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» » » बोल्ड सीन के कारण 'मर्डर' रिजेक्ट की:न्यूकमर कहकर प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म से निकलवाया; मिस्टर इंडिया और इंटरनेशनल जीत एक्टर बने रजनीश दुग्गल

दिल्ली का एक लड़का, जिसकी रगों में व्यापार और दिमाग में स्टार्टअप के आइडिया थे। लेकिन उसका खूबसूरत चेहरा और जबरदस्त डीलडौल उसके बिजनेस वाले टैलेंट पर भारी पड़े। कश्मीरी गेट की छोटी सी दुकान से निकलकर वो सीधे रैंप पर पहुंचा। वहां से मिस्टर इंडिया और मिस्टर इंटरनेशनल तक का सफर पूरा किया। फिट बॉडी और खूबसूरत चेहरे के दम पर उसने ना सिर्फ रैंप पर राज किया बल्कि रेमंड, मोंटे कार्लो, अरमानी, गुची, कार्टियर जैसे देश-विदेश के ब्रांड का चेहरा भी बना। चेहरा और कॉन्फिडेंस इतना जबरदस्त कि बड़े-बड़े फिल्ममेकर उसे अपनी फिल्मों में लेने के लिए ऑफर देने लगे। फिल्मों में आया तो सफलता-असफलता दोनों देखी। एक से हिम्मत जुटाई तो दूसरी से सबक सीखे। आज की सक्सेस स्टोरी में इसी सफलता की कहानी लेकर आए हैं मॉडल और एक्टर रजनीश दुग्गल… पापा की वजह से जीवन में अनुशासन आया मेरे पापा की कश्मीरी गेट में बॉल बेयरिंग की एक छोटी सी दुकान थी। दसवीं के बाद मेरे अंदर खुद के पैसे कमाने की चाहत रही। ऐसे में मैंने पापा से कहा कि मैं दुकान चलाना चाहता हूं। पापा मुझे दुकान पर बिठाने के लिए तैयार हो गए। पहली दफा मैं कूल कपड़ों में दुकान पहुंचा। उस वक्त सैंडल का जमाना था तो मैंने जूतों के बजाए सैंडल पहन रखी थी। मैं दुकान पर टाइम से भी नहीं पहुंचा था। पापा ने मुझे दुकान के बाहर से ही वापस भेज दिया। जब वो रात में घर पर आए तो मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? फिर पापा ने मुझे इसका कारण बताते हुए कुछ शर्तें रखीं। उन्होंने कहा कि तुम अब दुकान पर एम्प्लॉयी हो। तुम्हें दुकान का शटर भी खोलना होगा, झाड़ू भी मारना होगा। फिर हाथ धोकर पूजा भी करनी होगी। तब जाकर तुम वहां बैठने के लायक बनोगे। कल से दुकान में पैंट-शर्ट और शू में आना होगा। तुम्हें अनुशासन का पालन करना होगा, तब तुम उस दुकान पर बैठ सकोगे। मैंने उनकी बातों को गंभीरता से लिया और दुकान को अच्छे से संभाला। मैं दुकान के साथ पढ़ाई भी कर रहा था। आधे दिन मैं कॉलेज में बीबीए की पढ़ाई करता और शाम के समय में दुकान चलाता। मैंने बॉल बेयरिंग के अलावा दुकान पर कई नई चीजें एड कीं। कस्टमर और सेल्स का एक पूरा नेटवर्क खड़ा किया, जिसकी वजह से पापा की दुकान अच्छी चलने लगी। शादी में मिला रैंप मॉडल बनने का ऑफर पापा की दुकान और पढ़ाई के साथ लाइफ अच्छी चल रही थी। मेरी उम्र 21 साल रही होगी, जब मैं एक शादी में गया था। उस शादी में फेमस कोरियोग्राफर रश्मि गुरमानी भी मौजूद थीं। वो मेरी मासी की बहुत अच्छी दोस्त थीं। उन्होंने अपने कैमरे के जरिए मुझे देखा और मेरी तरफ आईं। मैं अपनी मौसी और कजन के साथ खड़ा था। उन्होंने कहा कि ये लड़का कौन है, मुझे मिलवाओ। फिर वो मेरी तरफ मुड़ी और कहा कि तुम्हें तो स्टेज पर होना चाहिए। मैंने उन्हें मना किया फिर वो जिद करती रहीं। ऐसे में मेरी मौसी ने कहा कि अच्छा एक शो कर ले। मैं लाइव शो का हिस्सा बना और मुझे बहुत अच्छा लगा। उसी समय मुझे एहसास हुआ कि मुझे ये करना चाहिए। मैंने छह महीने के अंदर दिल्ली में 70-80 शो किए। देखते-देखते मैं उस समय दिल्ली का हाईएस्ट पेड मॉडल बन गया। मिस्टर इंडिया नहीं बनता तो मॉडलिंग छोड़ देता अब दिल्ली में रैंप मॉडलिंग और पापा की दुकान के साथ ही मेरी पढ़ाई भी चल ही रही थी। जब मेरा बीबीए फाइनल हुआ, मैंने एमबीए करने का सोचा। बतौर मॉडल भी मेरा करियर अच्छा चल रहा था। ऐसे में मुझे दोनों में से कोई एक रास्ता चुन, उसमें आगे बढ़ना था। मैंने इसके लिए खुद को एक टारगेट दिया। मैंने रश्मि दी और सबसे राय ली और तय किया कि मिस्टर इंडिया जैसे टैग के लिए कोशिश करूंगा। अगर एक बार मैं विनर बन गया तो मैं देश भर में पहचाना जाऊंगा। मैंने खुद को एक चैलेंज भी दिया कि अगर मिस्टर इंडिया कंपटीशन में नंबर वन बना, तभी मॉडलिंग करियर को आगे ले जाऊंगा। वरना एमबीए और बिजनेस करूंगा। मैंने पापा से तीन महीने की मोहलत मांगी और साल 2003 के मेल ब्यूटी पेजेंट मिस्टर इंडिया में पार्टिसिपेट किया। उस वक्त फेमस कोरियोग्राफर श्यामक डावर शो का हिस्सा थे। शो के आखिरी दिन जब हम 28 लड़के बैकस्टेज तैयार हो रहे थे, तब श्यामक सारे लड़कों के पास जाकर उन्हें बेस्ट ऑफ लक बोल रहे थे। जब वो मेरे पास आए तो उन्होंने मुझसे कहा तुम शो जीतोगे। मैंने भी पूरे कॉन्फिडेंस से उन्हें जवाब में दिया कि हां, मुझे मालूम है। और मैं सच में मिस्टर इंडिया टाइटल जीत गया। एक दो महीने बाद मुझे मिस्टर इंटरनेशनल का हिस्सा बनने के लिए लेटर आया। उसके लिए मैं लिए लंदन गया और वहां मैं रनर अप रहा। मैंने वहां बेस्ट स्माइल का खिताब भी जीता था। मोंटे कार्लो ने मेरे लिए अपने नियम बदल डाले मॉडलिंग में आने के बाद मैं कई बड़े ब्रांड्स और बड़े डिजाइनर के लिए काम किया। उस वक्त मोंटे कार्लो के साथ डिजाइनर रोहित चावल और जे डब्लू टी काम करते थे। उनका एक रिकॉर्ड था कि वो अपने मॉडल को कभी रिपीट नहीं करते थे। लेकिन उन्होंने मेरे लिए वो नियम बदले। मैं लगातार तीन साल तक मोंटे कार्लो ब्रांड का चेहरा रहा। मैंने उनसे पूछा था कि सर आपका रूल है,फिर आपने ऐसा क्यों किया? उन्होंने जवाब में कहा कि तुम तो हमारे गोल्डन बॉय हो। फिर मुझे पता चला कि जब मैं पहली बार मोंटे कार्लो का चेहरा बना तो उस साल कंपनी की सेल बढ़ गई थी। इसलिए कंपनी को मैं चाहिए था। उन्होंने ये भी कहा कि तुम्हारे चेहरे में कोई तो बात है, जो हमें और इस कंपनी को दोनों को सूट कर रहा है। देश और प्यार के लिए विदेश की लाइफ छोड़ी मिस्टर इंटरनेशनल में रनर अप बनने के बाद एक बहुत फेमस कंपनी ने मेरे साथ दो साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। उन्होंने मुझे लंदन में रहने के लिए स्टूडियो अपार्टमेंट और सारी सुविधाएं दी थीं। पैसे के लिहाज से मैं बहुत अच्छा कमा रहा था। छह महीने के अंदर ही मैं अरमानी, गुची, कार्टियर जैसे बड़े ब्रांड के लिए काम कर चुका था। वहां, होता तो और बहुत कुछ कर सकता था लेकिन मैंने सब छोड़ देश लौटना तय किया। मेरे अंदर ये फीलिंग आने लगी थी कि जो भी करना है, अपने देश में ही करूंगा। दूसरा, उस वक्त तक मैं पल्लवी को डेट करना शुरू कर चुका था। एक फीलिंग ये भी थी कि मेरा प्यार मुझसे दूर है। प्यार, फैमिली, देश सबके लिए कॉन्ट्रैक्ट छोड़ अपने देश लौट आया। 400 लोगों में से फिल्म 'यकीन' के लिए हुआ था सेलेक्ट जब मैं लंदन में था, तभी मुझे डायरेक्टर गिरीश धमीजा और प्रोड्यूसर शील कुमार के ऑफिस से फिल्म का कॉल आ चुका था। लेकिन तब मैं मॉडलिंग में ही बिजी था। जब इंडिया लौटा तो उन दोनों ने मुझे फिर से कॉल किया। उन्होंने ने मेरी फोटो और प्रिंट एड देखे थे। दोनों ने मुझसे दिल्ली से मुंबई शिफ्ट होने कहा और मुझे बताया कि 400 लोगों को देखने के बाद वो मुझे फिल्म 'यकीन' के लिए कास्ट करना चाहते हैं। मैंने उनसे कहा कि मैं रैंप और प्रिंट मॉडल हूं। मैंने कभी कैमरा फेस नहीं किया है और मुझे एक्टिंग भी नहीं आती। मैं दिल्ली से मुंबई आया तो गिरीश सर और शील कुमार ने सबसे पहले मेरे रहने का इंतजाम किया। मुझे जुहू में एक पेंट हाउस में रखा। मेरे लिए गाड़ी, स्टाफ सब दिया। उन दोनों ने मेरे साथ तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। फिर एक्टिंग सीखने के लिए किशोर नमित कपूर सर के यहां क्लास ज्वाइन करवाई। गिरीश जी की एक टीम थी, जो हफ्ते में तीन दिन मुझे थिएटर क्लास देती थी। भाषा के लिए विधुर सर आते थे। बॉडी बनाने के लिए जिम की सुविधा दी। मतलब फिल्म 'यकीन' में मुझे लॉन्च करने के लिए प्रोड्यूसर-डायरेक्टर ने जी जान लगा दिया था। फिल्म 'यकीन' से प्रियंका चोपड़ा ने निकलवाया मैंने दो-ढाई महीने तक हर तरीके से खुद पर काम किया। फिल्म के किरदार पर भी काम कर रहा था। कुल मिलाकर सब कुछ अच्छा जा रहा था। फिर एक रात डेढ़ बजे के करीब मुझे प्रोड्यूसर शील कुमार का कॉल आया। उन्होंने मुझे अंधेरी ऑफिस उसी वक्त मिलने बुलाया। मैंने उन्हें कहा कि सर मैं अभी सो रहा हूं, सुबह क्लास भी जाना है तो कल बात करते हैं। उधर से जवाब मिला कि सीरियस मामला है तो अभी ऑफिस आओ। जब मैं उनके ऑफिस पहुंचा तो पूरा फिल्म सेटअप था। तीन स्पॉटलाइट लगे थे और गिरीश सर और शील कुमार वहां बैठे थे। शील बाबू ने मुझे देखते ही गले लगाया। उनकी आंखों भरी हुई थी। मैंने उनसे पूछा क्या हुआ लेकिन वो बोल नहीं पाए। फिर गिरीश सर आए, उनकी भी आंखें भरी हुई थी। उन्होंने मुझे बताया कि फिल्म की हीरोइन प्रियंका चोपड़ा न्यू कमर के साथ काम नहीं करना चाहती हैं। उस वक्त उनका करियर बुलंदियों पर था। वो सलमान खान, अक्षय कुमार जैसे स्टार्स के साथ काम कर रही थीं। ऐसे में उन्होंने मेरे साथ काम करने से मना कर दिया था। उस वक्त मेरे अंदर बिजनेस या इंडस्ट्री कैसे चलती है, इसकी समझ नहीं थी। ये सब सुनकर मेरा पहला रिएक्शन आया कि कोई बात नहीं हीरोइन बदल दो। मुझे लगा कि ये मेरे ऊपर टाइम पैसा सब इन्वेस्ट कर रहे है तो हीरोइन को बदल दें। तब शील बाबू ने फिर से मुझे गले लगाया और कहा कि तुम्हारे लिए मैं ये कर सकता हूं लेकिन हमने प्रियंका को पहले ही बहुत बड़ा अमाउंट दे दिया है। उन्होंने मुझे कहा कि तुम रुको हम तुम्हें अपनी दूसरी फिल्म में लेंगे। लेकिन मैं अंदर से टूट चुका था और मैंने उन्हें कहा कि मैं अब नहीं रुक सकता। कल ही अपना बैग पैक कर पेंट हाउस से चला जाऊंगा। दो महीने के लिए डिप्रेशन में चला गया उस एक वाक्य ने मुझे अंदर से तोड़ दिया। मैंने अगले दिन ही अपना बैग पैक किया और अपने एक दोस्त के पास रहने चला गया। लाइफ में पहली बार मेरे इस एहसास से सामना हुआ कि ये क्या हो गया मेरे साथ। मेरे पास मिस्टर इंडिया, मिस्टर इंटरनेशनल का टाइटल था। जब मॉडलिंग कर रहा था और नया था, तब भी ऐसा कुछ नहीं झेला था। फिर उस फिल्म को साइन करने के बाद मैं कितने बड़े ब्रांड्स के ऑफर को मना कर दिया था। मैं सिर्फ एक फिल्म पर फोकस करना चाहता था और उसमें अपना बेस्ट देना चाहता था। मैंने फिल्म के लिए सब कुछ छोड़ दिया और अब मैं ही उस फिल्म का हिस्सा नहीं था। इस फीलिंग ने मेरे अंदर अंधेरा भर दिया था। मैं कहीं जाना नहीं चाहता था। घर से नहीं निकलता था। ऑडिशन तक देना नहीं चाहता था। फिर एक दिन मेरा एक दोस्त आया और मुझे पॉप ग्रुप बॉम्बे वाइकिंग्स के एक म्यूजिक वीडियो के लिए ऑडिशन देने कहा। पहले मना किया फिर उसने बताया कि उस म्यूजिक वीडियो के लिए कई लोगों ने ऑडिशन दिया था। उसमें मेरे कई दोस्त भी थे लेकिन कोई फाइनल नहीं हो पा रहा। उसने मुझसे कहा कि तुम उस वीडियो में फिट बैठते हो तो ऑडिशन देने आओ। मैं एक ब्लैक टीशर्ट और जींस में ऑडिशन के लिए पहुंचा और अगले दिन ही मुझे कॉल आ गया। बॉम्बे वाइकिंग्स के 'छोड़ दो आंचल जमाना क्या कहेगा' गाने के बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वो गाना हर चार्ट में नंबर गाना बना। मैंने बैक टू बैक टीवी कमर्शियल, म्यूजिक वीडियो किए। मैंने रैंप, प्रिंट मॉडलिंग वापस शुरू कर दिया। किसिंग सीन की वजह से ‘मर्डर’ का ऑफर ठुकराया महेश भट्ट की फिल्म ‘मर्डर’ मुझे फिल्म ‘यकीन’ से पहले ऑफर हुई थी। मैं मिस्टर इंडिया का टाइल जीता और उसके तीसरे दिन मुझे अब्बू मलिक और अंशुमान स्वामी सर महेश भट्ट के ऑफिस ले गए थे। लेकिन ये किस्सा जीतने के पहले ही शुरू हो गया था। मिस्टर इंडिया में 28 दिनों की ट्रेनिंग होती है। उस ट्रेनिंग के दौरान हर दूसरे दिन कोई एक एक्सपर्ट आकर मास्टर क्लास लेता था। इसी दौरान मुकेश भट्ट सर आए थे। उन्होंने सारे कंटेस्टेंट से बातें की लेकिन उन्हें मेरे अंदर कुछ दिखा। अगले दिन महेश भट्ट सर आए और उन्होंने मुझे ढूंढा। फिर सारे लड़कों से अपना परिचय देने कहा। जब मेरी बारी आई तो मैंने बताया कि मैं दिल्ली से हूं और मैं जीतने आया हूं। उन्हें मेरा कॉन्फिडेंस पसंद आया था। ऐसे में जब टाइटल जीतने के तीसरे दिन मैं उनके ऑफिस पहुंचा तो वहां मुकेश और महेश भट्ट दोनों ही मौजूद थे। जब मैं अंदर घुसा तो उन्होंने मुझे दोबारा एंट्री लेने कहा। शायद वो मुझे में कुछ ऑब्जर्व कर रहे थे। फिर उन्होंने मुझे ‘मर्डर’ की कहानी नैरेट की और बताया कि हमने इस फिल्म में एक नई लड़की ली है। इमरान हाशमी को रिलॉन्च कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि तुम भी इस फिल्म का हिस्सा बनो। पति और लवर दो रोल है। तुम सेलेक्ट करो कि तुम्हें कौन सा रोल चाहिए। मैंने उनसे कहा कि सर मेरी गर्लफ्रेंड है और हम दोनों सीरियस रिलेशनशिप में हैं। हमने ये तय किया है कि मैं ऑन स्क्रीन किस नहीं करूंगा। सर ने मुझसे कहा कि लेकिन ये सीन इस फिल्म के लिए बहुत जरूरी हैं। लेकिन उन्होंने मेरी सिचुएशन समझी और कहा कि हम फ्यूचर में जरूरी साथ काम करेंगे। होर्डिंग्स में देख विक्रम भट्ट ने फिल्म ‘1920’ का ऑफर दिया मोंटे कार्लो के अलावा मैं रेमंड ब्रांड का भी चेहरा था। मैंने 5-6 साल तक रेमंड के लिए मॉडलिंग की है। विक्रम भट्ट ने मुझे रेमंड के होर्डिंग्स में कहीं देखा था। उन्होंने अपने एजेंट को कहा कि रेमंड वाले लड़के को बुलाकर लाओ। मुझे कॉल आया और मैं गया उनसे मिलने। उन्होंने बहुत प्यार से बात की और मुझे तीन फिल्मों के लिए साइन किया। कहानी नैरेट की फिल्म का क्लाइमैक्स बताया, जिसमें हनुमान चालीस मंत्र का अहम रोल है। उन्होंने पूछा कि हनुमान चालीस आती है। मैंने हां में जवाब दिया। वो थोड़ा से हैरान हुए, उन्हें लगा था कि अभी के समय में मुंह जबानी कौन याद रखता है। खैर, मैं फिल्म के लिए साइन हो गया। मेरे साथ नई एक्ट्रेस अदा शर्मा थीं। विक्रम सर की उससे पहले 12 फिल्में फ्लॉप रही थीं। ऐसे में हम सबने एक-दूसरे पर यकीन दिखाया। पहले हफ्ते में ‘1920’ फिल्म लोगों तक नहीं पहुंच पाई लेकिन उसके बाद लोगों ने फिल्म को देखना शुरू किया। इस फिल्म के बाद न सिर्फ हिंदू बल्कि कई मुस्लिम फैंस ने मुझसे कहा कि आपने जो आखिर में हनुमान चालीसा पढ़ा, उस सीन को देख रोंगटे खड़े हो गए। इसके बाद को मैंने कई फिल्में कीं। मैंने टीवी और ओटीटी का भी रुख किया। टीवी पर मैंने रामलीला-अजय देवगन के साथ, आरंभ, श्रीमद भगवत महापुराण, श्री रामायण कथा जैसे माइथोलॉजिकल शो में काम किया। मैं ‘खतरों के खिलाड़ी’ का भी हिस्सा बना और शो का विनर रहा। पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... बॉयफ्रेंड के टॉर्चर से सुसाइड का सोचा:बोल्ड सीन करने पर सेक्स सिंबल टैग मिला; ‘आश्रम’ से बनीं स्टार, अब ‘जपनाम’ से है पहचान एक लड़की जिसे जीवन में परफेक्शन पसंद था। उसे न तो कोई काम एवरेज करना था और न ही एवरेज बनना था। पढ़ाकू थी, साइंस में दिलचस्पी थी, माइक्रोबायोलॉजी की डिग्री ले ली। ग्लैमर और फिल्मी दुनिया में कोई दिलचस्पी नहीं थी, फिर भी बैठे-बिठाए फिल्म का ऑफर मिल गया। चूंकि एवरेज नहीं बनना था इसलिए उसने साउथ के एक बड़े चेहरे के साथ काम करने से मना कर दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वो लड़की घूम-फिरकर इंडस्ट्री में आ ही गई। पूरी खबर पढ़ें...

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