मुंबई में जन्मी और पली-बढ़ी अभिनेत्री रूपल पटेल ने एनएसडी से निकलने के बाद श्याम बेनेगल की फिल्मों से करियर शुरू किया और सादगी, ईमानदारी व अनुशासन को हमेशा अपना बल माना। जॉइंट फैमिली की परवरिश से मिली संवेदनशीलता के चलते उन्होंने बेटे की परवरिश के लिए अभिनय से 10 साल का ब्रेक लिया, पर किस्मत ने उन्हें दोबारा चमकाया — जब एक पुराने स्पॉट बॉय का कॉल उनके करियर की नई शुरुआत बन गया। ‘साथ निभाना साथिया’ में कोकिलाबेन का रोल उन्हें घर-घर में प्रसिद्ध कर गया। एक बार एक अंधे प्रशंसक ने केवल उनकी आवाज से उन्हें पहचाना, जिससे रूपल भावुक हो उठीं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्वच्छ भारत अभियान के लिए मिला सम्मान उन्हें गर्व और जिम्मेदारी दोनों का एहसास दिलाता है। आज की सक्सेस स्टोरी में रूपल पटेल की जीवन यात्रा से जुड़े कुछ अनसुने पहलुओं के बारे में जानिए अभिनय मेरी ‘सात्विक खुशी’, मुंबई मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि रूपल पटेल कहती हैं, "अभिनय मेरी सात्विक खुशी है — दिखावे से परे एक सच्ची अनुभूति।” परिवार में कोई कलाकार न होते हुए भी अभिनय का बीज उनमें बचपन से ही अंकुरित हुआ। कहानी सुनाने की कक्षाओं और संस्कृत-हिंदी के अध्ययन ने उनकी अभिव्यक्ति को निखारा। रूपल अभिनय को सत्य, सरलता और ईमानदारी का साधन मानती हैं — जहां व्यक्ति अहं से मुक्त होकर किरदार जीता है। संयुक्त परिवार में पली-बढ़ीं रूपल बताती हैं कि 15-20 लोगों के साथ रहकर साझा जीवन ने उन्हें अनुशासन, आदर और संतोष सिखाया। बचपन में राजश्री फिल्मों और धार्मिक कथाओं से उन्होंने पारिवारिक मूल्यों की अहमियत जानी। रूपल कहती हैं — “मुंबई ही मेरी जन्मभूमि और कर्मभूमि है।” पिता की सीख ने बदल दी रूपल पटेल की जिंदगी रूपल पटेल कहती हैं— पिता ने सिखाया था, “निर्णय लो और पीछे मत देखो।” यही बना उनके जीवन का सिद्धांत। अभिनय को पेशा बनाने की ठानी तो पिता की सलाह पर NSD में दाखिला लिया और पहले ही प्रयास में सफलता मिली। दिल्ली का NSD उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट रहा, जहां मुंबई के सुरक्षित घेरों से निकल उन्होंने संघर्ष, अनुशासन और आत्मनिर्भरता सीखी। उनके मुताबिक अभिनय केवल कला नहीं, एक साधना है। जिसमें ईमानदारी और आस्था ही असली पूंजी है। श्याम बेनेगल के प्रोत्साहन से मिली पहचान एनएसडी से निकलने के बाद रूपल पटेल ने श्याम बेनेगल को फोन किया। वे करती हैं कि उस समय उनका आत्मविश्वास और सरलता ही उनकी पहचान थी। श्याम बेनेगल ने उनसे फोटो मांगी तो उन्होंने ईमानदारी से कहा कि उनके पास सिर्फ एनएसडी में खिंचाई हुई एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर है। बेनेगल जी के प्रोत्साहन से उन्हें काम मिला और वहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ। ‘अंतरनाद’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने ओम पुरी, शबाना आजमी और कुलभूषण खरबंदा जैसे कलाकारों से बहुत कुछ सीखा। एनएसडी में उनके सीनियर राधा कृष्ण दत्त रहे, जिनसे नजदीकियां बढ़ीं और बाद में वही उनके पति बने। रूपल आज भी मानती हैं कि सादगी और सीखने की भावना ही उनका सबसे बड़ा बल है। एनएसडी की पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ प्यार, फिर एक छोटे घर से शुरू हुआ था वैवाहिक सफर एनएसडी में दाखिला लेते वक्त रूपल पटेल को एक फॉर्म में ‘लोकल गार्जियन’ का नाम भरना था। वह मदद के लिए स्टूडेंट यूनियन लीडर आर. के. दत्त(राधा कृष्ण दत्त) के पास गईं। दत्त ने अपने पिता से रूपल को मिलवाया, जिन्होंने कहा – “आई विल बी योर लोकल गार्जियन।” वहीं से दोनों की पहचान शुरू हुई। उस दौर में मोबाइल नहीं था, पोस्टकार्ड के जरिए संवाद होता था और हर छोटी जरूरत पर रूपल, राधा कृष्ण दत्त से मदद लेतीं। वे नाटक के जूनियर कलाकारों में हिस्सा लेतीं – "गोल खोपड़ी नुकीली खोपड़ी" जैसे प्ले में गांव वाले या भीड़ का किरदार निभातीं। एक साल बाद राधा कृष्ण दत्त ने गंभीरता से कहा – “हम एक ही फील्ड के हैं, तो लाइफ पार्टनर बन सकते हैं।” रूपल को पहले तुरंत बात समझ नहीं आई, पर बाद में उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। दोनों परिवार मिले और तय हुआ कि दोनों अपनी पढ़ाई पूरी करें, फिर शादी करेंगे। एनएसडी के बाद राधा कृष्ण दत्त को “टीपू सुल्तान” सीरियल मिला और उन्होंने पहली कमाई से रूपल के लिए एक छोटा घर लिया। वहीं से उनका वैवाहिक सफर शुरू हुआ—एक वन रूम किचन से, पर प्रेम और सम्मान से भरा हुआ। मां बनने की जिम्मेदारी निभाने के लिए दस साल का ब्रेक लिया रूपल कहती हैं- मैं जॉइंट फैमिली से हूं, जहां परिवार को सबसे पहले रखा जाता है। मैंने अपनी मम्मी, दादी और काकी को देखा कि कैसे वे घर और रिश्तों को संभालती थीं। मुझे हमेशा लगा कि अगर परिवार में एक व्यक्ति पहले से काम कर रहा है और सब ठीक चल रहा है, तो बच्चे को समय देना भी उतना ही जरूरी है। मां बनना जिम्मेदारी है। बच्चे को संस्कार और प्यार देना माता-पिता का कर्तव्य है। इसलिए मैंने 10 साल का ब्रेक लिया ताकि बेटे को पूरा समय दे सकूं। आज भले वह अमेरिका में है, लेकिन हमारी बॉन्डिंग बहुत गहरी है। मुझे लगता है मां बनने से इंसान और संवेदनशील हो जाता है, जो आगे चलकर प्रोफेशन में भी मदद करता है। 10 साल के बाद वापसी/पुराने स्पॉट बॉय ने दी नई जिंदगी का रोल रूपल ने 10 साल का ब्रेक लेने के बाद जब दोबारा काम शुरू करने का निर्णय लिया, तभी एक अप्रत्याशित कॉल आया — एक पुराने स्पॉट बॉय का, जिसे वह 1997 में सेट पर हमेशा हौसला देती थीं। वही स्पॉट बॉय अब एक प्रोडक्शन हेड बन चुका था और उसने उन्हें नए शो के लिए बुलाया। उस शो का दो ढाई महीने का रोल दो साल तक चला। रूपल ने इसे ईश्वर का आशीर्वाद और अपनी सकारात्मक सोच का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “अच्छाई हमेशा लौटकर आती है।” आज वे सोशल मीडिया से दूर हैं, फिर भी दर्शक उन्हें याद रखते हैं और उनके पुराने दृश्यों को पसंद करते हैं। वह मानती हैं कि यह निस्वार्थ दर्शक-प्रेम और प्रभु की कृपा का प्रमाण है। दर्शकों के प्यार ने कोकिलाबेन को बना दिया मील का पत्थर ‘साथ निभाना साथिया’ के बारे में बात करते हुए रूपल कहती हैं- मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ये इतना बड़ा और मजबूत रोल बन जाएगा। शुरुआत में टीम को भी नहीं पता था कि कहानी किस दिशा में जाएगी, क्योंकि डेली सोप में सब कुछ टीआरपी और दर्शकों के प्यार पर निर्भर करता है। उस वक्त 7 बजे का टाइम स्लॉट था, इसलिए कई लोग सोचते थे शो ज्यादा नहीं चलेगा, लेकिन मैंने बस सोचा—रोल अच्छा है, तो करना चाहिए। शुरुआत में बस टाइम स्लॉट दे दिया गया था, किसी को उम्मीद नहीं थी क्या होगा। पर दर्शकों के प्यार से शो ने कमाल किया। ‘साथिया’ के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। इस सफर में स्टार टीम, रश्मि मैम, पवन सर, को-आर्टिस्ट और टेक्नीशियनों—सबका बड़ा योगदान रहा। कोई भी बड़ी सफलता अकेले नहीं मिलती। आखिरी कतार से आगे की पंक्ति तक, मेहनत ने दिलाया सम्मान एक बार उनके शो "साथ निभाना साथिया" की टीम को स्टार परिवार अवॉर्ड्स में आखिरी कतार में बैठाया गया था। उस समय उन्हें दुख हुआ, लेकिन उन्होंने खुद को साबित करने का फैसला किया। अगले साल उनके शो ने इतनी सफलता पाई कि वे सबसे आगे बैठे। उनका मानना है कि ईमानदार मेहनत करने वालों को समय आने पर सम्मान जरूर मिलता है। 'रसोड़े में कौन था?’ कोविड में खूब वायरल हुआ ‘साथ निभाना साथिया’ में रूपल पटेल का किरदार कोकिलाबेन खूब लोकप्रिय हुआ। इसके डायलॉग 'रसोड़े में कौन था’ के खूब मीम्स बने। उनका डायलॉग 'रसोड़े में कौन था?' कोविड के समय यशराज मुखाटे के म्यूजिक रीमिक्स के बाद वायरल हो गया। रूपल ने बताया कि उन्हें इसका पता उनकी दोस्त चारुल मलिक से चला, क्योंकि वो सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहतीं। जब उन्होंने यशराज को फोन कर धन्यवाद दिया तो वो पहले डर गए कि शायद वह नाराज होंगी। लेकिन रूपल ने कहा, “मैं एक कलाकार हूं, अगर मेरी वजह से लोग मुस्कुराते हैं तो यही मेरे लिए सबसे बड़ा इनाम है।” फॉलोअर्स से नहीं, दर्शकों के प्यार से मिलती है असली सफलता रूपल पटेल कहती हैं कि आजकल लोग यह देखते हैं कि किसके कितने फॉलोअर्स हैं, लेकिन उनके पास सोशल मीडिया प्रेजेंस न होने के बावजूद दर्शकों का स्नेह और दीवानगी मिलना उनके लिए प्रभु का आशीर्वाद है। वह अपने दर्शकों, मीडिया और करीबी मित्र चारुल मलिक की आभारी हैं जो उन्हें समय-समय पर अपडेट देती रहती हैं। रूपल बताती हैं कि उनके अंदर लालच नहीं है। उनका मानना है कि "जिसका काम उसी को साजे।" अभिनय उनका कार्य है, इसलिए वह सिर्फ अपने किरदार पर ध्यान देती हैं, बाकी समय परिवार के साथ बिताती हैं। चारुल मलिक उन्हें हमेशा खुद के लिए समय निकालने की सलाह देती हैं। वह अपने जीवन में पेशेवर और निजी पक्ष के बीच संतुलन बनाए रखने में विश्वास रखती हैं। रूपल स्वीकार करती हैं कि कई बार लोगों ने उनसे पूछा कि वह सोशल मीडिया पर क्यों नहीं हैं या उनके कितने फॉलोअर्स हैं, लेकिन उन्हें फर्क नहीं पड़ता। वह कहती हैं, "अगर फॉलोअर्स ही सब कुछ होते तो शो क्यों बंद हो जाते?" उनके लिए असली सफलता है चरित्र को ईमानदारी, मेहनत और लगन से निभाना और दर्शकों के दिल में जगह बनाना। तैयारी ही बनाती है कलाकार को यादगार टीवी इंडस्ट्री में आजकल स्क्रिप्ट पर निर्भरता बढ़ गई है, लेकिन कुछ कलाकार अपने किरदार में अपना अनुभव और सोच भी जोड़ते हैं। जब रूपल से सवाल किया गया कि उनके निभाए किरदार इतने सालों बाद भी दर्शकों को क्यों याद रहते हैं, तो उन्होंने कहा- ‘’मैं अपने को-आर्टिस्ट्स का धन्यवाद करती हूं क्योंकि जब मैं इम्प्रोवाइज करती थी, उन्होंने हमेशा साथ दिया। हम रिहर्सल्स करते थे, पर अब रिहर्सल्स कम और प्रॉम्प्टिंग ज्यादा हो गई है। अब लोग मानते हैं कि बस शो चल गया तो स्टार बन गए, लेकिन असली मेहनत तो तैयारी में होती है।” गोपी बहू के बदलने पर टूट गई थीं रूपल रूपल इस बात की भी चर्चा करती हैं कि जब उनकी को-स्टार गोपी बहू को बदल दिया गया था। तब वो समय उनके लिए काफी मुश्किल था। वो कहती हैं- पहले जिया मानेक के साथ अच्छा कनेक्शन बन गया था, तो अचानक देवोलीना भट्टाचार्जी को उसी रोल में देखना आसान नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे हमने साथ काम किया और तालमेल बिठा लिया। लेकिन जब देवोलीना आईं, तो शुरू में उनके साथ प्रोमो शूट करना मेरे लिए मुश्किल था, क्योंकि जिया के साथ गहरा जुड़ाव था। शो के डायरेक्टर पवन सर ने मेरे इमोशंस समझे और समय दिया। बाद में देवोलीना ने भी उस किरदार को बहुत मेहनत से निभाया, क्योंकि पहले से स्थापित किरदार को दोबारा निभाना आसान नहीं होता। धीरे-धीरे हमारी केमिस्ट्री लोगों को पसंद आने लगी और दर्शकों ने देवोलीना को भी उतना ही प्यार दिया, जितना जिया को। तब समझ आई एक्टिंग की असली शक्ति एक बार स्टार प्लस की टीम रूपल को बड़ौदा लेकर गई, जहां उन्हें एक विशेष फैन से मिलने का अवसर दिया गया। यह फैन दृष्टिहीन थे, लेकिन उनका जुड़ाव कोकिलाबेन के किरदार से इतना गहरा था कि वे सिर्फ आवाज सुनकर उन्हें पहचान लेते थे। हर शाम 7 बजे, उनके लिए कोकिलाबेन की आवाज सुनना एक आध्यात्मिक अनुभव था। जब वह फैन उनसे मिले, तो बस इतना कहा- “आज मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा दिन है, क्योंकि मैंने आपको सुना।” इस एक वाक्य ने रूपल के दिल को छू लिया। उनकी आंखों में आंसू आ गए। उस पल उन्हें एहसास हुआ कि अभिनय सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को छूने की शक्ति रखता है। पीएम मोदी का लेटर आया तो डर गईं रूपल पटेल स्वच्छ भारत अभियान में ब्रांड एंबेसडर के रूप काम कर चुकी हैं। जिसके लिए उन्हें दो बार सम्मानित किया जा चुका है। रूपल कहती हैं- प्रधानमंत्री जी और उनकी टीम ने मुझे चुना, यह मेरा सौभाग्य है। जब उनका लेटर आया तो मैं डर गई थी, मैंने अपने पति से कहा कि वे घर आकर खोलें। पत्र पढ़कर बहुत गर्व हुआ और मैंने मोदी जी व उनकी टीम का धन्यवाद किया। आज भी मैं स्वच्छता अभियान से जुड़े काम करती रहती हूं और आगे भी जुड़ना चाहूंगी। हालांकि मोदी जी से नहीं मिली, लेकिन मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं उनसे नहीं मिली। वह जो देश के लिए इतना अच्छा काम कर रहे हैं, जो विकास और प्रगति हो रही है, उसे देखकर लगता है कि हम सब उनसे जुड़े हुए हैं। दर्शकों ने दी पहचान, लेकिन इंडस्ट्री ने नहीं दी बधाई रूपल कहती हैं कि कैसे उनके काम को दर्शकों और मीडिया ने पहचाना, लेकिन इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने उनकी सफलता पर खुलकर बधाई नहीं दी। इससे उन्हें दुख हुआ, लेकिन वे आज भी दूसरों की तारीफ करती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि अच्छाई मानवता की पहचान है। रूपल पटेल ने कहा— अगर टीवी कलाकार छोटे हैं तो फिल्म स्टार यहां क्यों आते हैं? रूपल ने बताया कि टीवी के मंच ने उन्हें दर्शकों से जुड़ने का अवसर दिया। फिल्मों में उन्हें मजबूत किरदार नहीं मिले, इसलिए उन्होंने टीवी पर ध्यान केंद्रित किया। वे मानती हैं कि टीवी एक शक्तिशाली माध्यम है और इसमें काम करने वाले कलाकारों को भी सम्मान मिलना चाहिए। वे हैरान हैं कि फिल्म स्टार टीवी पर क्यों आते हैं, अगर वे टीवी कलाकारों को कम मानते हैं। उन्होंने बताया कि एक डेली सोप में व्यस्तता के कारण उन्हें कई फिल्मों के ऑफर ठुकराने पड़े। लेकिन वे अपनी प्रतिबद्धता को निभाना जरूरी समझती हैं। उनका मानना है कि ईमानदारी, अनुशासन और फोकस ही सफलता की कुंजी है। ईमानदारी को कमजोरी नहीं, ताकत मानती हैं उनके लिए सबसे बड़ा संघर्ष अपने सपने को पूरा करना था, लेकिन परिवार और NSD ने उनका पूरा समर्थन किया। वे मानती हैं कि उनकी सफलता में भगवान का आशीर्वाद, दर्शकों का प्यार और अच्छे लोगों की दुआएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कई बार लोग उनकी ईमानदारी और मजबूत पर्सनैलिटी को गलत समझते हैं। वे कहती हैं कि लोग उनके अंदर की कोमलता और ईमानदारी नहीं देख पाते, जिससे कुछ लोगों में असुरक्षा पैदा होती है। लेकिन जो लोग उनके करीब हैं, वे उन्हें असली रूप में जानते हैं। उनके लिए सफलता का मतलब है — दिल, जुबान और कर्म एक होना। वे मानती हैं कि झूठ और बुराई के बीच भी अपनी अच्छाई बनाए रखना ही सच्ची सफलता है। उनका लक्ष्य अच्छा इंसान बने रहना, अच्छा काम करते रहना और अच्छे लोगों के साथ जुड़े रहना है। रूपल अपने प्रशंसकों के लिए चारुल मलिक के साथ मिलकर 'रूपचा' नाम से रील्स बना रही हैं। इनमें वे अलग-अलग कॉमिक किरदार निभा रही हैं, जो उनकी असली पर्सनैलिटी से अलग हैं। वे चाहती हैं कि लोग उन्हें नए रूप में भी देखें। ________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... ट्रेड पेपर ने ‘शोले’ को डिजास्टर बताया था:फिर सफलता बनी बोझ; ‘बुनियाद’ से रमेश सिप्पी ने फिर रचा इतिहास, साबित किया जज्बा जिंदा है रमेश सिप्पी भारतीय सिनेमा के उन दिग्गज निर्देशकों में से हैं जिन्होंने कराची से मुंबई तक का सफर तय करते हुए फिल्म जगत की विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पूरी खबर पढ़ें...
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