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ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

Monday, 30 June 2025

'राणा नायडू 2' में अर्जुन ने एक ही कॉस्ट्यूम पहना:रोल को लेकर बोले- उम्मीद नहीं थी इतना असर होगा, खुशी है कि लोगों ने सराहा

एक्टर अर्जुन रामपाल हाल ही में वेब सीरीज ‘राणा नायडू 2’ में नजर आए। सीरीज में अर्जुन का किरदार 'रउफ' एक ग्रे शेड वाला है। 'राणा नायडू' सीरीज का निर्देशन करण अंशुमान और सुपर्ण वर्मा ने किया है। सीरीज का पहला पार्ट 10 मार्च 2023 को रिलीज हुआ और "राणा नायडू 2" 13 जून 2025 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। हाल ही में भोपाल पहुंचे अर्जुन रामपाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की जिसमें उन्होंने अपने रोल को लेकर कहा कि यह रोल मार्टिन स्कॉर्सेसे की फिल्मों के गैंगस्टर जैसा है। इस बातचीत में अर्जुन ने बताया कि कैसे वह टाइपकास्ट होने से बचते हैं और दर्शकों को हमेशा सरप्राइज करना पसंद करते हैं। सवाल: आपके फैंस आपको ‘सोलो हीरो’ के रूप में कब देखेंगे? जवाब: आजकल ज्यादातर फिल्में मल्टी-स्टारर होती हैं। सोलो हीरो वाली फिल्में अब कम बनती हैं, जब कोई बायोपिक हो जैसे मेरी फिल्म ‘डैडी’। मैं हमेशा किरदार को प्राथमिकता देता हूं। 90 के दशक की तरह फिल्में अब नहीं बनतीं क्योंकि दर्शक और कहानियां दोनों बदल गए हैं। वैसे भी पहले भी ‘शोले’ या ‘अमर अकबर एंथनी’ जैसी फिल्मों में कई कलाकार साथ काम करते थे। अब रियलिज्म पर ज्यादा जोर है और मुझे भी रियलिस्टिक फिल्में और किरदार ज्यादा पसंद आते हैं। जब कहानी रियल हो, तो अभिनय भी उतना ही सच्चा होना चाहिए। सवाल:‘राणा नायडू’ में आपका किरदार काफी इंटेंस है। इसमें आपके लिए क्या चुनौतीपूर्ण रहा? जवाब: मैंने ‘राणा नायडू’ का पहला सीजन देखा था और मुझे यह पसंद आया, खासकर इसकी ग्रे शेड वाले जटिल किरदार। राणा और उसके पिता के बीच की प्रतिस्पर्धा मुझे बहुत दिलचस्प लगी। जब प्रोड्यूसर सुंदर मेरे पास सीजन 2 के लिए विलेन रोल का ऑफर लेकर आए, तो मैंने डायरेक्टर करण अंशुमान से मिलकर उनका विजन समझा। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सीजन 2 को पहले से बेहतर बनाना था, जो हमेशा कठिन होता है। हमने सीजन 1 की कमियों पर काम किया, जैसे अपशब्द और हिंसा को कम किया ताकि ज्यादा लोग इसे परिवार के साथ भी देख सकें। आखिरकार, यह एक ऐसे शख्स की कहानी है जो अपनी फैमिली को बचाना चाहता है। सवाल: इस सीरीज में अपने किरदार को और बेहतर करने के लिए आपने क्या किया? जवाब: मेरे लिए सबसे जरूरी बात ये थी कि किरदार को पूरी आजादी और रियलिज्म के साथ निभाया जाए। मैंने मेकर्स से कहा था कि अगर ओटीटी में इतनी छूट है तो इस कैरेक्टर को भी खुलकर और अनएक्सपेक्टेड बनाइए, जो एक पल मीठा हो और अगले ही पल पलट जाए। हम चाहते थे कि इसमें वैसा ही शेड हो जैसा मार्टिन स्कॉर्सेसे की फिल्मों के गैंगस्टर कैरेक्टर्स में होता है, हिंसक होकर भी एंटरटेनिंग। मुझे लगा हम ये सब किरदार में ला पाए और इसे निभाना मेरे लिए बहुत मजेदार रहा। दिलचस्प बात ये रही कि मुझे पूरी शूटिंग में एक ही कॉस्ट्यूम पहनना था। मुझे इस बात की उम्मीद नहीं थी कि दर्शकों पर इसका इतना असर होगा। लेकिन खुशी है कि यह रोल लोगों को पसंद आया। सवाल: क्या कोई खास वजह है कि हाल में आपको ज्यादातर ग्रे या नेगेटिव रोल्स में देखा गया? जवाब: ऐसा नहीं है। शायद आपको इसलिए लग रहा है क्योंकि हाल में जो फिल्में रिलीज हुईं, जैसे ‘धाकड़’ या ‘क्रैक’, उनमें मेरे किरदार ग्रे थे लेकिन ‘रा.वन’ या ‘ओम शांति ओम’ में वो रोल जानबूझकर चुने गए थे। वैसे मैंने कई पॉजिटिव रोल्स भी किए हैं जो जल्द रिलीज होने वाले हैं। जैसे अब्बास-मस्तान की एक फिल्म '3 मंकीज', एक ‘ब्लाइंड गेम’ है। मैं कभी खुद को टाइपकास्ट नहीं करना चाहता। मेरा मानना है कि एक एक्टर के पास सबसे बड़ा हथियार एलिमेंट ऑफ सरप्राइज होता है। हर दिन नया होता है, हर किरदार अलग और अगर मैं खुद को चौंका सकूं तो दर्शक भी चौंकेंगे। यही मेरी हर फिल्म में कोशिश रहती है। सवाल: वेंकटेश और राणा के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? क्या भविष्य में साथ काम करने की कोई बात हुई? जवाब: बिल्कुल 100% साथ काम करेंगे। राणा न सिर्फ कमाल के एक्टर हैं बल्कि बेहतरीन इंसान भी हैं। 'राणा नायडू' के दौरान हमारी अच्छी दोस्ती हो गई। उन्होंने सीजन 2 में जो गहराई और ठहराव के साथ अपना जटिल किरदार निभाया है, वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। वेंकी सर की बात करें तो उनकी कॉमिक टाइमिंग और डायलॉग डिलीवरी बेमिसाल है। जब वो सेट पर होते हैं माहौल ही अलग हो जाता है। पूरी स्टारकास्ट बहुत ही प्रोफेशनल और अपनी कला में माहिर है। बल्कि तीन डायरेक्टर्स सुपर्ण, करण और अभय के साथ काम करना मेरे लिए पहली बार था। तीनों की सोच अलग थी लेकिन विजन एक जैसा था। वो हर सीन में कुछ नया इनपुट देते थे, जो इस प्रोजेक्ट को और भी रोमांचक बना देता था। ऐसे माहौल में काम करना एक शानदार अनुभव था और उम्मीद है कि आगे भी हम साथ कुछ और दिलचस्प प्रोजेक्ट करेंगे। सवाल: 'बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव' अब तक रिलीज नहीं हुई। क्या इसे सोलो लीड में वापसी कहा जा सकता है? जवाब: फिलहाल मुझे भी नहीं पता फिल्म का क्या स्टेटस है। प्रोड्यूसर को कुछ दिक्कतें आ गई थीं, जिससे फिल्म अटक गई। स्क्रिप्ट बहुत शानदार थी और काफी हिस्सा शूट भी हो चुका है। उम्मीद है कि प्रोड्यूसर अपनी परेशानियां जल्दी सुलझा लें और फिल्म फिर से ट्रैक पर आ जाए। इस फिल्म के लिए मैंने काफी मेहनत की थी। सवाल: ‘भगवान केसरी' के बाद क्या साउथ से कोई नया ऑफर आया है? जवाब: हां, ऑफर्स तो कई आ रहे हैं लेकिन अभी तक किसी नई फिल्म के लिए साइन नहीं किया है। सभी पर बातचीत ही चल रही है। सवाल: क्या वेब स्पेस में मिल रहे रोल्स आपको रचनात्मक संतुष्टि दे रहे हैं? जवाब: बिल्कुल, मैं अपने करियर के इस दौर से संतुष्ट हूं। मुझे जो प्यार, सम्मान और पुरस्कार मिले हैं, उसके लिए मैं दर्शकों और फिल्म मेकर्स का आभारी हूं। जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। सवाल: आज स्टोरीटेलिंग के बदलते ट्रेंड को देखते हुए आपकी स्क्रिप्ट सेलेक्शन की सोच क्या होती है? जवाब: सबसे पहले मैं खुद से पूछता हूं कि अगर मैं इस फिल्म का हिस्सा न भी होऊं, तो क्या मैं इसे देखना चाहूंगा? यानी मैं ऑडियंस के नजरिए से सोचता हूं। देखता हूं कि फिल्म कहना क्या चाह रही है, उसमें एंटरटेनमेंट है या नहीं और सबसे जरूरी कि उसका कंटेंट क्या है। मैंने पिछले पांच-छह सालों में जो भी फिल्में की हैं, वो सारी कंटेंट-ड्रिवन रही हैं। आज की ऑडियंस समझदार है, इसलिए अब सिर्फ ग्लैमर या एक्शन से बात नहीं बनती, फिल्म या सीरीज की स्क्रिप्ट भी मजबूत होनी चाहिए।

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