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» » » 'द भूतनी' की स्टारकास्ट ने खोले फिल्म के राज:मौनी रॉय बोलीं- संजय दत्त के साथ काम करना सपना पूरा होने जैसा

संजय दत्त, मौनी रॉय, सनी सिंह स्टारर फिल्म ‘द भूतनी’ एक मई को थियेटर में रिलीज हो रही है। ये एक हॉरर कॉमेडी है, जिसे लिखा और डायरेक्ट सिद्धांत सचदेव ने किया है। फिल्म में ‘पंचायत’ फेम आसिफ खान, पलक तिवारी भी दिखेंगी। साथ ही इस फिल्म से एक नए एक्टर निक अपना बॉलीवुड डेब्यू कर रहे हैं। संजय दत्त फिल्म में एक्ट करने के अलावा इसके प्रोड्यूसर भी हैं। दैनिक भास्कर के साथ ‘द भूतनी’ के स्टार कास्ट ने खास बातचीत की है। पढ़िए उनका इंटरव्यू… सवाल- मौनी, 'द भूतनी' फिल्म की जर्नी कैसी रही। इसके बारे में बताएं। इस फिल्म में हमारे डायरेक्टर सिद्धांत सचदेव ने एक अलौलिक और अद्भुत दुनिया बनाई है। सेटअप कॉलेज का है, जिसमें कुछ लोगों की कहानी है। कॉलेज के कुछ स्टूडेंट्स हैं, जो चाहते हैं कि उन्हें प्यार मिले। खासकर के शांतनु का जो किरदार है, उसे प्यार की तलाश है। उस कहानी में आगे चलकर क्या होता है। उसे प्यार मिलता है और कैसा प्यार मिलता है। ये कहानी है। मैं और पलक क्या कर रहे हैं, उसके लिए आपको फिल्म जाकर देखना पड़ेगा। सवाल- सनी, संजय दत्त इस फिल्म में एक्टिंग के अलावा इसे प्रोड्यूस भी कर रहे हैं। जब आपको पता चला तो क्या रिएक्शन था? इससे पहले भी 2018 के आसपास हमने एक मीटिंग की थी। वो भी एक कॉमेडी फिल्म थी। हम चाह रहे थे कि वो फिल्म शुरू हो लेकिन लॉकडाउन लग गया। तब से आज तक मेरा और संजय सर का एक अनकहा बॉन्ड है। इस फिल्म के जो डायरेक्टर हैं सिद्धांत सचदेव उनके साथ मेरी दोस्ती है। इस फिल्म में मेरा कनेक्शन काफी लोगों के साथ है। जब मैं इसकी नेरेशन सुन रहा था, मैं तबसे संजू सर को लेकर उत्साहित हूं। मुझे लगता है कि हम जब पर्दे पर साथ आएंगे तो कुछ अलग होगा। बचपन से उनके साथ काम करने की चाहत थी, वो इतने अच्छे तरीके से हुआ है। जिस तरह से कहानी लिखी गई है, सबके किरदार, संजू सर बाबा बने हैं वो बहुत ही खूबसूरत है। सेट पर संजू सर अगर चुप भी बैठे हैं, तो लगता है हम उनसे कुछ सीख रहे हैं। सवाल- संजय दत्त के साथ कोई यादगार मोमेंट? शूटिंग के दौरान मैंने और सर तय कि हम लोग फिल्म का पोस्टर इंस्टाग्राम पर डालेंगे। हम दोनों ने इसके लिए शाम छह बजे का वक्त तय किया था। छह बजते ही संजू सर मेरे पास आए और पंजाबी में कहा कि सनी फोटो नहीं डालनी? सर के इस जेस्चर से मैं बहुत खुश हो गया। मेरे पास उनके इतने किस्से हैं, जो कभी खत्म नहीं होंगे। पर्सनली भी उन्होंने मुझे काफी मदद की है। मेरी मां को गुजरे दो-ढाई साल हो गए हैं। उस वक्त संजू सर ने मुझे अपने डॉक्टर से मिलवाया। उन्होंने मां का ट्रीटमेंट किया। मां के गुजरने के बाद हर कुछ दिन बाद वो चेक करते थे कि मैं ठीक हूं या नहीं। मुझे किसी चीज की जरूरत तो नहीं है। मैं इस चीज को कभी नहीं भूल पाऊंगा। सवाल- पलक, आप भूत-प्रेत में यकीन रखती हैं? नहीं, मेरा भूत-प्रेत में कोई यकीन नहीं है। हां, मेरी नानी ने मुझे हमेशा भगवान में विश्वास करना सिखाया है। मेरी फैमिली बहुत ज्यादा पूजा-पाठ करने वाली है। मेरी नानी हर सुबह पांच बजे उठकर पूजा-पाठ करती हैं। उनकी वजह से हम सब में स्प्रिचुअलिटी ज्यादा है। प्रेत का पता नहीं, भूत होते होंगे और अच्छे ही होते होंगे। मुझे नहीं लगता कि बुरी आत्माएं होती हैं। एक एनर्जी होती है, जो याद की तरह पीछे रह जाती है। जैसा कि हमारे फिल्म में दिखाया गया है। भूत कभी-कभी एक एहसास भी होते हैं। सवाल- आसिफ आप आपने किरदार के बारे में बताएं। फिल्म में मेरा लुक तो आपने ट्रेलर में देख ही लिया है। मेरे किरदार का नाम नासिर है। नासिर अपने तीन-चार दोस्तों के साथ कॉलेज में पढ़ता है। वहां उनकी लाइफ में दो-चार और नए किरदारों की एंट्री होती है, जिसके लिए वे तैयार नहीं होते हैं। मेरा किरदार नासिर यूपी के एक बहुत छोटे शहर से आता है। उसे उर्दू बोलने और शायरी लिखने का शौक होता है। वो इतना सीधा है कि अगर जमाना 40 की स्पीड से चल रहा है तो वो 20 की स्पीड से चलता है। कॉलेज में जो उसके दोस्त हैं, वो सब भी सीधे हैं। सवाल- निक, आप इस फिल्म से अपना डेब्यू कर रहे हैं। इस फिल्म से कैसे जुड़े? जी, मैं सिद्धांत सर से मिला था। उन्होंने मुझे कहानी नैरेट करने से पहले कहा कि ये तू ही है। जब मैंने साहिल के किरदार का नेरेशन सुना, तब मुझे भी लगा कि मैं ही हूं। फिल्म में मेरा एक्सपीरियंस आसिफ से हटकर है। आसिफ फिल्म में किरदार निभा रहा है। मैं तो असल में यही हूं। मुझे ज्यादा तैयारी करनी नहीं पड़ी। मैं मुंबई से हूं, साहिल का किरदार भी मुंबई से होता है। भाषा की भी दिक्कत नहीं हुई। साहिल का किरदार लाउड है, मैं भी असल जिंदगी में लाउड हूं। मैं खुद को लकी मानता हूं कि पहली फिल्म में मुझे ऐसा रोल मिला, जिसके लिए बहुत तैयारी नहीं करनी पड़ी। साथ ही पहली ही फिल्म में इतने सारे अच्छे एक्टर के साथ काम करने का मौका मिला, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। सवाल- मौनी, फिल्म में आप कुछ ढूंढने की कोशिश कर रही हैं। असल जीवन में क्या हासिल करना चाहती हैं? आपने बढ़िया सवाल पूछा है। असल जिंदगी में मैं पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस चाहती हूं। पूरी तरह से मेंटल पीस हासिल करना चाहती हूं। मैं पिछले साढ़े तीन साल से भगवद गीता पढ़ रही हूं।उसमें बताया गया है कि सेवा सबसे बड़ा धर्म होता है। मैं लोगों की हेल्प करना चाहती हूं। अभी जितना करती हूं वो काफी नहीं है। जानवरों के लिए कुछ करना चाहती हूं। लाइफ में ऐसी कई ख्वाहिशें हैं। मेरे एम्बिशन बहुत हाई नहीं हैं। सवाल- संजय दत्त के साथ पहला सीन क्या था? पहले सीन में उनसे ज्यादा बातचीत नहीं हुई। मैंने उन्हें सिर्फ हाय-हैलो नमस्ते बोला। पहला सीन ऐसा था कि मैं शूट करती हूं और वो दूर से खड़े होकर देखते हैं। आप जब फिल्म देखेंगे तो समझ आएगा। मेरा मेन सीन संजय सर के साथ हार्नेस पर था। मैं हवा में उड़कर उनसे मिली हूं। आप जो पोस्टर में देख रहे हैं कि मैं हवा में उड़कर उनके सीन पर पैर रखा है। ये सीन संजय सर के साथ शूट किए गए पहले कुछ चुनिंदा सीन्स में से एक है। ये करते वक्त मुझे डर और अजीब लग रहा था कि मैं उन पर कैसे पैर रख सकती हूं। मैं बार-बार उन्हें सॉरी सर बोल रही थी। लेकिन वो काफी अप्रोचेबल हैं। जितना बड़ा उनका ओहदा है, वो उतने ही ज्यादा उदार हैं। वो आपसे बहुत प्यार से मिलते हैं। मैं चाहती थी कि उनके साथ मेरे थोड़े और सीन्स हों लेकिन उनके साथ काम करके एक सपना पूरा हुआ है। सवाल- ऐसी कोई हॉरर फिल्म है, जिसे देखकर आप सबको डरा लगा था? सनी- हां, मैं और मेरे दोस्त बचपन में फन के लिए हॉरर फिल्म देखते थे। हॉरर फिल्म हम सब सिर झुका कर देखते थे। जब भूत स्क्रीन पर आता, तब हम अपना सिर नीचे कर लेते और जैसे ही चला जाता फिल्म देखने लगते। मैंने 'ईविल डेड' देखी थी, मुझे वो डरावनी लगी थी। 'गुमनाम है कोई' से भी डर लगता था। लेकिन मैं मानता हूं कि हॉरर कॉमेडी का अपना चार्म है। ऐसी फिल्मों से डर भी लगता है और जब कॉमेडी आती है, तब हम थोड़ा रिलैक्स हो जाते हैं। आसिफ- भूत का डर तब तक ही होता है, जब तक उसे आप दिखाओ ना। जैसे ही पर्दे पर भूत दिखाया जाता, मेरा डर खत्म हो जाता है। फिल्मों में काम करने के बाद मेरे लिए हॉरर फिल्म का मजा खराब हो गया है। अब मैं जब पर्दे पर भूत देखता हूं तो मेरे दिमाग में चलता है कि इसे शूट करने के लिए इसके सामने डीओपी होगा। फिर मेरा मजा खराब हो जाता है। मौनी- मुझे 'कंज्यूरिंग' से काफी डर लगा था। हिंदी फिल्म की बात करें तो 'कौन' बहुत डरावनी लगी थी। उर्मिला मैम ने अपनी परफॉर्मेंस से उसमें जान डाल दी थी। मैं आसिफ की बात से भी सहमत हूं कि जब तक भूत ना दिखे, डर बना रहता है। सवाल-पलक आपको जीवन में क्या हासिल करना है? मुझे बस इतना काम करना है कि मैं अपने परिवार को उन्नति और सुख दे पाऊं। मैं अपने काम से अपनी मां को, अपने नाना-नानी और अपने भाई को स्थिर जिंदगी देना चाहती हूं। उन्हें कभी किसी चीज की जरूरत ना हो। जैसे मेरी मां ने मुझे अब तक रखा है। मैं अपनी भाई को वैसी ही परवरिश और लग्जरी देना चाहती हूं, जैसी मेरी हुई है। सवाल- आसिफ, आपने संजय दत्त की कौन सी फिल्म सबसे पहली देखी थी? मैंने सर की पहली फिल्म 'दाग द फायर' वीसीआर पर देखी थी। हॉल मैं तो उनकी कितनी फिल्में देखी है, याद भी नहीं। मैं राजस्थान के चितौड़ जिले के एक बहुत छोटे से शहर आता हूं। वहां पर ऑटो में एक तरफ सलमान सर की और एक तरफ संजू सर की फोटो लगी होती है। जिम में भी दोनों की फोटो लगी होती है। किसी भी बनियान की कंपनी हो, उसे पर फोटो संजू सर या सलमान सर की होती है। आपको छोटे शहरों में इन दोनों के लिए बहुत प्यार-मोहब्बत मिलेगी। जब से वहां यार-दोस्तों को पता चला है कि मैं उनके साथ काम कर रहा हूं, वो सब अभी से पागल हैं। वो इंतजार कर रहे हैं कि फिल्म कब आएगी। सनी- मैं एक बात कहना चाहूंगा...90 में सलमान और संजय दत्त जैसे जो हीरो थे, उनका नेचुरल स्टाइल था। उन्होंने कुछ क्रिएट नहीं करना पड़ता था। वो इतना ज्यादा नेचुरल है कि उन दोनों के गानों पर डांस कैसे करना है, हमें पता होता है। इन दोनों का छोटे शहरों में ऐसा क्रेज है कि लोग पूरी लाइफ इनके जैसे बनकर रहते हैं। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।

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