WHAT’S HOT NOW

GOPAL KRISHNA SAD SONGS 003

GOPAL KRISHNA SAD SONGS 002

GOPAL KRISHNA SAD SONGS 001

ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

LIVE LIVE - The Car Festival Of Lord Jagannath | Rath Yatra | Puri, Odisha

Ad Code

Responsive Advertisement

Lorem Ipsum is simply dummy text of the printing and typesetting industry. Lorem Ipsum has been the industry's.

LIVE - The Car Festival Of Lord Jagannath | Rath Yatra | Puri, Odisha)

PDF Life Edited

PDFLifeEdited - Free Online PDF Compression Tool

PDFLifeEdited

Compress and optimize your PDF files while preserving quality. Perfect for email, web, and storage.

Drag & Drop Your PDF Here

or click to browse files (PDF documents only)

Medium

Downscaling

Quality

Format

0 MB
Original Size
0 MB
Compressed Size
0%
Size Savings

Advertisement

Google AdSense Ad Unit

Ad Unit ID: YOUR_AD_UNIT_ID

Premium Features

Upgrade to Pro for Batch Processing

Unlock premium features

Fast Compression

Compress PDFs in seconds with our optimized algorithm

Secure & Private

All processing happens in your browser - no server uploads

Mobile Friendly

Works perfectly on all devices and screen sizes

High Quality

Maintain document quality while reducing file size

Optimize Your PDFs for Better Performance

PDF compression is essential for efficient document management. Large PDF files can be difficult to share via email, take up unnecessary storage space, and slow down website loading times. Our free online PDF compressor helps you reduce file size without compromising on quality, making your documents more accessible and easier to share.

Compressed PDFs improve your website's performance metrics, which are crucial for SEO. Search engines prioritize websites that offer excellent user experiences, and fast-loading pages are a key component of that. By using our tool, you can ensure your PDFs are optimized for both desktop and mobile viewing.

Our tool includes advanced image optimization options that allow you to reduce the size of images within your PDF documents. You can choose different compression levels, downscaling options, and output formats to achieve the perfect balance between file size and visual quality.

© 2025, Styler Theme. Made with passion by Mr. Gopal Krishna Varik. Distributed by SGK. All Rights Reserved.

» » » अमिताभ से पहली मुलाकात में स्टार-स्ट्रक हुए राघव:‘तस्करी’ के डायरेक्टर बोले- हर स्टार का अलग औरा, इमरान ने फर्स्ट टेक में ही दिखाया मैजिक

नीरज पांडे की ‘तस्करी' नेटफ्लिक्स ग्लोबल टॉप 10 नॉन इंग्लिश टीवी लिस्ट में नंबर 1 स्पॉट पर पहुंचने वाली पहली भारतीय सीरीज बन चुकी है। यह सिर्फ शो के लिए बल्कि बड़े पैमाने पर भारतीय कहानी कहने के लिए भी एक अहम पल है। इस शो को नीरज पांडे के साथ राघव एम.जयराथ और बी.ए फिदा ने डायरेक्ट किया है। इस सीरीज में इमरान हाशमी के साथ जोया अफरोज, अमृता खानविलकर, शरद केलकर, नंदीश सिंह संधू और अनुराग सिन्हा लीड रोल में हैं। यह सीरीज एयरपोर्ट कस्टम और स्मगलिंग की हाईटेक दुनिया की कहानी है। हाल ही में इस सीरीज को लेकर राघव एम. जयराथ ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: हर तरफ ‘तस्करी’ की चर्चा हो रही है। दर्शकों की जिस तरह से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, वो सब आप देख रहे हैं। कैसा लग रहा है? जवाब: बहुत अच्छा लग रहा है। मैं हमेशा कहता हूं कि ये हमारा बाय-प्रोडक्ट है, जब हम कोई अच्छी चीज बना लेते हैं। अभी तो मैं, मेरी फैमिली, हमारी पूरी टीम, आर्टिस्ट्स और सब टैलेंट्स जो इसमें लगे थे। सब टॉप ऑफ द वर्ल्ड महसूस कर रहे हैं। सवाल: इमरान हाशमी ने एक वीडियो डाला है, जिसमें वो दर्शकों, फैंस और आपको सबको धन्यवाद दे रहे हैं। कह रहे हैं कि इस सीरीज को इतना प्यार मिला। इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? जवाब: मुझे लगता है इमरान ने बिल्कुल सही कहा। हमें जितना प्यार मिल रहा है, वो टीम की मेहनत का नतीजा है। कहानी पर इतनी रिसर्च की गई। कस्टम वाले लोगों की भी मेहनत कम नहीं, वो रोज फाइट करते हैं, सिस्टम के गैप्स भरते हैं। क्रिमिनल्स नई तकनीक बनाते रहते हैं, वो उन्हें रोकते हैं। हम उनसे ही इंस्पायर्ड हुए। नीरज पांडे सर के साथ को-डायरेक्ट करने का मौका मिला। हम सब खुश हैं, बहुत प्यार मिला। इसे कस्टम डिपार्टमेंट को भी डेडिकेट करना चाहूंगा। सवाल: इस कहानी का आइडिया कहां से आया? जवाब: नीरज सर बेहतर बता पाएंगे। लेकिन एयरपोर्ट पर शूटिंग के दौरान कस्टम वालों को देखते रहते हैं। बैगेज चेक करते समय सवाल पूछते हैं, वो क्यूरियस लगता है। कस्टम्स लोगों से मिले तो उनकी स्टोरीज पता चलीं। यूनिफॉर्म वालों को हमेशा रिस्पेक्ट मिलता है। मेरे पिता आर्मी में थे, चंडीगढ़ कनेक्शन है। हर जगह घूमे, लोकल कल्चर फील किया। कस्टम को दिखाने का आइडिया वहीं से आया, उन्हें सलाम। सवाल: कस्टम की ड्यूटी हीरो जैसी लगती है, लेकिन आम लोगों को इसकी असलियत नहीं पता। आपने इसे रियल रखा, न गोलियां-बम, न हीरो वाली फील। रियलिटी और सिनेमाई बैलेंस कैसे किया कि एंगेजिंग बनी? जवाब: स्क्रिप्ट में नीरज सर ने रियल रखा। रिसर्च में तय किया कि कोई गाड़ी उड़ाना, बम या गोलियां नहीं होगी। कस्टम वाले दिमाग से खेलते हैं। एयरपोर्ट पर बैग चेक से पहले पता चल जाता है। आपकी बॉडी लैंग्वेज, चाल से बता देते हैं कि एक्स्ट्रा फोन, आईपैड या बॉटल है या नहीं। ट्रैफिक पुलिस जैसा। सवाल:आप नीरज पांडे के साथ असिस्टेंट के तौर पर सालों काम कर चुके हैं। डिस्कवरी की 'सीक्रेट्स' के बाद ये इंडिपेंडेंट था। पहली बार कब पता चला कि ‘तस्करी’ पर आप लीड करोगे? जवाब: 'सीक्रेट्स ऑफ बुद्ध' डॉक्यूमेंट्री के दौरान रिसर्च चल रही थी। नीरज सर की तस्करी वाली स्क्रिप्ट लिखाई चल रही थी, मुझे इंटरेस्ट हो गया। एक दिन सर ने स्क्रिप्ट दी और बोले कि पढ़कर नोट्स बनाओ। 10 दिन बाद लौटे, विपुल जी के साथ फाइनल ड्राफ्ट देखा। 5-6वें एपिसोड की रीडिंग पर अचानक सर ने पूछा, "करना चाहोगे?" मैं हैरान रह गया। वो ड्रीम पूरी हो गई। नीरज सर ने मौका दिया, यहीं से तस्करी की जर्नी शुरू हुई। सवाल: स्क्रिप्ट की रीडिंग के समय कास्टिंग फाइनल हो रही थी या बाद में? जवाब: नीरज सर पहले कहानी लिखते हैं, फिर किरदार पेपर पर बनाते हैं। जिसमें पर्सनालिटी, बाउंड्रीज, डायलॉग्स तय होता है। 7वें एपिसोड के बाद डिस्कशन शुरू हुआ। ट्रिकी रोल था, किसी ने नाम नहीं सुझाया। नीरज सर ने इमरान हाशमी का नाम लिया। सभी इमरान हाशमी के नाम पर सहमत हो गए। सवाल: इमरान का नाम सुनकर आपकी क्या फीलिंग हुई? जवाब: बहुत अच्छी लगी, क्योंकि इमरान सर फैंटास्टिक एक्टर हैं। उन्होंने ‘शंघाई’ और ‘हक’ जैसी फिल्मों में डायवर्स रोल्स निभाए। एक्सपेरिमेंट करते हैं। अर्जुन मीणा के किरदार के लिए परफेक्ट लगे। एक सेकंड में फिट हो गए। रिजल्ट सामने है, ऑडियंस को उनका रोल और कहानी पसंद आ रही है। सवाल: पहले दिन का शूट कैसा रहा? और आप एक्टर्स को उनके कैरेक्टर नेम से पुकारते हैं, जैसे इमरान को अर्जुन। इसके पीछे क्या वजह है? जवाब: कोई प्लान्ड वजह नहीं। शूटिंग के दौरान उसी वर्ल्ड में ही रहना चाहता हूं। इमरान सर को अर्जुन, अमृता को मिताली बोलता था। सभी एक्टर्स को उनके कैरेक्टर के नाम से ही बुलाता था। एक दिन अमृता ने कहा कि मेरा नाम भी तो अमृता है। मैंने कहा कि शूट खत्म होने तक तुम वही किरदार हो। सवाल: इमरान हाशमी के साथ पहले दिन शूट कैसा रहा? जवाब: बहुत अच्छा एक्सपीरियंस रहा। नीरज सर गाइड करने आए। आउटडोर शूट, सब किरदार-टीम एक साथ। इमरान जी बहुत ही प्रोफेशनल और डेडिकेटेड एक्टर हैं। इतनी तैयारी के साथ आते हैं कि फर्स्ट टेक में मैजिक दिखा देते हैं। पहले 2-3 दिन सेटल होने में लगते हैं। हमारा क्रू पुराना था, लेकिन डायरेक्टर बनकर कमांड देना मेरे लिए नया था। पहला दिन थकान भरा रहा, लेकिन आखिरी दिन अब लोग अभूत ही इमोशनल हो गए थे। सवाल: इमरान से पहली मुलाकात कब हुई? जवाब: पहली मुलाकात तो ऑफिस में ही हुई थी। जब वो स्क्रिप्ट की नरेशन सुनने आए थे। सीधे नीरज सर के केबिन में गए। हमें लगा कि 2-3 घंटे के बाद केबिन से निकलेंगे, लेकिन नीरज सर ने ऐसा ब्रिलियंट नरेशन दिया कि 3-4 मिनट में ही बाहर आ गए। फिर कुछ दिनों तक ऑफिस में रीडिंग्स कीं, किरदार समझा। एक बार फ्लश आउट हुआ, फिर सीधा शूट पर मिले। सवाल: इमरान के साथ आपने इतना समय बिताया, सबसे अच्छी बातें क्या लगीं? जवाब: ब्रिलियंट इंसान हैं। सबकी मेहनत समझते हैं, सबको बराबर ट्रीट करते। बहुत ही डेडिकेटेड एक्टर हैं। डायलॉग सोच-समझकर ऐसा बोलते हैं कि फर्स्ट टेक में जादू नजर आता है। कैमरे में उनकी आंखों से इमोशन दिखता है। सेट छोड़कर कभी नहीं जाते थे। सवाल: एयरपोर्ट जैसे लाइव लोकेशन पर शूटिंग करना कितना मुश्किल रहा? जवाब: बहुत मुश्किल था। इमरान को देखने के लिए क्राउड जमा हो जाती थी। क्राउड की वजह से 2 घंटे में कई सीन शूट करने पड़े। एयरपोर्ट पर एंट्री के लिए 3-4 घंटे पहले पहुंचना पड़ता था। कैमरा, जूनियर आर्टिस्ट सब स्कैन होते हैं। कॉस्ट्यूम ले जाना हो तो कैंची तक नहीं मिलती। मेकअप सामान सीमित, हल्का ट्रिम भी मुश्किल होता था। एक बार अंदर चले गए तो पैकअप होने के बाद ही वापस आ सकते थे। सवाल: सुबह का समय एयरपोर्ट पर बहुत भीड़ भाड़ वाला होता है? जवाब: हां, यात्री फ्लाइट पकड़ने जाते, लेकिन इमरान सर को देखने के लिए फ्लाइट मिस कर देते थे। क्राउड इधर उधर भागता था। हम कहते थे कि इमरान सर उधर गए, फिर छुपाकर सीन शूट करते थे। कभी पीछे कोई दिख जाता था तो रीटेक करना पड़ता था। सवाल: सीरीज की सबसे खूबसूरत चीज क्या लगी, और सबसे इमोशनल पल कौन सा था? जवाब: लास्ट डे शूट सबसे इमोशनल था, क्योंकि टीम से बिछड़ना पड़ता है। फिर एडिटिंग, म्यूजिक, ग्राफिक्स का काम शुरू। Netflix ने पूरा साथ दिया, डेडलाइन रखी। आर्मी से डिसिप्लिन मिला, लेकिन नीरज सर का लेवल अलग ही रहा। रेकी में सबसे आगे रहते थे। सेट पर दिनभर खड़े रहते थे। सवाल: नीरज पांडे के साथ कई प्रोजेक्ट में आप काम कर चुके हैं। उससे पहले टीवी शोज (KBC, बिग बॉस, सच का सामना) में फ्लोर डायरेक्टर के तौर पर एक्सपीरियंस और लर्निंग क्या रही? जवाब: बहुत अलग लर्निंग रही। 2007 में इंडस्ट्री में आया। 'ए वेडनेसडे' फिल्म देखने के बाद नीरज सर से जुड़ने का मन था। ‘स्पेशल 26’ से पहले मुझे टीवी में मौका मिला। संदीप कौल, आनंद सर, सिद्धार्थ बासू, हुजैफा भाई, अरुण जी ने गाइड किया। नॉन-फिक्शन में रियलिज्म हाई था। सवाल: टीवी में लाइव शोज पर रिटेक नहीं ले सकते, एक्सपीरियंस कैसा रहा? क्या सीखा? जवाब: लाइव में परफेक्शन जरूरी होती है, रीटेक की हिम्मत नहीं होती है। जब नीरज सर के साथ फिल्म ‘बेबी’ में काम कर रहा था तब अक्षय सर से सीखा रीटेक कितना आसान होता है। रीटेक का मतलब अलग-अलग एंगल से शॉटलेना भी होता है। India's Got Talent पर रॉ टैलेंट देखा। छोटे शहरों से आए बच्चे, मोटिवेट होते हैं। टीआरपी से ऊपर क्रू का पैशन देखा। नीरज सर, शीतल भाटिया सर ने प्यार, डांट और क्रिएटिव फ्रीडम दी। डॉक्यू से फिक्शन तक को-डायरेक्ट का चांस दिया। सवाल: शुरुआत में जब आप नॉन-फिक्शन शोज कर रहे थे। जब अमिताभ बच्चन जैसे बड़े-बड़े स्टार्स से मिलना हुआ तो क्या कभी स्टार-स्ट्रक महसूस हुआ था? जवाब: जी हां, बिल्कुल। इतने बड़े कलाकारों का एक अलग ही औरा होता है। उनके सामने आते ही आदमी थोड़ा खो-सा जाता है। वो सिर्फ किरदार नहीं होते, एक पूरी मौजूदगी होती है। सवाल: अमिताभ बच्चन से पहली मुलाकात कैसी रही? जवाब: सच कहूं तो आवाज ही नहीं निकलती थी। पहली बार जब उन्होंने मुझसे कुछ कहा, तो मैं इतना नर्वस था कि समझ ही नहीं पाया उन्होंने क्या कहा। बाद में कंट्रोल रूम जाकर लोगों से पूछा कि उन्होंने कहा क्या था। सब लोग मेरे ऊपर हंसने लगे थे, लेकिन धीरे-धीरे आदत पड़ी, लेकिन पहली मुलाकात में तो इंसान बिल्कुल थम हो जाता है। सवाल: और बाकी स्टार्स के साथ भी ऐसा हुआ? जवाब: हां, जैसे माधुरी दीक्षित का मैं बहुत बड़ा फैन हूं। एक डांस शो में मुझे उन्हें स्क्रिप्ट समझाने वैनिटी में जाना था। उन्होंने स्माइल किया और मैं 10–15 सेकंड तक बस उन्हें देखता रह गया। फिर उन्होंने खुद मुझे बैठाया, तब जाकर मैं नॉर्मल हुआ। शाहरुख खान सर भी कई बार KBC के सेट पर आए। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करते हुए स्टार-स्ट्रक से ज्यादा उनके औरा से इंसान सम्मोहित हो जाता है। सवाल: नीरज पांडे के साथ काम करते हुए कोई यादगार अनुभव? जवाब: बहुत सारे। उन्हें शूट करते देखना अपने आप में एक सीख है। वो तब तक लिखना शुरू नहीं करते जब तक उन्हें पूरी क्लैरिटी न हो। कई बार हम स्क्रिप्ट पढ़कर सोचते हैं कि सीन ऐसे होगा, लेकिन शूट पर वो उसे पूरी तरह उलट देते हैं और वही जादू होता है। छोटी-छोटी चीजों से वो सीन का पूरा डायनेमिक बदल देते हैं और किरदार बहुत रियल लगने लगते हैं। सवाल: डायरेक्टर के तौर पर एक्टर के साथ उनका रिश्ता कैसा रहता है? जवाब: मेरे हिसाब से सारे एक्टर्स उनके साथ काम इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें अपने किरदार की पूरी समझ होती है। हर सवाल का जवाब, हर चीज का रीजन उनके पास होता है। वो एक्टर्स को आजादी भी देते हैं, लेकिन उन्हें साफ पता होता है कि कैरेक्टर कैसे मूव करेगा, कैसे बिहेव करेगा। इसी क्लैरिटी से शानदार कोलैबोरेशन होता है। सवाल: अक्षय कुमार, सुशांत सिंह राजपूत जैसे एक्टर्स को उन्होंने जिस तरह पेश किया, उस पर आपका क्या कहना है? जवाब: कमाल है। सुशांत जी ने ‘एमएस धोनी’ के लिए बहुत मेहनत की थी। नीरज सर खुद स्पोर्ट्स-लवर हैं, बहुत एथलेटिक हैं। उन्हें खेलों की समझ है, इसलिए वो ऐसे किरदारों को बहुत सच्चाई से निकाल पाते हैं। चाहे अक्षय सर हों, केके मेनन सर, इमरान हाशमी, सारे किरदार बहुत साफ और रियल लगते हैं। सवाल: ‘तस्करी’ पर सबसे अच्छा और सबसे क्रिटिकल फीडबैक क्या मिला? जवाब: सबसे खूबसूरत फीडबैक ये है कि लोग शो को बिंज-वॉच कर रहे हैं। रात 3:30 से 5 बजे के बीच सबसे ज्यादा मैसेज आते हैं। इसका मतलब लोग पूरी रात शो देख रहे हैं। क्रिटिकल फीडबैक ज्यादातर पर्सनल ओपिनियन हैं, जैसे किसी को कोई किरदार थोड़ा अलग चाहिए था। लेकिन ये भी दिखाता है कि लोग किरदारों से जुड़े हुए हैं। सवाल: एक डायलॉग को लेकर लोगों ने कहा कि गलती हो गई? जवाब: हां, एक सीन में एक कैरेक्टर डर के मारे गलत बोल देता है। लोग बोले कि डायलॉग गलत है। लेकिन वो जानबूझकर ऐसा रखा गया था, क्योंकि कैरेक्टर शॉक में था। ये बात खुद में एक कॉम्प्लिमेंट है कि लोग इतना ध्यान से देख रहे हैं। सवाल: अब जब शो को इतनी पहचान मिल रही है, आगे की प्लानिंग क्या है? जवाब: हम कहानियां बनाना चाहते हैं जो ऑडियंस को इमोशनल जर्नी पर ले जाएं।चाहे ड्रामा हो, थ्रिलर, फैंटेसी, सुपरहीरो या वॉर, जॉनर मायने नहीं रखता, कहानी मायने रखती है। बहुत सारी स्क्रिप्ट्स लिखी हुई हैं, अब उन्हें एक साथ समेट रहे हैं। जल्द ही अगला प्रोजेक्ट अनाउंस करेंगे। सवाल: क्या शूट के दौरान इमरान हाशमी को कोई नई स्क्रिप्ट सुनाई? जवाब: नहीं। शूट के दौरान हम सिर्फ उसी प्रोजेक्ट पर फोकस रखते हैं। एक काम पूरा होने के बाद ही दूसरे पर जाते हैं, वरना कन्फ्यूजन हो जाता है। हां, किस्से और रिसर्च से जुड़ी बातें खूब हुईं। इमरान जी के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा और सही वक्त आने पर हम फिर से उन्हें नई कहानी पिच करेंगे।

from बॉलीवुड | दैनिक भास्कर https://ift.tt/ZpEr9FJ
via IFTTT

«
Next
Newer Post
»
Previous
Older Post

No comments: