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ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

Tuesday, 22 September 2026

पंकज त्रिपाठी-प्रीति जिंटा होंगे फिल्म सेंसर बोर्ड के मेंबर:सरकार ने सेंसर बोर्ड में 7 साल बाद बदलाव किया, 18 नए सदस्य शामिल किए

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) का पुनर्गठन कर दिया है। मंत्रालय ने 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का ऐलान किया है। इस नई टीम में सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के कई बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक्ट्रेस प्रीति जिंटा, एक्टर सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और बंगाली सिनेमा के दिग्गज एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी का नाम प्रमुख है। नया बोर्ड सिनेमाग्राफ एक्ट के तहत 3 साल की अवधि या अगले आदेश तक काम करेगा। निर्देशकों और संगीतकारों को भी मिली जिम्मेदारी 18 सदस्यीय बोर्ड में सिर्फ एक्टर्स ही नहीं, बल्कि सिनेमा और संगीत जगत की अन्य हस्तियों को भी जगह दी गई है। इनमें तीन बार के ग्रैमी अवॉर्ड विजेता संगीतकार रिकी केज, जाने-माने निर्देशक प्रियदर्शन, हंसराज हंस और नीला माधब पांडा शामिल हैं। इसके अलावा मनोज जोशी, विनोद अनुपम, अभिषेक जैन, सुप्रिया यार्लागड्डा, यतींद्र मिश्र, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे को भी बोर्ड में मेंबर बनाया गया है। 2017 के बाद पहली बार हुआ बोर्ड पुनर्गठन CBFC के बोर्ड का यह पुनर्गठन लंबे समय के अंतराल के बाद हुआ है। इससे पहले सेंसर बोर्ड का औपचारिक पुनर्गठन अगस्त 2017 में किया गया था। इस महीने की शुरुआत में सेंसर बोर्ड ने 6 साल में अपनी पहली बैठक की थी। उस बैठक में बोर्ड के मेंबर्स ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन से जुड़े मुद्दों, रिवाइजिंग कमेटियों के कामकाज और नियम-कायदों पर विस्तार से चर्चा की थी। 3 साल के कार्यकाल के लिए बनी है नई टीम सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने यह नई टीम बनाई है। नया बोर्ड अगले 3 साल तक या सरकार के अगले आदेश तक अपने पद पर बना रहेगा। यह टीम भारतीय सिनेमा में कंटेंट की प्रामाणिकता, उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेशन और समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखकर फिल्मों को सर्टिफिकेट जारी करने का काम करेगी। शशि शेखर वेम्पति होंगे सेंसर बोर्ड के चेयरमैन सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, पुनर्गठित CBFC बोर्ड की कमान चेयरमैन शशि शेखर वेम्पति के हाथों में होगी। शशि शेखर वेम्पति मंत्रालय के तहत काम करने वाली इस वैधानिक फिल्म प्रमाणन संस्था के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। नया बोर्ड फिल्मों के सर्टिफिकेशन, कंटेंट की समीक्षा और रिवाइजिंग कमेटियों के कामकाज की निगरानी करेगा। क्या है CBFC और इसका काम? सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) एक वैधानिक संस्था है, जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करती है। सिनेमाघरों और टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली किसी भी फिल्म के लिए इस बोर्ड से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। बोर्ड फिल्मों को 'U', 'UA', 'A' और 'S' जैसी श्रेणियों में बांटता है, जिससे दर्शकों को पता चलता है कि फिल्म किस आयु वर्ग के लिए है। ये खबर भी पढ़ें एक्टर अनंत नाग को 2024 का दादा साहब फाल्के अवॉर्ड:300+ फिल्मों में काम किया; मालगुड़ी डेज से प्रसिद्ध हुए, KGF में भी थे दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने बुधवार को इसकी घोषणा की। पूरी खबर पढ़ें

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Monday, 21 September 2026

Iconic winter sport landscape acquired by Rijksmuseum and Mauritshuis

Amsterdam’s Rijksmuseum and The Hague’s Mauritshuis have jointly acquired one of the most important winter landscape scenes from the Dutch Golden Age: Colf Players on the Ice, painted around 1625 by Hendrick Avercamp. To celebrate its homecoming, the masterpiece will first go on display in a special exhibition at the Stedelijk Museum in Kampen, Avercamp’s birthplace, from October 3rd to January 10th, 2027. After that, the two museums will split custody. This is the first time the Netherland’s two greatest museums, respectively home of Rembrandt’s The Night Watch and Vermeer’s Girl With a Pearl Earring, are sharing an artwork.

Between 1575 and 1625, northern Europe experienced a period of severe winters known as “The Little Ice Age.” The rivers, canals, lakes and ports of below-sea-level Holland froze over for months. Avercamp was the first Dutch artist to specialize in depicting winter scenes, capturing people enjoying the cold in sports like ice skating, sledding and colf, and experiencing the harshness of having to work and live in such conditions.

Colf Players on the Ice is regarded as a highlight of Avercamp’s oeuvre. Unlike in his earlier winter landscape teeming with human figures, the artist focuses here on a small group in the foreground. The low vantage point makes us feel that we too are on the ice, and part of the scene. The focus is on two men playing colf – one of the oldest ball games in the Low Countries, and a forerunner of golf – as fishers, passers-by and other spectators watch the game. The painting is therefore not only a fabulous wintry scene, it is also the earliest known depiction of colf.

Colf was a popular year-round game in the Netherlands, played in the squares, church yards and the streets of town. Like golf, it was played by hitting a ball with a club, but unlike golf, the target was a vertical stick rather than a hole. Walloping balls through the streets of small, densely-inhabited towns had the unfortunate side-effect of breaking a lot of windows, and many towns passed ordinances prohibiting the game. The icy surfaces away from windows made the ideal colfing pitch.

Avercamp’s winter scenes are filled with details, capturing people from all walks of life. In Colf Players on the Ice, the gentleman in kuitbroek (knee breeches) wields the colf club while commoners like an ice fishermen and the little boy with a net helping him watch the game. The clothes are a snapshot of fashions followed by the merchants and burghers, as well as the rugged winterwear of the working classes.

For many years, the painting was on long-term loan to the Museum of Fine Arts, Houston, from the collection of British art dealers Edward and Sally Speelman. Speelman is an expert in Dutch old master paintings, and has amassed a significant private collection. They sold Colf Players on the Ice for a hefty price tag of $13 million.

The acquisition is very important for the Netherlands. Although several paintings by Avercamp are in Dutch public collections, almost all of them are early works. Colf Players on the Ice , on the other hand, shows the innovative nature of his mature style, and is thus an essential addition to the Dutch national collection.



* This article was originally published here

करीना कपूर@46; ‘पू’ से डीसीपी अजूनी कोहली तक:26 साल के करियर में एक्ट्रेस ने निभाए ग्लैमर से लेकर गंभीर किरदार

21 सितंबर 1980 को जन्मी करीना कपूर आज 46 साल की हो गई हैं। करीब ढाई दशक से ज्यादा लंबे करियर में करीना ने हिंदी सिनेमा में कई तरह के किरदार निभाए हैं। शुरुआत में जहां उनकी पहचान ग्लैमरस और कमर्शियल फिल्मों की हीरोइन के तौर पर बनी, वहीं समय के साथ उन्होंने ऐसे किरदार चुने जिनमें ग्लैमर से ज्यादा कहानी और किरदार की गहराई नजर आई। करीना ने साल 2000 में फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से एक्टिंग डेब्यू किया था। इसके बाद ‘मुझे कुछ कहना है’, ‘अजनबी’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें मेनस्ट्रीम सिनेमा की चर्चित एक्ट्रेस बना दिया। खासकर ‘कभी खुशी कभी गम’ की पू यानी पूजा शर्मा का किरदार उनकी ग्लैमरस इमेज का बड़ा हिस्सा बना। इसके बाद कुछ सालों तक करीना के करियर में रोमांटिक, ग्लैमरस और कमर्शियल फिल्मों का दबदबा रहा। ‘मुझसे दोस्ती करोगे!’, ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’, ‘खुशी’ और ‘क्योंकि’ जैसी फिल्मों में वह मुख्यधारा की हीरोइन के तौर पर नजर आईं। हालांकि इसी दौर में उन्होंने ऐसे किरदार भी किए, जिन्होंने आगे उनके करियर की दिशा बदलने का रास्ता तैयार किया। ‘चमेली’ ने बदली इमेज करीना के करियर में सबसे बड़ा बदलाव 2004 की फिल्म ‘चमेली’ से आया। इसमें उन्होंने एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था। यह उनके पहले के ग्लैमरस किरदारों से बिल्कुल अलग था। इसी साल उन्होंने फिल्म ‘देव’ में एक ऐसी महिला का किरदार निभाया, जिसकी जिंदगी गुजरात दंगों की हिंसा से प्रभावित होती है। इसके बाद विशाल भारद्वाज की ‘ओमकारा’ में उन्होंने डॉली मिश्रा का किरदार निभाया, जो शेक्सपियर के ‘ओथेलो’ की डेसडेमोना से प्रेरित था। ‘देव’ और ‘ओमकारा’ दोनों फिल्मों के लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्ट्रेस मिला था। यानी करीना का करियर शिफ्ट सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा। ‘चमेली’ के बाद उन्होंने यह दिखाना शुरू कर दिया कि वह सिर्फ ग्लैमरस हीरोइन की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। ‘जब वी मेट’ में ग्लैमर से ज्यादा किरदार की ताकत 2007 में आई ‘जब वी मेट’ को करीना के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म में उन्होंने गीत का किरदार निभाया था। गीत चुलबुली और बातूनी जरूर थी, लेकिन उसका पूरा किरदार सिर्फ ग्लैमर के आसपास नहीं घूमता था। कहानी का बड़ा हिस्सा उसके व्यक्तित्व, फैसलों और जिंदगी में आए बदलावों पर आधारित था। 2012 में दिखे करियर के कई रंग 2012 करीना के करियर का ऐसा साल था, जिसमें उन्होंने एक ही साल में बिल्कुल अलग तरह के किरदार किए। ‘एक मैं और एक तू’ में वह हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आईं, तो ‘हीरोइन’ में उन्होंने एक परेशान और अस्थिर फिल्म एक्ट्रेस का किरदार निभाया। ‘हीरोइन’ में उनका किरदार माही अरोड़ा फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक के पीछे छिपी असुरक्षा और निजी परेशानियों से जूझता है। इसी साल आई ‘तलाश’ में करीना ने रोजी का किरदार निभाया, जो फिल्म की रहस्यमयी कहानी का अहम हिस्सा था। यहां से करीना की फिल्मोग्राफी में एक दिलचस्प बदलाव दिखने लगा। वह बड़ी कमर्शियल फिल्मों का हिस्सा बनी रहीं, लेकिन साथ ही ऐसे किरदार भी चुनती रहीं जिनमें उनके लिए एक्टिंग की ज्यादा गुंजाइश थी। शादी और मां बनने के बाद भी बदली नहीं एक्टिंग की रेंज 2012 में करीना ने सैफ अली खान से शादी की। इसके बाद भी उन्होंने फिल्मों से दूरी पूरी तरह नहीं बनाई। ‘सिंघम रिटर्न्स’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी फिल्मों में वह कम स्क्रीन टाइम के बावजूद नजर आईं। ‘बजरंगी भाईजान’ में उन्होंने रसिका का किरदार निभाया था। 2016 में ‘की एंड का’ और ‘उड़ता पंजाब’ ने फिर उनकी अलग-अलग रेंज दिखाई। ‘की एंड का’ में वह एक ऐसी महिला के किरदार में थीं जो करियर को लेकर महत्वाकांक्षी है, जबकि ‘उड़ता पंजाब’ में उन्होंने डॉ. प्रीत साहनी का रोल किया। यह फिल्म पंजाब में ड्रग्स की समस्या के इर्द-गिर्द बनी थी। दूसरी पारी में ग्लैमर से ज्यादा कहानी अगर करीना के हाल के काम को देखें तो उनकी फिल्मों में इंटेंस और गंभीर कहानियों की संख्या बढ़ी है। ‘वीरे दी वेडिंग’ और ‘गुड न्यूज’ जैसी कमर्शियल फिल्मों के बीच उन्होंने ‘अंग्रेजी मीडियम’ में भी काम किया। 2022 में ‘लाल सिंह चड्ढा’ आई, जिसमें उन्होंने रूपा का किरदार निभाया। इसके बाद 2023 में नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘जाने जान’ में वह माया डिसूजा के किरदार में नजर आईं। ‘जाने जान’ करीना की स्ट्रीमिंग डेब्यू फिल्म थी। फिल्म में उनका किरदार एक ऐसी महिला का था जो अपने अतीत से बचकर नई जिंदगी जीने की कोशिश कर रही है। यहां करीना को उनके पुराने ग्लैमरस अवतार से बिल्कुल अलग अंदाज में देखा गया। इसके बाद 2024 में ‘द बकिंघम मर्डर्स’ आई। इसमें करीना ने ब्रिटिश-इंडियन डिटेक्टिव जस्मीत ‘जैस’ भामरा का किरदार निभाया, जो एक बच्चे की हत्या की जांच करती है। फिल्म से करीना पहली बार इस तरह के सीरियस इन्वेस्टिगेटिव रोल में नजर आईं। ‘दायरा’ में पुलिस ऑफिसर बनीं करीना करीना की इस इंटेंस फिल्मों वाली पारी में 2026 की ‘दायरा’ भी शामिल हो गई है। मेघना गुलजार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में करीना ने डीसीपी अजूनी कोहली का किरदार निभाया है। फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन भी डीसीपी रमन कुमार के रोल में हैं। 18 सितंबर 2026 को रिलीज हुई ‘दायरा’ की कहानी एक गंभीर अपराध और उसके बाद होने वाली पुलिस जांच के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में करीना का किरदार एक एनकाउंटर की जांच करता है और इसी के जरिए कानून, न्याय और पुलिस की जवाबदेही जैसे सवाल सामने आते हैं। 26 साल में बदली करीना की स्क्रीन इमेज करीना कपूर का करियर देखें तो इसे सिर्फ ‘ग्लैमरस से सीरियस’ बदलाव कहना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी। उन्होंने अपने करियर के अलग-अलग दौर में कमर्शियल फिल्मों, रोमांटिक फिल्मों, कॉमेडी, ड्रामा, थ्रिलर और सोशल इश्यू बेस्ड फिल्मों में काम किया है। ………………. यह खबर भी पढ़ें… अक्षय कुमार ने चुराया था हुमा कुरैशी का फोन:अभिनेताओं को भेजे थे शादी के प्रपोजल वाले मैसेज, ‘आई लव यू’ भी लिखा था बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार ने करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और सोशल ड्रामा जैसी कई तरह की फिल्मों में काम किया है। फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अक्षय अपने को-स्टार्स के साथ मजाक-मस्ती और प्रैंक करने के लिए भी मशहूर हैं। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने अक्षय के साथ काम करने के दौरान सुनाया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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करीना कपूर@46; ‘पू’ से डीसीपी अजूनी कोहली तक:26 साल के करियर में एक्ट्रेस ने निभाए ग्लैमर से लेकर गंभीर किरदार

21 सितंबर 1980 को जन्मी करीना कपूर आज 46 साल की हो गई हैं। करीब ढाई दशक से ज्यादा लंबे करियर में करीना ने हिंदी सिनेमा में कई तरह के किरदार निभाए हैं। शुरुआत में जहां उनकी पहचान ग्लैमरस और कमर्शियल फिल्मों की हीरोइन के तौर पर बनी, वहीं समय के साथ उन्होंने ऐसे किरदार चुने जिनमें ग्लैमर से ज्यादा कहानी और किरदार की गहराई नजर आई। करीना ने साल 2000 में फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से एक्टिंग डेब्यू किया था। इसके बाद ‘मुझे कुछ कहना है’, ‘अजनबी’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी फिल्मों ने उन्हें मेनस्ट्रीम सिनेमा की चर्चित एक्ट्रेस बना दिया। खासकर ‘कभी खुशी कभी गम’ की पू यानी पूजा शर्मा का किरदार उनकी ग्लैमरस इमेज का बड़ा हिस्सा बना। इसके बाद कुछ सालों तक करीना के करियर में रोमांटिक, ग्लैमरस और कमर्शियल फिल्मों का दबदबा रहा। ‘मुझसे दोस्ती करोगे!’, ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’, ‘खुशी’ और ‘क्योंकि’ जैसी फिल्मों में वह मुख्यधारा की हीरोइन के तौर पर नजर आईं। हालांकि इसी दौर में उन्होंने ऐसे किरदार भी किए, जिन्होंने आगे उनके करियर की दिशा बदलने का रास्ता तैयार किया। ‘चमेली’ ने बदली इमेज करीना के करियर में सबसे बड़ा बदलाव 2004 की फिल्म ‘चमेली’ से आया। इसमें उन्होंने एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था। यह उनके पहले के ग्लैमरस किरदारों से बिल्कुल अलग था। इसी साल उन्होंने फिल्म ‘देव’ में एक ऐसी महिला का किरदार निभाया, जिसकी जिंदगी गुजरात दंगों की हिंसा से प्रभावित होती है। इसके बाद विशाल भारद्वाज की ‘ओमकारा’ में उन्होंने डॉली मिश्रा का किरदार निभाया, जो शेक्सपियर के ‘ओथेलो’ की डेसडेमोना से प्रेरित था। ‘देव’ और ‘ओमकारा’ दोनों फिल्मों के लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्ट्रेस मिला था। यानी करीना का करियर शिफ्ट सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं रहा। ‘चमेली’ के बाद उन्होंने यह दिखाना शुरू कर दिया कि वह सिर्फ ग्लैमरस हीरोइन की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। ‘जब वी मेट’ में ग्लैमर से ज्यादा किरदार की ताकत 2007 में आई ‘जब वी मेट’ को करीना के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म में उन्होंने गीत का किरदार निभाया था। गीत चुलबुली और बातूनी जरूर थी, लेकिन उसका पूरा किरदार सिर्फ ग्लैमर के आसपास नहीं घूमता था। कहानी का बड़ा हिस्सा उसके व्यक्तित्व, फैसलों और जिंदगी में आए बदलावों पर आधारित था। 2012 में दिखे करियर के कई रंग 2012 करीना के करियर का ऐसा साल था, जिसमें उन्होंने एक ही साल में बिल्कुल अलग तरह के किरदार किए। ‘एक मैं और एक तू’ में वह हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आईं, तो ‘हीरोइन’ में उन्होंने एक परेशान और अस्थिर फिल्म एक्ट्रेस का किरदार निभाया। ‘हीरोइन’ में उनका किरदार माही अरोड़ा फिल्म इंडस्ट्री की चमक-दमक के पीछे छिपी असुरक्षा और निजी परेशानियों से जूझता है। इसी साल आई ‘तलाश’ में करीना ने रोजी का किरदार निभाया, जो फिल्म की रहस्यमयी कहानी का अहम हिस्सा था। यहां से करीना की फिल्मोग्राफी में एक दिलचस्प बदलाव दिखने लगा। वह बड़ी कमर्शियल फिल्मों का हिस्सा बनी रहीं, लेकिन साथ ही ऐसे किरदार भी चुनती रहीं जिनमें उनके लिए एक्टिंग की ज्यादा गुंजाइश थी। शादी और मां बनने के बाद भी बदली नहीं एक्टिंग की रेंज 2012 में करीना ने सैफ अली खान से शादी की। इसके बाद भी उन्होंने फिल्मों से दूरी पूरी तरह नहीं बनाई। ‘सिंघम रिटर्न्स’ और ‘बजरंगी भाईजान’ जैसी फिल्मों में वह कम स्क्रीन टाइम के बावजूद नजर आईं। ‘बजरंगी भाईजान’ में उन्होंने रसिका का किरदार निभाया था। 2016 में ‘की एंड का’ और ‘उड़ता पंजाब’ ने फिर उनकी अलग-अलग रेंज दिखाई। ‘की एंड का’ में वह एक ऐसी महिला के किरदार में थीं जो करियर को लेकर महत्वाकांक्षी है, जबकि ‘उड़ता पंजाब’ में उन्होंने डॉ. प्रीत साहनी का रोल किया। यह फिल्म पंजाब में ड्रग्स की समस्या के इर्द-गिर्द बनी थी। दूसरी पारी में ग्लैमर से ज्यादा कहानी अगर करीना के हाल के काम को देखें तो उनकी फिल्मों में इंटेंस और गंभीर कहानियों की संख्या बढ़ी है। ‘वीरे दी वेडिंग’ और ‘गुड न्यूज’ जैसी कमर्शियल फिल्मों के बीच उन्होंने ‘अंग्रेजी मीडियम’ में भी काम किया। 2022 में ‘लाल सिंह चड्ढा’ आई, जिसमें उन्होंने रूपा का किरदार निभाया। इसके बाद 2023 में नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘जाने जान’ में वह माया डिसूजा के किरदार में नजर आईं। ‘जाने जान’ करीना की स्ट्रीमिंग डेब्यू फिल्म थी। फिल्म में उनका किरदार एक ऐसी महिला का था जो अपने अतीत से बचकर नई जिंदगी जीने की कोशिश कर रही है। यहां करीना को उनके पुराने ग्लैमरस अवतार से बिल्कुल अलग अंदाज में देखा गया। इसके बाद 2024 में ‘द बकिंघम मर्डर्स’ आई। इसमें करीना ने ब्रिटिश-इंडियन डिटेक्टिव जस्मीत ‘जैस’ भामरा का किरदार निभाया, जो एक बच्चे की हत्या की जांच करती है। फिल्म से करीना पहली बार इस तरह के सीरियस इन्वेस्टिगेटिव रोल में नजर आईं। ‘दायरा’ में पुलिस ऑफिसर बनीं करीना करीना की इस इंटेंस फिल्मों वाली पारी में 2026 की ‘दायरा’ भी शामिल हो गई है। मेघना गुलजार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में करीना ने डीसीपी अजूनी कोहली का किरदार निभाया है। फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन भी डीसीपी रमन कुमार के रोल में हैं। 18 सितंबर 2026 को रिलीज हुई ‘दायरा’ की कहानी एक गंभीर अपराध और उसके बाद होने वाली पुलिस जांच के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में करीना का किरदार एक एनकाउंटर की जांच करता है और इसी के जरिए कानून, न्याय और पुलिस की जवाबदेही जैसे सवाल सामने आते हैं। 26 साल में बदली करीना की स्क्रीन इमेज करीना कपूर का करियर देखें तो इसे सिर्फ ‘ग्लैमरस से सीरियस’ बदलाव कहना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी। उन्होंने अपने करियर के अलग-अलग दौर में कमर्शियल फिल्मों, रोमांटिक फिल्मों, कॉमेडी, ड्रामा, थ्रिलर और सोशल इश्यू बेस्ड फिल्मों में काम किया है। ………………. यह खबर भी पढ़ें… अक्षय कुमार ने चुराया था हुमा कुरैशी का फोन:अभिनेताओं को भेजे थे शादी के प्रपोजल वाले मैसेज, ‘आई लव यू’ भी लिखा था बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी अक्षय कुमार ने करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में एक्शन, कॉमेडी, रोमांस और सोशल ड्रामा जैसी कई तरह की फिल्मों में काम किया है। फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अक्षय अपने को-स्टार्स के साथ मजाक-मस्ती और प्रैंक करने के लिए भी मशहूर हैं। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा एक्ट्रेस हुमा कुरैशी ने अक्षय के साथ काम करने के दौरान सुनाया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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गणपति उत्सव, शिल्पा ने पैपराजी संग किया डांस:गोविंदा ने मांगी बेटे के लिए मन्नत; संजय दत्त ने घायल फोटोग्राफर का पूछा हाल, अजय देवगन लालबागचा राजा पहुंचे

गणेश चतुर्थी के मौके पर बॉलीवुड में गणेश उत्सव का माहौल बना हुआ है। शिल्पा शेट्टी, संजय दत्त और गोविंदा समेत कई सितारे बप्पा के दर्शन और भक्ति के रंग में रंगे नजर आए। शिल्पा शेट्टी ने अपने घर पर बप्पा का स्वागत ढोल-नगाड़ों और पैपराजी के साथ डांस करके किया। वहीं संजय दत्त ने गणेश दर्शन के दौरान एक घायल पैपराजी की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। इसके अलावा अमेरिका से लौटे एक्टर गोविंदा ने भी घर पहुंचकर परिवार के साथ बप्पा के दर्शन किए और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की कामना की। अजय देवगन लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे। शिल्पा शेट्टी ने बेटी संग की ट्विनिंग गणेश उत्सव के दौरान एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी का एक खास अंदाज देखने को मिला। शिल्पा अपने घर पर गणपति बप्पा का स्वागत करते समय ढोल की थाप पर जमकर थिरकती नजर आईं। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद फोटोग्राफर्स के साथ कदम से कदम मिलाकर डांस किया। पूजन के समय शिल्पा और उनकी बेटी समीशा मैचिंग पीले और गुलाबी रंग के पारंपरिक परिधान में नजर आईं। दोनों मां-बेटी की यह ट्विनिंग काफी सराही जा रही है। पूजा के दौरान शिल्पा के पति राज कुंद्रा और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। संजय दत्त ने गाड़ी रुकवाकर घायल पैपराजी से पूछा हाल वहीं एक्टर संजय दत्त, समाज सेवी राहुल कनल के घर गणपति दर्शन के लिए पहुंचे। वहां जाते समय उनकी नजर एक घायल पैपराजी पर पड़ी। बाइक एक्सीडेंट के कारण फोटोग्राफर के पैर में चोट लगी थी। यह देखते ही संजय दत्त ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और उसका हाल-चाल जाना। जब फोटोग्राफर ने बताया कि उनका मैनेजर फोन नहीं उठा रहा है, तो संजय दत्त ने भरोसा दिलाया कि वे खुद इस मामले को देखेंगे। इससे पहले साल 2018 और 2019 में भी संजय दत्त पैपराजी की मदद करते देखे गए थे। अमेरिका से लौटकर बप्पा के दर्शन करने पहुंचे गोविंदा एक्टर गोविंदा अमेरिका का दौरा पूरा कर मुंबई लौटे और सीधे बप्पा का आशीर्वाद लेने पहुंचे। गोविंदा ने अपने बच्चों टीना और यशवर्धन के साथ आरती की और भगवान गणेश से उनके अच्छे भविष्य की प्रार्थना की। उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि उनके घर में गणपति बैठाने की परंपरा उनकी मां के समय से चली आ रही है। गोविंदा ने कहा, "मैं प्रार्थना करता हूं कि बप्पा यश को सफलता और समृद्धि दें ताकि लोग कहें कि वह गोविंदा से भी बेहतर है। वहीं बेटी टीना के लिए एक अच्छे घर और परिवार की कामना करता हूं।" इस बार गोविंदा की अनुपस्थिति में उनकी पत्नी सुनीता आहूजा ने बच्चों के साथ घर पर बप्पा का स्वागत किया था। सुनीता ने बताया था कि बीते साल बप्पा के आशीर्वाद से उन्हें काफी सफलता और नाम मिला है, इसलिए उन्होंने खुद अपने हाथों से गणपति प्रतिमा घर लाने का फैसला किया। वहीं अजय देवगन अपने बेटे के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे। इस दौरान वे अपने बेटे को भीड़ से बचाते नजर आए। ------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें सलमान खान ने एंटीलिया में लिया बप्पा का आशीर्वाद:तिलक लगवाकर फूल अर्पण किए, सिद्धार्थ-कियारा ने भी दर्शन किए; राधिका मर्चेंट की भक्तिमय परफॉर्मेंस सलमान खान अंबानी परिवार के गणपति सेलिब्रेशन का हिस्सा बने हैं। इस दौरान उन्होंने बप्पा का आशीर्वाद लिया और भगवान को फूल अर्पण किए। एंटीलिया में हुए गणपति सेलिब्रेशन की शुरुआत में राधिका मर्चेंट ने भक्तिमय प्रस्तुति दी। पूरी खबर पढ़ें

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Sunday, 20 September 2026

Remains of Roman structure found in Switzlerland

The remains of a previously unknown Roman structure have been discovered in Ligornetto, in the southern Swiss canton of Ticino. Archaeologists have uncovered a structure from the 2nd-3rd century A.D., a road and evidence of metalwork in the area. They also found a bronze bird fibula, probably a peacock, from the second or third century A.D.

Evidence of occupation in the Ligornetto area goes back to the beginning of the 2nd century B.C. and continued uninterrupted through the 10th century. We know from surviving inscriptions that in the Roman era, important families from the nearby urban centers of Mediolanum (Milan) and Novum Comum (Como) are known to have lived there, and a luxury villa from the period has been unearthed a half mile from the find site.

Excavations at the site began in June before new residential construction. Over about 5,380 square feet of area, the excavation uncovered remnants of a wooden structure from the final decades of the 1st century B.C., the oldest remains at the site. In the 2nd century A.D., the wooden structure was demolished, the ground leveled and a new masonry structure erected.

While there is more of the structure to be excavated, the parts of the building that have been unearthed so far are 26 feet wide and 36 feet long. It had at least six rooms. A portico about 10 feet wide was on the southern side overlooking a small road.

The building was altered again between 2nd and 3rd centuries. Additional walls were added to the interior and a platform was built of recycled bricks. The structure was permanently abandoned when it was destroyed in a fire in the 3rd century. Charcoal and remains of the collapsed roof were left untouched, so there was no further attempt to modify the building or salvage surviving materials.

While the southern portico overlooked a small road, a large strip of land behind the building extended for artisanal and agricultural activities. Postholes (indicating the presence of lightweight structures or temporary roofs) and a small path made of reused bricks, likely serving as a path and demarcating the plot, were discovered in this area.

The precise function of the building is still unclear, but the absence of fireplaces and other structures associated with domestic life seems to rule out residential use. A particularly noteworthy element, however, is the exceptional abundance of ferrous slag and bronze-working waste in the 2nd and 3rd century AD layers. These finds suggest the presence of significant metalworking activity in the immediate vicinity.



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Matthew Rhys' sister 'so proud of him' after historic Emmy wins

Rhys, from Cardiff, became the first person to win two lead acting Emmy prizes in one night.

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Rhys, from Cardiff, became the first person to win two lead acting Emmy prizes in one night.

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ईशा कोप्पिकर बोलीं- बप्पा ने कई इच्छाएं पूरी नहीं कीं:अब समझ आता है, शायद मेरे जीवन के लक्ष्य के लिए जरूरी था

गणेश चतुर्थी 2026 के मौके पर अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर के घर भी गणपति बप्पा विराजे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। ईशा ने गणपति की तैयारियों, बचपन की यादों से लेकर बप्पा से अपनी आस्था और अध्यात्म को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस बार उन्होंने घर पर साउथ इंडियन टेंपल की थीम पर डेकोरेशन कराया है। डेढ़ महीने पहले शुरू कर दी थीं तैयारियां ईशा ने बताया कि वह पिछले दो साल से गणपति के डेकोरेशन में फूलों पर ज्यादा फोकस कर रही थीं, लेकिन इस बार कुछ अलग करने का मन था। उन्होंने साउथ के मंदिरों की तर्ज पर गोल्डन थीम वाला डेकोरेशन कराया है। ईशा ने बताया कि इस बार उनके घर टिटवाला के गणपति विराजे हैं। पिछले साल उन्होंने दगड़ूशेठ के गणपति की स्थापना की थी। वह हर साल बप्पा के डेकोरेशन में कुछ बदलाव करने की कोशिश करती हैं। ईशा के मुताबिक, इस बार उन्होंने जुलाई के आखिर में ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। उन्होंने कहा कि जब किसी से बहुत प्यार होता है तो उसके लिए किए जाने वाले काम में मेहनत महसूस नहीं होती, सब कुछ अपने आप और बिना किसी दबाव के हो जाता है। बचपन में बप्पा के लिए पढ़ाई तक भूल जाती थीं ईशा ने अपने बचपन की गणपति की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनकी कॉलोनी में सार्वजनिक गणपति बैठते थे और पूरे 10 दिन तक उत्सव का माहौल रहता था। ईशा ने कहा कि बप्पा के लिए करीब दो महीने पहले से तैयारियां शुरू हो जाती थीं। नाटक, डांस शो और दूसरे कार्यक्रमों की रिहर्सल चलती रहती थीं। उस दौरान पढ़ाई पीछे छूट जाती थी। उन्होंने बताया कि स्कूल से आने के बाद बैग फेंककर सीधे गणपति की तैयारियों में निकल जाती थीं। घरवाले भी इस दौरान ज्यादा रोक-टोक नहीं करते थे। ईशा ने कहा कि बप्पा के विसर्जन के बाद घर और आसपास का माहौल एकदम खाली-खाली लगता था। उनके मुताबिक, बप्पा के चले जाने के बाद वह बेहद खालीपन महसूस करती थीं। पहले डेढ़ दिन रखते थे बप्पा, अब तीन दिन का किया उत्सव ईशा ने बताया कि पहले वह घर में डेढ़ दिन के लिए गणपति बप्पा की स्थापना करती थीं, लेकिन अब उन्होंने यह अवधि तीन दिन कर दी है। उन्होंने कहा कि डेढ़ दिन में लोगों के लिए अलग-अलग घरों में जाकर बप्पा के दर्शन करना मुश्किल हो जाता था। इसलिए उन्होंने तीन दिन तक बप्पा को घर में रखने का फैसला किया। ईशा ने बताया कि उनके स्टाफ के लोग भी गणेशोत्सव की तैयारियों में उनकी काफी मदद करते हैं। बप्पा से अपनी आस्था के बारे में बात करते हुए ईशा ने बताया कि पहले वह अपनी इच्छाओं की एक पूरी लिस्ट बनाकर मंदिर जाती थीं। वह लालबागचा राजा या सिद्धिविनायक के दर्शन करने पहुंचती थीं। ईशा ने कहा कि अब स्थिति बदल गई है। जैसे ही वह बप्पा के सामने जाती हैं, वह सब कुछ भूल जाती हैं। उन्होंने कहा कि बप्पा के प्रति इतना प्यार है कि उन्हें देखते ही आंखों में आंसू आ जाते हैं और फिर वह सिर्फ प्रणाम करके लौट आती हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस होता है कि बप्पा हमेशा उनके आसपास हैं और उनका साथ दे रहे हैं। ईशा बोलीं- बप्पा ने कई चीजें नहीं दीं, अब समझ आता है क्यों ईशा ने कहा कि जिंदगी के अलग-अलग दौर में हमारी जरूरतें और इच्छाएं बदलती रहती हैं। जो चीज 10 साल पहले जरूरी थी, जरूरी नहीं कि आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो। उन्होंने बताया कि उन्होंने जिंदगी में बप्पा से बहुत कुछ मांगा, लेकिन कई चीजें उन्हें नहीं मिलीं। हालांकि, अब वह समझती हैं कि इसके पीछे भी कोई वजह थी। ईशा के मुताबिक, अगर बप्पा उनकी हर इच्छा पूरी कर देते तो शायद वह अपने जीवन के असली लक्ष्य से भटक जातीं। उन्होंने कहा कि भगवान को पता होता है कि हमें जिंदगी में क्या बनना है और किस रास्ते पर जाना है। ईशा बोलीं- बचपन से ही अध्यात्म से जुड़ना चाहिए ईशा अध्यात्म को लेकर भी काफी सीरियस नजर आईं। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को बचपन से ही अध्यात्म के प्रति जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान के बारे में सिर्फ बुढ़ापे में सोचना सही नहीं है। जितनी कम उम्र में इंसान अपने अध्यात्म और भीतर की आवाज को समझना शुरू करेगा, उतना बेहतर होगा। बेटी रियाना ने बप्पा से मांगा पढ़ाई में अच्छा करने का आशीर्वाद बातचीत के दौरान ईशा की बेटी रियाना भी उनके साथ मौजूद थीं। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने बप्पा से क्या मांगा, तो उन्होंने पढ़ाई में अच्छा करने की इच्छा जताई। ईशा ने बताया कि रियाना पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स में भी काफी एक्टिव हैं। वह 100 और 200 मीटर दौड़ में हिस्सा लेती हैं और स्कूल की ओर से इंटर-स्कूल प्रतियोगिताओं में भी भाग लेती हैं। ईशा ने बताया कि रियाना ने बप्पा से अपनी पढ़ाई और खेल दोनों के लिए अच्छा करने की प्रार्थना की है।

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Saturday, 19 September 2026

Gold Christian amulet, Bronze Age stone seal found in Turkey

A Christian amulet from the 4th or 5th century A.D. has been discovered at the Turkmen Karahoyuk archaeological site in Konya, central Turkey. The small copper cylinder contained a sheet of gold just 0.1 millimeter thick rolled up. It has not been opened yet, but archaeologists believe a passage from the Bible was engraved on the gold.

Known as philacteria, amulets of this type were worn as a protective talismans in Late Antiquity. They are rare, especially in gold, and the closest comparable example was found in Germany. The size of the copper container indicates this one was probably worn by a child.

Karahoyuk was a settlement on a mound that today is 115 feet high. When it was founded, it was on the shore of a lake. It was first identified in a surface survey in 2017, and subsequent surveys examined the mound and surrounding area, finding ceramics and hieroglyphic Luwian language inscriptions that revealed its occupation dated back to the Bronze Age and continued to Late Antiquity.

Türkmen Karahöyük has actually been one of the most noteworthy sites in Anatolian archaeology for several years. The mound gained international attention in 2019 when the same research team discovered a stele inscribed in Luwian hieroglyphs. This stele, dedicated to King Hartapu, suggested that the mound may have been the capital of a great kingdom during the Iron Age, indicating that the region was the center of an unknown political power.

Excavations began in 2024 and having continued yearly. We are now in the third season of field excavations, and in addition to the amulet, archaeologists also found a stone seal with an inscription in Luwian hieroglyphics, two copper seals, and a clay seal impression. The stone seal dates back 3,500 years and the inscription includes a personal name and title of an official.

The stone seal bears the name “Kurunti-ziti.” According to [excavation co-director Assoc. Prof. Dr.] Massa, this name is linked to the god Kurunta, who held an important place in the Hittite world. Kurunta (Runtiya) was a protective deity associated with deer in Luwian and Hittite beliefs; his name frequently appears in both personal names and within royal circles. The clay seal impression, however, bears a different name. Massa states that these were seals used by administrative personnel in the region to seal documents, thus reflecting traces of an organized state bureaucracy at the mound.

King Hartapu ruled in the early 8th century B.C. The discovery of the seal reveals that the Karahoyuk settlement was already a regionally important administrative center far earlier than that, around 1500/1400 B.C.



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‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज:भगवान राम-सीता के विवाह की झलक दिखी; श्रेया घोषाल-अरिजीत सिंह ने आवाज दी

अपकमिंग फिल्म ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज हो गया है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही यह फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। गाने को श्रेया घोषाल और अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी है। इसके म्यूजिक को ए.आर. रहमान ने कंपोज, प्रोड्यूस और अरेंज किया है। गाने के लिरिक्स डॉ. कुमार विश्वास ने लिखे हैं। इस फिल्म के म्यूजिक पर ए.आर. रहमान के साथ हॉलीवुड के म्यूजिक कंपोजर हंस जिमर भी काम कर रहे हैं। देखें गाने के वीडियो की झलक- भगवान राम और सीता के विवाह पर केंद्रित है गाना ‘जय जय राम’ के विजुअल्स में सिया-राम के दिव्य संबंध को दिखाया गया है। गाने में भगवान राम और सीता के भव्य विवाह को भी दर्शाया गया है। गाने में भक्ति और आध्यात्मिक भाव को प्रमुखता दी गई है। गाने में ‘जय जय राम’ का बार-बार दोहराव किया गया है, जो इसे मंत्र की तरह प्रस्तुत करता है। लिरिक्स में भगवान राम के प्रति भक्त की आस्था, भरोसे और उनकी शरण में जाने की भावना व्यक्त की गई है। गाने की एक पंक्ति ‘जगत के अंधियारे, हमको घेरे सारे’ जीवन के अंधकार के बीच रोशनी की तलाश को दर्शाती है। गाने में ‘अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम’ जैसे पारंपरिक श्लोक का भी इस्तेमाल किया गया है। इससे रामायण की ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को आधुनिक संगीत से जोड़ा गया है। बता दें कि नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' के पहले पार्ट का ट्रेलर 30 जुलाई को सुबह 4:15 बजे, ब्रह्म मुहूर्त के शुभ अवसर पर दुनिया भर में लॉन्च किया था। 'रामायण' के ट्रेलर को हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में एक साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज किया गया था। देखें ट्रेलर की झलक- रणबीर कपूर बने हैं भगवान राम, यश निभा रहे रावण का रोल फिल्म 'रामायण' में बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बड़े कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। रणबीर कपूर फिल्म में भगवान राम की भूमिका में हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। साउथ सुपरस्टार यश इस फिल्म में रावण के रोल में दिखेंगे। इसके अलावा सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय और कुणाल कपूर भी अहम भूमिकाओं में शामिल हैं। ऑस्कर विनर्स एआर रहमान और हैंस जिमर दे रहे म्यूजिक फिल्म के संगीत को लेकर भी काफी समय से चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म में दो दिग्गज म्यूजिशियन एआर रहमान और ऑस्कर विजेता हैंस जिमर पहली बार एक साथ मिलकर बैकग्राउंड स्कोर और संगीत तैयार कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज और एक्टर यश के मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस के तहत किया जा रहा है। इस ग्रैंड प्रोजेक्ट को दो भागों में बनाया जा रहा है, जिसका पहला पार्ट नवंबर 2026 में दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा। 4000 करोड़ के बजट में बन रही देश की सबसे महंगी फिल्म 'दंगल' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म बना चुके डायरेक्टर नितेश तिवारी पिछले कई सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो भागों में बनने वाली इस फिल्म का कुल बजट 4000 करोड़ रुपए के करीब है, जो इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महंगी फिल्म बनाता है। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) की जिम्मेदारी ऑस्कर विनिंग कंपनी DNEG संभाल रही है। फिल्म के पहले पार्ट की शूटिंग पूरी हो चुकी है और इस समय इसके पोस्ट-प्रोडक्शन का काम तेजी से चल रहा है।

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Early Bowie music available to stream for first time

Previously unheard material from the start of the artist's career has been released for the first time.

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