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French culture ministry blocks sale of Baldung portrait

The rare silverpoint portrait of Susanna Pfeffinger by the German Renaissance artist Hans Baldung Grien was blocked from sale just 48 hours before it was set to go under the hammer. France’s Ministry of Culture declared it a national treasure on March 21st, blocking it from leaving France for 30 months and therefore from being sold at auction on March 23rd.

In a statement after the ministry’s decision, auction house Beaussant Lefèvre & Associés said they suspended the sale “despite strong interest from several international institutions and collectors,” which suggests they expected it to sell abroad. The were not pleased to have to cancel the sale on such short notice, and to be fair, they had filed for an export license on November 25, 2025. The ministry’s National Treasures Advisory Commission waited almost four months, meeting on March 18, 2026, to deliberate.

The Commission determined that the portrait was of “major interest to the national heritage from the point of view of history and art.” The ruling points to the importance of the artist and the small number of drawings by him — 252, only 15 of them portraits and only 12 of those done in the silverpoint technique (drawn with a silver-tipped stylus on paper coated in bone powder). The portrait “testifies to Baldung’s virtuosity in his use of the silverpoint technique, learned from [Albrecht] Dürer, recommended by Leonardo da Vinci in his Treatise on Painting and practiced by all the great artists of the period, such as Holbein the Elder and Hans Cranach, which allows very few corrections, requiring great sureness of line.” The opinion also cites the importance of the subject Susanna Pfeffinger as a member of the high society of Strasbourg, and the incredible uninterrupted ownership history of the portrait that has stayed in the family for generations since it was first made in 1517.

It appears important to retain on the territory this silverpoint portrait, emblematic of Baldung’s art, probably the only one still in private hands in France and without equivalent in French public collections, which has remained unknown to specialists and is strongly rooted in the history of Strasbourg, both by the person represented and by its continuous location in this city since its creation.

The pre-sale estimate was 1.5 – 3 million euros (ca. $1.74 – 3.5 million), but the portrait was likely to sell for much more than that, as the last Baldung portrait to come up for auction way back in 2007 sold for $3.7 million, and this is the only silverpoint portrait still in private hands. With export barred for the next two and a half years, Beaussant Lefèvre & Associés has gone back to drawing board, so the speak. They are now working to arrange a private sale to a French buyer who will keep the work in France.



* This article was originally published here

बंगाली एक्टर राहुल बनर्जी की समुद्र में डूबने से मौत:शूटिंग के दौरान हुआ हादसा, पुलिस का दावा- बिना इजाजत हुई शूटिंग; ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

बंगाली सिनेमा के एक्टर राहुल अरुणोदय बनर्जी की कल हादसे में मौत हो गई। वह ओडिशा के तलसरी समुद्र तट पर टीवी शो ‘भोले बाबा पार करेगा’ की शूटिंग कर रहे थे, तभी डूब गए। इस हादसे में उनकी को-एक्ट्रेस श्वेता मिश्रा की जान बच गई। जांच में सामने आया कि प्रोडक्शन टीम ने न तो इजाजत ली थी और न ही प्रशासन को जानकारी दी थी। एक्टर की मौत पर बालासोर (ओडिशा) के एसपी ने बताया, ‘कल तलसरी पुलिस को दीघा पुलिस से सूचना मिली कि एक बंगाली अभिनेता की मौत हो गई और शव दीघा अस्पताल में है। जांच में पता चला कि शाम करीब 5:30 बजे राहुल बनर्जी और श्वेता मिश्रा शूटिंग के दौरान घुटने तक पानी में डांस कर रहे थे, तभी गड्ढे में गिर गए। टीम उन्हें तुरंत अस्पताल ले गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।’ एसपी ने आगे कहा, ‘टीम ने शूटिंग के लिए न जानकारी दी थी और न अनुमति ली थी। आगे की कार्रवाई के लिए तलसरी और दीघा पुलिस मिलकर काम कर रही है।’ को-स्टार का दावा- पैकअप के बाद हुआ हादसा पुलिस के अनुसार शूटिंग के दौरान एक्टर की मौत हुई, लेकिन को-स्टार दिंगता बागची ने पीटीआई से कहा कि पैकअप के बाद वह अकेले समुद्र में गए थे, जहां उनका पैर फंस गया। लहरों में फंसने के बाद सेट पर अफरा-तफरी मच गई। टीम उन्हें निकालकर दीघा अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पत्नी ने की प्राइवेसी की मांग एक्टर राहुल बनर्जी की पत्नी प्रियंका सरकार ने इस मुश्किल समय में प्राइवेसी की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, यह हमारे लिए बहुत दुख का समय है। इस मुश्किल घड़ी में हम आपसे थोड़ा समय और प्राइवेसी देने की अपील करते हैं। हमारे परिवार में एक बच्चा, एक मां और बाकी सभी लोग मिलकर इस दुख को सहने की कोशिश कर रहे हैं। हम मीडिया से निवेदन करते हैं कि हमारी भावनाओं और सीमाओं का सम्मान करें, ज्यादा दखल न दें और हमें शांति से दुख मनाने दें। इस समय आपका साथ और समझ हमारे लिए बहुत मायने रखती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने श्रद्धांजलि दी एक्टर राहुल बनर्जी के निधन की खबर के बाद रविवार रात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘युवा और लोकप्रिय अभिनेता राहुल अब हमारे बीच नहीं रहे। यह खबर सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ है और मैं हैरान हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि ऐसा कैसे हुआ। वह मेरे पसंदीदा कलाकारों में से एक थे और बहुत अच्छे इंसान थे। मैं उनके परिवार, करीबियों और चाहने वालों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं। राहुल का अचानक जाना बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा नुकसान है।’ राहुल अरुणोदय बनर्जी को 2008 की फिल्म ‘चिरोदिनी तुमी जे अमार’ से पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘तुमी असबे बोले’ (2014), ‘जुल्फीकार’ (2016), ‘ब्योमकेश गोत्रो’ (2018), ‘बिदय ब्योमकेश’ (2018) और ‘द एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स’ (2025) में काम किया। उन्होंने टीवी सीरियल्स ‘होरोगौरी पिसे होटल’ और ‘मोहोना’ में भी काम किया।

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तीसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग बॉलीवुड फिल्म बनी धुरंधर 2:महज 11 दिनों में वर्ल्डवाइड कमाए 1350 करोड़, आमिर की दंगल को भी कर सकती है पीछे

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधरः द रिवेंज बॉलीवुड की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म का इंडियन कलेक्शन 846.87 करोड़ हो चुका है, जबकि फिल्म ने वर्ल्डवाइड 1350 करोड़ रुपए का कलेक्शन कर लिया है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिक्ल के अनुसार, 29 मार्च यानी रिलीज के दूसरे रविवार को फिल्म ने 68.10 करोड़ रुपए कमाए, जबकि 28 मार्च (शनिवार) को 62.85 करोड़ कमाए थे। ऐसे में 11 दिनों में फिल्म ने भारत में 846.87 करोड़ और वर्ल्डवाइड 1350 करोड़ कमा लिए। इस कलेक्शन के साथ धुरंधर 2 तीसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बन गई है। यह फिल्म पिछले पार्ट धुरंधर के 1428 करोड़ के ऑल टाइम कलेक्शन को पार करने के करीब है, जो बॉलीवुड की दूसरी हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म है। फिलहाल आमिर खान की दंगल पहले नंबर पर है। सभी भाषाओं में 5वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बॉलीवुड की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म धुरंधरः द रिवेंज, सभी भाषाओं में भारत की 5वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है। यह आरआरआर और केजीएफ चैप्टर 2 का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है, लेकिन अब भी पुष्पा-2 और बाहुबली 2 से पीछे है। दंगल भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है, लेकिन भारत में इसका कलेक्शन सिर्फ 511 करोड़ था और ज्यादातर कमाई ओवरसीज से हुई। भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में बाहुबली 2 पहले स्थान पर है, जिसने 1429 करोड़ कमाए। दूसरे नंबर पर अल्लू अर्जुन की पुष्पा 2 और तीसरे पर धुरंधर है। भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्में- इन बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के साथ धुरंधर और धुरंधर 2 के डायरेक्टर आदित्य धर बॉलीवुड के इकलौते निर्देशक बन गए हैं, जिन्होंने 1000 करोड़ से ज्यादा कमाई वाली दो फिल्में दी हैं। उनसे पहले एसएस राजामौली भी बाहुबली और बाहुबली 2 जैसी दो 1000 करोड़ कमाने वाली फिल्में बना चुके हैं।

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40 की उम्र में सोनम कपूर दूसरी बार मां बनीं:बेटे को जन्म दिया, खुशखबरी शेयर कर कहा- हमारा परिवार बड़ा हो गया है

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर दूसरी बार मां बनी हैं। उन्होंने 29 मार्च को मुंबई में बेटे को जन्म दिया। इससे पहले उनका एक बेटा वायु है। सोनम और उनके पति आनंद आहूजा ने सोशल मीडिया पर यह खुशखबरी शेयर की। कपल ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, बहुत खुशी और प्यार के साथ हम यह बताना चाहते हैं कि आज, 29 मार्च 2026 को हमारे घर एक बेटे का जन्म हुआ है। अब हमारा परिवार बड़ा हो गया है और उसके आने से हमारे दिल खुशी से भर गए हैं। वायु अपने छोटे भाई के आने से बहुत खुश है। इस नन्हे मेहमान ने हमारे घर में ढेर सारी खुशियां ला दी हैं। हम अब चार लोगों का परिवार बनकर इस नई शुरुआत के लिए बहुत आभारी हैं। प्यार के साथ- सोनम, आनंद और वायु। खुशखबरी के बाद करीना कपूर, आलिया भट्ट, दीया मिर्जा, हुमा कुरैशी समेत कई सेलेब्स कपल को शुभकामनाएं दे रहे हैं। नवंबर में दूसरी प्रेग्नेंसी अनाउंस की थी सोनम कपूर ने नवंबर 2025 में दूसरी बार मां बनने की खुशखबरी फैंस को दी थी। उन्होंने पिंक ग्लैमरस आउटफिट में मदरहुड कैप्शन के साथ इसकी घोषणा की। इसके बाद उनके प्रेग्नेंसी लुक चर्चा में रहे। फरवरी में गोद भराई की रस्म हुई थी सोनम कपूर की गोद भराई की रस्म फरवरी में हुई थी, जिसमें कपूर और आहूजा परिवार समेत फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग शामिल हुए। एक्ट्रेस ने तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर लिखा था, ‘सीमंतोन्नयन, सनातन धर्म के सोलह संस्कारों में तीसरा संस्कार है। इसे आमतौर पर “बालों की मांग भरने की रस्म” कहा जाता है, जो मां और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का सम्मान करती है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे गोद भराई, श्रीमंत, दोहाले जेवन, शाद, सीमन्थम, वलैकप्पु, सीमंथा, पुलिक्कुड़ी और साधभक्षण। नाम भले बदल जाएं, लेकिन इसका भाव एक ही होता है, नए जीवन के लिए प्यार, सुरक्षा और खुशियों का आशीर्वाद।’ शादी के 7 साल बाद दूसरी बार मां बनीं सोनम कपूर ने 2018 में दिल्ली के बिजनेसमैन आनंद आहूजा से शादी की थी। शादी के 4 साल बाद 2022 में उन्होंने बेटे वायु को जन्म दिया और 2026 में दूसरी बार मां बनीं।

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Exceptional Roman cargo shipwreck found in Lake Neuchâtel

The remains of a Roman vessel laden with cargo have been discovered on the bed of Lake Neuchâtel in Switzerland. The wreck sank between 20 and 50 A.D., and while the remains of the vessel itself are long gone, the site contains an exceptional diversity and quantity of artifacts — approximately 600 of them — many found intact. This is an unprecedented find in Switzerland, nor has any comparable example been found in any other inland waters north of the Alps.

The Neuchâtel Cantonal Archaeology Office (OARC) first spotted the wreck in an drone photography survey of the lake in November 2024. The survey was part of a project to monitor the lakebed’s vulnerable wrecks that has been ongoing since 2018. Maritime archaeologists followed-up a few days with an exploratory dive, and confirmed they’d found a large cargo of ceramics. They recovered a few artifacts for analysis, including a piece of wood that was radiocarbon tested returning a date range of between 50 B.C. and 50 A.D.

They returned in March 2025 to excavated the site, establishing a perimeter of the work area about 60 meters by 24 meters (196 x 79 feet). The center of was the area high concentration of ceramics, but the whole work area was divided into a grid for detailed documentation of every object and excavation. Several significant artifacts were discovered outside of the perimeter, including wooden and metal chariot wheels that are the only ones ever found in Switzerland. The team recovered about 150 objects from this first dig and they were taken to a restoration laboratory for conservation and stabilization.

Conservators developed a protocol to stabilize the recovered objects, keeping them in dimineralized water baths at the same temperature as the lake they came from, and then drying them gradually. The site was kept secret and monitored with waterproof cameras to protect the cargo from interference.

Excavations resumed after a year earlier this month. The goal was to precisely document every single artifact before recovering them. Most of the cargo consists of hundreds of ceramic tableware and amphorae, who sets of plates and bowls nested and stacked, likely the position they were in when packed in crates on the merchant ship. The largest number were terra sigillata (redware) platters, plates, goblets and bowls produced in the Swiss Central Plateau region. There were also amphorae of olive oil from Spain were also on board.

Other artifacts found in the wreck were tools from the ship’s crew, including metal kitchen gear like a bronze cauldron and a crucible, and an exceptionally preserved large wicker basket that held six ceramic pieces different from the rest of the cargo. This was likely the sailors’ cooking set.

Several horse bits and harness parts were found as well as four wood and metal cart wheels, plus metal artifacts from legionary gear like a highly decorated phalera, a fibula, a belt buckle and a dolabra (pickaxe). Two complete swords, one still inside its intact wooden scabbard, and one partial sword were found at the wreck site as well.

The swords and in particular the fibula help narrow down the date of the wreck. This style of fastening brooch only begins to appear on the archaeological record during the reign of Tiberius (14-37 A.D.). This range was also confirmed by dendrochronological analysis of a wooden board found under the stacked plates. The tree the board was made from was felled in 17 A.D.

These discoveries are evidence that the ship was at least escorted by legionaries, and given the dates, it was likely Legio XIII Gemina which was stationed at the Vindonissa camp (modern-day Windisch) in 16 A.D. It was tasked with preventing Germanic advances into the Swiss Plateau and the Alpine passes into Italy.

With such a large cargo, it’s possible the vessel was bringing supplies from Italy, Gaul and elsewhere in Helvetia to the legions garrisoning the Rhine and Danube. The wagons and horse gear on board are evidence that the Romans were prepared with a dual transport system, traveling lake routes with ships then moving seamlessly to land routes when necessary.

Enjoy this excellent video of the divers exploring the artifacts. The film quality is unusually high, so you get a really good look at the objects on the lakebed and as they are documented and recovered.



* This article was originally published here

भूत बंगला में कॉमेडी-हॉरर का नया अनुभव देंगे अक्षय:प्रियदर्शन बोले- कहानी कई बार लिखी गई; वामिका ने कहा- फिल्म ने शांत रहना और काम एंजॉय करना सिखाया

फिल्म ‘भूत बंगला’ को लेकर स्टारकास्ट और डायरेक्टर ने खुलकर बातचीत की, जिसमें इसके आइडिया, शूटिंग अनुभव और कॉमेडी-हॉरर के संतुलन पर चर्चा हुई। डायरेक्टर प्रियदर्शन ने बताया कि कहानी को कई बार री-राइट कर इसे एक परफेक्ट एंटरटेनर बनाया गया, जबकि अक्षय कुमार ने फिल्म में लॉजिक और रियल अप्रोच पर जोर दिया। वामिका गब्बी ने कहा कि इस फिल्म ने उन्हें शांत रहकर काम को एंजॉय करना सिखाया। शूटिंग के दौरान के दिलचस्प किस्से और प्रैंक्स भी सामने आए। साथ ही, आज के दौर में कॉमेडी, ओटीटी, जेन जी ऑडियंस और एआई के बढ़ते प्रभाव पर भी अपनी राय रखी। फिल्म को अलग ट्रीटमेंट और फ्रेश एक्सपीरियंस देने का दावा किया गया है। पेश है फिल्म की स्टारकास्ट और डायरेक्टर से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.. ‘भूत बंगला’ का आइडिया कैसे आया और ऐसा क्या है इसमें जो यह दर्शकों को एक नयापन देगी? प्रियदर्शन– भूत बंगला का आइडिया मुझे प्रोड्यूसर की तरफ से मिला था। उन्होंने एक स्टोरीलाइन भेजी थी, जो मुझे काफी दिलचस्प लगी। जब मैंने उसे सुना, तो लगा कि इसमें एक बहुत अच्छा प्लॉट है और इसे आगे डेवलप किया जा सकता है। इसके बाद हमने कहानी पर बार-बार काम किया, उसे री-राइट किया, क्योंकि हमारा मकसद था कि यह फिल्म एक पूरी तरह से एंटरटेनर बने। जिसमें भरपूर कॉमेडी भी हो और हॉरर भी। ये बैलेंस बनाना आसान नहीं होता, लेकिन हमने इसे हासिल करने की कोशिश की। अक्षय–एकता ने यह आइडिया मुझे सुनाया, फिर हमने इसे प्रियंक सर को सुनाया और आगे मिलकर इसे डेवलप किया। इसके बाद कहानी को एक अलग तरीके से ट्रीट किया गया। इसमें कॉमेडी, हॉरर और सबसे जरूरी, लॉजिक जोड़ा गया। हमने खास तौर पर ध्यान रखा कि फिल्म में लॉजिक मजबूत रहे। इसी प्रक्रिया के बाद यह फिल्म तैयार हुई। शूटिंग के दौरान क्या कभी डर लगा, कोई वाकया सेट का? अक्षय–सेट पर हमें कभी डर नहीं लगा, क्योंकि वहां असल में कोई भूत-वूत नहीं था। लेकिन एक दिलचस्प इंसिडेंट जरूर याद आता है, जो मैं आपसे शेयर करना चाहूंगा। मड आइलैंड में एक बहुत बड़ा बंगला है, जहां मैंने कई बार शूटिंग की है। हालांकि, लोग वहां रात में शूटिंग करने से बचते हैं। मैं बंगले का नाम नहीं लेना चाहूंगा, लेकिन उसके बारे में यह मशहूर था कि वहां रात को ‘भूत’ दिखाई देता है। कई लोगों ने उसे देखने का दावा भी किया था—यहां तक कि वहां के केयरटेकर ने भी कहा था कि उसने कई बार उसे देखा है। इसी वजह से वहां शूटिंग जल्दी खत्म कर दी जाती थी। आमतौर पर रात 1 बजे तक पैकअप हो जाता था और उसके बाद कोई भी बाहर नहीं निकलता था। उस बंगले के बारे में इतना डर फैल गया था कि उसका मालिक भी उसे बेच नहीं पा रहा था। सालों तक वह बंगला बिक ही नहीं पाया लेकिन कुछ साल पहले सच्चाई सामने आई, जो काफी हैरान करने वाली थी। दरअसल, वही केयरटेकर खुद ‘भूत’ बनकर लोगों को डराता था। वह नहीं चाहता था कि बंगला बिके, क्योंकि वह खुद वहीं रहना चाहता था। इसलिए वह रात में साड़ी पहनकर इधर-उधर घूमता था और लोगों को डराता था, जिससे इलाके में यह बात फैल गई कि वहां सच में भूत है। इस तरह उसने करीब 26–27 साल तक लोगों को भ्रम में रखा और बंगले को बिकने नहीं दिया। सच में, यह उसकी एक बहुत ही चालाकी भरी योजना थी।” वामिका–मेरे लिए यही हैं (अक्षय) सबसे बड़े प्रैंकस्टर। सेट पर एक दिन मेरे डैड आए थे। मुझे हार्नेस में शॉट देना था और जैसे ही एक्शन हुआ अक्षय ने मुझे अचानक छोड़ दिया। मैं हवा में लटक गई। मुझे नहीं पता था यह होने वाला है तो मैं तो बहुत डर गई थी। बाद में पता चला कि इस प्रैंक में खुद डैड शामिल थे और वीडियो बना रहे थे। ऐसी फिल्मों में हॉरर और कॉमेडी दोनों की टाइमिंग मेंटेन करना बड़ा चैलेंज होता है? प्रियदर्शन– नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हम पहले से तय करते हैं कि फिल्म में कितनी कॉमेडी होगी और कितना हॉरर। अगर आपने भूल-भुलैया देखी है, तो वह भी हॉरर और कॉमेडी का ही एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। असल में इसमें कोई फिक्स टाइमिंग नहीं होती कि इतने मिनट हॉरर होगा और इतने मिनट कॉमेडी। यह सब कहानी के साथ नैचुरली चलता है। जब आप थिएटर में बैठकर फिल्म देखते हैं, तो कभी आपको हंसी आती है, तो कभी अचानक आप टेंशन या डर महसूस करने लगते हैं। यही इस तरह की फिल्मों की खासियत होती है कि दोनों चीजें साथ-साथ चलती हैं और ऑडियंस को एक अलग ही एक्सपीरियंस देती हैं।’ दो दशक पहले की और अब की कॉमेडी में क्या अंतर आया है? अक्षय–कॉमेडी की बात करें तो यह कई तरह की होती है। जैसे फिजिकल कॉमेडी, सिचुएशनल कॉमेडी और कई बार सिर्फ एक्सप्रेशन्स के जरिए होने वाली फेशियल कॉमेडी–जहां बिना कुछ बोले ही दर्शक हंस पड़ते हैं। यानी कॉमेडी के कई अलग-अलग रूप होते हैं। मुझे नहीं लगता कि कॉमेडी के बेसिक फॉर्म में अब तक कोई बहुत बड़ा बदलाव आया है, लेकिन हां, समय के साथ ह्यूमर का स्टाइल जरूर थोड़ा बदला है। अगर आप हेरा फेरी की बात करें, तो वह एक बहुत खास फिल्म थी। उस समय तक कॉमेडी फिल्में ओवरसीज में ज्यादा नहीं चलती थीं। आमतौर पर वहां सिर्फ रोमांटिक फिल्में ही अच्छा बिजनेस करती थीं। लेकिन हेरा फेरी पहली ऐसी कॉमेडी फिल्म बनी, जिसने ओवरसीज में भी शानदार प्रदर्शन किया और यह साबित किया कि अच्छी कॉमेडी हर जगह दर्शकों को पसंद आ सकती है। प्रियदर्शन की फिल्में सिचुएशनल कॉमेडी होती हैं। प्रियदर्शन–हेराफेरी के बाद हम कॉमेडी फिल्मों में जोक्स नहीं लाते हैं बल्कि हमारी कॉमेडी सिचुएशनल होती है। ‘हेरा फेरी’ के बाद आपके करियर में काम करने के तरीकों में क्या बदलाव आया? अक्षय–जब मैंने पहली बार उनके साथ काम किया, तो मेरे लिए वह एक बहुत सीखने वाला अनुभव था। अपने करियर में मैंने उनसे काफी कुछ सीखा है, खासकर कॉमेडी के अलग-अलग पहलुओं को समझने में। कॉमेडी के भी कई प्रकार होते हैं और उन्हें किस तरह पेश करना है, उसकी बारीकियां मैंने उन्हीं से सीखी हैं। इसके अलावा, फिल्म बनाते समय एक और बहुत महत्वपूर्ण बात मैंने समझी कि एक डायरेक्टर को एडिटिंग की अच्छी समझ होना बेहद जरूरी है। उनके साथ काम करते हुए मुझे कई नई चीजें सीखने का मौका मिला, जो मेरे करियर में काफी काम आई हैं। ‘भूत बंगला’ से रिलेटेड कोई ऐसा किस्सा बताइए जो अलग हो? प्रियदर्शन–असल में फिल्म बनाते वक्त हम उसे कॉमेडी के तौर पर एंजॉय नहीं कर रहे होते, जैसा कि लोग सोचते हैं। क्योंकि हमारे किरदार काफी सीरियस होते हैं, लेकिन परिस्थितियां हास्य पैदा करती हैं। शूटिंग के दौरान हम ज्यादा हंसते नहीं हैं, क्योंकि हम पूरी तरह अपने किरदार और सिचुएशन पर फोकस करते हैं। हमें पहले से पता होता है कि जब यही सीन थिएटर में जाएगा, तो दर्शक उस सिचुएशन की वजह से ज्यादा हंसेंगे। यानी हमारी फिल्म की कॉमेडी सिर्फ परफॉर्मेंस पर नहीं, बल्कि सिचुएशन पर ज्यादा निर्भर करती है और यही उसकी खासियत है। आप लोग शूटिंग के दौरान पूरी तरह स्क्रिप्ट पर ही चलते हैं या इम्प्रोवाइज करते हैं? अक्षय–सेट पर काफी कुछ चेंज होता है। इंप्रोवाइजेशन बहुत होता है। मैं कुछ बोलता हूं, फिर इन्हें प्रियदर्शन को बताता हूं। ऐसा करके देखिए। अगर ठीक लगता है तो हम तुरंत उसे करते हैं। कोई भी सीन जो लिखा गया है, वो बदलता जरूर है। इम्प्रोवाइजेशन सेट के माहौल के हिसाब से होता है। यह राइटर बैठकर नहीं कर सकता है। वो खड़े–खड़े सेट पर ही होगा। आप एक साथ कई फिल्में कर चुके हैं। कभी कोई ऐसा सीन जहां आप एक दूसरे से सहमत ना हों? अक्षय–नहीं ऐसा नहीं है। हमने 8 फिल्में साथ की हैं। लेकिन हम हर शॉट और हर डायलॉग पर एक-दूसरे से सहमत होते हैं। इसीलिए लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं। कभी एक-दूसरे को क्वेश्चन नहीं किया। शॉर्ट्स और रील के दौर में आप जेन जी दर्शकों को कैसे ध्यान में रखते हैं? अक्षय– दर्शकों को हर तरह का कंटेंट पसंद होता है। वो शॉर्ट्स भी देखता है और चार घंटे की धुरंधर भी दर्शक पसंद कर रहे हैं। वामिका–मैं खुद भी इंस्टाग्राम पर रील देखती हूं। लेकिन मैं फिल्में भी देखती हूं। लोग फोन देखते हैं लेकिन फिल्में देखने का अनुभव बिल्कुल अलग है। वो रील्स नहीं है। उसमें कैरेक्टर हैं, स्टोरी है। इसलिए यंग लोग भी नेटफ्लिक्स, अमेजन पर और थिएटर पर फिल्में और वेबसीरीज देख रहे हैं। अक्षय– मैं तो जब घर पर ओटीटी पर कॉमेडी फिल्में देख रहा होता हूं तो उतनी हंसी नहीं आती है। क्योंकि आसपास कम लोग होते हैं। लेकिन जब लोग थिएटर में जाते हैं तो 150–200 लोगों के बीच में मजा आता है। थिएटर और घर पर बैठकर फिल्म देखने में बहुत अंतर है। आज एआई एक्टर्स की आवाज कॉपी कर रहा है। सीन रीक्रिएट कर रहा है। इसे आप कैसे देखते हैं? अक्षय– हाल ही में मुझसे किसी ने पूछा कि मैं किस तरह की फिल्म करना चाहता हूं। तो मैंने कहा कि मैं एक ऐसी फिल्म करना चाहता हूं जिसमें जबरदस्त एक्शन हो, और मैं फिर से 80s–90s के दौर में लौटना चाहता हूं। उस समय एक्टर खुद अपने स्टंट करते थे, खुद फाइट सीन करते थे—ना कि वीएफएक्स या एआई के सहारे। आजकल टेक्नोलॉजी बहुत आगे बढ़ गई है, लेकिन मैं एक ऐसी फिल्म बनाना चाहता हूं जिसमें ना एआई का इस्तेमाल हो और ना ही वीएफएक्स का– पूरी तरह रियल और ऑर्गेनिक फिल्म। मैं इसे एक उदाहरण से समझाता हूं–जैसे घर में एक प्रिंटेड पेंटिंग और एक हाथ से बनाई गई पेंटिंग होती है। प्रिंटेड पेंटिंग देखने में बहुत परफेक्ट लगती है, लेकिन जो असली पेंटिंग होती है, जिसे किसी कलाकार ने अपने हाथों से मेहनत करके बनाया होता है, उसमें जो डिटेलिंग, मेहनत और आत्मा होती है, वो अलग ही स्तर की होती है। ठीक उसी तरह, मैं ऐसी फिल्म बनाना चाहता हूं जिसमें वही असलियत और पवित्रता हो, जहां सब कुछ रियल हो। मैं अपनी जिंदगी में कम से कम एक ऐसी फिल्म जरूर बनाने की कोशिश करूंगा, जिसमें एआई और वीएफएक्स का इस्तेमाल बिल्कुल न हो। क्या एडिटिंग और स्क्रिप्टिंग जैसे कामों में भी खूब एआई इस्तेमाल हो रहा है? प्रियदर्शन–देखिए, फिल्म में हम एआई का सीमित इस्तेमाल करते हैं। जैसे कॉन्सेप्ट ड्रॉइंग बनाने के लिए, ताकि हमें यह समझने में मदद मिल सके कि कोई किरदार या सीन कैसा दिख सकता है। एआई के जरिए हम अलग-अलग विकल्प देख लेते हैं। लेकिन एक बात समझना जरूरी है कि आज भी एआई के पास सीमित डेटा है और वह पूरी तरह से क्रिएटर के निर्देशों पर ही काम करता है। वह खुद से कुछ नहीं करता, बल्कि इंसान के दिए गए कमांड के आधार पर ही रिजल्ट देता है। हां, अगर कभी ऐसा समय आता है जब एआई खुद इंसानों की तरह सोचने और फैसले लेने लगे, तो वह एक खतरनाक स्थिति हो सकती है। वामिका आपकी क्या लर्निंग रही इस स्टारकास्ट के साथ? वामिका–मेरी सबसे बड़ी लर्निंग यही रही कि आपको पेशेंस रखना चाहिए, शांत रहना चाहिए और अपने काम को एंजॉय करना चाहिए। शुरुआत में मैं चीजों को बहुत ज्यादा सीरियसली ले रही थी और अपने दिमाग में काफी प्रेशर बना लिया था लेकिन फिर मुझे एहसास हुआ कि आप रिलैक्स रहते हुए भी अच्छा काम कर सकते हैं, और इस पूरे प्रोसेस को एंजॉय करना बहुत जरूरी है। इसमें ‘भूल भुलैया’ से अलग क्या देखने को मिलेगा? प्रियदर्शन–‘भूल-भुलैया’ और इस फिल्म में यही सबसे बड़ा अंतर है। ‘भूल-भुलैया’ एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर थी, जहां अंत में पता चलता है कि असल में कोई भूत नहीं है लेकिन यह फिल्म एक फैंटेसी है। यहां कहानी का ट्रीटमेंट अलग है—इसमें शुरुआत में हमारा मुख्य किरदार यही मानता है कि भूत जैसी कोई चीज नहीं होती, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसे खुद भूत का सामना करना पड़ता है।’ असरानी जी अब नहीं हैं, इस फिल्म से जुड़ी उनकी कोई बात? प्रियदर्शन–मैंने उनके साथ फिल्म का आखिरी शॉट शूट किया था। उस दिन उन्होंने शॉट पूरा किया और फिर कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। उसके दो दिन बाद ही उनका निधन हो गया लेकिन उन्होंने दोनों फिल्मों की शूटिंग पूरी कर ली थी। कोई भी शॉट अधूरा नहीं रहा। दोनों फिल्मों में उनकी ही असली आवाज़ इस्तेमाल की गई है। सब कुछ बिल्कुल ओरिजिनल है। और सच कहूं तो हम सभी उन्हें दिल से बहुत मिस करते हैं।

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धुरंधर 2 बनी 6वीं सबसे ज्यादा कमाई वाली भारतीय फिल्म:वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹1226.44 करोड़ हुआ, KGF चैप्टर 2 और जवान को पीछे छोड़ा

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 (धुरंधर: द रिवेंज) दुनियाभर में 6वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई है। फिल्म का दुनियाभर में कलेक्शन 1,226.44 करोड़ रुपए पहुंच गया है और इसने KGF चैप्टर 2 (1,215 करोड़ रुपए) व जवान (1,160 करोड़ रुपए) को पीछे छोड़ दिया है। ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के अनुसार, रिलीज के दसवें दिन (शनिवार) फिल्म ने भारत में 62.85 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। फिल्म ने दुनियाभर में 1,226.44 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। धुरंधर 2 का भारत में कुल नेट कलेक्शन 778.77 करोड़ रुपए और ग्रॉस कलेक्शन 930.44 करोड़ रुपए हो गया। ग्रॉस कलेक्शन टिकट से कुल कमाई और नेट कलेक्शन टैक्स के बाद की कमाई होती है। ओवरसीज में फिल्म ने 296.00 करोड़ रुपए कमाए, जिससे वर्ल्डवाइड ग्रॉस 1,226.44 करोड़ रुपए पहुंच गया। दसवें दिन फिल्म के हिंदी वर्जन ने 58.00 करोड़ रुपए की सबसे ज्यादा कमाई की। वहीं, तेलुगु में 3.00 करोड़ रुपए, तमिल में 1.40 करोड़ रुपए, कन्नड़ में 0.30 करोड़ रुपए और मलयालम में 0.15 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ। धुरंधर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, 894.49 करोड़ रुपए की कमाई के साथ ही यह हिंदी भाषा में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दिलचस्प बात यह थी कि फिल्म को खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शानदार सफलता मिली। साथ ही यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म बनी। ……..……..……..…….. धुरंधर 2 से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस: नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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Rahul Ramakrishna’s brother allegedly dies after Paraquat poisoning: Experts warn why this herbicide is so deadly

Telugu actor Rahul Ramakrishna’s brother tragically died after ingesting the highly toxic herbicide paraquat.

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Toltec human sacrifice altar found in Mexico

Archaeologists with Mexico’s National Institute of Anthropology and History (INAH) have discovered an ancient Toltec altar and human remains near the Tula archaeological zone north of Mexico City. It dates to the Tollan period (900–1150 A.D.) when Tula was the capital city of the Toltec Empire.

The momoztli (altar) measures about one meter (3.3 feet) square and was built out of different stones, including volcanic blocks and river stone. It consists of three sections: a base of andesite quarry stone with small blocks no more than four inches thick on the outer face, a second section of larger slabs of andesite and a top section composed of river stones and basalt.

Four skulls, one of them still connected to a vertebral column, and several long bones, probably femurs, were found placed on three of the four sides. Their placement suggests a ritual purpose, and archaeologists believe they may be the result of ceremonial decapitations. Ceramic vessels, including a black bowl containing another bowl, obsidian fragments, obsidian blades and bone tools, known to have been used in sacrificial rituals, were also found. Archaeologists also uncovered shell remains, spindle whorls and awls, objects that played roles in both ritual practices and daily life. The fourth side has not yet been fully excavated; there are likely to be remains there too.

At the base of the altar were two skulls, one facing upwards and the other southwest. As the levels descended, a compacted layer with stucco, possibly lime and sand, was detected, and beneath this were found the other two incomplete skeletons, as well as some vessels.

Heredia Guillén said there is little chance of finding complete skeletons, because perhaps only those parts of the individuals were offered as sacrifices. Once registered, they will be sent to the project’s physical anthropology laboratory in the State of Mexico to determine age, sex, bone pathologies, and even whether they were decapitated, since one of the skulls still appears to be attached to the spine.

“In this case, although metals were already being worked in the Postclassic period, we know that here decapitations were still done with obsidian or flint knives, and they left cut marks on the bones,” he explained.

The altar was found near the Tula Chico area, about 300 meters (984 feet) from the perimeter wall of the Toltec capital. Remains of walls and foundations indicate the altar was in the center of a courtyard. INAH archaeologists believe the walls are the remains of elite buildings as people of high social rank in Tula lived outside the walls of the city.

All of the artifacts and remains recovered from the excavation will be cleaned, conserved and studied in laboratory conditions. The bones will be analyzed to narrow down the date of deposition and to determine the individual’s age, sex, geographical origins, health and possible causes of death.



* This article was originally published here

Oscars ceremony moving to new home outside Hollywood

The centrally located Peacock Theater in Los Angeles will host the 101st Academy Awards ceremony when it begins streaming on YouTube in 2029.

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