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Rare rock art found in Oman

A rare prehistoric rock art site has been discovered in northern Oman. Inscriptions and drawings were found at an archaeological site in the Hajar Al-Sinanat area in the Wilayat ​​Al-Khaboura, North Al-Batinah Governorate. Oman’s Ministry of Heritage and Tourism has not announced the date of the rock art. These sites were added to over the course of centuries, so further studies will be necessary to determine the stratigraphy of the engravings.

The newly recorded site features a large rock surface densely covered with pecked carvings, a method involving repeated impacts to shape stone. Among the images, archaeologists have identified depictions of animals, abstract geometric shapes, and figures resembling humans. Each mark represents more than simple decoration; they offer a tangible record of how past communities observed their surroundings, encoded ideas, and communicated through visual language. Experts suggest that these carvings may reflect ecological knowledge, ritual practices, or social interactions, though precise meanings remain under study.

What makes this discovery particularly compelling is the density and variety of motifs on a single rock face. Such concentration indicates the site was significant to those who created it, perhaps serving as a communal marker or a symbolic repository for collective memory. Archaeologists emphasize that rock art is a rare medium that captures human thought in a format that survives long after other evidence has vanished.

This site is being recorded as part of a wider program of documentation of rock art in Oman. Rock art is very vulnerable to damage and erosion, and even well-intentioned visitors can cause irreparable harm to fragile rock faces. Documenting the sites in meticulous detail will aid in their preservation and give researchers more information about the context of ancient rock art in the country.

Rock art sites like Hajar Al Sinanat serve as fragile visual records of past lives, providing unique insight into daily practices, symbolic thought, and environmental awareness. Unlike stone buildings or written chronicles, these markings are directly linked to human gesture, each peck, line, and figure representing an intentional act of communication. The ongoing protection of these sites ensures that future generations can engage with Oman’s ancient landscapes in meaningful ways.



* This article was originally published here

तलविंदर ने पाकिस्तानी सिंगर के साथ मंच शेयर किया:टोरंटो में कॉन्सर्ट में गले मिले, हसन रहीम ने कहा- भाई

भारतीय पंजाबी सिंगर तलविंदर हाल ही में टोरंटो में पाकिस्तानी सिंगर हसन रहीम के लाइव कॉन्सर्ट में शामिल हुए और उनके साथ मंच शेयर किया। दरअसल, मंगलवार को तलविंदर ने इंस्टाग्राम पर कॉन्सर्ट की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। उन्होंने पोस्ट पर कैप्शन लिखा, 'टोरंटो में हसन रहीम के साथ विशेज पूरी हुईं।' वीडियो में दोनों स्टेज पर एक साथ गाते, गले मिलते और डांस करते दिखे। हसन ने तलविंदर की इंस्टाग्राम पोस्ट पर 'भाई' लिखकर रिएक्ट किया। इस पोस्ट के बाद कुछ यूजर्स ने कमेंट सेक्शन में अपनी नाराजगी जाहिर की। कुछ ने लिखा कि हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच ऐसी मौजूदगी गलत थी। एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, 'मैंने नहीं सोचा था भाई कि ये लोग हमारे देश की सेना का मजाक उड़ाने वालों के साथ स्टेज शो करेंगे।' गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में और तनाव बढ़ गया है। इसके बाद 'फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज' (FWICE) जैसे संगठन ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर पाकिस्तानी कलाकारों, गायकों और तकनीशियनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। तलविंदर को गाने ‘पल पल’ से मिली थी पहचान तलविंदर का असली नाम तलविंदर सिंह सिद्धू है। उन्हें उनके गाने पल पल से पहचान मिली। कुछ महीने पहले उनका नाम एक्ट्रेस दिशा पाटनी से जुड़ा। दोनों को कई मौकों पर एक साथ देखा गया था। वहीं, तलविंदर ने दिशा के साथ कथित रिलेशनशिप को लेकर हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था, हमारी मुलाकात शादी (नूपुर सेनन की शादी) से ठीक पहले हुई थी और अचानक मिली इतनी सारी चर्चा ने हमें हैरान कर दिया। हम न तो किसी प्रेशर में आना चाहते हैं और न ही अफवाहों पर ध्यान देना चाहते हैं। हम अभी खुद को समझने और एक-दूसरे को जानने की प्रोसेस में हैं। मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि अगर लोग अफवाहें फैलाने की कोशिश करेंगे तो मैं उन्हें अफवाह ही रहने दूंगा। जब तलविंदर से पूछा गया था कि क्या वह प्यार और रिश्तों के बारे में सोचते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘मैं हर दिन प्यार में पड़ जाता हूं। मैं अभी भी प्यार में पड़ रहा हूं।’

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राम चरण बोले- पेद्दी के लिए आमिर-सलमान से कॉन्फिडेंट मिला:डायरेक्टर मना करते हैं, लेकिन अपने स्टंट खुद करता हूं; सेट पर लगीं कई चोटें, पार्ट-1

RRR को ऑस्कर में मिली जीत के बाद ग्लोबल स्टार बन चुके राम चरण की फिल्म पेद्दी 4 जून को रिलीज हो रही है। फिल्म में उनके साथ जान्हवी कपूर नजर आने वाली हैं। फिल्म रिलीज से पहले दैनिक राम चरण ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया है कि ये उनके करियर की ऐसी पहली फिल्म है, जिसके लिए उन्होंने सबसे ज्यादा सिंसियरली काम किया है। 200 दिनों के शूटिंग शेड्यूल में वो बस सोने ही घर जाते थे और अगली सुबह जल्दी सेट पर पहुंच जाते थे। शूटिंग के दौरान राम चरण को कई चोटें आईं। वो इन्हें गिफ्ट कहते हैं, उनका मानना है कि खुद स्टंट करना जरूरी है, क्योंकि आज के दौर में लोग सीन देखकर समझ जाते हैं कि कौन सा बॉडी डबल ने किया है और कौन सा एक्टर ने। राम चरण का ये भी कहना है कि सलमान खान की सुल्तान और दंगल की कामयाबी देखने के बाद उन्हें कुश्ती पर फिल्म बनाने का कॉन्फिडेंट मिला। पढ़िए राम चरण से हुई खास बातचीत- सवाल- पेद्दी में कुश्ती का बैकड्रॉप है। इस विषय को चुनने की क्या खास वजह रही? राम चरण- मुझे लगता है कि मेरी दूसरी फिल्मों की तुलना में मैंने इस फिल्म में सबसे ज्यादा सिंसियरली काम किया है। बहुत इज्जत से काम किया है, क्योंकि इसमें सिंसियेरिटी की जरुरत थी। ये फिल्म 1.8 बिलियन लोगों को रिप्रेजेंट करती है। ये फिल्म पहचान के लिए जीती है। जो पेद्दी का किरदरा है, वो पहचान की तलाश में है, अपने और अपनी कम्युनिटी के लिए। भारत जैसे देश में अगर आप मैप में नहीं हैं, कई गांव जिनमें लोग रह रहे हैं, वो वोट नहीं कर सकते, उनके पास ट्रांसपोर्ट नहीं है, स्कूल नहीं है, पोस्टल बॉक्स नहीं हैं, कोई सर्विसेस नहीं हैं। वो बस वहां रह रहे हैं। ऐसे कई गांव हैं। ये एक ऐसे लड़के की कहानी है, जो ऐसे गांव से निकलकर कैसे पहचान बनाता है। सवाल- आपका डेडिकेशन दिख रहा है, चेहरे पर चोटें भी हैं? राम चरण- बहुत सारे गिफ्ट्स (चोटें) मिले हैं मुझे इस डेडिकेशन के लिए। (हंसते हुए) जब पहली बार ये सुना था, तब मुझे मालूम हुआ। इससे पहले सलमान खान और आमिर खान की फिल्म भी चली थीं दंगल और सुल्तान। हम बहुत कॉन्फिडेंट थे कि इस तरह की फिल्में चलती हैं। उनका शुक्रिया। जहां तक कुश्ती का सवाल है, उत्तर भारत (यूपी, हरियाणा, बिहार) के दिल में यह खेल बसता है, लोग इसकी पूजा करते हैं। यह भारत में बेहद गहराई तक जड़ा हुआ खेल है। सदियों पुरानी इसकी परंपरा रही है। इसकी शुरुआत भले किसी अलग उद्देश्य से हुई थी, लेकिन अब यह देश के दिल और गांव-कस्बों से जुड़ा एक असली हार्टलैंड खेल बन चुका है। ऐसे किरदार करना बहुत थका देने वाला होता है, फिजिकली, आपको मेंटली बहुत स्ट्रॉन्ग होना पड़ता है। 200 दिन हमने शूटिंग की और फिजिकली जो करना पड़ा किया। मेरे सीनियर एक्टर सलमान खान और आमिर खान को हैड्स ऑफ, जिन्होंने इसे इतनी खूबसूरती से किया। मुझे भी कई गिफ्ट्स (चोटें) मिले हैं। सवाल- RRR में भी जो एक्शन था, असली आग के साथ जो क्लाइमैक्स सीन था, हर बार खुद को रिस्क में डालने में आपको डर नहीं लगता? राम चरण- मुझे लगता है डैड के टाइम से और हमारे टाइम में भी रिस्क फैक्टर था। अभी टेक्नॉलॉजी बढ़ने से रिस्क कम हो गया, लेकिन इसके अलावा क्या करना है ये मुझे नहीं पता। मुझे ऐसा करके, अपने स्टंट खुद करके अच्छा लगता है। मुझे इसके अलावा कुछ नहीं आता। मुझे पता है कि मेरी ऑडियंस को ये पसंद आएगा। आज कल देखकर बताया जा सकता है कि कौन सा स्टंट बॉडीडबल ने किया और कौन सा खुद ने किया। मुझे जितना हो सके ऑथेंटिक होना पसंद है। मेरे डायरेक्टर कहते हैं कि राम ऐसा मत करो। मेरे पिता आज भी 71 साल की उम्र में अपनी फाइट खुद करते हैं। मैं उनसे विनती करता हूं कि ऐसा मत करिए। लेकिन खुद ऐसा करने में एक चार्म है। लोगों कनेक्ट कर पाते हैं। उस कनेक्शन के लिए ही हम काम करते हैं। सवाल- हम बाहर से खुद को कितना भी स्ट्रॉन्ग हैं, लेकिन फिल्म के दौरान क्या कभी ऐसा हुआ जब इमोशनली टूटे या दर्द में रहे? राम चरण- मैं आपको बताता हूं, मैं अपनी जिंदगी में पहली बार 200 दिनों तक इतने जोश में मैं उठा था। ऐसा कभी किसी फिल्म में नहीं हुआ। मैं सिर्फ घर में सोने के लिए आता था। और वापस सेट पर पहुंचना चाहता था, ये फिल्म ही इतनी इंस्पायरिंग थी। हम सुबह 4ः45 पर उठते थे। वो लोग कहते थे कि 9 बजे या 10 बजे तक तैयार हो जाइए। लेकिन मैं कहता था सुबह 7 बजे क्यों नहीं। ऐसा इंथूसियाज्म इस फिल्म में लगा। सवाल- आपके पिता चिरंजीवी ने श्रीदेवी के साथ काम किया है, अब आप और जान्हवी इस फिल्म में हैं, दोनों की केमिस्ट्री नजर आ रही है। कैसा फील कर रहे हैं, जान्हवी के बारे में क्या कहना चाहेंगे? राम चरण- वो बहुत सिंसियर इंसान है। सिर्फ एक्ट्रेस ही नहीं, वो इंसान ही सिंसियर है। बहुत तैयारी से आती है, बहुत मेहनत करती है। जैसी वो है, उसमें उनके मां-बाप की परवरिश झलकती है। ये उसके काम में भी रिफ्लेक्ट होता है। उसके साथ काम करना एक प्लेजर है। फिल्म के बारे में- फिल्म पेद्दी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ये एक पैन इंडिया फिल्म है। बुच्ची बाबू के निर्देशन में बनी इस फिल्म को एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है। ये जान्हवी कपूर की दूसरी तेलुगु फिल्म है। उन्होंने 2024 में फिल्म देवरा से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था।

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Was Married at First Sight UK an 'accident waiting to happen'?

Channel 4 has wider questions to answer after allegations made by three women who took part in the show.

from BBC News https://ift.tt/NopIyRh

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Channel 4 has wider questions to answer after allegations made by three women who took part in the show.

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Mud plaster blocking wall from Tut’s tomb displayed for the first time

The original mud sealings that blocked the entrances to the tomb of 18th dynasty Pharaoh Tutankhamun have gone on public display for the first time since their discovery more than a century ago. They may seem ordinary in comparison to the glamour of his iconic gold funerary mask and other treasures, but surviving mud sealings that retain their original official impressions are rarer than gold in Egyptology because royal tombs were plundered and the entrance blocking destroyed in the process. The ancient looters of Tutankhamun’s tomb only made small holes in the sealing walls, and they were patched up, presumably by the priests who oversaw the pharaonic tombs.

Now displayed publicly for the first time at the Luxor Museum, the sealings offer visitors and researchers an unprecedented opportunity to encounter one of the few surviving original architectural elements directly connected to the discovery of Tutankhamun’s tomb.

The sealings were made from a local plaster material known in ancient Thebes as “Habiya”, a mixture of calcite, clay, sand, plant fibers, and gypsum. It is considered unique, with no comparable examples discovered in any other royal tomb in Egypt. Following the transfer of most of Tutankhamun’s treasures to the Grand Egyptian Museum (GEM), they also stand as the only original structural remnants still associated with the legendary tomb itself.

When Howard Carter discovered the tomb in 1922, he broke the sealings to three chambers to access the “wonderful things” within. He broke them into chunks, and at least took the care to box up all the broken pieces for storage, but unfortunately did not document their original configurations or locations. They were kept, but not conserved or studied, overshadowed by the extraordinary assemblage of more than 5,000 individual objects recovered from the tomb.

The complete wealth of funerary objects found in the tomb of Tutankhamun are now on display at the new Grand Egyptian Museum which had its official opening just last November. The boxes of fragments were not in display condition, and in 2025, the Supreme Council of Antiquities (SCA) launched a new initiative to give them their archaeological due. Each piece is being photographed and catalogued, their materials and manufacturing methods documented, then scanned so the walls can be digitally reconstructed.

Conservators have also been working to manually reconstruct them and one large section of blocking that was puzzled back together is part of the new exhibition at the Luxor museum. It was used to seal the entrance to the burial chamber from the antechamber and was stamped with the seals of Tutankhamun  and the necropolis guards who were entrusted with protecting the tomb from looters.



* This article was originally published here

जूनियर एनटीआर @43, दादा सीएम-पापा थे साउथ सुपरस्टार:भाई-पिता की मौत अलग-अलग समय एक तरीके से हुई, ट्रॉमा में मुखाग्निक तक नहीं दे सके

जूनियर एनटीआर आज टॉलीवुड ही नहीं, पूरे भारतीय सिनेमा के बड़े सितारों में गिने जाते हैं। दादा एन. टी. रामा राव की फिल्मी विरासत संभालने वाले जूनियर एनटीआर ने 13 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीता था। कभी लुक्स और वजन को लेकर ट्रोल हुए, तो कभी उनकी एक झलक पाने के लिए लाखों फैंस उमड़ पड़े। ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च में कथित तौर पर 10 लाख लोग पहुंचे थे। जूनियर एनटीआर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी उस दौर की सबसे महंगी सेलिब्रिटी शादियों में गिनी गई, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होने की रिपोर्ट्स थीं। 2009 में चुनाव प्रचार से लौटते वक्त वह भयानक सड़क हादसे का शिकार हुए और मौत को करीब से देखा। भाई और पिता की सड़क हादसों में मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया और वह फिल्मों से दूर हो गए। लेकिन चार साल बाद RRR से ऐसा कमबैक किया कि ग्लोबल स्टार बन गए। जूनियर एनटीआर के 43वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से। दादा की विरासत, राजनीति का दबदबा जूनियर एनटीआर आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह तेलुगु सिनेमा और आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली परिवार से आते हैं। उनके दादा एनटीआर (एन. टी. रामा राव) सुपरस्टार अभिनेता होने के साथ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक और आंध्र प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। एनटीआर ने 1943 में बसवतारकम से शादी की थी। दोनों के 12 बच्चे हुए, जिनमें 8 बेटे और 4 बेटियां थीं। बाद में यही परिवार तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति में बेहद ताकतवर माना जाने लगा। परिवार के कई सदस्य बड़े राजनीतिक और फिल्मी नाम बने। एनटीआर के बेटे: फिल्मों, राजनीति और बिजनेस में दबदबा एनटीआर के बेटों में सबसे चर्चित नाम नंदामूरी हरिकृष्ण और नंदामूरी बालकृष्ण रहे। हरिकृष्ण अभिनेता होने के साथ TDP के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद रहे। वहीं नंदामूरी बालकृष्ण तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार हैं और राजनीति में सक्रिय हैं। परिवार के अन्य बेटे भी अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़े रहे। नंदामूरी रामकृष्ण सीनियर फिल्म निर्माण और प्रोडक्शन गतिविधियों से जुड़े रहे। नंदामूरी जयकृष्ण फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और बिजनेस संभालते रहे। नंदामूरी साईकृष्ण व्यावसायिक कामकाज से जुड़े रहे। नंदामूरी मोहनकृष्ण फिल्म और बिजनेस नेटवर्क का हिस्सा रहे। नंदामूरी हरिनाथ सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहे। नंदामूरी रामकृष्ण जूनियर पारिवारिक फिल्म और बिजनेस गतिविधियों में सक्रिय रहे। अगली पीढ़ी में जूनियर एनटीआर, कल्याण राम और दूसरे कलाकारों ने फिल्मों में नाम कमाया। बेटियां भी बड़े राजनीतिक परिवारों से जुड़ीं एनटीआर की बेटियां भी राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। दग्गुबाती पुरंदेश्वरी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं। भुवनेश्वरी नारा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पत्नी हैं। लोकेश्वरी सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उमा महेश्वरी परिवार का हिस्सा रहीं और समय-समय पर चर्चाओं में रहीं। इसी वजह से एन. टी. रामा राव परिवार को आंध्र प्रदेश का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक-फिल्मी परिवार माना जाता है। दूसरी शादी और परिवार में बढ़ा राजनीतिक विवाद बसवतारकम के निधन के बाद एनटीआर ने 1993 में लक्ष्मी पार्वती से दूसरी शादी की थी। लक्ष्मी पार्वती लेखिका थीं और एनटीआर की जीवनी लिखने के दौरान दोनों करीब आए थे। इस शादी से उनकी कोई संतान नहीं हुई। यह रिश्ता काफी विवादों में रहा और परिवार के कई सदस्य इसके खिलाफ थे। बाद में परिवार और पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संघर्ष हुआ। एनटीआर के निधन के बाद लक्ष्मी पार्वती ने अलग पार्टी बनाई, लेकिन उन्हें ज्यादा राजनीतिक सफलता नहीं मिली। जूनियर एनटीआर किसके बेटे हैं? जूनियर एनटीआर, एनटीआर (एन. टी. रामा राव) के बेटे नंदामूरी हरिकृष्ण और शालिनी भास्कर राव के बेटे हैं। वह एनटीआर और उनकी पहली पत्नी बसवतारकम की फैमिली लाइन से पोते हैं। जूनियर एनटीआर के पिता नंदामूरी हरिकृष्ण ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी लक्ष्मी कुमारी थीं, जिनसे कल्याण राम, जनकी राम और सुहासिनी हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिकृष्ण की दूसरी शादी से परिवार में नाराजगी थी और दादा एन. टी. रामा राव शुरुआत में इस रिश्ते से खुश नहीं थे। हालांकि, जूनियर एनटीआर के जन्म के बाद उन्होंने शालिनी को परिवार में स्वीकार किया और अपने पोते को अपना नाम दिया। परिवार में जूनियर एनटीआर को प्यार से ‘तारक’ कहा जाता है। बाद में दादा एनटीआर ने अपने नाम से जोड़कर उनका पूरा नाम ‘नंदामूरी तारक रामा राव’ रखा। यहीं से वह ‘जूनियर एनटीआर’ के नाम से मशहूर हुए। जूनियर एनटीआर के पिता हरिकृष्ण फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय रहे। वह TDP के बड़े प्रचारक माने जाते थे और चुनावी रैलियों में भारी भीड़ जुटाते थे। यही लोकप्रियता बाद में जूनियर एनटीआर में भी दिखाई दी। 8 साल की उम्र में दादा की फिल्म से किया डेब्यू जूनियर एनटीआर का जन्म 20 मई 1983 को हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र में फिल्मों में काम शुरू कर दिया था। महज 8 साल की उम्र में ‘ब्रह्मऋषि विश्चामित्र’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू किया। यह फिल्म उनके दादा एनटीआर ने निर्देशित की थी। फिल्म में उन्होंने राजा भरत का किरदार निभाया था। स्कूल की पढ़ाई के साथ उन्होंने कुचिपुड़ी डांस की ट्रेनिंग ली, जिसने उनकी डांसिंग स्टाइल को अलग पहचान दिलाई। 13 साल की उम्र में मिला नेशनल अवॉर्ड जूनियर एनटीआर की दूसरी बड़ी फिल्म ‘रामायणम्’ थी। इसमें उन्होंने भगवान श्रीराम का किरदार निभाया था। उस समय उनकी उम्र करीब 14 साल थी। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि माना गया। उसी दौर में इंडस्ट्री को एहसास हो गया था कि वह आगे चलकर बड़े स्टार बनेंगे। 18 साल की उम्र में बने लीड हीरो साल 2001 में जूनियर एनटीआर ने ‘निन्नु चूडालानी’ से बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया। हालांकि उन्हें असली पहचान ‘स्टूडेंट नंबर 1’ से मिली। यह ‘एस.एस राजामौली’ की पहली डायरेक्टोरियल फिल्म भी थी। फिल्म सुपरहिट रही और यहीं से राजामौली और जूनियर एनटीआर की सफल जोड़ी शुरू हुई। बाद में दोनों ने ‘सिम्हाद्री’, ‘यमदोंगा’ और ‘RRR’ समेत 4 फिल्मों में काम किया। चारों फिल्में सुपरहिट रहीं। ‘आदि’ और ‘सिम्हाद्री’ ने बना दिया मास हीरो ‘आदि’ और ‘सिम्हाद्री’ की सफलता ने जूनियर एनटीआर को युवाओं के बीच सुपरस्टार बना दिया। उनकी डायलॉग डिलीवरी, डांस और एनर्जी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। डायरेक्टर्स बताते हैं कि जूनियर एनटीआर लंबे तेलुगु डायलॉग्स बिना कट के एक ही टेक में बोल देते हैं। उनकी मेमोरी तेज मानी जाती है और यही वजह है कि उन्हें टॉलीवुड का दमदार परफॉर्मर माना जाता है। ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च में पहुंचे 10 लाख लोग 5 दिसंबर 2003 को फिल्म ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च इवेंट में कथित तौर पर करीब 10 लाख लोग पहुंचे थे। यह कार्यक्रम निम्माकुरु गांव में हुआ था, जो जूनियर एनटीआर के दादा एनटीआर का जन्मस्थान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतनी भीड़ संभालने के लिए सरकार को 10 स्पेशल ट्रेनें चलानी पड़ी थीं। उस समय जूनियर एनटीआर की उम्र 20-21 साल थी। बाद में उन्होंने द कपिल शर्मा शो में भी इस घटना का जिक्र किया था। यह आज भी टॉलीवुड इतिहास की सबसे बड़ी फैन गैदरिंग्स में गिना जाता है। मोटापे के कारण ट्रोल हुए, फिर किया जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन करियर की शुरुआत में जूनियर एनटीआर को वजन और लुक्स को लेकर ट्रोल किया गया। खासतौर पर फिल्म ‘राखी’ के दौरान उनका वजन करीब 100 किलो तक पहुंच गया था। इसके बाद उन्होंने खुद पर मेहनत शुरू की और ‘यमदोंगा’ के लिए करीब 20 किलो वजन घटाया। फिल्म सुपरहिट रही और उनका नया लुक भी पसंद किया गया। एसएस राजामौली के निर्देशन में बनी यह फिल्म बाद में हिंदी में 'लोक परलोक' और तमिल में 'विजयन' नाम से डब कर रिलीज की गई। इसके बाद ‘बादशाह’, ‘टेम्पर’, ‘जनता गैरेज’ और ‘अरविंद समेथा वीरा राघवा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग ट्रांसफॉर्मेशन दिखाए। ‘अरविंद समेथा वीरा राघवा’ में वह पहली बार 6 पैक एब्स में नजर आए। चुनाव प्रचार के दौरान हुआ था भयानक एक्सीडेंट साल 2009 में जूनियर एनटीआर ने तेलुगु देशम पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया था। उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ती थी और उन्हें पार्टी का भविष्य माना जाता था। 27 मार्च 2009 को नलगोंडा जिले के पास उनकी कार का गंभीर एक्सीडेंट हुआ। हादसा इतना भयानक था कि वह SUV से बाहर जा गिरे थे। उन्हें गंभीर चोटें आईं और लंबे समय तक इलाज चला। इसके बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। 100 करोड़ की शादी बनी थी चर्चा जूनियर एनटीआर ने 5 मई 2011 को लक्ष्मी प्रणति से हैदराबाद में भव्य समारोह में शादी की थी। जूम टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शादी में करीब 100 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। लक्ष्मी प्रणति बिजनेसमैन नार्ने श्रीनिवास राव और नार्ने मल्लिका की बेटी हैं। मल्लिका, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की भतीजी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रिश्ते को तय कराने में चंद्रबाबू नायडू की अहम भूमिका रही थी। 18 करोड़ का मंडप बना, सुरक्षा के लिए भारी इंतजाम किए गए थे रिपोर्ट्स के अनुसार, जूनियर एनटीआर की शादी के लिए करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से विशाल मंडप तैयार किया गया था। मंडप को पारंपरिक दक्षिण भारतीय मंदिर शैली में सजाया गया था और इसके निर्माण में कई दिनों तक काम चला था। शादी में फिल्म इंडस्ट्री, बिजनेस और राजनीति जगत की बड़ी हस्तियां शामिल हुई थीं। भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। यह समारोह उस समय की सबसे चर्चित सेलिब्रिटी शादियों में गिना गया था। 1 करोड़ की साड़ी पहनकर दुल्हन बनी थीं लक्ष्मी प्रणति शादी में सबसे ज्यादा चर्चा लक्ष्मी प्रणति की लाल कांजीवरम साड़ी की हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए बताई गई थी। कहा जाता है कि शादी के बाद इस साड़ी को दान कर दिया गया था। जूनियर एनटीआर और लक्ष्मी प्रणति के दो बेटे अभय राम और भार्गव राम हैं। एक्टर की पत्नी लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं और बहुत कम सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आती हैं। भाई और पिता की मौत ने तोड़ दिया था परिवार 2014 में जूनियर एनटीआर के बड़े भाई जानकी राम की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद अगस्त 2018 में उनके पिता नंदामूरी हरिकृष्ण का भी रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया। पिता के अंतिम संस्कार के दौरान जूनियर एनटीआर खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। वे इतने बदहवास हो चुके थे कि सौतेले भाई कल्याण ने पिता को मुखाग्नि दी। इन घटनाओं ने जूनियर एनटीआर को अंदर तक तोड़ दिया था। पिता की मौत के बाद उन्होंने फिल्मों से लंबा ब्रेक लिया। ‘RRR’ से बने ग्लोबल स्टार चार साल बाद जूनियर एनटीआर ने 2022 में RRR से दमदार वापसी की। फिल्म में उनके निभाए कोमारम भीम के किरदार को दुनियाभर में पसंद किया गया। फिल्म के गाने ‘नाटू नाटू’ ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रचा। इसके बाद जूनियर एनटीआर की लोकप्रियता पूरी दुनिया तक पहुंच गई। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने 'देवारा: पार्ट 1' और 'वॉर 2' में काम किया। लग्जरी कारों के शौकीन, सभी नंबर ‘999’ जूनियर एनटीआर को नंबर 9 पसंद है और वह इसे अपना लकी नंबर मानते हैं। यही वजह है कि उनकी ज्यादातर लग्जरी कारों के नंबर 999 होते हैं। उनके कार कलेक्शन में पोर्श 718 केमन, रेंज रोवर और लैंबोर्गिनी यूरस जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। राजनीति से दूरी, फिल्मों पर पूरा फोकस इतने बड़े राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद जूनियर एनटीआर ने अब तक सक्रिय राजनीति में एंट्री नहीं की है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में जूनियर एनटीआर ने कहा था कि राजनीति बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और फिलहाल उनका पूरा ध्यान फिल्मों पर है। सामाजिक कार्यों में भी आगे रहते हैं जूनियर एनटीआर जूनियर एनटीआर फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। वह समय-समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत अभियानों में मदद करते रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता दी थी। इसके अलावा फिल्म इंडस्ट्री के जरूरतमंद वर्कर्स और फैंस की मदद करते रहते हैं। खास बात यह है कि जूनियर एनटीआर अपने सामाजिक कार्यों का ज्यादा प्रचार नहीं करते हैं। ____________________________________________ फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें- नवाजुद्दीन सिद्दीकी@52:वॉचमैन बने तो मालिक बोले- इस मरे हुए को किसने रखा, दोस्त की गुमशुदगी से मिली सरफरोश, सीन कटे तो थिएटर में रोए उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में जन्मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी जब 17 साल के हुए तो उनके एक घर में टीवी आया। एक दिन नवाज की नजर पड़ोस में रहने वाली लड़की पर पड़ी। पहली नजर में ही उन्हें उस लड़की से प्यार हो गया। वो लड़की रोज टीवी देखने एक घर में जाती तो पीछे-पीछे नवाज भी वहीं जाने लगे। दोनों घंटों उस घर में बैठते और कई बार नजरें टकरातीं।पूरी खबर पढ़ें..

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83 साल के अमिताभ बच्चन अस्पताल में भर्ती हुए:दावा- नानावटी अस्पताल के ए-विंग में 2 दिनों से हैं भर्ती, अभिषेक बच्चन भी हाल जानने हॉस्पिटल पहुंचे

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं। पत्रकार विक्की ललवानी ने यूट्यूब अकाउंट से दावा किया है कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। वो अस्पताल के ए-विंग में हैं। यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो में विक्की ललवानी ने बताया है कि वो खबर कन्फर्म करने खुद नानावटी अस्पताल पहुंचे थे, जहां उन्हें खबर की कन्फर्मेशन मिली। बिग बी को ए-विंग, तीसरी मंजिल में रखा गया है। उन्होंने ये भी दावा किया है कि अभिषेक बच्चन भी पिता को देखने मंगलवार शाम साढ़े 4 बजे अस्पताल पहुंचे थे। विक्की ललवानी के अनुसार, अमिताभ बच्चन लंबे समय से पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी तबीयत बहुत खराब है- डायरेक्टर विवेक शर्मा दैनिक भास्कर ने खबर की पुष्टि करने के लिए डायरेक्टर विवेक शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने कहा, ‘उनकी तबीयत बहुत खराब है। मैंने दो हफ्ते पहले उनसे समय मांगा था मिलने का, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी इजाजत नहीं है। तो कन्फर्म हो गया था कि या तो वो हॉस्पिटल में हैं या डॉक्टर्स की निगरानी में हैं। मुझे लगता है कि उनकी तबीयत काफी खराब है।’ इसके अलावा दैनिक भास्कर से बातचीत में परिवार के करीबी सूत्र का कहना है कि अमिताभ बच्चन को रूटीन चेकअप के चलते भर्ती करवाया गया है। बिग बी का 75% लिवर है खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके हैं। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब एक्स-रे हुआ लेकिन अब भी सही कारण नहीं पता चल सका। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुई तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर इसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फंट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने माने सर्जन एच.एस.भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फंट चुकी हैं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वो 4 दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर-

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47 miniature vessels found in pre-Hispanic shaft burial

A tomb containing the remains of eight individuals and offerings of 47 miniature pottery vessels has been discovered at the Ignacio Zaragoza archaeological site in Tula de Allende, Hidalgo, Mexico. The tomb is between 1,800 and 1,900 years old, and is part of a residential complex within the sphere of its economic and cultural dominance. It was about 55 miles from Teotihuacan and was occupied between 225 and 600 A.D., the apex of Teotihuacan’s power.

Archaeologists from Mexico’s National Institute of Anthropology and History (INAH) made the discovery in a salvage excavation along the route of the Mexico City-Queretaro Passenger Train. After finding scattered fragments of pottery on the surface, the team dug test pits that uncovered wall foundations. Further excavation and coupled with drone photography determined the settlement consisted of small residential structures with rooms oriented north-south and east-west, connected by central and side patios.

Inside and around the residential spaces, archaeologists found more than a dozen individual and collective burials containing complete and incomplete skeletons. Most were the long bones from the legs of adults, with a few children and adolescents. Some burials were cists on the surface, others cut into the tepetate (compressed volcanic soil). Five of the tombs were shaft burials — vertical shafts leading to small burial chambers.

Two of the shaft burials were in a single room. The one on the north side of the room had two chambers, the one of the south had one. It was inside the northern tomb that INAH archaeologists found the remains of eight people. Six of them had been arranged in a seated position with ceramic vessels at their feet.

The offering of 47 miniature vessels is especially important. Miniature ceramics in Mesoamerican funerary settings often point to ritual practice rather than daily use. Their placement near the bodies suggests that the tomb was not a simple burial space, but a carefully maintained mortuary context tied to memory, identity and household ritual.

One individual was also buried with shell ornaments, including part of a small semicircular mother-of-pearl pendant and a small plate made from the same material. In another tomb, archaeologists found engraved vessels, which were removed with surrounding soil so they could be studied through micro-excavation.



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रातोंरात स्टार बने जालंधर के सिंगर मस्कीन की कहानी:एक साल पुरानी रील से ऑफर मिला; 1.80 करोड़ देख चुके 'बुल्लेया वे' सॉन्ग

जालंधर के रहने वाले अशोक मस्कीन की जिंदगी एक रील से बदल गई। इसी रील से उन्हें ऐसा ऑफर मिला कि फैक्ट्री में खराद का काम करने वाले मस्कीन कोक स्टूडियो में गाए ‘बुल्लेया वे और लगदा नीं दिल मर जाणा…’ गाकर रातों-रात स्टार बन गए। उनका गाया सॉन्ग 1.8 करोड़ लोग देख चुके हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई तक उन्हें बॉलीवुड मूवीज में गाने के साथ लाइव शोज के ऑफर तक आ रहे हैं। हालांकि अशोक की जिंदगी पहले बहुत संघर्ष से भरी रही। 15 किमी पैदल चलकर अशोक ने मशहूर पंजाबी सिंगर साबर कोटी से गायकी सीखी। हालांकि गरीबी के चलते उनकी गायकी का शौक दिहाड़ी में ही दब गया था। 50 साल की उम्र में वह फेमस हुए तो फैक्ट्री का काम छोड़ दिया और पूरा ध्यान अब सिंगिंग पर है। किस्मत बदलने पर अब पत्नी-बेटी को भी गर्व और खुशी है। दैनिक भास्कर ने जिंदगी के संघर्ष और अचानक मिली शोहरत के बारे में अशोक मस्कीन से बात की, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अशोक मस्कीन के संगीत के सफर की कहानी जानिए… जानें एक रील से कैसे बदली मस्कीन की किस्मत बेटे के ऑपरेशन का खर्च तक मुंबई के संगीतकार ने उठाया मस्कीन ने बताया कि मुंबई के कालाकार बहुत मददगार हैं। मेरी बेटी के नाक की हड्‌डी में प्रॉब्लम थी, जन्म से उसका होठ भी फटा था। इसका ऑपरेशन करवाना था। बेटी को दाखिल कराया तो डॉक्टरों ने मोटा बिल बना दिया। समझ नहीं आ रहा था क्या करुं। इस पर मैंने मुंबई के संगीतकार तनिष को डरते हुए फोन किया और कहा कि बेटी का ऑपरेशन करवाया है और पैसे कम पड़ गए हैं। उन्होंने मेरी बात सुन एक मिनट भी नहीं लगाया और कहा कि टोटल खर्च बताओ कितना हुआ है और सारा पैसा खुद दे दिया। 2 कमरों के घर में रहते अशोक मकसूदां चौक के पास महाशा कॉलोनी में रहने वाली 50 वर्षीय अशोक मस्कीन के घर में 2 कमरे हैं। जिस गली में वह रहते हैं, वह संगीतकारों की गली है। गली में 70 घर हैं और हर कोई संगीत से जुड़ा है। एक सिरे से बंद गली में रहने वाले वाले मस्कीन की किस्मत को कोक स्टूडियो ने खोल दिया। बॉलीवुड और लाइव शोज के ऑफर्स मिल रहे अपने छोटे से मकान में पत्नी मोनिका और बेटी के साथ बैठे अशोक ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि संगीत इंडस्ट्री के कई लोगों ने मुझसे संपर्क किया है। मुझे एक हिंदी फिल्म में गाने का ऑफर मिला है और मेरे लाइव शोज की बुकिंग भी शुरू हो गई है। अभी जालंधर की एक कंपनी से दिल्ली की एक सिंगर के साथ ड्यूट गीत का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ है। बॉलीवुड फिल्म के लिए प्लेबैक किया है और 2 गीत एडवांस रिकॉर्ड हैं।

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