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Massive Assyrian stele found in Nineveh

A joint team of Iraqi and American archaeologists have unearthed a large Late Assyrian stele near the Sun Gate of Nineveh in Mosul, Iraq. It dates to the 7th century B.C. and lists building projects ordered by Ashurbanipal, king of Assyria from 668 to 627 B.C. Its monumental size and the information engraved on it makes it one of the most important records of an Assyrian monarch.

The stele is 6.6 feet tall and 5.1 wide and was carved out of a single block of Mosul marble. It has a semi-circular top and a rectangular body. The front side is engraved with a large relief of Ashurbanipal, characterized by a bronze helmet. Two smaller reliefs on the back are also believed to depict Assyrian kings. They are accompanied by a cuneiform inscription. It has not been fully deciphered yet, but preliminary translations describe buildings constructed in Nineveh and elsewhere in the Assyrian empire.

The Sun Gate, also known as the Shamash Gate or Bab Shamash, is one of gates in the city’s massive defensive walls. It is on the eastern wall and is still being used as a gate for car traffic today.

Many of Nineveh’s sites, including parts of its walls and the Mosul Museum, were damaged or destroyed by the Islamic State between 2014 and 2017.

Restoration work resumed after Mosul’s liberation, including a continuing project at the Sun Gate run with the University of Chicago’s Institute for the Study of Ancient Cultures. Officials say the stele was found during that work.

Authorities have not decided where the Assyrian stele will be displayed permanently, though officials say it could remain near Iraq’s Sun Gate or move to the planned Mosul Civilization Museum.



* This article was originally published here

जंतर-मंतर में शबाना आजमी ने खत्म कराया छात्रों का अनशन:कविता कौशिक पुलिस से बोलीं- मेरे देश के बच्चों पर हाथ मत उठाना

दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) छात्रों की मांगों के समर्थन में कई दिनों से प्रदर्शन कर रही है। आज उनका प्रस्तावित संसद मार्च है। जंतर-मंतर पर पिछले तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता नेहा, अमीन और मनीष कुमार का अनशन सोमवार को समाप्त हो गया। ये तीनों ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़े हैं। एक्ट्रेस शबाना आजमी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा और एक्टर प्रकाश राज ने उन्हें पानी पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया। इससे पहले रविवार को भी शबाना आजमी और प्रकाश राज जंतर-मंतर में मौजूद थे। कविता कौशिक ने वीडियो शेयर किया टीवी एक्ट्रेस कविता कौशिक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के सपोर्ट में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस से अपील की कि प्रदर्शनकारियों के साथ संयम और मानवीय व्यवहार किया जाए। वीडियो में कविता ने कहा कि पुलिसकर्मियों की भी अपनी फैमिली होती है और उन्हें यह याद रखना चाहिए कि सामने खड़े लोग भी देश के नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि हर परिवार चाहता है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय उसे एक योग्य डॉक्टर मिले और इसी वजह से कई छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कविता ने पुलिस से अनुरोध किया कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों या आम नागरिकों पर हाथ न उठाया जाए और उनके खिलाफ बल का प्रयोग न किया जाए। गौरतलब है कि इस प्रदर्शन में एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके सपोर्ट में कई बॉलीवुड सेलेब्स आ चुके हैं, जिनमें सोनी राजदान, शबाना आजमी, सोनाक्षी सिन्हा, रूबीना दिलाइक, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, अनुराग कश्यप, फातिमा सना शेख और अतुल कुलकर्णी जैसे कई सेलेब्स शामिल हैं। ये सभी वांगचुक के समर्थन में पोस्ट कर चुके हैं। अभिनेत्री स्वरा भास्कर जंतर-मंतर पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। वहीं, इससे पहले प्रकाश राज भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… …………….. यह खबर भी पढ़ें…. 3 इडियट्स के 'चतुर' बोले-नहीं चाहता फुंसुख वांगडू मर जाएं:जीनत अमान ने कहा- अपने अच्छे दिमाग को चुपचाप मरते हुए मत देखिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में वीडियो पोस्ट करते हुए एक्टर ओमी वैद्य ने उन्हें प्रेरणादायक बताते हुए उनकी जान बचाने की अपील की थी। वहीं, जीनत अमान ने सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग की और कहा था कि यह देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। पूरी खबर यहां पढें…

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सलमान ने देर रात तस्वीरें शेयर कीं:हेल्थ को लेकर चिंता के बीच पूछा- 'आप लोगों की तबीयत कैसी है?', नए वीडियो में भी थके दिखे

मुंबई में एक इवेंट के दौरान सलमान खान का नया लुक चर्चा में आया, जहां वे पहले से काफी दुबले नजर आए। इसके बाद फैंस उनकी सेहत को लेकर चिंता जताने लगे और कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया। इसी बीच रविवार देर रात सलमान ने X पर अपनी नई ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘आप लोगों की तबीयत कैसी है?’ सलमान ने तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें वह वायरल वीडियो की तुलना में काफी बेहतर और फिट नजर आ रहे हैं। वहीं, इस बीच सलमान का एक और वीडियो सामने आया। जिसमें वे अपने वायरल वीडियो की तुलना में थोड़ा बेहतर लग रहे हैं। हालांकि, उनकी आंखों के आसपास हल्की थकान दिखाई दे रही है। SRA के इवेंट में पहुंचे थे सलमान खान दरअसल, सलमान खान शुक्रवार को मुंबई के स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के दफ्तर में एक खास कार्यक्रम के सिलसिले में गए थे। वहां उन्होंने अथॉरिटी के नए डेटा कलेक्शन एंड वेरिफिकेशन सपोर्ट सेंटर (आईटी सर्वर रूम) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां भी सौंपीं। कार्यक्रम के दौरान सलमान खान के साथ उनके बॉडीगार्ड शेरा भी मौजूद थे। इस इवेंट के कई वीडियो इंटरनेट पर सामने आए, जिसके बाद उनकी फिजिकल कंडीशन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। देखें इवेंट की तस्वीरें- सोशल मीडिया पर फैंस ने किए कमेंट सलमान के लुक और सेहत को लेकर फैंस ने चिंता जताई थी। एक यूजर ने लिखा कि वे बीमार लग रहे हैं, भगवान उन्हें ठीक रखे। एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया कि उन्हें कोई हेल्थ इश्यू लग रहा है, क्योंकि वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं। एक अन्य फैन ने लिखा कि उनकी आंखों में थकान साफ दिख रही है। फिल्मों में अकेले 50 लोगों से लड़ने वाले भाई का औरा इस वक्त गायब लग रहा है। हालांकि, कुछ लोगों ने सलमान का सपोर्ट भी किया। एक यूजर ने लिखा कि बॉलीवुड के स्टार्स अपनी कमियों को छिपाने के लिए किसी भी हद तक जाते हैं, लेकिन सलमान ने बिना किसी झिझक के कैमरे के सामने अपनी असली उम्र को स्वीकार किया है। इसके लिए उनकी तारीफ होनी चाहिए। सलमान खान जल्द फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' में नजर आएंगे। पिछले दिनों अफवाह सामने आई थी कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। जिस पर सलमान खान फिल्म्स ने कहा था कि फिल्म की CBFC सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी होने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। बयान में कहा गया था कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजा ही नहीं गया है। फिल्म 'मातृभूमि' साल 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प पर आधारित है। पहले इस फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' रखा गया था। फिल्म को पहले 17 अप्रैल को ईद के मौके पर रिलीज किया जाना था, लेकिन बाद में इसकी रिलीज डेट टल गई। इस फिल्म का प्रोडक्शन सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने किया है और इसके डायरेक्टर अपूर्व लाखिया हैं। फिल्म में सलमान खान के साथ एक्ट्रेस चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का म्यूजिक हिमेश रेशमिया ने तैयार किया है। फिल्म 'मातृभूमि' का टीजर 27 दिसंबर 2025 को सलमान खान के 60वें जन्मदिन पर रिलीज किया गया था। इस फिल्म में सलमान खान 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं। कर्नल संतोष बाबू ने ही गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के दौरान भारतीय टुकड़ी का नेतृत्व किया था। इस झड़प में वे शहीद हो गए थे। वहीं, सलमान इन दिनों फिल्म 'SVC63' की शूटिंग कर रहे हैं। वामशी पेडिपल्ली के डायरेक्शन में बन रही इस एक्शन फिल्म को दिल राजू की श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस प्रोड्यूस कर रही है। फिल्म में नयनतारा पहली बार सलमान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगी। फिल्म ईद 2027 पर रिलीज होगी।

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नसीरुद्दीन शाह@76: पाकिस्तानी लड़की से छिपकर शादी की:दोस्त ने जलन में मारा चाकू, मां ने पूछा था- क्या रत्ना मुस्लिम बनेगी?

साल 1960 के दशक की बात है। एक दुबला-पतला लड़का था, जिसे एक्टर बनने के लिए मुंबई जाना था। एक दिन उनके एक दोस्त की गर्लफ्रेंड का पत्र आया कि मुंबई आ जाओ, मेरे पापा फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं, वो तुम्हारी मदद करेंगे। जिसके बाद वो मुंबई के निकल पड़ा। हालांकि जिस लड़की के भरोसे वो मुंबई पहुंचा, वो खुद बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। जिसके बाद उसने कुछ दिन रिश्तेदार के घर गुजारे, फिर वहां से भी जाना पड़ा। जेब खाली हुई तो जरी की फैक्ट्री के हॉल में रातें बिताईं। जहां वो तीस-चालीस लोगों के साथ फर्श पर वो सोया। कई बार लोकल ट्रेन में बिना टिकट सफर किया। बाद में यही लड़का आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे शानदार अभिनेताओं में से एक बना। स्पर्श, मासूम, सरफरोश, ए वेडनेसडे और इश्किया जैसी कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से उसने दर्शकों का दिल जीता। जी हां, हम बात कर रहे हैं नसीरुद्दीन शाह की। आज उनके 76वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने किस्से। 16 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई चले गए थे नसीरुद्दीन शाह अपनी आत्मकथा एंड देन वन डे में लिखते हैं दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उनको ऐसा लगा जैसे जिंदगी का सबसे मुश्किल पड़ाव पीछे छूट चुका हो। उनके पिता चाहते थे कि वो डॉक्टर बनें, अफसर बनें या फौज में जाएं। नेशनल डिफेंस अकादमी का फॉर्म भी भरवा दिया गया। मगर नसीरुद्दीन शाह के दिल में एक ही सपना था- एक्टर बनना और वह सपना मुंबई जाकर ही पूरा हो सकता था। कॉलेज में दाखिला तो हो गया, लेकिन क्लास से ज्यादा वक्त वो सिनेमाघरों में बिताते थे। फीस के पैसे भी फिल्मों पर खर्च होने लगे। इसी दौरान उन्होंने मुंबई में रहने वाली अपने एक दोस्त की गर्लफ्रेंड को पत्र लिखा, जिसके पिता फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट थे। उसका जवाब आया, ‘मुंबई आ जाओ, पापा तुम्हारी मदद करेंगे।’ बस, इतना सुनना था कि नसीरुद्दीन ने फीस के पैसों से ट्रेन का टिकट खरीद लिया, घड़ी और साइकिल बेचने की योजना बनाई और जेब में करीब पांच सौ रुपए लेकर मुंबई के लिए निकल पड़े। हालांकि, जिस लड़की के परिवार के भरोसे वह मुंबई आए थे, वही बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। इसके बाद कुछ दिन वह रिश्तेदार के घर में रहे, लेकिन जब सबको समझ आ गया कि यह लड़का वापस जाने वाला नहीं है, तो वहां से चले गए और एक जरी कढ़ाई की फैक्ट्री के बड़े-से हॉल में रहने लगे। रात में वहीं तीस-चालीस लोग फर्श पर सोते थे। इस दौरान उन्होंने वेटर बनने की कोशिश की और ताज होटल में बेलबॉय की नौकरी के लिए आवेदन दिया, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। फिर एक दिन एक दलाल उन्हें फिल्मों में एक्स्ट्रा कलाकार का काम दिलाने ले गया। मेहनताना था सिर्फ साढ़े सात रुपए। फिल्म थी अमन, जिसमें राजेंद्र कुमार मुख्य भूमिका निभा रहे थे। अंतिम यात्रा वाले सीन में नसीरुद्दीन भी भीड़ का हिस्सा बने। कैमरे के सामने खड़े होकर उन्हें लगा जैसे उनका सपना पूरा हो गया हो। वहीं, फिल्म आने के बाद वह हंसते हुए कहा करते थे, “दोस्तो, फिल्म में और भी सीन थे, लेकिन वह इसलिए काट दिए गए क्योंकि मेरी एक्टिंग बहुत अच्छी थी।” दिलीप कुमार ने फिल्मों से दूर रहने की सलाह दी घर से बिना बताए मुंबई आए नसीरुद्दीन शाह एक दिन पामपोश रेस्तरां के बाहर फुटपाथ पर बैठे थे। तभी एक लंबी, चमचमाती ग्रे रंग की लिमोजीन उनके सामने आकर रुकी। पीछे का दरवाजा खुला और ऊंची एड़ी की सैंडल पहने एक महिला उतरीं। उन्होंने पूछा, 'क्या तुम्हारा नाम नसीर है?' शाह ने हैरानी में सिर हिलाया। महिला ने बिना समय गंवाए उन्हें कार की आगे वाली सीट पर बैठने का इशारा किया। थोड़ी देर बाद उन्होंने उस महिला को पहचान लिया। वे थीं सईदा खान, दिलीप कुमार की सबसे छोटी बहन। तब नसीरुद्दीन शाह को समझ आया कि आखिर उन्हें ढूंढ़ कैसे लिया गया। उनके पिता अजमेर की उस सूफी दरगाह के प्रशासक रह चुके थे, जहां दिलीप कुमार की एक और बहन सकीना अक्सर आया करती थीं। दो महीने तक उनका कोई पता न मिलने के बाद आखिरकार पिता ने उन्हीं से संपर्क किया और एक पुराने परिचय के सहारे दिलीप कुमार का परिवार शाह तक पहुंचा था। कार दिलीप कुमार के बंगले में दाखिल हुई। ऊपर ले जाकर उनकी मुलाकात सकीना से कराई गई। अजमेर में वे उनसे पहले मिल चुके थे, लेकिन इस बार सकीना बेहद नाराज थीं। उनके सामने वे रो पड़े और माफी मांगने लगे। आखिरकार उन्होंने घर लौटने की हामी भर दी। बंगले के बेसमेंट में उन्हें रहने की जगह दे दी गई। कमरा साधारण था, लेकिन खाने-पीने और नहाने की पूरी व्यवस्था थी। एक दिन उनकी मुलाकात खुद दिलीप कुमार से भी हुई। शाह उनसे काम मांगना चाहते थे, लेकिन हिम्मत जुटा पाते, उससे पहले ही दिलीप कुमार ने उन्हें समझा दिया कि अच्छे परिवारों के लड़कों को फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आना चाहिए। कुछ दिनों बाद दिलीप कुमार के परिवार ने शाह को मेरठ भेज दिया। लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने बताया था कि जब दिलीप कुमार ने उनसे कहा, 'अच्छे घरों के लड़कों को फिल्मों में नहीं आना चाहिए,' तो उस वक्त वो दिलीप कुमार से पूछना चाहते थे, 'अगर ऐसा है, तो फिर आप खुद इस इंडस्ट्री में क्यों आए? आप भी तो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से थे।' हालांकि, उनकी ऐसा कहने की हिम्मत नहीं हुई। 34 साल की पाकिस्तानी औरत से गुपचुप शादी की थी नसीरुद्दीन शाह की पहली शादी परवीन मुराद उर्फ मनारा सीकरी से हुई थी। उनकी मुलाकात अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी। परवीन पाकिस्तान की नागरिक थीं और एमबीबीएस के आखिरी साल की छात्रा थीं। उम्र में वह नसीरुद्दीन से 14-15 साल बड़ी थीं। बचपन से कराची में पली-बढ़ीं और अपनी मां के पास अलीगढ़ आई थीं। पढ़ाई के बहाने भारत में ही रुकती चली गईं। दोनों की दोस्ती बहुत जल्दी गहरे रिश्ते में बदल गई। धीरे-धीरे नसीरुद्दीन ने अपने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से ज्यादा वक्त परवीन और उनकी मां के घर बिताना शुरू कर दिया। यह ऐसा दौर था, जब भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण थे। परवीन का स्टूडेंट वीजा खत्म होने वाला था। अगर वह भारत छोड़तीं, तो शायद दोबारा लौट नहीं पातीं। भारतीय नागरिकता पाने का सबसे आसान रास्ता शादी था। जिसके बाद 1 नवंबर 1969 को दोनों ने गुपचुप शादी कर ली। इस निकाह में गवाह सिर्फ दो महिलाएं थीं- परवीन की मां और उनके एक प्रोफेसर मित्र की पत्नी। नसीरुद्दीन के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, लेकिन अलीगढ़ जैसे शहर में कोई राज ज्यादा दिन छिप नहीं सकता था। कुछ ही दिनों में पूरी यूनिवर्सिटी में यह खबर फैल गई। फिर यह बात मेरठ और सरधना तक पहुंच गई, जहां नसीरुद्दीन का परिवार रहता था। उनके पिता को जब बेटे की शादी का पता चला, तो उन्हें गहरा झटका लगा। उन्होंने बेटे को पत्र लिखकर भोला और मूर्ख तक कह दिया। मां ने दर्द भरे शब्दों में पूछा, 'अगर तुम हमें बता देते, तो क्या हम मना कर देते?' बेटी के जन्म पर खुश होने के बजाय निराश हुए थे 1969 का साल था। नसीरुद्दीन शाह ने अभी-अभी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया था। तभी एक सुबह हॉस्टल में उन्हें एक तार मिला, 'परवीन को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है।' वह बिना देर किए दिल्ली से अलीगढ़ जाने वाली पहली बस में बैठ गए। करीब दोपहर में अस्पताल पहुंचे तो बाहर परवीन की मां खड़ी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'सुबह छह बजे बेटी हुई है।' नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया है कि उस पल वह खुश नहीं हुए। उन्हें बेटे की उम्मीद थी। उन्होंने मन ही मन एक बेटे की कल्पना कर रखी थी, जिसे वह क्रिकेट खेलना सिखाएंगे, बंदूक चलाना सिखाएंगे और अपने जैसा बनाएंगे। बेटी की खबर सुनते ही वह बुरी तरह निराश हो गए। उन्हें डर था कि दोस्त उनका मजाक उड़ाएंगे। वहीं, बेटी के जन्म के कुछ समय बाद ही नसीरुद्दीन शाह और परवीन मुराद के रिश्ते में दरार आ गई। हालात ऐसे बने कि दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अलगाव के बाद परवीन बेटी हीबा को लेकर पहले लंदन और फिर ईरान चली गईं। बाद में हीबा शाह जब लगभग 12 साल की हुईं, तब अपने पिता के पास लौट आईं। पिता की कब्र के सामने दिल की बातें कही थीं नसीरुद्दीन शाह को जब यह खबर मिली कि उनके पिता का निधन हो गया है और उन्हें आज मेरठ के सरधना में दफनाया जाएगा। उस वक्त उनके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने रत्ना पाठक से 500 रुपए उधार लिए और एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन सभी फ्लाइटें फुल थीं। उन्हें सलाह दी गई थी कि पिता के निधन वाला तार दिखाने पर इमरजेंसी सीट मिल सकती है, लेकिन काउंटर पर कर्मचारी के रूड व्यवहार के कारण उन्होंने किसी से मदद नहीं मांगी और वापस लौट आए। इस तरह वह अपने पिता की आखिरी विदाई में शामिल नहीं हो सके। बाद में जब नसीरुद्दीन शाह सरधना पहुंचे, तो पिता की कब्र पर बैठकर उन्होंने अपने दिल की सारी बातें कहीं, जो वह उनके जीते-जी कभी नहीं कह पाए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक नई फिल्म की है, जिसमें एक हिंदू पुजारी का किरदार निभाया है। अब 1857 के एक बागी की भूमिका निभाने वाले हैं। यह भी कहा कि उन्हें रत्ना से प्यार हो गया है और अब उनकी कमाई भी पहले से बेहतर है। नसीरुद्दीन शाह को लगा जैसे पिता उनका हर शब्द सुन रहे हों। मां ने पूछा था- क्या रत्ना धर्म बदलेंगी? नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक की शादी 1 अप्रैल 1982 को रत्ना की मां के घर पर एक सादे रजिस्टर्ड विवाह के रूप में हुई थी। दोनों की मुलाकात 1975 में 'संभोग से संन्यास तक' नामक नाटक की रिहर्सल के दौरान हुई थी। जब नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने शादी का फैसला किया, तब नसीरुद्दीन ने एक दिन हिम्मत करके अपनी मां से कहा कि अब वे रत्ना से शादी करना चाहते हैं। मां ने उनकी पूरी बात सुनी। फिर बहुत शांत स्वर में सिर्फ एक सवाल पूछा, 'क्या तुम रत्ना से इस्लाम कबूल करने के लिए कहोगे?' जिस पर नसीरुद्दीन ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, 'नहीं... मैं उनसे ऐसा कभी नहीं कहूंगा।' उन्होंने साफ कर दिया कि अगर शादी होगी, तो रत्ना अपनी पहचान और अपने धर्म के साथ ही इस रिश्ते में आएंगी। वे उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डालेंगे। इसके बाद उनकी मां खुद रत्ना के घर पहुंचीं। उन्होंने रत्ना की मां और मशहूर अभिनेत्री दीना पाठक से उनकी बेटी का हाथ मांगा। दोस्त जसपाल ने पीछे से चाकू मारा नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में बताया था कि साल 1977 में फिल्म भूमिका की शूटिंग के दौरान उनके दोस्त राजेंद्र जसपाल ने उन पर चाकू से हमला कर दिया था। बताया जाता है कि जसपाल ने शाह पर उनकी सफलता और करियर में मिल रही कामयाबी से जलन के कारण हमला किया था। उस समय नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी एक रेस्तरां में खाना खा रहे थे। तभी जसपाल वहां पहुंचा और कुछ देर बाद पीछे से नसीरुद्दीन शाह की पीठ पर चाकू से वार कर दिया। ओम पुरी ने तुरंत बहादुरी दिखाते हुए जसपाल को दोबारा हमला करने से रोक लिया। इसके बाद रेस्तरां में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने जसपाल को गिरफ्तार कर लिया। शाह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दो दिन जेल में रहने के बाद जसपाल को जमानत मिल गई थी। बाद में एक दिन जसपाल अचानक शाह के घर पहुंचा, लेकिन उसने न माफी मांगी और न ही हमले पर अफसोस जताया। बाद में दोनों अदालत पहुंचे, जहां शाह ने उसके खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद अदालत ने केस बंद कर दिया। शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर और अनुपम खेर को जोकर कहा था नसीरुद्दीन शाह बॉलीवुड के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं, जो अपने बेबाक और बोल्ड बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समय-समय पर कई अभिनेताओं की आलोचना की है। उन्होंने शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर तो राजेश खन्ना को सीमित और घटिया एक्टर बताया था। वहीं, शाह ने अनुपम खेर को जोकर भी कहा था, जिसका अनुपम खेर ने पलटवार करते हुए जवाब दिया था। दरअसल, शाह ने एक इंटरव्यू में खेर को लेकर कहा था, अनुपम खेर जैसे व्यक्ति काफी मुखर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। वह एक जोकर हैं। NSD और FTII में उनके कई समकालीन उनके चापलूस स्वभाव की पुष्टि कर सकते हैं। यह उनके स्वभाव में है। वह इससे खुद को अलग नहीं कर सकते। इसके जवाब में अनुपम खेर ने कहा था, मैं आपको और आपकी बातों को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता। हालांकि मैंने कभी आपकी बुराई नहीं की और न ही आपको भला-बुरा कहा, लेकिन अब जरूर कहना चाहूंगा कि आपने अपनी पूरी जिंदगी, इतनी कामयाबी मिलने के बावजूद, फ्रस्ट्रेशन में गुजारी है। अगर आप दिलीप कुमार साहब, अमिताभ बच्चन साहब, राजेश खन्ना साहब, शाहरुख खान और विराट कोहली जैसे लोगों की भी आलोचना कर सकते हैं, तो मुझे पूरा यकीन है कि मैं भी एक बेहतरीन कंपनी में हूं। इनमें से किसी ने भी आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि हम सब जानते हैं कि यह आप नहीं, बल्कि बरसों से जिन पदार्थों का आप सेवन करते रहे हैं, उनका असर है। शायद इसी वजह से आपको सही और गलत के बीच का फर्क समझ नहीं आता। वहीं, हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े एक बयान को लेकर अनुपम खेर ट्रोल हो रहे थे। इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह का बयान और उसके जवाब में अनुपम खेर की प्रतिक्रिया वाले दोनों पुराने वीडियो फिर से वायरल हो गए। इसके बाद अनुपम खेर ने बताया कि कुछ महीने पहले दोनों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगा लिया था। …………….. यह खबर भी पढ़ें…. राजेश खन्ना की पुण्यतिथि:मां-बाप पाकिस्तान भागे, रिश्तेदारों ने पाला, आखिरी शब्द-पैकअप टाइम हो गया, बंगले में तोहफों के 65 सूटकेस मिले, जानिए मौत की कहानी 18 जुलाई 2012 दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, 'काका बाबू' अब नहीं रहे। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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नसीरुद्दीन शाह@76: पाकिस्तानी लड़की से छिपकर शादी की:दोस्त ने जलन में मारा चाकू, मां ने पूछा था- क्या रत्ना मुस्लिम बनेगी?

साल 1960 के दशक की बात है। एक दुबला-पतला लड़का था, जिसे एक्टर बनने के लिए मुंबई जाना था। एक दिन उनके एक दोस्त की गर्लफ्रेंड का पत्र आया कि मुंबई आ जाओ, मेरे पापा फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट हैं, वो तुम्हारी मदद करेंगे। जिसके बाद वो मुंबई के निकल पड़ा। हालांकि जिस लड़की के भरोसे वो मुंबई पहुंचा, वो खुद बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। जिसके बाद उसने कुछ दिन रिश्तेदार के घर गुजारे, फिर वहां से भी जाना पड़ा। जेब खाली हुई तो जरी की फैक्ट्री के हॉल में रातें बिताईं। जहां वो तीस-चालीस लोगों के साथ फर्श पर वो सोया। कई बार लोकल ट्रेन में बिना टिकट सफर किया। बाद में यही लड़का आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे शानदार अभिनेताओं में से एक बना। स्पर्श, मासूम, सरफरोश, ए वेडनेसडे और इश्किया जैसी कई फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से उसने दर्शकों का दिल जीता। जी हां, हम बात कर रहे हैं नसीरुद्दीन शाह की। आज उनके 76वें जन्मदिन पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ ऐसे अनसुने किस्से। 16 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई चले गए थे नसीरुद्दीन शाह अपनी आत्मकथा एंड देन वन डे में लिखते हैं दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद उनको ऐसा लगा जैसे जिंदगी का सबसे मुश्किल पड़ाव पीछे छूट चुका हो। उनके पिता चाहते थे कि वो डॉक्टर बनें, अफसर बनें या फौज में जाएं। नेशनल डिफेंस अकादमी का फॉर्म भी भरवा दिया गया। मगर नसीरुद्दीन शाह के दिल में एक ही सपना था- एक्टर बनना और वह सपना मुंबई जाकर ही पूरा हो सकता था। कॉलेज में दाखिला तो हो गया, लेकिन क्लास से ज्यादा वक्त वो सिनेमाघरों में बिताते थे। फीस के पैसे भी फिल्मों पर खर्च होने लगे। इसी दौरान उन्होंने मुंबई में रहने वाली अपने एक दोस्त की गर्लफ्रेंड को पत्र लिखा, जिसके पिता फिल्मों में कैरेक्टर आर्टिस्ट थे। उसका जवाब आया, ‘मुंबई आ जाओ, पापा तुम्हारी मदद करेंगे।’ बस, इतना सुनना था कि नसीरुद्दीन ने फीस के पैसों से ट्रेन का टिकट खरीद लिया, घड़ी और साइकिल बेचने की योजना बनाई और जेब में करीब पांच सौ रुपए लेकर मुंबई के लिए निकल पड़े। हालांकि, जिस लड़की के परिवार के भरोसे वह मुंबई आए थे, वही बेहद साधारण जिंदगी जी रही थी। इसके बाद कुछ दिन वह रिश्तेदार के घर में रहे, लेकिन जब सबको समझ आ गया कि यह लड़का वापस जाने वाला नहीं है, तो वहां से चले गए और एक जरी कढ़ाई की फैक्ट्री के बड़े-से हॉल में रहने लगे। रात में वहीं तीस-चालीस लोग फर्श पर सोते थे। इस दौरान उन्होंने वेटर बनने की कोशिश की और ताज होटल में बेलबॉय की नौकरी के लिए आवेदन दिया, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी। फिर एक दिन एक दलाल उन्हें फिल्मों में एक्स्ट्रा कलाकार का काम दिलाने ले गया। मेहनताना था सिर्फ साढ़े सात रुपए। फिल्म थी अमन, जिसमें राजेंद्र कुमार मुख्य भूमिका निभा रहे थे। अंतिम यात्रा वाले सीन में नसीरुद्दीन भी भीड़ का हिस्सा बने। कैमरे के सामने खड़े होकर उन्हें लगा जैसे उनका सपना पूरा हो गया हो। वहीं, फिल्म आने के बाद वह हंसते हुए कहा करते थे, “दोस्तो, फिल्म में और भी सीन थे, लेकिन वह इसलिए काट दिए गए क्योंकि मेरी एक्टिंग बहुत अच्छी थी।” दिलीप कुमार ने फिल्मों से दूर रहने की सलाह दी घर से बिना बताए मुंबई आए नसीरुद्दीन शाह एक दिन पामपोश रेस्तरां के बाहर फुटपाथ पर बैठे थे। तभी एक लंबी, चमचमाती ग्रे रंग की लिमोजीन उनके सामने आकर रुकी। पीछे का दरवाजा खुला और ऊंची एड़ी की सैंडल पहने एक महिला उतरीं। उन्होंने पूछा, 'क्या तुम्हारा नाम नसीर है?' शाह ने हैरानी में सिर हिलाया। महिला ने बिना समय गंवाए उन्हें कार की आगे वाली सीट पर बैठने का इशारा किया। थोड़ी देर बाद उन्होंने उस महिला को पहचान लिया। वे थीं सईदा खान, दिलीप कुमार की सबसे छोटी बहन। तब नसीरुद्दीन शाह को समझ आया कि आखिर उन्हें ढूंढ़ कैसे लिया गया। उनके पिता अजमेर की उस सूफी दरगाह के प्रशासक रह चुके थे, जहां दिलीप कुमार की एक और बहन सकीना अक्सर आया करती थीं। दो महीने तक उनका कोई पता न मिलने के बाद आखिरकार पिता ने उन्हीं से संपर्क किया और एक पुराने परिचय के सहारे दिलीप कुमार का परिवार शाह तक पहुंचा था। कार दिलीप कुमार के बंगले में दाखिल हुई। ऊपर ले जाकर उनकी मुलाकात सकीना से कराई गई। अजमेर में वे उनसे पहले मिल चुके थे, लेकिन इस बार सकीना बेहद नाराज थीं। उनके सामने वे रो पड़े और माफी मांगने लगे। आखिरकार उन्होंने घर लौटने की हामी भर दी। बंगले के बेसमेंट में उन्हें रहने की जगह दे दी गई। कमरा साधारण था, लेकिन खाने-पीने और नहाने की पूरी व्यवस्था थी। एक दिन उनकी मुलाकात खुद दिलीप कुमार से भी हुई। शाह उनसे काम मांगना चाहते थे, लेकिन हिम्मत जुटा पाते, उससे पहले ही दिलीप कुमार ने उन्हें समझा दिया कि अच्छे परिवारों के लड़कों को फिल्म इंडस्ट्री में नहीं आना चाहिए। कुछ दिनों बाद दिलीप कुमार के परिवार ने शाह को मेरठ भेज दिया। लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में नसीरुद्दीन शाह ने बताया था कि जब दिलीप कुमार ने उनसे कहा, 'अच्छे घरों के लड़कों को फिल्मों में नहीं आना चाहिए,' तो उस वक्त वो दिलीप कुमार से पूछना चाहते थे, 'अगर ऐसा है, तो फिर आप खुद इस इंडस्ट्री में क्यों आए? आप भी तो एक अच्छे और संभ्रांत परिवार से थे।' हालांकि, उनकी ऐसा कहने की हिम्मत नहीं हुई। 34 साल की पाकिस्तानी औरत से गुपचुप शादी की थी नसीरुद्दीन शाह की पहली शादी परवीन मुराद उर्फ मनारा सीकरी से हुई थी। उनकी मुलाकात अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी। परवीन पाकिस्तान की नागरिक थीं और एमबीबीएस के आखिरी साल की छात्रा थीं। उम्र में वह नसीरुद्दीन से 14-15 साल बड़ी थीं। बचपन से कराची में पली-बढ़ीं और अपनी मां के पास अलीगढ़ आई थीं। पढ़ाई के बहाने भारत में ही रुकती चली गईं। दोनों की दोस्ती बहुत जल्दी गहरे रिश्ते में बदल गई। धीरे-धीरे नसीरुद्दीन ने अपने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से ज्यादा वक्त परवीन और उनकी मां के घर बिताना शुरू कर दिया। यह ऐसा दौर था, जब भारत-पाकिस्तान के रिश्ते तनावपूर्ण थे। परवीन का स्टूडेंट वीजा खत्म होने वाला था। अगर वह भारत छोड़तीं, तो शायद दोबारा लौट नहीं पातीं। भारतीय नागरिकता पाने का सबसे आसान रास्ता शादी था। जिसके बाद 1 नवंबर 1969 को दोनों ने गुपचुप शादी कर ली। इस निकाह में गवाह सिर्फ दो महिलाएं थीं- परवीन की मां और उनके एक प्रोफेसर मित्र की पत्नी। नसीरुद्दीन के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था, लेकिन अलीगढ़ जैसे शहर में कोई राज ज्यादा दिन छिप नहीं सकता था। कुछ ही दिनों में पूरी यूनिवर्सिटी में यह खबर फैल गई। फिर यह बात मेरठ और सरधना तक पहुंच गई, जहां नसीरुद्दीन का परिवार रहता था। उनके पिता को जब बेटे की शादी का पता चला, तो उन्हें गहरा झटका लगा। उन्होंने बेटे को पत्र लिखकर भोला और मूर्ख तक कह दिया। मां ने दर्द भरे शब्दों में पूछा, 'अगर तुम हमें बता देते, तो क्या हम मना कर देते?' बेटी के जन्म पर खुश होने के बजाय निराश हुए थे 1969 का साल था। नसीरुद्दीन शाह ने अभी-अभी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया था। तभी एक सुबह हॉस्टल में उन्हें एक तार मिला, 'परवीन को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है।' वह बिना देर किए दिल्ली से अलीगढ़ जाने वाली पहली बस में बैठ गए। करीब दोपहर में अस्पताल पहुंचे तो बाहर परवीन की मां खड़ी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'सुबह छह बजे बेटी हुई है।' नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया है कि उस पल वह खुश नहीं हुए। उन्हें बेटे की उम्मीद थी। उन्होंने मन ही मन एक बेटे की कल्पना कर रखी थी, जिसे वह क्रिकेट खेलना सिखाएंगे, बंदूक चलाना सिखाएंगे और अपने जैसा बनाएंगे। बेटी की खबर सुनते ही वह बुरी तरह निराश हो गए। उन्हें डर था कि दोस्त उनका मजाक उड़ाएंगे। वहीं, बेटी के जन्म के कुछ समय बाद ही नसीरुद्दीन शाह और परवीन मुराद के रिश्ते में दरार आ गई। हालात ऐसे बने कि दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। अलगाव के बाद परवीन बेटी हीबा को लेकर पहले लंदन और फिर ईरान चली गईं। बाद में हीबा शाह जब लगभग 12 साल की हुईं, तब अपने पिता के पास लौट आईं। पिता की कब्र के सामने दिल की बातें कही थीं नसीरुद्दीन शाह को जब यह खबर मिली कि उनके पिता का निधन हो गया है और उन्हें आज मेरठ के सरधना में दफनाया जाएगा। उस वक्त उनके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने रत्ना पाठक से 500 रुपए उधार लिए और एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन सभी फ्लाइटें फुल थीं। उन्हें सलाह दी गई थी कि पिता के निधन वाला तार दिखाने पर इमरजेंसी सीट मिल सकती है, लेकिन काउंटर पर कर्मचारी के रूड व्यवहार के कारण उन्होंने किसी से मदद नहीं मांगी और वापस लौट आए। इस तरह वह अपने पिता की आखिरी विदाई में शामिल नहीं हो सके। बाद में जब नसीरुद्दीन शाह सरधना पहुंचे, तो पिता की कब्र पर बैठकर उन्होंने अपने दिल की सारी बातें कहीं, जो वह उनके जीते-जी कभी नहीं कह पाए थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक नई फिल्म की है, जिसमें एक हिंदू पुजारी का किरदार निभाया है। अब 1857 के एक बागी की भूमिका निभाने वाले हैं। यह भी कहा कि उन्हें रत्ना से प्यार हो गया है और अब उनकी कमाई भी पहले से बेहतर है। नसीरुद्दीन शाह को लगा जैसे पिता उनका हर शब्द सुन रहे हों। मां ने पूछा था- क्या रत्ना धर्म बदलेंगी? नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक की शादी 1 अप्रैल 1982 को रत्ना की मां के घर पर एक सादे रजिस्टर्ड विवाह के रूप में हुई थी। दोनों की मुलाकात 1975 में 'संभोग से संन्यास तक' नामक नाटक की रिहर्सल के दौरान हुई थी। जब नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक ने शादी का फैसला किया, तब नसीरुद्दीन ने एक दिन हिम्मत करके अपनी मां से कहा कि अब वे रत्ना से शादी करना चाहते हैं। मां ने उनकी पूरी बात सुनी। फिर बहुत शांत स्वर में सिर्फ एक सवाल पूछा, 'क्या तुम रत्ना से इस्लाम कबूल करने के लिए कहोगे?' जिस पर नसीरुद्दीन ने बिना किसी झिझक के जवाब दिया, 'नहीं... मैं उनसे ऐसा कभी नहीं कहूंगा।' उन्होंने साफ कर दिया कि अगर शादी होगी, तो रत्ना अपनी पहचान और अपने धर्म के साथ ही इस रिश्ते में आएंगी। वे उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डालेंगे। इसके बाद उनकी मां खुद रत्ना के घर पहुंचीं। उन्होंने रत्ना की मां और मशहूर अभिनेत्री दीना पाठक से उनकी बेटी का हाथ मांगा। दोस्त जसपाल ने पीछे से चाकू मारा नसीरुद्दीन शाह ने अपनी आत्मकथा में बताया था कि साल 1977 में फिल्म भूमिका की शूटिंग के दौरान उनके दोस्त राजेंद्र जसपाल ने उन पर चाकू से हमला कर दिया था। बताया जाता है कि जसपाल ने शाह पर उनकी सफलता और करियर में मिल रही कामयाबी से जलन के कारण हमला किया था। उस समय नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी एक रेस्तरां में खाना खा रहे थे। तभी जसपाल वहां पहुंचा और कुछ देर बाद पीछे से नसीरुद्दीन शाह की पीठ पर चाकू से वार कर दिया। ओम पुरी ने तुरंत बहादुरी दिखाते हुए जसपाल को दोबारा हमला करने से रोक लिया। इसके बाद रेस्तरां में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस ने जसपाल को गिरफ्तार कर लिया। शाह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब दो दिन जेल में रहने के बाद जसपाल को जमानत मिल गई थी। बाद में एक दिन जसपाल अचानक शाह के घर पहुंचा, लेकिन उसने न माफी मांगी और न ही हमले पर अफसोस जताया। बाद में दोनों अदालत पहुंचे, जहां शाह ने उसके खिलाफ मामला आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद अदालत ने केस बंद कर दिया। शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर और अनुपम खेर को जोकर कहा था नसीरुद्दीन शाह बॉलीवुड के उन गिने-चुने कलाकारों में से हैं, जो अपने बेबाक और बोल्ड बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने समय-समय पर कई अभिनेताओं की आलोचना की है। उन्होंने शाहरुख खान को बोरिंग एक्टर तो राजेश खन्ना को सीमित और घटिया एक्टर बताया था। वहीं, शाह ने अनुपम खेर को जोकर भी कहा था, जिसका अनुपम खेर ने पलटवार करते हुए जवाब दिया था। दरअसल, शाह ने एक इंटरव्यू में खेर को लेकर कहा था, अनुपम खेर जैसे व्यक्ति काफी मुखर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत है। वह एक जोकर हैं। NSD और FTII में उनके कई समकालीन उनके चापलूस स्वभाव की पुष्टि कर सकते हैं। यह उनके स्वभाव में है। वह इससे खुद को अलग नहीं कर सकते। इसके जवाब में अनुपम खेर ने कहा था, मैं आपको और आपकी बातों को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लेता। हालांकि मैंने कभी आपकी बुराई नहीं की और न ही आपको भला-बुरा कहा, लेकिन अब जरूर कहना चाहूंगा कि आपने अपनी पूरी जिंदगी, इतनी कामयाबी मिलने के बावजूद, फ्रस्ट्रेशन में गुजारी है। अगर आप दिलीप कुमार साहब, अमिताभ बच्चन साहब, राजेश खन्ना साहब, शाहरुख खान और विराट कोहली जैसे लोगों की भी आलोचना कर सकते हैं, तो मुझे पूरा यकीन है कि मैं भी एक बेहतरीन कंपनी में हूं। इनमें से किसी ने भी आपकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि हम सब जानते हैं कि यह आप नहीं, बल्कि बरसों से जिन पदार्थों का आप सेवन करते रहे हैं, उनका असर है। शायद इसी वजह से आपको सही और गलत के बीच का फर्क समझ नहीं आता। वहीं, हाल ही में अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े एक बयान को लेकर अनुपम खेर ट्रोल हो रहे थे। इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह का बयान और उसके जवाब में अनुपम खेर की प्रतिक्रिया वाले दोनों पुराने वीडियो फिर से वायरल हो गए। इसके बाद अनुपम खेर ने बताया कि कुछ महीने पहले दोनों ने आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगा लिया था। …………….. यह खबर भी पढ़ें…. राजेश खन्ना की पुण्यतिथि:मां-बाप पाकिस्तान भागे, रिश्तेदारों ने पाला, आखिरी शब्द-पैकअप टाइम हो गया, बंगले में तोहफों के 65 सूटकेस मिले, जानिए मौत की कहानी 18 जुलाई 2012 दोपहर में खबर आई, सुपरस्टार राजेश खन्ना, 'काका बाबू' अब नहीं रहे। राजेश खन्ना पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार थे। फैंस की भीड़ कई दिनों से उनकी सलामती के लिए कार्टर रोड स्थित आशीर्वाद बंगले के बाहर भीड़ लगाकर दुआ कर रहे थे। फिर जैसे ही हर न्यूज चैनल, फेसबुक, ट्विटर में उनकी मौत की खबर आई, जल्द ही आशीर्वाद के सामने मातम मना रहे फैंस का जन सैलाब आ गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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Bayeux Tapestry unfurled, undamaged

The Bayeux Tapestry is now out of the protective box it was packed in for its top secret crossing of the Channel and according to French Culture Minister Catherine Pégard, who is a native of Normandy, it is in a “wonderful state.”

Much of the stitched masterpiece, which is actually coloured yarn embroidered on linen rather than a woven tapestry, is currently covered up in giant polyester sheeting, to protect it from light damage.

Yesterday, over 18 painstaking hours, teams of French and British conservators and British Museum staff unfurled the 70-metre long artwork from the folding stand where it had been concertinaed, surrounded by protective mattress-type padding.

It will be kept under a cover to protect it from exposure to light until the exhibition, but one section of the tapestry was uncovered for the French delegation and the press to view. It’s from the early part of the woven story when William, Duke of Normandy, not yet the Conqueror, is on his throne sending messengers to free the future King Harold from captivity in France.

When it’s ready, the tapestry will be placed flat on its back inside a custom-made glass case. When the exhibition opens, visits will be timed, which each ticket-holder getting 40 minutes to walk the 70 meters (230 feet) of the tapestry. There won’t be much time to examine the scenes, and I imagine there will be a bottleneck around the iconic depiction of King Harold killed with an arrow to the eye at the Battle of Hastings.

That arrow, by the way, may well be a later addition. There are drawings of the tapestry made shortly after it was created, and there is no arrow in those drawings. According to Professor Michael Lewis, curator of the British Museum’s Bayeux Tapestry exhibition, Harold being shot in the eye became part of the story in the 12th century, and the arrow was an interpolation added during a 19th century restoration to make the tapestry match the legend.



* This article was originally published here

हरियाणा- अश्लील कंटेंट पर अब महापंचायत:महम चौबीसी चबूतरे पर हरियाणवी-बॉलीवुड एक्टर जुटेंगे, भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा ने VIDEO में कहा था-सपना चौधरी लड़कियां बिगाड़ रही

हरियाणा में सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता और गन कल्चर के खिलाफ धर्मेंद्र हुड्डा की मुहिम को अब खाप पंचायतों का समर्थन मिला है। महम चौबीसी सर्व खाप ने 25 जुलाई को उत्तर भारत की महापंचायत बुलाने का ऐलान किया है, जिसमें विभिन्न खाप पंचायतों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होकर आगे की रणनीति तय करेंगे। सर्व खाप के प्रधान तुलसी ग्रेवाल ने घोषणा की है कि 25 जुलाई को सुबह 10 बजे महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर महापंचायत होगी। इसमें हरियाणवी व बॉलीवुड कलाकारों को भी बुलाया जाएगा। पूरे अभियान की शुरुआत जाट आंदोलन दंगों के भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा की ओर से की गई थी। हुड्डा ने वीडियो जारी कर कहा था कि सपना चौधरी, अनु बालियान और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रिया रेवाड़ी जैसी हरियाणवी कलाकारों के कारण हमारी लड़कियां बिगड़ रही हैं। हालांकि, सपना ने भी पोस्ट कर हुड्डा को अपने अंदाज में जवाब दिया था। इसके बाद हुड्डा ने तुलसी ग्रेवाल से फोन पर बात कर महापंचायत करने की अपील की। कॉल के बाद तुलसी ग्रेवाल ने कहा- पंचायत में सभी निर्णय सामूहिक सहमति से लिए जाएंगे और समाज में फैल रही बुराइयों के खिलाफ आगे की रणनीति तय की जाएगी। डांसर सपना चौधरी और प्रिया रेवाड़ी की कुछ PHOTOS… पहले पढ़िए सर्व खाप के प्रधान ने क्या कहा… धर्मेंद्र हुड्डा की अपील के बाद बनी सहमति तुलसी ग्रेवाल ने बताया कि धर्मेंद्र हुड्डा के सोशल मीडिया वीडियो और फोन कॉल के बाद महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर उत्तर भारत की महापंचायत बुलाने पर सहमति बनी। इसका उद्देश्य हरियाणवी संस्कृति को प्रभावित कर रहे ‘गन और गंदा’ कल्चर समेत सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होना है। 25 जुलाई को होगी उत्तर भारत की महापंचायत ग्रेवाल ने कहा- 25 जुलाई सुबह 10 बजे महम चौबीसी के ऐतिहासिक चबूतरे पर महापंचायत होगी। इसमें विभिन्न खाप पंचायतों, किसान, महिला, छात्र संगठनों और हरियाणवी व बॉलीवुड कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा। सभी फैसले सामूहिक सहमति से लिए जाएंगे। 12 हजार लोगों के बैठने की क्षमता, भोजन की भी व्यवस्था उन्होंने बताया कि महम चौबीसी सर्व खाप का ऐतिहासिक चबूतरा बिना कुर्सियों के करीब 12 हजार लोगों के बैठने की क्षमता रखता है। महापंचायत में ज्यादा से ज्यादा लोग आए इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी रहेगी। इन मुद्दों पर होगी चर्चा महापंचायत में गन कल्चर, सोशल मीडिया पर अश्लीलता, नशा, सट्टा बाजार, अश्लील डांस, अभद्र भाषा और समाज में फैल रही अन्य बुराइयों पर चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अश्लील कंटेंट को बैन करने की मांग की जाएगी। रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकार को सौंपेंगे ज्ञापन महापंचायत से पहले रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी रूपरेखा साझा की जाएगी। महापंचायत के बाद संवैधानिक तरीके से कानून बनाने की मांग को लेकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने तथा बड़े नेताओं से मिलकर विधानसभा में मुद्दा उठाने की कोशिश की जाएगी। हरियाणा में 100 से ज्यादा खाप पंचायतें सक्रिय तुलसी ग्रेवाल ने कहा- हरियाणा में 100 से अधिक अलग-अलग खाप पंचायतें हैं। पहले क्षेत्र के आधार पर खाप पंचायतें होती थीं, लेकिन अब अलग-अलग बिरादरियों की अलग-अलग खाप पंचायतें बनने से उनकी संख्या बढ़ गई है। इसलिए सभी से अलग-अलग बातचीत कर उन्हें इस महापंचायत में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। अब जानिए, धर्मेंद्र हुड्डा ने लाइव आकर क्या कहा था… सपना ने हुड्डा को दिया ये जवाब हरियाणवी डांसर और सिंगर सपना चौधरी ने भी हुड्डा के बयानों पर चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट साझा कर धर्मेंद्र हुड्डा को इशारों-इशारों में जवाब दिया है। लिखा- सुंदरता सिर्फ ध्यान खींचती है, मगर इंसान का अच्छा चरित्र दिल जीत लेता है। सपना चौधरी ने ये लाइनें अपने विदेशी दौरे के दौरान की शेयर की फोटोज और रील के साथ लिखी। मगर, जैसे ही ये पोस्ट उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर दिखी, वैसे ही कमेंट बॉक्स में धर्मेंद्र के समर्थकों ने सपना चौधरी को ट्रोल करना शुरू कर दिया। ---------------- अश्लील कंटेंट कंट्रोवर्सी पर सपना चौधरी का जवाब:हरियाणवी सिंगर बोलीं-अच्छा चरित्र दिल जीत लेता है; ट्रोलर्स बोले-तुम ये बात ही मत करो, पति को भी घसीटा जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भगोड़ा घोषित किए जा चुके धर्मेंद्र हुड्डा के लगातार हमलों के बाद आखिरकार हरियाणवी डांसर और सिंगर सपना चौधरी ने चुप्पी तोड़ी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट साझा कर धर्मेंद्र हुड्डा को जवाब दिया है। पूरी खबर पढ़िए…

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'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

फिल्म 'रामायण: प्रथम संकल्प' का ट्रेलर शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इवेंट में लॉन्च किया गया। इस मौके पर डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा और फिल्म की स्टार कास्ट मौजूद रही। मेकर्स ने घोषणा की कि ट्रेलर 24 जुलाई को दुनियाभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। इवेंट में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, सनी देओल, रवि दुबे, विवेक ओबेराय सहित अन्य कलाकार शामिल हुए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने सनी देओल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। करीब चार मिनट के ट्रेलर में फिल्म के भव्य विजुअल्स, बड़े पैमाने पर तैयार की गई दुनिया और प्रमुख किरदारों की पहली विस्तृत झलक दिखाई गई। बता दें कि रामायण: पार्ट 1 दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि रामायण: पार्ट 2 दिवाली 2027 में रिलीज की जाएगी। कार्यक्रम में बाबा रामदेव और कुमार विश्वास भी थे। इवेंट में बाबा रामदेव ने मंच पर योग भी करके दिखाया। वहीं, बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि इस फिल्म का बजट 4000 करोड़ रुपये है, तो यह सुनकर उनकी समाधि लग गई। इस पर मंच पर मौजूद कवि कुमार विश्वास ने चुटकी लेते हुए कहा, “स्वामी जी, आपका खुद का पतंजलि साम्राज्य तो 2 लाख करोड़ रुपए का है।” कुमार विश्वास की इस बात पर रणबीर कपूर समेत पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, बाबा रामदेव ने अपने खास अंदाज में योग और अध्यात्म से जुड़ी बातें भी साझा कीं, जिन्हें सुनकर रणबीर कपूर मुस्कुराते नजर आए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच पर जाकर बाबा रामदेव का अभिवादन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने काला चश्मा पहना हुआ था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, "सबसे पहले मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि ये काला चश्मा पहनने के लिए मैं आप सब से क्षमा मांगता हूं। मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ है, पर आज इस शुभ अवसर पर मेरे दिल में सिर्फ अफेक्शन (प्यार) है।" सनी देओल ने कहा, ‘मैं वाहेगुरु जी का शुक्रिया करता हूं कि मुझे हनुमान जी के किरदार को निभाने का मौका मिला। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं सही तरह से इसे निभा सकूं, क्योंकि हनुमान जी का किरदार निभाना आसान नहीं है, लेकिन मजा बहुत आएगा, क्योंकि वो नटखट, मासूम, ताकतवर हैं, आप सबके प्यारे हैं और राम जी के भक्त हैं।’ फिल्म 'रामायण' से जुड़ी अहम बातें- फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे। 1987 के टीवी शो ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का कुल बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म दंगल बनाई थी। फिल्म का म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हैंस जिमर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स बना रहे हैं। फिल्म IMAX पर रिलीज होगी। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का काम ऑस्कर विनर स्टूडियो DNEG और प्राइम फोकस संभाल रहे हैं। फिल्म को दो भाग में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगा।

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Psychology reveals the real reason behind your gut feelings about a person you just met

Psychology reveals that while your brain is wired to instantly read a stranger's vibe through subtle social cues, these initial snap judgments are often incomplete hypotheses that require time and repeated interactions to prove accurate.

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जफ्फी डालो, प्यार करो पर शहनाज गिल ट्रोल:पंजाबी फिल्म 'इश्कनामा' के ट्रेलर लॉन्चिंग पर बयान देकर फंसी; पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर बोला- कहानी फर्जी

एक्टर जय रंधावा और एक्ट्रेस शहनाज गिल की अपकमिंग पंजाबी फिल्म 'इश्कनामा' रिलीज से पहले ही विवादों में आ गई है। 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म की कहानी भारतीय पंजाबी सिख युवक निम्मा और पाकिस्तानी पंजाबी युवती नसीमा के प्रेम पर आधारित है। 14 जुलाई को ट्रेलर रिलीज होने के बाद बहस छिड़ी गई। फिल्म की कहानी और किरदारों पर भी सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर का दावा है कि यह एक फर्जी कहानी है और पाकिस्तान में ‘नसीमा’ नाम नहीं होता। लोग या तो नसीम नाम रखते या सीमा। नसीमा नाम पहली बार सुना है। इसके अलावा ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान में शहनाज गिल के बयान के बाद विवाद और बढ़ गया। शहनाज ने कहा कि अगर निम्मा को नसीमा मिल जाए तो वह दोनों को एक कमरे में छोड़ देंगी, उनके हाथ बांध देंगी और कहेंगी कि जफ्फी डाल लो और आज जी भरकर प्यार कर लो। इस बयान के बाद शहनाज गिल को भी ट्रोल किया जा रहा है। अधूरे प्यार की कहानी ‘इश्कनामा’ शहनाज गिल और जय रंधावा की आगामी फिल्म इश्कनामा' पाकिस्तानी पंजाबी युवती नसीमा और भारतीय पंजाबी सिख युवक निम्मा के प्यार की अधूरी कहानी से इंस्पायर है, जिसमें 1981 और 1988 के बीच दो अलग मुल्क में रहने वाले दो आशिकों की कहानी को ट्रेलर में उतारा गया है। कहानी एक सिख लड़के कवि निम्मा की है, जो पाकिस्तान जाता है, वहां उसकी मुलाकात नसीमा नाम की लड़की से होती है, जो मुस्लिम है। दोनों के बीच प्यार पनपता है और नसीमा एक दिन निम्मा से हिंदुस्तान घूमने की इच्छा व्यक्त करती है। वह उसे भारत घुमा भी देता है और उसे छोड़ने आता है, लेकिन जब दोनों की इस लव स्टोरी के बारे में नसीमा के पिता को पता लगता है, तो वह पाकिस्तान में लड़के को बुरी तरह से मारता है। अंत में दोनों को एक-दूसरे से दूर कर दिया जाता है। फिल्म में जय रंधावा ने निम्मा की भूमिका और शहनाज गिल ने नसीमा की भूमिका निभाई है। शूटिंग के दौरान घायल हुए थे जय रंधावा जय रंधावा फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के दौरान घायल हो गए थे। जनवरी में शूटिंग के समय एक जंप सीन करते हुए क्रेन मशीन में तकनीकी खराबी आ गई थी, जिससे जय रंधावा छत पर सही तरीके से लैंड नहीं कर पाए और सीधे दीवार से जा टकराए थे। इस दौरान उनका सिर दीवार से जोर से टकरा गया था। इस घटना का 8 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया था। उनकी अस्पताल से एक फोटो भी सामने आई थी। जिसमें MRI करते हुए दिखाया गया था। लेकिन, रंधावा ने जल्द ही सेट पर वापसी की और शूटिंग को खत्म किया। अब ये फिल्म 24 जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म पर जय रंधावा की 2 बड़ी बातें फिल्म पर शहनाज गिल की 2 बड़ी बातें इश्कनामा फिल्म पर ट्रोलर्स ने क्या कहा ************ ये खबर भी पढ़ें: पंजाबी एक्टर घायल, दीवार से सिर टकराया: फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के वक्त हादसा, जंप सीन करते वक्त क्रेन में खराबी आई पंजाबी एक्टर जय रंधावा फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के दौरान घायल हो गए। शूटिंग के समय एक जंप सीन करते हुए क्रेन मशीन में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे जय रंधावा छत पर सही तरीके से लैंड नहीं कर पाए और सीधे दीवार से जा टकराए। इस दौरान उनका सिर दीवार से जोर से टकरा गया। (पढ़ें पूरी खबर)

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Roman hoard with rare rattle donated to Aylesbury museum

A small hoard of Roman objects including a rare ceremonial rattle has been unearthed in Chilterns, Buckinghamshire, and goes on display today at the Discover Bucks Museum in Aylesbury.

Metal detectorist Adam McLelland discovered the group of two studs with millefiori pattern enamel, a glass gaming piece, a bone die and the component pieces of a bronze rattle. Very few of this type of rattle, known as a sistrum in Latin, have been found in Britain. While the rattle was broken apart, every piece of it survived.

The rattle was shaken during religious ceremonies. The metallic jingle was believe to ward off evil spirits. They were likely required elements in the rituals of mystery cults as some deities, like Cybele and Isis, were depicted holding a sistrum.

The finder reported his discovery to the Portable Antiquities Scheme Finds Liaison Officer, and the Buckinghamshire Council quickly contracted Oxford Archaeology to excavate the find site. They found traces of textile, which they believe was the remnants of a cloth bag or wrap that contained the hoard when it was buried.

Normally a hoard like this would be declared treasure and then assessed for market value. A local museum would be given the opportunity to acquire the hoard for the assessed sum, and the money would be split between the finder and landowner. In this case, the finder and landowner both agreed to donate the objects to the Discover Bucks Museum. A private donor then funded the necessary conservation, which was complex and time-consuming, especially for the enameled surface of the studs.



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Welsh ceramicist watercolours expected to fetch up to £25,000 at auction

A series of watercolours by a Welsh ceramicist are to go under the hammer.

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Andrew Flintoff crash passenger 'suffered PTSD and back injuries', court documents alleges

The particulars of Racing driver Paul Rees's claim against BBC Studios said he is suing for upwards of £100,000.

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Trump drops BBC's commercial arm from Panorama lawsuit, but main case remains

The US president removes BBC Studios from his defamation lawsuit over a controversial documentary.

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Welsh ceramicist watercolours expected to fetch up to £25,000 at auction

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“Miraculous” Florentine fresco restored

The late medieval fresco of the Madonna della Pura in Florence’s Basilica of Santa Maria Novella, venerated for hundreds of years as miraculous, has been restored.

The fresco depicts the Virgin Mary nursing the Christ child with Saint Catherine of Alexandria on the side next to a smaller en grisaille portrait of the patron who commissioned the work. According to tradition, it was originally placed in the Della Luna family’s burial vault in the cemetery on the eastern wall of the basilica, the fresco became an object of devotion when the Virgin Mary appeared before children playing the cemetery and asked them to clean the dust and spiderwebs off the painting.

The importance attributed to the event is evidenced by the speed with which the cult developed. In fact, within a year of the alleged miracle, a first altar was built in front of the image. A devotion to the so-called “children of purity”—so named in reference to the purity evoked by the Marian figure—took such firm hold that it convinced the Dominicans to grant the Ricasoli family permission to build a chapel designed to house and showcase the fresco. The new chapel was completed in 1476 and represented a significant architectural and artistic achievement. The image was incorporated into an elegant aedicule designed by Giovanni di Bertino, conceived according to a sophisticated perspective and characterized by references to classical architecture. From that moment on, the Madonna della Pura became one of the most significant objects of Marian devotion at Santa Maria Novella, maintaining a central role in the spirituality of the Dominican complex over the centuries.

Previous attempted conservations were highly invasive, most significantly in the 1950s when the fresco was detached from its original wall and remounted on a new backing. There was also extensive repainting of the flesh tones using pigments that over time have become discolored. The three-layer Masonite backing is still in good condition and structurally stable, but the painted surface had deteriorated over time. Dust and particulate matter from smoke and other materials were stuck to the surface and left scratches. Areas of loss that had been covered with stucco in previous restorations were overly large and marred the readability of the image.

Restorers began by dry cleaning the surface with soft brushes and low-power vacuuming to remove loose particle deposits. Next they wet cleaned the surface with natural sponges moistened with demineralized water. This simple treatment greatly improved the palette, restoring the original lightness of the piece. For the retouched, discolored flesh tones, conservators applied Japanese paper soaked in a solution of ammonium carbonate to soften and rehydrated the pigments. They were then removed with cotton swabs soaked in demineralized water.

The stucco patches were handled by paring down the mismatched edges with scalpels and micro-chisels. Any gaps exposed were filled with a modern material: aged lime putted and silica sand. This time the fill was applied meticulously only inside the gaps instead of having overlapping edges like the stucco repair had.

Loss areas were then lightly filled with watercolors. This makes the places where the original paint is gone look much less obvious, but at the same time it is still clear what is original and what has been added. Modern conservation principles don’t attempt to hide any changes that were made. The idea is to show your work, as subtly as possible, of course, and ensure whatever adaptations you make can be reversed.

The results of the restoration have restored a more authentic perception of the fresco. The removal of the 20th-century overpainting made it possible to restore the proper chromatic balance of the flesh tones and to bring to light pictorial details that had been obscured by alterations and deposits accumulated over time. The cleaning process has also highlighted the quality of the work’s execution, allowing for a clearer understanding of the artist’s technical and stylistic choices. At the same time, the restoration has reinforced the image’s devotional function, restoring to the faithful and visitors a work that once again expresses its spiritual significance more effectively.



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सोनम वांगचुक पर आमिर खान ने तोड़ी चुप्पी:कहा- 3 इडियट्स उन पर नहीं बनी, मैं उन्हें जानता तक नहीं था; हेल्थ पर बोले- उनके लिए चिंतित हैं

करीब तीन हफ्तों से जारी सोनम वांगचुक के आमरण अनशन के बीच आमिर खान ने पहली बार इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ी है। लंबे समय से सोशल मीडिया पर उनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब आमिर ने कहा है कि उन्हें सोनम वांगचुक की सेहत की चिंता है और वे उम्मीद करते हैं कि वह जल्द अपना अनशन खत्म करेंगे। लेकिन साथ ही आमिर ने कहा है कि फिल्म 3 इडियट्स सोनम वांगचुक पर नहीं बनी है। फिल्म बनाते हुए वो उन्हें जानते तक नहीं थे। लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में फिल्म लगान की स्क्रीनिंग के दौरान आमिर खान से सोनम वांगचुक पर एक महिला ने पूछा, ‘हम जब बड़े हो रहे थे, तब हम पर आपका गहरा असर रहा। आप भी सोनम वांगचुक से इंस्पायर हुए हैं।’ इस पर आमिर ने टोकते हुए कहा, ‘नहीं, ये एक गलत धारणा है। जब फिल्म बन रही थी, मैं सोनम को जानता भी नहीं था। मैंने अभी चतुर (3 इडियट्स एक्टर ओमी वैद) का वीडियो देखा, लेकिन वो गलत हैं। न ही राजकुमार हिरानी, न हमारे राइटर और न मैं सोनम के बारे में जानते थे। हालांकि सोनम हर तरह से सही काम कर रहे हैं। हमें उनकी और उनके काम की इज्जत करनी चाहिए। सोनम खुद भी कह चुके हैं कि 3 इडियट्स का किरदार उन पर नहीं बना है।’ आगे आमिर ने सोनम वांगचुक के अनशन पर कहा, ‘हर कोई उनकी हेल्थ और जिंदगी के लिए चिंतित है। हमें उम्मीद है कि सब कुछ अच्छे से खत्म होगा। हम सबको यही उम्मीद है कि वो अनशन खत्म करें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।’ दरअसल, इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में ही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह कथित परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी सेहत बिगड़ने की खबरें सामने आ रही हैं, जिसके बाद कई राजनीतिक नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने भी चिंता जताई है। 3 इडियट्स में चतुर बने ओमी वैद्य बोले- नहीं चाहता वो मरें सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 16वें दिन '3 इडियट्स' में चतुर रामलिंगम का किरदार निभा चुके ओमी वैद्य ने एक वीडियो जारी कर कहा, ‘मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वह एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं। मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित रहें और जिंदा रहें।’ वीडियो में उन्होंने कहा, मैं अक्सर ऐसे वीडियो नहीं बनाता, इसलिए मेरी बात ध्यान से सुनिए। क्या आपको पता है कि 3 इडियट्स में आमिर खान का किरदार फुंसुख वांगडू असल जिंदगी के लद्दाख के इंजीनियर, इनोवेटर, शिक्षक और समाज सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित था? ओमी ने आगे कहा, मैं उनसे मिल चुका हूं। वह बहुत ही दिलचस्प और सादगी पसंद इंसान हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई बेहतरीन काम किए हैं। इसलिए मैं आपसे कहूंगा कि उनके बारे में जानिए और देखिए कि इस समय वह क्या कर रहे हैं। फिलहाल सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। कई हफ्ते बीत चुके हैं और उनका ब्लड शुगर काफी कम हो गया है। मुझे नहीं पता कि आपने इसके बारे में सुना है या नहीं, या मीडिया इस पर कितनी खबर दिखा रहा है, लेकिन यह बहुत गंभीर मामला है। वह भूख हड़ताल क्यों कर रहे हैं? क्योंकि उन्हें भारत की शिक्षा व्यवस्था, लद्दाख से जुड़े कुछ मुद्दों और पर्यावरण की चिंता है। आप उनकी बात से सहमत हों या नहीं, लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि मैं नहीं चाहता कि यह इंसान मर जाए। मेरे लिए वह एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं और मैं चाहता हूं कि वह सुरक्षित रहें और जिंदा रहें। ये सेलेब्स भी सपोर्ट में उतरे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को सीनियर एक्टर सोनी राजदान, जीनत अमान, अतुल कुलकर्णी, सोनाक्षी सिन्हा, कॉमेडियन समय रैना समेत कई सेलेब्स का सपोर्ट मिल रहा है। सोनाक्षी बोलीं- अब चुप रहना संभव नहीं एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने पहले कभी इस तरह सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन इस बार चुप रहना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक देश के लिए किए गए अपने कार्यों और उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं। उनके अनुसार, वांगचुक उन छात्रों के भविष्य के लिए अनशन कर रहे हैं, जिन्हें वे संकट में मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे सिस्टम के खिलाफ लड़ाई है, जिसके कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। सोनाक्षी ने कहा कि देश के युवा अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर संवाद शुरू नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि वह भी देश की युवा हैं और देश का भला चाहती हैं, इसलिए उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा, "मैं बस यह पूछना चाहती हूं कि यह कब काफी होगा? जब ये लोग मर जाएंगे, तब क्या आप जागेंगे? और इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? जो हो रहा है, वह सही नहीं है। मैं बस यही कहना चाहती हूं।" एक्ट्रेस फातिमा सना शेख ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अब 19 दिन हो चुके हैं और किसी की बात सुनने के लिए इतना इंतजार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति, जिन्होंने देश के लिए काफी योगदान दिया है, उन्हें अपनी बात रखने के लिए अपनी सेहत दांव पर नहीं लगानी चाहिए। फातिमा ने कहा कि राजनीतिक विचार चाहे जो भी हों, छात्रों के भविष्य की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे का समाधान बातचीत के जरिए निकले और सोनम वांगचुक की सेहत सुरक्षित रहे। उन्होंने युवाओं के बेहतर भविष्य के समर्थन की भी अपील की। कॉमेडियन समय रैना ने भी सोनम वांगचुक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि वह उम्मीद और प्रार्थना कर रहे हैं कि वांगचुक सुरक्षित रहें और इस पूरे मामले का समाधान जल्द बातचीत के जरिए निकले। सुरेंद्र शर्मा ने सोनम वांगचुक से की अपील कवि सुरेंद्र शर्मा ने सोनम वांगचुक के नाम एक वीडियो मैसेज जारी किया। उन्होंने वांगचुक से आमरण अनशन खत्म करने की भावुक अपील की। शर्मा ने कहा कि देश को सोनम वांगचुक जैसे नेतृत्व की जरूरत है, इसलिए किसी मंत्री के इस्तीफे के लिए अपनी जान दांव पर नहीं लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश किसी एक इस्तीफे से बड़ा होता है और करोड़ों युवा आज वांगचुक को अपनी आवाज मानते हैं। शर्मा ने कहा कि अगर उन्हें कुछ हुआ तो युवाओं की उम्मीद टूट जाएगी। अंत में उन्होंने वांगचुक से देशहित में अनशन खत्म कर संघर्ष जारी रखने की अपील की। वहीं, इससे पहले सोनी राजदान, शबाना आजमी, रूबीना दिलैक, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अनुराग कश्यप जैसे कई सेलेब्स भी वांगचुक के समर्थन में पोस्ट कर चुके हैं। अभिनेत्री स्वरा भास्कर जंतर-मंतर पहुंचीं और सोनम वांगचुक से मुलाकात कर अपना समर्थन जताया। वहीं, इससे पहले प्रकाश राज भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 19वां दिन सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वांगचुक की भूख हड़ताल का 20वां दिन है। उनकी हड़ताल को लेकर अब बॉलीवुड के कई कलाकारों ने पब्लिकली अपना समर्थन जताया। …………….. यह खबर भी पढ़ें…. 3 इडियट्स के 'चतुर' बोले-नहीं चाहता फुंसुख वांगडू मर जाएं:जीनत अमान ने कहा- अपने अच्छे दिमाग को चुपचाप मरते हुए मत देखिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के समर्थन में वीडियो पोस्ट करते हुए एक्टर ओमी वैद्य ने उन्हें प्रेरणादायक बताते हुए उनकी जान बचाने की अपील की थी। वहीं, जीनत अमान ने सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग की और कहा था कि यह देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। पूरी खबर यहां पढें…

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सपना चौधरी के खिलाफ भगोड़े हुड्डा का दूसरा VIDEO:बोला- उस पर 35 FIR, सेटिंग से बच रही; प्रिया रेवाड़ी को 1 कॉल में सुधारा

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भगोड़ा घोषित हुए धर्मेंद्र हुड्डा ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर लाइव आकर हरियाणवी डांसर-सिंगर सपना चौधरी समेत कई कलाकारों पर आरोप लगाए हैं। हुड्डा ने दावा किया कि सपना चौधरी हरियाणा की संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही हैं। सपना के समर्थन में आने वाले कुछ बुद्धिजीवी और कलाकार उनके पक्ष में गलत तरीके से माहौल बना रहे हैं। हुड्डा ने दावा किया कि सपना चौधरी के खिलाफ 35 एफआईआर दर्ज हैं। वह विभिन्न तरीकों से इन मामलों में कार्रवाई से बचती रही हैं। अगर सपना वास्तव में समाज की बहन-बेटी होतीं, तो उन पर हरियाणा की संस्कृति को कलंकित करने के आरोप नहीं लगते। हुड्डा ने सपना चौधरी का समर्थन करने वालों की भी आलोचना की। कहा कि जो लोग उन्हें समाज की बहन-बेटी बताकर उनका बचाव कर रहे हैं, वे वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहे हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रिया रेवाड़ी पर दावा किया कि फूहड़ता फैलाने के लिए बुजुर्गों और खाप के सम्मानित लोगों ने डांसरों के पैरों में अपनी पगड़ी तक रख दी थी, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी। मगर, मेरी एक कॉल के बाद ही पूनिया ने तुरंत अपनी गलती मानी और सुधर गई। अब जानिए, धर्मेंद्र हुड्डा ने लाइव आकर क्या कहा… विधानसभा में कानून बनवाया जाएगा धर्मेंद्र हुड्डा ने कहा कि वह इस अभियान को केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि इसे हरियाणा विधानसभा तक ले जाएंगे। इस मुद्दे पर नया कानून बनवाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए उन्होंने तीन मांगें भी रखीं। पहली, 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मोबाइल के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। दूसरी, सोशल मीडिया पर अश्लील या आपत्तिजनक वीडियो बनाने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए। तीसरी, कानून में ऐसा संशोधन किया जाए कि गांव की ही लड़की से पारिवारिक रिश्तों के दायरे में कोर्ट मैरिज न हो सके। तीन हरियाणवी कलाकारों के समर्थन का दावा धर्मेंद्र हुड्डा ने लोगों से अपील की कि जो हरियाणवी कलाकार, सिंगर या नेता उनके सांस्कृतिक सुधार अभियान का समर्थन नहीं कर रहे हैं, उनका बहिष्कार किया जाए। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा के युवाओं को गुंडागर्दी, नशे और हथियारों की संस्कृति की ओर धकेलने में कुछ स्वार्थी कलाकारों और नेताओं की भूमिका है। पूरे हरियाणा में केवल तीन कलाकार—दलेर खरकिया, एमडी और वीरू कटारिया ने ही उनके अभियान का खुलकर समर्थन किया है, जबकि बाकी कलाकार इस मुद्दे पर चुप हैं। जेल और पुराने मुकदमों का भी किया जिक्र धर्मेंद्र हुड्डा ने अपने आपराधिक और राजनीतिक मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 17 साल की उम्र में पहली बार धारा 307 (हत्या के प्रयास) के मामले में जेल गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई के एक मामले में भी उन्हें जेल जाना पड़ा और उन्होंने दो साल जेल में बिताए। हुड्डा के अनुसार, किसान आंदोलन और जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उन पर देशद्रोह समेत कई गंभीर मुकदमे दर्ज हुए थे। जो व्यक्ति देशद्रोह जैसे मामलों और जेल से नहीं डरा, उसे मानहानि के मुकदमों से डराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। ------------------------- सपना चौधरी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इन्फ्लुएंसर्स बोलीं-सपना चौधरी ने हरियाणा को 'सॉफ्ट पोर्न' दिया:भगोड़े हुड्‌डा का दावा-35 बड़े स्टार की लिस्ट, ज्यादातर ने अश्लील कंटेंट छोड़ा; VIDEO शेयर कर रहे जाट आरक्षण आंदोलन के दंगों से सुर्खियों में आए और फिलहाल अमेरिका में रह रहे भगोड़े धर्मेंद्र हुड्डा की ओर से सोशल मीडिया पर 'अश्लील, अभद्र और डबल मीनिंग' कंटेंट के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है। यह मुहिम अब हरियाणा में भी बड़ी बहस का विषय बन गई है। (पूरी खबर पढ़ें) जाट-आरक्षण दंगों का भगोड़ा बोला-सपना चौधरी ने नाचकर गंद फैलाया:'नंगा नाच' से लड़कियां बिगाड़ी, एके जट्टी ने 4 घर नाश किए; मर्द ₹100-100 घालते थे जाट आरक्षण आंदोलन दंगों में भगोड़ा घोषित धर्मेंद्र हुड्डा ने हरियाणवी एक्ट्रेस-डांसर सपना चौधरी और अनु कादयान उर्फ एके जट्टी को लेकर विवादित टिप्पणियां की हैं। अमेरिका में बैठे हुड्डा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। जिसमें कहा- हरियाणा में डांस और सोशल मीडिया पर जो अश्लीलता और फूहड़ता फैल रही है, उसके लिए यही लोग जिम्मेदार हैं। (पूरी खबर पढ़ें)

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सोहेल खान का बचपन में हुआ था यौन उत्पीड़न:सलमान खान के भाई बोले- सालों तक शर्म की वजह से किसी को नहीं बताया

सलमान खान के छोटे भाई और एक्टर सोहेल खान ने हाल ही में बताया कि बचपन में उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ था, लेकिन उन्होंने कई सालों तक इस बारे में किसी से बात नहीं की थी। यह बात उन्होंने रियलिटी शो 'अलायंस' में कही। शो में सोहेल खान की टीम इस सप्ताह लीडरबोर्ड में टॉप पर रही। जीत के जश्न और हल्के-फुल्के माहौल के बीच उन्होंने दूसरे कंटेस्टेंट अर्सलान गोनी, रुही दोसानी और अली गोनी के साथ बातचीत में अपने बचपन का अनुभव शेयर किया। कई सालों तक किसी को नहीं बताया रैगिंग के खिलाफ बात करते हुए सोहेल ने कहा, 'जब मैं छोटा था तो किसी ने मेरा यौन उत्पीड़न किया था और मैंने इसे सालों तक अपने अंदर दबाए रखा।' बड़े होने के बाद उन्होंने अपने पिता को इसके बारे में बताया। सोहेल के मुताबिक, उनके पिता ने कहा था कि उन्होंने इतने साल तक यह बात अपने अंदर क्यों रखी। सोहेल ने कहा कि उस समय उन्हें इस घटना के बारे में बताने में शर्म महसूस होती थी, जबकि उनकी कोई गलती नहीं थी। परिवार को याद कर भावुक हुए सोहेल खान इसी एपिसोड में सोहेल खान अपने परिवार के बारे में बात करते हुए इमोशनल हो गए। उन्होंने कहा कि वह उन्हें बहुत मिस करते हैं। शो के होस्ट कुणाल खेमू से बात करते हुए सोहेल ने बताया कि उन्होंने पहले भी कई रियलिटी शो होस्ट और जज किए हैं, लेकिन एक कंटेस्टेंट के तौर पर हिस्सा लेने के बाद उन्हें कंटेस्टेंट पर पड़ने वाले मेंटल और इमोशनल प्रेशर का एहसास हुआ। सोहेल ने कहा कि 'अलायंस' में हिस्सा लेने के बाद उन्हें ऐसी सीख मिली, जो वह अपने 55 साल के जीवन में पहले नहीं सीख पाए थे। शो में सीमा की वाइल्डकार्ड एंट्री शो में सोहेल खान के साथ उनकी पूर्व पत्नी सीमा सजदेह भी हैं। सीमा ने शो में वाइल्डकार्ड कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली है। शो में सीमा की एंट्री के बाद दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग देखने को मिल रही है। सीमा का स्वागत करते हुए सोहेल ने कहा था कि उन्होंने 25 साल इस खूबसूरत महिला के साथ बिताए हैं और अगर रिश्ते में कोई गलती हुई, तो उसकी जिम्मेदारी वह लेते हैं। यह खबर भी पढ़ें…. सोहेल खान बेटे का नाम 'राम खान' रखना चाहते थे:जन्म के बाद फिर क्यों बेटे का नाम 'निर्वाण' रखा गया? एक्टर ने सुनाया किस्सा एक्टर सोहेल खान ने हाल ही में बताया कि वह अपने बड़े बेटे का नाम 'राम खान' रखना चाहते थे, लेकिन बेटे के जन्म के बाद सीमा सजदेह ने उसका नाम 'निर्वाण' रख दिया था। उन्होंने यह बात रियलिटी शो 'अलायंस' में बातचीत के दौरान शेयर की। पूरी खबर यहां पढें…

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20-25 ऑडिशन में रिजेक्ट हुईं रश्मिका मंदाना:कहा गया- एक्ट्रेस जैसा चेहरा नहीं; घर जाकर रोती थीं, फिर ऐसे बदली किस्मत, बनीं पैन इंडिया स्टार

आज रश्मिका मंदाना देश की बड़ी अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। 'पुष्पा', 'एनिमल' और 'छावा' जैसी फिल्मों से उन्होंने पैन इंडिया स्टार का दर्जा हासिल किया। लेकिन करियर की शुरुआत में उन्हें लगातार रिजेक्शन झेलने पड़े। उन्होंने करीब 20-25 ऑडिशन दिए, जिनमें ज्यादातर में यह कहकर रिजेक्ट कर दिया गया कि उनका चेहरा एक्ट्रेस जैसा नहीं है। वह घर लौटकर रोती थीं। एक फिल्म के लिए 2-3 महीने ट्रेनिंग लेने के बाद वह फिल्म भी बंद हो गई। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और पहली ही कन्नड फिल्म 'किरिक पार्टी' से स्टार बन गईं। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं रश्मिका मंदाना के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें। कर्नाटक के वीराजपेट में हुआ जन्म रश्मिका मंदाना का जन्म 5 अप्रैल 1996 को कर्नाटक के कोडागु (कूर्ग) जिले के वीराजपेट में हुआ। वह कोडवा परिवार से ताल्लुक रखती हैं। खूबसूरत पहाड़ियों और कॉफी बागानों के लिए मशहूर कूर्ग में उनका बचपन बीता। उनके पिता मदन मंदाना स्थानीय कारोबारी हैं, जिनका कॉफी एस्टेट और एक फंक्शन हॉल है। उनकी मां सुमन मंदाना गृहिणी हैं और रश्मिका के करियर में हमेशा उनका सहारा रही हैं। उनकी छोटी बहन शिमन मंदाना भी हैं, जिनसे उनका गहरा लगाव है। बचपन में देखा आर्थिक संघर्ष रश्मिका के पेरेंट्स के पास कभी उनके लिए खिलौने खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उन्होंने हिंदुस्टान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में इसका जिक्र किया था। उनके अनुसार, एक वक्त ऐसा था जब उनके पेरेंट्स को घर ढूंढ़ने और किराया देने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। हालात इतने खराब थे कि वे अपनी बेटी को खिलौना तक नहीं खरीदकर दे पा रहे थे। इसी गरीबी को देखकर रश्मिका आज मेहनत से कमाए गए रुपयों की वैल्यू करती हैं। जिंदगी का बड़ा हिस्सा हॉस्टल में बीता रश्मिका ने शुरुआती पढ़ाई कूर्ग पब्लिक स्कूल, गोनिकोप्पल से की। यह बोर्डिंग स्कूल था, इसलिए उनका बचपन काफी हद तक हॉस्टल में बीता। रश्मिका ने कहा, "मेरी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा हॉस्टल में बीता। उस वक्त मेरे माता-पिता अपनी जिंदगी और आर्थिक स्थिति को संभालने में जुटे हुए थे। इसलिए बचपन से ही मैं हॉस्टल में रही। उस समय मुझे फिल्में देखने का भी मौका नहीं मिलता था। हॉस्टल में रात 9:30 से 10 बजे तक ही टीवी देखने की अनुमति थी और उस दौरान भी न्यूज, स्पोर्ट्स या म्यूजिक ही देखा जा सकता था।" पढ़ाई नहीं, डांस में मन लगता था उन्होंने कहा, "स्कूल में टीचर्स डे, एनुअल डे या किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में मैं हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थी। खास तौर पर भरतनाट्यम सीखती थी और डांस करना मुझे बहुत पसंद था। पढ़ाई में मेरा बिल्कुल मन नहीं लगता था। मैं क्लास की बैकबेंचर थी। मुझे लगता था कि पढ़ाई से मैं कुछ खास नहीं कर पाऊंगी। ज्यादा से ज्यादा यही होगा कि घर लौटकर पापा के बिजनेस में उनकी मदद करूंगी।" तीन विषयों में बैचलर डिग्री रश्मिका मंदाना सिर्फ सफल अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि अच्छी पढ़ाई भी कर चुकी हैं। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य (English Literature), मनोविज्ञान (Psychology) और पत्रकारिता (Journalism) में बैचलर डिग्री हासिल की है। स्कूल की पढ़ाई के बाद रश्मिका ने मैसूर इंस्टीट्यूट ऑफ कॉमर्स एंड आर्ट्स से प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स किया। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के एम.एस. रामैया कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में दाखिला लिया और यहीं से इन तीनों विषयों में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। एक्ट्रेस बनने का सपना कभी नहीं देखा था साल 2014 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान रश्मिका ने 'क्लीन एंड क्लियर टाइम्स फ्रेश फेस' प्रतियोगिता जीती। इसके बाद उन्हें मॉडलिंग के कई ऑफर मिलने लगे। शुरुआत में उन्होंने एक्टिंग के प्रस्ताव ठुकरा दिए थे, क्योंकि उन्होंने कभी अभिनेत्री बनने के बारे में नहीं सोचा था। रश्मिका कहती हैं, "जब भी फिल्मों के गाने देखती थी या एक्टर्स के बारे में सुनती थी, तो उनकी जिंदगी मुझे बहुत आकर्षित करती थी। मैं सोचती थी कि कितनी शानदार जिंदगी होगी उनकी। लेकिन मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन मैं खुद अभिनेत्री बन जाऊंगी।" बाद में कॉलेज के एक प्रोफेसर ने उन्हें ऑडिशन देने के लिए प्रेरित किया। तुम्हारा चेहरा एक्ट्रेस जैसा नहीं रश्मिका ने करियर के शुरुआती दिनों में करीब 20 से 25 ऑडिशन दिए। ज्यादातर जगहों पर उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। कई कास्टिंग टीमों ने उनसे कहा कि उनका चेहरा एक्ट्रेस जैसा नहीं दिखता। यह बात उन्हें अंदर तक तोड़ देती थी। घर लौटकर खूब रोती थीं Galatta Plus को दिए इंटरव्यू में रश्मिका ने बताया था कि लगातार रिजेक्शन के बाद वह अक्सर घर लौटकर रोती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय वह असफलता स्वीकार नहीं कर पाती थीं। हर रिजेक्शन उन्हें लगता था कि शायद वह इस इंडस्ट्री के लिए बनी ही नहीं हैं। पहली फिल्म मिली, लेकिन कभी बन नहीं पाई रश्मिका ने बताया, "इसके बाद मैंने आखिरी बार एक फिल्म के लिए ऑडिशन दिया और मेरा सिलेक्शन भी हो गया। फिल्म का नाम 'गालारे गेलातीरे' था। हमने दो-तीन महीने तक उसकी ट्रेनिंग भी की, लेकिन दुर्भाग्य से वह फिल्म कभी शुरू ही नहीं हो पाई। मैं वापस घर आ गई और अपनी पढ़ाई में लग गई। उस वक्त मेरे माता-पिता ने भी कहा कि अब दो साल हो गए हैं, घर वापस आ जाओ। मैंने भी सोचा कि शायद मेरी जिंदगी का रास्ता यही है।" हालांकि उन्होंने खुद को संभाला और नए मौके तलाशना जारी रखा। रिजेक्शन ने सिखाया आगे बढ़ना रश्मिका मंदाना अक्सर कहती हैं कि करियर में मिले रिजेक्शन और असफलताएं ही उनकी सबसे बड़ी शिक्षक साबित हुईं। शुरुआती दिनों में कई ऑडिशन में उन्हें बिना स्पष्ट वजह के रिजेक्ट कर दिया गया। कई बार उन्हें चयन न होने की वजह भी नहीं बताई गई। शुरुआत में यह निराश करने वाला था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने समझ लिया कि मनोरंजन इंडस्ट्री में रिजेक्शन हर कलाकार की यात्रा का हिस्सा है और इसे व्यक्तिगत असफलता नहीं मानना चाहिए। रश्मिका का मानना है कि अगर वह शुरुआती झटकों से टूट जातीं, तो शायद कभी 'पुष्पा', 'एनिमल' और दूसरी बड़ी फिल्मों तक नहीं पहुंच पातीं। उन्होंने हर रिजेक्शन को खुद को बेहतर बनाने का अवसर माना। अपनी एक्टिंग, स्क्रीन प्रेजेंस और आत्मविश्वास पर लगातार काम किया। वह कह चुकी हैं कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि धैर्य, निरंतर मेहनत और खुद पर भरोसे से मिलती है। यही सोच उन्हें हर असफलता के बाद दोबारा खड़े होने और मजबूत होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रही। 'किरिक पार्टी' ने बदल दी जिंदगी रश्मिका ने कहा, "इसी दौरान मुझे 'किरिक पार्टी' का कॉल आया। मुझे लगता है कि वहीं से मेरी एक्ट्रेस के तौर पर असली यात्रा शुरू हुई। जब मुझे यह फिल्म मिली तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ। मैं बस यही सोच रही थी, 'वाह... ये कैसे हो गया?'" रश्मिका मंदाना ने 2016 में कन्नड़ फिल्म 'किरिक पार्टी' से अभिनय की शुरुआत की। पहली ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई और रश्मिका कर्नाटक की नई स्टार बन गईं। उनकी सहज एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने पसंद किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कन्नड़ फिल्म 'किरिक पार्टी' का निर्देशन कांतारा फेम एक्टर-डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी ने किया था। कन्नड़ सिनेमा में लगातार मिली सफलता 'किरिक पार्टी' के बाद रश्मिका ने कन्नड़ फिल्मों 'अंजनी पुत्र' (2017) और 'चमक' (2017) में काम किया। दोनों फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया और रश्मिका इंडस्ट्री की सफल अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। तेलुगु इंडस्ट्री में रखा कदम 2018 में रश्मिका ने तेलुगु फिल्म 'चलो' से डेब्यू किया। फिल्म सफल रही और तेलुगु दर्शकों ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। इसी साल आई 'गीता गोविंदम' में विजय देवरकोंडा के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही। फिल्म ने 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार किया और रश्मिका पूरे दक्षिण भारत में लोकप्रिय हो गईं। इसके बाद उन्होंने 'देवदास', 'डियर कॉमरेड', 'सरिलेरु नीकेवरु', 'भीष्म' और 'पुष्पा: द राइज' जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों ने उन्हें तेलुगु सिनेमा की टॉप अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। पुष्पा कैसे मिली? 'गीता गोविंदम', 'सरिलेरु नीकेवरु' और 'भीष्म' जैसी फिल्मों की सफलता के बाद निर्देशक सुकुमार ऐसी अभिनेत्री की तलाश में थे, जो 'श्रीवल्ली' के किरदार में गांव की सादगी और मजबूत भावनाओं को पर्दे पर उतार सके। रश्मिका की नैचुरल एक्टिंग और लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें यह रोल ऑफर किया गया। 2021 में रिलीज हुई 'पुष्पा: द राइज' में अल्लू अर्जुन के साथ उनकी जोड़ी पसंद की गई। फिल्म के गाने 'सामी सामी' और श्रीवल्ली का किरदार देशभर में लोकप्रिय हुआ। इसके बाद रश्मिका की पहचान सिर्फ साउथ तक सीमित नहीं रही और वह पैन इंडिया स्टार बन गईं। अमिताभ बच्चन की फिल्म से बॉलीवुड में हुई शुरुआत रश्मिका ने 2022 में अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'गुडबाय' से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। फिल्म को समीक्षकों ने पसंद किया, हालांकि बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह 'मिशन मजनू' (सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ) में नजर आईं। यह फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई और उनके अभिनय की सराहना हुई। 'एनिमल' से मिली नई पहचान 2023 में रिलीज हुई 'एनिमल' रश्मिका के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में उन्होंने रणबीर कपूर की पत्नी गीतांजलि का किरदार निभाया। यह किरदार सिर्फ ग्लैमरस नहीं था, बल्कि भावनात्मक रूप से मजबूत भी था। इस फिल्म से रश्मिका की लोकप्रियता हिंदी दर्शकों के बीच कई गुना बढ़ गई। सोशल मीडिया पर उन्हें लंबे समय से 'नेशनल क्रश' कहा जाता रहा है, लेकिन 'एनिमल' के बाद यह पहचान पूरे हिंदी बेल्ट में और मजबूत हो गई। क्या है 'नेशनल क्रश' की कहानी? रश्मिका को 2020 के आसपास सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर 'नेशनल क्रश ऑफ इंडिया' कहा जाने लगा। इसकी वजह उनकी मुस्कान, सादगी, इंटरव्यू में सहज अंदाज और दक्षिण भारत में मिल रही सफलता थी। बाद में 'पुष्पा' और 'एनिमल' जैसी फिल्मों ने इस लोकप्रियता को पूरे देश में बढ़ा दिया। हालांकि यह कोई आधिकारिक सम्मान नहीं, बल्कि फैंस और सोशल मीडिया द्वारा दिया गया संबोधन है। सफलता के साथ ट्रोलिंग भी झेली, कई विवादों में रहीं चर्चा का विषय रश्मिका मंदाना का करियर जितनी तेजी से आगे बढ़ा, उतनी ही बार उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा। सबसे बड़ा विवाद 2018 में अभिनेता रक्षित शेट्टी से सगाई टूटने के बाद हुआ। सोशल मीडिया पर एक वर्ग ने बिना ठोस जानकारी के उन्हें रिश्ता टूटने का जिम्मेदार ठहराया और लंबे समय तक निशाना बनाया। इसके बाद 2022 में एक इंटरव्यू के दौरान रश्मिका ने अपनी पहली फिल्म 'किरिक पार्टी' का जिक्र करते हुए प्रोडक्शन हाउस का नाम लेने के बजाय हाथ के इशारे (एयर कोट्स) का इस्तेमाल किया। इसे लेकर कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के कुछ प्रशंसकों ने इसे निर्देशक ऋषभ शेट्टी और प्रोडक्शन हाउस का अपमान बताया। इसी दौरान 'कांतारा' नहीं देखने वाले बयान पर भी उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचना झेलनी पड़ी। लगातार ट्रोलिंग पर रश्मिका ने नवंबर 2022 में सोशल मीडिया पर लंबा नोट लिखकर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा, "यह दिल तोड़ने वाला और हतोत्साहित करने वाला है कि मुझे उन बातों के लिए ट्रोल किया जाता है, जो मैंने कभी कही ही नहीं।" उन्होंने यह भी लिखा कि करियर की शुरुआत से ही उन्हें लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है और अब उन्हें लगा कि इस पर अपनी बात रखना जरूरी है। बाद में एक इंटरव्यू में रश्मिका ने कहा कि लोग उनके बोलने के तरीके, हाथ के इशारों और एक्सप्रेशन तक को गलत अर्थों में ले लेते हैं। उनके मुताबिक, पब्लिक फिगर होने के नाते वह समझती हैं कि हर कोई उन्हें पसंद नहीं करेगा, लेकिन अगर लोग किसी के प्रति दयालु नहीं हो सकते तो कम से कम बिना वजह नफरत नहीं फैलानी चाहिए। हालांकि, लगातार ट्रोलिंग और विवादों के बावजूद रश्मिका ने अपने काम पर फोकस बनाए रखा। आज वह भारतीय सिनेमा की सफल अभिनेत्रियों में शुमार हैं और उनकी फिल्मों का इंतजार दर्शक बेसब्री से करते हैं। रश्मिका की आने वाली प्रमुख फिल्में 1.रानाबाली यह 19वीं सदी की ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म है, जिसमें रश्मिका अपने पति विजय देवरकोंडा के साथ मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। पैन-इंडिया स्तर पर बनने वाली यह फिल्म तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज की जाएगी। इसमें विजय देवरकोंडा ने रानाबाली और रश्मिका मंदाना ने जयम्मा का किरदार निभाया है। 2. मायसा यह तेलुगु एक्शन ड्रामा फिल्म है, जिसमें रश्मिका ग्रामीण और आदिवासी पृष्ठभूमि वाले मुख्य किरदार में दिखाई देंगी। यह फिल्म 2026 के अंत तक सिनेमाघरों में रिलीज होने की उम्मीद है। 3. पुष्पा 3 - द रैम्पेज ब्लॉकबस्टर 'पुष्पा' फ्रैंचाइजी की तीसरी कड़ी में वह अल्लू अर्जुन के साथ एक बार फिर श्रीवल्ली का किरदार निभाएंगी। यह फिल्म 2028 या 2029 तक सिनेमाघरों में रिलीज होने की उम्मीद है। 4. एनिमल पार्क 'एनिमल' की सफलता के बाद वह संदीप रेड्डी वांगा की इस अगली क्राइम-ड्रामा फिल्म में भी दिखाई देंगी। इस फिल्म की रिलीज डेट अभी घोषित नहीं की गई है, क्योंकि इसकी शूटिंग 2027 के मध्य में शुरू होगी। 5. एटली की अगली फिल्म एटली के निर्देशन में बनने वाली इस आगामी तेलुगु फिल्म में रश्मिका की जोड़ी अल्लू अर्जुन के साथ बनेगी। इस फिल्म का आधिकारिक तौर पर 'राका' नाम दिया गया है। फिलहाल इस साइंस-फिक्शन फिल्म की आधिकारिक रिलीज डेट घोषित नहीं की गई है, लेकिन ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार इसके समर 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होने की उम्मीद है। _____________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... अरशद वारसी ने मरती हुई मां को नहीं पिलाया पानी:आज भी पछताते हैं, कभी बेची लिपस्टिक, 'सर्किट' की सफलता की उम्मीद नहीं थी 14 साल की उम्र में अरशद वारसी ने ऐसा दर्द देखा, जिसने उन्हें वक्त से पहले बड़ा बना दिया। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने मां को पानी नहीं दिया था और कुछ घंटों बाद उनका निधन हो गया। इस बात का मलाल उन्हें आज भी है। माता-पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। उन्होंने बसों और घर-घर जाकर लिपस्टिक बेची, फोटो लैब में नौकरी की और छोटे-छोटे काम करके गुजारा किया।पूरी खबर पढ़ें..

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14th c. papal bull seal found in Estonia

Archaeologists have discovered a 14th century papal bull in Tallinn, Estonia. It’s the first papal ever discovered in an archaeological context in Estonia. Only three other are known, and they are all still attached to the original documents that have been preserved in the Tallinn City Archives since they were sent.

The bull was unearthed in an excavation of the courtyard of the Soviet-era Eesti Projekt office building. Since excavations began last year, archaeologists have uncovered a medieval road, medieval ceramics, bricks, roof tiles and three wells. The lead bull was found this week.

Archaeologist Mihkel Tammet described the discovery as nothing short of sensational in the Estonian context. The object fits perfectly with the medieval finds of ceramics and other individual pieces that were recovered at this site.

The seal originates from a dark, medieval layer of soil that was deposited there over centuries. Mihkel Tammet suspects that the bulla was brought to its current location by waste or excavated earth from the old town.

Papal bulls are lead seals that were added to official letters or announcements issued by popes. This one was issued by Clement V who sat on the Throne of Peter from 1305 until his death in 1314. His name is inscribed on the obverse. The reverse bears the heads of saints Peter and Paul with beaded halos and a cruciform scepter between them.

Clement V issued several momentous papal bulls during his decade at the helm of the Church. He was French by birth and just an archbishop when King Philip IV of France strongarmed the conclave to elect him Pope. He never moved to Rome and was very much the French king’s man. He issued Vox in excelso abolishing the Templar order largely at Philip’s behest. He was also the pope who moved the curia to Avignon in 1309, launching the Avignon Papacy when seven popes in a row lived and administered the Church from Avignon. The papacy only returned to Rome in 1376.

The document the seal was attached to has not survived, so we don’t know exactly when it was sent to Tallinn, but very few of them made their way so far into Eastern Europe. For comparison, 24 papal bullae have been archaeologically excavated in London.



* This article was originally published here

Music fans have spoken - who should be in the Scottish Rock and Roll Hall of Fame?

Some of the biggest names in Scottish music are supporting a bid to create a Scottish Rock and Roll Music Hall of Fame.

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Name of 8th c. Maya astronomer deciphered

A text of Maya glyphs painted on a Classic period (250–900 A.D.) building at the ancient site of Xultun, Guatemala, has been discovered to record an astronomical formula that concludes with the name of its author: “so says Sak Tahn Waax” (meaning White-Chested Fox). He is the first mathematician and astronomer in the Americas known by name.

Mathematics and astronomy were highly regarded subjects of scholarship in Maya society, studied by scribes and religious figures and used to predict astronomical phenomena and guide human calendars and activities to move in concert with heavenly cycles. Complex mathematical and astronomical calculations played an important role in Maya culture during the Classic period, and are referred to in official inscriptions on murals, stelae and ritual offerings.

As an astronomer and mathematician, White-Chested Fox would have observed natural cycles and made calculations the political and religious elite then used to make major decisions, like when to crown a king or build major public monuments on the Maya 260-day ritual calendar.

The inscription was first discovered in 2010 when archaeologists found a looters’ tunnel that exposed part of a mural. They excavated the hole and uncovered a large chamber with murals on the wall. On the inner east wall, a layer of plaster was applied and “microtext” glyphs written on it. The paint was heavily faded, so the team scanned, drew and photographed the microtexts so they could be digitally enhanced for legibility. In total, they were able to identify 52 mathematical and astronomical texts on that one wall.

Massachusetts Institute of Technology archaeologist Franco D. Rossi and lead author of the research paper published in the journal Antiquity, found the key clue to decipher the inscription. He recognized it as a celestial chronology and together with the research team was then able to figure out that the glyphs recorded the time it took for plants to return to a given position after a turn around the sun. White-Chested Fox took these individual observations and combined them into one mathematical formula, then signed his work.

Significantly, these inscriptions appear to be “rough draft” calculations for the content of codices produced by the Maya within the residential complex. The researchers liken this discovery to finding a sketch of a great work of art. The team also unearthed papermaking tools in and near the chamber, suggesting that it may have been a place where people were trained in calendrical calculations—based on the titles of scribes shown in the wall paintings. […]

Rossi notes that, for the moment, only a handful of the chamber’s often highly eroded texts have been fully analysed and deciphered. This makes the continued analysis of all the microtexts a focus for future research. The team also hopes to identify the different scribal hands at work in the painted chamber—it is possible that Sak Tahn Waax wrote other texts there, too—and they plan to continue their archaeological survey and documentation across the city of Xultun, of which 900 hectares of urban zone remain covered by forest.



* This article was originally published here

BBC 'working hard' on future of Doctor Who, new BBC director general says

The sci-fi series currently faces an uncertain future after its annual Christmas special was axed for the second year in a row.

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Iron shackles, metallurgy remains found in Gallic settlement

Archaeologists have discovered the remains of a Gallic settlement dating to the third century B.C. in Allonnes, northwestern France, with a large metalworking district marked by numerous metal tools, raw materials and metallurgy waste. The team also unearthed at least five iron shackles for wrists and ankles, an extremely rare find for Iron Age Gaul.

Their presence suggests that the slave trade likely took place within the Gallic settlement of Allonnes. Generally speaking, traces relating to the poorest members of Gallic society, and especially those of servile populations, remain invisible. Those enslaved may have been prisoners of war, convicts, or individuals owing unpaid debts. Men, women, and children became individuals without rights, mere objects of property that could be resold by their owners.

The settlement was at the intersection of several ancient thoroughfares, which explains why it had such a large and vibrant neighborhood of artisan workshops, including the metalworking district. The remains of small buildings on posts were found over numerous squares. These were probably workshops or storefronts where products manufactured in the workshops or locally harvested and processed foodstuffs were sold.

The excavation also uncovered the remains of a sanctuary that was in use for almost 8 centuries, continuing to draw worshippers after the settlement itself was abandoned.

Numerous rituals—likely reserved for a select few members of the priesthood, such as the druids—were performed there, while others, accessible to the entire population, took place directly in a public space adjacent to the religious building. A multitude of weapons (swords, scabbards, spearheads, etc.) and several hundred coins, both Gallic and Roman, spanning more than five centuries, were deposited as offerings to the gods. Small objects made of copper alloy (harness fittings, keys, etc.) as well as clothing and jewelry (fibulae, amulets, rings), also used as offerings, were also discovered.

Whether placed within the sanctuary or in votive spaces outside, many of these offerings bear traces of deliberate deformation or mutilation. This symbolic act aimed to strip the object of its functional and/or commercial character, transforming it into a gift for the gods. Thus, many of the weapons unearthed by archaeologists have been twisted, bent, or sheared. Similarly, a third of the coins discovered at Allonnes have been mutilated with chisels, filed, or sheared.

Between the marketplace, workshops and sanctuary with its offerings, archaeologists recovered a large number of metal objects of unusual variety. They are now being analyzed and conserved by experts at the Arc’antique laboratory in Nantes. To clean some of the thick coatings of corrosion material, the team is using techniques like chemical baths and micro-sandblasting as well as precision scalpel work.



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