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ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

Monday, 26 October 2026

Final James Bond screen tests to take place this weekend, reports say

Callum Turner and Jack Lowden "appear to be in the mix" of actors doing screen tests for the role.

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Final James Bond screen tests to take place this weekend, reports say

Callum Turner and Jack Lowden "appear to be in the mix" of actors doing screen tests for the role.

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रवीना@54, लव लाइफ के किस्से:ऋषि कपूर थे क्रश, जो लड़का पसंद था, उसने चोटी खींचकर मोटी कहा, अक्षय ने सगाई तोड़ी, अजय ने पागल कहा

‘टिप टिप बरसा पानी…’, ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त…’ और ‘अंखियों से गोली मारे…’। 90 के दशक में इन गानों ने रवीना टंडन को लाखों दिलों की धड़कन बना दिया था। पर्दे पर उनकी अदाओं के दीवाने थे, उनकी खूबसूरती के चर्चे थे और उनकी एक झलक पाने के लिए फैंस घंटों इंतजार करते थे। लेकिन जिस रवीना पर एक दौर में पूरा जमाना फिदा था, उनकी अपनी मोहब्बत की कहानी इतनी आसान नहीं थी। बचपन में कभी जिस लड़के को पसंद किया, उसने चोटी खींचकर मोटा कह दिया। बचपन का क्रश ऋषि कपूर किसी और के हो गए, तो रवीना उनकी शादी में मुंह फुलाए घूमती रहीं। बड़े होकर अजय देवगन के साथ रिश्ते को लेकर ऐसी बयानबाजी हुई कि मामला सार्वजनिक विवाद बन गया। फिर अक्षय कुमार से सगाई हुई, शादी की तैयारियां भी शुरू हो गईं, लेकिन रिश्ता मंजिल तक नहीं पहुंचा। दिलचस्प बात यह है कि रवीना की जिंदगी में जब अनिल थडानी आए, तब भी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। वैलेंटाइन्स डे की एक पार्टी में पहली बार उन्हें देखकर दिलचस्पी जगी, लेकिन उस वक्त अनिल किसी और को डेट कर रहे थे। आखिरकार, तमाम उतार-चढ़ाव के बाद रवीना को वह साथी मिला, जिसके साथ उन्होंने जिंदगी बिताने का फैसला किया। आज उनके 54वें जन्मदिन के मौके पर पढ़िए उनकी जिंदगी के पांच ऐसे किस्से, जिनमें बचपन की मासूम मोहब्बत से लेकर टूटे रिश्तों और शादी तक का सफर दर्ज है। लव स्टोरी-1 ऋषि कपूर थे क्रश, शादी में नाराज घूमती रहीं, मनाने के लिए लाए गए तोहफे रवीना टंडन का जन्म 26 अक्टूबर 1972 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। उनके पिता रवि टंडन फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक थे। घर में फिल्मी हस्तियों का आना-जाना लगा रहता था। इसी माहौल में रवीना का बचपन बीता और इसी दौरान उन्हें एक ऐसे सितारे से लगाव हो गया, जो उनसे उम्र में करीब 20 साल बड़े थे। वह सितारा थे ऋषि कपूर। रवीना के पिता ने ऋषि कपूर और नीतू सिंह के साथ फिल्म ‘खेल खेल में’ बनाई थी। इसी फिल्मी मेलजोल के बीच रवीना को ऋषि कपूर एकतरफा पसंद आ गए। रवीना ने लहरें को दिए एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि ऋषि कपूर जब भी विदेश जाते, उनके लिए कोई न कोई गुड़िया लेकर आते थे। इन तोहफों ने उनके मन में ऋषि के लिए खास जगह बना दी थी। लेकिन फिर आया 1980, जब ऋषि कपूर ने नीतू सिंह से शादी कर ली। रवीना के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं थी। उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि ऋषि की शादी से वह इतनी नाराज थीं कि पूरी शादी के दौरान मुंह फुलाए घूमती रहीं। रवीना के मुताबिक, ऋषि कपूर की शादी में उनकी नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें लंदन से बोलने वाली गुड़िया लाकर दी गई थी। जिस सितारे को कभी वह अपना क्रश मानती थीं, बाद में उसी के साथ फिल्म ‘साजन की बाहों में’ में रोमांस करने का मौका भी मिला। रवीना के मुताबिक, तब ऋषि कपूर हंसते थे कि अब उन्हें ‘चिंटू अंकल’ की जगह ‘चिंटू जी’ कहना पड़ेगा। लव स्टोरी-2 14 साल की उम्र में भाई के दोस्त से हुआ प्यार, चोटी खींचकर बोला- ‘मोटी’ रवीना की जिंदगी में अगला किस्सा किसी फिल्मी सेट पर नहीं, बल्कि घर की चारदीवारी में शुरू हुआ था। वह महज 14 साल की थीं, जब उन्हें घर के पास रहने वाले अपने बड़े भाई राजीव के एक दोस्त से एकतरफा प्यार हो गया। वह लड़का उम्र में उनसे बड़ा था और कॉलेज जाता था। रवीना को उसकी एक झलक पाने का इंतजार रहता था। वह छत पर बैठकर उसके कॉलेज से लौटने का इंतजार करतीं और उस दौरान पंकज उधास के गाने सुना करती थीं। जब वह लड़का उनके भाई से मिलने घर आता, तो रवीना की नजरें उसी पर टिकी रहतीं। आखिरकार एक दिन उन्होंने उससे बात करने की हिम्मत जुटाई और भाई के कमरे में पहुंच गईं। लेकिन वहां उनका इंतजार किसी रोमांटिक जवाब ने नहीं, बल्कि एक ऐसे तंज ने किया, जिसे वह लंबे समय तक याद रखने वाली थीं। रवीना के कमरे में आते ही लड़के ने उनकी चोटी पकड़कर मजाक उड़ाया और कहा, ‘मोटी, कैसी हो?’ रवीना ने सिमी गरेवाल के चैट शो में यह किस्सा सुनाते हुए बताया था कि उस प्रतिक्रिया से उन्हें बहुत बुरा लगा। उन्होंने वजन कम करने की ठान ली। दो साल में रवीना ने खुद को बदल लिया। 16 साल की उम्र तक वह पहले से काफी फिट हो चुकी थीं। फिर एक दिन वही लड़का उनके पास आया और डेट पर चलने के लिए कहा। लेकिन अब कहानी का किरदार बदल चुका था। इस बार जवाब देने की बारी रवीना की थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वजन तो उन्होंने कम कर लिया, लेकिन वह अपनी हाइट का क्या करेगा? रवीना के मुताबिक, तब तक वह उस लड़के से करीब तीन इंच लंबी हो चुकी थीं। लव स्टोरी-3 अजय देवगन से जुड़ा रिश्ता बना विवाद, लव लेटर के आरोप पर अभिनेता ने कहा- ‘पागलों के डॉक्टर की जरूरत’ रवीना टंडन ने सलमान खान के साथ फिल्म पत्थर के फूल से 1991 में बॉलीवुड डेब्यू किया। आगे उन्होंने जीना मरना तेरे लिए, परम्परा जैसी कई फिल्में कीं। फिर साल 1994 की फिल्म दिलवाले में उन्हें अजय देवगन के साथ कास्ट किया गया। दरअसल, रवीना और अजय दोनों ही फिल्मी बैकग्राउंड से थे और एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। अजय रवीना के सीनियर थे और कॉलेज के दिनों में दोनों कार एक्सचेंज भी करते थे। फिर जब दोनों को फिल्म दिलवाले में साथ कास्ट किया गया, तो ये दोस्ती और पक्की हो गई। साथ काम करते हुए दोनों की नजदीकियों की चर्चाएं भी शुरू हो गईं। इसी बीच अजय देवगन फिल्म ‘जिगर’ में करिश्मा कपूर के साथ काम कर रहे थे। मीडिया में अजय और करिश्मा की नजदीकियों की खबरें भी आने लगीं। रवीना ने उस समय फिल्मफेयर मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि अजय ने उन्हें लव लेटर लिखे थे और करिश्मा के आने से अब वह उनसे दूरी बना रहे हैं। अजय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। इंटरव्यू में अजय ने रवीना के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्हें ‘पागलों के डॉक्टर’ की जरूरत है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि रवीना ने उनके नाम से खुद को ही पत्र लिखे थे। अजय ने उनके साथ प्रेम-संबंध होने की बात से इनकार किया था। रवीना ने भी अजय के रवैये पर नाराजगी जाहिर की थी। इस विवाद के दौरान अजय ने एक अन्य इंटरव्यू में चेतावनी दी थी कि अगर रवीना ने उन पर आरोप लगाने बंद नहीं किए, तो वह उनके कई राज खोल देंगे। कई मैगजीन में रवीना की मानसिक स्थिति और कथित आत्महत्या की कोशिश को लेकर भी दावे किए गए थे। तब अजय ने कहा था कि ये सिर्फ रवीना का पब्लिसिटी स्टंट है। लव स्टोरी-4 अक्षय कुमार ने शादी का प्रस्ताव रखा, फार्महाउस में हुई थी सगाई 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘मोहरा’ ने रवीना टंडन और अक्षय कुमार की जोड़ी को खूब लोकप्रियता दिलाई। साथ काम करते-करते दोनों करीब आए और उनके रिश्ते की खबरें फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय बन गईं। रवीना ने सिमी गरेवाल के चैट शो में बताया था कि एक दिन अक्षय ने उनसे डेट पर चलने के लिए कहा। रवीना ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह किसी अफेयर या डेटिंग के लिए तैयार नहीं हैं। इस पर अक्षय ने उनसे कहा था कि वह उन्हें सिर्फ डेट करने के लिए नहीं, बल्कि शादी के नजरिए से देखते हैं। रवीना के मुताबिक, अक्षय ने उनसे कहा था कि वह ऐसी लड़की हैं, जिससे वह शादी करना चाहेंगे। रवीना ने जब उनसे पूछा कि क्या वह समझते हैं कि क्या कह रहे हैं, तो अक्षय ने जवाब दिया कि वह उनके पिता से बात करेंगे। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई और शादी की तैयारियां शुरू हो गईं। रवीना शादी करके घर बसाना चाहती थीं। उन्होंने अपने करियर से ब्रेक लेने का फैसला भी किया। सिमी गरेवाल से बातचीत में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अपनी मर्जी से फिल्मों से दूरी बनाई थी, क्योंकि उन्हें लगा था कि शादी के बाद वह सामान्य पारिवारिक जिंदगी जीना चाहेंगी। 19 अप्रैल 1995 को दोनों की सगाई होने की खबरें सामने आईं। यह समारोह रवीना के फार्महाउस पर हुआ था। दोनों परिवार मौजूद थे, पंडित ने पूजा-पाठ कराया और रवीना के सिर पर लाल चुनरी रखी गई। समारोह इतना पारंपरिक था कि कई लोगों को लगा कि दोनों की शादी हो चुकी है। फिर रिश्ते में दरार आने लगी। उस समय अक्षय और शिल्पा शेट्टी के कथित रिश्ते को लेकर भी खबरें सामने आईं और रवीना की सगाई टूट गई। रिश्ता टूटने के बाद रवीना ने फिल्मों में वापसी की और ‘जिद्दी’, ‘दूल्हे राजा’ तथा ‘आंटी नंबर 1’ जैसी फिल्मों में काम किया। लव स्टोरी-5 पार्टी में अनिल थडानी को देखा, दो साल बाद शुरू हुई बातचीत, दो महीने में की सगाई रवीना टंडन की जिंदगी में आखिरकार वह शख्स आया, जिसके साथ उनकी कहानी शादी तक पहुंची। नाम था अनिल थडानी। वह फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर थे और फिल्म इंडस्ट्री से ही जुड़े थे। इस मुलाकात का किस्सा रवीना ने लहरें रेट्रो को दिए इंटरव्यू में सुनाया था। उन्होंने बताया कि साल 2001 में वह अपने कुछ सिंगल दोस्तों के साथ वैलेंटाइन्स डे मनाने निकली थीं। एक क्लब में उनकी नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जो अपने दोस्तों के साथ आया था। रवीना ने अपने पास बैठे फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा से पूछा कि वह कौन है। मनीष ने हैरानी से कहा कि वह उसे नहीं जानतीं, जबकि वे एक ही इंडस्ट्री से जुड़े हैं। तब रवीना को पता चला कि वह शख्स अनिल थडानी हैं और उन्होंने ही उनकी पहली फिल्म ‘पत्थर के फूल’ डिस्ट्रीब्यूट की थी। यानी जिस शख्स पर उस रात उनकी नजर ठहरी, वह उनके करियर की शुरुआत से ही किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ था। हालांकि, उस मुलाकात के दौरान दोनों के बीच कोई रिश्ता शुरू नहीं हुआ। रवीना को यह भी पता चला कि अनिल पहले तलाक ले चुके थे और उस समय लंदन की एक लड़की को डेट कर रहे थे। कहानी में अगला मोड़ करीब दो साल बाद आया। रवीना अपनी फिल्म ‘स्टंप्ड’ प्रोड्यूस कर रही थीं और अनिल उसके डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े थे। रवीना के मुताबिक, 4 अगस्त 2003 को दोनों की मुलाकात हुई और इसी दौरान उनकी बातचीत आगे बढ़ी। इसके बाद चीजें तेजी से बदलीं। रवीना ने बताया था कि दोनों ने करीब दो महीने डेटिंग करने के बाद सगाई कर ली। नवंबर 2003 में उनकी सगाई हुई और 22 फरवरी 2004 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए। लेकिन रवीना की जिंदगी में शादी सिर्फ दो लोगों का साथ आना नहीं थी। वह पहले ही छाया और पूजा नाम की दो बेटियों को गोद ले चुकी थीं। ऐसे में अनिल के साथ रिश्ता आगे बढ़ाते हुए उनके लिए यह जरूरी था कि वह उनकी बेटियों को भी अपने परिवार का हिस्सा मानें। रवीना ने अनिल के सामने अपनी बेटियों और अपने परिवार को स्वीकार करने की बात रखी। अनिल ने इस रिश्ते को अपनाया और समय के साथ बेटियों के जीवन में पिता जैसी भूमिका निभाई। शादी के बाद रवीना और अनिल के दो बच्चे हुए, बेटी राशा और बेटा रणबीरवर्धन।

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Sunday, 25 October 2026

1,500-year-old female shaman figure found in Japan

An excavation of a late 5th century burial mound in central Japan has uncovered a clay figurine representing a female shaman (miko). The figurative clay sculpture, a haniwa, is well-preserved, with its features still finely detailed and extensive surviving red paint.

Excavations at the Nishikaminomiya Site began in 2020 as part of a Tone River improvement project. Since then 11 burial mounds from the Kofun period have been discovered. The largest mound is Tumulus No. 1 at approximately 160 feet long. It is surrounded by a moat is 60 feet wide. The haniwa was discovered in this year’s excavation of the southern end of Tumulus No. 1 adjacent to the Tone River. It had rolled down a protruding section of the mound into the moat.

Haniwa were made of unglazed earthenware and placed on grave mounds as protective markers. The figural haniwa were typically sculpted on top of a simple cylinder that had been the earliest form of the statue in the 3rd century. The cylinder was buried leaving the figure above ground to mark the burial sites.

The newly-discovered example is only a torso and head (the buried base has broken off) and is about 16 inches high. It depicts a woman wearing a sash with her hair styled in the Kofun Shimada (topknot) identifying her as a shaman. The top of the head is made of clay cord, conveying with its texture the tied hair. The face, sash lower section of the garment and bracelet on her right wrist are painted red. She holds a rod-shaped object in her left hand that was used in religious rituals. Made in the second half of the 5th century, it is one the earliest anthropomorphic haniwa to have been found in the Gunwa Prefecture.

Miko were popular subjects for haniwa. In the Kofun period, miko performed religious rituals at Shinto shrines and temples, falling into ecstatic trances to relay the words of the gods to worshipers. Historians believe miko held significant religious and political authority in Kofun society, and their visibility on the tombs of the elite confirms they figures of importance and authority.

Excavation is now complete. The haniwa will go on display next week at the Gunma Prefectural Museum of History.



* This article was originally published here

The rise of new black spaces in music

Young black creatives are continuing a tradition of carving out spaces to dance, connect and belong.

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अमिताभ बच्चन ने यहीं देखी पहली फिल्म:लता मंगेशकर का पहला मंचीय प्रदर्शन; रॉयल ओपेरा हाउस के दोबारा खुलने के 10 साल पूरे

अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर और पृथ्वीराज कपूर जैसे दिग्गजों की यादों से जुड़ा मुंबई का ऐतिहासिक रॉयल ओपेरा हाउस एक बार फिर चर्चा में है। 23 अक्टूबर को दोबारा खुलने के 10 साल पूरे होने पर यहां विशेष संगीत और इमर्सिव प्रोजेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर गोंडल के महाराजा हिमांशु सिंह और ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने इसकी विरासत, पुनरुद्धार और सांस्कृतिक सफर के बारे में बताया। बदहाली के कारण बंद पड़ा यह थिएटर अब मुंबई में कला और संगीत का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 1908 में बनी योजना, 1911 में हुआ उद्घाटन रॉयल ओपेरा हाउस की कहानी 1908 में शुरू हुई। मनोरंजन जगत से जुड़े मौरिस बैंडमैन और पारसी कारोबारी जहांगीर फ्रामजी कराका ने मुंबई में भव्य ओपेरा हाउस बनाने की योजना बनाई। इसकी आधारशिला 1909 में रखी गई। ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम ने 1911 में भारत यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन किया। इमारत का निर्माण 1916 में पूरा हुआ। यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य शैली के मेल से बनी यह इमारत मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गई। पृथ्वीराज कपूर करते थे नाटक, ऋषि कपूर ने सुनाई बचपन की याद ओपेरा हाउस का रिश्ता भारतीय सिनेमा और रंगमंच के कई दिग्गजों से रहा है। पृथ्वीराज कपूर यहां नाटक प्रस्तुत करते थे। लता मंगेशकर ने यहां पहला सार्वजनिक मंचीय प्रदर्शन किया था। अमिताभ बच्चन ने 2016 में दोबारा उद्घाटन के दौरान बताया था कि मुंबई आने के बाद उन्होंने पहली बार फिल्म यहीं देखी थी। उनकी कई फिल्में यहां लंबे समय तक चली थीं। फिल्म ‘102 नॉट आउट’ के मीडिया आयोजन में ऋषि कपूर ने बताया था कि बाल कलाकार के रूप में उनका पहला मंचीय प्रदर्शन इसी ओपेरा हाउस में हुआ था। यह इमारत भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास की गवाह भी है। 1952 में गोंडल राजपरिवार ने खरीदा, 1993 में बंद हुआ 1952 में गोंडल के महाराजा विक्रमसिंहजी ने रॉयल ओपेरा हाउस खरीदा। समय के साथ सिनेमा देखने का तरीका बदला और आधुनिक वातानुकूलित सिनेमाघर लोकप्रिय हुए। रखरखाव की चुनौतियों और दर्शकों की बदलती पसंद के चलते यह थिएटर 1993 में बंद हो गया। करीब दो दशक तक इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही। पिता ने लिया पुनरुद्धार का फैसला, 2016 में फिर खुला महाराजा हिमांशु सिंह के मुताबिक, उनके पिता महाराजा ज्योतेंद्रसिंहजी जडेजा ने इस धरोहर को बचाने का फैसला किया। संरक्षण वास्तुकार आभा नारायण लांबा के मार्गदर्शन में इमारत को मूल स्वरूप के करीब लाया गया। पुराने डिजाइन और स्थापत्य विशेषताओं को सहेजते हुए इसमें आधुनिक सुविधाएं, नई सीटें, एयर कंडीशनिंग और बेहतर साउंड सिस्टम जोड़े गए। 2016 में इसे जनता के लिए दोबारा खोल दिया गया। हिमांशु सिंह ने कहा कि इस पहल का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि मुंबई के लोगों को उनकी ऐतिहासिक धरोहर लौटाना है। उन्होंने पुनरुद्धार में आभा नारायण लांबा के योगदान की सराहना भी की। 10 साल में नाटक से संगीत तक हजारों रंग ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में यहां नाटक, संगीत, स्टोरीटेलिंग, बच्चों के कार्यक्रम और कॉर्पोरेट आयोजन हुए। वर्षगांठ पर ‘तबला एंड सन्स’ की प्रस्तुति के साथ पूरे थिएटर पर प्रोजेक्शन के जरिए इमर्सिव शो दिखाया गया। दोषी ने गोंडल राजपरिवार के योगदान को मुंबई के लिए उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों के लिए खुला है। 2017 में रॉयल ओपेरा हाउस को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक अवॉर्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था।

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जयपुर में छाईं ‘गुलाबी क्वीन’ जैस्मीन सैंडलास:‘केसरिया बालम’ की दी प्रस्तुति; बंधेज ड्रेस में आईं नजर, सिंगर के गानों पर नाची मां

पंजाबी संगीत की दुनिया में ‘गुलाबी क्वीन’ के नाम से मशहूर सिंगर जैस्मीन सैंडलास ने जयपुर में अपनी लाइव परफॉर्मेंस से समां बांध दिया। सिंगर ने फिल्म ‘किक’ का सॉन्ग ‘यार ना मिले’, ‘इश्क दा सूटा’, ‘रात जश्न दी’, ‘बंब जट्ट’, ‘मीठी मीठी’, ‘तरस’, ‘धुरंधर’ टाइटल ट्रैक और ‘शरारत’ जैसे सॉन्ग सुनाए। वहीं कॉन्सर्ट के दौरान ऑडियंस में मौजूद जैस्मीन की मां बेटी को मंच पर परफॉर्म करते देख खुद को थिरकने से रोक नहीं सकीं। जयपुर में प्रस्तुति के दौरान जैस्मीन ने राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ाव दिखाया। उन्होंने पारंपरिक राजस्थानी लोकगीत ‘केसरिया बालम’ को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया। वहीं पारंपरिक अंदाज वाले बंधेज ड्रेस में सजी जैस्मीन ने अपने लुक और स्टेज प्रेजेंस से भी ध्यान खींचा। सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित कॉन्सर्ट में जैस्मीन ने शनिवार को अपने सुपरहिट गानों के साथ एल्बम के गीत भी पेश किए। उनकी गाने और डांस से दर्शक शुरू से लेकर आखिरी पलों तक झूमते रहे। जैसे-जैसे उनके लोकप्रिय गानों की धुनें गूंजती गईं। ऑडियंस भी तालियों, हूटिंग और डांस के साथ उनका उत्साह बढ़ाती नजर आईं। इवेंट के फोटोज यहां देखिए… बंधेज परिधान में मंच पर दिखा पंजाबी अंदाज जैस्मीन की परफॉर्मेंस में उनके पहनावे और मंच पर मौजूदगी का भी खास आकर्षण रहा। बंधेज परिधान में नजर आईं सिंगर ने अपने लुक को पंजाबी संगीत की ऊर्जा और अंदाज के साथ पेश किया। गानों के दौरान उनका लगातार डांस करना और दर्शकों को अपने साथ झूमने के लिए प्रेरित करना कॉन्सर्ट की खासियत रहा। जैस्मीन ने अपने लोकप्रिय गीतों को पूरे उत्साह के साथ प्रस्तुत किया। फैन ने भेंट किया लाइव स्केच, जैस्मीन ने लगाया गले कॉन्सर्ट के दौरान जैस्मीन के एक फैन ने उन्हें खास तोहफा दिया। एक फैन ने उनका लाइव स्केच तैयार कर उन्हें भेंट किया। इस कलाकृति को देखकर जैस्मीन ने जिस तरह प्रतिक्रिया दी। वह कार्यक्रम के यादगार पलों में शामिल हो गया। उन्होंने स्केच को गले लगाया और उसमें गाड़ी चलाते हुए नजर आ रहे व्यक्ति को ‘चौधरी जी’ कहकर संबोधित किया। कॉन्सर्ट के दौरान दर्शकों की पसंद भी साफ तौर पर सामने आई। ऑडियंस की ओर से ‘धुरंधर’ के गाने की सबसे ज्यादा डिमांड की गई।

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Saturday, 24 October 2026

Long-lost Marie Antoinette breast bowl found

The last of the four jatte téton, the breast-shaped bowls made by Sèvres for Queen Marie Antoinette’s pleasure dairy at the Château de Rambouillet, has been rediscovered more than 200 years after its last known appearance. It was found during an inventory of the estate of the Galerie Meyer, a Paris art dealer in business for three generations, and is the only remaining one of the four in private hands.

King Louis XVI commissioned the Sèvres Porcelain Manufactory to make an 108-piece service for the Queen to serve the fresh products of her dairy in royal finery while ensconced in her fake bucolic fantasy. Only 65 pieces were ever produced, delivered to Rambouillet in 1787 and 1788. The four breast-shaped bowls consist of a creamy pink-white bowl shaped like a breast, completely with a realistic colored nipple, on a tripod of goat heads. Goats were a symbol of fertility and apparently Marie Antoinette’s favorite animal among the stock at her dairy. The base of the tripod is decorated with black and purple with foliate scrolls and egg-and-dart friezes against an ochre-orange background.

Produced just one year before the French Revolution put an end to Marie Antoinette’s pastoral fantasy life and soon thereafter her real life, a legend sprang up that the jatte téton had been made from moulds of her own breasts. They were not made from moulds of anyone’s breasts, let alone the Queen’s. The design was inspired by the mastos, a breast-shaped drinking cup used in Greek symposia.

Three of the bowls are now in public collections. Two are held at the National Museum of Ceramics in Sèvres, one with a pale aqua background with purple decoration on the tripod and one with a lavender background with purple and black decoration. Another with a light blue background and black decoration, is in the collection of the Duca di Martina Museum in Naples. The orange background of the recently found bowl is markedly different from the pastels of its three siblings.

According to a handwritten document found with the breast bowl, it went from the Rambouillet dairy to Marie Josephe Rose, Marquise de Chanaleilles, (1784-1867), who was the sister of Marie Louise Zélie, Comtesse de Bouillé, one of the ladies-in-waiting to the Duchesse of Berry. The Marquise de Chanaleilles gave it to her grandson, General Ferdinand de Salles (1831-1925). He sold it to the Galerie Meyer in Paris.

Marie Antoinette’s rediscovered breast bowl will go up for auction at Hôtel Drouot on November 26th. The pre-sale estimate is €1,000,000–€2,000,000. Any foreign buyer will almost certainly be subject to an export bar, so I imagine there will be an effort to secure it for a French institution.



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Trump ordered to answer questions under oath in BBC lawsuit

Trump is suing the BBC over an episode of Panorama that edited together two different sections of a speech he gave in 2021.

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वामिका गब्बी से कहा गया- ‘तुम्हें कोई हीरोइन नहीं लेगा’:फिर ‘जुबली’ से मिली पहचान, दो बड़े प्रोजेक्ट बंद हुए और एक्टिंग छोड़ने का मन बनाया

एक वक्त वामिका गब्बी को लगता था कि शायद वे एक्टिंग के लिए नहीं बनी हैं। लगातार रिजेक्शन मिल रहे थे और अच्छे रोल नहीं मिल रहे थे। मुंबई में करीब 6-7 साल बिताने के बाद भी करियर उस मुकाम पर नहीं पहुंचा था, जिसका उन्होंने सपना देखा था। एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनसे कहा गया कि अपने हुनर पर काम करो, क्योंकि तुम्हें कोई हीरोइन नहीं लेगा। इसी बीच नेटफ्लिक्स की दो सीरीज- ‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ और ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ से जुड़ने का मौका मिला, लेकिन दोनों प्रोजेक्ट पर्दे तक नहीं पहुंच पाए। हालांकि, एक अधूरी सीरीज ने उनके करियर की दिशा बदल दी। विशाल भारद्वाज की वर्कशॉप ने उन्हें एक्टिंग का नया नजरिया दिया, जबकि विक्रमादित्य मोटवानी की ‘जुबली’ से उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच पहचान मिली। आज वामिका बड़े सितारों के साथ फिल्मों और ओटीटी प्रोजेक्ट्स में नजर आ रही हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में वामिका गब्बी के करियर और निजी जिंदगी से जुड़ी खास बातें। बचपन में कैमरे के सामने आईं, ‘जब वी मेट’ से शुरू हुआ सफर वामिका गब्बी का जन्म 29 सितंबर 1993 को चंडीगढ़ में हुआ। उनके पिता गोवर्धन गब्बी पंजाबी लेखक हैं। साहित्य और कला के माहौल में पली-बढ़ीं वामिका को बचपन से अभिनय में दिलचस्पी थी। उनके पिता मजाक में उन्हें ड्रामेबाज कहते थे। 2007 में रिलीज इम्तियाज अली की फिल्म ‘जब वी मेट’ वामिका के करियर की शुरुआती फिल्मों में शामिल थी। फिल्म में शाहिद कपूर और करीना कपूर लीड रोल में थे। वामिका ने करीना के किरदार गीत की कजिन का छोटा-सा रोल निभाया था। सिनेमा एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि ‘जब वी मेट’ की शूटिंग के दौरान वे आठवीं क्लास में थीं। फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली आज भी उन्हें ‘छोटी वाली’ कहकर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि इम्तियाज ने ‘जुबली’ देखकर उनके अभिनय की तारीफ की, तो यह उनके लिए बेहद खास पल था। पहली फिल्म में छोटा रोल मिलने के बाद वामिका ने अभिनय जारी रखा। वे ‘लव आज कल’ (2009), ‘मौसम’ (2011) और ‘बिट्टू बॉस’ (2012) में नजर आईं। हालांकि, इन फिल्मों से उन्हें करियर को नई ऊंचाई देने वाली पहचान नहीं मिली। ‘तुम्हें कोई हीरोइन नहीं लेगा’, कम उम्र में सुननी पड़ी यह बात वामिका के शुरुआती करियर का एक किस्सा उनके संघर्ष को दिखाता है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि शुरुआती फिल्मों में से एक की शूटिंग के दौरान उनकी उम्र करीब 16-17 साल थी। पूरी टीम डिनर के लिए बैठी थी। तभी एक शख्स उनके पास आया और कहा- अपने क्राफ्ट पर काम करो, अच्छी एक्टर बनना, क्योंकि तुम्हें कोई हीरोइन तो लेगा नहीं। कम उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने वाले किसी भी कलाकार के लिए भविष्य को लेकर ऐसी टिप्पणी सुनना आसान नहीं होता। वामिका की कहानी ऐसे बयानों तक सीमित नहीं है। करियर में कई बार उन्हें अपने काम पर दोबारा विचार करना पड़ा। कभी सही रोल नहीं मिले, तो कभी अच्छे प्रोजेक्ट्स बनने से पहले ही बंद हो गए। कई बार उन्हें लगा कि शायद वे सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद उन्होंने अभिनय जारी रखा। छोटे रोल से शुरुआत कर अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम किया और फिर हिंदी सिनेमा में लीड रोल हासिल किया। पंजाबी फिल्मों से पहचान मिली, साउथ सिनेमा में भी आजमाया हुनर हिंदी फिल्मों में शुरुआती काम के बाद वामिका ने पंजाबी सिनेमा में जगह बनाने की कोशिश की। 2013 में रिलीज पंजाबी फिल्म ‘तू मेरा 22 मैं तेरा 22’ में वे नजर आईं। फिल्म में उनके साथ अमरिंदर गिल और यो यो हनी सिंह थे। इसके बाद उन्होंने पंजाबी फिल्मों में लगातार काम किया। वामिका ने ‘इश्क ब्रांडी’, ‘निका जैलदार 2’ और अन्य पंजाबी फिल्मों से दर्शकों के बीच पहचान मजबूत की। उन्होंने तमिल, तेलुगु और मलयालम सिनेमा में भी काम किया। तमिल फिल्म ‘मलाई नेरथु मयक्कम’ और मलयालम फिल्म ‘गोधा’ उनके क्षेत्रीय सिनेमा के सफर की अहम फिल्में हैं। अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम करने से वामिका को कई तरह के किरदार निभाने का अनुभव मिला। हालांकि, कई साल काम करने के बाद भी हिंदी सिनेमा में उन्हें मनचाही पहचान नहीं मिली। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि 2019 तक वे मुंबई में करीब सात साल बिता चुकी थीं। फिर भी उन्हें मनचाहा काम नहीं मिल रहा था। वे अपने अभिनय से संतुष्ट नहीं थीं और उन्हें लगने लगा था कि शायद कुछ और करना चाहिए। 2019 में एक्टिंग छोड़ने का मन बनाया, फिर मिला विशाल भारद्वाज का प्रोजेक्ट वामिका के करियर का अहम मोड़ 2019 में आया। उस साल उनकी पांच पंजाबी फिल्में रिलीज हुई थीं, जिनमें से तीन सफल रही थीं। इसके बावजूद वे अपने काम से खुश नहीं थीं। फिल्मफेयर को नवंबर 2023 में दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया कि उस दौर में वे करियर को लेकर उलझन में थीं। उनके पिता हमेशा कहते थे कि वही काम करना चाहिए, जिसमें खुशी मिले। वामिका ने सोचा था कि कुछ और फिल्में करके पैसे कमाएंगी और फिर दुनिया घूमने निकल जाएंगी। इसी दौर में उन्हें फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज के प्रोजेक्ट ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ के लिए ऑडिशन देने का मौका मिला। यह प्रोजेक्ट लेखक सलमान रुश्दी के चर्चित उपन्यास पर आधारित था। वामिका के मुताबिक, उन्होंने शुरुआत में ऑडिशन को गंभीरता से नहीं लिया था, क्योंकि लगातार रिजेक्शन के बाद उन्हें इस बार भी चयन की उम्मीद नहीं थी। लेकिन किरदार के लिए सीन करते हुए उन्हें मजा आया। वे सहज महसूस कर रही थीं और यह अनुभव उन्हें पिछले ऑडिशन से अलग लगा। इसके बाद उन्हें बताया गया कि चुने गए कलाकारों को एक्टिंग कोच अतुल मोंगिया के साथ तीन दिन की वर्कशॉप करनी होगी। वामिका उसमें शामिल हुईं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह अनुभव अभिनय और करियर को लेकर उनका नजरिया बदल देगा। तीन दिन की वर्कशॉप से सीखा- बेहतर एक्टर बनने के लिए खुद को समझना जरूरी वामिका के लिए ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ का ऑडिशन बड़े प्रोजेक्ट में काम पाने के साथ-साथ अभिनय को नए सिरे से समझने का मौका भी था। उन्होंने बताया था कि वर्कशॉप के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि एक्टिंग का मतलब खुद को छिपाना या किसी दूसरे की नकल करना नहीं है। अभिनय बेहतर बनाने के लिए पहले खुद को समझना जरूरी है। जब इंसान खुद के प्रति संवेदनशील, स्वीकार करने वाला और कम जजमेंटल होता है, तो वह अपने किरदार को भी बेहतर समझ पाता है। इस अनुभव से वामिका का अभिनय के प्रति उत्साह लौटा। जिस काम को छोड़ने के बारे में वे सोच रही थीं, उसी में उन्हें नई खुशी मिलने लगी। विशाल भारद्वाज ने भी उनके टैलेंट पर भरोसा जताया। फिल्मफेयर से बातचीत में वामिका ने बताया था कि प्लेटफॉर्म लोकप्रिय चेहरे की तलाश में था, लेकिन विशाल भारद्वाज उन्हें चुनना चाहते थे। वामिका के मुताबिक, उन्होंने उनके टैलेंट पर भरोसा जताते हुए कहा था कि इस लड़की में कुछ खास है। किसी अनुभवी फिल्ममेकर का भरोसा एक युवा कलाकार के लिए बड़ी बात होती है। वामिका के लिए यह सिर्फ रोल मिलने की खबर नहीं, बल्कि अपने अभिनय के दम पर आगे बढ़ने का भरोसा भी था। ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ बंद हुई, लेकिन वामिका के लिए नए रास्ते खुले ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ में वामिका को पार्वती के किरदार के लिए चुना गया था। वे प्रोजेक्ट की तैयारी कर रही थीं, लेकिन शूटिंग शुरू होने से करीब एक महीने पहले इसे रोक दिया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वामिका मार्च 2019 में ऑडिशन के बाद इस प्रोजेक्ट के लिए शॉर्टलिस्ट हुई थीं। सीरीज नहीं बन पाई, लेकिन ऑडिशन और वर्कशॉप ने उनके करियर को नई दिशा दी। वामिका ने कई इंटरव्यू में बताया कि इस प्रोजेक्ट के जरिए उनका परिचय विशाल भारद्वाज से हुआ और इंडस्ट्री में उनके काम की चर्चा शुरू हुई। बाद में उन्हें विशाल भारद्वाज की फिल्मों और सीरीज में अहम भूमिकाएं मिलीं। जिस प्रोजेक्ट के बंद होने से उन्हें निराशा हो सकती थी, वही भविष्य के अवसरों की शुरुआत बना। उनके करियर के इस मोड़ पर फिल्म या सीरीज के रिलीज होने से ज्यादा अहम उससे मिला अनुभव और इंडस्ट्री में बने संपर्क साबित हुए। ‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ में युवा शिवगामी बनने की तैयारी थी वामिका के करियर का एक और अधूरा प्रोजेक्ट नेटफ्लिक्स की ‘बाहुबली: बिफोर द बिगिनिंग’ था। यह एस.एस. राजामौली की ‘बाहुबली’ फिल्मों से पहले की कहानी पर आधारित प्रस्तावित सीरीज थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वामिका को इसमें युवा शिवगामी की भूमिका के लिए चुना गया था। ‘बाहुबली’ की कहानी में शिवगामी का किरदार अहम है। फिल्मों में यह भूमिका राम्या कृष्णन ने निभाई थी। इस भूमिका के लिए वामिका ने तलवारबाजी की ट्रेनिंग ली थी। दिसंबर 2023 में प्रकाशित इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि निर्देशक बदलते रहे, लेकिन वे तलवारबाजी का अभ्यास करती रहीं। उन्हें उम्मीद थी कि प्रोजेक्ट आगे बढ़ेगा, लेकिन आखिरकार इसे बंद कर दिया गया। प्रोजेक्ट बंद होने की वजहों पर अलग-अलग रिपोर्टें आईं, लेकिन किसी एक कारण की निर्णायक पुष्टि नहीं हुई। वामिका इसकी तैयारी कर रही थीं, लेकिन दर्शक उन्हें इस भूमिका में नहीं देख सके। यह उनके लिए एक और ऐसा अवसर था, जिसमें काफी तैयारी के बावजूद अंतिम नतीजा उनके हाथ में नहीं था। फिर भी उन्होंने अभिनय और नए किरदारों की तलाश जारी रखी। ‘जुबली’ में नीलोफर बनकर बदली किस्मत, पहले इस रोल के लिए हुई थीं रिजेक्ट वामिका को हिंदी दर्शकों के बीच पहचान 2023 में आई विक्रमादित्य मोटवानी की वेब सीरीज ‘जुबली’ से मिली। इस पीरियड ड्रामा में उन्होंने नीलोफर कुरैशी का किरदार निभाया, जो अभिनेत्री बनने और फिल्म इंडस्ट्री में जगह बनाने के लिए संघर्ष करती है। वामिका को शुरुआत में इस भूमिका के लिए रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। उन्होंने बताया था कि ऑडिशन अच्छा गया था, लेकिन निर्देशक विक्रमादित्य मोटवानी उनके चयन को लेकर आश्वस्त नहीं थे। बाद में वामिका के इंस्टाग्राम वीडियो और अन्य कंटेंट देखकर उन्हें लगा कि उसमें नीलोफर के किरदार के लिए जरूरी चंचलता और अलग अंदाज है। इस तरह सोशल मीडिया पर वामिका का व्यक्तित्व भी भूमिका दिलाने में मददगार बना। नीलोफर महत्वाकांक्षी है। वह फिल्मी दुनिया में आगे बढ़ना चाहती है, लेकिन उसका सफर आसान नहीं है। वह ऑडिशन देती है, मौके तलाशती है और प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ने की कोशिश करती है। वामिका ने इस किरदार को सिर्फ महत्वाकांक्षी महिला के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसकी परिस्थितियों और भावनाओं को समझने की कोशिश की। उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा। द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि ‘जुबली’ के बाद अपने नाम और अभिनय की तारीफ सुनना उनके लिए अविश्वसनीय अनुभव था। सालों के काम के बाद आखिरकार उन्हें उस पहचान मिलने लगी, जिसका इंतजार था। ‘खुफिया’, ‘चार्ली चोपड़ा’ और ‘मॉडर्न लव’ में दिखाए अभिनय के अलग-अलग रंग ‘जुबली’ की सफलता के बाद वामिका को कई नए अवसर मिले। विशाल भारद्वाज की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘खुफिया’ में उन्होंने चारु का किरदार निभाया। फिल्म में उनके साथ तब्बू और अली फजल भी थे। ‘खुफिया’ में उनका किरदार ‘जुबली’ की नीलोफर से अलग था। विशाल भारद्वाज की सीरीज ‘चार्ली चोपड़ा एंड द मिस्ट्री ऑफ सोलांग वैली’ में वे जासूस की भूमिका में नजर आईं। यह अगाथा क्रिस्टी के उपन्यास ‘द सिट्टाफोर्ड मिस्ट्री’ से प्रेरित थी। इससे पहले वे ‘मॉडर्न लव मुंबई’ और ‘मॉडर्न लव चेन्नई’ जैसे एंथोलॉजी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही थीं। इनसे उन्हें अलग-अलग कहानियों और किरदारों में काम करने का अवसर मिला। वामिका ने विशाल भारद्वाज के साथ काम करने के अनुभव को खास बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे उन्हें जीवन और रिश्तों को समझने का नया नजरिया मिला। दोनों ओशो के विचारों पर भी बातचीत करते थे। वामिका का विशाल भारद्वाज के साथ जुड़ाव सिर्फ काम तक सीमित नहीं रहा। ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ से शुरू हुआ यह रिश्ता आगे कई प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा और उनके करियर का अहम हिस्सा बना। कम इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के कारण भी झेलना पड़ा रिजेक्शन वामिका का संघर्ष सिर्फ अच्छे किरदार न मिलने तक सीमित नहीं था। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की लोकप्रियता मापने के तरीकों का भी सामना करना पड़ा। एक इंटरव्यू में वामिका ने बताया था कि कुछ फिल्ममेकर्स ने उन्हें इसलिए रिजेक्ट किया, क्योंकि वे ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स वाली अभिनेत्री चाहते थे। यह अनुभव दिखाता है कि कास्टिंग में कलाकार की प्रतिभा के साथ सोशल मीडिया लोकप्रियता को भी महत्व दिया जाता है। वामिका के मामले में दिलचस्प यह है कि बाद में सोशल मीडिया वीडियो ने उन्हें ‘जुबली’ में नीलोफर का किरदार दिलाने में मदद की। यानी जिस माध्यम के कारण उन्हें कभी रिजेक्शन मिला, उसी के कंटेंट ने अहम अवसर भी दिलाया। यह विरोधाभास उनके करियर को दिलचस्प बनाता है। सोशल मीडिया न तो उनके लिए सफलता की गारंटी रहा और न ही सिर्फ रिजेक्शन की वजह। आखिरकार निर्देशक को उनके व्यक्तित्व और अभिनय में अपने किरदार की झलक दिखाई दी। ‘बेबी जॉन’ से ‘भूत बंगला’ तक, बड़े सितारों के साथ बढ़ा दायरा ‘जुबली’ के बाद वामिका ने हिंदी फिल्मों में काम जारी रखा। वे वरुण धवन के साथ ‘बेबी जॉन’ में नजर आईं, जो दिसंबर 2024 में रिलीज हुई थी। इसके बाद मई 2025 में राजकुमार राव के साथ उनकी फिल्म ‘भूल चूक माफ’ रिलीज हुई। ‘भूल चूक माफ’ रोमांटिक कॉमेडी थी, जिसमें वामिका और राजकुमार राव की जोड़ी नजर आई। इस फिल्म से उन्होंने हल्के-फुल्के मनोरंजन वाले सिनेमा में भी काम किया। अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ में वे अलग किरदार में दिखीं। ‘प्रहार’ में राजकुमार राव के साथ नजर आईं वामिका की फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इसमें राजकुमार राव ने वरिष्ठ सरकारी वकील उज्ज्वल निकम और वामिका ने उनकी पत्नी ज्योति निकम की मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन अविनाश अरुण धवारे ने किया है। यह उज्ज्वल निकम के पेशेवर जीवन और उन कानूनी मामलों पर आधारित है, जिन्होंने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। एक साल में नहीं बदली किस्मत, दस साल की मेहनत के बाद मिला मुकाम वामिका गब्बी के करियर में बदलाव किसी एक फिल्म की रिलीज से अचानक नहीं आया। ‘जब वी मेट’ में छोटा रोल मिलने से लेकर ‘जुबली’ में मुख्य किरदार निभाने तक उन्होंने करीब डेढ़ दशक का सफर तय किया। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में वामिका ने कहा था कि कभी-कभी जिंदगी में ऐसे साल का इंतजार करना पड़ता है, जो पिछले दस साल की मेहनत को नई दिशा दे। उनके लिए 2023 ऐसा ही साल रहा, जब ‘जुबली’, ‘खुफिया’, ‘चार्ली चोपड़ा’ और ‘मॉडर्न लव चेन्नई’ जैसे प्रोजेक्ट्स दर्शकों तक पहुंचे। इस दौर में उन्हें नए किरदारों के साथ प्रतिभा दिखाने के ज्यादा अवसर मिले। इससे पहले वे एक्टिंग छोड़ने के बारे में सोच रही थीं, लेकिन अब अपने काम से ज्यादा संतुष्ट महसूस करने लगीं। ____________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़ें.. दृश्यम एक्ट्रेस श्रिया सरन ने ऑडिशन के लिए शादी छोड़ी:साउथ में सुपरस्टार बनीं, बॉलीवुड में स्ट्रगल किया, बोलीं- नॉमिनेशन मिला, अवॉर्ड शो में नहीं बुलाया माता-पिता चाहते थे कि श्रिया सरन पढ़ाई पूरी करने के बाद एक्टिंग में आएं, लेकिन एक म्यूजिक वीडियो ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। तेलुगु फिल्म ‘इष्टम’ से करियर शुरू करने वाली श्रिया ने साउथ की फिल्मों में पहचान बनाई, लेकिन बॉलीवुड में संघर्ष करना पड़ा। ‘तुझे मेरी कसम’, ‘शुक्रिया’ और ‘मिशन इस्तांबुल’ से उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।पूरी खबर पढ़ें...

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Trump ordered to answer questions under oath in BBC lawsuit

Trump is suing the BBC over an episode of Panorama that edited together two different sections of a speech he gave in 2021.

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Friday, 23 October 2026

Bronze Age Blyth Hoard has unique ingot, moulds

A Bronze Age hoard found near Blyth Bridge in the Scottish Borders contains exceptional surviving raw materials for metal work, including the first copper ingot ever discovered from Bronze Age Scotland and casting moulds used for producing decorative fittings like the ones in the Peebles Hoard.

The Blyth Hoard was discovered in 2022 just seven miles from the Peebles Hoard, the most diverse agglomeration of Bronze Age artifacts in Europe. Amazingly enough, the same metal detectorist, Mariusz Stępień, discovered both hoards, and while he is apparently a magical Bronze Age hoard magnet, he is also so archaeologically conscientious that as soon as he found a socketed axe, he stopped digging and reported it to the Treasure Trove Unit.

Because of Stępień’s scrupulousness, the Blyth hoard was professionally excavated by archeologists from National Museums Scotland. They unearthed a second socketed axe head, a large copper ingot and three fragments of clay moulds used to cast bronze objects. The hoard dates to the Late Bronze Age, 1150-800 B.C.

The copper ingot is complete and is the first of its kind from Scotland. Ingots are more common in southern Britain, particularly on the south coast, but have never been found north of the Border. It is important evidence that raw material was being imported into Scotland 3000 years ago. People weren’t simply recycling existing objects – there was a supply of fresh metal into the area.

Most of the Late Bronze Age moulds that have survived were used to produce weapons or tools. The Blyth moulds, on the other hand, are shaped and patterned to produce smaller decorative pieces. Because Peebles was found two years before the Blyth Hoard, when archaeologists examined the fragments of casting moulds, they were able to recognize the spiral and outlines of the Peebles fittings.

It is rare to find any moulds that link to specific objects from the Bronze Age. This makes the discovery at Blyth quite exceptional. Given the unique nature of the Peebles Hoard fittings, it is highly probable that whoever buried the Blyth Hoard may have been involved in making some, or all, of the Peebles Hoard fittings. This is especially striking given the presence of an ingot.

The survival of metalwork and the remains of manufacturing materials together is rare in Britain, and previously unknown in Scotland. The Blyth Hoard is an opportunity to examine some of the relationships between metal objects, production and deposition. The socketed axeheads and ingot may represent the raw material for casting into new objects, such as the Peebles-style fittings. The person (or people) who buried the Blyth Hoard may have been a metalworker, skilled at making moulds and casting objects.



* This article was originally published here

Big Brother fans still not happy as housemate called out on behaviour

Ofcom received thousands of complaints related to Omar El Mayer's behaviour in the Big Brother house.

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