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ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

Monday, 2 November 2026

शाहरुख खान@61:अफेयर की खबर छापने वाले को कहा- काट डालूंगा, मन्नत पर पत्थर फेंके जाने पर बेटी सुहाना रोई तो दी धमकी; गुस्से के किस्से

बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान… पर्दे पर कभी मोहब्बत के लिए दुनिया से लड़ते दिखे, तो कभी दुश्मनों के छक्के छुड़ाते। लेकिन असल जिंदगी में भी शाहरुख का एक ऐसा अंदाज रहा है, जिसने कई बार सुर्खियां बटोरीं। जब बात परिवार की हो, आत्मसम्मान की या फिर अपने काम और इज्जत की, तो शाहरुख ने कैमरे के सामने ही नहीं, कैमरे के पीछे भी कई बार एक्शन किया है। एक बार तो शाहरुख को-एक्ट्रेस से शारीरिक संबंध बनाने की बात छापने वाले पत्रकार को मारने तलवार लेकर उसके घर पहुंच गए थे। वहीं एक बार यूनिट की लड़कियों को छेड़ने वालों की लाठी से पिटाई की थी। आज शाहरुख खान के बर्थडे के खास मौके पर पढ़िए उनके ऑफ कैमरा झगड़ों की कहानी- किस्सा- 1 हीरोइन से अफेयर की खबर छापने वाले से कहा- काट डालूंगा, जिंदा गाड़ दूंगा शाहरुख नए-नए फिल्मों में आए थे और उनकी शादी भी नई-नई थी। इसी समय उन्हें दीपा सेन के साथ फिल्म मामा मेमसाब (1993) में कास्ट किया गया। फिल्म की शूटिंग चल रही थी, तभी एक मैगजीन ने कवर पेज पर शाहरुख की बड़ी सी तस्वीर के साथ लिखा कि शूटिंग में हीरोइन के साथ सहज महसूस करने के लिए उन्होंने उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए हैं। मैगजीन घर पहुंची, तो शाहरुख की पत्नी गौरी खान डर गईं। शाहरुख ने पढ़ते ही सीधे मैगजीन की एडिटर को कॉल मिलाया और कहा- ‘ये क्या छापा है?’ जवाब मिला- ‘शाहरुख, ये मजाक है।’ शाहरुख ने गालियों की बौछार कर दी और कॉल पर ही धमकी दे डाली। उसी शाम शाहरुख, शादी में आर्मी ऑफिसर ससुर से घुड़चड़ाई के समय मिली तलवार लेकर मैगजीन के रिपोर्टर के घर पहुंच गए। पहुंचते ही उन्होंने उस रिपोर्टर की टांगों के बीच में तलवार अड़ा दी। गाली-गलौज हुई और शाहरुख ने उसके पेरेंट्स से कहा- ‘मैं इसे काट डालूंगा।’ उस रोज रिपोर्टर के घर में एक पार्टी थी, जिसमें कई लोग आए हुए थे, लेकिन शाहरुख ने आव देखा न ताव सीधे बखेड़ा खड़ा कर, जमकर मारपीट की और गालियां बरसाईं। उन्होंने धमकी दी कि दोबारा ऐसा हुआ, तो वो सबको जिंदा गाड़ देंगे। शाहरुख तमतमाते घर लौट आए। अगले दिन उनका गुस्सा शांत हो चुका था। शाम को वो दूसरी फिल्म कभी हां कभी ना की शूटिंग करने चले गए। सेट पर पुलिस आईं, शाहरुख को लगा फैन हैं। कुछ तस्वीरें क्लिक करने के बाद पुलिस ने कहा- आपको स्टेशन बुलाया गया है। शाहरुख को लगा कोई अफसर उनसे मिलना चाहता है। वो स्टाइल में पुलिस स्टेशन गए। जैसे ही वो कुर्सी पर बैठने को हुए, अफसर ने तेज आवाज में कहा- बैठने की जरुरत नहीं है। तुम्हारे खिलाफ शिकायत मिली है। शाम के 6 बजकर निकल गए थे, तो बेल की भी उम्मीद नहीं थी। पुलिस ने उन्हें एक कॉल करने की इजाजत दी। लेकिन शाहरुख ने परिवार, वकील या दोस्तों की जगह सीधे शिकायत करने वाले रिपोर्टर को कॉल लगाया और कहा- ‘अब तो मैं जेल आ गया हूं, निकलकर तुझे छोड़ूंगा नहीं।’ शाहरुख को फॉर्मेलिटी के बाद जेल में डाला गया, तब नाना पाटेकर ने उन्हें बेल दिलवाई थी। ये किस्सा खुद शाहरुख ने 2012 के थिंक फेस्ट में सुनाया था। किस्सा- 2 लड़कियों को छेड़ने वाले लड़कों की कर दी पिटाई शाहरुख खान और सलमान खान राजस्थान में फिल्म करण अर्जुन की शूटिंग कर रहे थे। इस दौरान कई लोग उनकी शूटिंग देखने इकट्ठा होते थे। एक दिन शाहरुख के गाने की शूटिंग हुई, जिसमें कोरियोग्राफर चिन्नी प्रकाश की टीम की कई लड़कियां भी शामिल हुईं। शूटिंग के बीच कुछ लड़के आकर, उन लड़कियों पर कमेंट कर बदतमीजी करने लगे। पहले तो टीम ने लड़कों को समझाकर भगाने की कोशिश की, लेकिन जब वो तब भी लगातार बदतमीजी करते रहे, तो शाहरुख और सलमान ने लाठी से उन लड़कों की पिटाई कर दी। सेट के लोग डर गए कि कहीं वो लड़के हंगामा न खड़ा कर दें, इस वजह से उन लड़कियों को हड़बड़ी में सेट से होटल तक सुरक्षित पहुंचाया गया था। किस्सा- 3 अंडरवर्ल्ड की धमकी मिली, तो जवाब में कहा- पठान हूं 90 के दशक में बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का हस्तक्षेप बढ़ने लगा। कई प्रोड्यूसर्स से प्रोटेक्शन मनी के नाम पर लाखों वसूले जाते, तो कई हीरो-हीरोइन पर कुछ प्रोड्यूसर की फिल्में करने का दबाव बनाया जा रहा था। बात न मानने वालों को जान से मारने की धमकी दी जाती। ऐसे ही प्रोड्यूसर गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई और राजीव राय को धमकाया गया। राकेश रोशन पर भी हमला हुआ। एक दिन सलमान खान फिल्म दिल तो पागल है की शूटिंग कर रहे थे, तभी उनके पास अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गे अबू सलेम का कॉल आया। उन पर एक प्रोड्यूसर की फिल्म करने का दबाव बनाया गया। शाहरुख ने पहले बड़ी विनम्रता से कहा कि वह पहले ही कई फिल्मों में बिजी हैं, ऐसे में कोई नई फिल्म नहीं कर पाएंगे। लेकिन कॉल पर उन्हें धमकियां दी जाने लगीं। कहा गया- ‘मैं तुम्हारे पास एक आदमी भेज रहा हूं, तुम्हें अपनी जान की परवाह है तो फिल्म कर लेना।’ शाहरुख ने जवाब दिया- ‘मैं पठान हूं, गोली मारनी है तो मार दो। डरता नहीं हूं।’ कुछ दिन बीत गए। शाहरुख फिल्म डुप्लीकेट की शूटिंग कर रहे थे, तभी उनके पास छोटा शकील का कॉल आया। शाहरुख ने फिर इनकार कर दिया। लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने आसपास की सिक्योरिटी बढ़ा ली और बुलेटप्रूफ कार भी खरीदी। शाहरुख को 2013 में भी अंडरवर्ल्ड की धमकी मिल चुकी है। किस्सा- 4 मन्नत पर पत्थर फेंके जाने पर बेटी सुहाना रोई, तो दे डाली धमकी साल 2007 में शाहरुख खान ने सैफ अली खान के साथ आईफा अवॉर्ड होस्ट किया था। होस्टिंग के बीच शाहरुख ने समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह का मजाक बनाते हुए कहा था कि उनकी आंखों में दरिंदगी दिखती है। उस समय तो सभी जोर-जोर से हंस पड़े, लेकिन शो टेलीकास्ट होने के बाद सपा नेता के सपोर्टर्स शाहरुख को धमकियां देने लगे। सपोर्टर्स ने 5 मार्च 2007 को शाहरुख खान के घर मन्नत के बाहर हंगामा किया। शाहरुख खान, शूटिंग पर थे और पत्नी गौरी खान किसी काम से घर से बाहर गई हुई थीं, लेकिन बच्चे घर में ही थे। जल्द ही गुस्साई भीड़ ने नारेबाजी करते हुए घर में पत्थर मारने शुरू कर दिए। ये देखकर शाहरुख की बेटी सुहाना खान जोर-जोर से रोने लगीं, जो 6 साल की थीं। बड़े बेटे आर्यन भी रो रहे थे और शाहरुख की बहन की तबीयत खराब थी। घर से कॉल आते ही शाहरुख ने शूटिंग कैंसिल की और पुलिस को खबर थी। जल्द ही पुलिस ने भीड़ पर काबू पा लिया। शाहरुख भी तुरंत बच्चों के पास पहुंचे। शाहरुख इस इंसिडेंट से काफी नाराज हुए। कुछ दिनों बाद मिड-डे को दिए इंटरव्यू में शाहरुख ने कहा, मुझे अपना शूट कैंसिल कर घर भागना पड़ा था, क्योंकि मेरी 6 साल की बेटी सुहाना रो रही थी। मेरे घर के बाहर लोग हल्ला कर रहे थे, चिल्ला रहे थे। मेरा बेटा आर्यन डरा हुआ था कि कहीं कोई पत्थर न फेंक दे। अगर आप ये कहकर मुझे डराना चाहते हो कि मुझे नुकसान पहुंचाओगे, तो मैं डर जाऊंगा, क्योंकि मेरे न रहने के बाद मेरे बच्चों को कौन देखेगा। अगर मुझे नुकसान पहुंचाओगे, तो मैं अपने बारे में नहीं सोचूंगा। आगे शाहरुख ने कहा, मैं एक पठान हूं और अपने परिवार को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव हूं। अगर मैं पुलिस के आने से पहले आ जाता, तो मैंने अपनी बेटी को रुलाने वाले उन सभी लोगों को रुला दिया होता। ये एक पठान का वादा है, मैंने उन्हें बख्शा नहीं होता। किस्सा- 5 काम का मजाक उड़ाया तो सलमान से हुई हाथापाई, संजय दत्त ने किया बीच-बचाव शाहरुख सलमान 90 के दशक में अच्छे दोस्त थे। दोनों साथ फिल्में भी करते थे। फिर जब शाहरुख ने ऐश्वर्या के साथ फिल्म चलते-चलते की शूटिंग शुरू की, तो इस दोस्ती में दरार आ गई। दरअसल, सलमान बार-बार सेट पर आकर ऐश्वर्या की वजह से हंगामा करते थे। शाहरुख ने ऐश्वर्या को फिल्म से हटाकर रानी को ले लिया। सलमान-शाहरुख में अनबन तो हुई, लेकिन फराह खान ने अपनी शादी में दोनों की फिर सुलह करवा दी। दोस्ती फिर चर्चा में आ गई। फिर साल 2008 में शाहरुख पत्नी के साथ सलमान की गर्लफ्रेंड कटरीना की बर्थडे पार्टी में पहुंचे। मजाक-मजाक में सलमान ने शाहरुख के टीवी शो क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं का मजाक उड़ा दिया। शाहरुख काम का मजाक बनता देख चिढ़ गए और दोनों की वहीं बहस शुरू हो गई। बहस के बीच हाथापाई की नौबत भी आ गई। संजय दत्त ने बीच-बचाव करवाया और शाहरुख तुरंत वाइफ गौरी खान के साथ पार्टी छोड़कर निकल गए। झगड़े के बाद दोनों ने सालों तक एक-दूसरे से बात नहीं की, हालांकि अब दोनों फिर दोस्त बन चुके हैं। किस्सा- 6 फिल्म का मजाक उड़ाने पर दोस्त फराह के पति को मारा थप्पड़ संजय दत्त की फिल्म अग्निपथ हिट रही थी, जिसके बाद उन्होंने अपने घर में एक सक्सेस पार्टी रखी। इस पार्टी में संजय के करीबी दोस्त शाहरुख खान भी पहुंचे। इनके अलावा शाहरुख की दोस्त फराह खान भी पति शिरीष कुंदर के साथ पहुंचीं। उसी समय शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस की मेगा बजट फिल्म रा.वन फ्लॉप हुई थी। पार्टी में बातचीत के बीच शिरीष कुंदर ने शाहरुख की रा.वन के फ्लॉप होने का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। शाहरुख ने सुना तो वो गुस्सा काबू नहीं कर सके और सीधे शिरीष को थप्पड़ जड़ दिया। फराह तुरंत पार्टी छोड़कर निकल गईं। डब्बू रत्नानी, अमीषा पटेल, जैसे कई लोगों ने माना, गलती शिरीष की थी। झगड़ा खबरों में रहा, फिर अगले ही दिन गलती का एहसास होने पर शिरीष कुंदर ने शाहरुख से माफी मांगकर मामला शांत कर दिया। किस्सा- 7 आमिर ने शाहरुख के नाम का कुत्ता पाला, जो जवाब में आमिर खान को छिछोरा कहा मई 2008 की बात है। पंचगनी के एक फार्महाउस से आमिर खान ने ब्लॉग लिखा- शाहरुख मेरे पैरों को चाट रहा है और मैं बीच-बीच में उसे बिस्किट खिला रहा हूं। इससे ज्यादा और क्या मांग सकता हूं?" आमिर का बयान आते ही साफ हो गया कि उनके और शाहरुख के बीच सालों से चला आ रही कॉल्ड वॉर, अब पब्लिक होने वाली है। 25 दिसंबर 2009 को आमिर की फिल्म 3 इडियट्स रिलीज होनी थी और कुछ दिनों बाद 12 फरवरी 2010 में शाहरुख की फिल्म माय नेम इज खान आनी थी। दोनों रिलीज में चंद दिनों की दूरी थी। आमिर फिल्म के प्रमोशन के लिए भेष बदलकर पब्लिक प्लेस में जा रहे थे। वहीं शाहरुख भी प्रमोशन में व्यस्त थे। एक इवेंट में शाहरुख से आमिर के गेटअप बदलकर प्रमोशन करने पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा- ये शब्द इस्तेमाल करने के लिए माफी, लेकिन ये छिछोरापन है। मुझे नहीं लगता कि एक लेवल पर आकर फिल्ममेकर्स या हम फिल्म की पब्लिसिटी के लिए ये छिछोरापन करेंगे। किस्सा- 8 बेटी से बदतमीजी की तो स्टेडियम में लड़ पड़े शाहरुख, बच्चे नाराज हुए तो दी सफाई 17 मई 2012 में शाहरुख, पत्नी गौरी खान, बच्चों आर्यन और सुहाना समेत करीब 40 बच्चों को मैच दिखाने ले गए थे। उस दिन शाहरुख की IPL टीम किंग नाइट राइडर का मैच चेन्नई सुपर किंग से था। सुहाना और आर्यन दूसरे बच्चों के साथ एक तरफ खड़े थे, तभी सिक्योरिटी गार्ड ने आकर उनसे बदसलूकी करना शुरू कर दी। वो बच्चों को वहां से भद्दी भाषा में हटा रहा था। उस समय तो शाहरुख वहां मौजूद नहीं थे। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि गार्ड ने उनके बच्चों के साथ बुरा सलूक किया, वो आपा खोते हुए उस गार्ड को मारने पहुंच गए। जमकर हंगामा और मारपीट हुई। नतीजतन मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने शाहरुख की वानखेड़े स्टेडियम में एंट्री पर 5 साल का बैन लगा दिया। उस दिन मारपीट कर जब शाहरुख घर लौटे, तो गौरी और बच्चे उनके रवैये पर नाराज थे। बेटे आर्यन ने साफ कहा कि उन्हें मारपीट नहीं करनी चाहिए थी। जब शाहरुख ने कहा कि वो बच्चों को गाली दे रहा था, तो सुहाना ने भी कहा- ये इतनी बड़ी बात नहीं थी कि आप इतना गुस्सा हो जाओ। आप एक बड़े स्टार हो। आपको तमीज से पेश आना चाहिए। शाहरुख ने आप की अदालत में इस मुद्दे पर बात की और अपने रवैये पर देश की जनता से भी माफी मांगी। अब पढ़िए, कैसे हीरो बने शाहरुख खान- शाहरुख के पिता मीर ताज मोहम्मद का जन्म अफगानिस्तान में ही हुआ था। 1946 में वो दिल्ली यूनिवर्सिटी से वकालत करने भारत आए थे, हालांकि इसके बाद भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से शुरू हुए दंगों के बाद वो अफगानिस्तान नहीं लौट सके। शाहरुख के पिता ने वकालत पूरी करने के बाद फर्नीचर बिजनेस किया। ये सफल नहीं रहा तो उन्होंने ट्रांसपोर्टेशन और केरोसीन डीलिंग जैसे काम किए। बाद में उन्होंने दिल्ली के विलिंगन हॉस्पिटल के पीछे चाय की दुकान खोल ली। 1956 में मीर ताज मोहम्मद, लतीफ फातिमा से शादी कर दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में किराए के घर में रहने लगे। एक बेटी के बाद 2 नवंबर 1965 को उनके घर बेटे शाहरुख का जन्म हुआ। शाहरुख ने 5 साल मैंगलोर में अपने नाना-नानी के साथ गुजारे। देखिए शाहरुख खान के बचपन की तस्वीरें- उनके नाना इफ्तिखार अहमद, पोर्ट में चीफ इंजीनियर थे। शाहरुख की मां लतीफ फातिमा भी पढ़ी-लिखी थीं। इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वालीं लतीफ फातिमा फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट थीं। वो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की करीबी थीं और उनके साथ सोशल वर्क किया करती थीं। स्पोर्ट्समैन बनना चाहते थे, कंधे में लगी चोट से टूटा सपना शाहरुख खान ने पढ़ाई सेंट कोलंबस स्कूल से की। वो पढ़ाई के साथ हॉकी और फुटबॉल में भी माहिर थे। खेलकूद में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें स्कूल का सबसे बड़ा सोर्ड ऑफ ऑनर अवॉर्ड मिला था। वो स्पोर्ट्समैन बनना चाहते थे, लेकिन एक दिन खेलते हुए उनके कंधे पर इतनी गहरी चोट लगी, जिससे डॉक्टर्स ने उन्हें खेल से दूर रहने की सलाह दी। स्पोर्ट्स छोड़ने के बाद उन्होंने हंसराज कॉलेज में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई के साथ प्ले में हिस्सा लेना शुरू किया। दिल्ली के थिएटर एक्शन ग्रुप से जुड़कर उन्हें बैरी जॉन से एक्टिंग सीखने का मौका मिला। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने दिल्ली के ही जामिया मिलिया इस्लामिया कॉलेज से मास कम्यूनिकेशन के मास्टर्स में दाखिला लिया। फिर एक्टर बनने के लिए पढ़ाई अधूरी छोड़ दी और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया। खुद को हीरो बनने लायक नहीं समझते थे शाहरुख नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एक्टिंग सीखते हुए शाहरुख की मुलाकात फिल्म और टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों से हुई। सबसे पहले उन्हें लेख टंडन के टीवी शो दिल दरिया में काम मिला था, जिसकी शूटिंग 1988 में शुरू हुई थी। हालांकि ये शो बनने में देरी हो गई और उन्होंने राजकुमार कपूर के निर्देशन में बने 1989 के शो फौजी से एक्टिंग करियर की शुरुआत की। वो अजीज मिर्जा के शो सर्कस (1989-1990), मणि कौल के शो इडियट (1992) और उम्मीद (1989) का भी हिस्सा रहे। शाहरुख के दमदार अभिनय की तुलना दिलीप कुमार से की जाती थी। कई लोग उनसे कहते थे कि उन्हें टीवी सीरियल में नहीं बल्कि फिल्मों में काम करना चाहिए, हालांकि वो खुद को फिल्म में हीरो बनने लायक नहीं समझते थे। एक दिन शाहरुख खान के पास हेमा मालिनी की भतीजी का कॉल आया था। उन्होंने कहा था कि एक फिल्म के सिलसिले में हेमा आपसे बात करना चाहती हैं। शाहरुख को लगा कि कोई मजाक कर रहा है, हालांकि कुछ ही समय में हेमा मालिनी कॉल पर थीं। उन्होंने शाहरुख को मिलने बुलाया, लेकिन उन्हें फिल्में नहीं करनी थीं, तो वो गए ही नहीं। कुछ समय बाद मां का निधन हो गया और शाहरुख बुरी तरह टूट गए। सदमे से उबरने के लिए वो दिल्ली छोड़कर मुंबई चले आए। तब भी हेमा मालिनी अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म दिल आशना है के लिए एक हीरो की तलाश में थीं, तो शाहरुख खान उनसे मिलने चले गए। हेमा मालिनी ने बोलने का स्टाइल देखकर कर दिया था रिजेक्ट हेमा मालिनी की ऑटोबायोग्राफी बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल के मुताबिक, हेमा को शाहरुख के बाल और उनके जल्दी-जल्दी बोलने का तरीका पसंद नहीं आया, जिसके चलते उन्होंने शाहरुख को रिजेक्ट कर दिया। कुछ समय बाद जब हेमा मालिनी को उनकी फिल्म दिल आशना है के लिए कोई हीरो नहीं मिला, तो उन्होंने शाहरुख खान को ही कास्ट कर लिया। सालों पहले गुरु मां ने की थी भविष्यवाणी- ये लड़का एक दिन इंडस्ट्री का चेहरा बदल देगा शूटिंग शुरू होने के बाद हेमा मालिनी अपनी गुरु मां इंदिरा के पास शाहरुख खान की तस्वीर लेकर पहुंची थीं। तब उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि एक दिन ये लड़का इंडस्ट्री का चेहरा बदल देगा। सालों बाद गुरु मां की कही बात सच साबित हुई। 1991 में शाहरुख खान की एक साथ 4 फिल्में दिल आशना है, दीवाना, राजू बन गया जेंटलमैन और चमत्कार रिलीज हुईं और सारी हिट रहीं। इन फिल्मों की बदौलत शाहरुख खान को 1992 की फिल्म बाजीगर मिली। फिल्म बाजीगर और डर में नेगेटिव रोल निभाकर शाहरुख खान स्टार बन गए। 1991 से लेकर अब तक शाहरुख खान 80 फिल्मों में बतौर हीरो काम कर चुके हैं। पिछले साल उन्हें फिल्म पठान के लिए पहला बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। शाहरुख अब जल्द ही किंग में नजर आने वाले हैं, जो 2027 में रिलीज होगी। शाहरुख के बारे में ये फैक्ट्स भी पढ़िए-

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From Maya as Sir Mo Farah to Heidi as her own left hand: The best Halloween looks

Celebrities have been embracing the scariest day of the year by dressing up as sport stars, dismembered limbs and unsold concert tickets.

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‘मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा चैप्टर खत्म’:निर्माता बीपी सिंह के निधन पर CID के ACP प्रद्युम्न हुए इमोशनल, बोले- उन्हें पद्मश्री मिलना चाहिए था

CID में ACP प्रद्युम्न का किरदार निभाने वाले एक्टर शिवाजी साटम ने शो के निर्माता बीपी सिंह के निधन पर दुख जताया। बीपी सिंह का मंगलवार को हार्ट अटैक के बाद निधन हो गया। साटम ने उन्हें अपना मेंटर, दोस्त और शिक्षक बताया। उन्होंने कहा कि बीपी सिंह के निधन के बाद उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा चैप्टर खत्म हो गया। साटम ने वैरायटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, आज मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा चैप्टर खत्म हो गया। वह महान इंसान और अच्छे दोस्त थे। मैंने उनसे सब कुछ सीखा। मैं थिएटर से आया था और स्टेज पर एक्टिंग करना जानता था। लेकिन बीपी सिंह ने मुझे कैमरे के सामने एक्टिंग करना सिखाया। साटम ने बताया कि CID की टीम ने एक ही टेक में 111 मिनट लंबा एपिसोड शूट कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने कहा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद सिंह लगातार काम करते रहे। हार्ट सर्जरी के सिर्फ तीन महीने बाद वह जंगल में कैमरा लेकर चेज सीक्वेंस शूट कर रहे थे। साटम ने बताया कि दूसरी सर्जरी के छह-सात महीने बाद सिंह ने 111 मिनट का सिंगल-शॉट एपिसोड तैयार किया। उन्होंने कैमरामैन नितिन राव को पूरे शूट के दौरान मार्गदर्शन दिया था। बता दें कि इस उपलब्धि को ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ और ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया था। शिवाजी साटम ने भारतीय टेलीविजन में बीपी सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा, “उन जैसे इंसान को पद्मश्री मिलना चाहिए था, लेकिन उन्हें इसकी कभी परवाह नहीं रही। वह कहते थे, ‘छोड़ो, इससे क्या फर्क पड़ता है? हमारे दर्शक हमारे साथ हैं, है ना?’ आज भी दर्शक हमारे साथ हैं। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।” दयानंद शेट्टी ने भी दी श्रद्धांजलि दयानंद शेट्टी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बीपी सिंह को याद किया। शेट्टी ने कहा, “बीपी सिंह जी की जिंदगी में कंटेंट बनाने के अलावा कुछ और नहीं था। वह अपने काम के लिए समर्पित थे और उनमें बहुत जुनून था।” उन्होंने कहा, “वह हमारे सबसे अच्छे कैमरामैन में से एक थे। वह काफी समय से बीमार थे और मंगलवार सुबह नहीं उठे।” अंतिम संस्कार में CID के कई कलाकार शामिल हुए बुधवार को बीपी सिंह के अंतिम संस्कार में शिवाजी साटम, दयानंद शेट्टी समेत CID के कई कलाकार और दूसरे सेलिब्रिटीज पहुंचे। देखें अंतिम संस्कार की तस्वीरें— देहरादून में हुआ था जन्म, FTII से पढ़ाई की थी बीपी सिंह का जन्म 1949 में देहरादून में हुआ था। उन्होंने पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से पढ़ाई की। साल 1973 में उन्होंने दूरदर्शन में न्यूज कैमरामैन के तौर पर करियर शुरू किया। करीब 10 साल तक कैमरे के पीछे काम करने के बाद वह मुंबई आ गए। उन्होंने दूरदर्शन के लिए मर्डर मिस्ट्री फिल्म ‘सिर्फ चार दिन’ बनाई। इस दौरान पुलिस की क्राइम ब्रांच में उनकी दिलचस्पी बढ़ी। बाद में उन्होंने ‘एक शून्य शून्य’ और कई मराठी सीरियल भी बनाए। साल 1995 में उनका हॉरर शो ‘आहट’ प्रसारित होना शुरू हुआ। शुरुआत में यह सस्पेंस पर आधारित था, लेकिन बाद में इसमें भूत-प्रेत की कहानियां भी दिखाई जाने लगीं। साल 1998 में बीपी सिंह ने ‘सीआईडी’ शो बनाया। इसमें उन्होंने निर्माण और निर्देशन के साथ समय-समय पर डीसीपी शमशेर सिंह चित्रोले का किरदार भी निभाया। साल 2010 में उनके शो की ओर से ‘सीआईडी गैलेंट्री अवॉर्ड्स’ की शुरुआत भी की गई थी। उन्होंने ‘गुटुर गू’, ‘रात होने को है’, ‘सूर्या द सुपर कॉप’ और ‘सुपरकॉप्स वर्सेज सुपरविलेन्स’ जैसे शो भी बनाए। साथ ही, वेब सीरीज ‘अभय’ को भी प्रोड्यूस किया था। CID बनाने से पहले सिंह की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी बीपी सिंह का सफर आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें कई साल तक काम नहीं मिला। देवांग भट्ट को दिए इंटरव्यू में बीपी सिंह ने बताया था कि उनके करियर में सफलता और मुश्किलें, दोनों आईं। उनका मराठी सीरियल ‘एक शून्य शून्य’ काफी हिट हुआ था, लेकिन 31 एपिसोड के बाद वह बंद हो गया। इसके बाद करीब चार-पांच साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। बीपी सिंह ने इंटरव्यू में एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया था कि एक दिन उनके घर पर सिटी बैंक का एक कर्मचारी आया। उसने कहा कि बैंक उन्हें लोन देना चाहता है। दरअसल, बीपी सिंह ने पहले कार लोन लिया था और उसकी सभी किस्तें समय पर चुकाई थीं। इसी वजह से बैंक ने उन्हें पर्सनल लोन देने का प्रस्ताव दिया। शुरुआत में बीपी सिंह को भरोसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन बैंक कर्मचारी ने उन्हें सोचने का समय दिया और दोबारा घर आया। आखिरकार, उन्हें करीब डेढ़ लाख रुपए का लोन मिला और उन्होंने करीब पांच लाख रुपए जमा किए। फिर CID का पायलट एपिसोड बनाया। एक डॉक्टर की बात से आया CID का आइडिया बीपी सिंह ने बताया कि CID का विचार उन्हें फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी एक बातचीत के दौरान आया था। उनकी मुलाकात एक फॉरेंसिक डॉक्टर फतनानी से हुई थी। डॉक्टर ने उन्हें बताया था कि मुर्दा कभी झूठ नहीं बोलेगा, जिनसे अपराध का पता लगाया जा सकता है। यह बात बीपी सिंह को बेहद दिलचस्प लगी। उन्होंने सोचा कि अगर इन वैज्ञानिक तरीकों को कहानियों के जरिए दिखाया जाए, तो दर्शकों को कुछ नया देखने को मिलेगा। इसके बाद उन्होंने फॉरेंसिक साइंस से जुड़ी किताबें पढ़ीं। उन्होंने अपने लेखकों को भी इस बारे में जानकारी दी। इसी सोच ने CID की कहानियों को एक अलग पहचान दी। शिवाजी साटम और दया की कास्टिंग कैसी हुई थी बीपी सिंह ने बताया था कि शिवाजी साटम और उनकी दोस्ती काफी पुरानी थी। साटम बैंक में काम करते थे, तब से वे एक-दूसरे को जानते थे। बीपी सिंह को लगता था कि शिवाजी साटम की आंखों में एक ईमानदारी नजर आती है। यही बात ACP प्रद्युम्न के किरदार के लिए जरूरी थी। इंस्पेक्टर दया की कास्टिंग का किस्सा भी दिलचस्प था। सिंह ने बताया था कि एक दिन उनकी टीम के एक सदस्य ने दया के किरदार के लिए एक्टर दयानंद शेट्टी को बुलाने की सलाह दी। करीब दो घंटे बाद दयानंद शेट्टी ऑडिशन देने पहुंचे। बीपी सिंह ने उन्हें दो पन्नों का डायलॉग दिया। दयानंद शेट्टी ने उसे याद करके भाव के साथ सुनाया। बीपी सिंह को लगा कि उन्हें अपने किरदार के लिए सही कलाकार मिल गया है। बीपी सिंह के निधन के बाद लोगों ने उनके बारे में जानने के लिए गूगल पर सर्च किया, जिसके बाद वह ट्रेंड करने लगे

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Sunday, 1 November 2026

12th c. bronzes of Hindu deities found in southern India

Two 12th century bronzes of Hindu deities from the Chola Empire have been discovered in Nagapattinam, Tamil Nadu, India. They depict the deities Nataraja, the dancing form of Shiva, and Sivakami Amman, a form of the goddess Parvati and consort of Shiva. They are the first example of bronze statues of their kind unearthed in a scientific excavation by the Tamil Nadu State Department of Archaeology.

The Nataraja is the larger of the two at 110 cm high and 100 cm wide. Shiva has for arms and one leg raised crossed over the over, dancing the Anansa Tandava, the dance of bliss. The right leg is slightly bent and the foot rests on a figure believed to represent ignorance. The Sivakami statue is 82 cm high and 23 cm wide. She stands in an curved posture known as tribhanga, with one arm raised and the opposite leg bent.

The statues were found in August buried together next to their pedestals. Archaeologists dated them to the 12th century based on their design style and bronze craftsmanship.

Bronze sculptures reached a particularly sophisticated level under the Chola rulers. Images of Hindu deities were not simply decorative objects. Many were created for worship and could be carried in religious processions, allowing divine images to move beyond the inner spaces of temples. Whether the newly discovered statues served such a purpose has not yet been established.

Nagapattinam was an important port city during the Chola period, serving as the empire’s primary entry point and exit point for east-bound travel across the Bay of Bengal. In addition to the commercial traffic, the city welcomed religious pilgrims who came to visit the Chudamani Vihara Buddhist monastery and the Soundarajaperumal Temple to Vishnu that is referenced in the Vaishnava canon, holy books written by the Alvars, Tamil poet-saints.

Both bronzes have been transported to Chennai for chemical conservation. Researchers also plan metallurgical analyses to examine the materials used in their manufacture.



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आखिरी फिल्म में ‘बीहड़’ के बागी बने दिखेंगे नाना पाटेकर:40 डिग्री में शूटिंग की, इरफान खान को बहुत याद करते थे

दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर ने अपनी आखिरी फिल्म दिनेश विजन की मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनी शक्तिशालिनी में काम किया। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की खासियत इसकी कहानी और स्टारकास्ट के साथ उसकी दुनिया भी है। यह पारंपरिक हॉरर-कॉमेडी से अलग है। इसमें सोशल सिचुएशन, रियल लाइफ से इंस्पायर्ड घटनाओं और चंबल के बीहड़ों को अहमियत दी गई है। नाना का किरदार कॉमिक अंदाज के बजाय गंभीरता और बागी तेवरों वाला है। फिल्म को मुंज्या और थामा फेम आदित्य सरपोतदार ने डायरेक्ट किया है और गुल्लक फेम दुर्गेश सिंह ने कहानी लिखी है। हॉरर-कॉमेडी नहीं, सोशल हॉरर-ड्रामा है फिल्म सूत्रों के मुताबिक, फिल्म को हॉरर-कॉमेडी की कैटेगरी में रखना सही नहीं होगा। इसकी कहानी गंभीर ड्रामा पर आधारित है, जिसमें सोशल सिचुएशन से पैदा होने वाला डर और टेंशन अहम हैं। फिल्म में हॉरर एलिमेंट है, लेकिन कॉमेडी के जरिए दर्शकों को डराना इसका मकसद नहीं है। कहानी की परिस्थितियों और सोशल बैकग्राउंड से बेचैनी पैदा करने की कोशिश की गई है। इसलिए इसे सोशल हॉरर-ड्रामा माना जा रहा है। रियल घटनाओं से इंस्पायर्ड है कहानी फिल्म की कहानी रियल घटनाओं से इंस्पायर्ड बताई जा रही है। हालांकि, इंस्पिरेशन लेने और किसी घटना को हूबहू पर्दे पर दिखाने में फर्क है। अभी साफ नहीं है कि स्क्रिप्ट वास्तविक घटनाओं को किस हद तक फॉलो करती है और कहां क्रिएटिव लिबर्टी ली गई है। सूत्र इसकी कहानी और बैकग्राउंड को दूसरी हॉरर-कॉमेडी फिल्मों से अलग बता रहे हैं। चंबल, ग्वालियर, भिंड और मुरैना में हुई शूटिंग जानकारी के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग चंबल रीजन, ग्वालियर और आसपास की लोकेशंस पर हुई। भिंड और मुरैना में भी शूटिंग का जिक्र है। इन जगहों की भौगोलिक बनावट, बीहड़ों का फैलाव और माहौल फिल्म को अलग विजुअल अपील दे सकता है। ऐसी फिल्मों में लोकेशन सिर्फ बैकग्राउंड नहीं होती, बल्कि किरदारों की सोच और स्ट्रगल समझने में भी मदद करती है। 40 डिग्री तापमान में नाना ने की शूटिंग सूत्रों के मुताबिक, शूटिंग का शेड्यूल लंबा था और कलाकारों ने गर्म मौसम में भी काम किया। ग्वालियर और बीहड़ वाले इलाकों में करीब 40 डिग्री तापमान में शूटिंग हुई। नाना पाटेकर के लिए बीहड़ों में शूटिंग अलग अनुभव था। बताया जाता है कि उन्होंने पहले इस तरह के माहौल में शूटिंग नहीं की थी। इसके बावजूद उन्होंने पेशेवर अंदाज में शूटिंग पूरी की। नाना का किरदार होगा सीरियस, कॉमेडी से बिल्कुल अलग नाना पाटेकर का किरदार गंभीर और बागी तेवरों वाला है। इसे उनके लोकप्रिय कॉमिक किरदारों की अगली कड़ी नहीं माना जा रहा। किरदार बीहड़ों की उस दुनिया से जुड़ा है, जहां संघर्ष, सोशल प्रेशर और अपने तरीके से जीने की जिद अहम है। हालांकि, उसकी पूरी बैकस्टोरी और कहानी में भूमिका को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं है। अनीत पड्डा ने नाना से लिए एक्टिंग टिप्स सूत्रों के मुताबिक, नाना पाटेकर ने शूटिंग के दौरान युवा कलाकारों से अपने अनुभव साझा किए। अनीत पड्डा के करियर के लिहाज से यह बड़े स्केल का प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। नाना जैसे सीनियर एक्टर के साथ काम करना उनके लिए सीखने का मौका रहा। उनका एक्टिंग एक्सपीरियंस, सीन समझने का तरीका और किरदार की बारीकियों पर ध्यान देने की आदत युवा कलाकारों के लिए उपयोगी रही। अनीत ने भी उनसे एक्टिंग के टिप्स लिए। नाना को कहानी सुनाने के लिए फार्महाउस पहुंचे आदित्य सरपोतदार नाना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मराठी फिल्मकार आदित्य सरपोतदार पहले उन्हें अपनी दो मराठी फिल्मों के लिए अप्रोच कर चुके थे, लेकिन डेट्स और दूसरी वजहों से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़े। आखिरकार शक्तिशालिनी में दोनों साथ काम कर सके। कहानी सुनाने के लिए आदित्य और राइटर दुर्गेश सिंह कई बार नाना के फार्महाउस गए। नैरेशन एक सिटिंग में पूरा नहीं हुआ। कई मुलाकातों में कहानी पर विस्तार से चर्चा हुई और कुल करीब आठ से दस घंटे नैरेशन चला। कहानी सुनते हुए खाना भी बनाते थे नाना पाटेकर सूत्रों के मुताबिक, फार्महाउस पर कहानी सुनाने का सिलसिला फॉर्मल मीटिंग तक सीमित नहीं था। बातचीत के दौरान नाना के खुद खाना बनाते हुए कहानी सुनने का जिक्र आया। कहानी पर चर्चा के साथ उनकी सामान्य दिनचर्या भी चलती रहती थी। किसी सीनियर एक्टर को किरदार के लिए तैयार करने में कहानी का आइडिया ही काफी नहीं होता। उसकी बैकस्टोरी, नेचर और फिल्म की ओवरऑल विजन समझाना भी जरूरी होता है। इरफान खान को बेहतरीन एक्टर्स में गिनते थे नाना बीहड़ों पर चर्चा के दौरान दिवंगत अभिनेता इरफान खान का जिक्र हुआ। नाना पाटेकर उनकी एक्टिंग की तारीफ करते थे और उन्हें बेहतरीन एक्टर्स में गिनते थे। चंबल और बागी जीवन के सिनेमाई संदर्भ में इरफान की फिल्म पान सिंह तोमर का जिक्र भी आया। सूत्रों के मुताबिक, नाना को यह फिल्म बहुत पसंद थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि शक्तिशालिनी उसकी स्टोरी या स्टाइल को फॉलो करती है। दोनों फिल्मों की तुलना से ज्यादा अहम किरदार और उसकी दुनिया को रियलिस्टिक बनाने पर दिया गया ध्यान है। एडिटिंग शुरू, म्यूजिक से सचिन-जिगर का नाम जुड़ा फिल्म की एडिटिंग शुरू होने की जानकारी सामने आई है। तकनीकी तौर पर इसे एडिट लॉक स्टेज कहते हैं। फिल्म फरवरी तक रिलीज हो सकती है। निर्माताओं ने इसे थामा या भेड़िया की तरह हेवी वीएफएक्स वाली फिल्म नहीं बनाया है। म्यूजिक के लिए पुराने सहयोगी सचिन-जिगर का नाम सामने आया है। किसी पुराने गाने को रीक्रिएट करने पर चर्चा हुई, लेकिन इसे फाइनल म्यूजिक प्लान नहीं माना जा सकता। फिल्म को मैडॉक की हॉरर-कॉमेडी फिल्मों से जोड़ना जल्दबाजी होगी, क्योंकि इसका जॉनर और ट्रीटमेंट अलग बताया जा रहा है। नाना पाटेकर के लिए यादगार रहेगा यह प्रोजेक्ट नाना पाटेकर का गंभीर और बागी किरदार इस फिल्म का खास पहलू है। रियल घटनाओं से इंस्पायर्ड कहानी, चंबल की लोकेशंस और अनीत पड्डा जैसे युवा कलाकारों के साथ उनका काम प्रोजेक्ट को अलग पहचान दे सकता है। मैडॉक फिल्म्स के लिए भी यह अपनी हॉरर-कॉमेडी इमेज से आगे बढ़कर अलग कहानी पेश करने का मौका है।

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Footage of Seoul crush to be removed from Call of Duty after backlash

Bereaved families say they were appalled to see footage of the Itaewon disaster included in Modern Warfare 4.

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Saturday, 31 October 2026

Exceptional Roman child’s sarcophagus found with toys inside

The 1,800-year-old sarcophagus of a child still sealed with toys inside has been discovered in the ancient city of Tomis, Romania. It was found on the northern edge of the Roman necropolis, an area that was in use in the 2nd and 3rd centuries A.D., and is the first well-preserved sarcophagus of a child discovered at Tomis.

Tomis, modern-day Constanța, was founded in the 6th century B.C. by Greek colonists from Miletus. Its harbor on the Black Sea and a direct inland route linking the sea to the Danube made it an advantageous location for trade, but it didn’t develop into a major city and center of regional commerce until after it was annexed by Rome in 29 B.C. The poet Ovid was banished there by Augustus in 8 A.D. and lamented what a remote backwater it was, but it prospered rapidly as one of Rome’s most important settlements on the Black Sea. It would become the capital of the province of Scythia Minor in the 3rd century.

The sarcophagus was unearthed last week by archaeologists from the Constanța Museum of National History and Archaeology in a preventative excavation before construction. It was small, suited for a child of around four of five, and intact with lead clamps and mortar sealing the lid in place. The entire unit was raised and removed to the museum so it could be opened and its contents examined.

On Tuesday, October 27th, the lid was raised, revealing the skeletal remains of a young child and exceptionally preserved organic remains including an inner wooden coffin, a burial shroud and floral offerings like leaves folded into small bundles. The coffin is so well-preserved its side panels are complete with their dovetail joints. Laid to rest with the baby were several bronze objects, coins and two clay toys: a horse on wheels and a rattle shaped like a rooster. Both toys have painted features and decoration surviving on the surface. The rooster still contains small objects that rattle when you shake it.

The child was wearing bronze bracelets and two bullae pendants on a necklace. Bullae were usually worn by Roman boys, but the sex won’t be determined until the bones are thoroughly examined. The age is also to be determined, as despite the size of the sarcophagus, the rattle suggests a younger child than a four-year-old. The high quality of the sarcophagus and finery it contained indicate the child was from a family of means.



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Ex-Traitors players talk tactics and celebrity final predictions

Former contestants share their thoughts on life in the castle ahead of Friday's final.

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Friday, 30 October 2026

Celtic grave with unique animal offering found in Bavaria

The grave of a Celtic woman buried with an unusual animal offering and rich jewelry has been discovered in Senden, in the German state of Bavaria. The remains of a lamb or kid, which were typically not left in graves as food offerings, raises new questions about the funerary rituals of the Celts of central Europe.

The grave was unearthed in a 2024 excavation at the site of a planned industrial park. The excavation uncovered traces of settlement from the Celtic Iron Age to the Roman Imperial era, but the grave was the most striking find. It contained the skeletal remains of an adult woman wearing valuable jewelry: a matching pair of heavy bronze anklets and a rare arm ring made of sapropelite, a dark, jet-like rock formed from fine organic mud that has hardened and mineralized over millions of years. Iron Age Celts carved and polished it for jewelry, usually bangle bracelets.

The remains have not been absolutely dated yet, but the two anklets are knotted ring bracelets, a type of jewelry produced by the La Tène culture between 380 and 250 B.C.

Dr. Stefanie Berg, who leads the ground monument department at the BLfD, calls the woman’s grave an outstanding single find. She says the grave sits inside a much bigger story. Her team documented traces of settlement across the dig area, running from the Celtic period into the Roman imperial age. Finds like these, she says, show the region served as busy living space for thousands of years. The grave is one point in a long record of people living and working on the same ground.



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Sam Fender pre-sale moved after 'bot attack'

Fender says a "sophisticated" attack affected a website selling tickets for his Newcastle shows.

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Sam Fender pre-sale moved after 'bot attack'

Fender says a "sophisticated" attack affected a website selling tickets for his Newcastle shows.

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Thursday, 29 October 2026

Prehistoric battle axe blocked from leaving UK

A prehistoric battle-axe head discovered in 1974 at Scarthingwell, near Tadcaster in North Yorkshire, has been temporarily blocked from export to give museums and local collectors a chance to buy it and keep it in the UK where it can be on public display. It is more than 4,000 years old, dating to the Bronze Age.

The battle-axe provides valuable insight into the role these objects played in expressing status, identity and changing ways of life in Neolithic and Bronze Age Britain. It also has significant research potential, offering future generations an opportunity to learn more about this period of our shared national history.

Discovered by accident during construction work but only reported to the Portable Antiquities Scheme in 2012, the axe head is made of diorite, a hard igneous rock with a distinctive mottled pattern. It has curved edges, a central hole for the handle and highly polished surface that emphasizes the natural pattern in the stone. It is in exceptional condition.

According to Tim Pestell, member of the Reviewing Committee on the Export of Works of Art and Objects of Cultural Interest (RCEWA), cutting a hard stone like this into a tapered shape with a central hole and then polishing it to a bright shine would have required hundreds of hours of hard work. The emphasis on aesthetics in the production of the piece suggest it was not just a utilitarian device.

In a profound period of change, the Early Bronze Age witnessed a society previously restricted to flint tool technology adopting metalwork. Despite this, battle axes became some of the most powerful symbolic objects, labelled by one scholar as ‘blunt instruments of power’. Made of stone rather than metal, they conveyed important social, sacred and political messages.

The axe head’s outstanding connection the British history, aesthetic significance and importance to the study of artifacts like it meets the first, second and third of the Waverley criteria used by the committee to make its determination. On the recommendation of RCEWA, Heritage Minister Baroness Twycross imposed a temporary export bar on the prehistoric artefact. Potential purchasers have until December 22 to make a good faith effort to raise the funds to acquire the axe head for the recommended price of £15,000 ($16,700).



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