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Unique Roman enamel brooch to go on display

A unique Roman brooch decorated with enamel in a zig-zag pattern has been acquired by the National Museums Scotland and will be going on display for the first time in a new exhibition. What makes it so extraordinary is that it fuses local Celtic artistic traditions with Roman design, creating a one-of-a-kind piece on the archaeological record of Roman Britain.

Created around 100-160 A.D., the brooch is made of bronze with the graceful curves of Celtic metalwork and is decorated on the surface with alternating squares of red and yellow enamel in the vibrant colors and miniaturized precision of Roman technique. It is 6cm (2.4 inches) long. Scientific analysis of the surface found that it was originally coated with a thin layer of tin. This would have made the enamel shimmer and complimented the bright colors.

It was discovered in 2022 by a metal detectorist in field near Pathhead, Midlothian. Archaeologists believe it was made in northern England by skilled craftsmen who used the Roman brooches brought in with the invading legions as the base for a new hybrid that integrated local and imported styles.

Dr Fraser Hunter, principal curator of prehistory and Roman archaeology at National Museums Scotland, said: “The Pathhead brooch is a miniature masterpiece of craftworking and the details are exquisite.

“Fancy Roman pieces like this were unusual even at the time and were used to show off in local society.”

The exhibition, Roman Scotland: Life on the Edge of Empire runs from November 14, 2026, through April 28, 2027. It will focus on life at the frontier of the Empire, the soldiers in the legions, the locals who lived around its forts and depended on the occupation forces, and the ones who were threatened by the arrival of the invaders. The extraordinary altar to Mithras with the cut-out solar rays will also go on display in the new exhibition.

Dr Hunter said: “We’re really excited to be able to present new finds like this, things that have never been seen before, because they’re some of the things that really help drive the story and this, in particular, because it tells that story of interaction, because it’s a style of brooch that mixes the local and the Roman.”



* This article was originally published here

डिंपल कपाड़िया@69:बॉबी के सेट में इनके नाम से ऋषि कपूर को चिढ़ाते थे अमिताभ, अक्षय को समझती थीं गे, जेनेटिक टेस्ट करवाया, जानिए मजेदार किस्से

8 जून 1957 बॉम्बे के नामी इंडस्ट्रियलिस्ट चुन्नीभाई कपाड़िया के घर बेटी का जन्म हुआ। चुन्नीभाई एक रईस इस्माइल खोजा परिवार से ताल्लुक रखते थे। निजामी इस्लाइली के 41वें निजाम आगा खान 3 (फाउंडिंग फादर ऑफ पाकिस्तान) ने डिंपल के जन्म के ठीक बाद उन्हें अमीना नाम दिया। हालांकि, परिवार ने उन्हें डिंपल नाम से पहचान दी। पिता रईस घराने से थे, जिनका उठना-बैठना फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ था। डिंपल महज 14 साल की थीं, जब स्कूल में बैठे हुए एक रोज उनकी नजर अखबार में पड़ी। इश्तिहार में लिखा था- राज कपूर नई फिल्म बॉबी के लिए एक नए चेहरे की तलाश में हैं। डिंपल में पढ़ते ही साथ बैठीं दोस्तों से तुरंत कहा- ‘देखना, ये फिल्म मैं ही करूंगी।’ हैरत की बात थी क्योंकि इससे पहले भी डिंपल 13 साल की उम्र में ऋषिकेश मुखर्जी की मशहूर फिल्म ‘गुड्डी’ ठुकरा चुकी थीं, जिसमें बाद में जया भादुड़ी को लिया गया था। उनके पिता की दोस्त अंजना रवैल एक मशहूर स्क्रीनराइटर थीं, उनके रिश्तेदार डायरेक्टर एच.एस.रवैल की फिल्म संघर्ष (1968) में 11 साल की उम्र में डिंपल ने वैजयंतीमाला के बचपन का रोल निभाया था, हालांकि बाद में उनके सीन काट दिए गए थे। इश्तिहार पढ़ने के बाद स्कूल से घर लौटते ही उन्होंने पिता से कहकर सारी जानकारी इकट्ठा करवाई और अपनी दोस्त मुन्नी धवन के जरिए तस्वीरें राज कपूर के दफ्तर भिजवाईं। शक्ल देखकर राज कपूर ने उन्हें तुरंत रिजेक्ट कर दिया। वो फिल्म से बेटे ऋषि कपूर को लॉन्च कर रहे थे और डिंपल, उस समय ऋषि से बड़ी दिखती थीं। तब नीतू सिंह की मां चाहती थीं कि राज कपूर इस फिल्म से उनकी बेटी को लॉन्च करेंगे। लेकिन राज कपूर को नया चेहरा चाहिए था और नीतू बचपन में कई फिल्में कर चुकी थीं, तो बात नहीं बन सकी। डिंपल को रिजेक्ट किए जाने के कुछ दिनों बाद पिता की सिफारिश पर उन्हें फिर राज कपूर की एक फिल्म के सेट पर स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाया गया और इस बार वो चुनी गईं। ये फिल्म करना डिंपल का सपना था, लेकिन किसे पता था कि फिल्म बनते और रिलीज होते तक, उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी। एक नई लड़की ने भारत के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना को प्रपोज कर उनसे शादी कर ली थी। बॉबी रिलीज से पहले ही वो गर्भवती हो चुकी थीं। फिल्म बॉबी ब्लॉकबस्टर रही और डिंपल रातोंरात स्टार बन गईं, लेकिन शादी के लिए उन्हें इंडस्ट्री छोड़नी पड़ी। आज डिंपल कपाड़िया 69 साल की हो चुकी हैं। उनके जन्मदिन के खास मौके पर, जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े मजेदार किस्से, जो उनकी शख्सियत का सार हैं- किस्सा-1 ऋषि कपूर की गर्लफ्रेंड की अंगूठी रखी, जिससे हुआ विवाद 14 साल की उम्र में डिंपल कपाड़िया को फिल्म बॉबी मिली। राज कपूर ने वो फिल्म लगातार फिल्में फ्लॉप होने से चढ़े कर्ज को उतारने के लिए बनाई थी। उन्होंने डिंपल को एक्टिंग की ट्रेनिंग दी और पूरी ग्रूमिंग करवाई। सेट पर ऋषि कपूर के साथ समय बिताते हुए दोस्ती गहरी होने लगी। ऋषि कपूर उन दिनों पारसी यास्मीन मेहता को डेट कर रहे थे। वो उनकी जिंदगी का पहला प्यार थीं। यास्मीन ने ऋषि कपूर को एक अंगूठी दी, जो वो हमेशा पहने रखते। एक दिन डिंपल को वो अंगूठी इतनी पसंद आई कि वो अक्सर पहनने के लिए उसे लेने लगीं। समय के साथ अंगूठी डिंपल के पास ही रहने लगी। शूटिंग के दौरान डिंपल और ऋषि की नजदीकियों की खबरें अखबारों और मैगजीन में छपने लगीं। बात यास्मीन तक पहुंची, तो उन्होंने ऋषि से रिश्ता तोड़ दिया। ऋषि कपूर कैसे भी यास्मीन से रिश्ता बरकरार रखना चाहते थे, तो मनाने के लिए कभी उनके घर जाते, तो कभी को-स्टार्स से उन्हें कॉल करवाते। देखिए फिल्म बॉबी से डिंपल की तस्वीरें- किस्सा- 2 बॉबी के सेट पर लग्जरी कारों से आती थीं डिंपल, ऋषि की टूटी-फूटी फिएट देख चिढ़ाते थे अमिताभ बच्चन डिंपल कपाड़िया के पिता रईस बिजनेसमैन थे। उनके पास कई लग्जरी कारें थीं। बॉबी के सेट पर भी डिंपल लग्जरी इंपोर्टेड गाड़ियों से आती थीं। जबकि ऋषि कपूर के घर की आर्थिक स्थिति तब ठीक नहीं थी और वो एक टूटी-फूटी फिएट कार से आते थे। उसी समय फिल्मों में नए-नए आए अमिताभ बच्चन की फिल्म बॉम्बे टू गोवा की शूटिंग चलती थी। वो भी फिएट से आते-जाते थे। सेट से गुजरते हुए अमिताभ, अक्सर ऋषि कपूर को चिढ़ाकर कहते थे- आपकी हीरोइन तो बड़ी-बड़ी कारों से आती है। जब इसी बात पर डिंपल को चिढ़ाया जाता था, तो वो बड़े स्टाइल और कॉन्फिडेंस में कहती थीं, मैं राज कपूर की हीरोइन हूं, मैं एक स्टार हूं। फिल्म चली तो ठीक और नहीं चली तो भी मैं स्टार ही रहूंगी। द मूवी मोथ को दिए इंटरव्यू में ऋषि कपूर ने ये किस्सा सुनाते हुए कहा था, ‘वाकई वो उस समय स्टार थीं।’ किस्सा- 3 राजेश खन्ना को करती थीं ब्लैंक कॉल, फिर फ्लाइट में किया प्रपोज बॉबी की शूटिंग के बीच डिंपल कपाड़िया को अहमदाबाद के नवरंगपुरा स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित एक इवेंट में पहुंची थीं। इस इवेंट के चीफ गेस्ट राजेश खन्ना था। आसपास से गुजरते हुए राजेश खन्ना की नजर डिंपल पर पड़ी, तो वो बार-बार उनकी ओर देखने लगे। डिंपल बचपन से राजेश खन्ना की फैन थीं। वो कई बार उनके नंबर पर कॉल किया करती थीं और हर बार उन्हें राजेश खन्ना के मैनेजर की डांट पड़ती थी। उस इवेंट में डिंपल भी राजेश खन्ना को छुप-छुपकर देख रही थीं। तभी राजेश खन्ना ने पास खड़े एक शख्स से डिंपल की पूरी डीटेल्स ले लीं। लौटते हुए राजेश खन्ना, ठीक डिंपल की साथ वाली सीट पर बैठे। डिंपल कपाड़िया कुछ न कुछ करके उनका ध्यान खींच रही थी। फिर एक दम से बोल उठीं- ‘हम जहां जा रहे हैं वहां भीड़ होगी, आप मेरा हाथ पकड़ोगे?’ राजेश खन्ना ने झट से कहा- ‘हां, बिल्कुल।’ डिंपल ने फिर कहा- ‘हमेशा के लिए।’ राजेश खन्ना ने उस वक्त तो कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन मुंबई पहुंचते ही उनके घर पहुंचे और शादी का प्रस्ताव रख दिया। डिंपल महज 16 साल की थीं और राजेश खन्ना उनसे 15 साल बड़े 31 साल के सुपरस्टार थे। परिवार ने बिना देर किए हामी भर दी, लेकिन तब राजेश खन्ना ने शर्त रखी कि शादी महज 1 हफ्ते में ही करनी होगी। परिवार इसके लिए भी राजी हो गया। किस्सा-4 ऋषि कपूर की गर्लफ्रेंड की अंगूठी पहनी थी, राजेश खन्ना ने डायमंड रिंग दी तो फेंकनी पड़ी शादी से पहले राजेश खन्ना एक रोज डिंपल को समुद्र किनारे सैर पर ले गए। उन्होंने वहां डिंपल को एक डायमंड रिंग पहनाई, लेकिन तब उन्होंने ऋषि कपूर से ली हुई उनकी गर्लफ्रेंड यास्मीन की अंगूठी पहनी हुई थी। ऐसे में राजेश खन्ना ने वो अंगूठी उतरवाकर समुद्र में फेंक दी और अपनी अंगूठी पहनाई। तब मैगजीन में खबर रही कि राजेश ने अपनी अंगूठी पहनाने के लिए ऋषि कपूर की उतरवा दी। ये खबर जब ऋषि कपूर की गर्लफ्रेंड ने पढ़ी, तो उन्हें गलतफहमी हुई कि ऋषि ने ही वो अंगूठी डिंपल को दी होगी। इस गलतफहमी से उनका और ऋषि का रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया। 27 मार्च 1973 को राजेश खन्ना के बंगले में उनकी और डिंपल की शादी आर्य समाज रीति-रिवाजों से हुई। शादी के लिए डिंपल ने बॉबी फिल्म से ब्रेक लिया। शादी के बाद फिल्म इंडस्ट्री के लिए ग्रांड रिसेप्शन रखा गया। देखिए डिंपल कपाड़िया और राजेश खन्ना की शादी और रिसेप्शन की तस्वीरें- किस्सा-5 शादी के बाद मेहंदी लगाकर शूट किया बॉबी का गाना शादी के बाद जब डिंपल फिल्म बॉबी के सेट पर लौटीं तो उनके हाथों में मेहंदी रची हुई थी। शुरुआत में फिल्म के गाने मुझे कुछ कहना है के गाने की शूटिंग टाली गई, लेकिन प्रोडक्शन डिले से बचने के लिए डिंपल कपाड़िया के हाथों में रची मेहंदी के साथ ही शूटिंग करनी पड़ी। गाने में उनके हाथ में मेहंदी साफ नजर आई। डिंपल की शादी के 6 महीने बाद बॉबी रिलीज हुई। ये फिल्म बड़ी हिट साबित हुई जिसने डिंपल को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया। फिल्म में डिंपल के पहने गए कपड़े देशभर में ट्रेंड बन गए थे। डिंपल की एक्टिंग को खूब तारीफें मिलीं। उन्हें लोगों ने एक उभरता हुआ चेहरा बताया। कई बड़े फिल्ममेकर उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहते थे, लेकिन राजेश खन्ना नहीं चाहते थे कि शादी के बाद वो फिल्मों में काम करें। डिंपल ने पति के कहने पर फिल्मी दुनिया छोड़ दी और अगले 17 की उम्र में पहली बेटी डिंपल को जन्म दिया। किस्सा- 6 राजेश खन्ना की फिल्मों के सेट पर अकेेले बैठकर पीती थीं शराब, हेमा से कहा- धर्मेंद्र तुमसे शादी नहीं करेगा राजेश खन्ना से शादी के बाद डिंपल पूरी तरह उन पर निर्भर हो गई थीं। वो अक्सर उनकी फिल्मों के सेट पर जातीं और घंटों अकेले बैठी रहतीं, जबकि राजेश शूटिंग में व्यस्त होते। हेमा मालिनी सेट पर हुईं मुलाकातों से उन्हें छोटी बहन मानने लगी थीं। अपनी ऑटो बायोग्राफी हेमा मालिनी- बियॉन्ड ड्रीम गर्ल में हेमा मालिनी ने लिखा कि डिंपल अकेलेपन में जिंदगी गुजार रही थीं। वो सेट पर एक किनारे बैठीं शराब और सिगरेट पीती रहती थीं। न कोई उनसे ज्यादा बात करता और न ही कोई मनोजरंन का जरिया था। वो तनाव से गुजर रही थीं। उस समय हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की शादी की चर्चा थी। एक रोज डिंपल ने उनसे कहा था, ‘ये आदमी (धर्मेंद्र) कभी आपसे शादी नहीं करेगा। बेहतर होगा, तुम खुद कुछ करो।’ किस्सा- 7 10 साल बाद कमबैक किया, कैमरा देखते ही कांपने लगीं शादी के कुछ सालों बाद डिंपल और राजेश के रिश्ते में अनबन होने लगी। जब राजेश खन्ना और टीना के अफेयर की खबरें उड़ीं तो झगड़े और बढ़ गए। शादी के 9 साल बाद 1982 में डिंपल, दोनों बेटियों ट्विंकल और सिंपल को लेकर पेरेंट्स के पास रहने आ गईं। बेटियों की परवरिश के लिए ट्विंकल ने फिल्मों में वापसी करने का फैसला किया। जब रमेश सिप्पी को इसकी खबर मिली, तो उन्होंने डिंपल को स्क्रीनटेस्ट के लिए बुलाया। उनका कॉन्फिडेंस इतना कम हो चुका था कि वो कैमरे के सामने आते ही कंपकंपाने लगीं और डायलॉग नहीं बोल पाईं। टेस्ट फेल रहा, लेकिन इसके बावजूद रमेश सिप्पी ने उन्हें फिल्म सागर में कास्ट कर लिया। फिल्म के हीरो, उनकी पहली फिल्म बॉबी के हीरो ऋषि कपूर और कमल हासन रहे। फिल्म बनने में देर होती रही और इससे पहले ही डिंपल की दूसरी फिल्म जख्मी शेर (1984) रिलीज हो गई। इसके अगले साल फिल्म सागर रिलीज हुई, जो ब्लॉकबस्टर रही। किस्सा-8 डिंपल के लिए सनी ने की थी सौतेली मां हेमा मालिनी से पहली बार बात मंजिल-मंजिल और एतबार जैसी फिल्मों में साथ काम करते हुए डिंपल कपाड़िया और सनी देओल की नजदीकियां बढ़ गईं। दोनों करीब 11 सालों तक रिलेशन में रहे, लेकिन जब इस रिश्ते से सनी की शादीशुदा जिंदगी में दिक्कतें बढ़ीं तो दोनों अलग हो गए। उस समय डिंपल की बेटियां सनी को छोटे पापा कहती थीं। हेमा मालिनी की ऑटो बायोग्राफी के अनुसार, सनी देओल ने उनसे पहली बार डिंपल की वजह से ही बात की थी। 1991 में हेमा मालिनी के प्रोडक्शन की फिल्म दिल आशना है की शूटिंग चल रही थी, जिसमें डिंपल कपाड़िया ने दिव्या भारती की मां का रोल किया था। उस समय डिंपल को मिथुन चक्रवर्ती के साथ हेलीकॉप्टर का एक सीन शूट करना था, लेकिन एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में पायलट की मौत होने से वो डरी हुई थीं। शूटिंग के दिन, डर से डिंपल ने बॉयफ्रेंड सनी देओल को कॉल कर पूरी बात बताई और कुछ ही देर में सनी सेट पर पहुंच गए। उन्होंने उस दिन पहली बार सौतेली मां हेमा मालिनी से बात की, वजह थीं डिंपल और उनका डर। सनी से बात करने के बाद हेमा ने उन्हें तसल्ली दी कि वो डिंपल से हेलीकॉप्टर का सीन शूट नहीं करवाएंगी। किस्सा- 9 सनी देओल की गर्लफ्रेंड थीं, फिल्म में न चाहते हुए भी करना पड़ा धर्मेंद्र को किस 1992 की फिल्म दुश्मन देवता में डिंपल कपाड़िया को सनी देओल के पिता धर्मेंद्र के साथ कास्ट किया गया था। दोनों का फिल्म में किसिंग सीन भी था, जबकि डिंपल धर्मेंद्र से 21 साल छोटी थीं। इस सीन के चर्चा में रहने का कारण ये भी था कि उसी समय डिंपल कपाड़िया सनी देओल को डेट कर रही थीं, हालांकि इस बात से धर्मेंद्र अनजान थे। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक जब डिंपल को ये स्क्रिप्ट दी गई थी, तो उसमें किसिंग सीन नहीं था। जब बाद में इसे जोड़ा गया तो डिंपल काफी नाराज हुईं। उन्होंने डायरेक्टर के दबाव में सीन शूट तो किया, लेकिन बाद में इसकी डबिंग करने से इनकार कर दिया। हालांकि बाद में उन्हें मानना ही पड़ा। पत्नी के विरोध के चलते सनी देओल ने डिंपल से दूरियां बना लीं। हालांकि सालों बाद 2017 में उन्हें लंदन में साथ हाथ थामे हुए स्पॉट किया गया था। किस्सा- 10 अक्षय कुमार को समझती थीं गे, बेटी की शादी से पहले टेस्ट करवाया अक्षय कुमार ने साल 2000 में डिंपल कपाड़िया की बेटी ट्विंकल से शादी की थी। जिस समय अक्षय, ट्विंकल को डेट कर रहे थे, तब डिंपल की एक दोस्त ने उन्हें कहा कि अक्षय कुमार गे हैं। समय के साथ डिंपल, बेटी के लिए चिंतित रहने लगीं और पड़ताल शुरू कर दी। एक दिन उन्होंने अक्षय के सामने शर्त रखी कि अगर उन्हें ट्विंकल से शादी करनी है, तो पहले उन्हें जेनेटिक टेस्ट करवाना होगा। उनके कहने पर अक्षय ने टेस्ट भी करवाया था। ये किस्सा खुद अक्षय और ट्विंकल ने चैट शो कॉफी विद करण में शेयर किया था। किस्सा- 11 डिपंल पर भड़के राजेश खन्ना, कहा- तुम मुझे सिखाओगी राजेश खन्ना का घर छोड़ने के बाद भी डिंपल ने बेटियों के लिए उनसे रिश्ता रखा। दोनों कई पब्लिक इवेंट में साथ नजर आते थे। 1990 में राजेश खन्ना की फिल्म जय शिव शंकर रिलीज हुई थी। इस फिल्म में डिंपल कपाड़िया, राजेश खन्ना के साथ नजर आईं। शूटिंग के समय एक बार राजेश की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन उनके होटल के बाहर चाहने वाले उनकी एक नजर पाने के लिए भीड़ लगाए बैठे थे। डिंपल ने रेडिफ डॉट कॉम से बातचीत में ये किस्सा शेयर करते हुए बताया था कि जब राजेश ने सबके सामने जाने का फैसला किया तो डिंपल ने उन्हें सनग्लासेस और शॉल दी। डिंपल ने उनसे कहा- ‘काकाजी, जब आप लोगों को देखो तो सामने मत देखना, आपकी साइड प्रोफाइल अच्छी लगती है।’ राजेश खन्ना ने गुस्से में डिंपल को देखा और जवाब दिया- ‘अब तुम मुझे सिखाओगी?’ राजेश का ये जवाब सुनकर वो डर गईं और सबके सामने हाथ जोड़कर माफी मांगने लगीं। साल 2012 में जब राजेश बीमार हुए तो डिंपल ने उनकी खूब सेवा की। जब राजेश का निधन हुआ तो डिंपल पूरे समय मौजूद रहीं।

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Wild boar burials found in Greco-Roman necropolis in Nile Delta

Egyptian archaeologists have discovered a Greco-Roman necropolis at the archaeological site of Kom Aziza in the western Nile Delta region. The burials methods are unusually varied, and even more unusual is the presence of several complete wild boar burials.

The presence of this animal in funerary contexts of ancient Egypt is extraordinarily rare due to the negative symbolic association of the boar, linked in the pharaonic religious imagination to the deity Seth, the force of chaos and the disturbance of cosmic order.

The excavation leaders have indicated that this isolated occurrence might point more to an economic or domestic activity developed at the site during one of its occupation phases, rather than to a deliberate ritual practice, although the definitive interpretation awaits further analysis.

The human remains found at the site were buried individually and collectively, in north-south and east-west orientations, with arms crossed over the pelvis, straight alongside the body, or crossed over the chest in the classic Osirian position of arms crossed across the chest. Some of the deceased were buried directly into pits, others in mudbrick frames, inside painted plaster coffins and large barrel-shaped pottery coffins. The variety of burial types indicates a multiplicity of funerary practices and rituals took place at the Kom Aziza necropolis.

The stratigraphy of the site revealed that the cemetery was built on much older settlement layers. Materials confirm a history at the site going back at least 3,000 years to the Old Kingdom. Everyday use objects recovered from the previous settlement layers include ceramic and stone vessels, break-making molds, stone tools and ovens. A large number of animal bones — fish, birds, mammals — found there will give archaeologists the opportunity to reconstruct the diets of the settlement occupants over the generations.

The Director General of Beheira Antiquities and head of the excavation mission, Mr. Khaled Abdel Ghani Farhat, stressed that the site represents a unique model of a multi-phase location, where residential and productive activities succeeded one another from the dawn of ancient Egyptian history until later periods when the area was transformed into an intense funerary zone.



* This article was originally published here

'मैं वहां लगभग मर ही गया था':जेल में रहे विक्रम भट्ट ने सुनाई आपबीती, बोले-मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी

फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने हाल ही में कथित धोखाधड़ी के आरोप में उदयपुर जेल में बिताए 70 दिनों का अनुभव शेयर किया। विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी पर 30 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में भट्ट ने कहा कि जेल में उनका समय बहुत मुश्किल था, लेकिन वहां उन्हें अपने साथी कैदियों से उम्मीद से ज्यादा सपोर्ट मिला। उन्होंने बताया कि वह 60 से 80 कैदियों के साथ एक बैरक में रहते थे। उनके अनुसार, साथी कैदी उनका खास ध्यान रखते थे, उनके लिए खाना लाते थे और कपड़ों की देखभाल करते थे। भट्ट ने कहा कि कैदी उन्हें ‘भीष्म पितामह’ कहकर बुलाते थे और रात में उनसे डरावनी कहानियां सुनाने की मांग करते थे। जेल में भट्ट को पीलिया हो गया था भट्ट ने बताया कि जेल के दौरान उनकी तबीयत और बिगड़ गई तथा उन्हें पीलिया हो गया। उन्होंने कहा, "मैं वहां लगभग मर ही गया था। अब मुझे नहीं पता कि वहां की राजनीति क्या थी, क्योंकि मेरे साथ तो लोग अच्छे थे, लेकिन मैं एक ऑटोइम्यून बीमारी, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित हूं। इसकी वजह से मेरे जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द रहता है।" फिल्ममेकर ने आगे कहा कि दिसंबर-जनवरी का महीना था और बहुत ठंड पड़ रही थी। मैं जिस करवट सोता, उसी तरफ की हिप बोन में दर्द होने लगता। दूसरी करवट लेता तो वहां दर्द शुरू हो जाता। इसी दौरान मुझे पीलिया भी हो गया। विक्रम ने अस्पताल ले जाने में देरी का दावा किया भट्ट ने दावा किया कि तेज बुखार और कमजोरी के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि बैरक के साथी कैदी उन्हें अपने कंबल ओढ़ाकर मदद करते थे, जबकि वे लगातार अस्पताल भेजे जाने की मांग कर रहे थे। रिहाई के बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों के फोन आए। भट्ट ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती और संजय दत्त ने उनका हालचाल पूछा। उन्होंने कहा कि संजय दत्त का फोन उनके लिए खास था क्योंकि उन्होंने कभी साथ काम नहीं किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या अक्षय कुमार ने भी संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि अक्षय उनके दोस्त नहीं हैं, इसलिए ऐसी उम्मीद नहीं थी। भट्ट ने अपने बचपन के दोस्त अजय देवगन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अजय का फोन आना नैचुरल था क्योंकि दोनों का रिश्ता सालों का पुराना है। भट्ट के अनुसार, हर रिश्ते का नेचर अलग होता है और सभी से समान अपेक्षा रखना उचित नहीं है। विक्रम भट्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जेल से बाहर आए विक्रम भट्ट, बोले-सत्य पराजित नहीं होगा:अंदर एक दोस्त बना, मुझे मेवाड़ की मिट्टी की तासीर के बारे में बताया बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्‌ट 19 फरवरी 2026 को 2 महीने 11 दिन बाद उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए गए थे। जेल से निकलते ही उन्होंने सबसे पहले कैंपस में स्थित भगवान शिव के दर्शन किए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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'मैंने नाना पाटेकर को सच में थप्पड़ जड़ दिया था':एक्ट्रेस मधु शाह ने सुनाया फिल्म यशवंत की शूटिंग का किस्सा

एक्ट्रेस मधु शाह ने हाल ही में फिल्म यशवंत की शूटिंग से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के एक सीन की शूटिंग के दौरान एक्टर नाना पाटेकर ने उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया था, जिसके जवाब में उन्होंने भी नाना को रियल में थप्पड़ जड़ दिया था। हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में मधु ने बताया कि यशवंत में एक सीन के दौरान उन्हें रोना था। सीन के लिए वह ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन नाना पाटेकर इसके पक्ष में नहीं थे। उनके मुताबिक, नाना चाहते थे कि एक्टर इमोशन महसूस करें और नैचुरली एक्टिंग करें। नाना पाटेकर ने सीन में सच में थप्पड़ मारा था मधु ने बताया, "उन्होंने (नाना पाटेकर) सीन के दौरान मुझे सच में थप्पड़ मार दिया। मेरी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। मैं बहुत गुस्सा हो गई, क्योंकि रिहर्सल में उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया था। रिहर्सल के समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था। टेक के दौरान उन्होंने मुझे पूरी तरह चौंका दिया। उन्होंने मुझे सच में थप्पड़ मार दिया था। मैं उस समय बहुत गुस्से वाली लड़की थी और शायद आज भी हूं। इसलिए मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने भी उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया।" मधु के मुताबिक, यह फिल्म का एक जरूरी सीन था और डायरेक्टर अनिल मट्टू ने इसकी शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया था, लेकिन कुछ अचानक हुए बदलावों की वजह से यह सीन उम्मीद से बहुत जल्दी पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि यह सीन बहुत नैचुरल लगा और सिर्फ आधे दिन में पूरा हो गया। नाना से मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं मधु ने यह भी कहा कि इस घटना के बावजूद नाना पाटेकर ने कभी उनका अनादर नहीं किया। उनके अनुसार, नाना सिर्फ एक्टिंग को लेकर सख्त थे और चाहते थे कि कलाकार अपने किरदार को पूरी तरह महसूस करके निभाएं। उन्होंने कहा कि नाना के साथ काम करते हुए उन्होंने मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं। मधु जल्द फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी मधु जल्द ही फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बता दें कि अपने करियर में मधु फूल और कांटे (1991), रोजा (1992), अल्लारी प्रियुडु (1992), योद्धा (1992) और जेंटलमैन (1993) जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

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'मैंने नाना पाटेकर को सच में थप्पड़ जड़ दिया था':एक्ट्रेस मधू शाह ने सुनाया फिल्म यशवंत की शूटिंग का किस्सा

एक्ट्रेस मधू शाह ने हाल ही में फिल्म यशवंत की शूटिंग से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के एक सीन की शूटिंग के दौरान एक्टर नाना पाटेकर ने उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया था, जिसके जवाब में उन्होंने भी नाना को रियल में थप्पड़ जड़ दिया था। हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में मधू ने बताया कि यशवंत में एक सीन के दौरान उन्हें रोना था। सीन के लिए वह ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन नाना पाटेकर इसके पक्ष में नहीं थे। उनके मुताबिक, नाना चाहते थे कि एक्टर इमोशन महसूस करें और नैचुरली एक्टिंग करें। नाना पाटेकर ने सीन में सच में थप्पड़ मारा था मधू ने बताया, "उन्होंने (नाना पाटेकर) सीन के दौरान मुझे सच में थप्पड़ मार दिया। मेरी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। मैं बहुत गुस्सा हो गई, क्योंकि रिहर्सल में उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया था। रिहर्सल के समय ऐसा कुछ नहीं हुआ था। टेक के दौरान उन्होंने मुझे पूरी तरह चौंका दिया। उन्होंने मुझे सच में थप्पड़ मार दिया था। मैं उस समय बहुत गुस्से वाली लड़की थी और शायद आज भी हूं। इसलिए मुझे बहुत गुस्सा आ गया और मैंने भी उन्हें सच में थप्पड़ मार दिया।" मधू के मुताबिक, यह फिल्म का एक जरूरी सीन था और डायरेक्टर अनिल मट्टू ने इसकी शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया था, लेकिन कुछ अचानक हुए बदलावों की वजह से यह सीन उम्मीद से बहुत जल्दी पूरा हो गया। उन्होंने कहा कि यह सीन बहुत नैचुरल लगा और सिर्फ आधे दिन में पूरा हो गया। नाना से मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं मधू ने यह भी कहा कि इस घटना के बावजूद नाना पाटेकर ने कभी उनका अनादर नहीं किया। उनके अनुसार, नाना सिर्फ एक्टिंग को लेकर सख्त थे और चाहते थे कि कलाकार अपने किरदार को पूरी तरह महसूस करके निभाएं। उन्होंने कहा कि नाना के साथ काम करते हुए उन्होंने मेथड एक्टिंग की कई बातें सीखीं। मधू जल्द फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी मधू जल्द ही फिल्म 'गवर्नर' में नजर आएंगी। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। बता दें कि अपने करियर में मधू फूल और कांटे (1991), रोजा (1992), अल्लारी प्रियुडु (1992), योद्धा (1992) और जेंटलमैन (1993) जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं।

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डेढ़ लाख गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला:फर्जी वादों और इंडस्ट्री के धोखों पर बोले 'द पिरामिड स्कीम' के सितारे

पिरामिड स्कीम्स सिर्फ पैसे नहीं डुबोतीं, बल्कि रिश्तों और भरोसे को भी तोड़ देती हैं। TVF की नई वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' इसी सच्चाई को दिखाती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रणवीर शौरी, अल्फिया जाफरी, परमवीर सिंह चीमा और क्रिएटर-निर्देशक श्रेयांश पांडे ने अपने अनुभव साझा किए। किसी ने मॉडलिंग के नाम पर लाखों रुपए गंवाए, तो किसी ने झूठे वादों और फर्जी ऑफर्स का सामना किया। कलाकारों ने भरोसा टूटने, संघर्ष, इंडस्ट्री की हकीकत और पिरामिड स्कीम्स के असर पर बात की। सवाल: क्या कभी किसी ने आपसे कहा कि बस यह काम कर लो, फिर जिंदगी बदल जाएगी? जवाब/रणवीर शौरी: हमारी इंडस्ट्री में यह बात अक्सर सुनने को मिलती है। कहा जाता है कि यह लाइफ-चेंजिंग रोल है, इसके बाद सब बदल जाएगा। जिंदगी बदलती है, लेकिन उतनी नहीं जितनी बताई जाती है। हर प्रोजेक्ट के बाद खुद को फिर से साबित करना पड़ता है। एक बार नीचे गिर जाएं तो दो-तीन साल दोबारा खड़े होने में लग जाते हैं। सवाल: क्या आप कभी किसी स्कीम या झांसे में फंसे हैं? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: हां, शुरुआती दिनों में मैं एक फोटोग्राफर के झांसे में आ गया था। मॉडलिंग के लिए पोर्टफोलियो बनवाने की सलाह दी गई। बताया गया कि वह फोटोग्राफर आमतौर पर 2 लाख रुपए लेता है, लेकिन मुझसे 1.25 लाख लेगा। मैंने पैसे दिए और शूट कराया। बाद में पता चला कि वह फोटोग्राफर मुफ्त में शूट करता था। स्टाइलिस्ट को अलग से 25 हजार रुपए दिए। कुल मिलाकर डेढ़ लाख रुपए खर्च हो गए। सवाल: उस घटना का सबसे ज्यादा दुख किस बात का था? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: पैसों का नुकसान था, लेकिन उससे ज्यादा दुख विश्वास टूटने का था। मुझे लगा था कि लोग मेरी मदद कर रहे हैं, लेकिन बाद में पता चला कि मेरे साथ खेल हुआ है। सवाल: अल्फिया, क्या आप कभी ऐसी किसी स्कीम का शिकार हुई हैं? जवाब/अल्फिया जाफरी: सीधे तौर पर नहीं। लेकिन बचपन से सुनती आई हूं कि बस थोड़ी बड़ी हो जाओ, तुम्हें लॉन्च कर देंगे, हीरोइन बना देंगे। ऐसे कई वादे किए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। एक समय ऐसा आया कि मैंने सोचा कि मुझे यह सब नहीं करना है। सवाल: श्रेयांश, 'द पिरामिड स्कीम' बनाने का विचार कहां से आया? जवाब/श्रेयांश पांडे: हमने इस विषय पर काफी रिसर्च की। कॉलेज के दिनों में ऐसी कई कंपनियों को करीब से देखा, जो युवाओं को बड़े सपने दिखाती थीं। उन्हें बताया जाता था कि उनकी पर्सनैलिटी डेवलप होगी, नौकरी मिल जाएगी और जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन असल में पूरा सिस्टम लोगों को फंसाने के लिए बनाया जाता था। सवाल: पिरामिड स्कीम में सबसे बड़ा नुकसान क्या होता है? जवाब/श्रेयांश पांडे: सिर्फ पैसों का नुकसान नहीं होता। सबसे बड़ा नुकसान रिश्तों का होता है। लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को जोड़ते हैं। जब स्कीम टूटती है तो रिश्ते भी टूट जाते हैं। पैसा वापस कमाया जा सकता है, लेकिन टूटा भरोसा वापस नहीं आता। सवाल: रणवीर, क्या आपने भी कभी पोर्टफोलियो शूट कराया था? जवाब/रणवीर शौरी: हां, मैंने भी पोर्टफोलियो बनवाया था, लेकिन परमवीर जैसा अनुभव नहीं रहा। मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि जब कोई आपकी मासूमियत और भरोसे का फायदा उठाता है, तो वही सबसे ज्यादा तकलीफ देता है। सवाल: क्या आपके साथ कभी भरोसा टूटने वाली कोई घटना हुई? जवाब/रणवीर शौरी: फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा मेरे साथ ज्यादा नहीं हुआ, क्योंकि मैं बचपन से इस माहौल को देखता आया हूं। यहां की चालबाजियों और स्कीम्स के बारे में पहले से जानता था। इसलिए मुझे बेवकूफ बनाना आसान नहीं है। सवाल: अल्फिया, जब भरोसा टूटता है तो उससे कैसे उबरना चाहिए? जवाब/अल्फिया जाफरी: हर इंसान अलग तरह से चीजों को देखता है। मैं पहले बहुत लोगों पर भरोसा करती थी, लेकिन कुछ अनुभवों के बाद लोगों पर भरोसा करना कम कर दिया। आज मेरे बहुत कम दोस्त हैं। मेरे लिए आगे बढ़ना आसान नहीं था, लेकिन हर किसी का तरीका अलग होता है। सवाल: परमवीर, भरोसा टूटने के बाद क्या बदलाव आया? जवाब/परमवीर सिंह चीमा: जब बार-बार ऐसे अनुभव होते हैं, तो इंसान लोगों से दूरी बनाने लगता है। कई बार सही लोगों पर भी भरोसा नहीं कर पाता। मेरे साथ भी ऐसा हुआ था। सवाल: क्या समय के साथ इंसान मजबूत हो जाता है? जवाब/रणवीर शौरी: बिल्कुल। उम्र और अनुभव के साथ आपकी 'स्किन मोटी' हो जाती है। बार-बार चोट खाने के बाद आप चीजों को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं। सवाल: आपने पिरामिड स्कीम से जुड़ी सबसे अजीब चीज क्या देखी? जवाब/श्रेयांश पांडे: हमने इंटरनेट पर ऐसी कई वीडियो देखीं। एक महिला दावा कर रही थी कि वह इतनी विदेश यात्राएं करती है कि अब पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे दावे सुनकर हैरानी होती है। सवाल: इंडस्ट्री में नेटवर्किंग ज्यादा जरूरी है या टैलेंट? जवाब/रणवीर शौरी: दोनों जरूरी हैं। परमवीर सिंह चीमा: अनुभव भी जरूरी है। अल्फिया जाफरी: मैं उम्मीद करती हूं कि मेरे मामले में टैलेंट ज्यादा महत्वपूर्ण हो। सवाल: क्या सिर्फ कॉन्टैक्ट्स होने से सब कुछ संभव हो जाता है? जवाब/रणवीर शौरी: यह सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री की नहीं, बल्कि देश की भी हकीकत है कि कॉन्टैक्ट्स कई जगह काम आते हैं। सवाल: क्या कभी फेक कास्टिंग कॉल या झूठे वादे का सामना करना पड़ा? जवाब/अल्फिया जाफरी: हां। एक बार मुझे कॉल आया कि मुझे 'हाउस ऑफ द ड्रैगन' के लिए कास्ट करना चाहते हैं। मैं बहुत उत्साहित हो गई थी, लेकिन बाद में पता चला कि वह फर्जी कॉल था। सवाल: आखिर में, इंडस्ट्री में ज्यादा एक्टिंग कैमरे के सामने होती है या पीछे? जवाब/रणवीर शौरी: कैमरे के सामने ही होती है। शुरुआत में लोग कैमरे के पीछे भी एक्टिंग करते हैं, लेकिन बाद में समझ आ जाता है कि उसका कोई फायदा नहीं है। सवाल: दर्शकों को 'द पिरामिड स्कीम' क्यों देखनी चाहिए? जवाब/श्रेयांश पांडे: क्योंकि यह सिर्फ एक स्कैम की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की कहानी है, जिन्होंने अपने सपनों, पैसों और सबसे बढ़कर रिश्तों को दांव पर लगा दिया।

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Oldest iron saw in Japan identified

An iron object bent over on one side has been identified as an ancient saw. Dating to the late Yayoi period, the late 2nd century A.D., it is the oldest found in Japan, pushing back the introduction of saws to the Japanese archipelago a hundred years.

It measures 4.1 cm long and 2.1 cm wide at the widest point (1.6 x .8 inches), with 1.6 cm (.6 inches) of the tip folded back. If it were unfolded, it would be beak-shaped with a pointed tip. It appears to have suffered damage before it was discarded. Archaeologists estimate it was originally up to 15-20 cm long (6-8 inches) when intact.

the object was one of a wide variety artifacts recovered in excavations between 1996 and 2003 at the Hayashi-Fujishima archaeological site in Fukui. The excavations revealed large settlement from the late Yayoi period with a dedicate bead-making workshop. A large number of iron tools associated with the workshop were unearthed there. A total of 944 objects, metal and beads, were recovered from the workshop.

With the iron materials, already corroded after 2,000 years in alluvial soil, in danger of further deterioration, a program of conservation was launched in 2021. As part of the program, metal objects were X-rayed and CT scanned. The X-ray of the little iron piece with the bent end revealed a serrated pattern on one side, identifying it for the first time as a saw. Archaeologists believe it may have been used for sawing wood, but it could have also processed soft stone during the bead-making process.

Iron was not yet produced on the Japanese islands during the Yayoi period, and the advanced techniques necessary to manufacture a saw like this indicates it was made elsewhere, namely China, and imported to Japan.

“The artifact could be an important piece of evidence supporting the advancement of ironware culture along the Sea of Japan coast during the Yayoi period,” said Tomokatsu Uozu, the center’s deputy director.

In China, saws with similar shapes from the second to third centuries have also been unearthed.

Researchers said iron processing techniques from the Chinese mainland likely crossed over to northern Kyushu through the Korean Peninsula and reached Fukui Prefecture following a route along the Sea of Japan.



* This article was originally published here

कास्टिंग स्कैम का शिकार हुई थीं श्रुति शर्मा:बोलीं- एक्ट्रेस बनने से पहले टीवी शो का झांसा देकर एक शख्स ने ₹15 हजार ठग लिए थे

'ऑफिस-ऑफिस' के नए सीजन में मुसद्दी लाल की बेटी 'अनोखी' का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस श्रुति शर्मा ने अपने संघर्ष, करियर और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से साझा किए। प्रतापगढ़ से मुंबई तक का सफर तय करने वाली श्रुति ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि कैसे वह कास्टिंग फ्रॉड का शिकार हुईं, पांच बार रिजेक्ट होने के बाद पहला बड़ा मौका मिला और परिवार के भरोसे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 'हीरामंडी', संजय लीला भंसाली, टीवी इंडस्ट्री के संघर्ष और अपने उसूलों पर भी बात की। सवाल: 'ऑफिस-ऑफिस' के नए सीजन का हिस्सा बनने की खबर मिलने पर कैसा लगा? जवाब: सच कहूं तो पहले मुझे यकीन नहीं हुआ। 25 साल बाद अगर कोई कहे कि 'ऑफिस-ऑफिस' का नया सीजन बन रहा है, तो मजाक लगता है। लेकिन दोबारा कॉल और मीटिंग के बाद एहसास हुआ कि यह सच में हो रहा है। शुरुआत में मैं काफी नर्वस थी। लग रहा था कि लोग नए शो की तुलना पुराने 'ऑफिस-ऑफिस' से करेंगे। यह बड़ा चैलेंज था। लेकिन निर्देशक राजन सर और पूरी कास्ट के साथ स्क्रिप्ट रीडिंग के बाद भरोसा मिला। हमें लगा कि हम अच्छा काम कर पाएंगे। सवाल: 'ऑफिस-ऑफिस' के सेट पर पहला दिन कैसा था? जवाब: पहले दिन सभी कलाकार उत्साहित थे। शूटिंग शुरू होने से पहले पूजा भी हुई थी, जिसमें उमेश सर और उनका परिवार शामिल हुआ था। सबसे अच्छी बात यह थी कि निर्माताओं ने शुरुआत से ही सकारात्मक माहौल बनाया था। सेट पुराने 'ऑफिस-ऑफिस' जैसा तैयार किया गया था। पहले दिन मैं काफी घबराई हुई थी। मेरा पहला सीन भी पहले एपिसोड का था। आज भी वह सीन देखती हूं, तो चेहरे पर नर्वसनेस दिखाई देती है। सवाल: क्या पुराने 'ऑफिस-ऑफिस' के कलाकार भी नए सीजन में हैं? जवाब: नहीं, पुराने कलाकारों में से कोई भी इस शो का हिस्सा नहीं है। यह हमारे लिए अच्छा रहा। अगर उनके साथ स्क्रीन शेयर करनी पड़ती, तो हम और ज्यादा नर्वस हो जाते। हालांकि, हमारे किरदार पुराने किरदारों से जुड़े हैं। जैसे मैं मुसद्दी लाल की बेटी अनोखी बनी हूं। कोई किसी का भतीजा है, कोई किसी का जीजा या साला। लेकिन कहानी और स्क्रिप्ट पूरी तरह नई है। हमने पुराने शो की नकल नहीं की। सवाल: 'अनोखी' का किरदार कैसा है? जवाब: मुसद्दी लाल सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर परेशान लौटते थे। लेकिन उनकी बेटी अनोखी बिल्कुल अलग है। उसकी मां ने बचपन से बताया है कि उसके पिता बहादुर और जीतने वाले इंसान थे। इसलिए अनोखी को लगता है कि वह भी हर लड़ाई जीत सकती है। वह मुश्किलों का सामना करती है, कई बार फंसती है, लेकिन हार नहीं मानती। हर एपिसोड के अंत में वह अपना काम निकलवा लेती है और सामने वाले को सबक भी सिखाती है। चाहे उसे साम, दाम, दंड या भेद, कोई भी तरीका अपनाना पड़े। सवाल: अनोखी की कमजोरियां क्या हैं? जवाब: अनोखी कोई आदर्शवादी किरदार नहीं है। वह मानवीय है और उसमें कमियां भी हैं। अगर उसे लगता है कि किसी काम के लिए शॉर्टकट अपनाना पड़ेगा, तो वह पीछे नहीं हटती। कई बार वह पैसे देकर काम करवाने की कोशिश करती है और बाद में ठगी का शिकार हो जाती है। कई एपिसोड में वह दूसरों को चकमा भी देती है। यही बात उसके किरदार को दिलचस्प बनाती है। सवाल: क्या आपके साथ भी कभी कोई स्कैम हुआ है? जवाब: जी हां, मेरे साथ भी धोखाधड़ी हुई है। मुंबई आने की तैयारी के दौरान मुझे एक फोन आया। सामने वाले ने खुद को कास्टिंग डायरेक्टर बताया और कहा कि मुझे एक टीवी शो के लिए चुना गया है। उसने रजिस्ट्रेशन के नाम पर 10 से 15 हजार रुपए मांगे। उस समय मैं स्कूल में पढ़ाती थी और मेहनत से पैसे जमा कर रही थी। मैंने पैसे भेज दिए, लेकिन बाद में उसका फोन बंद हो गया और वह गायब हो गया। उस समय मैं बहुत रोई थी। मेरी तनख्वाह सिर्फ तीन हजार रुपए थी और मैंने मुश्किल से वह रकम जुटाई थी। सवाल: क्या आपने उसी समय तय कर लिया था कि एक्टिंग करनी है? जवाब: जी हां। मेरे पिता शुरू में इसके खिलाफ थे। उनका मानना था कि लड़कियों के लिए यह इंडस्ट्री सुरक्षित नहीं है। उन्हें मनाने में काफी समय लगा। मैंने 2016 में एक नाटक लिखा था। भाई के साथ उसकी कास्टिंग, रिहर्सल और मंचन किया। लोगों को वह नाटक पसंद आया। इसके बाद परिवार को भरोसा हुआ कि मैं अभिनय के क्षेत्र में कुछ कर सकती हूं। इसके बाद मैंने मुंबई आने का फैसला कर लिया। सवाल: मुंबई आने का फैसला कैसे लिया? परिवार का क्या रिएक्शन था? जवाब: उस नाटक के बाद मुंबई आने का फैसला मैंने लगभग कर लिया था, लेकिन पापा को सीधे नहीं बताया था। मेरी ट्रेन अगले दिन थी और उस रात मम्मी व भाई ने उन्हें समझाया। शुरुआत में वे हैरान थे, लेकिन आखिरकार मान गए। पूरा परिवार मुझे छोड़ने स्टेशन आया था। वह पल भावुक था। सवाल: मुंबई आने के बाद शुरुआत कैसी रही? जवाब: मुंबई आने के बाद मैं अंधेरी ईस्ट के चकाला इलाके में तीन लड़कियों के साथ छोटे किराए के घर में रहती थी। यह मेरे लिए नया अनुभव था। 26 अक्टूबर 2017 को मैं मुंबई आई और 28 अक्टूबर को ही 'इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार' के ऑडिशन का फोन आ गया। मैंने ऑडिशन दिया और शॉर्टलिस्ट हो गई। इसके बाद दो महीने तक वर्कशॉप चली। हालांकि, मुझे पांच बार रिजेक्ट किया गया। एक समय मैं निराश होकर लखनऊ लौट गई। लेकिन जिस दिन मैं वहां पहुंची, उसी दिन फोन आया कि मेरा चयन हो गया है और मुझे वापस मुंबई आना होगा। पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने मेरी टिकट करवाई और वहीं से करियर की शुरुआत हुई। सवाल: संघर्ष के दिनों में आपका प्लान क्या था? जवाब: मेरे पिताजी ने मुझे दो साल का समय दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर दो साल में कुछ नहीं हुआ, तो वापस आकर शादी करनी होगी। मैंने सोच रखा था कि अगर अभिनय से काम नहीं मिला, तो नौकरी कर लूंगी। मैं पहले से पढ़ाती थी, इसलिए भरोसा था कि किसी स्कूल या संस्थान में काम मिल जाएगा। मेरा मानना था कि अपने सपनों का खर्च खुद उठाना चाहिए। सवाल: आपकी पढ़ाई-लिखाई कैसी रही? जवाब: मैंने ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद क्रिएटिव राइटिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। साथ ही भरतनाट्यम की ट्रेनिंग ली। मैं हमेशा से कला और साहित्य की ओर झुकी रही हूं। मुझे साहित्य और मनोविज्ञान जैसे विषय पसंद थे। कभी सोचा था कि प्रोफेसर बनूंगी, लेकिन किस्मत मुझे अभिनय की दुनिया में ले आई। सवाल: पहला बड़ा मौका कैसे मिला? जवाब: मेरी पहली तेलुगु फिल्म 'एजेंट साई श्रीनिवास आत्रेय' थी। मैं हैदराबाद में उसकी शूटिंग कर रही थी। उसी दौरान टीवी शो 'गठबंधन' के लिए ऑडिशन का कॉल आया। शूटिंग की वजह से मैं तुरंत नहीं जा सकी। कई बार फोन आने के बाद जब मुंबई लौटी, तब ऑडिशन दिया और चयन हो गया। वहीं से टीवी इंडस्ट्री में मेरी शुरुआत हुई। सवाल: तेलुगु फिल्म कैसे मिली थी? जवाब: 'इंडियाज नेक्स्ट सुपरस्टार' के दौरान मैंने एक नागिन एक्ट किया था। फिल्म के निर्देशक ने वही प्रदर्शन देखा और उन्हें मेरा काम पसंद आया। इसके बाद मुझे फिल्म का प्रस्ताव मिला। शुरुआत में यकीन नहीं हुआ, क्योंकि मैं कभी साउथ इंडिया नहीं गई थी। लेकिन कहानी अच्छी लगी और मैंने फिल्म कर ली। फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला, लेकिन उस समय मैं टीवी शो 'गठबंधन' में व्यस्त थी, इसलिए प्रमोशन का हिस्सा नहीं बन सकी। सवाल: आपके करियर का सबसे खास किरदार कौन-सा रहा? जवाब: मेरे सभी किरदारों को दर्शकों ने प्यार दिया है। लेकिन पहला शो हमेशा खास होता है। 'गठबंधन' ने मुझे पहचान दिलाई और घर-घर तक पहुंचाया। इसके अलावा 'नमक' का किरदार भी मेरे दिल के करीब है। उस शो का विषय मजबूत था और दर्शकों ने उसे काफी पसंद किया। सवाल: टीवी इंडस्ट्री में लंबे काम के घंटों को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने 20 से 22 घंटे तक लगातार काम किया है। शुरुआत में हमें अपने अधिकारों की ज्यादा जानकारी नहीं थी। 'गठबंधन' के दौरान वरिष्ठ कलाकारों ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट में काम के घंटे तय कराए जा सकते हैं। इसके बाद मैंने कॉन्ट्रैक्ट में यह शर्त जोड़नी शुरू कर दी कि रोजाना सीमित घंटे ही काम करूंगी। सवाल: 'हीरामंडी' में काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत शानदार। मैंने खुद को वहां नए कलाकार की तरह रखा। मुझे लगा कि मेरे पास सिर्फ टैलेंट है और मुझे सीखना है। सेट पर बड़े कलाकार थे, इसलिए हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। टीवी में सीखा अनुशासन और तेजी 'हीरामंडी' में बहुत काम आई। संजय लीला भंसाली सर प्रतिभाशाली निर्देशक हैं। उनका विजन बड़ा है और वे हर छोटे कलाकार पर बराबर ध्यान देते हैं। सेट पर किसी जूनियर आर्टिस्ट की पायल से लेकर हेयरस्टाइल तक उनकी नजर रहती थी। उनके साथ काम करने के लिए अहंकार छोड़कर उनके विजन पर भरोसा करना पड़ता है। सवाल: 'हीरामंडी' आपको कैसे मिली थी? जवाब: मैं टीवी शो 'नमक इश्क का' की शूटिंग कर रही थी, तभी ऑडिशन का कॉल आया। मैंने मेकअप रूम में ही ऑडिशन रिकॉर्ड किया। इसके बाद संजय लीला भंसाली से मुलाकात हुई। उनके सामने बैठना मेरे लिए किसी सपने जैसा था। मुझे लगा नहीं था कि मेरा चयन होगा, लेकिन किस्मत से यह मौका मिल गया। सवाल: 'हीरामंडी' से आपके करियर को कितना फायदा हुआ? जवाब: बहुत फायदा हुआ। यह शो 192 देशों में रिलीज हुआ और दुनिया भर से लोगों के संदेश आने लगे। एक कलाकार के तौर पर मुझे लगा कि मेरे काम को वैश्विक पहचान मिली है। इसी शो की वजह से आगे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स भी मिले। सवाल: फिल्मों के ऑफर आते हैं? जवाब: जी हां, ऑफर आते हैं। लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं। मैं वही काम करना पसंद करती हूं, जिसे परिवार के साथ बैठकर देख सकूं। कई बार अच्छी कहानियां सिर्फ एक-दो दृश्यों की वजह से छोड़नी पड़ती हैं। अफसोस होता है, लेकिन मेरा मानना है कि जो मेरे लिए बना है, वह मुझे जरूर मिलेगा। सवाल: आपने प्रोडक्शन में भी कदम रखा है? जवाब: जी हां। मुझे और मेरे भाई को लिखना पसंद है। हमने मिलकर कुछ कहानियां लिखीं और फिर अपना कंटेंट बनाने का फैसला किया। हमने कुछ वर्टिकल ड्रामा और अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है। भविष्य में फिल्मों और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने की योजना है। सवाल: सफलता को आप कैसे परिभाषित करती हैं? जवाब: मेरे लिए सफलता सिर्फ प्रसिद्धि नहीं है। सबसे बड़ी सफलता यह है कि मैंने लोगों की सोच बदली है। मैं ऐसे माहौल से आती हूं, जहां लोग मानते थे कि अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए समझौते करने पड़ते हैं। अगर मुझे देखकर कोई युवा यह विश्वास करता है कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर सफलता मिल सकती है, तो वही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। सवाल: युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी? जवाब: अगर किसी भी काम के लिए आत्मसम्मान या सिद्धांत छोड़ने पड़ रहे हैं, तो वह काम मत कीजिए। अभिनय में कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत करनी पड़ती है, ऑडिशन देने पड़ते हैं और धैर्य रखना पड़ता है। खासतौर पर लड़कियों से मैं कहना चाहूंगी कि अगर कोई आपसे समझौता करने की बात करे, तो वहां से तुरंत निकल जाएं। इंडस्ट्री में अच्छे लोग हैं और मेहनत करने वालों के लिए यहां अवसरों की कमी नहीं है।

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