहुंचाया और मुझे भी अच्छा काम करने का मौका मिला। लेकिन अब प्लेटफॉर्म ज्यादा कमर्शियल और असुरक्षित हो गए हैं। पहले अलग तरह की कहानियों को ज्यादा मौका मिलता था, जो अब कम हो गया है। सवाल: दर्शक इस फिल्म से क्या लेकर जाएंगे? जवाब: इस फिल्म का सबसे बड़ा संदेश “जिद” है, लेकिन समझदारी वाली जिद। यह किरदार हर मुश्किल में रास्ता निकालने की कोशिश करता है और आखिर तक हार नहीं मानता। सवाल: क्या आपको लगता है कि आपकी जिंदगी और इस किरदार में कुछ समानता है? जवाब: हां, मेरी जिंदगी में भी जिद रही है। कभी समझदारी वाली, तो कभी थोड़ी बेवकूफी वाली जिद। लेकिन उसी जिद ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।

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One Weather Forecast Changed the Course of WWII. Here's the Real Story Behind 'Pressure,' a Drama About the Meteorologist Who Convinced the Allies to Delay D-Day

One Weather Forecast Changed the Course of WWII. Here's the Real Story Behind 'Pressure,' a Drama About the Meteorologist Who Convinced the Allies to Delay D-Day
A new movie starring Andrew Scott and Brendan Fraser dramatizes the tense 72 hours before the Allied invasion of Normandy, revealing how meteorology helped determine Operation Overlord's success

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