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Wild boar burials found in Greco-Roman necropolis in Nile Delta

Egyptian archaeologists have discovered a Greco-Roman necropolis at the archaeological site of Kom Aziza in the western Nile Delta region. The burials methods are unusually varied, and even more unusual is the presence of several complete wild boar burials.

The presence of this animal in funerary contexts of ancient Egypt is extraordinarily rare due to the negative symbolic association of the boar, linked in the pharaonic religious imagination to the deity Seth, the force of chaos and the disturbance of cosmic order.

The excavation leaders have indicated that this isolated occurrence might point more to an economic or domestic activity developed at the site during one of its occupation phases, rather than to a deliberate ritual practice, although the definitive interpretation awaits further analysis.

The human remains found at the site were buried individually and collectively, in north-south and east-west orientations, with arms crossed over the pelvis, straight alongside the body, or crossed over the chest in the classic Osirian position of arms crossed across the chest. Some of the deceased were buried directly into pits, others in mudbrick frames, inside painted plaster coffins and large barrel-shaped pottery coffins. The variety of burial types indicates a multiplicity of funerary practices and rituals took place at the Kom Aziza necropolis.

The stratigraphy of the site revealed that the cemetery was built on much older settlement layers. Materials confirm a history at the site going back at least 3,000 years to the Old Kingdom. Everyday use objects recovered from the previous settlement layers include ceramic and stone vessels, break-making molds, stone tools and ovens. A large number of animal bones — fish, birds, mammals — found there will give archaeologists the opportunity to reconstruct the diets of the settlement occupants over the generations.

The Director General of Beheira Antiquities and head of the excavation mission, Mr. Khaled Abdel Ghani Farhat, stressed that the site represents a unique model of a multi-phase location, where residential and productive activities succeeded one another from the dawn of ancient Egyptian history until later periods when the area was transformed into an intense funerary zone.



* This article was originally published here

'मैं वहां लगभग मर ही गया था':जेल में रहे विक्रम भट्ट ने सुनाई आपबीती, बोले-मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी

फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने हाल ही में कथित धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिनों का अनुभव शेयर किया। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में भट्ट ने कहा कि जेल में उनका समय बहुत मुश्किल था, लेकिन वहां उन्हें अपने साथी कैदियों से उम्मीद से ज्यादा सपोर्ट मिला। उन्होंने बताया कि वह 60 से 80 कैदियों के साथ एक बैरक में रहते थे। उनके अनुसार, साथी कैदी उनका खास ध्यान रखते थे, उनके लिए खाना लाते थे और कपड़ों की देखभाल करते थे। भट्ट ने कहा कि कैदी उन्हें ‘भीष्म पितामह’ कहकर बुलाते थे और रात में उनसे डरावनी कहानियां सुनाने की मांग करते थे। जेल में भट्ट को पीलिया हो गया था भट्ट ने बताया कि जेल के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई तथा उन्हें पीलिया हो गया। उन्होंने कहा, "मैं वहां लगभग मर ही गया था। अब मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी, क्योंकि मेरे साथ तो लोग अच्छे थे, लेकिन मैं एक ऑटोइम्यून बीमारी, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित हूं। इसकी वजह से मेरे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द रहता है।" फिल्ममेकर ने आगे कहा कि दिसंबर-जनवरी का महीना था और बहुत ठंड पड़ रही थी। मैं जिस करवट सोता, उसी तरफ की हिप बोन में दर्द होने लगता। दूसरी करवट लेता तो वहां दर्द शुरू हो जाता। इसी दौरान मुझे पीलिया भी हो गया। विक्रम ने अस्पताल ले जाने में देरी का दावा किया भट्ट ने दावा किया कि तेज बुखार और कमजोरी के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि बैरक के साथी कैदी उन्हें अपने कंबल ओढ़ाकर मदद करते थे, जबकि वे लगातार अस्पताल भेजे जाने की मांग कर रहे थे। रिहाई के बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों के फोन आए। भट्ट ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती और संजय दत्त ने उनका हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि संजय दत्त का फोन उनके लिए खास था क्योंकि उन्होंने कभी साथ काम नहीं किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या अक्षय कुमार ने भी संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि अक्षय उनके दोस्त नहीं हैं, इसलिए ऐसी उम्मीद नहीं थी। भट्ट ने अपने बचपन के दोस्त अजय देवगन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अजय का फोन आना नैचुरल था क्योंकि दोनों का रिश्ता सालों का पुराना है। भट्ट के अनुसार, हर रिश्ते का नेचर अलग होता है और सभी से समान अपेक्षा रखना उचित नहीं है। विक्रम भट्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जेल से बाहर आए विक्रम भट्ट, बोले-सत्य पराजित नहीं होगा:अंदर एक दोस्त बना, मुझे मेवाड़ की मिट्टी की तासीर के बारे में बताया बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्‌ट 19 फरवरी 2026 को 2 महीने 11 दिन बाद उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए गए थे। जेल से निकलते ही उन्होंने सबसे पहले कैंपस में स्थित भगवान शिव के दर्शन किए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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'मैंने नाना पाटेकर को सच में थप्पड़ जड़ दिया था':एक्ट्रेस मधु शाह ने सुनाया फिल्म यशवंत की शूटिंग का किस्सा

एक्ट्रेस मधु शाह ने हाल ही में फिल्म यशवंत की शूटिंग से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के एक सीन की शूटिंग के दौरान एक्टर नाना पाटेकर ने उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया था, जिसके जवाब में उन्होंने भी नाना को रियल में थप्पड़ जड़ दिया था। हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में मधु ने बताया कि यशवंत में एक सीन के दौरान उन्हें रोना था। सीन के लिए वह ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन नाना पाटेकर इसके पक्ष में नहीं थे। उनके मुताबिक, नाना चाहते थे कि एक्टर इमोशन महसूस करें और नैचुरली एक्टिंग करें। नाना पाटेकर ने सीन में सच में थप्पड़ मारा था मधु ने बताया, "उन्होंने (नाना पाटेकर) सीन के दौरान मुझे सच में थप्पड़ मार दिया। मेरी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। मैं बहुत गुस्सा हो गई, क्योंकि रिहर्सल में उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया था। रिहर्सल के समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था। टेक के दौरान उन्होंने मुझे पूरी तरह चौंका दिया। उन्होंने मुझे सच में थप्पड़ मार दिया था। मैं उस समय बहुत गुस्से वाली लड़की थी और शायद आज भी हूं। इसलिए मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने भी उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया।" मधु के मुताबिक, यह फिल्म का एक जरूरी सीन था और डायरेक्टर अनिल मट्टू ने इसकी शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया था, लेकिन कुछ अचानक हुए बदलावों की वजह से यह सीन उम्मीद से बहुत जल्दी पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि यह सीन बहुत नैचुरल लगा और सिर्फ आधे दिन में पूरा हो गया। नाना से मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं मधु ने यह भी कहा कि इस घटना के बावजूद नाना पाटेकर ने कभी उनका अनादर नहीं किया। उनके अनुसार, नाना सिर्फ एक्टिंग को लेकर सख्त थे और चाहते थे कि कलाकार अपने किरदार को पूरी तरह महसूस करके निभाएं। उन्होंने कहा कि नाना के साथ काम करते हुए उन्होंने मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं। मधु जल्द फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी मधु जल्द ही फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बता दें कि अपने करियर में मधु फूल और कांटे (1991), रोजा (1992), अल्लारी प्रियुडु (1992), योद्धा (1992) और जेंटलमैन (1993) जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

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'मैंने नाना पाटेकर को सच में थप्पड़ जड़ दिया था':एक्ट्रेस मधू शाह ने सुनाया फिल्म यशवंत की शूटिंग का किस्सा

एक्ट्रेस मधू शाह ने हाल ही में फिल्म यशवंत की शूटिंग से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के एक सीन की शूटिंग के दौरान एक्टर नाना पाटेकर ने उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया था, जिसके जवाब में उन्होंने भी नाना को रियल में थप्पड़ जड़ दिया था। हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में मधू ने बताया कि यशवंत में एक सीन के दौरान उन्हें रोना था। सीन के लिए वह ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन नाना पाटेकर इसके पक्ष में नहीं थे। उनके मुताबिक, नाना चाहते थे कि एक्टर इमोशन महसूस करें और नैचुरली एक्टिंग करें। नाना पाटेकर ने सीन में सच में थप्पड़ मारा था मधू ने बताया, "उन्होंने (नाना पाटेकर) सीन के दौरान मुझे सच में थप्पड़ मार दिया। मेरी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। मैं बहुत गुस्सा हो गई, क्योंकि रिहर्सल में उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया था। रिहर्सल के समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था। टेक के दौरान उन्होंने मुझे पूरी तरह चौंका दिया। उन्होंने मुझे सच में थप्पड़ मार दिया था। मैं उस समय बहुत गुस्से वाली लड़की थी और शायद आज भी हूं। इसलिए मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने भी उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया।" मधू के मुताबिक, यह फिल्म का एक जरूरी सीन था और डायरेक्टर अनिल मट्टू ने इसकी शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया था, लेकिन कुछ अचानक हुए बदलावों की वजह से यह सीन उम्मीद से बहुत जल्दी पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि यह सीन बहुत नैचुरल लगा और सिर्फ आधे दिन में पूरा हो गया। नाना से मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं मधू ने यह भी कहा कि इस घटना के बावजूद नाना पाटेकर ने कभी उनका अनादर नहीं किया। उनके अनुसार, नाना सिर्फ एक्टिंग को लेकर सख्त थे और चाहते थे कि कलाकार अपने किरदार को पूरी तरह महसूस करके निभाएं। उन्होंने कहा कि नाना के साथ काम करते हुए उन्होंने मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं। मधू जल्द फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी मधू जल्द ही फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बता दें कि अपने करियर में मधू फूल और कांटे (1991), रोजा (1992), अल्लारी प्रियुडु (1992), योद्धा (1992) और जेंटलमैन (1993) जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

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डेढ़ लाख गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला:फर्जी वादों और इंडस्ट्री के धोखों पर बोले 'द पिरामिड स्कीम' के सितारे

पिरामिड स्कीम्स सिर्फ पैसे नहीं डुबोतीं, बल्कि रिश्तों और भरोसे को भी तोड़ देती हैं। TVF की नई वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' इसी सच्चाई को दिखाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रणवीर शौरी, अल्फिया जाफरी, परमवीर सिंह चीमा और क्रिएटर-निर्देशक श्रेयांश पांडे ने अपने अनुभव साझा किए। किसी ने मॉडलिंग के नाम पर लाखों रुपए गंवाए, तो किसी ने झूठे वादों और फर्जी ऑफर्स का सामना किया। कलाकारों ने भरोसा टूटने, संघर्ष, इंडस्ट्री की हकीकत और पिरामिड स्कीम्स के असर पर बात की। सवाल: क्या कभी किसी ने आपसे कहा कि बस यह काम कर लो, फिर जिंदगी बदल जाएगी? जवाब/रणवीर शौरी: हमारी इंडस्ट्री में यह बात अक्सर सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि यह लाइफ-चेंजिंग रोल है, इसके बाद सब बदल जाएगा। जिंदगी बदलती है, लेकिन उतनी नहीं जितनी बताई जाती है। हर प्रोजेक्ट के बाद खुद को फिर से साबित करना पड़ता है। एक बार नीचे गिर जाएं तो दो-तीन साल दोबारा खड़े होने में लग जाते हैं। सवाल: क्या आप कभी किसी स्कीम या झांसे में फंसे हैं? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, शुरुआती दिनों में मैं एक फोटोग्राफर के झांसे में आ गया था। मॉडलिंग के लिए पोर्टफोलियो बनवाने की सलाह दी गई। बताया गया कि वह फोटोग्राफर आमतौर पर 2 लाख रुपए लेता है, लेकिन मुझसे 1.25 लाख लेगा। मैंने पैसे दिए और शूट कराया। बाद में पता चला कि वह फोटोग्राफर मुफ्त में शूट करता था। स्टाइलिस्ट को अलग से 25 हजार रुपए दिए। कुल मिलाकर डेढ़ लाख रुपए खर्च हो गए। सवाल: उस घटना का सबसे ज्यादा दुख किस बात का था? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: पैसों का नुकसान था, लेकिन उससे ज्यादा दुख विश्वास टूटने का था। मुझे लगा था कि लोग मेरी मदद कर रहे हैं, लेकिन बाद में पता चला कि मेरे साथ खेल हुआ है। सवाल: अल्फिया, क्या आप कभी ऐसी किसी स्कीम का शिकार हुई हैं? जवाब/अल्फिया जाफरी: सीधे तौर पर नहीं। लेकिन बचपन से सुनती आई हूं कि बस थोड़ी बड़ी हो जाओ, तुम्हें लॉन्च कर देंगे, हीरोइन बना देंगे। ऐसे कई वादे किए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। एक समय ऐसा आया कि मैंने सोचा कि मुझे यह सब नहीं करना है। सवाल: श्रेयांश, 'द पिरामिड स्कीम' बनाने का विचार कहां से आया? जवाब/श्रेयांश पांडे: हमने इस विषय पर काफी रिसर्च की। कॉलेज के दिनों में ऐसी कई कंपनियों को करीब से देखा, जो युवाओं को बड़े सपने दिखाती थीं। उन्हें बताया जाता था कि उनकी पर्सनैलिटी डेवलप होगी, नौकरी मिल जाएगी और जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन असल में पूरा सिस्टम लोगों को फंसाने के लिए बनाया जाता था। सवाल: पिरामिड स्कीम में सबसे बड़ा नुकसान क्या होता है? जवाब/श्रेयांश पांडे: सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं होता। सबसे बड़ा नुकसान रिश्तों का होता है। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को जोड़ते हैं। जब स्कीम टूटती है तो रिश्ते भी टूट जाते हैं। पैसा वापस कमाया जा सकता है, लेकिन टूटा भरोसा वापस नहीं आता। सवाल: रणवीर, क्या आपने भी कभी पोर्टफोलियो शूट कराया था? जवाब/रणवीर शौरी: हां, मैंने भी पोर्टफोलियो बनवाया था, लेकिन परमवीर जैसा अनुभव नहीं रहा। मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि जब कोई आपकी मासूमियत और भरोसे का फायदा उठाता है, तो वही सबसे ज्यादा तकलीफ देता है। सवाल: क्या आपके साथ कभी भरोसा टूटने वाली कोई घटना हुई? जवाब/रणवीर शौरी: फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा मेरे साथ ज्यादा नहीं हुआ, क्योंकि मैं बचपन से इस माहौल को देखता आया हूं। यहां की चालबाजियों और स्कीम्स के बारे में पहले से जानता था। इसलिए मुझे बेवकूफ बनाना आसान नहीं है। सवाल: अल्फिया, जब भरोसा टूटता है तो उससे कैसे उबरना चाहिए? जवाब/अल्फिया जाफरी: हर इंसान अलग तरह से चीजों को देखता है। मैं पहले बहुत लोगों पर भरोसा करती थी, लेकिन कुछ अनुभवों के बाद लोगों पर भरोसा करना कम कर दिया। आज मेरे बहुत कम दोस्त हैं। मेरे लिए आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन हर किसी का तरीका अलग होता है। सवाल: परमवीर, भरोसा टूटने के बाद क्या बदलाव आया? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: जब बार-बार ऐसे अनुभव होते हैं, तो इंसान लोगों से दूरी बनाने लगता है। कई बार सही लोगों पर भी भरोसा नहीं कर पाता। मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। सवाल: क्या समय के साथ इंसान मजबूत हो जाता है? जवाब/रणवीर शौरी: बिल्कुल। उम्र और अनुभव के साथ आपकी 'स्किन मोटी' हो जाती है। बार-बार चोट खाने के बाद आप चीजों को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं। सवाल: आपने पिरामिड स्कीम से जुड़ी सबसे अजीब चीज क्या देखी? जवाब/श्रेयांश पांडे: हमने इंटरनेट पर ऐसी कई वीडियो देखीं। एक महिला दावा कर रही थी कि वह इतनी विदेश यात्राएं करती है कि अब पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे दावे सुनकर हैरानी होती है। सवाल: इंडस्ट्री में नेटवर्किंग ज्यादा जरूरी है या टैलेंट? जवाब/रणवीर शौरी: दोनों जरूरी हैं। परमवीर सिंह चीमा: अनुभव भी जरूरी है। अल्फिया जाफरी: मैं उम्मीद करती हूं कि मेरे मामले में टैलेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हो। सवाल: क्या सिर्फ कॉन्टैक्ट्स होने से सब कुछ संभव हो जाता है? जवाब/रणवीर शौरी: यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की नहीं, बल्कि देश की भी हकीकत है कि कॉन्टैक्ट्स कई जगह काम आते हैं। सवाल: क्या कभी फेक कास्टिंग कॉल या झूठे वादे का सामना करना पड़ा? जवाब/अल्फिया जाफरी: हां। एक बार मुझे कॉल आया कि मुझे 'हाउस ऑफ द ड्रैगन' के लिए कास्ट करना चाहते हैं। मैं बहुत उत्साहित हो गई थी, लेकिन बाद में पता चला कि वह फर्जी कॉल था। सवाल: आखिर में, इंडस्ट्री में ज्यादा एक्टिंग कैमरे के सामने होती है या पीछे? जवाब/रणवीर शौरी: कैमरे के सामने ही होती है। शुरुआत में लोग कैमरे के पीछे भी एक्टिंग करते हैं, लेकिन बाद में समझ आ जाता है कि उसका कोई फायदा नहीं है। सवाल: दर्शकों को 'द पिरामिड स्कीम' क्यों देखनी चाहिए? जवाब/श्रेयांश पांडे: क्योंकि यह सिर्फ एक स्कैम की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने अपने सपनों, पैसों और सबसे बढ़कर रिश्तों को दांव पर लगा दिया।

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Oldest iron saw in Japan identified

An iron object bent over on one side has been identified as an ancient saw. Dating to the late Yayoi period, the late 2nd century A.D., it is the oldest found in Japan, pushing back the introduction of saws to the Japanese archipelago a hundred years.

It measures 4.1 cm long and 2.1 cm wide at the widest point (1.6 x .8 inches), with 1.6 cm (.6 inches) of the tip folded back. If it were unfolded, it would be beak-shaped with a pointed tip. It appears to have suffered damage before it was discarded. Archaeologists estimate it was originally up to 15-20 cm long (6-8 inches) when intact.

the object was one of a wide variety artifacts recovered in excavations between 1996 and 2003 at the Hayashi-Fujishima archaeological site in Fukui. The excavations revealed large settlement from the late Yayoi period with a dedicate bead-making workshop. A large number of iron tools associated with the workshop were unearthed there. A total of 944 objects, metal and beads, were recovered from the workshop.

With the iron materials, already corroded after 2,000 years in alluvial soil, in danger of further deterioration, a program of conservation was launched in 2021. As part of the program, metal objects were X-rayed and CT scanned. The X-ray of the little iron piece with the bent end revealed a serrated pattern on one side, identifying it for the first time as a saw. Archaeologists believe it may have been used for sawing wood, but it could have also processed soft stone during the bead-making process.

Iron was not yet produced on the Japanese islands during the Yayoi period, and the advanced techniques necessary to manufacture a saw like this indicates it was made elsewhere, namely China, and imported to Japan.

“The artifact could be an important piece of evidence supporting the advancement of ironware culture along the Sea of Japan coast during the Yayoi period,” said Tomokatsu Uozu, the center’s deputy director.

In China, saws with similar shapes from the second to third centuries have also been unearthed.

Researchers said iron processing techniques from the Chinese mainland likely crossed over to northern Kyushu through the Korean Peninsula and reached Fukui Prefecture following a route along the Sea of Japan.



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कास्टिंग स्कैम का शिकार हुई थीं श्रुति शर्मा:बोलीं- एक्ट्रेस बनने से पहले टीवी शो का झांसा देकर एक शख्स ने ₹15 हजार ठग लिए थे

'ऑफिस-ऑफिस' के नए सीजन में मुसद्दी लाल की बेटी 'अनोखी' का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस श्रुति शर्मा ने अपने संघर्ष, करियर और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए। प्रतापगढ़ से मुंबई तक का सफर तय करने वाली श्रुति ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कैसे वह कास्टिंग फ्रॉड का शिकार हुईं, पांच बार रिजेक्ट होने के बाद पहला बड़ा मौका मिला और परिवार के भरोसे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 'हीरामंडी', संजय लीला भंसाली, टीवी इंडस्ट्री के संघर्ष और अपने उसूलों पर भी बात की। सवाल: 'ऑफिस-ऑफिस' के नए सीजन का हिस्सा बनने की खबर मिलने पर कैसा लगा? जवाब: सच कहूं तो पहले मुझे यकीन नहीं हुआ। 25 साल बाद अगर कोई कहे कि 'ऑफिस-ऑफिस' का नया सीजन बन रहा है, तो मजाक लगता है। लेकिन दोबारा कॉल और मीटिंग के बाद एहसास हुआ कि यह सच में हो रहा है। शुरुआत में मैं काफी नर्वस थी। लग रहा था कि लोग नए शो की तुलना पुराने 'ऑफिस-ऑफिस' से करेंगे। यह बड़ा चैलेंज था। लेकिन निर्देशक राजन सर और पूरी कास्ट के साथ स्क्रिप्ट रीडिंग के बाद भरोसा मिला। हमें लगा कि हम अच्छा काम कर पाएंगे। सवाल: 'ऑफिस-ऑफिस' के सेट पर पहला दिन कैसा था? जवाब: पहले दिन सभी कलाकार उत्साहित थे। शूटिंग शुरू होने से पहले पूजा भी हुई थी, जिसमें उमेश सर और उनका परिवार शामिल हुआ था। सबसे अच्छी बात यह थी कि निर्माताओं ने शुरुआत से ही सकारात्मक माहौल बनाया था। सेट पुराने 'ऑफिस-ऑफिस' जैसा तैयार किया गया था। पहले दिन मैं काफी घबराई हुई थी। मेरा पहला सीन भी पहले एपिसोड का था। आज भी वह सीन देखती हूं, तो चेहरे पर नर्वसनेस दिखाई देती है। सवाल: क्या पुराने 'ऑफिस-ऑफिस' के कलाकार भी नए सीजन में हैं? जवाब: नहीं, पुराने कलाकारों में से कोई भी इस शो का हिस्सा नहीं है। यह हमारे लिए अच्छा रहा। अगर उनके साथ स्क्रीन शेयर करनी पड़ती, तो हम और ज्यादा नर्वस हो जाते। हालांकि, हमारे किरदार पुराने किरदारों से जुड़े हैं। जैसे मैं मुसद्दी लाल की बेटी अनोखी बनी हूं। कोई किसी का भतीजा है, कोई किसी का जीजा या साला। लेकिन कहानी और स्क्रिप्ट पूरी तरह नई है। हमने पुराने शो की नकल नहीं की। सवाल: 'अनोखी' का किरदार कैसा है? जवाब: मुसद्दी लाल सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान लौटते थे। लेकिन उनकी बेटी अनोखी बिल्कुल अलग है। उसकी मां ने बचपन से बताया है कि उसके पिता बहादुर और जीतने वाले इंसान थे। इसलिए अनोखी को लगता है कि वह भी हर लड़ाई जीत सकती है। वह मुश्किलों का सामना करती है, कई बार फंसती है, लेकिन हार नहीं मानती। हर एपिसोड के अंत में वह अपना काम निकलवा लेती है और सामने वाले को सबक भी सिखाती है। चाहे उसे साम, दाम, दंड या भेद, कोई भी तरीका अपनाना पड़े। सवाल: अनोखी की कमजोरियां क्या हैं? जवाब: अनोखी कोई आदर्शवादी किरदार नहीं है। वह मानवीय है और उसमें कमियां भी हैं। अगर उसे लगता है कि किसी काम के लिए शॉर्टकट अपनाना पड़ेगा, तो वह पीछे नहीं हटती। कई बार वह पैसे देकर काम करवाने की कोशिश करती है और बाद में ठगी का शिकार हो जाती है। कई एपिसोड में वह दूसरों को चकमा भी देती है। यही बात उसके किरदार को दिलचस्प बनाती है। सवाल: क्या आपके साथ भी कभी कोई स्कैम हुआ है? जवाब: जी हां, मेरे साथ भी धोखाधड़ी हुई है। मुंबई आने की तैयारी के दौरान मुझे एक फोन आया। सामने वाले ने खुद को कास्टिंग डायरेक्टर बताया और कहा कि मुझे एक टीवी शो के लिए चुना गया है। उसने रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10 से 15 हजार रुपए मांगे। उस समय मैं स्कूल में पढ़ाती थी और मेहनत से पैसे जमा कर रही थी। मैंने पैसे भेज दिए, लेकिन बाद में उसका फोन बंद हो गया और वह गायब हो गया। उस समय मैं बहुत रोई थी। मेरी तनख्वाह सिर्फ तीन हजार रुपए थी और मैंने मुश्किल से वह रकम जुटाई थी। सवाल: क्या आपने उसी समय तय कर लिया था कि एक्टिंग करनी है? जवाब: जी हां। मेरे पिता शुरू में इसके खिलाफ थे। उनका मानना था कि लड़कियों के लिए यह इंडस्ट्री सुरक्षित नहीं है। उन्हें मनाने में काफी समय लगा। मैंने 2016 में एक नाटक लिखा था। भाई के साथ उसकी कास्टिंग, रिहर्सल और मंचन किया। लोगों को वह नाटक पसंद आया। इसके बाद परिवार को भरोसा हुआ कि मैं अभिनय के क्षेत्र में कुछ कर सकती हूं। इसके बाद मैंने मुंबई आने का फैसला कर लिया। सवाल: मुंबई आने का फैसला कैसे लिया? परिवार का क्या रिएक्शन था? जवाब: उस नाटक के बाद मुंबई आने का फैसला मैंने लगभग कर लिया था, लेकिन पापा को सीधे नहीं बताया था। मेरी ट्रेन अगले दिन थी और उस रात मम्मी व भाई ने उन्हें समझाया। शुरुआत में वे हैरान थे, लेकिन आखिरकार मान गए। पूरा परिवार मुझे छोड़ने स्टेशन आया था। वह पल भावुक था। सवाल: मुंबई आने के बाद शुरुआत कैसी रही? जवाब: मुंबई आने के बाद मैं अंधेरी ईस्ट के चकाला इलाके में तीन लड़कियों के साथ छोटे किराए के घर में रहती थी। यह मेरे लिए नया अनुभव था। 26 अक्टूबर 2017 को मैं मुंबई आई और 28 अक्टूबर को ही 'इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार' के ऑडिशन का फोन आ गया। मैंने ऑडिशन दिया और शॉर्टलिस्ट हो गई। इसके बाद दो महीने तक वर्कशॉप चली। हालांकि, मुझे पांच बार रिजेक्ट किया गया। एक समय मैं निराश होकर लखनऊ लौट गई। लेकिन जिस दिन मैं वहां पहुंची, उसी दिन फोन आया कि मेरा चयन हो गया है और मुझे वापस मुंबई आना होगा। पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने मेरी टिकट करवाई और वहीं से करियर की शुरुआत हुई। सवाल: संघर्ष के दिनों में आपका प्लान क्या था? जवाब: मेरे पिताजी ने मुझे दो साल का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर दो साल में कुछ नहीं हुआ, तो वापस आकर शादी करनी होगी। मैंने सोच रखा था कि अगर अभिनय से काम नहीं मिला, तो नौकरी कर लूंगी। मैं पहले से पढ़ाती थी, इसलिए भरोसा था कि किसी स्कूल या संस्थान में काम मिल जाएगा। मेरा मानना था कि अपने सपनों का खर्च खुद उठाना चाहिए। सवाल: आपकी पढ़ाई-लिखाई कैसी रही? जवाब: मैंने ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद क्रिएटिव राइटिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। साथ ही भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ली। मैं हमेशा से कला और साहित्य की ओर झुकी रही हूं। मुझे साहित्य और मनोविज्ञान जैसे विषय पसंद थे। कभी सोचा था कि प्रोफेसर बनूंगी, लेकिन किस्मत मुझे अभिनय की दुनिया में ले आई। सवाल: पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी पहली तेलुगु फिल्म 'एजेंट साई श्रीनिवास आत्रेय' थी। मैं हैदराबाद में उसकी शूटिंग कर रही थी। उसी दौरान टीवी शो 'गठबंधन' के लिए ऑडिशन का कॉल आया। शूटिंग की वजह से मैं तुरंत नहीं जा सकी। कई बार फोन आने के बाद जब मुंबई लौटी, तब ऑडिशन दिया और चयन हो गया। वहीं से टीवी इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत हुई। सवाल: तेलुगु फिल्म कैसे मिली थी? जवाब: 'इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार' के दौरान मैंने एक नागिन एक्ट किया था। फिल्म के निर्देशक ने वही प्रदर्शन देखा और उन्हें मेरा काम पसंद आया। इसके बाद मुझे फिल्म का प्रस्ताव मिला। शुरुआत में यकीन नहीं हुआ, क्योंकि मैं कभी साउथ इंडिया नहीं गई थी। लेकिन कहानी अच्छी लगी और मैंने फिल्म कर ली। फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन उस समय मैं टीवी शो 'गठबंधन' में व्यस्त थी, इसलिए प्रमोशन का हिस्सा नहीं बन सकी। सवाल: आपके करियर का सबसे खास किरदार कौन-सा रहा? जवाब: मेरे सभी किरदारों को दर्शकों ने प्यार दिया है। लेकिन पहला शो हमेशा खास होता है। 'गठबंधन' ने मुझे पहचान दिलाई और घर-घर तक पहुंचाया। इसके अलावा 'नमक' का किरदार भी मेरे दिल के करीब है। उस शो का विषय मजबूत था और दर्शकों ने उसे काफी पसंद किया। सवाल: टीवी इंडस्ट्री में लंबे काम के घंटों को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने 20 से 22 घंटे तक लगातार काम किया है। शुरुआत में हमें अपने अधिकारों की ज्यादा जानकारी नहीं थी। 'गठबंधन' के दौरान वरिष्ठ कलाकारों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट में काम के घंटे तय कराए जा सकते हैं। इसके बाद मैंने कॉन्ट्रैक्ट में यह शर्त जोड़नी शुरू कर दी कि रोजाना सीमित घंटे ही काम करूंगी। सवाल: 'हीरामंडी' में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। मैंने खुद को वहां नए कलाकार की तरह रखा। मुझे लगा कि मेरे पास सिर्फ टैलेंट है और मुझे सीखना है। सेट पर बड़े कलाकार थे, इसलिए हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। टीवी में सीखा अनुशासन और तेजी 'हीरामंडी' में बहुत काम आई। संजय लीला भंसाली सर प्रतिभाशाली निर्देशक हैं। उनका विजन बड़ा है और वे हर छोटे कलाकार पर बराबर ध्यान देते हैं। सेट पर किसी जूनियर आर्टिस्ट की पायल से लेकर हेयरस्टाइल तक उनकी नजर रहती थी। उनके साथ काम करने के लिए अहंकार छोड़कर उनके विजन पर भरोसा करना पड़ता है। सवाल: 'हीरामंडी' आपको कैसे मिली थी? जवाब: मैं टीवी शो 'नमक इश्क का' की शूटिंग कर रही थी, तभी ऑडिशन का कॉल आया। मैंने मेकअप रूम में ही ऑडिशन रिकॉर्ड किया। इसके बाद संजय लीला भंसाली से मुलाकात हुई। उनके सामने बैठना मेरे लिए किसी सपने जैसा था। मुझे लगा नहीं था कि मेरा चयन होगा, लेकिन किस्मत से यह मौका मिल गया। सवाल: 'हीरामंडी' से आपके करियर को कितना फायदा हुआ? जवाब: बहुत फायदा हुआ। यह शो 192 देशों में रिलीज हुआ और दुनिया भर से लोगों के संदेश आने लगे। एक कलाकार के तौर पर मुझे लगा कि मेरे काम को वैश्विक पहचान मिली है। इसी शो की वजह से आगे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स भी मिले। सवाल: फिल्मों के ऑफर आते हैं? जवाब: जी हां, ऑफर आते हैं। लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं। मैं वही काम करना पसंद करती हूं, जिसे परिवार के साथ बैठकर देख सकूं। कई बार अच्छी कहानियां सिर्फ एक-दो दृश्यों की वजह से छोड़नी पड़ती हैं। अफसोस होता है, लेकिन मेरा मानना है कि जो मेरे लिए बना है, वह मुझे जरूर मिलेगा। सवाल: आपने प्रोडक्शन में भी कदम रखा है? जवाब: जी हां। मुझे और मेरे भाई को लिखना पसंद है। हमने मिलकर कुछ कहानियां लिखीं और फिर अपना कंटेंट बनाने का फैसला किया। हमने कुछ वर्टिकल ड्रामा और अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है। भविष्य में फिल्मों और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने की योजना है। सवाल: सफलता को आप कैसे परिभाषित करती हैं? जवाब: मेरे लिए सफलता सिर्फ प्रसिद्धि नहीं है। सबसे बड़ी सफलता यह है कि मैंने लोगों की सोच बदली है। मैं ऐसे माहौल से आती हूं, जहां लोग मानते थे कि अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए समझौते करने पड़ते हैं। अगर मुझे देखकर कोई युवा यह विश्वास करता है कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता मिल सकती है, तो वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। सवाल: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी? जवाब: अगर किसी भी काम के लिए आत्मसम्मान या सिद्धांत छोड़ने पड़ रहे हैं, तो वह काम मत कीजिए। अभिनय में कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत करनी पड़ती है, ऑडिशन देने पड़ते हैं और धैर्य रखना पड़ता है। खासतौर पर लड़कियों से मैं कहना चाहूंगी कि अगर कोई आपसे समझौता करने की बात करे, तो वहां से तुरंत निकल जाएं। इंडस्ट्री में अच्छे लोग हैं और मेहनत करने वालों के लिए यहां अवसरों की कमी नहीं है।

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रैपिड फायर राउंड में मनोज बाजपेयी बोले:इंडस्ट्री में कई कलाकारों की प्रतिभा अब भी कम आंकी जाती है

मनोज बाजपेयी अपनी दमदार एक्टिंग और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने करियर, फिल्मों और रैपिड फायर राउंड में दिलचस्प जवाब दिए। भारत की सबसे बड़ी ताकत, स्टारडम की परिभाषा, फाइनेंशियल आदतों और पसंदीदा खाने तक, मनोज ने कई सवालों के जवाब सहज अंदाज में दिए। पढ़िए, रैपिड फायर राउंड में मनोज बाजपेयी के जवाब। सवाल: अगर एक शब्द में भारत को समझाना हो तो क्या कहेंगे? जवाब: विविधता सवाल: पावर या पीस? जवाब: पीस हमेशा। सवाल: ओटीटी या बिग स्क्रीन? जवाब:बिग स्क्रीन सवाल: कौन-सा किरदार आपको सबसे ज्यादा डराने वाला लगा? जवाब: गली गुलियां सवाल: आपकी एक फाइनेंशियल आदत क्या है? जवाब: मैं और मेरा परिवार अपनी जरूरतें नहीं बढ़ाते। जितना जरूरी हो, उतना ही खर्च करते हैं। सवाल: बिहार की कौन-सी बात दुनिया को सीखनी चाहिए? जवाब: रिश्तों में अपनापन और अपनी जड़ों से जुड़े रहना। सवाल: आपका कम्फर्ट फूड क्या है? जवाब: दाल-चावल और परवल की भुजिया सवाल: स्टारडम को एक शब्द में कैसे बताएंगे? जवाब: अननेसेसरी सवाल: कौन-सी चीज आपको सबसे ज्यादा परेशान करती है? जवाब: जब लोग समय पर नहीं आते सवाल: कौन-से कलाकार आपको अंडररेटेड लगते हैं? जवाब: केके मेनन, विजय राज, रघुवीर यादव और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकार शानदार हैं। मुझे लगता है कि कई कलाकारों की प्रतिभा का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। ____________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें... पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें।पूरा इंटरव्यू पढ़ें.. आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

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नेहा कक्कड़@38, समोसे बेचते थे पिता:4 साल में जगराता गाया, 10X10 के कमरे में रहीं, वैन में सोईं, नशे में कंटेस्टेंट ने किया प्रपोज

6 जून 1988 नेहा कक्कड़ का जन्म ऋषिकेश के बेहद गरीब परिवार में हुआ। तीन भाई-बहनों में नेहा सबसे छोटी थीं। सोनू कक्कड़ (सिंगर) और टोनी कक्कड़ (सिंगर-कंपोजर) उनसे बड़े थे। पिता के पास गुजारे के लिए कोई पक्की नौकरी नहीं थी। वो पत्नी निती कक्कड़ और 3 बच्चों के साथ ऋषिकेश के एक 10 बाय 10 के किराए के कमरे में रहते थे। गरीबी का वो आलम था कि घर में किचन तक नहीं था। मां उसी कमरे में एक टेबल रखकर उस पर खाना पकातीं। उसी कमरे में सब उठते-बैठते, सोते, खेलते। नेहा महज 4 साल की थीं, जब पिता रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली शिफ्ट हो गए। वो एक छोटे से स्कूल के बाहर समोसे बेचने लगे। बड़ी बहन सोनू उसी स्कूल में पढ़ती थीं। स्कूल में पिता के काम के चलते उनका जमकर मजाक बनाया जाता था, जिससे वो काफी रोती थीं। परिवार का गुजारा मुश्किल होने लगा, तो पिता ने बड़ी बेटी सोनू कक्कड़ के साथ जगराते में गाना शुरू कर दिया। पिता को लिखने का शौक था, तो वो खुद जगराते के लिए गाने लिखा करते थे। समय के साथ भाई टोनी और फिर 4 साल की उम्र में नेहा ने भी पिता की आर्थिक मदद करने के लिए जगराते में गाना शुरू कर दिया। पूरा परिवार रिक्शे से जगराता करने जाता था। हर जगराते के उन्हें 500 रुपए तक मिलने लगे और घर के हालात भी बेहतर हो गए। समय के साथ पिता ने ट्रेवलिंग के लिए एक वैन ले ली। जब भी कभी रातभर जगराता होता, तो पिता वैन के पीछे वाली सीट खोलकर वहीं बच्चों के लिए गद्दे बिछा देते थे, जिससे बच्चों को आराम मिल सके। कभी चंद रुपयों के लिए अपना बचपन खोने वालीं नेहा कक्कड़ 38 साल की हो चुकी हैं और सिंगिंग स्टार हैं। नेहा के बर्थडे के खास मौके पर एक नजर उनकी जिंदगी की प्रेरणादायक कहानी पर- देखिए बचपन में जगराते से नेहा कक्कड़ की चुनिंदा तस्वीरें- इंडियन आइडल के एक एपिसोड में बचपन के दिनों को याद कर नेहा ने कहा था- मैंने 4 साल की उम्र में गाना शुरू किया। उस समय कोई टाइम लिमिट नहीं होती थी। जगराते कभी-कभी रात से शुरू होकर सुबह तक चलते थे और हम लगातार गाते थे। लोग हमारी तारीफ तक नहीं करते थे, कई बार तो ऐसा भी हुआ, जब हम रातभर गाने के चलते स्कूल नहीं जा सके। झगड़े में भाई की जांघ में मारा पैन नेहा कक्कड़, भले ही पढ़ाई से दूर रहीं, लेकिन शरारत में अव्वल थीं। सोनू उनसे बड़ी थीं, लेकिन टोनी से उम्र का फासला कम होने पर दोनों खूब झगड़ते थे। कपिल शर्मा शो में आए कक्कड़ भाई-बहनों ने बताया कि एक बहस के बाद नेहा ने भाई टोनी की जांघों पर पैन से ऐसा हमला किया कि आधा पैन उनकी जांघ में घुस गया था। 5 साल की उम्र में बड़ों को टक्कर देकर जीता म्यूजिक कॉम्पिटिशन नेहा कक्कड़ ने महज 5 साल की उम्र में ऋषिकेश में होने वाले एक म्यूजिकल कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। उस कॉम्पिटिशन में कोई एज लिमिट नहीं थी, तो 5 साल की नेहा को 16-17 और उससे भी बड़े लोगों के साथ कंपीट करना पड़ा। नन्ही सी नेहा ने तब नई-नई आई फिल्म फूल और कांटे का गाना मैंने प्यार तुम्ही से किया है गाया था। नेहा ने अपनी मधुर आवाज से बड़ों को न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि वो कॉम्पिटिशन भी जीता। आगे वो शादियों और इवेंट में भी गाने लगीं। एक बार नेहा-सोनू को एक बड़े जागरण में गाने का मौका मिला, जिसमें उनसे ठीक पहले आशा भोसले ने परफॉर्मेंस दी थी। रिश्तेदार-पड़ोसियों ने बच्चों से गाना गंवाने पर दिए ताने समय के साथ नेहा-सोनू को भजन संध्या और जगराता के काफी काम मिलने लगे। वो दिल्ली, ऋषिकेश के अलावा भी चंडीगढ़ समेत नॉर्थ के कई शहरों में परफॉर्म करने जाती थीं, जिससे उनकी पढ़ाई ठीक तरह नहीं हो पाती थी। बच्चों की कमाई से ही एक समय घर चलने लगा, जिसके चलते आस-पड़ोस के लोग और रिश्तेदार उनके पेरेंट्स को काफी ताने देते थे। सोनू कक्कड़ को रियलिटी शो के बाद मिला था 'बाबू जी जरा धीरे चलो' गाना दिल्ली में गायिकी में मजबूत पकड़ बनाने के बाद बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने 2003 में मुंबई के सिंगिंग रियलिटी शो पॉपस्टार जीता। उस शो के जज संदीप चौटवा को सोनू की आवाज इतनी पसंद आई कि उन्होंने शो खत्म होते ही उन्हें ऑफिस बुलाकर, फिल्म ‘दम’ का गाना ‘बाबू जी जरा धीरे चलो…,’ ऑफर कर दिया। कम समय में ही सोनू ने म्यूजिक इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ बनाते हुए कई हिट गाने दिए। 16 साल की उम्र में भाई के साथ पहुंचीं मुंबई सोनू की बढ़ती पॉपुलैरिटी के बीच ही नेहा कक्कड़ 16 साल की उम्र में भाई टोनी के साथ म्यूजिक में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गईं। टोनी कक्कड़ को कंपोजिशन का शौक था, तो वो कंपोजर संदीप चौटवा के साथ बतौर लिरिसिस्ट काम सीखने लगे, वहीं नेहा कई सिंगिंग रियलिटी शोज में ऑडिशन दिया करती थीं। तब वो 11वीं क्लास में थीं। एक साल के लंबे संघर्ष के बाद उनका इंडियन आइडल सीजन 2 में सिलेक्शन हुआ। ऑडिशन में जज रहे सोनू निगम ने नेहा से कहा कि उनकी आवाज फंसी-फंसी लग रही है। हालांकि थोड़ी देर उन्हें परेशान करने के बाद वो गोल्डन वर्ल्ड कहे गए, ‘आप मुंबई आ रही हैं।’ शो में नेहा ने कहा था कि वो इंडियन आइडन-1 के विनर अभिजीत सावंत जितनी फेमस होना चाहती हैं। नेहा की जर्नी शानदार रही, लेकिन वो 10वें नंबर पर शो से बाहर हो गईं। हालांकि अब नेहा कक्कड़ हुनर और मेहनत की बदौलत खुद इंडियन आइडन की पसंदीदा जजेस में से एक हैं। इंडियन आइडल 2 के विजेता संदीप आचार्या रहे, जिनका 2013 में महज 29 साल की उम्र में पीलिया से निधन हो गया। इंडियन आइडन हारने के बावजूद नेहा ने हार नहीं मानी और खुद अपनी म्यूजिल एल्बम ‘नेहाः द रॉकस्टार’ रिलीज की। ये एल्बम हिट रही और आगे नेहा ने रोमियो जूलिएट म्यूजिक एल्बम बनाई, जिसे उनके भाई टोनी कक्कड़ ने कंपोज किया। एल्बम हिट होने के बाद नेहा को ‘मीराबाई नॉट आउट’ (2008) का गाना ‘हाय रामा’ मिला, जिसे उन्होंने सुखविंदर के साथ गाया। ए.आर.रहमान के गाने में हुईं फीचर, टीवी शो के गाने से मिली पहचान नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग के अलाव एक्टिंग में भी हाथ आजमाया है। वो फिल्म ब्लू के टाइटल सॉन्ग के कोरस में दिखीं। इसके अलावा वो फिल्म इसी लाइफ में (2010) में नजर आ चुकी हैं। उन्होंने कॉमेडी सर्कस के तानसेन में कपिल शर्मा और अली अजगर के साथ काम किया। वो कई कन्नड़ और तेलुगु गानों में भी नजर आई हैं। 2009 में नेहा कक्कड़ ने टीवी शो 'ना आना इस देश लाडो' के टाइटल सॉन्ग को आवाज दी, जिससे उन्हें काफी पहचान मिली थी। नेहा कक्कड़ ने कन्नड़ फिल्म ‘थमास्सू’ के गाने ‘नोडू बारे’ को आवाज दी, जिसके लिए उन्हें साउथ फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का नॉमिनेशन मिला था। दीपिका की फिल्म से नेहा को मिला बड़ा सिंगिंग ब्रेक नेहा कक्कड़ को 2012 की फिल्म कॉकटेल के गाने सेकेंड हैंड जवानी से बड़ा ब्रेक मिला। गाना हिट रहा और नेहा कक्कड़ ने इंडस्ट्री में पहचान बना ली और एक-एक कर कई हिट गाने दिए। कई विवादों के नाम रहा नेहा का सिंगिंग करियर- प्राग गाने पर अश्लीलता के आरोप- साल 2013 में नेहा कक्कड़ ने फिल्म प्राग के गाने बोतल खोल को आवाज दी। अश्लील और डबल मीनिंग लिरिक्स के चलते सेंसर बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई थी। ये गाना काफी विवादों में रहा था। मेलबर्न कॉन्सर्ट विवाद (2025)- ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक कॉन्सर्ट में नेहा कथित रूप से 2 घंटे की देरी से पहुंचीं। दर्शकों ने नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई। नेहा और उनके भाई टोनी कक्कड़ ने आयोजन की खराब व्यवस्थाओं को जिम्मेदार बताया, जबकि आयोजकों ने उल्टा नेहा की टीम पर गैर-पेशेवर व्यवहार के आरोप लगाए और मुआवजे की मांग की। 'कैंडी शॉप/लॉलीपॉप' गाने पर अश्लीलता का आरोप- नेहा और टोनी कक्कड़ के गाने "कैंडी शॉप" (लॉलीपॉप) के बोल और एक डांस स्टेप को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद हुआ। कई लोगों ने नेहा द्वारा किए गए डांस स्टेप्स को अश्लील बताया और भारतीय संस्कृति के खिलाफ माना। स्टेज परफॉर्मेंस में खुद पर पानी डालने का वीडियो- एक लाइव शो के दौरान नेहा का अपने ऊपर पानी डालकर परफॉर्म करने वाला वीडियो वायरल हुआ। इस पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया, कुछ लोगों ने इसे मनोरंजन माना, जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक और भड़काऊ बताया। रियलिटी शो में भावुक होने पर ट्रोलिंग- नेहा सालों से सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडन की जज हैं। कई एपिसोड में नेहा भावुक होकर रोती दिखाई दीं। कुछ दर्शकों ने इसे वास्तविक भावना माना, जबकि कुछ ने इसे "ओवरड्रामेटिक" कहकर ट्रोल किया। रीमिक्स गानों को लेकर आलोचना- नेहा ने कई पुराने पॉपुलर गानों के रीमिक्स गाए हैं। जिनमें कांटा लगा, छम्मा छम्मा और टिप टिप बरसा पानी जैसे दर्जनों गाने शामिल हैं। रिमिक्स गानों पर नेहा की जमकर ट्रोलिंग होती है। 2022 में नेहा ने फाल्गुनी पाठक के गाने मैंने पायल है छनकाई गाया, जिस पर ऑरिजिनल सिंगर ने न सिर्फ इसकी जमकर आलोचना की, बल्कि इसे म्यूजिक के इतिहास के लिए हानिकारक कहा। रिलेशनशिप, ब्रेकअप, डिप्रेशन और शादी- नेशनल टेलीविजन में रिश्ता किया ऑफिशियल, फिर अचानक हुआ ब्रेकअप नेहा कक्कड़ साल 2014 से एक्टर हिमांश कोहली के साथ रिलेशनशिप में थीं। दोनों की मुलाकात फिल्म यारियां की शूटिंग के दौरान हुई। हिमांश फिल्म के हीरो थे और नेहा ने फिल्म के गाने आज ब्लू है पानी-पानी को आवाज दी थी। दोनों ने 2018 में रियलिटी शो इंडियन आइडल में नेशनल टेलीविजन पर रिश्ता ऑफिशियल किया और ये भी ऐलान किया कि वो जल्द ही शादी करेंगे। हालांकि 3 महीने बाद ही अचानक नेहा ने हिमांश से ब्रेकअप कर इसकी घोषणा सोशल मीडिया पर कर दी। ब्रेकअप के बाद डिप्रेशन में रहीं नेहा कक्कड़ ब्रेकअप के कुछ समय बाद नेहा कक्कड़ कई मौकों पर गाने सुनकर इंडियन आइडल के सेट पर रोती दिखीं। जनवरी 2019 में नेहा कक्कड़ ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से डिप्रेशन की बात कबूली और कहा कि वो जिंदगी के सबसे मुश्किल समय से गुजर रही हैं और डिप्रेशन में हैं। उन्हें एंग्जाइटी की समस्या भी रही। नशे में किया था शो के कंटेस्टेंट रोहनप्रीत ने शादी के लिए प्रपोज नेहा कक्कड़ ने 2020 में रोहनप्रीत से शादी की थी। दरअसल, रोहनप्रीत, 2018 में सिंगिग रियलिटी शो राइजिंग स्टार के कंटेस्टेंट थे। वो शो के रनर-अप भी रहे। इसके बाद एक गाने की शूटिंग के समय रोहनप्रीत को नेहा पसंद आ गईं। उन्होंने नेहा की स्नैपचैट आइडी मांगी और दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। एक दिन रोहनप्रीत ने हिम्मत कर उन्हें प्रपोज कर दिया, लेकिन नेहा ने ये कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि वो किसी रिलेशनशिप में नहीं आना चाहतीं, उनका फोकस शादी की तरफ है। रोहन महज 25 साल के थे और वो शादी के लिए तैयार नहीं थे। आखिरकार, बात नहीं बनी। रोहनप्रीत से उनकी बातचीत बंद हो गई। फिर कुछ महीनों बाद एक दिन रोहनप्रीत ने नशे में नेहा को कॉल कर कहा कि वो उनके बिना नहीं रह सके। उन्हें जल्द ही शादी कर लेनी चाहिए। नेहा को लगा कि वो नशे में कुछ भी कह रहे हैं, अगले दिन भूल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रोहन उनसे मिलने आए और फिर शादी का प्रस्ताव दिया। शादी को समझा गया पब्लिसिटी स्टंट नेहा की शादी की खबरों के बीच उनके गाने नेहू द व्याह अनाउंस हुआ। तब हर किसी का मानना था कि शादी की खबरें महज पब्लिसिटी स्टंट हैं। हालांकि सॉन्ग रिलीज के दिन ही नेहा कक्कड़ ने शादी कर ली। देखिए शादी की चुनिंदा तस्वीरें- गाने से उड़ी प्रेग्नेंसी की अफवाहें जैसे शादी से पहले नेहा ने गाना अनाउंस किया, ठीक वैसे ही शादी के चंद महीने बाद नेहा ने एक और गाना अनाउंस किया, जिसमें वो बेबी बंप के साथ नजर आई। हर किसी को लगा कि वो प्रेग्नेंट हैं, जिसके लिए एक और गाना बना है, हालांकि बाद में सिंगर ने साफ किया, ये गेटअप महज गाने के लिए है। बहन ने तोड़ा रिश्ता, जमकर हुआ विवाद अप्रैल 2025 में सोनू कक्कड़ ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट शेयर कर नेहा और टोनी से रिश्ता खत्म करने की घोषणा कर दी। इसके बाद से ही सोनू परिवार के सभी इवेंट से नदारद दिखीं। तलाक की खबरों से चर्चा में रहीं 2026 की शुरुआत में नेहा कक्कड़ ने भी पोस्ट शेयर कर कहा कि वो सभी रिश्तों से ब्रेक ले रही हैं। इसके बाद से ही उनके तलाक की खबरें सुर्खियों में आ गईं। चर्चा इतनी बढ़ी कि नेहा ने खुद इस पर सफाई देते हुए अपील की कि उनके बयान में पति और परिवार को न घसीटा जाए।

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नेहा कक्कड़@38, समोसे बेचते थे पिता:4 साल में जगराता गाया, 10*10 के कमरे में रहीं, वैन में सोईं, नशे में कंटेस्टेंट ने किया प्रपोज

6 जून 1988 नेहा कक्कड़ का जन्म ऋषिकेश के बेहद गरीब परिवार में हुआ। तीन भाई-बहनों में नेहा सबसे छोटी थीं। सोनू कक्कड़ (सिंगर) और टोनी कक्कड़ (सिंगर-कंपोजर) उनसे बड़े थे। पिता के पास गुजारे के लिए कोई पक्की नौकरी नहीं थी। वो पत्नी निती कक्कड़ और 3 बच्चों के साथ ऋषिकेश के एक 10 बाय 10 के किराए के कमरे में रहते थे। गरीबी का वो आलम था कि घर में किचन तक नहीं था। मां उसी कमरे में एक टेबल रखकर उस पर खाना पकातीं। उसी कमरे में सब उठते-बैठते, सोते, खेलते। नेहा महज 4 साल की थीं, जब पिता रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली शिफ्ट हो गए। वो एक छोटे से स्कूल के बाहर समोसे बेचने लगे। बड़ी बहन सोनू उसी स्कूल में पढ़ती थीं। स्कूल में पिता के काम के चलते उनका जमकर मजाक बनाया जाता था, जिससे वो काफी रोती थीं। परिवार का गुजारा मुश्किल होने लगा, तो पिता ने बड़ी बेटी सोनू कक्कड़ के साथ जगराते में गाना शुरू कर दिया। पिता को लिखने का शौक था, तो वो खुद जगराते के लिए गाने लिखा करते थे। समय के साथ भाई टोनी और फिर 4 साल की उम्र में नेहा ने भी पिता की आर्थिक मदद करने के लिए जगराते में गाना शुरू कर दिया। पूरा परिवार रिक्शे से जगराता करने जाता था। हर जगराते के उन्हें 500 रुपए तक मिलने लगे और घर के हालात भी बेहतर हो गए। समय के साथ पिता ने ट्रेवलिंग के लिए एक वैन ले ली। जब भी कभी रातभर जगराता होता, तो पिता वैन के पीछे वाली सीट खोलकर वहीं बच्चों के लिए गद्दे बिछा देते थे, जिससे बच्चों को आराम मिल सके। कभी चंद रुपयों के लिए अपना बचपन खोने वालीं नेहा कक्कड़ 38 साल की हो चुकी हैं और सिंगिंग स्टार हैं। नेहा के बर्थडे के खास मौके पर एक नजर उनकी जिंदगी की प्रेरणादायक कहानी पर- देखिए बचपन में जगराते से नेहा कक्कड़ की चुनिंदा तस्वीरें- इंडियन आइडल के एक एपिसोड में बचपन के दिनों को याद कर नेहा ने कहा था- मैंने 4 साल की उम्र में गाना शुरू किया। उस समय कोई टाइम लिमिट नहीं होती थी। जगराते कभी-कभी रात से शुरू होकर सुबह तक चलते थे और हम लगातार गाते थे। लोग हमारी तारीफ तक नहीं करते थे, कई बार तो ऐसा भी हुआ, जब हम रातभर गाने के चलते स्कूल नहीं जा सके। झगड़े में भाई की जांघ में मारा पैन नेहा कक्कड़, भले ही पढ़ाई से दूर रहीं, लेकिन शरारत में अव्वल थीं। सोनू उनसे बड़ी थीं, लेकिन टोनी से उम्र का फासला कम होने पर दोनों खूब झगड़ते थे। कपिल शर्मा शो में आए कक्कड़ भाई-बहनों ने बताया कि एक बहस के बाद नेहा ने भाई टोनी की जांघों पर पैन से ऐसा हमला किया कि आधा पैन उनकी जांघ में घुस गया था। 5 साल की उम्र में बड़ों को टक्कर देकर जीता म्यूजिक कॉम्पिटिशन नेहा कक्कड़ ने महज 5 साल की उम्र में ऋषिकेश में होने वाले एक म्यूजिकल कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। उस कॉम्पिटिशन में कोई एज लिमिट नहीं थी, तो 5 साल की नेहा को 16-17 और उससे भी बड़े लोगों के साथ कंपीट करना पड़ा। नन्ही सी नेहा ने तब नई-नई आई फिल्म फूल और कांटे का गाना मैंने प्यार तुम्ही से किया है गाया था। नेहा ने अपनी मधुर आवाज से बड़ों को न सिर्फ कड़ी टक्कर दी, बल्कि वो कॉम्पिटिशन भी जीता। आगे वो शादियों और इवेंट में भी गाने लगीं। एक बार नेहा-सोनू को एक बड़े जागरण में गाने का मौका मिला, जिसमें उनसे ठीक पहले आशा भोसले ने परफॉर्मेंस दी थी। रिश्तेदार-पड़ोसियों ने बच्चों से गाना गंवाने पर दिए ताने समय के साथ नेहा-सोनू को भजन संध्या और जगराता के काफी काम मिलने लगे। वो दिल्ली, ऋषिकेश के अलावा भी चंडीगढ़ समेत नॉर्थ के कई शहरों में परफॉर्म करने जाती थीं, जिससे उनकी पढ़ाई ठीक तरह नहीं हो पाती थी। बच्चों की कमाई से ही एक समय घर चलने लगा, जिसके चलते आस-पड़ोस के लोग और रिश्तेदार उनके पेरेंट्स को काफी ताने देते थे। सोनू कक्कड़ को रियलिटी शो के बाद मिला था 'बाबू जी जरा धीरे चलो' गाना दिल्ली में गायिकी में मजबूत पकड़ बनाने के बाद बड़ी बहन सोनू कक्कड़ ने 2003 में मुंबई के सिंगिंग रियलिटी शो पॉपस्टार जीता। उस शो के जज संदीप चौटवा को सोनू की आवाज इतनी पसंद आई कि उन्होंने शो खत्म होते ही उन्हें ऑफिस बुलाकर, फिल्म ‘दम’ का गाना ‘बाबू जी जरा धीरे चलो…,’ ऑफर कर दिया। कम समय में ही सोनू ने म्यूजिक इंडस्ट्री में मजबूत पकड़ बनाते हुए कई हिट गाने दिए। 16 साल की उम्र में भाई के साथ पहुंचीं मुंबई सोनू की बढ़ती पॉपुलैरिटी के बीच ही नेहा कक्कड़ 16 साल की उम्र में भाई टोनी के साथ म्यूजिक में करियर बनाने के लिए मुंबई आ गईं। टोनी कक्कड़ को कंपोजिशन का शौक था, तो वो कंपोजर संदीप चौटवा के साथ बतौर लिरिसिस्ट काम सीखने लगे, वहीं नेहा कई सिंगिंग रियलिटी शोज में ऑडिशन दिया करती थीं। तब वो 11वीं क्लास में थीं। एक साल के लंबे संघर्ष के बाद उनका इंडियन आइडल सीजन 2 में सिलेक्शन हुआ। ऑडिशन में जज रहे सोनू निगम ने नेहा से कहा कि उनकी आवाज फंसी-फंसी लग रही है। हालांकि थोड़ी देर उन्हें परेशान करने के बाद वो गोल्डन वर्ल्ड कहे गए, ‘आप मुंबई आ रही हैं।’ शो में नेहा ने कहा था कि वो इंडियन आइडन-1 के विनर अभिजीत सावंत जितनी फेमस होना चाहती हैं। नेहा की जर्नी शानदार रही, लेकिन वो 10वें नंबर पर शो से बाहर हो गईं। हालांकि अब नेहा कक्कड़ हुनर और मेहनत की बदौलत खुद इंडियन आइडन की पसंदीदा जजेस में से एक हैं। इंडियन आइडल 2 के विजेता संदीप आचार्या रहे, जिनका 2013 में महज 29 साल की उम्र में पीलिया से निधन हो गया। इंडियन आइडन हारने के बावजूद नेहा ने हार नहीं मानी और खुद अपनी म्यूजिल एल्बम ‘नेहाः द रॉकस्टार’ रिलीज की। ये एल्बम हिट रही और आगे नेहा ने रोमियो जूलिएट म्यूजिक एल्बम बनाई, जिसे उनके भाई टोनी कक्कड़ ने कंपोज किया। एल्बम हिट होने के बाद नेहा को ‘मीराबाई नॉट आउट’ (2008) का गाना ‘हाय रामा’ मिला, जिसे उन्होंने सुखविंदर के साथ गाया। ए.आर.रहमान के गाने में हुईं फीचर, टीवी शो के गाने से मिली पहचान नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग के अलाव एक्टिंग में भी हाथ आजमाया है। वो फिल्म ब्लू के टाइटल सॉन्ग के कोरस में दिखीं। इसके अलावा वो फिल्म इसी लाइफ में (2010) में नजर आ चुकी हैं। उन्होंने कॉमेडी सर्कस के तानसेन में कपिल शर्मा और अली अजगर के साथ काम किया। वो कई कन्नड़ और तेलुगु गानों में भी नजर आई हैं। 2009 में नेहा कक्कड़ ने टीवी शो 'ना आना इस देश लाडो' के टाइटल सॉन्ग को आवाज दी, जिससे उन्हें काफी पहचान मिली थी। नेहा कक्कड़ ने कन्नड़ फिल्म ‘थमास्सू’ के गाने ‘नोडू बारे’ को आवाज दी, जिसके लिए उन्हें साउथ फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का नॉमिनेशन मिला था। दीपिका की फिल्म से नेहा को मिला बड़ा सिंगिंग ब्रेक नेहा कक्कड़ को 2012 की फिल्म कॉकटेल के गाने सेकेंड हैंड जवानी से बड़ा ब्रेक मिला। गाना हिट रहा और नेहा कक्कड़ ने इंडस्ट्री में पहचान बना ली और एक-एक कर कई हिट गाने दिए। कई विवादों के नाम रहा नेहा का सिंगिंग करियर- प्राग गाने पर अश्लीलता के आरोप- साल 2013 में नेहा कक्कड़ ने फिल्म प्राग के गाने बोतल खोल को आवाज दी। अश्लील और डबल मीनिंग लिरिक्स के चलते सेंसर बोर्ड ने इस पर आपत्ति जताई थी। ये गाना काफी विवादों में रहा था। मेलबर्न कॉन्सर्ट विवाद (2025)- ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एक कॉन्सर्ट में नेहा कथित रूप से 2 घंटे की देरी से पहुंचीं। दर्शकों ने नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई। नेहा और उनके भाई टोनी कक्कड़ ने आयोजन की खराब व्यवस्थाओं को जिम्मेदार बताया, जबकि आयोजकों ने उल्टा नेहा की टीम पर गैर-पेशेवर व्यवहार के आरोप लगाए और मुआवजे की मांग की। 'कैंडी शॉप/लॉलीपॉप' गाने पर अश्लीलता का आरोप- नेहा और टोनी कक्कड़ के गाने "कैंडी शॉप" (लॉलीपॉप) के बोल और एक डांस स्टेप को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद हुआ। कई लोगों ने नेहा द्वारा किए गए डांस स्टेप्स को अश्लील बताया और भारतीय संस्कृति के खिलाफ माना। स्टेज परफॉर्मेंस में खुद पर पानी डालने का वीडियो- एक लाइव शो के दौरान नेहा का अपने ऊपर पानी डालकर परफॉर्म करने वाला वीडियो वायरल हुआ। इस पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया, कुछ लोगों ने इसे मनोरंजन माना, जबकि अन्य ने इसे अनावश्यक और भड़काऊ बताया। रियलिटी शो में भावुक होने पर ट्रोलिंग- नेहा सालों से सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडन की जज हैं। कई एपिसोड में नेहा भावुक होकर रोती दिखाई दीं। कुछ दर्शकों ने इसे वास्तविक भावना माना, जबकि कुछ ने इसे "ओवरड्रामेटिक" कहकर ट्रोल किया। रीमिक्स गानों को लेकर आलोचना- नेहा ने कई पुराने पॉपुलर गानों के रीमिक्स गाए हैं। जिनमें कांटा लगा, छम्मा छम्मा और टिप टिप बरसा पानी जैसे दर्जनों गाने शामिल हैं। रिमिक्स गानों पर नेहा की जमकर ट्रोलिंग होती है। 2022 में नेहा ने फाल्गुनी पाठक के गाने मैंने पायल है छनकाई गाया, जिस पर ऑरिजिनल सिंगर ने न सिर्फ इसकी जमकर आलोचना की, बल्कि इसे म्यूजिक के इतिहास के लिए हानिकारक कहा। रिलेशनशिप, ब्रेकअप, डिप्रेशन और शादी- नेशनल टेलीविजन में रिश्ता किया ऑफिशियल, फिर अचानक हुआ ब्रेकअप नेहा कक्कड़ साल 2014 से एक्टर हिमांश कोहली के साथ रिलेशनशिप में थीं। दोनों की मुलाकात फिल्म यारियां की शूटिंग के दौरान हुई। हिमांश फिल्म के हीरो थे और नेहा ने फिल्म के गाने आज ब्लू है पानी-पानी को आवाज दी थी। दोनों ने 2018 में रियलिटी शो इंडियन आइडल में नेशनल टेलीविजन पर रिश्ता ऑफिशियल किया और ये भी ऐलान किया कि वो जल्द ही शादी करेंगे। हालांकि 3 महीने बाद ही अचानक नेहा ने हिमांश से ब्रेकअप कर इसकी घोषणा सोशल मीडिया पर कर दी। ब्रेकअप के बाद डिप्रेशन में रहीं नेहा कक्कड़ ब्रेकअप के कुछ समय बाद नेहा कक्कड़ कई मौकों पर गाने सुनकर इंडियन आइडल के सेट पर रोती दिखीं। जनवरी 2019 में नेहा कक्कड़ ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से डिप्रेशन की बात कबूली और कहा कि वो जिंदगी के सबसे मुश्किल समय से गुजर रही हैं और डिप्रेशन में हैं। उन्हें एंग्जाइटी की समस्या भी रही। नशे में किया था शो के कंटेस्टेंट रोहनप्रीत ने शादी के लिए प्रपोज नेहा कक्कड़ ने 2020 में रोहनप्रीत से शादी की थी। दरअसल, रोहनप्रीत, 2018 में सिंगिग रियलिटी शो राइजिंग स्टार के कंटेस्टेंट थे। वो शो के रनर-अप भी रहे। इसके बाद एक गाने की शूटिंग के समय रोहनप्रीत को नेहा पसंद आ गईं। उन्होंने नेहा की स्नैपचैट आइडी मांगी और दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। एक दिन रोहनप्रीत ने हिम्मत कर उन्हें प्रपोज कर दिया, लेकिन नेहा ने ये कहते हुए साफ इनकार कर दिया कि वो किसी रिलेशनशिप में नहीं आना चाहतीं, उनका फोकस शादी की तरफ है। रोहन महज 25 साल के थे और वो शादी के लिए तैयार नहीं थे। आखिरकार, बात नहीं बनी। रोहनप्रीत से उनकी बातचीत बंद हो गई। फिर कुछ महीनों बाद एक दिन रोहनप्रीत ने नशे में नेहा को कॉल कर कहा कि वो उनके बिना नहीं रह सके। उन्हें जल्द ही शादी कर लेनी चाहिए। नेहा को लगा कि वो नशे में कुछ भी कह रहे हैं, अगले दिन भूल जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रोहन उनसे मिलने आए और फिर शादी का प्रस्ताव दिया। शादी को समझा गया पब्लिसिटी स्टंट नेहा की शादी की खबरों के बीच उनके गाने नेहू द व्याह अनाउंस हुआ। तब हर किसी का मानना था कि शादी की खबरें महज पब्लिसिटी स्टंट हैं। हालांकि सॉन्ग रिलीज के दिन ही नेहा कक्कड़ ने शादी कर ली। देखिए शादी की चुनिंदा तस्वीरें- गाने से उड़ी प्रेग्नेंसी की अफवाहें जैसे शादी से पहले नेहा ने गाना अनाउंस किया, ठीक वैसे ही शादी के चंद महीने बाद नेहा ने एक और गाना अनाउंस किया, जिसमें वो बेबी बंप के साथ नजर आई। हर किसी को लगा कि वो प्रेग्नेंट हैं, जिसके लिए एक और गाना बना है, हालांकि बाद में सिंगर ने साफ किया, ये गेटअप महज गाने के लिए है। बहन ने तोड़ा रिश्ता, जमकर हुआ विवाद अप्रैल 2025 में सोनू कक्कड़ ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट शेयर कर नेहा और टोनी से रिश्ता खत्म करने की घोषणा कर दी। इसके बाद से ही सोनू परिवार के सभी इवेंट से नदारद दिखीं। तलाक की खबरों से चर्चा में रहीं 2026 की शुरुआत में नेहा कक्कड़ ने भी पोस्ट शेयर कर कहा कि वो सभी रिश्तों से ब्रेक ले रही हैं। इसके बाद से ही उनके तलाक की खबरें सुर्खियों में आ गईं। चर्चा इतनी बढ़ी कि नेहा ने खुद इस पर सफाई देते हुए अपील की कि उनके बयान में पति और परिवार को न घसीटा जाए।

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