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ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

LIVE LIVE - The Car Festival Of Lord Jagannath | Rath Yatra | Puri, Odisha

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बिग बॉस के बाद पहली बार साथ नजर आए ईशा-अविनाश:सॉन्ग 'काला शा काला' में दिखी जबरदस्त केमिस्ट्री, बोले- सिंगल टेक में शूट हुआ गाना

बिग बॉस 18 के कंटेस्टेंट्स अविनाश मिश्रा और ईशा सिंह की दोस्ती तो फैंस के बीच काफी चर्चित रही है, लेकिन अब दोनों का साथ में पहला गाना 'काला शा काला' रिलीज हो चुका है। इस गाने में दोनों की जबरदस्त परफॉर्मेंस और शानदार केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। इस गाने को मूडी और आखर ने लिखा है, जबकि रामजी गुलाटी ने अपनी आवाज दी है। वहीं, रामजी गुलाटी, अविनाश और ईशा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पढ़िए इंटरव्यू की प्रमुख बातें… आपने अपने नए गाने में ईशा और अविनाश को क्यों कास्ट किया और जब उन्हें इसके बारे में पता चला, तो रिएक्शन कैसा था? जवाब/रामजी- मैं भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं कि इस गाने में ईशा और अविनाश हैं। मेरे ख्याल से इनसे बेहतर इस गाने को कोई और नहीं कर सकता था। इनके फैंस इन्हें साथ में काफी पसंद करते हैं और यह उनका पहला प्रोजेक्ट है। इनके साथ काम करके मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं खुद इनके साथ काम करने के लिए काफी एक्साइटेड था। खास बात यह है कि मुझे हर शॉट एक ही टेक में मिल गया। इन दोनों से मुझे पूरी तरह से फैमिली जैसा एहसास होता है। बिग बॉस के बाद आपने पहली बार साथ में काम किया। क्या कोई मुश्किलें आईं या सब कुछ आसान था? अविनाश- सच कहूं तो, यह इतना आसान नहीं था। हां, पाजी (रामजी) के साथ काम करना आसान था, लेकिन ईशा के साथ थोड़ी मुश्किलें आईं। जब आप किसी को-स्टार के साथ काम करते हैं, तो एक फॉर्मलिटी होती है। लेकिन बिग बॉस के बाद हमारा कनेक्शन इतना गहरा हो गया है कि ईशा मुझे तंग करती रहती हैं, ‘ऐसा करो, वैसा करो!। हम को-एक्टर के तौर पर नहीं बल्कि एक-दूसरे को तंग करते हुए काम करते हैं, जिससे साथ में काम करने में बहुत मजा आता है। दुबई आपकी लकी डेस्टिनेशन रही है, जहां आपने अधिकतर गाने शूट किए हैं। लेकिन इस बार लोकेशन बदलने की कोई खास वजह? रामजी- पहले हम इस गाने की शूटिंग आर्मेनिया में करना चाहते थे, लेकिन मौसम की वजह से ऐसा नहीं हो सका। मैं चाहता था कि यह वीडियो बिल्कुल फ्रेश लगे और हम ऐसी लोकेशन पर शूट करें, जहां पहले कभी शूटिंग न हुई हो। इस बारे में मैंने यश जी से भी बात की थी कि मैं काफी समय बाद कोई गाना कर रहा हूं और जोड़ी भी नई है, तो मैं इसे एक नए और हट के तरीके से करना चाहता था। उसी सोच को ध्यान में रखते हुए फिर हमने इस गाने की शूटिंग थाईलैंड में की। इस दौरान हमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि वहां बहुत गर्मी थी। कुछ गाने की शूटिंग बैंकॉक और पटाया में भी हुई। ईशा और अविनाश में आपको सबसे अच्छी कौन सी क्वालिटी लगी? रामजी- इन दोनों में सभी क्वालिटी अच्छी और यूनिक हैं। वैसे तो मैं हर किसी के साथ काम करता हूं, लेकिन मेरे लिए सबसे जरूरी है कि इंसान अच्छा हो और ये दोनों बहुत अच्छे हैं। अविनाश- राम जी भी बहुत अच्छे हैं। उन्होंने हमारा बहुत ख्याल रखा। जब शूट हो रहा था, तो वे समय-समय पर हमारा हाल-चाल पूछते रहते थे और हमें कहीं घूमने जाने के लिए भी प्रेरित करते थे। मैं कहना चाहूंगा कि राम जी खुद इतने अच्छे इंसान हैं कि जो भी उनके साथ काम करेगा, उसे फैमिली जैसा एहसास जरूर होगा। ईशा- मैंने और राम जी ने पहले कभी साथ में काम नहीं किया था, इसलिए मेरी मम्मी थोड़ी चिंतित थीं। क्योंकि यह पहली बार था जब मैं उनके बिना कहीं जा रही थी। लेकिन बाद में सब कुछ ठीक हो गया और मेरी मम्मी भी काफी खुश हो गई थीं। ईशा और अविनाश, आपके लिए सेट पर सबसे अच्छी बात कौन सी थी, जो आपके दिल के सबसे ज्यादा रही? अविनाश- मेरे लिए सबसे खास बात यह रही कि मैं बाहर जाकर भी इंडिया का फूड खाना चाहता था और मैंने ऐसा किया भी। हां, टीम के कुछ मेंबर्स की पसंद अलग थी, लेकिन ईशा और पाजी ने मेरा पूरा साथ दिया। हमने मिलकर इंडियन फूड ही खाया। ईशा- मेरा थोड़ा अलग नजरिया है। जब भी मैं बाहर जाती हूं, मेरी कोशिश रहती है कि मैं उस शहर का फूड खाऊं, जो उसकी पहचान होती है। हालांकि, मैंने अविनाश से कहा था कि मैं इंडियन फूड नहीं खाऊंगी, लेकिन फिर एक दिन बाद मैंने पूरा इंडियन फूड ही खा लिया। जैसे, मैं खड़ी चावल कभी नहीं खाती, लेकिन उस दिन मैंने खड़ी चावल भी खाए। रामजी- मेरे लिए तो पूरी जर्नी ही यादगार रही। क्योंकि जब हम शूट शुरू करने वाले थे, तब कई सारी मुश्किलें थीं। लेकिन भगवान का शुक्रिया, सब कुछ बिल्कुल ठीक हो गया और फाइनल आउटकम बेहतरीन रहा।

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250 रुपए में रजिस्टर्ड, लाखों में बिके टाइटल:श्रीदेवी ने राम गोपाल वर्मा पर किया था केस, फिल्म के नाम पर क्यों होते हैं विवाद?

फिल्मों के टाइटल महज सिर्फ नाम नहीं होते, बल्कि इसके पीछे एक पूरी स्ट्रैटजी होती है। कुछ फिल्मों के टाइटल ऐसे होते हैं, जिन्हें सुनते ही फिल्म को देखने की उत्सुकता बढ़ जाती है। कभी फिल्मों के टाइटल को लेकर इतनी कंट्रोवर्सी हो जाती है कि उसे बदलना पड़ता है। किसी भी फिल्म का टाइटल कैसे डिसाइड होता है, उसके रजिस्ट्रेशन की क्या प्रक्रिया होती है, आज रील टु रियल के इस एपिसोड में समझेंगे। इस पूरे प्रोसेस को समझने के लिए हमने इम्पा के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा और विफपा के प्रेसिडेंट संग्राम शिर्के से बात की। प्रोड्यूसर एसोसिएशन में 250 रु. से लेकर 500 रु. में टाइटल रजिस्टर्ड होता है जब कोई प्रोड्यूसर फिल्म बनाने की योजना बनाता है, तो उसे सबसे पहले अपनी प्रोडक्शन कंपनी को रजिस्टर्ड कराना पड़ता है। जब फिल्म की कहानी तैयार हो जाती है, तब टाइटल फाइनल करने की प्रक्रिया शुरू होती है। टाइटल रजिस्ट्रेशन के लिए 500 रुपए (जीएसटी सहित) का शुल्क लिया जाता है। कुछ एसोसिएशन 250 रुपए में फिल्म का टाइटल रजिस्टर्ड करते हैं। चार एसोसिएशन मिलकर तय करते हैं फिल्म का टाइटल फिल्म प्रोड्यूसर्स की चार एसोसिएशन है। जिसमें इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन फिल्म्स एंड प्रोड्यूसर्स काउंसिल है। प्रोड्यूसर इनमें से जिस एसोसिएशन का मेंबर होता है, उसमें टाइटल रजिस्टर्ड करवाता है। उसके बाद एसोसिएशन के पदाधिकारी बाकी तीन एसोसिएशन में टाइटल भेजकर यह कन्फर्म करते हैं कि वह टाइटल वहां रजिस्टर्ड तो नहीं है। अगर वहां से कोई ऑब्जेक्शन आता है तो वह टाइटल प्रोड्यूसर को नहीं मिलता है। फिर उन्हें टाइटल में बदलाव करने का सुझाव दिया जाता है। एक महीने के अंदर टाइटल का कन्फर्मेशन मिलता है आम तौर पर एक एसोसिएशन में एक महीने में एक हजार टाइटल रजिस्ट्रेशन के लिए आते हैं। उसके बाद सभी एसोसिएशन के कमेटी मेंबर मिलकर टाइटल डिसाइड करते हैं। 22 लोग कमेटी में शामिल होते हैं। कमेटी की हर महीने में दो बार मीटिंग होती है। मीटिंग में इस बात का ध्यान दिया जाता है कि टाइटल में अश्लीलता नहीं होनी चाहिए। या फिर कोई विवादित टाइटल ना हो, जिसकी वजह से आगे चलकर कोई प्रॉब्लम हो। एक प्रोड्यूसर हर भाषा में 15 टाइटल रजिस्टर्ड करवा सकता है। टाइटल रजिस्ट्रेशन के लिए फास्ट-ट्रैक सुविधा उपलब्ध होती है अगर किसी प्रोड्यूसर को टाइटल जल्दी चाहिए या फिल्म रिलीज के करीब है, लेकिन फिल्म का टाइटल रजिस्टर नहीं हुआ है, तो 3000 रुपए के विशेष शुल्क पर फास्ट-ट्रैक सुविधा पर टाइटल रजिस्टर्ड करवा सकता है। इस प्रक्रिया के तहत एक हफ्ते के भीतर टाइटल पर निर्णय लिया जाता है। ऑनलाइन रिक्वेस्ट की सुविधा अब टाइटल रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन और भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है। आवेदन करने के बाद आवेदक को ईमेल से जानकारी दी जाती है कि उसे फिल्म का टाइटल मिलेगा या नहीं। यदि किसी प्रोड्यूसर का टाइटल रिजेक्ट हो जाता है, तो वह दोबारा आवेदन कर सकता है। टाइटल अलॉटमेंट के नियम यदि कोई प्रोड्यूसर टाइटल रजिस्टर कराने के बाद दो साल तक फिल्म नहीं बनाता है, तो कोई अन्य प्रोड्यूसर उस टाइटल के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए पहले टाइटल होल्डर से पूछा जाता है कि क्या वे टाइटल का इस्तेमाल करेंगे। यदि वे पीछे हटते हैं, तो टाइटल नए आवेदक को दिया जा सकता है। टाइटल काे अनऑफिशियल रूप से बेचना नियमों के खिलाफ है, लेकिन ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। यदि कोई प्रोड्यूसर बिना टाइटल रजिस्ट्रेशन के फिल्म का मुहूर्त करता है, तो उसे नोटिस भेजकर पेनल्टी लगाई जाती है। किन- किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है? वेस्टर्न इंडिया फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (विफपा) के प्रेसिडेंट संग्राम शिर्के ने बताया- यह ध्यान देना पड़ता है कि फिल्म का टाइटल टीवी या वेब सीरीज को न दें। कभी-कभी मिलते-जुलते टाइटल से तीन-चार फिल्में बनती हैं। जैसे भगत सिंह के जीवन पर एक साथ तीन फिल्में बनी थीं, उस समय टाइटल को लेकर बहुत झगड़े हुए थे उसे हमें संभालना पड़ा था। हमारे यहां 35 हजार और इम्पा में 25 हजार मेंबर हैं। इसलिए हमारे पास ज्यादा टाइटल आते हैं। बाकी एसोसिएशन में इतने ज्यादा मेंबर नहीं हैं, इसलिए उनके पास ज्यादा टाइटल नहीं आते हैं। टाइटल रजिस्टर्ड होने के बाद अगर दो- तीन साल तक फिल्म नहीं बनती है तो प्रोड्यूसर को टाइटल सरेंडर करना पड़ता है। मदर इंडिया जैसी क्लासिक फिल्मों का टाइटल किसी को नहीं देते हैं। सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद प्रोड्यूसर के पास 5 साल तक टाइटल फिल्म के टाइटल के लिए संजय दत्त ने खुद फोन किया इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इम्पा) के प्रेसिडेंट अभय सिन्हा ने संजय दत्त की फिल्म ‘द भूतनी’ से जुड़ा एक किस्सा शेयर किया। उन्होंने कहा- ‘द भूतनी’ के प्रोड्यूसर दीपक मुकुट का ‘भूतनी’ टाइटल के लिए मेरे पास फोन आया कि यह टाइटल उन्हें चाहिए। यह टाइटल किसी और के पास था। इसलिए मैंने मना कर दिया। उसके बाद संजय दत्त ने खुद फोन किया और उन्होंने कहा कि अरे भाई, आपके हाथ में है टाइटल दे दो, लेकिन जब टाइटल पहले से ही किसी और के नाम से रजिस्टर्ड है तो उसे मैं कैसे दे सकता था। हालांकि जिस प्रोड्यूसर के पास फिल्म का टाइटल था, उनसे रिक्वेस्ट की तो उन्होंने टाइटल दे दिया। उसके बाद उन्होंने फिल्म का टाइटल ‘द भूतनी’ रखा। दो प्रोड्यूसर आपसी सहमति से टाइटल का आदान-प्रदान कर सकते हैं, लेकिन इसमें एसोसिएशन किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करता है।’ 'आशिकी' टाइटल विवाद कोर्ट तक पहुंचा मुकेश भट्ट की विशेष फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और टी-सीरीज की सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने 'आशिकी 3’ बनाने की योजना बनाई, लेकिन इस पर विवाद तब हुआ जब टी-सीरीज ने 'तू ही आशिकी' जैसे टाइटल से फिल्म की घोषणा की। इसे लेकर टी सीरीज के खिलाफ मुकेश भट्ट ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मुकेश भट्ट की तरफ से आरोप लगाया गया था कि टी-सीरीज उनकी इजाजत के बिना 'आशिकी' शब्द का इस्तेमाल कर रहा है। इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए मुकेश भट्ट के हक में फैसला सुनाया था। टी-सीरीज और उसके सहयोगियों को 'आशिकी' शब्द के साथ किसी भी टाइटल का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई थी। बता दें कि 'आशिकी' (1990) और 'आशिकी 2’ (2013) विशेष फिल्म्स और टी-सीरीज की साझेदारी और संयुक्त क्रेडिट्स के साथ बनाई गई थी। ‘पद्मावती' फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद ‘पद्मावती' फिल्म के टाइटल को लेकर भी विवाद हुआ था, जिसे बाद में बदलकर 'पद्मावत' कर दिया गया। यह विवाद फिल्म की ऐतिहासिक सटीकता और रानी पद्मावती के चित्रण को लेकर था, जिसमें कुछ संगठनों ने फिल्म में इतिहास को विकृत करने और रानी पद्मावती की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया था। श्रीदेवी फिल्म का टाइटल रखने पर राम गोपाल वर्मा पर भड़की थीं एक्ट्रेस राम गोपाल वर्मा ने अपनी फिल्म का नाम सावित्री से बदलकर श्रीदेवी कर दिया था। इस वजह से श्रीदेवी और उनके पति बोनी कपूर नाराज हो गए। श्रीदेवी ने रामू को कानूनी नोटिस भेजकर नाम बदलने, बिना शर्त माफी मांगने और फिल्म में उनके नाम या छवि के किसी भी तरह के इस्तेमाल को रोकने की मांग की थी। रामू ने फेसबुक पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी फिल्म एक किशोर लड़के की 25 वर्षीय महिला के प्रति दीवानगी पर आधारित है और इसका श्रीदेवी से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि यह फिल्म रिलीज नहीं हो पाई थी। वीएचपी-बजरंग दल की आपत्ति, कोर्ट ने किया खारिज जब सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ का पोस्टर 2015 में रिलीज हुआ, तो विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने नाम बदलने की मांग की। मामला कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और फिल्म अपने ओरिजिनल नाम से रिलीज हुई। धार्मिक टाइटल पर SGPC की आपत्ति, लेकिन नाम नहीं बदला सनी देओल की फिल्म ‘सिंह साब द ग्रेट’ पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) ने आपत्ति जताई थी। SGPC का कहना था कि सिंह साब एक सम्मानजनक उपाधि है, जिसे पांच तख्तों के जत्थेदारों और स्वर्ण मंदिर के ग्रंथियों को दिया जाता है, इसलिए इसे किसी फिल्म के टाइटल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि फिल्म का नाम नहीं बदला गया और विवाद के बावजूद फिल्म इसी नाम से रिलीज हुई। 'रैंबो' नाम पर विवाद प्रभुदेवा की फिल्म का नाम रैंबो राजकुमार था, लेकिन रैंबो फ्रेंचाइजी के निर्माताओं ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि रैंबो नाम कॉपीराइट है और इसे किसी अन्य फिल्म के टाइटल में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। नतीजतन, फिल्म का नाम बदलकर ‘आर... राजकुमार’ कर दिया गया। रजनीकांत की याचिका पर बदला फिल्म का नाम डायरेक्टर फैसल सैफ को ‘मैं हूं रजनीकांत’ का नाम बदलकर ‘मैं हूं रजनी’ करना पड़ा, क्योंकि रजनीकांत ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि फिल्म का टाइटल उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद टाइटल में बदलाव अक्षय कुमार की एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म का नाम पहले लक्ष्मी बॉम्ब था, लेकिन कुछ हिंदू संगठनों ने इसे माता लक्ष्मी के नाम से जोड़कर आपत्ति जताई, जिसके बाद फिल्म का नाम बदलकर लक्ष्मी कर दिया गया। कोर्ट केस के बाद रिलीज से 48 घंटे पहले बदला नाम संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गोलियों की रासलीला: राम-लीला’ बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन इसके टाइटल को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। कुछ संगठनों का मानना था कि राम-लीला नाम हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है, क्योंकि फिल्म में हिंसा और बोल्ड सीन थे। मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद रिलीज से ठीक 48 घंटे पहले फिल्म का नाम बदल दिया गया। ऐतिहासिक सम्मान बनाए रखने के लिए बदला गया टाइटल ऐतिहासिक सम्मान बनाए रखने के लिए ‘पृथ्वीराज’ फिल्म का नाम बदलकर ‘सम्राट पृथ्वीराज’ कर दिया गया। यह बदलाव इसलिए किया गया ताकि महान राजा को पूरे सम्मान के साथ प्रस्तुत किया जा सके। नाई समुदाय की नाराजगी के बाद हटा 'बार्बर' शाहरुख खान की फिल्म ‘बिल्लू बार्बर’ में नाई समुदाय ने बार्बर शब्द पर आपत्ति जताई। हजारों हेयर ड्रेसर्स ने विरोध किया, जिसके बाद फिल्म का नाम बदलकर सिर्फ ‘बिल्लू’ कर दिया गया। शाहरुख खान ने कहा कि वह किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते थे। ______________________________________________ रील टु रियल की ये स्टोरी भी पढ़ें.. फिल्म प्रोजेक्शन के पुराने दिनों की अनसुनी कहानियां:जब शोले सिर्फ चार प्रिंट से रिलीज हुई थी, बाइक पर प्रिंट लेकर दौड़ते थे थिएटर से थिएटर सिनेमाघरों के प्रोजेक्शन रूम में पहले फिल्म की भारी-भरकम रील प्रोजेक्टर पर लगाई जाती थीं, जिन्हें हर 15-20 मिनट में बदलना पड़ता था। जरा सी चूक होती, तो फिल्म बीच में रुक जाती या रील जल जाती। कभी सिनेमाघरों में रील समय पर नहीं पहुंचती, तो कभी चोरी हो जाती या खराब निकलती, जिससे ऑडियंस को काफी परेशानी होती थी। पूरी खबर पढ़ें.....

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Early Modern Millers’ Tales

Early Modern Millers’ Tales JamesHoare Thu, 04/03/2025 - 09:05 * This article was originally published here ...

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गोविंदा ने यशवर्धन से कहा फिल्मों में गाली मत देना:डेब्यू से पहले की पिता की तारीफ, कहा- उन्होंने कभी स्क्रीन पर गाली नहीं दी

यशवर्धन आहूजा जल्द ही बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रहे हैं। इसी बीच उन्होंने अपने पिता और एक्टर गोविंदा की दी हुई एडवाइस के बारे में बात की है। यशवर्धन से गोविंदा ने कहा फिल्मों में गाली मत देना यशवर्धन ने 2016 में आई फिल्म डिशूम और बागी में सपोर्टिंग रोल किया। स्टार किड होने के बावजूद उन्होंने 9 साल तक ऑडिशन दिए। हालांकि, बाद में यशवर्धन को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर साई राजेश के साथ अपना पहला प्रोजेक्ट मिला। हाल ही में यशवर्धन ने शेयर किया कि उनके पिता गोविंदा ने उन्हें फिल्मों में करियर के लिए एक एडवाइस दी थी। टाइम्स एंटरटेनमेंट से बातचीत में यशवर्धन ने बताया, मेरे पिता ने कभी भी स्क्रीन पर गाली नहीं दी। बॉलीवुड में आने से पहले उन्होंने मुझसे भी यही कहा कि फिल्मों में कभी गाली-गलौज मत करना।’ 'डांस या कॉमिक टाइमिंग में कोई मेरे पिता को हरा नहीं सकता' यशवर्धन आहूजा ने आगे कहा, मेरे पिता का मानना ​​है कि हर किसी की अपनी जर्नी होती है। मैंने उन्हें कभी भी अपने डायलॉग सीखते या याद करते नहीं देखा। लेकिन, फिर भी उनकी टाइमिंग एकदम सही है। उनकी याददाश्त बहुत अच्छी है। डांस या कॉमिक टाइमिंग में कोई भी उन्हें हरा नहीं सकता। मैंने उन्हें देखकर बहुत कुछ सीखा है।’ यशवर्धन-राशा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हाल ही में यशवर्धन और राशा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इसमें उन्होंने गोविंदा और रवीना के फेमस डांस नंबर ‘अखियों से गोली मारे’ टाइटल ट्रैक को रीक्रिएट किया था। नेटिजेंस उनकी केमिस्ट्री से हैरान थे, कई लोगों ने दोनों को लेकर एक फिल्म बनाने की बात कही थी। अब तक कई स्टार किड ने किया डेब्यू साल 2025 की शुरुआत से अब तक कई स्टार किड बॉलीवुड में डेब्यू कर चुके हैं। रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी ने अजय देवगन के भतीजे अमन देवगन के साथ बॉलीवुड में डेब्यू किया। उसके बाद सैफ अली खान के बेटे इब्राहिम अली खान ने जान्हवी कपूर की बहन खुशी कपूर के साथ नादानियां से अपने करियर की शुरुआत की।

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विक्रांत मैसी @38, कॉफी शॉप में किया काम:फिल्मों में आए तो मिले ताने, 12th फेल ने बदली किस्मत; ₹800 से करोड़ों कमाने का सफर

जीरो से कर रीस्टार्ट रीस्टार्ट..रीस्टार्ट..रीस्टार्ट..रीस्टार्ट… भले ही ये विक्रांत मैसी की फिल्म 12th Fail के एक गाने के बोल हैं, लेकिन ये लाइनें उनकी जिंदगी पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आज विक्रांत किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। फिल्म 12th Fail के बाद उन्हें बच्चा-बच्चा जानता है, लेकिन इस मुकाम को हासिल करना उनके लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। विक्रांत का बचपन गरीबी में बीता। उनके पिता की सैलरी महीने के शुरुआती 15 दिनों के भीतर ही खत्म हो जाती थी। ऐसे में विक्रांत ने महज 16 साल की उम्र में खुद डांस सीखा और सिखाना भी शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने एक कॉफी शॉप में काम भी किया, ताकि वे परिवार की मदद कर सकें। लेकिन उनके मन में हमेशा से एक्टर बनने का ख्वाब था। इसके लिए उन्होंने जी-तोड़ मेहनत भी की। शाहरुख खान की तरह विक्रांत ने भी छोटे पर्दे से अपने करियर की शुरुआत की। टीवी इंडस्ट्री में तो वे एक जाना-माना चेहरा बन गए, लेकिन बॉलीवुड में एंट्री के दौरान उन्हें काफी ताने मिले। कोई भी प्रोड्यूसर उन पर पैसे लगाने को तैयार नहीं होता था। इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और इसी का परिणाम है कि जो विक्रांत कभी 800 रुपए कमाते थे, आज उनकी नेटवर्थ 20 से 26 करोड़ रुपए है। विक्रांत मैसी के जन्मदिन पर जानिए उनके संघर्षों की कहानी.. चार धर्मों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं विक्रांत विक्रांत मैसी चार धर्मों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जॉली क्रिश्चियन हैं और मां मीना सिख परिवार से हैं। उनके बड़े भाई मोहसिन ने बहुत कम उम्र में ही इस्लाम अपना लिया था। बताया जाता है कि विक्रांत के माता-पिता की लव स्टोरी भी काफी फिल्मी है। वे दोनों एक-दूसरे को बचपन से पसंद करते थे। अलग-अलग धर्मों के होने के कारण जब परिवार ने विरोध किया, तो उन्होंने भागकर शादी की थी। जबकि उनकी पत्नी हिंदू धर्म से आती हैं। एक इंटरव्यू में विक्रांत ने बताया था कि मेरे घर में एक मंदिर है। मेरे पिता ईसाई होते हुए भी छह बार वैष्णो माता के मंदिर गए हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो कॉफी शॉप में किया काम विक्रांत मैसी के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनका बचपन गरीबी में बीता। जब पिता की सैलरी आती थी, तो महीने के पहले 15 दिन तक तो सब कुछ ठीक रहता था, लेकिन 16वें दिन के बाद यह समझ में नहीं आता था कि अब घर कैसे चलाया जाए। परिवार की मुश्किलों को देखकर विक्रांत ने अपने ग्रेजुएशन के दौरान ही डांस सीखना और सिखाना शुरू कर दिया था। सुबह उठकर सबसे पहले वे श्यामक डावर की डांस क्लास में बच्चों को डांस सिखाने जाते थे। सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने मुंबई के वर्सोवा में एक कॉफी शॉप में भी काम किया था। विरासत में मिला एक्टिंग का हुनर, कॉफी शॉप में काम करना भी एक मकसद विक्रांत के दादा रविकांत मैसी थिएटर आर्टिस्ट और फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट थे। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद से दो बार ऑल इंडिया ड्रामेटिक कॉम्पिटिशन में स्वर्ण पदक भी मिला था। उन्होंने दिलीप कुमार और देवआनंद जैसे बड़े कलाकारों के साथ नया दौर और गाइड जैसी फिल्मों में काम भी किया था। भले ही विक्रांत के खून में एक्टिंग का हुनर था, लेकिन एक्टर बनने का ख्वाब उन्होंने तब देखा, जब उनके आस-पास फिल्मों की शूटिंग हुआ करती थी। उन्होंने बचपन से ही सुनील दत्त, गुलशन ग्रोवर और जैकी श्रॉफ जैसे एक्टर्स को शूटिंग करते हुए देखा था, जिस कारण उनके मन में भी एक्टर बनने का ख्याल आया। एक इंटरव्यू में विक्रांत ने बताया भी था कि कॉफी शॉप में काम करने के दो बड़े मकसद थे। पहली घर की आर्थिक स्थिति और दूसरी उस दुकान पर फिल्म लाइन के बहुत सारे लोग आते थे। ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि यहीं से उनका फिल्मी सफर भी शुरू हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वॉशरूम के बाहर मिला था एक्टिंग में पहला ब्रेक, कमाए 24 हजार विक्रांत मैसी को 16 साल की उम्र में एक सीरियल का ऑफर मिला था। इसके लिए उन्होंने श्यामक डावर की नौकरी छोड़ दी थी, जहां 2 साल तक काम किया था, लेकिन वो टीवी शो कभी टेलीकास्ट ही नहीं हुआ। हालांकि किस्मत ने उनके लिए दूसरे दरवाजे भी खोले। एक बार वे बाथरूम की लाइन में खड़े थे, तभी वहां एक महिला ने आकर उनसे एक्टिंग के लिए पूछा और अपने ऑफिस बुलाया। विक्रांत ने ऑफर एक्सेप्ट कर लिया। ऐसे ही उन्हें टीवी शो 'धूम मचाओ धूम' मिला। इसके हर एपिसोड के लिए 6 हजार रुपए मिले। 4 एपिसोड करके एक्टर ने 24 हजार कमाए थे। इसके बाद विक्रांत धरम वीर, कुबूल है, बाबा ऐसो वर ढूंढो और बालिका वधु जैसे शो में नजर आए थे। फिल्मों के लिए विक्रांत ने छोड़ी हर महीने 35 लाख की कमाई विक्रांत मैसी हमेशा से एक्टिंग में अपना करियर बनाना चाहते थे और उनका यह सपना आखिरकार पूरा भी हुआ। उन्होंने टीवी के कई शोज में काम किया, जिससे उनकी कमाई 35 लाख रुपए हर महीने होने लगी थी, लेकिन उनके सपने बड़े थे और इसलिए उन्होंने टीवी इंडस्ट्री छोड़ दी। इतना ही नहीं, जो पैसे उन्होंने बचाए थे, वो सभी फिल्मों के ऑडिशन देने में लगा दिए। जमापूंजी हुई खत्म, तो पत्नी से ऑडिशन के लिए पैसे लेते थे विक्रांत ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी जिंदगी में एक दौर ऐसा भी आया, जब फिल्मों के ऑडिशन देने में उनकी सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई थी। उस समय उनकी गर्लफ्रेंड शीतल (जो अब उनकी पत्नी हैं) उन्हें पॉकेट मनी देती थीं। वहीं, अगर विक्रांत और शीतल की लव स्टोरी की बात करें तो एक इंटरव्यू में विक्रांत ने बताया था कि शीतल से उनकी मुलाकात मुंबई में उनके दोस्त की वजह से हुई थी। बड़ी बात यह है कि विक्रांत का एक दोस्त भी शीतल को मन ही मन चाहता था और वो चाहते था कि विक्रांत उन दोनों को मिलाने में हेल्प करें, लेकिन फिर एक-दो मुलाकातों के बाद विक्रांत को शीतल पसंद आने लगीं। तीसरी मुलाकात में शीतल को उन्होंने प्रपोज कर दिया। इसके बाद उन्होंने साल 2022 में शादी कर ली। 2024 में उनका बेटा हुआ, जिसका नाम वरदान है। 2013 में फिल्मों में डेब्यू, लेकिन नहीं मिली कोई खास पहचान 2013 में विक्रांत ने फिल्म लुटेरा से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, लेकिन क्या आपको पता है कि विक्रांत को इस फिल्म के ऑडिशन में रिजेक्ट कर दिया गया था। हालांकि जो एक्टर ये किरदार करने वाला था, उसने शूटिंग से दो हफ्ते पहले ही मना कर दिया। तब विक्रांत को इस फिल्म में कास्ट किया गया था। लुटेरा में विक्रांत लीड नहीं बल्कि साइड एक्टर के तौर पर नजर आए थे। इसमें उन्होंने 'देवदास' का किरदार निभाया था। जबकि सोनाक्षी सिन्हा और रणवीर सिंह मेन रोल में नजर आए थे। पहली फिल्म के बाद नहीं मिला काम, टीवी पर लौटे विक्रांत फिल्म लुटेरा करने के बाद भी विक्रांत मैसी के पास कोई काम नहीं था। ऐसे में उन्होंने टीवी शोज में वापसी करने का फैसला किया। उन्होंने ये है आशिकी और गुमराह: एंड ऑफ इनोसेंस जैसे शोज किए। हालांकि फिर 8 महीने बाद दोबारा उनके पास फिल्मों के ऑफर आने लगे। विक्रांत दिल धड़कने दो, ए डेथ इन द गंज और हाफ गर्लफ्रेंड जैसी फिल्मों में नजर आए, लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास पहचान नहीं मिली। उन्हें ज्यादातर साइड रोल ही ऑफर हुए थे। मिर्जापुर से किया OTT डेब्यू, लोगों के बीच छा गए विक्रांत मैसी को जब फिल्मों में कोई खास पहचान नहीं मिल रही थी, तो उसी दौरान उन्होंने ओटीटी पर अपना डेब्यू किया। साल 2018 में विक्रांत वेब सीरीज मिर्जापुर में नजर आए। इस सीरीज में उन्होंने बबलू पंडित का किरदार निभाया। हालांकि उनका यह रोल सिर्फ पहले ही सीजन तक सीमित रहा, लेकिन उन्हें अच्छी-खासी पहचान मिल गई थी, जिसके बाद लोगों चाह रहे थे कि वे इसके आने वाले सीजन में भी नजर आए। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। इसके अलावा विक्रांत ब्रोकन बट ब्यूटीफुल, क्रिमिनल जस्टिस और मेड इन हेवन जैसी वेब सीरीज में भी नजर आ चुके हैं। 2020 में दीपिका पादुकोण के साथ शेयर की स्क्रीन भले ही विक्रांत को ओटीटी से एक पहचान मिल चुकी थी, लेकिन साल 2020 में आई फिल्म छपाक में वो दीपिका पादुकोण के अपोजिट नजर आए थे। यह फिल्म भले ही फ्लॉप साबित हुई, लेकिन उन्हें लीड एक्टर के तौर पर इंडस्ट्री में पहचान जरूर मिली। लोगों ने इस फिल्म में उनके काम और एक्टिंग की काफी तारीफ की थी। टीवी एक्टर होने पर मिलते थे ताने विक्रांत ने टीवी के बाद जब बॉलीवुड में काम किया तो उन्हें कई ताने भी मिले। क्योंकि वे टीवी इंडस्ट्री से आए थे। जिस कारण वो काफी टूट भी जाते थे। फिल्म 12th फेल बनी करियर की टर्निंग पॉइंट विक्रांत ने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी किस्मत 2023 में आई फिल्म 12th Fail से बदली। यह उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई, जिसमें उन्होंने IPS मनोज कुमार शर्मा का रोल निभाया था। फिल्म में विक्रांत के अभिनय की खूब तारीफ हुई, और उन्हें कई अवॉर्ड्स से भी सम्मानित किया गया। हाल ही में उनकी फिल्म फिल्म द साबरमती रिपोर्ट रिलीज हुई है, जिसे काफी सराहा गया। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस फिल्म की तारीफ की है। हालांकि, इस फिल्म को करने के बाद उन्हें धमकियां भी मिली थीं। ब्रेक का ऐलान किया, तो चौंक गए थे फैन विक्रांत मैसी ने 2 दिसंबर 2024 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने अचानक से फिल्मों से अनिश्चितकाल के लिए ब्रेक का ऐलान किया था। उनकी पोस्ट से ऐसा लगा कि वे अब फिल्मों में नजर नहीं आएंगे। हालांकि उन्होंने 24 घंटे के भीतर इस पर सफाई दे दी थी। विक्रांत ने कहा था कि लोग मेरी बात को ठीक से समझ नहीं पाए। मैं थोड़ा थक गया हूं और कुछ दिन फैमिली के साथ बिताना चाहता हूं। पत्नी के छुए पैर तो सोशल मीडिया पर हुए थे विवाद करवा चौथ के मौके पर विक्रांत मैसी ने इंस्टाग्राम पर कई फोटोज शेयर किए थे, जिसमें वे अपनी पत्नी के पैर छूते नजर आए थे। ऐसे में विक्रांत को काफी ट्रोल किया गया था। इसके बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने इस मामले में कहा था, 'मेरे फोन में छह तस्वीरें हैं। उनमें से चार तस्वीरें ऐसी हैं, जिन पर चर्चा की जा सकती है। कुछ लोग इन तस्वीरों को पसंद करेंगे, जबकि कुछ मुझे इसके लिए गालियां देंगे। मुझे समझ नहीं आता कि क्यों? मुझे लगता है कि अगर आपको घर में शांति चाहिए तो आपको समय-समय पर अपनी पत्नी के पैर छू लेने चाहिए। लोगों ने उन तस्वीरों को वायरल कर दिया। वह मेरे घर की लक्ष्मी है और मुझे नहीं लगता कि लक्ष्मी का पैर छूना गलत है। मैं गर्व से कहता हूं कि वह मेरी जिंदगी में 10 साल पहले आई और मेरे जीवन को बेहतर बना दिया। जब से वह मेरी जिंदगी में आई है तब से मेरे साथ सब कुछ अच्छा हो रहा है। इसे बरकरार रखने के लिए मैं उसका पैर छूता रहूंगा। ----------------- बॉलीवुड की यह खबर भी पढ़िए.. कपिल शर्मा @44, कैंसर पीड़ित पिता के लिए मांगी मौत:पुलिस की नौकरी ठुकराई, फिल्म फ्लॉप होने से डिप्रेशन में गए तो सुसाइड की सोची कॉमेडी के बादशाह कपिल शर्मा आज घर-घर में लोकप्रिय हैं। लोगों के चेहरे पर हंसी और चहक लाने वाले कपिल शर्मा आज भले ही बड़े स्टार बन चुके हों, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उन्हें काम के लिए बहुत धक्के खाने पड़ते थे। पूरी खबर पढ़ें..

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‘The Crisis of Colonial Anglicanism’ by Martyn Percy review

‘The Crisis of Colonial Anglicanism’ by Martyn Percy review JamesHoare Wed, 04/02/2025 - 09:13 * This article was originally published here ...

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Indian superstar's latest film faces right-wing backlash

Mohanlal agrees to remove some scenes from L2 Empuraan after criticism from Hindu nationalist groups. from BBC News https://ift.tt/qF1pMB7 ...

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Indian superstar's latest film faces right-wing backlash

Mohanlal agrees to remove some scenes from L2 Empuraan after criticism from Hindu nationalist groups. from BBC News https://ift.tt/OjHW61z ...

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Wool Aliens of the British Empire

Wool Aliens of the British Empire JamesHoare Tue, 04/01/2025 - 09:07 * This article was originally published here ...

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'2022 में दिया था दयाबेन का ऑडिशन':एक्ट्रेस काजल पिसल ने वायरल वीडियो पर तोड़ी चुप्पी, कहा- 'तारक मेहता...' अब एक बंद चैप्टर है

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में दयाबेन के नए किरदार को लेकर इन दिनों कई कयास लगाए जा रहे हैं। हाल ही में काजल पिसल का एक पुराना ऑडिशन वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद यह चर्चा उठने लगी कि वह दिशा वकानी की जगह दयाबेन का किरदार निभाने वाली हैं। इस पर काजल पिसल ने अपनी प्रतिक्रिया दी और साफ किया कि यह वीडियो 2022 का है, जो अब दोबारा सामने आ रहा है। ऑडिशन वीडियो पर काजल पिसल ने अपनी प्रतिक्रिया दी काजल पिसल ने इस बारे में दैनिक भास्कर से बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा,'क्या हम 2022 में वापस आ गए हैं? क्योंकि यह खबर उसी समय की है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि यह खबर अब फिर से क्यों सामने आ रही है। मैंने 2022 में दयाबेन के लिए ऑडिशन दिया था। अब मैं एक शो कर रही हूं - झनक। फिलहाल दयाबेन का किरदार मेरे लिए एक बंद चैप्टर है। हालांकि, अगर ऐसा होता तो अच्छा होता, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है। यह बहुत पुरानी खबर है। मुझे नहीं समझ आ रहा है कि अचानक से इतनी चर्चा क्यों शुरू हो गई। शायद शो की पॉपुलैरिटी की वजह से लोग जानने के लिए गूगल कर रहे होंगे, लेकिन यह सब सच नहीं है।' कॉल्स और मैसेजेस का सिलसिला काजल से जब पूछा गया कि इन अफवाहों के बाद उन्हें किस तरह के कॉल्स और मैसेज मिल रहे हैं, तो उन्होंने बताया, 'मुझे बहुत सारे कॉल्स और मैसेजेस आए हैं। लोग बार-बार मुझसे इस बारे में कन्फर्म करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं शूटिंग कर रही थी और सेट से बाहर आकर देखा कि ढेर सारे कॉल्स और मैसेजेस आए थे। लेकिन मैं क्या कहूं? मुझे नहीं पता कि इस पर किस तरह रिएक्ट करूं।' क्या काजल पिसल फिर से दयाबेन बनेंगी? आखिर में काजल से यह भी पूछा गया कि अगर दोबारा मौका मिले तो क्या वह दयाबेन का किरदार निभाना चाहेंगी, तो उन्होंने कहा, 'अगर काम अच्छा हो, मौका सही मिले तो क्यों नहीं? काम के लिए कोई भी मना नहीं करता। हम हमेशा अच्छा काम करना चाहते हैं, नए किरदार एक्सप्लोर करना चाहते हैं। लेकिन फिलहाल मैं झनक कर रही हूं और उसमें खुश हूं।' असित मोदी बोले- दयाबेन के लिए ऑडिशन जारी बता दें, कुछ दिन पहले, हमने शो के प्रोड्यूसर असित मोदी से भी इस बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि पिछले 6 महीनों से दयाबेन के लिए ऑडिशन हो रहे हैं, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। असित मोदी ने कहा, 'ऑडिशन का सिलसिला पिछले छह महीनों से चल रहा है, लेकिन खोज अभी भी जारी है। अगर सब कुछ सही रहा तो ऑडियंस को एक-दो महीने में नई दयाबेन देखने को मिल सकती हैं।' दिशा वकानी ने शो क्यों छोड़ा? एक्ट्रेस दिशा वकानी तारक मेहता का उल्टा चश्मा में दयाबेन के किरदार से पॉपुलर हुईं। 2018 में वह मैटरनिटी लीव पर गई थीं और तब से उन्होंने शो में वापसी नहीं की। बेटी के जन्म के बाद भी उनकी वापसी को लेकर कई खबरें आईं, लेकिन अब तक कुछ फाइनल नहीं हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिशा वकानी ने अपने काम के घंटों और फीस को लेकर कुछ शर्तें रखी थीं, जिन पर बात नहीं बन पाई।

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जनता ने मुझे सड़क से उठाकर एक्टर बनाया:नेपोटिज्म पर बोले अमित साध- फिल्म न चलने पर ऑडियंस को दोष नहीं दे सकते

अमित साध इंडस्ट्री में जाना-माना नाम हैं। एक्टर अपने इंटेंस और एक्शन रोल के लिए जाने जाते हैं। अमित आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कई जतन किए हैं। बहुत सारी चुनौतियों को झेला है। एक्टर का मानना है कि इंडस्ट्री हो या समाज इंसानियत पहले होनी चाहिए। उनकी कोशिश है कि वो अपने हिस्से की इंसानियत बराबर से निभा पाए। सवाल- अमित आप सुशांत सिंह राजपूत के साथ अच्छा बॉन्ड शेयर करते थे। क्या आउटसाइडर एक्टर को जनता सपोर्ट नहीं करती है? जवाब- मैं इस बारे में बहुत सोचता हूं। जनता ने ऑलरेडी सबको बहुत कुछ दे रखा है। तो हर चीज जनता पर नहीं डाल सकते। अगर आपके घर में आग लगी हो तो आग बुझाने की ड्यूटी सबसे पहले घरवालों की होती है। न कि पड़ोसी की। वैसे ही अगर कोई एक्टर परेशान है, अकेला है तो पहला रोल इंडस्ट्री का होना चाहिए। इंडस्ट्री एक फैमिली है। अगर अपने ही अपने काम नहीं आए तो हम कौन होते हैं ऑडियंस को दोष देने वाले। मुझे लगता है कि हमें एक-दूसरे का ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत है। एक-दूसरे के प्रति इतना गुस्सा, रंजिश या उसे इंसान को रिजेक्ट करना देना नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि इंडस्ट्री में अच्छे लोग नहीं है। लेकिन फिल्म की दुनिया मुश्किल लाइन है। लोग अपना घर छोड़कर आते हैं। ऐसे में इंडस्ट्री के लोगों को ही एक-दूसरे का ख्याल रखना चाहिए। सवाल- सुशांत ने या आपने बहुत अच्छी फिल्म बनाई है लेकिन ऑडियंस नहीं देखती। तो क्या जनता दोषी नहीं है? जवाब- ऐसे में मेरा मानना है कि अगर कोई फिल्म नहीं चली तो इसका दोष हम ऑडियंस पर नहीं डाल सकते। ऑडियंस बहुत बड़ा फैक्टर है लेकिन कई बार गणित सही नहीं बैठता है। पिक्चर अच्छी है या गंदी ये तय करने वाले भी हम कोई नहीं होते हैं। मान लीजिए, कोई फिल्म बनी, उसका एक वक्त था, उस फिल्म की किस्मत थी, उसमें वो फील था। दुनिया ने देखी और वो चल गई। अगली नहीं चली तो आगे बढ़ना चाहिए। कुछ और ट्राई करना चाहिए। सवाल- आपको नहीं लगता है कि ऑडियंस स्टार किड्स के बारे में जानने के लिए उत्सुक होती है? पैपराजी भी उन्हें ही फोकस करते हैं? जवाब- बिल्कुल नहीं। कोई ऑडियंस स्टार किड को जानने में उत्सुक नहीं होती। उनकी मार्केटिंग टीम आपको यकीन दिलाती है। जनता बहुत स्मार्ट है। जनता ये तय करती है कि उन्हें कौन सी फिल्म सिनेमा हॉल में देखनी है, कौन सी ओटीटी में और कौन सी पिक्चर नहीं देखनी है। जनता कंज्यूमर है और कंज्यूमर भगवान होता है। ऑडियंस नहीं होती तो इंडस्ट्री नहीं होती। ऑडियंस नहीं होती तो मेरे जैसा इंसान एक्टर नहीं बनता। मैं तो ऑडियंस से शिकायत ही नहीं कर सकता। उन्होंने तो मुझे सड़क से उठाकर यहां बिठा दिया है। सवाल- नेपोटिज्म पर आपकी क्या राय है? जवाब- मुझे तो लगता है कि हम सब नेपोटिज्म हैं। मेरी नजर में नेपोटिज्म कोई चीज आपको अपने मां-बाप से, कुदरत से, अपने आस-पास के माहौल से मिलना है। कुछ चीजों में आप आगे होते हैं। कुछ चीजों में कोई दूसरा बेहतर होता है। अगर मुझे कोई बोले 20 फीट से छलांग लगाने, मैं दो मिनट मैं कर दूंगा। अगर मुझे गन दोगे तो मैं सोल्जर बन जाऊंगा क्योंकि मैं हमेशा एक सोल्जर की तरह ट्रेन्ड हुआ हूं। ये मेरी नेपोटिज्म है। मार्केटिंग ने इस टर्म को गढ़ दिया है। सबको अपने हिस्से की खुशियां और स्ट्रगल मिलती है। चाहे आप सचिन तेंदुलकर के बेटे क्यों ना हो? सवाल- इस समय आपका एम्बिशन क्या है? ड्रीम रोल क्या है? जवाब- मेरे अंदर एम्बिशन नहीं काम को लेकर भूख है। ड्रीम रोल की बात करूं तो मुझे जो भी रोल मिलता है, उसमें अपना समर्पण देता हूं। उसे ही अपना ड्रीम रोल बना देता हूं। हालांकि, मैं फिल्मों में लॉयर की भूमिका निभाना चाहता हूं। मैं सुपरहीरो वाली फिल्म करना चाहता हूं। मैं कॉमेडी फिल्में करना चाहता हूं। ऑडियंस को एंटरटेनमेंट के साथ खुशी और रोमांच देना चाहता हूं। सवाल- फैंस का कोई मैसेज या तारीफ जो आपके दिल के करीब है और आप बताना चाहते हो? जवाब- मेरे पास दो ऐसे किस्से हैं। ‘काई पो चे’ के वक्त मेरी एक फैंस मुझे मैसेज करके लड़ती थी कि आप इंटरव्यू में बोलते क्यों नहीं हैं? मैं भी उससे लड़ता और बताता था कि दूसरे एक्टर मुझे बोलने ही नहीं देते। तो वो कहती कि जब आपसे सवाल करते हैं, तब तो जवाब देना चाहिए। मैंने उससे बोला कि शायद मुझे बात करने नहीं आती, मैं कोशिश करूंगा। फिल्म ‘सुल्तान’ और ‘ब्रीद‘ के बाद मैं थोड़ा बोलने लगा। इंटरव्यू में अपनी सोच बताने लगा। फिर उसका मैसेज आया कि अब मैं असली शेर को देख रही हूं। मेरी दूसरी फैन अंजलि जो अब इसे दुनिया में नहीं हैं। लेकिन वो मेरे लिए बहुत खास थीं। उनसे जब मैसेज में बात होती थी तो कुछ मैसेज मां का रूप होता, कुछ में फैन का और कुछ में बहन होती थीं। मैं अंजलि को मिस करता हूं। सवाल- अमित अपने आने वाली फिल्मों के बारे में बताइए? जवाब- ‘पुणे हाइवे’ करके मेरी एक फिल्म आ रही है। ये राहुल दा कुन्हा की प्ले पर आधारित मर्डर मिस्ट्री है। मेरे लिए ये फिल्म ‘काई पो चे’ है। इसमें भी तीन दोस्त हैं। इस पूरी फिल्म की वाइब भी ‘काई पो छे’ वाली ही है। तीन दोस्तों की कहानी है। फिल्म में ड्राई ह्यूमर है। दोस्ती और दुविधा साथ-साथ चलती है। जल्द ही इस फिल्म का प्रमोशन शुरू होगा। मेरी एक और फिल्म आ रही है ‘प्रताप’। इसमें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की कहानी है। मैं अपनी दोनों फिल्मों को लेकर बहुत उत्साहित हूं। साल 2018 में स्क्रीन पर मेरी फिल्म गोल्ड आई थी। उसके बाद अब जाकर ये दो फिल्म आ रही हैं। मेरे लिए बहुत इमोशनल पल है। उम्मीद करता हूं कि मेरी दोनों ही फिल्में चले। ऑडियंस ने अब तक जैसे प्यार दिया है, वैसा ही प्यार इन फिल्मों को मिले। सवाल- आखिर में आपके लिए सफलता क्या है? जवाब- जीवन में जो चल रहा है, वो चलते रहे। जिंदगी में जो होगा देख लेंगे। सिर झुकाना है, नजरें नहीं। मेरे लिए सफलता के मायने यही हैं।

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