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Archaic necropolis with luxury grave goods found in southern Italy

An archaic necropolis replete with well-preserved organic remains and luxury grave goods has been unearthed in Gragnano, outside of Naples, in Southern Italy’s Campania region. It dates to the first half of the 6th century B.C. and is exceptionally significant, both for the exceptional state of preservation of the graves and as a rich new source of information that will rewrite the history of the funerary traditions, commerce, artisanal activity, social organization and lifestyles of one of the most important pre-Roman communities in Southern Italy.

Gragnano is located in the ancient Ager Stabianus, the plain around the luxury resort residential center of Stabiae where opulent villas of the Roman elite overlooked the Bay of Naples. The necropolis far predates the summer palaces of the Roman aristocracy. Naples was founded as Parthenope, a colony of the Greek city of Cumae in the 8th century B.C. Its location on a promontory allowed the town to control maritime traffic and therefore trade in the gulf on the Tyrrhenian Sea. It was then refounded as Neapolis (New City) in the early 6th century B.C. by Cumaen aristocrats.

Archaeologists discovered the burial ground in a preventative archaeology excavation before the planned expansion of the historic Pastificio Garofalo pasta factory. Since February 2025, the team unearthed 85 graves, identifying the remains of 16 adults, 4 children and 15 infants.

The necropolis dates to the time of the founding of Neaopolis, and the high quality of the grave goods attests to the elite status of the people interred there. They were buried in sealed tufa sarcophagi that withstood the elements so well that archaeologists were able to recover organic artifacts including textiles, wooden objects and woven baskets from the graves.

Both inside and outside of the sarcophagi also discovered rare goods imported from around the Mediterranean. Among the luxury objects found are Egyptian scarabs from Naukratis (a Greek trading colony in the Nile Delta), zoomorphic carved amber, finely carved silver, a wide variety of Etruscan bronzes, Etruscan bucchero pottery, imported Attic pottery and weapons. Whole sets of pottery were found completely intact with all component parts.

The finds, including the surviving skeletal remains, are being studied and conserved in the archaeological laboratories of the Superintendency. Gragnano city officials are proposing that some of the finds be exhibited in the Gragnano Pasta Museum which will be built on the campus of the factory a short distance from where the necropolis was discovered.



* This article was originally published here

Shakira, Madonna, Justin Bieber and BTS perform at colourful World Cup half-time show

Robbie Williams and Jennifer Hudson also performed, with Kylie Jenner and Timothee Chalamet among the celebrities in the crowds.

from BBC News https://ift.tt/zbku8Ts

नसीरुद्दीन शाह CJP के सपोर्ट में जंतर-मंतर नहीं पहुंचे:दावा गलत, मुंबई के रीगल सिनेमा के बाहर का है वायरल वीडियो

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के बीच एक्टर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। दावा किया गया कि वह अपने बेटे विवान शाह के साथ प्रदर्शन के समर्थन में वहां पहुंचे थे। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि नसीरुद्दीन शाह ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया और चुपचाप एक खंभे के सहारे खड़े होकर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद लौटते छात्रों को देखते रहे। इन दावों के साथ वीडियो को बड़े पैमाने पर शेयर किया गया। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो दिल्ली का नहीं, बल्कि मुंबई के कोलाबा स्थित रीगल सिनेमा के बाहर का है। यह फुटेज सबसे पहले राजेश गौर नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया था। वीडियो में कैमरा घुमाकर रीगल सिनेमा के बाहर का सीन भी दिखाया गया है, जहां फिल्म 'राजा शिवाजी' और 'पति पत्नी और वो 2' का प्रदर्शन हो रहा था। दूसरी फिल्म में आयुष्मान खुराना, वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह नजर आए हैं। वहीं, वायरल क्लिप में वीडियो का वह हिस्सा हटा दिया गया, जिससे यह साफ होता था कि नसीरुद्दीन शाह थिएटर के बाहर थे, न कि जंतर-मंतर पर। राजेश गौर नाम के इंस्टाग्राम यूजर ने यह वीडियो पहली बार 15 जुलाई को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था और 20 जुलाई को दोबारा शेयर किया। बाद में सोमवार को इसे इस दावे के साथ वायरल किया गया कि नसीरुद्दीन शाह जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। वहीं, खास बात यह है कि सोमवार को ही नसीरुद्दीन शाह का 76वां जन्मदिन था। शबाना आजमी जंतर-मंतर प्रदर्शन में पहुंचीं गौरतलब है कि शबाना आजमी, स्वरा भास्कर और प्रकाश राज जैसे कई सेलेब्स आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे थे। पिछले तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता नेहा, अमीन और मनीष कुमार का अनशन सोमवार को एक्ट्रेस शबाना आजमी और एक्टर प्रकाश राज ने उन्हें पानी पिलाकर खत्म कराया। पूरी खबर यहां पढ़ें भले ही नसीरुद्दीन शाह जंतर-मंतर नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने CJP के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रिएक्शन दिया था। नसीरुद्दीन शाह ने अपनी पत्नी रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय और अर्थशास्त्री जयती घोष के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया था। उन्होंने बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का अनुरोध करते हुए कहा था, 'यह लड़ाई एक मैराथन है, कोई स्प्रिंट (छोटी दौड़) नहीं। देश के युवाओं के नेतृत्व के लिए हमें आगे आपकी जरूरत है, इसलिए सेहत बचाना जरूरी है।'

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नसीरुद्दीन शाह CJP के सपोर्ट में जंतर-मंतर नहीं पहुंचे:दावा गलत, मुंबई के रीगल सिनेमा के बाहर का है वायरल वीडियो

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के बीच एक्टर नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। दावा किया गया कि वह अपने बेटे विवान शाह के साथ प्रदर्शन के समर्थन में वहां पहुंचे थे। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि नसीरुद्दीन शाह ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया और चुपचाप एक खंभे के सहारे खड़े होकर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद लौटते छात्रों को देखते रहे। इन दावों के साथ वीडियो को बड़े पैमाने पर शेयर किया गया। हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो दिल्ली का नहीं, बल्कि मुंबई के कोलाबा स्थित रीगल सिनेमा के बाहर का है। वीडियो में नसीरुद्दीन शाह अपने बेटे के साथ सड़क किनारे खड़े दिखाई देते हैं। यह फुटेज सबसे पहले राजेश गौर नाम के एक इंस्टाग्राम यूजर ने शेयर किया था। वीडियो में कैमरा घुमाकर रीगल सिनेमा के बाहर का सीन भी दिखाया गया है, जहां फिल्म 'राजा शिवाजी' और 'पति पत्नी और वो 2' का प्रदर्शन हो रहा था। दूसरी फिल्म में आयुष्मान खुराना, वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह नजर आए हैं। वहीं, वायरल क्लिप में वीडियो का वह हिस्सा हटा दिया गया, जिससे यह साफ होता था कि नसीरुद्दीन शाह थिएटर के बाहर थे, न कि जंतर-मंतर पर। वीडियो में रीगल सिनेमा लिखा और 'राजा शिवाजी' व 'पति पत्नी और वो 2' के पोस्टर दिख रहे हैं। राजेश गौर नाम के इंस्टाग्राम यूजर ने यह वीडियो पहली बार 15 जुलाई को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया था और 20 जुलाई को दोबारा शेयर किया। बाद में सोमवार को इसे इस दावे के साथ वायरल किया गया कि नसीरुद्दीन शाह जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हुए थे। वहीं, खास बात यह है कि सोमवार को ही नसीरुद्दीन शाह का 76वां जन्मदिन था। शबाना आजमी जंतर-मंतर प्रदर्शन में पहुंचीं गौरतलब है कि शबाना आजमी, स्वरा भास्कर और प्रकाश राज जैसे कई सेलेब्स आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे थे। पिछले तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता नेहा, अमीन और मनीष कुमार का अनशन सोमवार को एक्ट्रेस शबाना आजमी और एक्टर प्रकाश राज ने उन्हें पानी पिलाकर खत्म कराया। पूरी खबर यहां पढ़ें भले ही नसीरुद्दीन शाह जंतर-मंतर नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने CJP के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर रिएक्शन दिया था। नसीरुद्दीन शाह ने अपनी पत्नी रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय और अर्थशास्त्री जयती घोष के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया था। उन्होंने बिगड़ती सेहत को देखते हुए सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने का अनुरोध करते हुए कहा था, 'यह लड़ाई एक मैराथन है, कोई स्प्रिंट (छोटी दौड़) नहीं। देश के युवाओं के नेतृत्व के लिए हमें आगे आपकी जरूरत है, इसलिए सेहत बचाना जरूरी है।'

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छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की सेलेब्स ने की आलोचना:सलमान के जीजा आयुष बोले- प्रदर्शन में लाठीचार्ज दुखद; भूमि पेडनेकर, अनुराग कश्यप ने भी जताई नाराजगी

सोनू सूद, अनुराग कश्यप, आयुष शर्मा, हुमा कुरैशी और भूमि पेडनेकर समेत बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज की आलोचना की है। बॉलीवुड एक्टर और सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा ने जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र की असली पहचान सिर्फ वोट नहीं, बल्कि हर नागरिक की आवाज है। उनके मुताबिक, चाहे छात्र हों या देश का कोई भी नागरिक, जब वे अपनी बात रखते हैं तो उसे सुना जाना चाहिए, दबाया नहीं जाना चाहिए। आयुष शर्मा ने कहा कि सरकार ने आखिरकार छात्रों की आवाज सुनी, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों को टियर गैस और लाठीचार्ज का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए युवाओं को ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, जो चिंताजनक है। एक्टर सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हमारे छात्रों को लाठियां नहीं, गले लगाने वाले हाथ चाहिए।' पुलिस कार्रवाई पर अनुराग ने सवाल उठाए फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, वर्दी पहनने के लिए आत्मा का, आत्मीयता का, सबका सौदा करना पड़ता है। मालूम नहीं था। क्या इस देश में कोई पुलिसवाला है, जो खड़ा होकर बोल सके, 'मैं इस आदेश का पालन नहीं करूंगा, क्योंकि यह गलत है?' हुमा कुरैशी ने लाठीचार्ज को दुखद बताया हुमा कुरैशी ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा, आज की तस्वीरें मेरे जहन में लंबे समय तक रहेंगी। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर इतनी बेरहमी और लाठियों का इस्तेमाल होते देख मुझे बहुत दुख हुआ। इसे निश्चित रूप से ज्यादा सब्र, लोगों की बात सुनने और बातचीत के जरिए संभाला जा सकता था। उन्होंने आगे लिखा, हम भारत के लोगों ने ही इस सरकार को चुना है और आज हम सभी को सवाल पूछने और जवाबदेही की उम्मीद करने की जरूरत है। हम एक बहुत बड़ा और विविधताओं वाला देश हैं। जरूरी नहीं कि हम हर मुद्दे पर सहमत हों, लेकिन हम निश्चित रूप से इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि बल प्रयोग करने से पहले हर नागरिक की बात सम्मान के साथ सुनी जानी चाहिए। हुमा ने अंत में कहा कि हर उस छात्र और नागरिक का सम्मान है, जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मान्यताओं के लिए खड़े होने का फैसला किया। जय हिंद।" एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा, ‘हिंसा समाधान नहीं है।’ भूमि पेडनेकर बोलीं- हिंसा समाधान नहीं है भूमि ने कहा कि देश का अपने युवाओं के प्रति यह फर्ज है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आंदोलन हिंसक न हो और अपने मकसद से न भटके। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र बातचीत से ही बनते हैं। भूमि ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की भी मांग की और पेपर लीक, परीक्षा में विफलता, समान अवसर न मिलना, शिक्षकों की कमी और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव जैसे मुद्दों को उठाया, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। यूट्यूबर एल्विश यादव ने भी हिंसा का विरोध करते हुए X अकाउंट पर लिखा, मैं न तो बीजेपी का समर्थक हूं और न ही कांग्रेस का, लेकिन छात्रों के साथ जो हो रहा है, वह पूरी तरह गलत है। जो छात्र अपनी जायज समस्याओं को लेकर सामने आए, उनके साथ हिंसा नहीं होनी चाहिए थी। उनकी बातों को सुना जाना चाहिए और उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चले प्रदर्शन के दौरान कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। सुबह 8 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर मार्च किया। आंदोलनकारी जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक होते हुए संसद के करीब पहुंचे। संसद में घुसने की कोशिश की, जिसके बाद संसद की सुरक्षा बढ़ा दी गई, मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। देर शाम को पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं। इसमें 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी और इतने ही प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। CJP ने आरोप लगाया कि निहत्थे आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोल दागे। इस दौरान कई लोगों के घायल होने की फोटो सामने आईं। पूरी खबर यहां पढ़ें.... संसद भवन के पास से प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें यह खबर भी पढ़ें…. CJP आंदोलन पर आमने-सामने फिल्मी सितारे:शबाना आजमी-प्रकाश राज ने ट्रक पर चढ़कर किया प्रदर्शन, कंगना-हेमा ने कहा- प्रोटेस्ट का मतलब नहीं, उत्पात मचा रहे नीट परीक्षा में गड़बड़ी और शिक्षा सुधारों को लेकर दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन पर बॉलीवुड दो धड़ों में बंट गया है। एक तरफ जहां शबाना आजमी और प्रकाश राज जैसे सीनियर कलाकार सड़कों पर उतरकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी सांसद कंगना रनोट और हेमा मालिनी ने इस प्रदर्शन को गलत बताया है। पूरी खबर यहां पढ़ें….

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Massive Assyrian stele found in Nineveh

A joint team of Iraqi and American archaeologists have unearthed a large Late Assyrian stele near the Sun Gate of Nineveh in Mosul, Iraq. It dates to the 7th century B.C. and lists building projects ordered by Ashurbanipal, king of Assyria from 668 to 627 B.C. Its monumental size and the information engraved on it makes it one of the most important records of an Assyrian monarch.

The stele is 6.6 feet tall and 5.1 wide and was carved out of a single block of Mosul marble. It has a semi-circular top and a rectangular body. The front side is engraved with a large relief of Ashurbanipal, characterized by a bronze helmet. Two smaller reliefs on the back are also believed to depict Assyrian kings. They are accompanied by a cuneiform inscription. It has not been fully deciphered yet, but preliminary translations describe buildings constructed in Nineveh and elsewhere in the Assyrian empire.

The Sun Gate, also known as the Shamash Gate or Bab Shamash, is one of gates in the city’s massive defensive walls. It is on the eastern wall and is still being used as a gate for car traffic today.

Many of Nineveh’s sites, including parts of its walls and the Mosul Museum, were damaged or destroyed by the Islamic State between 2014 and 2017.

Restoration work resumed after Mosul’s liberation, including a continuing project at the Sun Gate run with the University of Chicago’s Institute for the Study of Ancient Cultures. Officials say the stele was found during that work.

Authorities have not decided where the Assyrian stele will be displayed permanently, though officials say it could remain near Iraq’s Sun Gate or move to the planned Mosul Civilization Museum.



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जंतर-मंतर में शबाना आजमी ने खत्म कराया छात्रों का अनशन:कविता कौशिक पुलिस से बोलीं- मेरे देश के बच्चों पर हाथ मत उठाना

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। आज उनका प्रस्तावित संसद मार्च है। जंतर-मंतर पर पिछले तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता नेहा, अमीन और मनीष कुमार का अनशन सोमवार को समाप्त हो गया। ये तीनों ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े हैं। एक्ट्रेस शबाना आजमी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा और एक्टर प्रकाश राज ने उन्हें पानी पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया। इससे पहले रविवार को भी शबाना आजमी और प्रकाश राज जंतर-मंतर में मौजूद थे। कविता कौशिक ने वीडियो शेयर किया टीवी एक्ट्रेस कविता कौशिक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के सपोर्ट में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस से अपील की कि प्रदर्शनकारियों के साथ संयम और मानवीय व्यवहार किया जाए। वीडियो में कविता ने कहा कि पुलिसकर्मियों की भी अपनी फैमिली होती है और उन्हें यह याद रखना चाहिए कि सामने खड़े लोग भी देश के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि हर परिवार चाहता है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय उसे एक योग्य डॉक्टर मिले और इसी वजह से कई छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कविता ने पुलिस से अनुरोध किया कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों या आम नागरिकों पर हाथ न उठाया जाए और उनके खिलाफ बल का प्रयोग न किया जाए। गौरतलब है कि इस प्रदर्शन में एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके सपोर्ट में कई बॉलीवुड सेलेब्स आ चुके हैं, जिनमें सोनी राजदान, शबाना आजमी, सोनाक्षी सिन्हा, रूबीना दिलाइक, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अनुराग कश्यप, फातिमा सना शेख और अतुल कुलकर्णी जैसे कई सेलेब्स शामिल हैं। ये सभी वांगचुक के समर्थन में पोस्ट कर चुके हैं। अभिनेत्री स्वरा भास्कर जंतर-मंतर पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। वहीं, इससे पहले प्रकाश राज भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… …………….. यह खबर भी पढ़ें…. 3 इडियट्स के 'चतुर' बोले-नहीं चाहता फुंसुख वांगडू मर जाएं:जीनत अमान ने कहा- अपने अच्छे दिमाग को चुपचाप मरते हुए मत देखिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में वीडियो पोस्ट करते हुए एक्टर ओमी वैद्य ने उन्हें प्रेरणादायक बताते हुए उनकी जान बचाने की अपील की थी। वहीं, जीनत अमान ने सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग की और कहा था कि यह देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। पूरी खबर यहां पढें…

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सलमान ने देर रात तस्वीरें शेयर कीं:हेल्थ को लेकर चिंता के बीच पूछा- 'आप लोगों की तबीयत कैसी है?', नए वीडियो में भी थके दिखे

मुंबई में एक इवेंट के दौरान सलमान खान का नया लुक चर्चा में आया, जहां वे पहले से काफी दुबले नजर आए। इसके बाद फैंस उनकी सेहत को लेकर चिंता जताने लगे और कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया। इसी बीच रविवार देर रात सलमान ने X पर अपनी नई ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘आप लोगों की तबीयत कैसी है?’ सलमान ने तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें वह वायरल वीडियो की तुलना में काफी बेहतर और फिट नजर आ रहे हैं। वहीं, इस बीच सलमान का एक और वीडियो सामने आया। जिसमें वे अपने वायरल वीडियो की तुलना में थोड़ा बेहतर लग रहे हैं। हालांकि, उनकी आंखों के आसपास हल्की थकान दिखाई दे रही है। SRA के इवेंट में पहुंचे थे सलमान खान दरअसल, सलमान खान शुक्रवार को मुंबई के स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के दफ्तर में एक खास कार्यक्रम के सिलसिले में गए थे। वहां उन्होंने अथॉरिटी के नए डेटा कलेक्शन एंड वेरिफिकेशन सपोर्ट सेंटर (आईटी सर्वर रूम) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां भी सौंपीं। कार्यक्रम के दौरान सलमान खान के साथ उनके बॉडीगार्ड शेरा भी मौजूद थे। इस इवेंट के कई वीडियो इंटरनेट पर सामने आए, जिसके बाद उनकी फिजिकल कंडीशन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। देखें इवेंट की तस्वीरें- सोशल मीडिया पर फैंस ने किए कमेंट सलमान के लुक और सेहत को लेकर फैंस ने चिंता जताई थी। एक यूजर ने लिखा कि वे बीमार लग रहे हैं, भगवान उन्हें ठीक रखे। एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया कि उन्हें कोई हेल्थ इश्यू लग रहा है, क्योंकि वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं। एक अन्य फैन ने लिखा कि उनकी आंखों में थकान साफ दिख रही है। फिल्मों में अकेले 50 लोगों से लड़ने वाले भाई का औरा इस वक्त गायब लग रहा है। हालांकि, कुछ लोगों ने सलमान का सपोर्ट भी किया। एक यूजर ने लिखा कि बॉलीवुड के स्टार्स अपनी कमियों को छिपाने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं, लेकिन सलमान ने बिना किसी झिझक के कैमरे के सामने अपनी असली उम्र को स्वीकार किया है। इसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए। सलमान खान जल्द फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' में नजर आएंगे। पिछले दिनों अफवाह सामने आई थी कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। जिस पर सलमान खान फिल्म्स ने कहा था कि फिल्म की CBFC सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी होने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। बयान में कहा गया था कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजा ही नहीं गया है। फिल्म 'मातृभूमि' साल 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प पर आधारित है। पहले इस फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' रखा गया था। फिल्म को पहले 17 अप्रैल को ईद के मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी रिलीज डेट टल गई। इस फिल्म का प्रोडक्शन सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने किया है और इसके डायरेक्टर अपूर्व लाखिया हैं। फिल्म में सलमान खान के साथ एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का म्यूजिक हिमेश रेशमिया ने तैयार किया है। फिल्म 'मातृभूमि' का टीजर 27 दिसंबर 2025 को सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर रिलीज किया गया था। इस फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। कर्नल संतोष बाबू ने ही गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के दौरान भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व किया था। इस झड़प में वे शहीद हो गए थे। वहीं, सलमान इन दिनों फिल्म 'SVC63' की शूटिंग कर रहे हैं। वामशी पेडिपल्ली के डायरेक्शन में बन रही इस एक्शन फिल्म को दिल राजू की श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस प्रोड्यूस कर रही है। फिल्म में नयनतारा पहली बार सलमान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। फिल्म ईद 2027 पर रिलीज होगी।

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नसीरुद्दीन शाह@76: पाकिस्तानी लड़की से छिपकर शादी की:दोस्त ने जलन में मारा चाकू, मां ने पूछा था- क्या रत्ना मुस्लिम बनेगी?

साल 1960 के दशक की बात है। एक दुबला-पतला लड़का था, जिसे एक्टर बनने के लिए मुंबई जाना था। एक दिन उनके एक दोस्त की गर्लफ्रेंड का पत्र आया कि मुंबई आ जाओ, मेरे पापा फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं, वो तुम्हारी मदद करेंगे। जिसके बाद वो मुंबई के निकल पड़ा। हालांकि जिस लड़की के भरोसे वो मुंबई पहुंचा, वो खुद बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। जिसके बाद उसने कुछ दिन रिश्तेदार के घर गुजारे, फिर वहां से भी जाना पड़ा। जेब खाली हुई तो जरी की फैक्ट्री के हॉल में रातें बिताईं। जहां वो तीस-चालीस लोगों के साथ फर्श पर वो सोया। कई बार लोकल ट्रेन में बिना टिकट सफर किया। बाद में यही लड़का आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे शानदार अभिनेताओं में से एक बना। स्पर्श, मासूम, सरफरोश, ए वेडनेसडे और इश्किया जैसी कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से उसने दर्शकों का दिल जीता। जी हां, हम बात कर रहे हैं नसीरुद्दीन शाह की। आज उनके 76वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने किस्से। 16 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई चले गए थे नसीरुद्दीन शाह अपनी आत्मकथा एंड देन वन डे में लिखते हैं दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उनको ऐसा लगा जैसे जिंदगी का सबसे मुश्किल पड़ाव पीछे छूट चुका हो। उनके पिता चाहते थे कि वो डॉक्टर बनें, अफसर बनें या फौज में जाएं। नेशनल डिफेंस अकादमी का फॉर्म भी भरवा दिया गया। मगर नसीरुद्दीन शाह के दिल में एक ही सपना था- एक्टर बनना और वह सपना मुंबई जाकर ही पूरा हो सकता था। कॉलेज में दाखिला तो हो गया, लेकिन क्लास से ज्यादा वक्त वो सिनेमाघरों में बिताते थे। फीस के पैसे भी फिल्मों पर खर्च होने लगे। इसी दौरान उन्होंने मुंबई में रहने वाली अपने एक दोस्त की गर्लफ्रेंड को पत्र लिखा, जिसके पिता फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट थे। उसका जवाब आया, ‘मुंबई आ जाओ, पापा तुम्हारी मदद करेंगे।’ बस, इतना सुनना था कि नसीरुद्दीन ने फीस के पैसों से ट्रेन का टिकट खरीद लिया, घड़ी और साइकिल बेचने की योजना बनाई और जेब में करीब पांच सौ रुपए लेकर मुंबई के लिए निकल पड़े। हालांकि, जिस लड़की के परिवार के भरोसे वह मुंबई आए थे, वही बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। इसके बाद कुछ दिन वह रिश्तेदार के घर में रहे, लेकिन जब सबको समझ आ गया कि यह लड़का वापस जाने वाला नहीं है, तो वहां से चले गए और एक जरी कढ़ाई की फैक्ट्री के बड़े-से हॉल में रहने लगे। रात में वहीं तीस-चालीस लोग फर्श पर सोते थे। इस दौरान उन्होंने वेटर बनने की कोशिश की और ताज होटल में बेलबॉय की नौकरी के लिए आवेदन दिया, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। फिर एक दिन एक दलाल उन्हें फिल्मों में एक्स्ट्रा कलाकार का काम दिलाने ले गया। मेहनताना था सिर्फ साढ़े सात रुपए। फिल्म थी अमन, जिसमें राजेंद्र कुमार मुख्य भूमिका निभा रहे थे। अंतिम यात्रा वाले सीन में नसीरुद्दीन भी भीड़ का हिस्सा बने। कैमरे के सामने खड़े होकर उन्हें लगा जैसे उनका सपना पूरा हो गया हो। वहीं, फिल्म आने के बाद वह हंसते हुए कहा करते थे, “दोस्तो, फिल्म में और भी सीन थे, लेकिन वह इसलिए काट दिए गए क्योंकि मेरी एक्टिंग बहुत अच्छी थी।” दिलीप कुमार ने फिल्मों से दूर रहने की सलाह दी घर से बिना बताए मुंबई आए नसीरुद्दीन शाह एक दिन पामपोश रेस्तरां के बाहर फुटपाथ पर बैठे थे। तभी एक लंबी, चमचमाती ग्रे रंग की लिमोजीन उनके सामने आकर रुकी। पीछे का दरवाजा खुला और ऊंची एड़ी की सैंडल पहने एक महिला उतरीं। उन्होंने पूछा, 'क्या तुम्हारा नाम नसीर है?' शाह ने हैरानी में सिर हिलाया। महिला ने बिना समय गंवाए उन्हें कार की आगे वाली सीट पर बैठने का इशारा किया। थोड़ी देर बाद उन्होंने उस महिला को पहचान लिया। वे थीं सईदा खान, दिलीप कुमार की सबसे छोटी बहन। तब नसीरुद्दीन शाह को समझ आया कि आखिर उन्हें ढूंढ़ कैसे लिया गया। उनके पिता अजमेर की उस सूफी दरगाह के प्रशासक रह चुके थे, जहां दिलीप कुमार की एक और बहन सकीना अक्सर आया करती थीं। दो महीने तक उनका कोई पता न मिलने के बाद आखिरकार पिता ने उन्हीं से संपर्क किया और एक पुराने परिचय के सहारे दिलीप कुमार का परिवार शाह तक पहुंचा था। कार दिलीप कुमार के बंगले में दाखिल हुई। ऊपर ले जाकर उनकी मुलाकात सकीना से कराई गई। अजमेर में वे उनसे पहले मिल चुके थे, लेकिन इस बार सकीना बेहद नाराज थीं। उनके सामने वे रो पड़े और माफी मांगने लगे। आखिरकार उन्होंने घर लौटने की हामी भर दी। बंगले के बेसमेंट में उन्हें रहने की जगह दे दी गई। कमरा साधारण था, लेकिन खाने-पीने और नहाने की पूरी व्यवस्था थी। एक दिन उनकी मुलाकात खुद दिलीप कुमार से भी हुई। शाह उनसे काम मांगना चाहते थे, लेकिन हिम्मत जुटा पाते, उससे पहले ही दिलीप कुमार ने उन्हें समझा दिया कि अच्छे परिवारों के लड़कों को फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आना चाहिए। कुछ दिनों बाद दिलीप कुमार के परिवार ने शाह को मेरठ भेज दिया। लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने बताया था कि जब दिलीप कुमार ने उनसे कहा, 'अच्छे घरों के लड़कों को फिल्मों में नहीं आना चाहिए,' तो उस वक्त वो दिलीप कुमार से पूछना चाहते थे, 'अगर ऐसा है, तो फिर आप खुद इस इंडस्ट्री में क्यों आए? आप भी तो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से थे।' हालांकि, उनकी ऐसा कहने की हिम्मत नहीं हुई। 34 साल की पाकिस्तानी औरत से गुपचुप शादी की थी नसीरुद्दीन शाह की पहली शादी परवीन मुराद उर्फ मनारा सीकरी से हुई थी। उनकी मुलाकात अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी। परवीन पाकिस्तान की नागरिक थीं और एमबीबीएस के आखिरी साल की छात्रा थीं। उम्र में वह नसीरुद्दीन से 14-15 साल बड़ी थीं। बचपन से कराची में पली-बढ़ीं और अपनी मां के पास अलीगढ़ आई थीं। पढ़ाई के बहाने भारत में ही रुकती चली गईं। दोनों की दोस्ती बहुत जल्दी गहरे रिश्ते में बदल गई। धीरे-धीरे नसीरुद्दीन ने अपने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से ज्यादा वक्त परवीन और उनकी मां के घर बिताना शुरू कर दिया। यह ऐसा दौर था, जब भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण थे। परवीन का स्टूडेंट वीजा खत्म होने वाला था। अगर वह भारत छोड़तीं, तो शायद दोबारा लौट नहीं पातीं। भारतीय नागरिकता पाने का सबसे आसान रास्ता शादी था। जिसके बाद 1 नवंबर 1969 को दोनों ने गुपचुप शादी कर ली। इस निकाह में गवाह सिर्फ दो महिलाएं थीं- परवीन की मां और उनके एक प्रोफेसर मित्र की पत्नी। नसीरुद्दीन के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, लेकिन अलीगढ़ जैसे शहर में कोई राज ज्यादा दिन छिप नहीं सकता था। कुछ ही दिनों में पूरी यूनिवर्सिटी में यह खबर फैल गई। फिर यह बात मेरठ और सरधना तक पहुंच गई, जहां नसीरुद्दीन का परिवार रहता था। उनके पिता को जब बेटे की शादी का पता चला, तो उन्हें गहरा झटका लगा। उन्होंने बेटे को पत्र लिखकर भोला और मूर्ख तक कह दिया। मां ने दर्द भरे शब्दों में पूछा, 'अगर तुम हमें बता देते, तो क्या हम मना कर देते?' बेटी के जन्म पर खुश होने के बजाय निराश हुए थे 1969 का साल था। नसीरुद्दीन शाह ने अभी-अभी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया था। तभी एक सुबह हॉस्टल में उन्हें एक तार मिला, 'परवीन को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है।' वह बिना देर किए दिल्ली से अलीगढ़ जाने वाली पहली बस में बैठ गए। करीब दोपहर में अस्पताल पहुंचे तो बाहर परवीन की मां खड़ी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'सुबह छह बजे बेटी हुई है।' नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया है कि उस पल वह खुश नहीं हुए। उन्हें बेटे की उम्मीद थी। उन्होंने मन ही मन एक बेटे की कल्पना कर रखी थी, जिसे वह क्रिकेट खेलना सिखाएंगे, बंदूक चलाना सिखाएंगे और अपने जैसा बनाएंगे। बेटी की खबर सुनते ही वह बुरी तरह निराश हो गए। उन्हें डर था कि दोस्त उनका मजाक उड़ाएंगे। वहीं, बेटी के जन्म के कुछ समय बाद ही नसीरुद्दीन शाह और परवीन मुराद के रिश्ते में दरार आ गई। हालात ऐसे बने कि दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अलगाव के बाद परवीन बेटी हीबा को लेकर पहले लंदन और फिर ईरान चली गईं। बाद में हीबा शाह जब लगभग 12 साल की हुईं, तब अपने पिता के पास लौट आईं। पिता की कब्र के सामने दिल की बातें कही थीं नसीरुद्दीन शाह को जब यह खबर मिली कि उनके पिता का निधन हो गया है और उन्हें आज मेरठ के सरधना में दफनाया जाएगा। उस वक्त उनके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने रत्ना पाठक से 500 रुपए उधार लिए और एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन सभी फ्लाइटें फुल थीं। उन्हें सलाह दी गई थी कि पिता के निधन वाला तार दिखाने पर इमरजेंसी सीट मिल सकती है, लेकिन काउंटर पर कर्मचारी के रूड व्यवहार के कारण उन्होंने किसी से मदद नहीं मांगी और वापस लौट आए। इस तरह वह अपने पिता की आखिरी विदाई में शामिल नहीं हो सके। बाद में जब नसीरुद्दीन शाह सरधना पहुंचे, तो पिता की कब्र पर बैठकर उन्होंने अपने दिल की सारी बातें कहीं, जो वह उनके जीते-जी कभी नहीं कह पाए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक नई फिल्म की है, जिसमें एक हिंदू पुजारी का किरदार निभाया है। अब 1857 के एक बागी की भूमिका निभाने वाले हैं। यह भी कहा कि उन्हें रत्ना से प्यार हो गया है और अब उनकी कमाई भी पहले से बेहतर है। नसीरुद्दीन शाह को लगा जैसे पिता उनका हर शब्द सुन रहे हों। मां ने पूछा था- क्या रत्ना धर्म बदलेंगी? नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक की शादी 1 अप्रैल 1982 को रत्ना की मां के घर पर एक सादे रजिस्टर्ड विवाह के रूप में हुई थी। दोनों की मुलाकात 1975 में 'संभोग से संन्यास तक' नामक नाटक की रिहर्सल के दौरान हुई थी। जब नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने शादी का फैसला किया, तब नसीरुद्दीन ने एक दिन हिम्मत करके अपनी मां से कहा कि अब वे रत्ना से शादी करना चाहते हैं। मां ने उनकी पूरी बात सुनी। फिर बहुत शांत स्वर में सिर्फ एक सवाल पूछा, 'क्या तुम रत्ना से इस्लाम कबूल करने के लिए कहोगे?' जिस पर नसीरुद्दीन ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, 'नहीं... मैं उनसे ऐसा कभी नहीं कहूंगा।' उन्होंने साफ कर दिया कि अगर शादी होगी, तो रत्ना अपनी पहचान और अपने धर्म के साथ ही इस रिश्ते में आएंगी। वे उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डालेंगे। इसके बाद उनकी मां खुद रत्ना के घर पहुंचीं। उन्होंने रत्ना की मां और मशहूर अभिनेत्री दीना पाठक से उनकी बेटी का हाथ मांगा। दोस्त जसपाल ने पीछे से चाकू मारा नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में बताया था कि साल 1977 में फिल्म भूमिका की शूटिंग के दौरान उनके दोस्त राजेंद्र जसपाल ने उन पर चाकू से हमला कर दिया था। बताया जाता है कि जसपाल ने शाह पर उनकी सफलता और करियर में मिल रही कामयाबी से जलन के कारण हमला किया था। उस समय नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी एक रेस्तरां में खाना खा रहे थे। तभी जसपाल वहां पहुंचा और कुछ देर बाद पीछे से नसीरुद्दीन शाह की पीठ पर चाकू से वार कर दिया। ओम पुरी ने तुरंत बहादुरी दिखाते हुए जसपाल को दोबारा हमला करने से रोक लिया। इसके बाद रेस्तरां में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने जसपाल को गिरफ्तार कर लिया। शाह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दो दिन जेल में रहने के बाद जसपाल को जमानत मिल गई थी। बाद में एक दिन जसपाल अचानक शाह के घर पहुंचा, लेकिन उसने न माफी मांगी और न ही हमले पर अफसोस जताया। बाद में दोनों अदालत पहुंचे, जहां शाह ने उसके खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद अदालत ने केस बंद कर दिया। शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर और अनुपम खेर को जोकर कहा था नसीरुद्दीन शाह बॉलीवुड के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं, जो अपने बेबाक और बोल्ड बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समय-समय पर कई अभिनेताओं की आलोचना की है। उन्होंने शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर तो राजेश खन्ना को सीमित और घटिया एक्टर बताया था। वहीं, शाह ने अनुपम खेर को जोकर भी कहा था, जिसका अनुपम खेर ने पलटवार करते हुए जवाब दिया था। दरअसल, शाह ने एक इंटरव्यू में खेर को लेकर कहा था, अनुपम खेर जैसे व्यक्ति काफी मुखर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। वह एक जोकर हैं। NSD और FTII में उनके कई समकालीन उनके चापलूस स्वभाव की पुष्टि कर सकते हैं। यह उनके स्वभाव में है। वह इससे खुद को अलग नहीं कर सकते। इसके जवाब में अनुपम खेर ने कहा था, मैं आपको और आपकी बातों को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता। हालांकि मैंने कभी आपकी बुराई नहीं की और न ही आपको भला-बुरा कहा, लेकिन अब जरूर कहना चाहूंगा कि आपने अपनी पूरी जिंदगी, इतनी कामयाबी मिलने के बावजूद, फ्रस्ट्रेशन में गुजारी है। अगर आप दिलीप कुमार साहब, अमिताभ बच्चन साहब, राजेश खन्ना साहब, शाहरुख खान और विराट कोहली जैसे लोगों की भी आलोचना कर सकते हैं, तो मुझे पूरा यकीन है कि मैं भी एक बेहतरीन कंपनी में हूं। इनमें से किसी ने भी आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि हम सब जानते हैं कि यह आप नहीं, बल्कि बरसों से जिन पदार्थों का आप सेवन करते रहे हैं, उनका असर है। शायद इसी वजह से आपको सही और गलत के बीच का फर्क समझ नहीं आता। वहीं, हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े एक बयान को लेकर अनुपम खेर ट्रोल हो रहे थे। इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह का बयान और उसके जवाब में अनुपम खेर की प्रतिक्रिया वाले दोनों पुराने वीडियो फिर से वायरल हो गए। इसके बाद अनुपम खेर ने बताया कि कुछ महीने पहले दोनों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगा लिया था। …………….. यह खबर भी पढ़ें…. राजेश खन्ना की पुण्यतिथि:मां-बाप पाकिस्तान भागे, रिश्तेदारों ने पाला, आखिरी शब्द-पैकअप टाइम हो गया, बंगले में तोहफों के 65 सूटकेस मिले, जानिए मौत की कहानी 18 जुलाई 2012 दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, 'काका बाबू' अब नहीं रहे। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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नसीरुद्दीन शाह@76: पाकिस्तानी लड़की से छिपकर शादी की:दोस्त ने जलन में मारा चाकू, मां ने पूछा था- क्या रत्ना मुस्लिम बनेगी?

साल 1960 के दशक की बात है। एक दुबला-पतला लड़का था, जिसे एक्टर बनने के लिए मुंबई जाना था। एक दिन उनके एक दोस्त की गर्लफ्रेंड का पत्र आया कि मुंबई आ जाओ, मेरे पापा फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं, वो तुम्हारी मदद करेंगे। जिसके बाद वो मुंबई के निकल पड़ा। हालांकि जिस लड़की के भरोसे वो मुंबई पहुंचा, वो खुद बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। जिसके बाद उसने कुछ दिन रिश्तेदार के घर गुजारे, फिर वहां से भी जाना पड़ा। जेब खाली हुई तो जरी की फैक्ट्री के हॉल में रातें बिताईं। जहां वो तीस-चालीस लोगों के साथ फर्श पर वो सोया। कई बार लोकल ट्रेन में बिना टिकट सफर किया। बाद में यही लड़का आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे शानदार अभिनेताओं में से एक बना। स्पर्श, मासूम, सरफरोश, ए वेडनेसडे और इश्किया जैसी कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से उसने दर्शकों का दिल जीता। जी हां, हम बात कर रहे हैं नसीरुद्दीन शाह की। आज उनके 76वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने किस्से। 16 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई चले गए थे नसीरुद्दीन शाह अपनी आत्मकथा एंड देन वन डे में लिखते हैं दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उनको ऐसा लगा जैसे जिंदगी का सबसे मुश्किल पड़ाव पीछे छूट चुका हो। उनके पिता चाहते थे कि वो डॉक्टर बनें, अफसर बनें या फौज में जाएं। नेशनल डिफेंस अकादमी का फॉर्म भी भरवा दिया गया। मगर नसीरुद्दीन शाह के दिल में एक ही सपना था- एक्टर बनना और वह सपना मुंबई जाकर ही पूरा हो सकता था। कॉलेज में दाखिला तो हो गया, लेकिन क्लास से ज्यादा वक्त वो सिनेमाघरों में बिताते थे। फीस के पैसे भी फिल्मों पर खर्च होने लगे। इसी दौरान उन्होंने मुंबई में रहने वाली अपने एक दोस्त की गर्लफ्रेंड को पत्र लिखा, जिसके पिता फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट थे। उसका जवाब आया, ‘मुंबई आ जाओ, पापा तुम्हारी मदद करेंगे।’ बस, इतना सुनना था कि नसीरुद्दीन ने फीस के पैसों से ट्रेन का टिकट खरीद लिया, घड़ी और साइकिल बेचने की योजना बनाई और जेब में करीब पांच सौ रुपए लेकर मुंबई के लिए निकल पड़े। हालांकि, जिस लड़की के परिवार के भरोसे वह मुंबई आए थे, वही बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। इसके बाद कुछ दिन वह रिश्तेदार के घर में रहे, लेकिन जब सबको समझ आ गया कि यह लड़का वापस जाने वाला नहीं है, तो वहां से चले गए और एक जरी कढ़ाई की फैक्ट्री के बड़े-से हॉल में रहने लगे। रात में वहीं तीस-चालीस लोग फर्श पर सोते थे। इस दौरान उन्होंने वेटर बनने की कोशिश की और ताज होटल में बेलबॉय की नौकरी के लिए आवेदन दिया, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। फिर एक दिन एक दलाल उन्हें फिल्मों में एक्स्ट्रा कलाकार का काम दिलाने ले गया। मेहनताना था सिर्फ साढ़े सात रुपए। फिल्म थी अमन, जिसमें राजेंद्र कुमार मुख्य भूमिका निभा रहे थे। अंतिम यात्रा वाले सीन में नसीरुद्दीन भी भीड़ का हिस्सा बने। कैमरे के सामने खड़े होकर उन्हें लगा जैसे उनका सपना पूरा हो गया हो। वहीं, फिल्म आने के बाद वह हंसते हुए कहा करते थे, “दोस्तो, फिल्म में और भी सीन थे, लेकिन वह इसलिए काट दिए गए क्योंकि मेरी एक्टिंग बहुत अच्छी थी।” दिलीप कुमार ने फिल्मों से दूर रहने की सलाह दी घर से बिना बताए मुंबई आए नसीरुद्दीन शाह एक दिन पामपोश रेस्तरां के बाहर फुटपाथ पर बैठे थे। तभी एक लंबी, चमचमाती ग्रे रंग की लिमोजीन उनके सामने आकर रुकी। पीछे का दरवाजा खुला और ऊंची एड़ी की सैंडल पहने एक महिला उतरीं। उन्होंने पूछा, 'क्या तुम्हारा नाम नसीर है?' शाह ने हैरानी में सिर हिलाया। महिला ने बिना समय गंवाए उन्हें कार की आगे वाली सीट पर बैठने का इशारा किया। थोड़ी देर बाद उन्होंने उस महिला को पहचान लिया। वे थीं सईदा खान, दिलीप कुमार की सबसे छोटी बहन। तब नसीरुद्दीन शाह को समझ आया कि आखिर उन्हें ढूंढ़ कैसे लिया गया। उनके पिता अजमेर की उस सूफी दरगाह के प्रशासक रह चुके थे, जहां दिलीप कुमार की एक और बहन सकीना अक्सर आया करती थीं। दो महीने तक उनका कोई पता न मिलने के बाद आखिरकार पिता ने उन्हीं से संपर्क किया और एक पुराने परिचय के सहारे दिलीप कुमार का परिवार शाह तक पहुंचा था। कार दिलीप कुमार के बंगले में दाखिल हुई। ऊपर ले जाकर उनकी मुलाकात सकीना से कराई गई। अजमेर में वे उनसे पहले मिल चुके थे, लेकिन इस बार सकीना बेहद नाराज थीं। उनके सामने वे रो पड़े और माफी मांगने लगे। आखिरकार उन्होंने घर लौटने की हामी भर दी। बंगले के बेसमेंट में उन्हें रहने की जगह दे दी गई। कमरा साधारण था, लेकिन खाने-पीने और नहाने की पूरी व्यवस्था थी। एक दिन उनकी मुलाकात खुद दिलीप कुमार से भी हुई। शाह उनसे काम मांगना चाहते थे, लेकिन हिम्मत जुटा पाते, उससे पहले ही दिलीप कुमार ने उन्हें समझा दिया कि अच्छे परिवारों के लड़कों को फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आना चाहिए। कुछ दिनों बाद दिलीप कुमार के परिवार ने शाह को मेरठ भेज दिया। लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने बताया था कि जब दिलीप कुमार ने उनसे कहा, 'अच्छे घरों के लड़कों को फिल्मों में नहीं आना चाहिए,' तो उस वक्त वो दिलीप कुमार से पूछना चाहते थे, 'अगर ऐसा है, तो फिर आप खुद इस इंडस्ट्री में क्यों आए? आप भी तो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से थे।' हालांकि, उनकी ऐसा कहने की हिम्मत नहीं हुई। 34 साल की पाकिस्तानी औरत से गुपचुप शादी की थी नसीरुद्दीन शाह की पहली शादी परवीन मुराद उर्फ मनारा सीकरी से हुई थी। उनकी मुलाकात अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी। परवीन पाकिस्तान की नागरिक थीं और एमबीबीएस के आखिरी साल की छात्रा थीं। उम्र में वह नसीरुद्दीन से 14-15 साल बड़ी थीं। बचपन से कराची में पली-बढ़ीं और अपनी मां के पास अलीगढ़ आई थीं। पढ़ाई के बहाने भारत में ही रुकती चली गईं। दोनों की दोस्ती बहुत जल्दी गहरे रिश्ते में बदल गई। धीरे-धीरे नसीरुद्दीन ने अपने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से ज्यादा वक्त परवीन और उनकी मां के घर बिताना शुरू कर दिया। यह ऐसा दौर था, जब भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण थे। परवीन का स्टूडेंट वीजा खत्म होने वाला था। अगर वह भारत छोड़तीं, तो शायद दोबारा लौट नहीं पातीं। भारतीय नागरिकता पाने का सबसे आसान रास्ता शादी था। जिसके बाद 1 नवंबर 1969 को दोनों ने गुपचुप शादी कर ली। इस निकाह में गवाह सिर्फ दो महिलाएं थीं- परवीन की मां और उनके एक प्रोफेसर मित्र की पत्नी। नसीरुद्दीन के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, लेकिन अलीगढ़ जैसे शहर में कोई राज ज्यादा दिन छिप नहीं सकता था। कुछ ही दिनों में पूरी यूनिवर्सिटी में यह खबर फैल गई। फिर यह बात मेरठ और सरधना तक पहुंच गई, जहां नसीरुद्दीन का परिवार रहता था। उनके पिता को जब बेटे की शादी का पता चला, तो उन्हें गहरा झटका लगा। उन्होंने बेटे को पत्र लिखकर भोला और मूर्ख तक कह दिया। मां ने दर्द भरे शब्दों में पूछा, 'अगर तुम हमें बता देते, तो क्या हम मना कर देते?' बेटी के जन्म पर खुश होने के बजाय निराश हुए थे 1969 का साल था। नसीरुद्दीन शाह ने अभी-अभी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया था। तभी एक सुबह हॉस्टल में उन्हें एक तार मिला, 'परवीन को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है।' वह बिना देर किए दिल्ली से अलीगढ़ जाने वाली पहली बस में बैठ गए। करीब दोपहर में अस्पताल पहुंचे तो बाहर परवीन की मां खड़ी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'सुबह छह बजे बेटी हुई है।' नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया है कि उस पल वह खुश नहीं हुए। उन्हें बेटे की उम्मीद थी। उन्होंने मन ही मन एक बेटे की कल्पना कर रखी थी, जिसे वह क्रिकेट खेलना सिखाएंगे, बंदूक चलाना सिखाएंगे और अपने जैसा बनाएंगे। बेटी की खबर सुनते ही वह बुरी तरह निराश हो गए। उन्हें डर था कि दोस्त उनका मजाक उड़ाएंगे। वहीं, बेटी के जन्म के कुछ समय बाद ही नसीरुद्दीन शाह और परवीन मुराद के रिश्ते में दरार आ गई। हालात ऐसे बने कि दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अलगाव के बाद परवीन बेटी हीबा को लेकर पहले लंदन और फिर ईरान चली गईं। बाद में हीबा शाह जब लगभग 12 साल की हुईं, तब अपने पिता के पास लौट आईं। पिता की कब्र के सामने दिल की बातें कही थीं नसीरुद्दीन शाह को जब यह खबर मिली कि उनके पिता का निधन हो गया है और उन्हें आज मेरठ के सरधना में दफनाया जाएगा। उस वक्त उनके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने रत्ना पाठक से 500 रुपए उधार लिए और एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन सभी फ्लाइटें फुल थीं। उन्हें सलाह दी गई थी कि पिता के निधन वाला तार दिखाने पर इमरजेंसी सीट मिल सकती है, लेकिन काउंटर पर कर्मचारी के रूड व्यवहार के कारण उन्होंने किसी से मदद नहीं मांगी और वापस लौट आए। इस तरह वह अपने पिता की आखिरी विदाई में शामिल नहीं हो सके। बाद में जब नसीरुद्दीन शाह सरधना पहुंचे, तो पिता की कब्र पर बैठकर उन्होंने अपने दिल की सारी बातें कहीं, जो वह उनके जीते-जी कभी नहीं कह पाए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक नई फिल्म की है, जिसमें एक हिंदू पुजारी का किरदार निभाया है। अब 1857 के एक बागी की भूमिका निभाने वाले हैं। यह भी कहा कि उन्हें रत्ना से प्यार हो गया है और अब उनकी कमाई भी पहले से बेहतर है। नसीरुद्दीन शाह को लगा जैसे पिता उनका हर शब्द सुन रहे हों। मां ने पूछा था- क्या रत्ना धर्म बदलेंगी? नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक की शादी 1 अप्रैल 1982 को रत्ना की मां के घर पर एक सादे रजिस्टर्ड विवाह के रूप में हुई थी। दोनों की मुलाकात 1975 में 'संभोग से संन्यास तक' नामक नाटक की रिहर्सल के दौरान हुई थी। जब नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने शादी का फैसला किया, तब नसीरुद्दीन ने एक दिन हिम्मत करके अपनी मां से कहा कि अब वे रत्ना से शादी करना चाहते हैं। मां ने उनकी पूरी बात सुनी। फिर बहुत शांत स्वर में सिर्फ एक सवाल पूछा, 'क्या तुम रत्ना से इस्लाम कबूल करने के लिए कहोगे?' जिस पर नसीरुद्दीन ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, 'नहीं... मैं उनसे ऐसा कभी नहीं कहूंगा।' उन्होंने साफ कर दिया कि अगर शादी होगी, तो रत्ना अपनी पहचान और अपने धर्म के साथ ही इस रिश्ते में आएंगी। वे उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डालेंगे। इसके बाद उनकी मां खुद रत्ना के घर पहुंचीं। उन्होंने रत्ना की मां और मशहूर अभिनेत्री दीना पाठक से उनकी बेटी का हाथ मांगा। दोस्त जसपाल ने पीछे से चाकू मारा नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में बताया था कि साल 1977 में फिल्म भूमिका की शूटिंग के दौरान उनके दोस्त राजेंद्र जसपाल ने उन पर चाकू से हमला कर दिया था। बताया जाता है कि जसपाल ने शाह पर उनकी सफलता और करियर में मिल रही कामयाबी से जलन के कारण हमला किया था। उस समय नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी एक रेस्तरां में खाना खा रहे थे। तभी जसपाल वहां पहुंचा और कुछ देर बाद पीछे से नसीरुद्दीन शाह की पीठ पर चाकू से वार कर दिया। ओम पुरी ने तुरंत बहादुरी दिखाते हुए जसपाल को दोबारा हमला करने से रोक लिया। इसके बाद रेस्तरां में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने जसपाल को गिरफ्तार कर लिया। शाह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दो दिन जेल में रहने के बाद जसपाल को जमानत मिल गई थी। बाद में एक दिन जसपाल अचानक शाह के घर पहुंचा, लेकिन उसने न माफी मांगी और न ही हमले पर अफसोस जताया। बाद में दोनों अदालत पहुंचे, जहां शाह ने उसके खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद अदालत ने केस बंद कर दिया। शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर और अनुपम खेर को जोकर कहा था नसीरुद्दीन शाह बॉलीवुड के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं, जो अपने बेबाक और बोल्ड बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समय-समय पर कई अभिनेताओं की आलोचना की है। उन्होंने शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर तो राजेश खन्ना को सीमित और घटिया एक्टर बताया था। वहीं, शाह ने अनुपम खेर को जोकर भी कहा था, जिसका अनुपम खेर ने पलटवार करते हुए जवाब दिया था। दरअसल, शाह ने एक इंटरव्यू में खेर को लेकर कहा था, अनुपम खेर जैसे व्यक्ति काफी मुखर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। वह एक जोकर हैं। NSD और FTII में उनके कई समकालीन उनके चापलूस स्वभाव की पुष्टि कर सकते हैं। यह उनके स्वभाव में है। वह इससे खुद को अलग नहीं कर सकते। इसके जवाब में अनुपम खेर ने कहा था, मैं आपको और आपकी बातों को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता। हालांकि मैंने कभी आपकी बुराई नहीं की और न ही आपको भला-बुरा कहा, लेकिन अब जरूर कहना चाहूंगा कि आपने अपनी पूरी जिंदगी, इतनी कामयाबी मिलने के बावजूद, फ्रस्ट्रेशन में गुजारी है। अगर आप दिलीप कुमार साहब, अमिताभ बच्चन साहब, राजेश खन्ना साहब, शाहरुख खान और विराट कोहली जैसे लोगों की भी आलोचना कर सकते हैं, तो मुझे पूरा यकीन है कि मैं भी एक बेहतरीन कंपनी में हूं। इनमें से किसी ने भी आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि हम सब जानते हैं कि यह आप नहीं, बल्कि बरसों से जिन पदार्थों का आप सेवन करते रहे हैं, उनका असर है। शायद इसी वजह से आपको सही और गलत के बीच का फर्क समझ नहीं आता। वहीं, हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े एक बयान को लेकर अनुपम खेर ट्रोल हो रहे थे। इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह का बयान और उसके जवाब में अनुपम खेर की प्रतिक्रिया वाले दोनों पुराने वीडियो फिर से वायरल हो गए। इसके बाद अनुपम खेर ने बताया कि कुछ महीने पहले दोनों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगा लिया था। …………….. यह खबर भी पढ़ें…. राजेश खन्ना की पुण्यतिथि:मां-बाप पाकिस्तान भागे, रिश्तेदारों ने पाला, आखिरी शब्द-पैकअप टाइम हो गया, बंगले में तोहफों के 65 सूटकेस मिले, जानिए मौत की कहानी 18 जुलाई 2012 दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, 'काका बाबू' अब नहीं रहे। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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