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» » » पत्रकार से एक्ट्रेस बनीं दीक्षा जुनेजा:पैसों के लिए एक्टिंग में आईं, ऋषि कपूर की फिल्म से डेब्यू, OTT के हर प्लेटफॉर्म पर अब इनका शो

दीक्षा जुनेजा इंडस्ट्री की उभारती कलाकार हैं। हाल ही में वो नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘सारे जहां से अच्छा’ में नजर आई है। इस सीरीज में उन्होंने इंडस्ट्री की कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है और उनसे अपने काम के लिए तारीफें भी बटोरी है। दिवंगत एक्टर ऋषि कपूर के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाली दीक्षा एक्ट्रेस बनने से पहले कास्टिंग असिस्टेंट थीं और उससे पहले जर्नलिस्ट। आज वो ओटीटी के हर प्लेटफॉर्म के लिए काम कर चुकी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में दीक्षा ने अपनी जर्नी के बारे में खुलकर बात की है। दीक्षा, आपकी सीरीज ‘सारे जहां से अच्छा’ नेटफ्लिक्स पर आई है। इसमें काम करने का अनुभव कैसा रहा? मैंने इस सीरीज में ‘नसीम’ का रोल प्ले किया है। मेरी जर्नी बहुत ही हसल वाली रही है। वेब सीरीज मुझे ऐसे मिली कि मेरी एक मीटिंग गौरव शुक्ला से हुई, जो इस सीरीज के असिस्टेंट डायरेक्टर थे। अगले ही दिन उनका कॉल आया और मुझे रोल मिल गया। मुझे इंतजार नहीं करना पड़ा, काफी जल्दी काम मिल गया। उसके बाद किरदार के लिए मैंने उर्दू डिक्शन की क्लास ली, क्योंकि इस रोल में पंजाबी और उर्दू का बैलेंस चाहिए था। मैं पंजाब से हूं तो पंजाबी आती थी, लेकिन ध्यान इस बात का रखना था कि मेरी पंजाबी भारतीय वाली ज्यादा न लगे, बल्कि पाकिस्तानी साउंड करे, यही सबसे मुश्किल था। हमारे डिक्शन कोच ईश्राग जी थे, जो रिहर्सल करवाते थे। इससे पहले मैंने एक शॉर्ट फिल्म में ‘राहिला’ नाम का मुस्लिम किरदार निभाया था, उसमें उर्दू सीखी थी, तो अब ज्यादा वक्त नहीं लगा। मेरा मानना है कि एक्टर के तौर पर तलफ्फुज साफ होना चाहिए,एक्टिंग में ये सब बहुत काम आता है। मैं नुसरत साहब के गाने सुनती हूं, वहां से भी बहुत कुछ सीखा। मैंने दो हफ्तों में किरदार के बोलने लायक उर्दू सीख ली थी। सीरीज में प्रतीक गांधी, रजत कपूर और तिलोत्तमा शोम जैसे बड़े कलाकार हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? मुझे जब पता चला कि ये सारे सीरीज का हिस्सा हैं और मुझे इनके साथ काम करने का मौका मिलेगा तो मैं बहुत खुशी हुई थी। मैं तिलोत्तमा मैम की बहुत बड़ी फैन हूं। हालांकि, कई कलाकारों के साथ मुझे सीन शूट करने का मौका नहीं मिला, लेकिन इस बात से बहुत खुशी थी कि जिनके काम देखकर सीखा है, उनके साथ शो शेयर कर रही हूं। सभी एक्टर बहुत स्किल्ड और और अपना काम में काफी अच्छे हैं। मैं सेट पर इन सबसे मिल नहीं पाई क्योंकि हमारे साथ में सीन नहीं थे। लेकिन मैं शो के सक्सेस पार्टी में पहली बार सबसे मिली। मुझे नहीं लगा था कि मेरा किरदार नसीम को इतना प्यार मिलेगा। उस पार्टी में हर कोई शो के साथ मेरे कैरेक्टर के बारे में बात कर रहा था। प्रतीक गांधी और उनकी वाइफ ने मेरी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शो में मेरा काम बहुत पसंद आया। हम तुम्हें और देखना चाहते थे। हमारे बच्चों को भी तुम्हारा काम पसंद आया। वहीं, रजत कपूर सर पहले पार्टी में मुझे पहचान नहीं पाए। जब मैंने उन्हें बताया कि मैंने शो में नसीम प्ले किया है फिर वो हैरान रह गए। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं आपको पहचान नहीं पाया क्योंकि आप सामने से इतनी अलग लगती हैं। वो पंद्रह मिनट मेरे साथ बैठे और मुझसे बात कीं। मेरी काम की तारीफ की। सीन्स के बारे में डिस्कशन किया। इस तरह वो रात मेरे लिए यादगार बन गई। आपकी फिल्मोग्राफी देखें तो अपने लगभग हर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काम किया है। इसे आप कैसे देखती हैं? मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यहां तक पहुंचूंगी। मैं तो एक्टर बनना ही नहीं चाहती थी, लेकिन किस्मत में था। लोग आकर बताते हैं कि उन्होंने मुझे ओटीटी की फलां सीरीज में देखा है तो अच्छा लगता है। हर प्लेटफॉर्म पर मेरा कोई ना कोई एक शो है, मतलब हर ऑडियंस तक मेरा काम पहुंच रहा है। इससे अच्छा क्या होगा एक एक्टर के लिए कि लोग आपके काम को पहचानते हैं। बतौर एक्टर आप यही तो चाहते हैं कि ऑडियंस तक आपका काम पहुंचे। आपने हर तरह के जॉनर में काम किया है, तो आपको खुद कौन सा रोल करना ज्यादा पसंद है- कॉमेडी, स्पाई या एक्शन? मेरे लिए ड्रामा करना आसान है, लेकिन कॉमेडी परफॉर्म करने में ज्यादा मजा आता है। मैं खुद बड़ी फनी हूं तो परफॉर्म करना आसान हो जाता है। जैसी हूं वैसा ही आ जाता है। किसी सीन को देखकर रो देना इतना मुश्किल नहीं, लेकिन कॉमेडी मुश्किल है। जोक सही जगह लैंड करे, इसका ध्यान रखना पड़ता है। ये सब मैंने थिएटर से सीखा है। मैं फिल्म ‘हेरा फेरी’ की बहुत बड़ी फैन हूं। मैं इस फिल्म को 50 से 100 बार देख चुकी हूं। परेश रावल की एक्टिंग पसंद है, उनकी नकल भी उतारती थी। आपकी जर्नी काफी दिलचस्प रही हैं। चंडीगढ़ की लड़की पहले जर्नलिस्ट बनीं फिर कास्टिंग असिस्टेंट और अब एक्ट्रेस। इतना ट्रांजिशन कैसे हुआ? मुझे स्कूल में स्टेज परफॉर्मेंस बहुत पसंद थी। कुछ भी होता, मैं सबसे पहले स्टेज पर पहुंच जाती थी। पेरेंट्स टीचर से कहते “बस करो, इससे क्या-क्या करवाओगे।” छोटे शहर से थी, तो किसी ने कभी कोई बड़ा सपना दिखाया नहीं, सब हॉबी बनकर रह गया। जब मैं बीकॉम कर रही थी, तो मैं पढ़ाई से बोर हो गई थी। बोरियत भगाने के लिए पंजाबी फिल्मों वॉइस मॉड्यूलेशन करना शुरू किया था। एक्स्ट्रा इनकम भी हो जाती थी। डबिंग के दौरान दोस्तों ने सजेस्ट किया कि इसका कोर्स कर लो। फिर माय एफएम रेडियो में इंटर्न किया। वहां लगा कि आवाज के साथ-साथ मेरा चेहरा भी दिखना चाहिए क्योंकि मैं काफी एक्सप्रेसिव हूं। इसके बाद जर्नलिस्ट बनने का सोचा। दिल्ली में NDTV में इंटर्न कर रही थी, तभी कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा से मुलाकात हुई। उन्होंने पूछा एक्टिंग करनी है? मैंने कहा-नहीं सर, बिहाइंड द स्क्रीन काम करना है। फिर 2-3 महीने में उनके ऑफिस से कॉल आया कि असिस्टेंट डायरेक्टर की पोस्ट पर काम करना है क्या? फिर मैं दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हुई। भगवान का शुक्र है कि अच्छे लोग मिले और किस्मत यहां तक ले आई। कास्टिंग असिस्टेंट के तौर पर आपका पहला प्रोजेक्ट कौन सा था और आपने उससे क्या सीखा? मैंने कास्टिंग में ‘दंगल’ के लिए मुकेश छाबड़ा को असिस्ट किया था। वो मेरा पहला प्रोजेक्ट था। मैंने वहां जितना सीखा, शायद कोई एक्टिंग स्कूल भी ना सिखा पाए। हमें ‘दंगल’ की स्क्रिप्ट दी गई थी कि कैसे कैरेक्टर चाहिए, उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी होनी चाहिए, सबकुछ। नीतेश सर खुद बताते थे कि लड़की पहलवान जैसी दिखनी चाहिए। हम 6 महीने तक हर स्पोर्ट्स एकेडमी में गए। एक और दिलचस्प बात कि सारी ऑडिशन क्लिप आमिर सर और नीरज सर ने खुद एक-एक करके बैठकर देखी। मुकेश सर के साथ काम करते हुए एक बात मैंने जरूर सीखी कि वो ऑडिशन के वक्त परफॉर्मर को सिर्फ फ्रेम नहीं देते, उसे पूरा बैकग्राउंड और फील देते हैं, जैसे शूटिंग चल रही हो। मैंने ‘दंगल’ में असिस्टेंट के तौर पर काम करने के बाद ऋषि कपूर सर के साथ फिल्म ‘राजमा चावल’ से अपना एक्टिंग डेब्यू किया। उसके बाद बतौर एक्टर एमएक्स प्लेयर के लिए ‘गर्लफ्रेंड चोर’, जी के लिए ‘यूनाइटेड कच्चे’ शो, फिर रितेश देशमुख के साथ जियो के लिए ‘पिल’, अमेजन प्लयेर के लिए ‘मिट्टी’ और अब नेटफ्लिक्स के लिए ‘सारे जहां से अच्छा’ जैसी सीरीज में काम किया। जल्द ही नागेश कुकनूर के साथ ओटीटी पर मेरा एक और शो आने वाला है। कैमरे के पीछे से एक्टिंग की तरफ सफर कैसे शुरू हुआ? ऑडिशन की कोई याद? मुंबई बहुत महंगा शहर है। यहां पर सैलरी के साथ गुजारा मुश्किल था, तो एक्स्ट्रा पॉकेट मनी के लिए मैंने एड करना शुरू किया। दोस्तों ने भी कहा था कि “तू एड कर, अच्छी दिखती है।” इसलिए ऑफिस के ऑफ डे पर ऑडिशन के लिए जाती थी। साथ ही जब मेरे ऑफिस में कोई एक्टर आते थे, तो मोटिवेट होती थी कि मैं भी ऐसा कर सकती हूं। इसके अलावा मैं कास्टिंग में काम कर रही थी तो वहां से मेरा कास्टिंग में नेटवर्क बन गया था, वहां से मदद मिलती थी। फोन करके कास्टिंग टीम को बता देती थी कि मैं एक्टिंग भी कर रही हूं। कोई रोल हो तो ऑडिशन देना है मुझे भी। मुश्किल था मैनेज करना, लेकिन जैसे ही एक्टिंग में मौका मिला तो मैंने जॉब छोड़ दी। पहला एड मैंने होंडा एक्टिवा के लिए किया। दूसरा एड मैंने विक्रमादित्य मोटवानी के लिए आईफोन का एड किया। सेट पर मजा आया। और उसे सेट पर तय किया कर लिया था कि अब इस एक्टिंग करियर को सीरियसली लेना है। ‘राजमा चावल’ में ऋषि कपूर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? ‘राजमा चावल’ मेरे लिए बहुत खास था। पहले रीडिंग में ही ऋषि सर ने मुझे कॉम्प्लीमेंट देते हुए कहा था मुझसे कि ‘तू तो बहुत सही कर रही है।’ एक नए एक्टर को ऐसा ही पुश चाहिए होता है। उन्होंने मेरे बारे में दूसरों से पूछा से भी कि ‘ये कहां से आई है?’ जब पता चला पंजाब से हूं, तो और भी जुड़ाव हो गया। मेरा किरदार ‘राजपारो’ भी पंजाब से थी, जो दिल्ली में रहती है। ऋषि सर को लेकर मैं बताना चाहूंगी कि वो नए एक्टर को कितने अच्छे से ट्रीट करते हैं। मेरा पहला पहला प्रोजेक्ट था, तो मेरे पेरेंट्स सेट पर आए थे। उन्होंने मेरी बहुत फ्रिक थी कि ये मुंबई में कैसे रहेगी। ऋषि सर ने मेरे पेरेंट्स से जिस तरह मेरी तारीफ की, वो इतना आश्वस्त करने वाला था कि मैं उसे कभी नहीं भूल पाऊंगी। मेरे पेरेंट्स भी चिंता मुक्त हो गए थे। आपने ओटीटी पर काफी काम किया है। बड़े पर्दे पर कब नजर आएंगी? सपना तो है बड़े पर्दे पर आने का और शायद जल्द कोई मौका मिले। कुछ मौके आए भी थे, लेकिन उतने चैलेंजिंग नहीं थे, इसलिए नहीं किया। अब अगर कुछ अच्छा आएगा तो जरूर करूंगी। मैं बड़े पर्दे पर लव स्टोरी और रोमांटिक रोल करना चाहती हूं। मैं शाहरुख खान को देखकर बड़ी हुई हूं और आजकल लव स्टोरी कम बन रही हैं। ऐसे में मैं लव स्टोरी करना चाहूंगी। साथ ही मेरे फेवरेट डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी हैं, जिनके साथ काम करने का सपना है। और रही एक्टर्स की बात, जिनके साथ काम करना का सपना है, वो तिलोत्तमा शोम, शाहरुख खान और रणबीर कपूर, इनके साथ स्टेज शेयर करने की ख्वाहिश है।

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