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डेथ एनिवर्सरीःगहने गिरवी रख प्रकाश मेहरा ने बनाई जंजीर:फ्लॉप अमिताभ को लिया तो डिस्ट्रीब्यूटर बोले- ये लंबा-बेवकूफ कौन, नशे में कहा- मैंने तुम्हें स्टार बनाया

70 के दशक की बात है। रोमांस का दौर था और हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार थे दिलीप कुमार। धर्मेंद्र उस दौर में ‘मेरा गांव मेरा देश’(1971), ‘सीता और गीता’(1972) जैसी बेहतरीन फिल्मों से खुद को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर चुके थे। समय के साथ वो फिल्में बनाने में दिलचस्पी लेने लगे। कोई भी स्क्रिप्ट अच्छी लगती थी, तो झट से खरीद लेते। सीता और गीता में काम करते हुए धर्मेंद्र ने उस फिल्म की राइटर जोड़ी सलीम-जावेद की एक कहानी सुनी। नाम था ‘जंजीर’। सलीम-जावेद तब ‘अंदाज’ (1971) और ‘हाथी मेरे साथी’ (1971) जैसी फिल्में लिख चुके थे। कहानी पसंद आने पर धर्मेंद्र ने जंजीर की स्क्रिप्ट झट से खरीद ली। समय के साथ वो दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए। एक रोज उनकी मुलाकात हसीना मान जाएगी, आन बान जैसी जुबली हिट डायरेक्ट करने वाले प्रकाश मेहरा से हुई। वो प्रोडक्शन में कदम रखने वाले थे। उन्होंने धर्मेंद्र से कहा कि वो फिल्म ‘समाधि’ बना रहे हैं, हीरो का डबल रोल होगा। धर्मेंद्र ने दिलचस्पी दिखाई और कहानी सुनी। उन्हें वो स्क्रिप्ट इतनी पसंद आई कि वो झट से इसे करने के लिए मान गए, लेकिन फिर एक डील हुई। धर्मेंद्र ने प्रकाश मेहरा से ‘समाधि’ की स्क्रिप्ट खरीद ली और बदले में 3500 रुपए लेकर जंजीर की स्क्रिप्ट थमा दी, जो सलीम-जावेद ने उन्हें दी थी। और इस तरह जंजीर की स्क्रिप्ट पहुंचीं प्रकाश मेहरा के पास। वो जंजीर, जिसने प्रकाश मेहरा को सबसे बड़ा डायरेक्टर, फ्लॉप-मनहूस एक्टर अमिताभ बच्चन को स्टार और सलीम-जावेद को इतिहास रचने वाली राइटर जोड़ी का दर्जा दिलाया। पत्नी के गहने बेचकर इस फिल्म को रूप देने वाले प्रकाश मेहरा को गुजरे आज 17 साल हो गए। डेथ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए कैसे एक फिल्म और कई संयोंग ने उन्हें बनाया हिंदी सिनेमा का आला फिल्मकार- प्रकाश मेहरा ने धर्मेंद्र और मुमताज के साथ फिल्म जंजीर अनाउंस की। इसी समय प्रकाश मेहरा ने राइटर के.नारायण से ‘कहानी किस्मत की’ फिल्म की स्क्रिप्ट खरीदी। धर्मेंद्र को ये कहानी भी पसंद आई। उन्होंने प्रकाश मेहरा से कहा, ‘अगर आप कहानी किस्मत की फिल्म की स्क्रिप्ट डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी (धर्मेंद्र को पहली फिल्म देने वाले) को दे देंगे, तो वो आपकी जंजीर बनाने में काफी मदद कर सकते हैं।’ प्रकाश मेहरा को ये ऑफर पसंद नहीं आया। वो पहले ही ‘समाधि’ की कहानी धर्मेंद्र को दे चुके थे, अब एक और फिल्म किसी और को देना उन्हें मुनासिब नहीं लगा। उन्होंने साफ इनकार कर दिया। धर्मेंद्र को ये बात थोड़ी खटकी। कुछ दिन बीते ही थे कि धर्मेंद्र ने अपने भाई की फिल्म शुरू कर दी। जंजीर के लिए डेट्स मांगी गई तो धर्मेंद्र ने साफ कहा- ‘पहले मैं अपने भाई की फिल्म का आधा शेड्यूल करूंगा और फिर जंजीर की शूटिंग शुरू करूंगा।’ प्रकाश मेहरा इतना लंबा इंतजार नहीं करना चाहते थे। धर्मेंद्र ने इस बारे में सोचने का समय लिया, लेकिन फिर फिल्म छोड़ दी। धर्मेंद्र के इनकार के बाद प्रकाश मेहरा देव आनंद के पास गए। उन्हें लगा कि फिल्म में एक्शन-ही-एक्शन है और गाने कम। उन्होंने प्रकाश मेहरा को सुझाव दिया- ‘क्यों न तुम फिल्म में कुछ और गाने डालो’। बातचीत के बीच देव आनंद ने कहा- ‘अगर मैं अपने होम प्रोडक्शन नव निकेतन के बैनर तले ये फिल्म बनाऊं तो तुम कितने पैसे लोगे?’ प्रकाश मेहरा ये स्क्रिप्ट छोड़ना नहीं चाहते थे। उन्होंने देव आनंद का ऑफर झट से ठुकरा दिया। हीरो की तलाश जारी रही। अब प्रकाश मेहरा, राजकुमार के पास गए। वो तब मद्रास में एक फिल्म शूट कर रहे थे। उन्हें ‘जंजीर’ इतनी पसंद आई कि उन्होंने कहा कि वो कल से ही फिल्म की शूटिंग करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते शूटिंग मद्रास में ही हो, जिससे वो दूसरी फिल्म भी शूट कर सकें। ये मुमकिन नहीं था, क्योंकि कहानी बॉम्बे की थी। बात इस बार भी नहीं बनी। राजेश खन्ना, दिलीप कुमार ने भी एक्शन फिल्म करने से इनकार कर दिया। प्रकाश मेहरा बार-बार मिल रहे रिजेक्शन से परेशान हो गए। जावेद अख्तर ने दैनिक भास्कर को दिए पुराने इंटरव्यू में कहा था- फिल्म इंडस्ट्री में अगर एक -दो बड़े स्टार्स ने फिल्म की स्क्रिप्ट को ना कह दिया तो प्रोड्यूसर्स को लगता है कि स्क्रिप्ट खराब है और वो उसे छोड़ देते थे, लेकिन इस इंसान की न जाने क्या धारणा थी जो इन्होंने फिल्म नहीं छोड़ी। वो भी तब जब बड़े स्टार्स ने इसे करने से इनकार कर दिया था। एक दिन प्राण, प्रकाश मेहरा से मिलने पहुंचे और परेशान देख कहा- ‘तुम अमिताभ को ट्राय क्यों नहीं करते? बॉम्बे टू गोवा में देखने के बाद मुझे लगता है कि वो भविष्य में स्टार बनेगा। आपको भी वो फिल्म जरूर देखनी चाहिए।’ प्रकाश मेहरा ने ये बात अनसुनी कर दी। उस समय अमिताभ बच्चन एक फ्लॉप हीरो थे। अमिताभ 30 साल के थे और तब उनकी एक-एक कर 12 फिल्में फ्लॉप हो गईं। हर कोई उन्हें फिल्मों में लेने से कतराने लगा था। कुछ दिन बीते तो सलीम-जावेद भी उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने भी प्रकाश मेहरा के सामने अमिताभ का नाम सुझाया और कहा- ‘इस लड़के में वो बात है, जो जंजीर में विजय खन्ना बनने के लिए परफेक्ट हैं।' सलीम-जावेद ने भी प्रकाश मेहरा के सामने फिल्म बॉम्बे टू गोवा के उस फाइट सीन का जिक्र किया, जिसमें अमिताभ बच्चन च्विंगम खाते हुए गुंडों की पिटाई कर रहे थे। सबके सुझाव पर प्रकाश मेहरा ने फिल्म बॉम्बे टू गोवा देखी। एक सीन में अमिताभ बच्चन को देखते ही प्रकाश मेहरा जोर से चिल्लाए- ‘जंजीर का हीरो मिल गया।’ प्रकाश मेहरा ने अमिताभ को फिल्म ऑफर की, तो वो माने, जरूर लेकिन ये भी कहा कि अगर जंजीर नहीं चली तो मैं फिल्म इंडस्ट्री और बॉम्बे छोड़कर इलाहाबाद चला जाऊंगा। प्रकाश मेहरा को सलीम-जावेद की इस कहानी पर काफी भरोसा था। उन्होंने आश्वासन दिया कि ये फ्लॉप नहीं होगी। हीरो की कास्टिंग के बाद अब बारी थी हीरोइन की। फिल्म मुमताज के साथ अनाउंस हुई थी, लेकिन उन्होंने शादी के लिए फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी। बाद में कुछ और हीरोइनों ने ये कहकर फिल्म ठुकरा दी कि वो अमिताभ जैसे फ्लॉप एक्टर के साथ काम नहीं करेंगी। एक दिन अमिताभ ने जया भादुड़ी से कहा कि कोई भी हीरोइन उनके साथ काम करने के लिए राजी नहीं है। उस समय दोनों रिलेशनशिप में थे। अमिताभ बच्चन की निराशा देख जया ने कहा- ‘अगर प्रकाश मेहरा कहें, तो मैं फिल्म करने के लिए तैयार हूं।’ अमिताभ ये बात लेकर प्रकाश मेहरा के पास पहुंचे और बात बन गई। 1973 में ये फिल्म बनकर तैयार हो गई, लेकिन जब प्रकाश मेहरा ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को फिल्म दिखाई, तो उन्होंने अमिताभ बच्चन को देख मजाक उड़ाते हुए कहा- ‘ये लंबा बेवकूफ हीरो कौन है।’ अमिताभ बच्चन को ये बात काफी बुरी लगी। बिग बी तब प्रकाश मेहरा को लल्ला कहते थे, जो इलाहाबाद में भाई को कहा जाता ता। एक दिन उन्होंने कहा, ‘लल्ला मैं नहीं जानता कि इस फिल्म के बाद मेरा भविष्य क्या होगा?’ जवाब मिला, ‘स्वार्थी मत बनो, मेरे बारे में सोचो। अगर कुछ भी गड़बड़ हुई तो मैं सब कुछ गंवा दूंगा।’ वाकई प्रकाश मेहरा ने इस फिल्म में अपना सब कुछ लगा दिया। हर एक जमापूंजी। यहां तक कि उन्होंने पत्नी के सारे जेवर भी गिरवी रख दिए थे। लंबे स्ट्रगल के बाद जंजीर को डिस्ट्रीब्यूटर्स मिले, लेकिन रिलीज होने से पहले ही डायरेक्टर प्रकाश मेहरा और राइटर जोड़ी सलीम-जावेद के बीच क्रेडिट की मजेदार जंग शुरू हो गई। दरअसल, सलीम जावेद को अपनी लिखी कहानी पर पूरा भरोसा था। उनका मानना था कि अगर फिल्म की कहानी अच्छी हो, तो उसे हिट होने से कोई रोक नहीं सकता, लेकिन अगर कोई फिल्म हिट होती है, तो उसका क्रेडिट राइटर्स को भी जरूर मिलना चाहिए। एक दिन राइटर सलीम खान, प्रकाश मेहरा के पास पहुंचे और कहा- ‘हमारे नाम भी जंजीर के पोस्टर में होने चाहिए।’ प्रकाश मेहरा ने हैरानी जताते हुए कहा- ‘राइटर्स के नाम? ऐसा कभी होता है क्या?’ वाकई हिंदी सिनेमा के इतिहास में किसी भी फिल्म के पोस्टर में उस समय तक कभी किसी राइटर का नाम नहीं लिखा गया था, लेकिन सलीम-जावेद ये रीत बदलने पर अड़े थे। देखते-ही-देखते फिल्म रिलीज की तारीख पास आ गई और बॉम्बे में पोस्टर लगा दिए गए। एक दिन सलीम खान ने काफी शराब पी और जे.पी.सिप्पी के प्रोडक्शन हाउस में काम करने वाले लड़के को कॉल कर जीप और पेंटिंग के सामान का इंतजाम करने को कहा। वो लड़का जैसे ही पहुंचा, सलीम खान ने उससे कहा- ‘जाओ, शहर में जंजीर के जितने भी पोस्टर लिखे हैं, उनके ऊपर जाकर लिख दो, रिटन बाय सलीम-जावेद।’ उस लड़के ने ठीक वैसा ही किया। अगली सुबह जुहू से ओपेरा हाउस तक के हर पोस्टर में जया और प्राण नाथ के माथे पर अलग से पोते गए सलीम-जावेद के नाम थे। फिल्म इंडस्ट्री में इसकी जमकर चर्चा हुई, लेकिन फिर प्रकाश मेहरा ने उनकी जिद के आगे घुटने टेक दिए। उन्होंने जंजीर के नए पोस्टर बनवाए, जिसमें हिंदी सिनेमा के इतिहास में पहली बार राइटर के नाम शामिल किए गए। फिल्म के कोलकाता प्रीमियर कोलकाता में कई बड़ी हस्तियां पहुंचीं। प्रीमियर खत्म होते ही वहां मौजूद हर कोई प्राण के पास जाकर उनके अभिनय की तारीफ करने लगा और अमिताभ नजरअंदाज हो गए। ये देख अमिताभ बच्चन की आंखों में आंसू आ गए। प्रकाश मेहरा ने ये देखा, तो पास आकर कहा- ‘तुम चिंता मत करो, एक बार फिल्म रिलीज होने दो, फिर देखना, जो लोग आज प्राण-प्राण कर रहे हैं, वो कैसे अमिताभ-अमिताभ करेंगे।’ 11 मई 1973 फ्लॉप हीरो अमिताभ बच्चन और जया बच्चन स्टारर, प्रकाश मेहरा द्वारा डायरेक्ट और प्रोड्यूस की हुई फिल्म जंजीर रिलीज हुई। कोलकाता में फिल्म ने ठीक-ठाक कमाई की, लेकिन बॉम्बे में थिएटर खाली-खाली रहे। अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद लौटने की तैयारी कर ली। निराशा इतनी हुई कि उन्हें तेज बुखार हो गया। फिल्म रिलीज हुए 4 दिन बीत गए और प्रकाश मेहरा ने रोज-रोज फिल्म की खबर लेना भी बंद कर दिया। एक दिन मुंबई के गेएटी गैलेक्सी सिनेमा हॉल के बाहर से गुजरते हुए उन्होंने देखा कि टिकट विंडो के बाहर काफी भीड़ लगी है। आज से पहले तक वहां कभी इतनी भीड़ नहीं लगी थी। वो पास गए, तो वहां जंजीर लगी थी। फिल्म देखने वालों की भीड़ इतनी थी कि उन्हें टिकट भी नहीं मिल रही थी। तब भी लोग 5 रुपए की टिकट 100-100 रुपए में खरीदने के लिए झगड़ रहे थे। फिल्म जंजीर चल निकली थी। फिल्म के गाने ‘यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी…’ और ‘दीवाने हैं, दीवानों को न घर चाहिए…’ काफी हिट रहे। हर जगह बस फिल्म की ही चर्चा थी। प्रकाश मेहरा ने तुरंत अमिताभ को कॉल कर ये खबर दी, उन्हें लगा ये सुनकर उनकी तबीयत ठीक हो जाएगी, लेकिन हुआ इसका उल्टा। अमिताभ बच्चन को ये सुनते ही 104 डिग्री बुखार हो गया। एक हफ्ते में अमिताभ बच्चन स्टार बन चुके थे। उनके हुए डायलॉग- ‘जब तक बैठने को न कहा जाए, शराफत से खड़े रहो, ये पुलिस स्टेशन है, तुम्हारे बाप का घर नहीं….’, हर किसी की जुबान पर था और अमिताभ बच्चन फ्लॉप एक्टर से बन गए एंग्री यंग मैन। प्रकाश मेहरा, अमिताभ बच्चन, सलीम-जावेद, चारों को फिल्म का फायदा मिला। प्रकाश मेहरा को अमिताभ का काम ऐसा पसंद आया कि आगे उन्होंने ‘हेरा फेरी’, ‘खून पसीना’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी’ जैसी 6 फिल्में अमिताभ बच्चन के साथ बनाईं। तब कहा जाता था कि जिस फिल्म में प्रकाश मेहरा अमिताभ बच्चन को लें, उसका हिट होना तय है, लेकिन ये भ्रम फिल्म ‘जादूगर’ (1989) से टूट गया, जो प्रकाश मेहरा ने तत्कालीन प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी के कहने पर बनाई थी। दरअसल, 5 हिट फिल्मों के बाद प्रकाश मेहरा अमिताभ के साथ फिल्म जादूगर बनाना चाहते थे, लेकिन बैक-टु-बैक फिल्में कर रहे अमिताभ के पास समय नहीं था। इसी बीच अमिताभ ने प्रकाश मेहरा के सबसे बड़े कॉम्पिटिटर मनमोहन देसाई के साथ कुछ फिल्में कीं। मर्द, अमर अकबर एंथोनी, नसीब और कूली बनाने वाले मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा का झगड़ा जगजाहिर था। दोनों इंटरव्यूज में एक दूसरे को फिल्मों के नाम से ताने देते थे। मनमोहन देसाई ने एक इंटरव्यू में कहा- ‘एक शराबी ही शराबी जैसी फिल्म बना सकता है, और मर्द ही मर्द जैसी फिल्में बनाते हैं।’ प्रकाश मेहरा ने जवाब दिया- ‘एक कुली ही इतने नीचे गिरकर ऐसी बात कर सकता है।’ इस कॉम्पिटिशन का असर बिग बी पर भी पड़ा, क्योंकि वो दोनों की फिल्में कर रहे थे। लेकिन एक गलतफहमी से प्रकाश मेहरा के जहन में बिग बी के लिए शक पैदा हो गया। उन्हें लगा कि स्टार बनने के बाद वो उन्हें समय नहीं दे रहे। 1987 में प्रकाश मेहरा एक पार्टी में पहुंचे। उन्होंने जमकर शराब पी। नशा होते ही वो अमिताभ बच्चन के पास पहुंचे और चिल्लाकर कहा- 'मैंने तुम्हें स्टार बनाया और अब तुम्हारे पास मेरे लिए ही टाइम नहीं। तुम मुझे भूल जाओ, मेरी फिल्म भूल जाओ, लेकिन ये मत भूलना कि जब तुम्हें कोई पूछता नहीं था, तब मैंन तुम्हें जंजीर से उठाया। एंग्री यंग मैन बनाया।' अमिताभ खामोश खड़े सुनते रहे। बात वहीं खत्म हो गई। अगले दिन अमिताभ ने प्रकाश मेहरा को कॉल कर कहा, ‘आपको ऐसा क्यों लगा कि मैं आपकी फिल्म नहीं करना चाहता। इस बार प्रकाश मेहरा खामोश रहे। आगे अमिताभ ने कहा- आप अपनी फिल्म के लिए डेट्स ले लीजिए।’ अनबन वहीं खत्म हो गई, लेकिन फिर प्रकाश मेहरा ने जादूगर बनाने का आइडिया ड्रॉप कर दिया। वाइल्ड फिल्म्स इंडिया को दिए इंटरव्यू में प्रकाश मेहरा ने स्वीकार किया था कि अमिताभ बच्चन से उनकी अनबन थी। उन्होंने ये भी कहा कि फिल्म जादूगर को चुनना उनकी बदकिस्मती थी। एक दिन यशवंतराव चौहान हॉल में इंदिरा गांधी एक प्रोग्राम में आई थीं,अमिताभ बच्चन के गांधी परिवार से करीब के रिश्ते थे, तो वो भी पहुंचे और प्रकाश मेहरा भी आए। वहां इंदिरा गांधी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री को जिम्मेदारी लेकर अंधविश्वास कम करने के लिए फिल्में बनानी चाहिए। इंदिरा गांधी की बात सुनकर अमिताभ बच्चन ने प्रकाश मेहरा ने कहा, ‘देखो अपने बीच जो भी बात हुई उसे भूल जाओ।’ फिल्म बननी शुरू हुई, जो एक फर्जी बाबा को एक्सपोज करने की कहानी थी। शूटिंग चल ही रही थी कि एक दिन एक आदमी ने प्रकाश मेहरा की कार की डिग्गी में 50 लाख रुपए से भरी पेटी रख दी। कुछ देर बाद एक बाबा उनके पास आए और कहा ये 50 लाख रख लो, लेकिन ये फिल्म मत बनाओ। प्रकाश मेहरा ने इनकार कर दिया। फिल्म 1989 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही। प्रकाश मेहरा क्रिएटिव, मस्ती-मजाक करने वाले शख्स थे, लेकिन सेट पर बेहद सख्त मिजाज थे। यही वजह रही कि वो फिल्म ‘लावारिस’ से राखी को निकालने वाले थे। इस फिल्म में परवीन बाबी को अमिताभ के साथ कास्ट किया गया था। परवीन बाबी की मानसिक हालत से सेट का माहौल बिगड़ने लगा, तो उन्हें हटाकर जीनत अमान की कास्टिंग की गई। राखी ने फिल्म में अमिताभ बच्चन की मां का रोल निभाया। एक दिन सेट पर अमजद खान तैयार बैठे, लेकिन राखी नहीं पहुंचीं। कई घंटे बीते, कई कॉल भी किए गए, लेकिन जवाब नहीं मिला। प्रकाश मेहरा शूटिंग रुकने से भड़क गए। उन्होंने टीम से कहा, ‘आखिरी बार कॉल करो, उठे तो ठीक वरना आज पैकअप कर, कल नई हीरोइन के साथ शूट करेंगे।’ खुशकिस्मती से राखी ने कॉल उठाकर कहा कि उनकी बेटी बीमार है। ये सुनकर प्रकाश मेहरा का गुस्सा शांत हो गया। एक नजर प्रकाश मेहरा के करियर पर- 13 जुलाई 1939 को प्रकाश मेहरा का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुआ। जन्म के ठीक बाद मां का निधन हो गया। पिता ने भी संन्यास ले लिया और नवजात प्रकाश को उनके नाना-नानी के पास छोड़ गए। रेडियो सुनते हुए उन्हें म्यूजिक कंपोजर बनने की ठानी और नाना से 13 रुपए चुराकर मुंबई आ गए। फिल्म इंडस्ट्री में काम नहीं मिला तो वो गुजारे के लिए सैलून में काम करने लगे। लंबी जद्दोजहद के बाद उन्हें 1962 की फिल्म प्रोफेसर में प्रोडक्शन कंट्रोलर का काम मिला। आगे उन्होंने 1965 की मीना कुमारी स्टारर फिल्म पूर्णिमा में असिस्टेंट डायरेक्टर का काम किया। साथ ही फिल्म का एक गाना भी लिखा। दो सालों में ही हुनर परखने के बाद उन्होंने 1968 की हसीना मान जाएगी से बतौर डायरेक्टर फिल्म बनाई, जो जुबली हिट रही। आगे उन्होंने मेला, समाधि और आन-बान जैसी फिल्में भी बनाईं, जो सभी जुबली हिट रहीं। आगे उन्होंने जंजीर से बतौर प्रोड्यूसर करियर की दूसरी पारी शुरू की और शराबी, लावारिस, मुकद्दर का सिकंदर जैसी कई हिट फिल्में बनाईं। जादूगर फ्लॉप होने के बाद उनकी जिंदगी एक जुआं, दलाल और बाल ब्रह्मचारी जैसी फिल्में एवरेज रहीं। प्रकाश मेहरा ने फिल्मी करियर में कई गाने भी लिखे और साथ ही चमेली की शादी की स्क्रिप्ट में भी उनकी भागीदारी रही। उनके डायरेक्शन और प्रोडक्शन की आखिरी फिल्म मुझे मेरी बीवी से बचाओ (2001) रही। उन्हें प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की तरफ से दो बार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। 17 मई 2009 में उनका 69 साल की उम्र में मल्टीपल ऑर्गन फैल्योर से निधन हो गया। ……………………………………………………………………………………. फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें- विजय का लेडी लक, जिसके बर्थडे पर चुनाव जीते: तमिलनाडु का रिजल्ट आते ही विजय के घर पहुंचीं तृषा, एक्टर का हो चुका तलाक तमिलनाडु चुनाव में थलापति विजय की पार्टी TVK की जीत में उनकी 'लेडी लक' तृषा कृष्णन को अहम माना जा रहा है। 4 मई को 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन था, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं। 51 साल के विजय आज तमिल फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हैं तो तृषा कृष्णन क्वीन ऑफ साउथ इंडिया कही जाती हैं। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं। पूरी खबर पढ़िए… पुण्यतिथि: ऋषि कपूर को सलमान के पिता ने धमकाया:राज कपूर ने सिगरेट पीने पर पीटा, दाऊद के साथ चाय पी, कभी अमिताभ का अवॉर्ड खरीदा 30 अप्रैल 2020, 6 साल पहले सुबह खबर आई कि ऋषि कपूर अब नहीं रहे। कुछ दिन पहले तक वो गंभीर हालत होने के बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ को हंसाते तो कभी गाना सुना रहे थे। दैनिक भास्कर से बात करते हुए ऋषि कपूर की इकलौती बेटी रिद्धिमा कहती हैं, ‘सब अचानक हुआ, वो बहुत डरावना दिन था। अचानक एक खालीपन आ गया। एक सूनापन, उनकी जिंदगी उनकी मौजूदगी लार्जर देन लाइफ थी।’ पूरी स्टोरी पढ़ें… ………………………………………………. विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। पूरी खबर पढ़ें…

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Judge declares another mistrial in Harvey Weinstein New York rape case

It marks the third time a New York jury has considered the case against the 74-year-old disgraced film mogul.

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साई पल्लवी@34, लव लेटर मिलने पर मार पड़ी:फिल्म ऑफर करने वाले को समझा स्टॉकर, कंगना की फिल्म में जूनियर आर्टिस्ट थीं रामायण की सीता

इंडियन सिनेमा की मोस्ट अवेटेड फिल्मों में से एक रामायण में माता सीता के किरदार में नजर आने वालीं साई पल्लवी आज 34 साल की हो चुकी हैं। साई पल्लवी कभी एक डांस रियलिटी शो की आम सी कंटेस्टेंट हुआ करती थीं। बचपन में वो कंगना रनोट की फिल्म में बतौर जूनियर आर्टिस्ट भी नजर आईं। आज अपने हुनर और सादगी से साई पल्लवी साउथ की टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर एक नजर उनके बचपन, करियर और बेहतरीन किस्सों पर- फिल्म ऑफर करने वाले डायरेक्टर को समझ लिया स्टॉकर 9 मई 1992 साई पल्लवी का जन्म तमिलनाडु के कोएम्बटूर में हुआ। पिता एक्साइज ऑफिसर और एक फुटबॉल प्लेयर थे और मां राधा एक डांसर थीं। बचपन में साई भी अच्छी बैडमिंटन प्लेयर थीं। साई महज 13 साल की उम्र में फिल्म कस्तूरी मान (2005) में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट नजर आई थीं। इसके बाद उन्होंने 2008 की तमिल फिल्म धाम धूम में बतौर जूनियर आर्टिस्ट काम किया। वो उस वक्त छठी क्लास में थीं। इस फिल्म से कंगना रनोट ने तमिल सिनेमा में डेब्यू किया था। मां के नक्शेकदम पर चलते साई को डांस में रुचि होने लगी। टीनएज में उन्होंने तमिल डांस शो उंगालिल यार उधुता प्रभु देवा (कौन बनेगा अगला प्रभू देवा) (2008) में हिस्सा लिया। शो के एक एपिसोड में सामंथा रुथप्रभू साई के डांस से इंप्रेस हुई थीं और जमकर तारीफ की थी। तब से ही साई को थोड़ी-बहुत पहचान मिलने लगी। कौन बनेगा अगला प्रभू देवा में अगर साई फाइनलिस्ट होतीं, तो उन्हें प्रभू देवा से मिलने का मौका मिलता, लेकिन सेमी फिनाले में ही शो से बाहर होने पर वो प्रभु देवा से नहीं मिल सकीं। लेकिन संयोग से सालों बाद प्रभू देवा ने उनके लिए डांस कोरियोग्राफ किया, जिसने बड़ा रिकॉर्ड कायम किया। साई वो डांस रियलिटी शो तो नहीं जीत सकीं, लेकिन उनकी परफॉर्मेंस सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई। उस समय साउथ के डायरेक्टर अल्फोंस पुथ्रेन अपनी एक फिल्म के लिए नए चेहरे की तलाश में थे कि तभी एक दिन फेसबुक पर उनकी नजर एक डांस वीडियो पर पड़ी। वो वीडियो साई पल्लवी के डांस क्लिप का था। उन्हें साई इतनी पसंद आई कि वो जैसे-तैसे उनका नंबर ढूंढने लगे। एक रोज कॉल कर अल्फोंस ने साई को फिल्म ऑफर कर दी। शौकिया तौर पर डांस रियलिटी शो करने वालीं साई को असल में डॉक्टर बनना था। उनकी एक कजिन डॉक्टरी पढ़ने जॉर्जिया जा रही थी, तो साई ने भी वहीं एडमिशन ले लिया। यही वजह रही कि उन्होंने डायरेक्टर अल्फोंस की फिल्म भी ठुकरा दी। साई छुट्टियों में भारत आती थीं और बाकी समय जॉर्जिया में रहती थीं। साउथ रिपोर्ट्स के मुताबिक, साई शुरुआत में जॉर्जिया नहीं जाना चाहती थीं, तब उनकी मां ने कहा था कि अगर वो नहीं गईं, तो उनकी कजिन वहां गोरी हो जाएंगी, अच्छी अंग्रेजी सीखेंगी और उन्हें अच्छे रिश्ते भी मिलेंगे। इसी लालच में मां ने उन्हें जॉर्जिया जाने के लिए राजी किया। जब साई के फाइनल ईयर के एग्जाम नजदीक आए तो वो पढ़ाई पर फोकस करने के लिए कोएम्बटूर आ गईं। ये वही समय था, 6 साल पहले साई को फिल्म ऑफर करने वाले डायरेक्टर अल्फोंस ने फिल्म प्रेमम शुरू की। इस फिल्म में वो असिन को कास्ट करना चाहते थे, लेकिन फिर मलयाली बोलने वाली एक्ट्रेस की चाह में उन्होंने असिन का नाम ड्रॉप कर दिया। एक रोज उन्हें फिर साई पल्लवी का ख्याल आया और उन्होंने झट से साई को कॉल कर प्रेमम फिल्म ऑफर कर दी। पढ़ाई पर फोकस कर रहीं साई इस कॉल से डर गईं। उन्हें लगा कि कहीं कोई उन्हें स्टॉक तो नहीं कर रहा, जो बार-बार ऐसे कॉल करता है। साई ने पहले तो कॉल पर जमकर बातें सुनाईं और फिर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाना चाहा। खुशकिस्मती से डायरेक्टर ने अपनी पूरी प्रोफाइल और फिल्म के बारे में बताकर ये गलतफहमी दूर कर दी। इसके बाद साई ने मलयाली फिल्म प्रेमम में काम करने के लिए हामी भर दी। साल 2014 में 5 लोग खासकर साई का ऑडिशन लेने उनके होमटाउन पहुंचे थे। ऑडिशन सफल रहा और उन्हें फिल्म प्रेमम में एक लेक्चरर मलार का रोल मिला। फिल्म साइन करने से पहले साई ने 3 शर्तें रखीं। पहली शर्त- शूटिंग कॉलेज की छुट्टियों में ही होगी, दूसरी शर्त- वो फिल्म में वही कपड़े पहनेंगी, जिनमें वो सहज रहें और तीसरी शर्त- वो फिल्म में मेकअप नहीं करेंगी। आमतौर पर हर एक्ट्रेस चाहती है कि वो कैमरे पर बेदाग और परफेक्ट दिखे, जिसके लिए मेकअप का इस्तेमाल करना बेहद आम बात है। तब करीब 22 साल की साई पल्लवी के चेहरे पर कई मुहांसे थे। कोई भी लड़की इन्हें फिल्म में छिपाना चाहती, लेकिन साई ने मेकअप न करने का फैसला किया। छुट्टियों में ही साई ने पूरी फिल्म शूट की और फिर जॉर्जिया जाकर एग्जाम दिए। फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखने के लिए साई जॉर्जिया से भारत आईं। जैसे ही थिएटर में फिल्म खत्म हुई, पूरा थिएटर तालियों से गूंज उठा। इसे क्रिटिक्स और दर्शकों का खूब प्यार मिला। इस फिल्म के लिए न्यूकमर साई पल्लवी को 1-2 नहीं बल्कि पूरे 6 डेब्यू अवॉर्ड मिले थे। उनके बिना मेकअप काम करने की भी काफी चर्चा रही। फिल्म प्रेमम की बदौलत साई पल्लवी को कई फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। 2015 में वो दुलकर सलमान के साथ मलयाली फिल्म काली में नजर आईं। ये फिल्म भी हिट रही और साई पल्लवी को बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन मिला। मलयाली फिल्मों में स्टारडम हासिल करने के बाद साई ने 2017 में तेलुगु फिल्म फिदा की, जो ब्लॉकबस्टर रही। इस फिल्म में साई पल्लवी की परफॉर्मेंस को 100 ग्रेटेस्ट परफॉर्मेंस ऑफ द डीकेड्स में शामिल किया है। इस फिल्म के लिए उन्हें पहला बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड भी मिला। आगे उन्होंने मिडल क्लास अब्बाई, मारी 2, एथिरन, लव स्टोरी जैसी बेहतरीन फिल्में करते हुए खुद को साउथ की टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल किया। साई पल्लवी से जुड़े ये किस्से और विवाद भी पढ़िए- लव लेटर लिखने पर घर में हुई पिटाई नेटफ्लिक्स के शो माय विलेज में साई पल्लवी ने बचपन से जुड़ा मजेदार किस्सा शेयर किया था। उन्होंने बताया था कि एक बार 7वीं क्लास में एक लड़के ने उनके बैग में लव लेटर रख दिया था। शाम को जब उनके पिता ने उनका बैग चेक किया तो उसमें लेटर निकला। ये देखकर उन्हें पिता की खूब मार पड़ी थी। प्रभु देवा से मिलने का पुराना सपना हुआ पूरा, 10 साल बाद उन्हीं के साथ बनाया इतिहास साई पल्लवी ने डांस रियलिटी शो कौन बनेगा अगला प्रभु देवा किया था। फाइनलिस्ट को प्रभु देवा से मिलने का मौका मिलता, लेकिन साई पल्लवी सेमी फिनाले में ही बाहर हो गईं और प्रभू देवा से नहीं मिल सकीं। जब उन्हें 2018 की फिल्म मारी 2 मिली तो इसका एक गाना राऊडी बेबी प्रभु देवा और जानी मास्टर ने मिलकर कोरियोग्राफ किया था। संयोग ये रहा कि इस गाने की शूटिंग उसी स्टूडियो में हुई, जहां उस डांस रियलिटी शो की शूटिंग होती थी। प्रभु देवा द्वारा कोरियोग्राफ किया गया ये गाना काफी हिट रहा। ये गाना 12 जनवरी 2019 में यूट्यूब पर अपलोड हुआ। ये पहला साउथ इंडियन गाना है, जिसके यूट्यूब पर 1.5 बिलियन व्यूज हैं। किसिंग सीन होने पर ठुकराई विजय देवरकोंडा की फिल्म साल 2018 में साई पल्लवी ने विजय देवरकोंडा के साथ डेब्यूटेंट डायरेक्टर भरत कम्मा के साथ फिल्म साइन की थी। इस फिल्म का पहला पोस्टर 9 मई 2018 में विजय के बर्थडे के दिन जारी हुई। हालांकि जब साई को पता चला कि उन्हें फिल्म में विजय के साथ किसिंग सीन देना होगा, तो उन्हें ये फिल्म ठुकरा दी। कश्मीरी पंडितों पर दिए गए बयान पर हुआ विवाद फिल्म विराट पर्वन के प्रमोशनल इवेंट में साई के एक बयान से विवाद हो गया। दरअसल, उन्होंने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की तुलना गो तस्करी के आरोपियों की लिंचिंग से की है और कहा कि हिंसा कोई भी करे वह गलत है। साई ने कहा था, 'कश्मीर फाइल्स में 90 के दशक में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार दिखाया है। अगर आप इसे धर्म की लड़ाई की तरह देख रहे हैं तो उस घटना के बारे में क्या कहेंगे जिसमें गायों से भरा ट्रक लेकर जा रहे मुस्लिम ड्राइवर को पीटा गया और जय श्री राम के नारे लगाने के लिए मजबूर किया गया। मेरे हिसाब से इन दोनों में कोई फर्क नहीं है।' विवाद होने पर साई पल्लवी ने माफी मांगी और कहा कि वो सिर्फ हिंसा की निंदा कर रही थीं। उनके बयान को गलत तरह पेश किया गया। भारतीय सेना का अपमान करने के आरोप लगे 2022 में साई का एक पुराना वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग भारतीय सेना को आतंकवादी मानते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम पाकिस्तानियों को मानते हैं। साई का वीडियो वायरल होने के बाद साई पल्लवी को बॉयकॉट करने के आरोप लगे। बिकिनी में फेक फोटोज वायरल होने पर विवाद हुआ बीते साल साई पल्लवी के बाद साई ने असल तस्वीरें पोस्ट कर साफ किया कि पहले वायरल हुईं फोटोज मॉर्फ्ड थीं। इस बीच रिपोर्ट रही कि रामायण के मेकर्स ने विवाद से बचने के लिए साई और उनके परिवार से लो-प्रोफाइल रखने की अपील की है। 2 करोड़ का फेयरनेस क्रीम का एड ठुकराया साई पल्लवी को एक बार फेयरनेस क्रीम का एड मिला था। इस एंडोर्समेंट के लिए साई को 2 करोड़ रुपए फीस ऑफर हुई थी, लेकिन एक्ट्रेस ने ये कहते हुए ऑफर ठुकरा दिया कि वो नेचुरल ब्यूटी पसंद करती हैं। साई पल्लवी को मिले 34 अवॉर्ड साई पल्लवी ने 11 साल के एक्टिंग करियर में अब तक 54 नॉमिनेशन में 34 अवॉर्ड हासिल किए हैं। उनके पास 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ, 3 साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवर्ड मिले हैं। उन्हें तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड से भी नवाजा गया। एक्ट्रेस को गवर्नमेंट ऑफ तमिलनाडु की तरफ से कलाईममानी अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। एक दिन से किया बॉलीवुड डेब्यू, जल्द रामायण में नजर आएंगी साई पल्लवी ने साउथ सिनेमा स्टारडम हासिल करने के बाद इस साल आई आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म एक दिन से बॉलीवुड डेब्यू किया है। फिल्म में उनके साथ जुनैद खान नजर आए हैं। जल्द ही वो पैन इंडिया मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण में नजर आएंगी। फिल्म में उन्होंने माता सीता का रोल निभाया है, जबकि रणबीर कपूर भगवान राम के रोल में हैं। फिल्म 8 नवंबर को रिलीज होगी। ……………………………………………… फिल्मी हस्तियों से जुड़ी ये स्टोरीज भी पढ़ें- विजय का लेडी लक, जिसके बर्थडे पर चुनाव जीते: तमिलनाडु का रिजल्ट आते ही विजय के घर पहुंचीं तृषा, एक्टर का हो चुका तलाक तमिलनाडु चुनाव में थलापति विजय की पार्टी TVK की जीत में उनकी 'लेडी लक' तृषा कृष्णन को अहम माना जा रहा है। 4 मई को 'लेडी लक' एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का जन्मदिन था, जिनका नाम विजय से जुड़ता रहा है। तृषा तमिलनाडु चुनाव का रिजल्ट आने से पहले तिरुमाला मंदिर पहुंचीं, दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंचीं। 51 साल के विजय आज तमिल फिल्मों के सबसे बड़े स्टार हैं तो तृषा कृष्णन क्वीन ऑफ साउथ इंडिया कही जाती हैं। दोनों करीब 5 फिल्मों में साथ नजर आए हैं, जिनमें से 2023 में रिलीज सुपरहिट फिल्म लियो भी शामिल है। यह वही वक्त था जब विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम तलाक के लिए कोर्ट में लड़ाई लड़ रही थीं। पूरी खबर पढ़िए… पुण्यतिथि: ऋषि कपूर को सलमान के पिता ने धमकाया:राज कपूर ने सिगरेट पीने पर पीटा, दाऊद के साथ चाय पी, कभी अमिताभ का अवॉर्ड खरीदा 30 अप्रैल 2020, 6 साल पहले सुबह खबर आई कि ऋषि कपूर अब नहीं रहे। कुछ दिन पहले तक वो गंभीर हालत होने के बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ को हंसाते तो कभी गाना सुना रहे थे। दैनिक भास्कर से बात करते हुए ऋषि कपूर की इकलौती बेटी रिद्धिमा कहती हैं, ‘सब अचानक हुआ, वो बहुत डरावना दिन था। अचानक एक खालीपन आ गया। एक सूनापन, उनकी जिंदगी उनकी मौजूदगी लार्जर देन लाइफ थी।’ पूरी स्टोरी पढ़ें… ………………………………………………. विनोद खन्ना की पुण्यतिथि, पिता ने पिस्तौल तानी:अमिताभ ने फेंका ग्लास, तो टांके आए: महेश भट्ट को धमकाया, आखिरी ख्वाहिश थी- पाकिस्तान जाना लंबी कद-काठी, गोरी रंगत और गहरी आंखें। 18 साल की उम्र में कॉलेज के दिनों में कई लड़कियां विनोद खन्ना के लुक की तारीफ करती नहीं थकती थीं। सबका एक ही सुझाव था, ‘हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ’, लेकिन विनोद के पिता चाहते थे कि बेटा पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभाले। विनोद का बागी रवैया तभी शुरू हो गया था, जब उन्होंने पिता के कहने पर कॉमर्स के बजाय साइंस चुना। एक रोज उनकी कॉलेज पार्टी में कुछ फिल्मी हस्तियां पहुंचीं, जिनमें उस दौर के नामी हीरो सुनील दत्त और उनकी दोस्त अंजू महेंद्रू भी थीं। वो देखना चाहते थे कि टीनएजर्स किस तरह पार्टी करते थे। पूरी खबर पढ़ें…

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Finely-decorated Roman lead coffin goes on display

A late Roman burial of a high-status woman in a unique decorated lead coffin discovered in Colchester in 2023 has gone on public display for the first time. She was buried with rich grave goods including a set of fine jet hairpins and glass unguentaria. The coffin, the remains of its occupant and the grave goods make their debut today at the Roman Circus Visitor Centre. The exhibition will run for a year.

The Colchester Archaeological Trust excavated the site of the former Essex County Hospital in advance of housing development construction. The lead coffin was unearthed during the last days of the dig, after the public had been allowed to visit the site for one day, so the new exhibition is the first chance people will have to see her and her accoutrements.

Scientific analysis of the remains determined she was young, in her 20s or 30s, when she died. The elegant, carefully placed grave goods indicate she was someone of wealth. Samples of residues found in the coffin were identified as frankincense and gypsum, indicating expensive imported materials were used in the treatment of her body for burial. Residue analysis also found traces of exotic resins in one of the glass vessels.

Preliminary evidence suggests she may have been Colchester born and bred, but fully Romanized culturally and thanks to her family’s wealth, with access to goods imported from all over the Empire.

Adam Wightman, Director of Archaeology at Colchester Archaeological Trust, said: “This is one of the most fascinating Roman burials we have worked on in Colchester in recent years. The decorated coffin is a beautiful object in its own right, but it is the combination of the coffin, the grave goods and the scientific evidence that makes this burial so compelling. Together they allow us to glimpse not just a person, but the care, ritual and belief that surrounded her burial in late Roman Colchester.”



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रितेश को लोगों ने एक्टर नहीं, सीएम का बेटा माना:फिल्में फ्लॉप हुईं तो एक्टिंग छोड़ना चाहते थे; कॉमेडी से पहचान मिली, विलेन बनकर चौंकाया

कॉमेडी फिल्मों से पहचान बनाने वाले रितेश देशमुख आज ‘राजा शिवाजी’ में छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार को लेकर चर्चा में हैं। हालांकि एक दौर ऐसा भी था, जब लगातार फ्लॉप फिल्मों और ट्रोलिंग से परेशान होकर उन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे होने की वजह से लोग उन्हें अक्सर एक्टर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का बेटा कहते थे। डेब्यू फिल्म ‘तुझे मेरी कसम’ के बाद उनकी कई फिल्में नहीं चलीं और उन्होंने दोबारा आर्किटेक्ट की नौकरी करने का फैसला कर लिया था। बाद में ‘मस्ती’, ‘धमाल’, ‘हे बेबी’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में बनाए रखा। फिर ‘एक विलेन’ में निगेटिव किरदार निभाकर उन्होंने अलग पहचान बनाई। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं रितेश देशमुख के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक, लेकिन राजनीति से दूरी रितेश देशमुख का जन्म 17 दिसंबर 1978 को लातूर, महाराष्ट्र में हुआ था। वह महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे हैं। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक होने की वजह से उनका बचपन राजनीति और सार्वजनिक जीवन के माहौल में बीता। हालांकि रितेश ने कभी राजनीति में आने की इच्छा जाहिर नहीं की। उनका झुकाव शुरुआत से ही क्रिएटिव फील्ड और डिजाइनिंग की तरफ था। आर्किटेक्चर की पढ़ाई, न्यूयॉर्क में नौकरी रितेश की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के जी.डी. सोमानी मेमोरियल स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने कमला रहेजा कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड एनवायरनमेंटल स्टडीज, मुंबई से आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय न्यूयॉर्क की एक आर्किटेक्चर फर्म में काम किया। उस दौर में उनका फोकस पूरी तरह आर्किटेक्चर करियर पर था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि फिल्मों में काम करेंगे। रितेश को कॉलेज के दिनों से ही स्टेज, एक्टिंग और एंटरटेनमेंट पसंद था। हालांकि वह काफी शर्मीले स्वभाव के थे। राजनीतिक परिवार से होने की वजह से वह सीमित दायरे में रहते थे और उन्हें लगता था कि संभलकर रहना चाहिए। ‘तुझे मेरी कसम’ से फिल्मों में एंट्री रितेश का फिल्मों में आने का विचार धीरे-धीरे बना। उस समय तेलुगु फिल्म ‘नुव्वे कवाली’ बड़ी हिट हुई थी और इसके हिंदी रीमेक की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान रितेश तक फिल्म की स्क्रिप्ट पहुंची। शुरुआत में उन्होंने ओरिजिनल फिल्म देखने की कोशिश की, लेकिन भाषा समझ नहीं आने की वजह से ज्यादा देर नहीं देख पाए। बाद में निर्देशक के. विजय भास्कर ने उन्हें हैदराबाद बुलाकर पूरी स्क्रिप्ट सुनाई। रितेश स्क्रिप्ट और किरदार की सादगी से प्रभावित हुए। उन्हें लगा कि यह किरदार उनकी कॉलेज लाइफ जैसा है। रितेश कहते हैं- ‘तुझे मेरी कसम’ के जरिए मुझे सब करने का मौका मिला, जो मैं कॉलेज के दिनों में कभी खुलकर नहीं कर पाया था। लोग एक्टर से ज्यादा सीएम का बेटा मानते थे उस समय इंडस्ट्री में चर्चा थी कि मुख्यमंत्री के बेटे होने की वजह से उन्हें आसानी से लॉन्च मिल गया। लेकिन रितेश मानते हैं कि इस बैकग्राउंड की वजह से उन पर दबाव भी बहुत ज्यादा था। लोग उन्हें एक्टर से ज्यादा सीएम का बेटा मानते थे। डेब्यू के बाद उनका करियर आसान नहीं रहा। उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप रहीं और इंडस्ट्री में धारणा बनने लगी कि वह ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएंगे। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में रितेश ने बताया था कि जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा, तब उन्हें भरोसा नहीं था कि वह इंडस्ट्री में लंबे समय तक टिक पाएंगे। फिल्में फ्लॉप हुईं तो एक्टिंग छोड़ने का ख्याल आया रितेश ने बताया कि एक समय ऐसा आया जब उनकी लगातार पांच फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नहीं चलीं। उस दौर में उन्हें लगने लगा था कि उनका करियर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा था- एक वक्त ऐसा आया जब मेरी लगातार पांच फिल्में फ्लॉप हुईं। तब मैंने सोचा- बस, अब पैकअप… मैं वापस आर्किटेक्चर में चला जाऊंगा। उस दौर में इंडस्ट्री में चर्चा शुरू हो गई थी कि रितेश शायद लंबे समय तक बॉलीवुड में टिक नहीं पाएंगे। लगातार असफल फिल्मों की वजह से उनका आत्मविश्वास भी प्रभावित हुआ। कॉमेडी फिल्मों ने इंडस्ट्री में टिकने का मौका दिया लगातार असफलताओं के बाद रितेश के करियर ने नया मोड़ लिया। फ्लॉप फिल्मों के बाद जब उनकी फिल्में सफल होने लगीं, तो उन्हें लगा कि इंडस्ट्री में उनकी नई जिंदगी शुरू हो गई है। कॉमेडी फिल्मों में रितेश देशमुख की टाइमिंग दर्शकों को पसंद आने लगी। ‘मस्ती’, ‘क्या कूल हैं हम’, ‘मालामाल वीकली’, ‘हे बेबी’, ‘धमाल’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई। दैनिक भास्कर से बातचीत में रितेश देशमुख कहते हैं- मैं लोगों का आभारी हूं। उस दौर में जब मैंने डेब्यू किया था, अगर किसी एक तरह की फिल्म हिट हो जाती थी तो उसी तरह के और काम मिलते थे। इसलिए मेरी एक कॉमेडी फिल्म चली, तो फिर मुझे दूसरी और तीसरी कॉमेडी फिल्म मिलीं। मैं खुशकिस्मत था कि कॉमेडी-जेनर ने मुझे लंबे समय तक इंडस्ट्री में बनाए रखा। रितेश के मुताबिक, राजनीतिक परिवार से आने की वजह से उन्होंने बचपन से हार और वापसी दोनों करीब से देखी हैं। यही वजह है कि वह असफलता से जल्दी टूटते नहीं हैं। कॉमेडी इमेज तोड़ने का फैसला किया रितेश देशमुख लंबे समय तक बॉलीवुड में कॉमेडी फिल्मों के लिए पहचाने जाते रहे। लेकिन करियर के एक दौर में उन्होंने अपनी इमेज तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने ऐसे किरदार चुनने शुरू किए, जिनमें उनका डार्क और खतरनाक अंदाज दिखाई दे। दिलचस्प बात यह रही कि विलेन के रूप में भी उन्हें काफी सराहना मिली। ‘एक विलेन’ बना करियर का टर्निंग पॉइंट रितेश के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट ‘एक विलेन’ रही। साल 2014 में रिलीज हुई इस फिल्म में उन्होंने राकेश महाडकर नाम के सीरियल किलर का किरदार निभाया था। फिल्म में उनका किरदार एक आम आदमी का था, जो बाहर से शांत और साधारण नजर आता है, लेकिन अंदर से बेहद हिंसक और मानसिक रूप से परेशान होता है। राकेश अपनी पत्नी से लगातार अपमानित महसूस करता है और इसी कुंठा में महिलाओं की बेरहमी से हत्या करने लगता है। फिल्म में रितेश का शांत चेहरा और अचानक हिंसक हो जाना दर्शकों के लिए काफी शॉकिंग था। साबित किया कि सिर्फ कॉमेडी एक्टर नहीं हैं ‘एक विलेन’ के रोल के लिए रितेश की काफी तारीफ हुई। कई क्रिटिक्स ने लिखा कि रितेश ने पहली बार साबित किया कि वह सिर्फ कॉमेडी एक्टर नहीं हैं। साल 2019 में फिल्म ‘मरजावां’ में रितेश ने विष्णु शेट्टी नाम का निगेटिव किरदार निभाया। यह रोल अलग था, क्योंकि फिल्म में उनका किरदार बौने गैंगस्टर का था। विष्णु बेहद गुस्सैल, सनकी और पावर का भूखा इंसान होता है। फिल्म में वह सिद्धार्थ मल्होत्रा के किरदार से नफरत करता है और अपने वर्चस्व के लिए किसी भी हद तक चला जाता है। हालांकि फिल्म को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली, लेकिन रितेश के डायलॉग्स और स्क्रीन प्रेजेंस की काफी चर्चा हुई। खासकर उनका डायलॉग- “कमिनेपन की हाइट तीन फुट” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। रितेश कहा कि ‘एक विलेन’ उनके लिए बड़ा रिस्क थी, क्योंकि लोग उन्हें उस तरह के किरदार में देखने के आदी नहीं थे। लेकिन फिल्म की सफलता के बाद इंडस्ट्री का नजरिया बदल गया। इसके बाद उन्हें अलग तरह के रोल मिलने शुरू हुए। रितेश की सबसे बड़ी ताकत उनका सॉफ्ट फेस माना जाता है। स्क्रीन पर वह सामान्य और शांत इंसान जैसे दिखते हैं। यही वजह है कि जब वह अचानक हिंसक या खतरनाक किरदार निभाते हैं, तो उसका असर ज्यादा मजबूत दिखाई देता है। क्रिटिक्स का मानना है कि रितेश ने विलेन के किरदारों में ओवरएक्टिंग के बजाय शांत और दबे हुए गुस्से का इस्तेमाल किया, जिसने उनके रोल्स को ज्यादा डरावना बनाया। प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर नई पारी की शुरुआत अभिनेता होने के साथ-साथ रितेश देशमुख अब प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर भी मराठी इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन चुके हैं। रितेश और उनकी पत्नी जेनेलिया डिसूजा ने मिलकर ‘मुंबई फिल्म कंपनी’ नाम की प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। राजनीतिक परिवार से आने वाले रितेश हमेशा से मराठी संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने मराठी फिल्मों को बड़े स्तर पर पेश करने की कोशिश की और ऐसी फिल्में बनाई, जिनका स्केल हिंदी फिल्मों जैसा दिखाई दे। ‘लय भारी’ ने मराठी सिनेमा की तस्वीर बदल दी साल 2014 में रिलीज हुई ‘लय भारी’ रितेश के मराठी करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म को जेनेलिया ने प्रोड्यूस किया था और डायरेक्टर निशिकांत कामत थे। फिल्म में रितेश ने दोहरे रोल निभाए थे। एक्शन, भावनाएं और जनप्रिय मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म ने मराठी बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई की थी। उस दौर में मराठी फिल्मों का बजट अपेक्षाकृत कम माना जाता था, लेकिन ‘लय भारी’ ने साबित किया कि मराठी सिनेमा भी बड़े पैमाने पर बनी फिल्मों को सफल बना सकता है। फिल्म में सलमान खान का छोटा-सा कैमियो भी चर्चा में रहा था। रितेश ने कई मराठी फिल्मों को प्रोड्यूस किया। उनका फोकस ऐसी कहानियों पर रहा, जो मराठी दर्शकों से जुड़ी हों, लेकिन प्रेजेंटेशन और स्केल में राष्ट्रीय स्तर की दिखें। मराठी फिल्म ‘वेद’ से डायरेक्टर बने साल 2022 में मराठी फिल्म ‘वेद’ के जरिए रितेश ने निर्देशन में कदम रखा। यह फिल्म तेलुगु फिल्म ‘मजिली’ की मराठी रीमेक थी। फिल्म में रितेश और जेनेलिया की जोड़ी नजर आई। ‘वेद’ बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई और मराठी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। डायरेक्टर के तौर पर भी रितेश की काफी तारीफ हुई। अब ‘राजा शिवाजी’ से चर्चा में इन दिनों रितेश अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म रिलीज हो चुकी है और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन कर रही है। यह फिल्म ‘छत्रपति शिवाजी महाराज’ के जीवन, युद्ध कौशल और हिंदवी स्वराज्य की स्थापना के संघर्ष पर आधारित है। फिल्म में रितेश ने खुद शिवाजी महाराज की भूमिका निभाई है और निर्देशन भी किया है। सलमान खान समेत कई बड़े स्टार्स की मौजूदगी फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका बड़ा स्टारकास्ट माना जा रहा है। सलमान खान फिल्म में खास कैमियो रोल में नजर आए हैं। उनके अलावा संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, फरदीन खान, विद्या बालन, जेनेलिया और कई मराठी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दिए हैं। यह फिल्म मराठी और हिंदी में रिलीज हुई है। खुद को अपडेट रखना बहुत जरूरी है संघर्ष और चुनौतियों पर बात करते हुए रितेश देशमुख कहते हैं- चुनौती और संघर्ष यही है कि समय बदलता रहता है और सिनेमा के साथ दर्शकों की सोच भी बदल जाती है। हम अक्सर उसी पुराने ढंग की एक्टिंग में अटक जाते हैं, क्योंकि वह पहले चली थी। लेकिन समय बदलने पर अगर आप उसी तरह के रहो, तो आउट-डेट लगने लगते हैं। इसलिए अपने आप को समय के साथ अपडेट करना बहुत जरूरी है। _____________________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... पिता बस ड्राइवर थे, ₹300 लेकर एक्टर बनने निकले:थिएटर में ₹50 कमाए, टीवी से शुरुआत करने वाले यश को केजीएफ ने पैन-इंडिया स्टार बनाया यश आज पैन-इंडिया सुपरस्टार हैं, लेकिन उनका सफर संघर्षों से भरा रहा। कर्नाटक के साधारण परिवार में जन्मे यश के पिता BMTC बस ड्राइवर थे, जबकि मां हाउसवाइफ थीं। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिर्फ एक्टर बनना है। घरवालों की चिंता और पैसों की तंगी के बावजूद वे महज ₹300 लेकर बेंगलुरु पहुंचे।पूरी खबर पढ़ें..

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Olly Murs in tears as he completes endurance feat

He crossed the finish line at the London Stadium in Stratford after covering about 250 miles.

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James Corden names 'very, very, very bad' Gavin and Stacey episode

The plot involved a phone call-related misunderstanding between the titular characters.

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Hoard of Bronze Age heavy bracelets found in Poland

A hoard of heavy Bronza Age bracelets has been discovered in near the village of Śniatycze in southeastern Poland. It consists of 18 objects arm and leg rings weighing a total of 3.6 kg, that’s eight pounds of bronze. They date to the late period of the Lusatian culture, known as Hallstatt D, ca. 550–400 B.C., a time when Lusatian bronze casting reached its peak of metal crafting skill.

The hoard was found by a metal detectorist practicing with consent of the landowner and with an official permit from the Lublin Voivodeship Conservator of Monuments. He reported the find and archaeologists followed up to excavate. The 18 objects were buried together in a single small pit just 30 cm (12 inches) beneath the surface. They were in such good condition that a preliminary cleaning was sufficient to make them immediately presentable for public exhibition.

The most significant objects from the standpoint of craftsmanship, form and ornamentation include:

  • a pair of practically identical bracelets made from a massive rod decorated with deep, single transverse cuts on the outside while the inside remains smooth,
  • a massive tube with a ridged edges decorated with rhomboid incisions filled with very fine horizontal incised lines,
  • a bracelet decorated inside and out with a continuous spiral incised across its entire surface that has such long overlapping terminals that it looks extra massive,
  • a c-shaped bangle decorated with knobs that is completely hollow on the inside,
  • a thick bar with herringbone rafter cuts and x-shaped incisions filled with horizontal lines.

The extraordinary weight, quality, quantity and condition of the objects make this a sensational find.

The find is all the more sensational because Lusatian culture ornaments made of bronze were found very rarely in the Zamość region and were only single pieces or only small fragments (not counting the treasure of ornaments from Czernięcin, where in 2023 an explorer discovered 13 bronze objects, including several bracelets).

In this case, however, we have a very large assemblage of 18 items, consisting almost exclusively of massive, large-sized greaves representing various types. These artifacts are of enormous cognitive, scientific, and conservation importance to archaeologists, in the context of analyzing the settlement of the Lusatian culture in the Zamość region and the entire Lublin region. The discovery of the bronze ornament hoard discussed here finds parallels in Greater Poland, Pomerania, Kuyavia, Lower Silesia, and also Lesser Poland.

The bracelets have been assigned to the Zamość Museum in Zamość where they are undergoing thorough conservation and scientific analysis of their metal composition. If all goes well, they will be ready for public display later this month for the Night of Museums event.



* This article was originally published here

Drug addiction counsellor sentenced in Matthew Perry's overdose death

The drug counsellor was one of five people accused of supplying ketamine to Perry and exploiting his drug addiction.

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