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Was Married at First Sight UK an 'accident waiting to happen'?

Channel 4 has wider questions to answer after allegations made by three women who took part in the show.

from BBC News https://ift.tt/NopIyRh

Was Married at First Sight UK an 'accident waiting to happen'?

Channel 4 has wider questions to answer after allegations made by three women who took part in the show.

from BBC News https://ift.tt/mHYQIF3

Mud plaster blocking wall from Tut’s tomb displayed for the first time

The original mud sealings that blocked the entrances to the tomb of 18th dynasty Pharaoh Tutankhamun have gone on public display for the first time since their discovery more than a century ago. They may seem ordinary in comparison to the glamour of his iconic gold funerary mask and other treasures, but surviving mud sealings that retain their original official impressions are rarer than gold in Egyptology because royal tombs were plundered and the entrance blocking destroyed in the process. The ancient looters of Tutankhamun’s tomb only made small holes in the sealing walls, and they were patched up, presumably by the priests who oversaw the pharaonic tombs.

Now displayed publicly for the first time at the Luxor Museum, the sealings offer visitors and researchers an unprecedented opportunity to encounter one of the few surviving original architectural elements directly connected to the discovery of Tutankhamun’s tomb.

The sealings were made from a local plaster material known in ancient Thebes as “Habiya”, a mixture of calcite, clay, sand, plant fibers, and gypsum. It is considered unique, with no comparable examples discovered in any other royal tomb in Egypt. Following the transfer of most of Tutankhamun’s treasures to the Grand Egyptian Museum (GEM), they also stand as the only original structural remnants still associated with the legendary tomb itself.

When Howard Carter discovered the tomb in 1922, he broke the sealings to three chambers to access the “wonderful things” within. He broke them into chunks, and at least took the care to box up all the broken pieces for storage, but unfortunately did not document their original configurations or locations. They were kept, but not conserved or studied, overshadowed by the extraordinary assemblage of more than 5,000 individual objects recovered from the tomb.

The complete wealth of funerary objects found in the tomb of Tutankhamun are now on display at the new Grand Egyptian Museum which had its official opening just last November. The boxes of fragments were not in display condition, and in 2025, the Supreme Council of Antiquities (SCA) launched a new initiative to give them their archaeological due. Each piece is being photographed and catalogued, their materials and manufacturing methods documented, then scanned so the walls can be digitally reconstructed.

Conservators have also been working to manually reconstruct them and one large section of blocking that was puzzled back together is part of the new exhibition at the Luxor museum. It was used to seal the entrance to the burial chamber from the antechamber and was stamped with the seals of Tutankhamun  and the necropolis guards who were entrusted with protecting the tomb from looters.



* This article was originally published here

जूनियर एनटीआर @43, दादा सीएम-पापा थे साउथ सुपरस्टार:भाई-पिता की मौत अलग-अलग समय एक तरीके से हुई, ट्रॉमा में मुखाग्निक तक नहीं दे सके

जूनियर एनटीआर आज टॉलीवुड ही नहीं, पूरे भारतीय सिनेमा के बड़े सितारों में गिने जाते हैं। दादा एन. टी. रामा राव की फिल्मी विरासत संभालने वाले जूनियर एनटीआर ने 13 साल की उम्र में नेशनल अवॉर्ड जीता था। कभी लुक्स और वजन को लेकर ट्रोल हुए, तो कभी उनकी एक झलक पाने के लिए लाखों फैंस उमड़ पड़े। ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च में कथित तौर पर 10 लाख लोग पहुंचे थे। जूनियर एनटीआर की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनकी शादी उस दौर की सबसे महंगी सेलिब्रिटी शादियों में गिनी गई, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होने की रिपोर्ट्स थीं। 2009 में चुनाव प्रचार से लौटते वक्त वह भयानक सड़क हादसे का शिकार हुए और मौत को करीब से देखा। भाई और पिता की सड़क हादसों में मौत ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया और वह फिल्मों से दूर हो गए। लेकिन चार साल बाद RRR से ऐसा कमबैक किया कि ग्लोबल स्टार बन गए। जूनियर एनटीआर के 43वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से। दादा की विरासत, राजनीति का दबदबा जूनियर एनटीआर आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनकी पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। वह तेलुगु सिनेमा और आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली परिवार से आते हैं। उनके दादा एनटीआर (एन. टी. रामा राव) सुपरस्टार अभिनेता होने के साथ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के संस्थापक और आंध्र प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। एनटीआर ने 1943 में बसवतारकम से शादी की थी। दोनों के 12 बच्चे हुए, जिनमें 8 बेटे और 4 बेटियां थीं। बाद में यही परिवार तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति में बेहद ताकतवर माना जाने लगा। परिवार के कई सदस्य बड़े राजनीतिक और फिल्मी नाम बने। एनटीआर के बेटे: फिल्मों, राजनीति और बिजनेस में दबदबा एनटीआर के बेटों में सबसे चर्चित नाम नंदामूरी हरिकृष्ण और नंदामूरी बालकृष्ण रहे। हरिकृष्ण अभिनेता होने के साथ TDP के बड़े नेता और राज्यसभा सांसद रहे। वहीं नंदामूरी बालकृष्ण तेलुगु फिल्मों के सुपरस्टार हैं और राजनीति में सक्रिय हैं। परिवार के अन्य बेटे भी अलग-अलग भूमिकाओं में जुड़े रहे। नंदामूरी रामकृष्ण सीनियर फिल्म निर्माण और प्रोडक्शन गतिविधियों से जुड़े रहे। नंदामूरी जयकृष्ण फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन और बिजनेस संभालते रहे। नंदामूरी साईकृष्ण व्यावसायिक कामकाज से जुड़े रहे। नंदामूरी मोहनकृष्ण फिल्म और बिजनेस नेटवर्क का हिस्सा रहे। नंदामूरी हरिनाथ सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहे। नंदामूरी रामकृष्ण जूनियर पारिवारिक फिल्म और बिजनेस गतिविधियों में सक्रिय रहे। अगली पीढ़ी में जूनियर एनटीआर, कल्याण राम और दूसरे कलाकारों ने फिल्मों में नाम कमाया। बेटियां भी बड़े राजनीतिक परिवारों से जुड़ीं एनटीआर की बेटियां भी राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। दग्गुबाती पुरंदेश्वरी भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहीं। भुवनेश्वरी नारा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की पत्नी हैं। लोकेश्वरी सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। उमा महेश्वरी परिवार का हिस्सा रहीं और समय-समय पर चर्चाओं में रहीं। इसी वजह से एन. टी. रामा राव परिवार को आंध्र प्रदेश का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक-फिल्मी परिवार माना जाता है। दूसरी शादी और परिवार में बढ़ा राजनीतिक विवाद बसवतारकम के निधन के बाद एनटीआर ने 1993 में लक्ष्मी पार्वती से दूसरी शादी की थी। लक्ष्मी पार्वती लेखिका थीं और एनटीआर की जीवनी लिखने के दौरान दोनों करीब आए थे। इस शादी से उनकी कोई संतान नहीं हुई। यह रिश्ता काफी विवादों में रहा और परिवार के कई सदस्य इसके खिलाफ थे। बाद में परिवार और पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संघर्ष हुआ। एनटीआर के निधन के बाद लक्ष्मी पार्वती ने अलग पार्टी बनाई, लेकिन उन्हें ज्यादा राजनीतिक सफलता नहीं मिली। जूनियर एनटीआर किसके बेटे हैं? जूनियर एनटीआर, एनटीआर (एन. टी. रामा राव) के बेटे नंदामूरी हरिकृष्ण और शालिनी भास्कर राव के बेटे हैं। वह एनटीआर और उनकी पहली पत्नी बसवतारकम की फैमिली लाइन से पोते हैं। जूनियर एनटीआर के पिता नंदामूरी हरिकृष्ण ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी लक्ष्मी कुमारी थीं, जिनसे कल्याण राम, जनकी राम और सुहासिनी हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिकृष्ण की दूसरी शादी से परिवार में नाराजगी थी और दादा एन. टी. रामा राव शुरुआत में इस रिश्ते से खुश नहीं थे। हालांकि, जूनियर एनटीआर के जन्म के बाद उन्होंने शालिनी को परिवार में स्वीकार किया और अपने पोते को अपना नाम दिया। परिवार में जूनियर एनटीआर को प्यार से ‘तारक’ कहा जाता है। बाद में दादा एनटीआर ने अपने नाम से जोड़कर उनका पूरा नाम ‘नंदामूरी तारक रामा राव’ रखा। यहीं से वह ‘जूनियर एनटीआर’ के नाम से मशहूर हुए। जूनियर एनटीआर के पिता हरिकृष्ण फिल्मों और राजनीति दोनों में सक्रिय रहे। वह TDP के बड़े प्रचारक माने जाते थे और चुनावी रैलियों में भारी भीड़ जुटाते थे। यही लोकप्रियता बाद में जूनियर एनटीआर में भी दिखाई दी। 8 साल की उम्र में दादा की फिल्म से किया डेब्यू जूनियर एनटीआर का जन्म 20 मई 1983 को हुआ था। उन्होंने छोटी उम्र में फिल्मों में काम शुरू कर दिया था। महज 8 साल की उम्र में ‘ब्रह्मऋषि विश्चामित्र’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट डेब्यू किया। यह फिल्म उनके दादा एनटीआर ने निर्देशित की थी। फिल्म में उन्होंने राजा भरत का किरदार निभाया था। स्कूल की पढ़ाई के साथ उन्होंने कुचिपुड़ी डांस की ट्रेनिंग ली, जिसने उनकी डांसिंग स्टाइल को अलग पहचान दिलाई। 13 साल की उम्र में मिला नेशनल अवॉर्ड जूनियर एनटीआर की दूसरी बड़ी फिल्म ‘रामायणम्’ थी। इसमें उन्होंने भगवान श्रीराम का किरदार निभाया था। उस समय उनकी उम्र करीब 14 साल थी। फिल्म को सर्वश्रेष्ठ बाल फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि माना गया। उसी दौर में इंडस्ट्री को एहसास हो गया था कि वह आगे चलकर बड़े स्टार बनेंगे। 18 साल की उम्र में बने लीड हीरो साल 2001 में जूनियर एनटीआर ने ‘निन्नु चूडालानी’ से बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया। हालांकि उन्हें असली पहचान ‘स्टूडेंट नंबर 1’ से मिली। यह ‘एस.एस राजामौली’ की पहली डायरेक्टोरियल फिल्म भी थी। फिल्म सुपरहिट रही और यहीं से राजामौली और जूनियर एनटीआर की सफल जोड़ी शुरू हुई। बाद में दोनों ने ‘सिम्हाद्री’, ‘यमदोंगा’ और ‘RRR’ समेत 4 फिल्मों में काम किया। चारों फिल्में सुपरहिट रहीं। ‘आदि’ और ‘सिम्हाद्री’ ने बना दिया मास हीरो ‘आदि’ और ‘सिम्हाद्री’ की सफलता ने जूनियर एनटीआर को युवाओं के बीच सुपरस्टार बना दिया। उनकी डायलॉग डिलीवरी, डांस और एनर्जी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। डायरेक्टर्स बताते हैं कि जूनियर एनटीआर लंबे तेलुगु डायलॉग्स बिना कट के एक ही टेक में बोल देते हैं। उनकी मेमोरी तेज मानी जाती है और यही वजह है कि उन्हें टॉलीवुड का दमदार परफॉर्मर माना जाता है। ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च में पहुंचे 10 लाख लोग 5 दिसंबर 2003 को फिल्म ‘अंधरावाला’ के ऑडियो लॉन्च इवेंट में कथित तौर पर करीब 10 लाख लोग पहुंचे थे। यह कार्यक्रम निम्माकुरु गांव में हुआ था, जो जूनियर एनटीआर के दादा एनटीआर का जन्मस्थान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतनी भीड़ संभालने के लिए सरकार को 10 स्पेशल ट्रेनें चलानी पड़ी थीं। उस समय जूनियर एनटीआर की उम्र 20-21 साल थी। बाद में उन्होंने द कपिल शर्मा शो में भी इस घटना का जिक्र किया था। यह आज भी टॉलीवुड इतिहास की सबसे बड़ी फैन गैदरिंग्स में गिना जाता है। मोटापे के कारण ट्रोल हुए, फिर किया जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन करियर की शुरुआत में जूनियर एनटीआर को वजन और लुक्स को लेकर ट्रोल किया गया। खासतौर पर फिल्म ‘राखी’ के दौरान उनका वजन करीब 100 किलो तक पहुंच गया था। इसके बाद उन्होंने खुद पर मेहनत शुरू की और ‘यमदोंगा’ के लिए करीब 20 किलो वजन घटाया। फिल्म सुपरहिट रही और उनका नया लुक भी पसंद किया गया। एसएस राजामौली के निर्देशन में बनी यह फिल्म बाद में हिंदी में 'लोक परलोक' और तमिल में 'विजयन' नाम से डब कर रिलीज की गई। इसके बाद ‘बादशाह’, ‘टेम्पर’, ‘जनता गैरेज’ और ‘अरविंद समेथा वीरा राघवा’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग ट्रांसफॉर्मेशन दिखाए। ‘अरविंद समेथा वीरा राघवा’ में वह पहली बार 6 पैक एब्स में नजर आए। चुनाव प्रचार के दौरान हुआ था भयानक एक्सीडेंट साल 2009 में जूनियर एनटीआर ने तेलुगु देशम पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया था। उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ती थी और उन्हें पार्टी का भविष्य माना जाता था। 27 मार्च 2009 को नलगोंडा जिले के पास उनकी कार का गंभीर एक्सीडेंट हुआ। हादसा इतना भयानक था कि वह SUV से बाहर जा गिरे थे। उन्हें गंभीर चोटें आईं और लंबे समय तक इलाज चला। इसके बाद उन्होंने राजनीति से दूरी बना ली। 100 करोड़ की शादी बनी थी चर्चा जूनियर एनटीआर ने 5 मई 2011 को लक्ष्मी प्रणति से हैदराबाद में भव्य समारोह में शादी की थी। जूम टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शादी में करीब 100 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। लक्ष्मी प्रणति बिजनेसमैन नार्ने श्रीनिवास राव और नार्ने मल्लिका की बेटी हैं। मल्लिका, आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की भतीजी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रिश्ते को तय कराने में चंद्रबाबू नायडू की अहम भूमिका रही थी। 18 करोड़ का मंडप बना, सुरक्षा के लिए भारी इंतजाम किए गए थे रिपोर्ट्स के अनुसार, जूनियर एनटीआर की शादी के लिए करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से विशाल मंडप तैयार किया गया था। मंडप को पारंपरिक दक्षिण भारतीय मंदिर शैली में सजाया गया था और इसके निर्माण में कई दिनों तक काम चला था। शादी में फिल्म इंडस्ट्री, बिजनेस और राजनीति जगत की बड़ी हस्तियां शामिल हुई थीं। भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे। यह समारोह उस समय की सबसे चर्चित सेलिब्रिटी शादियों में गिना गया था। 1 करोड़ की साड़ी पहनकर दुल्हन बनी थीं लक्ष्मी प्रणति शादी में सबसे ज्यादा चर्चा लक्ष्मी प्रणति की लाल कांजीवरम साड़ी की हुई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी कीमत करीब 1 करोड़ रुपए बताई गई थी। कहा जाता है कि शादी के बाद इस साड़ी को दान कर दिया गया था। जूनियर एनटीआर और लक्ष्मी प्रणति के दो बेटे अभय राम और भार्गव राम हैं। एक्टर की पत्नी लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं और बहुत कम सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आती हैं। भाई और पिता की मौत ने तोड़ दिया था परिवार 2014 में जूनियर एनटीआर के बड़े भाई जानकी राम की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इसके बाद अगस्त 2018 में उनके पिता नंदामूरी हरिकृष्ण का भी रोड एक्सीडेंट में निधन हो गया। पिता के अंतिम संस्कार के दौरान जूनियर एनटीआर खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। वे इतने बदहवास हो चुके थे कि सौतेले भाई कल्याण ने पिता को मुखाग्नि दी। इन घटनाओं ने जूनियर एनटीआर को अंदर तक तोड़ दिया था। पिता की मौत के बाद उन्होंने फिल्मों से लंबा ब्रेक लिया। ‘RRR’ से बने ग्लोबल स्टार चार साल बाद जूनियर एनटीआर ने 2022 में RRR से दमदार वापसी की। फिल्म में उनके निभाए कोमारम भीम के किरदार को दुनियाभर में पसंद किया गया। फिल्म के गाने ‘नाटू नाटू’ ने ऑस्कर जीतकर इतिहास रचा। इसके बाद जूनियर एनटीआर की लोकप्रियता पूरी दुनिया तक पहुंच गई। इस फिल्म की सफलता के बाद उन्होंने 'देवारा: पार्ट 1' और 'वॉर 2' में काम किया। लग्जरी कारों के शौकीन, सभी नंबर ‘999’ जूनियर एनटीआर को नंबर 9 पसंद है और वह इसे अपना लकी नंबर मानते हैं। यही वजह है कि उनकी ज्यादातर लग्जरी कारों के नंबर 999 होते हैं। उनके कार कलेक्शन में पोर्श 718 केमन, रेंज रोवर और लैंबोर्गिनी यूरस जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। राजनीति से दूरी, फिल्मों पर पूरा फोकस इतने बड़े राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद जूनियर एनटीआर ने अब तक सक्रिय राजनीति में एंट्री नहीं की है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में जूनियर एनटीआर ने कहा था कि राजनीति बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और फिलहाल उनका पूरा ध्यान फिल्मों पर है। सामाजिक कार्यों में भी आगे रहते हैं जूनियर एनटीआर जूनियर एनटीआर फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। वह समय-समय पर शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत अभियानों में मदद करते रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता दी थी। इसके अलावा फिल्म इंडस्ट्री के जरूरतमंद वर्कर्स और फैंस की मदद करते रहते हैं। खास बात यह है कि जूनियर एनटीआर अपने सामाजिक कार्यों का ज्यादा प्रचार नहीं करते हैं। ____________________________________________ फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें- नवाजुद्दीन सिद्दीकी@52:वॉचमैन बने तो मालिक बोले- इस मरे हुए को किसने रखा, दोस्त की गुमशुदगी से मिली सरफरोश, सीन कटे तो थिएटर में रोए उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में जन्मे नवाजुद्दीन सिद्दीकी जब 17 साल के हुए तो उनके एक घर में टीवी आया। एक दिन नवाज की नजर पड़ोस में रहने वाली लड़की पर पड़ी। पहली नजर में ही उन्हें उस लड़की से प्यार हो गया। वो लड़की रोज टीवी देखने एक घर में जाती तो पीछे-पीछे नवाज भी वहीं जाने लगे। दोनों घंटों उस घर में बैठते और कई बार नजरें टकरातीं।पूरी खबर पढ़ें..

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83 साल के अमिताभ बच्चन अस्पताल में भर्ती हुए:दावा- नानावटी अस्पताल के ए-विंग में 2 दिनों से हैं भर्ती, अभिषेक बच्चन भी हाल जानने हॉस्पिटल पहुंचे

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं। पत्रकार विक्की ललवानी ने यूट्यूब अकाउंट से दावा किया है कि उन्हें 16 मई को भर्ती करवाया गया है। वो अस्पताल के ए-विंग में हैं। यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो में विक्की ललवानी ने बताया है कि वो खबर कन्फर्म करने खुद नानावटी अस्पताल पहुंचे थे, जहां उन्हें खबर की कन्फर्मेशन मिली। बिग बी को ए-विंग, तीसरी मंजिल में रखा गया है। उन्होंने ये भी दावा किया है कि अभिषेक बच्चन भी पिता को देखने मंगलवार शाम साढ़े 4 बजे अस्पताल पहुंचे थे। विक्की ललवानी के अनुसार, अमिताभ बच्चन लंबे समय से पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनकी तबीयत बहुत खराब है- डायरेक्टर विवेक शर्मा दैनिक भास्कर ने खबर की पुष्टि करने के लिए डायरेक्टर विवेक शर्मा से बातचीत की तो उन्होंने कहा, ‘उनकी तबीयत बहुत खराब है। मैंने दो हफ्ते पहले उनसे समय मांगा था मिलने का, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी इजाजत नहीं है। तो कन्फर्म हो गया था कि या तो वो हॉस्पिटल में हैं या डॉक्टर्स की निगरानी में हैं। मुझे लगता है कि उनकी तबीयत काफी खराब है।’ इसके अलावा दैनिक भास्कर से बातचीत में परिवार के करीबी सूत्र का कहना है कि अमिताभ बच्चन को रूटीन चेकअप के चलते भर्ती करवाया गया है। बिग बी का 75% लिवर है खराब 83 साल के बिग बी सिर्फ 25% लिवर पर ही जिंदा हैं, उनका 75% लिवर खराब है। कुली के सेट पर हुए हादसे के बाद डॉक्टर्स क्लिनिकली मरा हुआ घोषित कर चुके हैं। 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, वो दर्द अमिताभ ने 4 दिन झेला 26 जुलाई 1982 को अमिताभ बच्चन फिल्म कुली के लिए एक एक्शन सीक्वेंस शूट कर रहे थे। शॉट की डिमांड के अनुसार पुनीत इस्सर को अमिताभ को मुक्का मारना था और उन्हें टेबल पर जाकर गिरना था। ये काम बॉडी डबल का था, लेकिन अमिताभ ने परफेक्शन के लिए खुद इसे शूट किया। मुक्का तेज लगा जिससे टेबल का एक कोना अमिताभ के पेट पर लग गया। खून नहीं आया था, लेकिन दर्द से बिग बी का बुरा हाल था। अस्पताल गए तो डॉक्टर्स सही कारण नहीं समझ सके। पेन किलर के सहारे बिग बी ने दो दिन काटे, लेकिन जब दर्द बंद नहीं हुआ तो फिर उन्हें बेंगलुरु के सेंट फिलोमेना हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। डॉक्टर्स भी दे चुके थे जवाब एक्स-रे हुआ लेकिन अब भी सही कारण नहीं पता चल सका। कई टेस्ट हुए, लेकिन जब चोट का ही पता नहीं चला तो इलाज कैसे होता। तीसरे दिन जब दर्द असहनीय हुई तो डॉक्टर्स ने दोबारा एक्स-रे कर इसे बारीकी से एग्जामिन किया। देखा कि एक्स-रे में डायफ्राम के नीचे गैस दिख रही थी, जो लीकेज का संकेत थी। दरअसल चोट लगने से अमिताभ की अंतड़ियां फंट गई थीं और सही समय पर इलाज न मिलने पर इंफेक्शन फैल चुका था। चौथे दिन जाने माने सर्जन एच.एस.भाटिया ने अमिताभ का केस देखा और तुरंत ऑपरेशन का सुझाव दिया। ऑपरेशन से पहले अमिताभ को 102 बुखार हो गया और उनकी हार्टबीट 72 की जगह 180 हो गई। ऑपरेशन हुआ तो देखा कि अंदर से आंतें फंट चुकी हैं। ऐसी कंडीशन में 3-4 घंटे जिंदा रहना भी मुश्किल था, लेकिन वो 4 दिनों से जूझ रहे थे। चौथे दिन बिग बी कोमा में चले गए। दो ऑपरेशन हुए और दो महीनों तक उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया। पहले ही अस्थमा, लिवर प्रॉब्लम और निमोनिया से जूझ रहे थे बिग बी हादसे से पहले ही अमिताभ बच्चन को लिवर की समस्या थी और साथ ही वो अस्थमैटिक भी थे। ऑपरेशन के अगले ही दिन उन्हें निमोनिया हुआ जिससे हालत और बिगड़ गई। बैंगलोर में इलाज के बाद उन्हें एयरबस से मुंबई लाया गया था। क्रेन से उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया था। 8 अगस्त को उनका दोबारा ऑपरेशन हुआ। अस्पताल के बाहर उनके चाहने वालों की चौबीसो घंटे भीड़ रहती थी। पूरे देश में कहीं पूजा करवाई जा रही थी तो कहीं यज्ञ। जया बच्चन खुद भी अमिताभ की सलामती के लिए सिद्धि विनायक गई थीं, लेकिन जब वो पहुंचीं तो देखा कि उनसे पहले ही कई लोग बिग बी के लिए वहां पूजा कर रहे थे। लोगों की दुआएं रंग लाईं। एक नजर अमिताभ बच्चन की जिंदगी पर-

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47 miniature vessels found in pre-Hispanic shaft burial

A tomb containing the remains of eight individuals and offerings of 47 miniature pottery vessels has been discovered at the Ignacio Zaragoza archaeological site in Tula de Allende, Hidalgo, Mexico. The tomb is between 1,800 and 1,900 years old, and is part of a residential complex within the sphere of its economic and cultural dominance. It was about 55 miles from Teotihuacan and was occupied between 225 and 600 A.D., the apex of Teotihuacan’s power.

Archaeologists from Mexico’s National Institute of Anthropology and History (INAH) made the discovery in a salvage excavation along the route of the Mexico City-Queretaro Passenger Train. After finding scattered fragments of pottery on the surface, the team dug test pits that uncovered wall foundations. Further excavation and coupled with drone photography determined the settlement consisted of small residential structures with rooms oriented north-south and east-west, connected by central and side patios.

Inside and around the residential spaces, archaeologists found more than a dozen individual and collective burials containing complete and incomplete skeletons. Most were the long bones from the legs of adults, with a few children and adolescents. Some burials were cists on the surface, others cut into the tepetate (compressed volcanic soil). Five of the tombs were shaft burials — vertical shafts leading to small burial chambers.

Two of the shaft burials were in a single room. The one on the north side of the room had two chambers, the one of the south had one. It was inside the northern tomb that INAH archaeologists found the remains of eight people. Six of them had been arranged in a seated position with ceramic vessels at their feet.

The offering of 47 miniature vessels is especially important. Miniature ceramics in Mesoamerican funerary settings often point to ritual practice rather than daily use. Their placement near the bodies suggests that the tomb was not a simple burial space, but a carefully maintained mortuary context tied to memory, identity and household ritual.

One individual was also buried with shell ornaments, including part of a small semicircular mother-of-pearl pendant and a small plate made from the same material. In another tomb, archaeologists found engraved vessels, which were removed with surrounding soil so they could be studied through micro-excavation.



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रातोंरात स्टार बने जालंधर के सिंगर मस्कीन की कहानी:एक साल पुरानी रील से ऑफर मिला; 1.80 करोड़ देख चुके 'बुल्लेया वे' सॉन्ग

जालंधर के रहने वाले अशोक मस्कीन की जिंदगी एक रील से बदल गई। इसी रील से उन्हें ऐसा ऑफर मिला कि फैक्ट्री में खराद का काम करने वाले मस्कीन कोक स्टूडियो में गाए ‘बुल्लेया वे और लगदा नीं दिल मर जाणा…’ गाकर रातों-रात स्टार बन गए। उनका गाया सॉन्ग 1.8 करोड़ लोग देख चुके हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई तक उन्हें बॉलीवुड मूवीज में गाने के साथ लाइव शोज के ऑफर तक आ रहे हैं। हालांकि अशोक की जिंदगी पहले बहुत संघर्ष से भरी रही। 15 किमी पैदल चलकर अशोक ने मशहूर पंजाबी सिंगर साबर कोटी से गायकी सीखी। हालांकि गरीबी के चलते उनकी गायकी का शौक दिहाड़ी में ही दब गया था। 50 साल की उम्र में वह फेमस हुए तो फैक्ट्री का काम छोड़ दिया और पूरा ध्यान अब सिंगिंग पर है। किस्मत बदलने पर अब पत्नी-बेटी को भी गर्व और खुशी है। दैनिक भास्कर ने जिंदगी के संघर्ष और अचानक मिली शोहरत के बारे में अशोक मस्कीन से बात की, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… अशोक मस्कीन के संगीत के सफर की कहानी जानिए… जानें एक रील से कैसे बदली मस्कीन की किस्मत बेटे के ऑपरेशन का खर्च तक मुंबई के संगीतकार ने उठाया मस्कीन ने बताया कि मुंबई के कालाकार बहुत मददगार हैं। मेरी बेटी के नाक की हड्‌डी में प्रॉब्लम थी, जन्म से उसका होठ भी फटा था। इसका ऑपरेशन करवाना था। बेटी को दाखिल कराया तो डॉक्टरों ने मोटा बिल बना दिया। समझ नहीं आ रहा था क्या करुं। इस पर मैंने मुंबई के संगीतकार तनिष को डरते हुए फोन किया और कहा कि बेटी का ऑपरेशन करवाया है और पैसे कम पड़ गए हैं। उन्होंने मेरी बात सुन एक मिनट भी नहीं लगाया और कहा कि टोटल खर्च बताओ कितना हुआ है और सारा पैसा खुद दे दिया। 2 कमरों के घर में रहते अशोक मकसूदां चौक के पास महाशा कॉलोनी में रहने वाली 50 वर्षीय अशोक मस्कीन के घर में 2 कमरे हैं। जिस गली में वह रहते हैं, वह संगीतकारों की गली है। गली में 70 घर हैं और हर कोई संगीत से जुड़ा है। एक सिरे से बंद गली में रहने वाले वाले मस्कीन की किस्मत को कोक स्टूडियो ने खोल दिया। बॉलीवुड और लाइव शोज के ऑफर्स मिल रहे अपने छोटे से मकान में पत्नी मोनिका और बेटी के साथ बैठे अशोक ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि संगीत इंडस्ट्री के कई लोगों ने मुझसे संपर्क किया है। मुझे एक हिंदी फिल्म में गाने का ऑफर मिला है और मेरे लाइव शोज की बुकिंग भी शुरू हो गई है। अभी जालंधर की एक कंपनी से दिल्ली की एक सिंगर के साथ ड्यूट गीत का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ है। बॉलीवुड फिल्म के लिए प्लेबैक किया है और 2 गीत एडवांस रिकॉर्ड हैं।

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नवाजुद्दीन सिद्दीकी@52:वॉचमैन बने तो मालिक ने कहा- इस मरे हुए को किसने रखा, दोस्त की गुमशुदगी से मिली सरफरोश, सीन कटे तो थिएटर में रोए

उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना में जन्में नवाजुद्दीन सिद्दीकी जब 17 साल के हुए तो उनके गांव के एक घर में टीवी आया। एक दिन नवाज की नजर पड़ोस में रहनेवाली लड़की पर पड़ी। पहली नजर में ही उन्हें उस लड़की से प्यार हो गया। वो लड़की रोज टीवी देखने उस घर एक घर में जाती, तो पीछे-पीछे नवाज भी वहीं जाने लगे। दोनों घंटों उस घर में बैठते और कई बार नजरें टकरातीं। एक दिन नवाजुद्दीन ने हिम्मत कर लड़की का हाथ पकड़ लिया और कहा- ‘टीवी मत देखो, मुझे देखो।’ लड़की ने जवाब दिया- 'मैं तो टीवी ही देखूंगी।' इस पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने तैश में कहा- ‘देखना, एक दिन मैं भी टीवी पर आऊंगा।’ नवाज को गुस्सा करते देख, लड़की उनका हाथ झटक कर वहां से चली गई। उसने भी एक पल के लिए जरूर सोचा होगा कि एक छोटे से गांव का सांवला, आम सी शक्ल का दुबला-पतला ये लड़का हीरो बनेगा? कुछ साल बाद नवाजुद्दीन ने अपनी कही बात सच कर दिखाई। ये मुमकिन हो सका उनकी लगन, संघर्ष और काबिलियत से, जिसे नवाजुद्दीन ने साल-दर-साल निखारा। इस सफर में नवाजुद्दीन कभी वॉचमैन बने, तो कभी 100 रुपए का नुकसान होने से 19 किलोमीटर पैदल चले। कभी तीन वक्त चाय-बिस्कुल में गुजारा किया, तो कभी स्टूडियो से बेइज्जती कर निकाले गए। कभी टीवी पर वेटर बने, चोर बने, तो कभी गुंडे, लेकिन फिर हुनर की बदौलत उनकी गिनती बॉलीवुड के सबसे मंझे हुए एक्टर्स में की जाने लगी। उनके कहे गए डायलॉग- ‘बाप का, दादा का, भाई का सबका बदला लेगा तेरा फैजल….’, ‘आखिर चाहिए क्या औरत को….’, ‘मैं 15 मिनट तक अपनी सांस रोक सकता हूं, मौत को छू के टक से वापस आ सकता हूं…’, आज भी चाहनेवालों की जुबां पर रटे रहते हैं। वजह है उनका हुनर, कहने का सलीका और दमदार अभिनय। आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी 52 साल के हो चुके हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े मजेदार किस्से, जो उनकी शख्सियत को करीब से समझने का मौका देते हैं- किस्सा- 1 चीफ केमिस्ट की नौकरी छोड़ी, फिर वॉचमैन बनने के लिए मां के गहने रखे गिरवी 19 मई 1974 नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्म उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) में जमींदार के घर हुआ। प्री-मैच्योर नवाज 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। घरवाले खेती-किसानी करते थे, लेकिन नवाजुद्दीन को पढ़ाई में दिलचस्पी थी। 10 की उम्र में पिता ने अखाड़े भेजा, लेकिन बार-बार पिटाई होने पर उन्होंने इसे जारी रखने से इनकार कर दिया। शुरुआती पढ़ाई गांव से हुई और फिर पिता ने उनकी रुचि की कद्र करते हुए केमिट्री में ग्रेजुएन करने के लिए उनका दाखिला हरिद्वार के कांगड़ी विश्वविद्यालय में करवा दिया। पढ़ाई के बाद उनकी वडोदरा की केमिकल फेक्ट्री में चीफ केमिस्ट की नौकरी लग गई। नवाज अपने परिवार के इकलौते थे, जिन्होंने ग्रेजुशन किया था। एक महीने में ही नवाज इस काम से ऊब गए और नई नौकरी की तलाश में दिल्ली निकल पड़े। एक दिन मंडी हाउस में दोस्त का प्ले देखने गए नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने खुद भी एक्टिंग करने का फैसला कर लिया। उन्हें महसूस हुआ कि यही वो काम है, जिसे कर वो कभी बोर नहीं हो सकते। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लेने के लिए एक प्ले ग्रुप जॉइन कर लिया। दरअसल, दाखिले के लिए स्टूडेंट के लिए 10 प्ले करना अनिवार्य होता था। प्ले के दिनों में गुजारा करना मुश्किल होने लगा। एक दिन नई दिल्ली रेल्वे स्टेशन के बाहर बने सुलभ में पेशाब करते हुए नवाजुद्दीन सिद्दीकी की नजर सामने चिपके पैंप्लेट पर पड़ी। लिखा था, 500 सिक्योरिटी गार्ड, 300 वॉचमैन चाहिए। उस कंपनी के शाहदरा ऑफिस पहुंचे, तो कहा गया, नौकरी मिल जाएगी, लेकिन 5 हजार सिक्योरिटी डिपॉजिट देने होंगे। नवाजुद्दीन ने हामी भर दी। वो गांव गए, मां के सोने के गहने गिरवी रखकर पैसे लिए, जिसके डिपॉजिट से उन्हें नोएडा की एक खिलौने बनाने वाली कंपनी में वॉचमैन की नौकरी मिल गई। किस्सा- 2 धूप में बेहोश हुए, तो मालिक ने कहा- इस मरे हुए इंसान को किसने काम दिया नवाजुद्दीन सिद्दीकी सुबह 9 बजे से 5 बजे तक वॉचमैन की नौकरी करते और शाम को सीधे मंडी हाउस पहुंचकर प्ले करते थे। डेढ़ सालों तक ये सिलसिला जारी रहा। वो जिस टॉय कंपनी में काम करते थे,वहां उन्हें कड़ी धूप में 8 घंटे खड़ा रहना पड़ता था, छांव के लिए कोई जगह ही नहीं थी, ऊपर से नवाज एकदम दुबले-पतले थे। कुछ देर में ही धूप और थकान के मारे वो गेट के कोने में बैठ जाते थे। बदकिस्मती से जैसे ही वो बैठते, वैसे ही उनके मालिक आ जाते। 5-6 बार यही हुआ। एक दिन वो धूप में खड़े-खड़े बेहोश हो गए। तभी वहां मालिक पहुंच गए। अगले दिन उन्होंने चिल्लाते हुए कहा- ‘ये मरे हुए आदमी को किसने काम पर रखा। कौन लेकर आया है, हटाओ इसे।’ नवाजुद्दीन ने जब डिपॉजिट वापस मांगा, तो जवाब मिला- ‘गिरे तुम, गलती तुम्हारी, तो हम पैसे नहीं देंगे।’ और इस तरह नवाज के 5000 डूब गए। संघर्ष के दिनों में वो ईस्ट दिल्ली के शकरपुर में किराए के कमरे में रहते थे। तब स्ट्रगल कर रहे एक्टर-कॉमेडियन विजय राज उनके रूम मेट थे। कमरे का किराया 150 रुपए था, तो दोनो 75-75 रुपए देते थे। दोनों तीन वक्त चाय-बिस्कुट खाकर गुजारा करते। कुछ समय बाद उन्हें प्लेज की बदौलत नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला मिल गया। वहां रहने और खाने की भी व्यवस्था दी गई। नवाजुद्दीन के प्ले के दिनों की तस्वीरें- किस्सा- 3 100 के 200 करने के लिए चौराहे में धनिया बेची NSD से पढ़ाई पूरी कर नवाजुद्दीन 1999 में बॉम्बे आ गए। एक दिन एक दोस्त ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी से कहा, ‘100 रुपए के 200 करने हैं।’ नवाजुद्दीन ने झट से कहा- ‘हां करना है, लेकिन कैसे।’ जवाब मिला- 'धनिया बेचेंगे। चल साथ में।' नवाज दोस्त के साथ लोकल ट्रेन से गोरेगांव से दादर गए। सब्जी मंडी से 400 की थोक में धनिया खरीदी और गड्डियां बनाकर चौराहे में खड़े हो गए। नवाज तो चुप खड़े थे, लेकिन दोस्त जोर-जोर से चिल्ला रहा था- ‘धनिया, 10 की एक गड्डी।’ कोई ग्राहक नहीं आया और एक घंटे में धनिया काली पड़ गई। दोनों सब्जीवाले के पास गए और कहा, ये बिके भी नहीं काले अलग पड़ गए। दुकानवाले ने कहा- ‘अरे इसे हर मिनट पानी देना पड़ता है।’ इस बार नवाज ने गुस्से में कहा- ‘तो ये बात पहले बतानी थी।’ पैसे डबल करने के बदले और कम हो गए। पैसे नहीं थे तो दोनों बिना टिकट दादर से गोरेगांव आए। किस्सा- 4 विजय राज के साथ खाई वजन बढ़ाने की दवा, बिगड़ी बॉडी स्ट्रगल के दिनों में एक्टर विजय राज और नवाजुद्दीन रूम मेट्स थे। कमरे का किराया 150 रुपए था, तो दोनों 75-75 देते थे। दोनों ही दुबले-पतले थे। एक दिन वजन बढ़ाने के लिए परेशान नवाजुद्दीन को देख विजय राज ने कहा- ‘तू एक काम कर, मैं तुझे दवा लिखकर देता हूं, तू वो खा।’ अपनी दवाइयां लिखकर दे दीं। वो भी वजन बढ़ाने के लिए वही दवा लेते थे। एक बार उनका वजन काफी बढ़ गया, लेकिन दवा छोड़ने पर वो फिर पतले हो गए। नवाजुद्दीन ने भी वही दवाइयां लीं। तब उनका वजन 50-51 किलो ही था। एक गोली खाते ही ऐसी भूख लगती थी कि वो घंटों तक खाते रहते थे। दवा लेते ही 15 दिनों में वो 65-67 किलो के हो गए। शरीर ऐसा बिगड़ा कि उन्हें दवा छोड़नी पड़ी और कुछ ही दिनों में वजन फिर घट गया। किस्सा- 5 पैसे बचाने के लिए सब्जीवाले के सामने अंधे बनने की करते रहे एक्टिंग नवाजुद्दीन सिद्दीकी स्ट्रगल के दिनों में पैसे बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते थे। वो जहां किराए पर रहते थे, वहां पास में एक सब्जीवाला था। वो रोज, अंधे की एक्टिंग करते हुए सब्जी खरीदने जाते। दया करते हुए सब्जीवाला कम पैसे लेता। ऐसा नवाज ने पूरे 2 सालों तक किया। किस्सा- 6 प्ले में मनोज तिवारी बनते थे भालू, घंटों पेड़ बनकर खड़े रहते थे नवाज थिएटर के दिनों में मनोज तिवारी काफी फेमस हुआ करते थे। उन्हें फिल्म बैंडिट क्वीन मिली थी। तभी नवाजुद्दीन सिद्दीकी और विजय राज को उनके साथ एक प्ले मिला। मनोज उसमें भालू बने थे और नवाजुद्दीन सिद्दीकी को रोल मिला पेड़ का। भालू बने मनोज जानबूझकर, पेड़ के पास आकर बॉडी को रगड़ते और खुजली की एक्टिंग करते थे। प्ले के चक्कर में नवाजुद्दीन सिद्दीकी को घंटों पेड़ बनकर खड़े रहना पड़ता था। किस्सा- 7 दोस्त गायब हुआ तो संयोग से मिला फिल्म सरफरोश में पहला रोल नवाजुद्दीन सिद्दीकी मुंबई में जिस जगह रहते थे, वहां उनकी तरह स्ट्रगल कर रहे कई लोग रहते थे। उनके पास के कमरे में एक लड़का था, जिसका नाम था, निर्मल दास। नवाजुद्दीन उसके अच्छे दोस्त थे। निर्मल दास की उस समय फिल्म सरफरोश में टेररिस्ट का रोल निभाने के लिए बात चल रही थी, लेकिन जिस दिन कास्टिंग वाले उन्हें ढूंढते हुए आए, वो अपने कमरे में ही नहीं थे। नवाजुद्दीन सिद्दीकी वहीं पास में टहल रहे थे। निर्मल दास नहीं मिला तो, कास्टिंग वालों ने नवाजुद्दीन को रोककर पूछा कि क्या आप एक फिल्म के लिए ऑडिशन देंगे। नवाजुद्दीन, जो इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वो इनकार कैसे करते। झट से हां कहा और फिर डायरेक्टर जॉन मैथ्यू के घर उनका ऑडिशन लिया गया और उनका सिलेक्शन हो गया। फिल्म में उन्होंने 1 मिनट से भी कम समय का रोल किया, जिन्हें आमिर खान कस्टडी में लेते हैं। तब तो हर किसी ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया, किसी को उनका नाम तक नहीं पता था। लेकिन आज फिल्म देखकर हर कोई वो सीन देख कहता जरूर है- देखो वो नवाजुद्दीन है। जिस निर्मल दास की अचानक गुमशुदगी से नवाजुद्दीन सिद्दीकी को सरफरोश में काम मिला। वो सालों तक गायब रहा। किसी ने उसे नहीं देखा। फिर सालों बाद पता चला कि वो पागल हो चुका है। इसी तरह नवाजुद्दीन ने 2000 में आई फिल्म जंगल में भी काम किया था, लेकिन उनके लगभग सभी सीन काट दिए गए। उन्हें फिल्म की फीस नहीं मिली थी, तो वो रोज सेट पर खाना खाकर फीस वसूलते थे। नवाजुद्दीन सिद्दीकी के चुनिंदा रोल देखिए- किस्सा- 8 दोस्तों के अपनी फिल्म दिखाने पहुंचे, सीन कटे, तो वहीं खड़े रो पड़े मुंबई में लंबी जद्दोजहद करते हुए नवाजुद्दीन सिद्दीकी को आमिर खान की फिल्म सरफरोश में टेररिस्ट का एक छोटा सा रोल मिल गया। उन्होंने सोच लिया कि छोटे-छोटे रोल ही मिल जाएं, तो उनके रहने-खाने का खर्च निकलता रहेगा। थोड़े ही पैसे मिले। इसके बाद उन्हें कमल हासन की फिल्म हे राम में एक अच्छा रोल मिला। फिल्म की स्क्रीनिंग रखी गई, तो नवाजुद्दीन अपने 5 दोस्तों को साथ ले गए। उनके लिए बड़ा रोल मिलना बड़ी बात थी। नवाज पहुंचे, तो डायरेक्टर-प्रोड्यूसर कमल हासन उनके पास आए और कहा- ‘नवाज, अपने दोस्तों को बोल दो कि तुम्हारा रोल कट गया है।’ नवाज घबरा गए और कहा- ‘सर, क्या बात कर रहे हो, मैं अपने दोस्तों को लेकर आया हूं। क्या कुछ हो नहीं सकता। आप एक काम करो, यहां बैठे लोगों को मेरे सीन दिखा दो, बाद में भले ही फिल्म से निकाल देना। प्लीज सर मेरी बहुत बेइज्जती हो जाएगी।’ कमल हासन ने कहा- ‘नहीं ऐसा नहीं हो सकता, फिल्म कल ही रिलीज हो रही है। हम ऐसा नहीं कर सकते, लेकिन तुम दोस्तों से ईमानदारी से बोल दो।’ नवाज जैसे ही दोस्तों के पास पहुंचे, सभी एक्साइटेड होकर पूछने लगे, ‘अरे तुम्हारी डायरेक्टर से क्या बात हुई।’ ये सुनते ही नवाज रो पड़े। उन्होंने रोते हुए दोस्तों से कहा- ‘मेरा रोल कट चुका है। तुम लोग डिसाइड करो, अब फिल्म देखनी है या नहीं।’ सबने तय किया कि आ गए हैं, तो फिल्म देख ही लेते हैं। किस्सा- 9 किराया नहीं था, तो सीनियर ने कुक बनाकर दी घर में जगह छोटे-मोटे रोल से नवाजुद्दीन का गुजारा मुश्किल होने लगा। 2002 में एक समय ऐसा आया, जब उनके पास किराए के पैसे भी नहीं थे। नवाजुद्दीन ने जब एनएसडी के सीनियर्स से रहने के लिए जगह मांगी, तो उन्होंने शर्त रखी की मुफ्त में कमरे में रहने की इजाजत तो दे देंगे, लेकिन इसके बदले तुम्हें सबके लिए खाना बनाना होगा। नवाजुद्दीन मान गए और घर का काम कर वहीं रहते रहे। किस्सा-10 फिल्म में की दोस्त की नकल, फिल दोस्त को ही नहीं मिला काम संघर्ष के दिनों में नवाजुद्दीन सिद्दीकी का एक घनश्याम नाम को दोस्त हुआ करता था। घनध्याम तोतला था और उसकी बॉडी लैंग्वेज भी काफी अलग थी। जब छोटे-मोटे किरदारों के बाद नवाजुद्दीन को लंच बॉक्स में काम मिला, तो उन्होंने घनश्याम की तरह ही उसे निभाया। जब लंच बॉक्स रिलीज हुई, तो नवाजुद्दीन अलग फ्लैट में शिफ्ट हो चुके थे। फिल्म देखने के बाद दोस्त ने मैसेज कर कहा- ‘मैंने लंच बॉक्स देखी थैंक्यू।’ कुछ समय बाद ऐसा हुआ कि जब भी घनश्याम ऑडिशन देने जाते, तो उन्हें ये कहते हुए इनकार किया जाता कि ये रोल तो नवाजुद्दीन करके जा चुके हैं। और वो दोस्त रिजेक्शन के बाद खिजियाकर कहते, ‘नहीं, मैं ऑरिजिनल हूं, वो मेरी कॉपी करता है।’ लेकिन उनकी बात कोई नहीं मानता था और भगा देता था। एक नजर नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर पर- ……………………………………………………………………………………. फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें- विजय का लेडी लक, जिसके बर्थडे पर चुनाव जीते: तमिलनाडु का रिजल्ट आते ही विजय के घर पहुंचीं तृषा, एक्टर का हो चुका तलाक तमिलनाडु चुनाव में थलापति विजय की पार्टी TVK की जीत में उनकी 'लेडी लक' तृषा कृष्णन को अहम माना जा रहा है। 4 मई को 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन था, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं। 51 साल के विजय आज तमिल फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हैं तो तृषा कृष्णन क्वीन ऑफ साउथ इंडिया कही जाती हैं। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं। पूरी खबर पढ़िए… पुण्यतिथि: ऋषि कपूर को सलमान के पिता ने धमकाया:राज कपूर ने सिगरेट पीने पर पीटा, दाऊद के साथ चाय पी, कभी अमिताभ का अवॉर्ड खरीदा 30 अप्रैल 2020, 6 साल पहले सुबह खबर आई कि ऋषि कपूर अब नहीं रहे। कुछ दिन पहले तक वो गंभीर हालत होने के बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ को हंसाते तो कभी गाना सुना रहे थे। दैनिक भास्कर से बात करते हुए ऋषि कपूर की इकलौती बेटी रिद्धिमा कहती हैं, ‘सब अचानक हुआ, वो बहुत डरावना दिन था। अचानक एक खालीपन आ गया। एक सूनापन, उनकी जिंदगी उनकी मौजूदगी लार्जर देन लाइफ थी।’ पूरी स्टोरी पढ़ें… ………………………………………………. विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। पूरी खबर पढ़ें…

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Self-sufficient Iron Age settlement found in Saxony

An excavation at a gravel extraction site in Belgern-Schildau, Saxony, Germany, has uncovered a settlement from the late Roman/early Migration Period. Inside the dwellings, archaeologists found evidence they were used as homes, stables and for textile production from the 3rd to 5th centuries A.D.

The State Office for Archaeology of Saxony (LfA) surveyed the site before the expansion of the open-pit gravel mine. The area is known to have been settled for millennia, and any archaeological remains would inevitably be destroyed in the extraction of gravel.

Among the numerous finds, such as pits and postholes—structures in the ground created by human intervention—at least four multi-aisled longhouses built using post-and-beam construction and three pit houses can be identified. While the longhouses, up to 20 meters long and five meters wide, were used as dwellings and stables, the small pit houses, dug into the ground and with a floor area of ​​between seven and twelve square meters, served as farm buildings and storage facilities.

One pit house yielded clear evidence of textile production. Thirty flat, round clay loom weights indicate that fabrics were produced here using a loom. The loom weights tensioned the warp threads, which hung vertically on the loom, through which the weft threads were then threaded. During the Roman Imperial period, woven textiles made primarily from sheep’s wool were produced. A clay spindle whorl was also found, which could be used to spin raw wool into thread on a weighted spindle.

Among the finds, mostly fragments of everyday pottery, a large, dark, opaque glass bead decorated with light-colored wave bands stands out. These beads are usually found as ornamental items in women’s graves. The shape and decoration of beads of this type are very durable. They are most commonly found in the 4th and 5th centuries AD. Since this large bead was found in a settlement pit, its use as a spindle whorl, for example, cannot be ruled out.

Burned clay and grain indicate the dwelling walls were coated with coat and grain stored in the structures. A fire must have struck to burn the walls and grain. The settlement may have been abandoned in the wake of the fire. Archaeologists will now focus on analyzing the recovered remains, including radiocarbon dating the plant matter and charcoal.



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PBKS के लिए प्रीति जिंटा गोल्डन टेंपल में नतमस्तक:लंगर हॉल में सेवा की; बोलीं- पंजाब का भरपूर प्यार मिला, प्लेऑफ में जरूर पहुंचेंगे

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा शनिवार रात अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में माथा टेकने पहुंचीं। उन्होंने गुरु घर में नतमस्तक होकर अरदास की। इस दौरान प्रीति जिंटा की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में भी काफी उत्साह देखा गया। कई लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के बाद प्रीति जिंटा ने लंगर हॉल में सेवा की। उन्होंने संगत को लंगर वितरित किया। मीडिया से बात करते हुए प्रीति जिंटा ने कहा- बाबा जी का बुलावा आया था, उन्होंने बुलाया था तो हम आ गए। उन्होंने बताया कि 11 मई को उनकी पंजाब किंग्स क्रिकेट टीम का महत्वपूर्ण मुकाबला है और वह टीम की जीत के लिए अरदास करने पहुंची हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वाहेगुरु जी की कृपा से उनकी टीम शानदार प्रदर्शन करेगी और सभी मैच जीतने का प्रयास करेगी और प्लेऑफ में पहुंचेगी। इस दौरान उन्होंने टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब के लोग उन्हें प्यार से सरपंच बुलाते हैं, जो टीम के लिए गर्व की बात है। प्रीति जिंटा ने पंजाब के युवाओं और क्रिकेट प्रेमियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि टीम को लोगों से भरपूर प्यार और समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यही प्यार खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाता है और टीम की सबसे बड़ी ताकत है। प्रीति की टीम का टूर्नामेंट में अब तक प्रदर्शन इन समीकरणों से प्लेऑफ में बना सकती है जगह हालांकि, अब भी टीम प्लेऑफ की रेस में बनी हुई है। आईपीएल 2026 के ताजा समीकरणों के अनुसार, पंजाब किंग्स (PBKS) की स्थिति काफी मजबूत है। फिर भी टीम को प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की करने के लिए आगे भी बढ़िया प्रदर्शन करना होगा। पंजाब टीम यदि बाकी बचे अपने सभी 4 मुकाबले जीतती है तो वह पॉइंट टेबल में टॉप भी कर सकती है। इससे उसे क्लालीफायर खेलकर फाइनल में पहुंचने के 2 अवसर मिलेंगे। जबकि, यदि टीम कम से कम 2 मैच और जीत ले तो 17 अंकों के साथ भी टॉप-4 में निश्चित रूप से अपनी जगह पक्की कर लेगी। टीम अगले 4 मैचों में से केवल 1 मैच जीतकर भी 15 अंकों के साथ प्लेऑफ में प्रवेश कर सकती है, लेकिन तब टीम को नेट रन रेट (NRR) और दूसरी टीमों (जैसे RCB, RR, GT) के मैचों के नतीजों पर डिपेंड रहने पड़ेगा।

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