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ಗುರುವಾರ ಕೇಳಿ ಶ್ರೀ ರಾಘವೇಂದ್ರ ರಕ್ಷಾ ಮಂತ್ರ

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The Race to Write a History of Naples

The Race to Write a History of Naples JamesHoare

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Peter Kay postpones gigs due to 'kidney procedure'

Kay's two shows at Nottingham's Motorpoint Arena are pushed back by a couple of months each.

from BBC News https://ift.tt/Nd8DUfY

Nicole Kidman and Keith Urban separate after almost 20 years

The A-List couple share two children and have been married since 2006.

from BBC News https://ift.tt/aMzLmcV

सलमान खान संग कंट्रोवर्सी पर बोले विवेक ओबेरॉय:मैंने जो फिल्में साइन की थीं, उनसे निकाला गया, अब उन बातों को भूल गया हूं

एक्टर विवेक ओबेरॉय का पास्ट बहुत कंट्रोवर्शियल रहा है लेकिन फिलहाल वो अपनी निजी जिंदगी में काफी खुश और सेटल हैं। एक्टर अपने बिजनेस और काम को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में विवेक ने एक इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने साल 2003 के उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में बात की, जिसमें उन्होंने सलमान खान पर गंभीर आरोप लगाए थे। विवेक ने ऐश्वर्या के साथ हुए ब्रेकअप पर भी अपना पक्ष रखा। प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में विवेक ने कहा- 'मैं जीवन में बहुत संवेदनशील और भावुक व्यक्ति रहा हूं। मैं दिल टूटने के डर में नहीं जीना चाहता क्योंकि मैं पहले ही ये सब झेल चुका हूं। मैंने इसका अनुभव किया है, ये बहुत ही डरावना, अकेला और अलग-थलग करने वाला अनुभव है।’ पॉडकास्ट में जब विवेक से पूछा गया कि उनके साथ जब चीजें अच्छी नहीं हो रही थी, तब उनके मन ऐसा सवाल नहीं आया कि मैं ही क्यों? विवेक कहते हैं- 'ये तो मेरे जीवन का अहम सवाल है। मैं ऐसे प्वाइंट पर था, जहां पर भयंकर करियर बॉयकट चल रहा था। मतलब मेरे साथ कोई काम ही नहीं करने को तैयार। मैंने जो फिल्में साइन की थी, उनमें से मुझे निकाला जा रहा था। ऊपर से फोन पर अजीबोगरीब धमकी मिल रही थी। कभी मुझे, कभी मेरी बहन, पापा और मां को धमकी मिल रही है। एक तरफ ये सब चल रहा था, दूसरी तरफ पर्सनल लाइफ भी खराब चल रही थी। मैं अपनी मां को गोद में सिर रखकर बहुत रोया और ये सवाल अलग-अलग तरह से पूछा। फिर मेरी मां ने मुझे कई उदाहरणों के जरिए समझाया तो मैंने सोचा बात तो सही कह रही हैं।' प्रेस कॉन्फ्रेंस वाली घटना पर विवेक कहते हैं- 'सच तो यह है कि इस विषय पर किसी भी प्रकार की चर्चा करना भी उनके लिए बहुत ही अटपटा लगता है। अजीब बात ये है कि सिर पर जब आफत आती है, सिर पर पंगे होते हैं, तब वो बड़े लगते हैं। मेरा बेटा विवान 12 साल का है और बिटिया 10 साल की है। जब मैं लाइफ में उनकी प्रॉब्लम देखता हूं तो मुझे कैसे हंसी आती है। इसी तरह, जब मुझे लगता है कि मेरी प्रॉब्लम इतनी बड़ी है, उस वक्त भगवान आपकी समस्याओं को देखकर हंसता थे। वे सोचते होंगे कि बच्चे यह तो छोटी सी बात है, मैं तुम्हें मजबूत बनाऊंगा।' उन्होंने कहा- 'वो नजरिया बाद में दिखता है। अब मुझे वो फनी और बचपना लगता है। अब कोई प्रतिक्रिया देना या देना अजीब लगता है। वो जो डर था, या कड़वाहट थी, जख्म थे, वो उस वक्त एक मुश्किल दौर बन जाता है। मैं जिस भी दौर से गुजरा हूं, उसे अब भूल गया हूं।' विवेक आगे देव आनंद के गाने का उदाहरण देते हुए बताते हैं- 'वो देव साहब का गाना है ना, हर फ्रिक के धुएं में उड़ाता चला गया। फिलॉसफी है उस गाने में जबरदस्त।' बता दें कि सलमान खान के साथ ऐश्वर्या राय का ब्रेकअप होने के बाद एक्ट्रेस का नाम विवेक ओबेरॉय से जुड़ा था। दोनों जब रिश्ते में थे, तभी साल 2003 में विवेक ने एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सलमान पर ऐश्वर्या के साथ उनके संबंधों को लेकर धमकी देने का आरोप लगाया था। हालांकि, इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का असर उनके करियर पर पड़ा। विवेक अचानक से लाइमलाइट से बाहर चले गए थे। फिर ऐश्वर्या के साथ भी उनका रिश्ता टूट गया।

from बॉलीवुड | दैनिक भास्कर https://ift.tt/zVrmXuR
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‘Fenwomen’ by Mary Chamberlain review

‘Fenwomen’ by Mary Chamberlain review JamesHoare

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अल्लू अर्जुन का गला पकड़ने वाले एक्टर बोले-आसान नहीं था:वे सरप्राइज हो गए थे, इतनी जल्दी कैसे इतनी बड़ी लाइन बोल दी

बॉलीवुड एक्टर और फिटनेस आइकॉन ठाकुर अनूप सिंह अपनी नई फिल्म कंट्रोल के प्रमोशन के लिए जयपुर पहुंचे। होटल शकुन में दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अपनी फिल्म, संघर्ष भरी जर्नी और राजस्थान से जुड़ाव पर खुलकर चर्चा की। अनूप सिंह ने बताया- फिल्म कंट्रोल आज के दौर के एआई और डीपफेक स्कैम से प्रेरित है। उन्होंने अल्लू अर्जुन का गला पकड़े वाले सीन के बारे में भी बताया। कहा- यह आसान नहीं था। वे मेरे डायलॉग के बाद खुद सरप्राइज हो गए कि इसने इतनी जल्दी कैसे इतनी बड़ी लाइन डिलीवर कर दी। वहां से बॉन्डिंग डवलप हुई। आगे पढ़िए पूरा इंटरव्यू... सवाल: आपकी फिल्म के बारे में बताएं, किस तरह का किरदार है और क्या खास है? ठाकुर अनूप सिंह: सबसे पहले मैं राजस्थान की मेरी दैनिक भास्कर की जनता का धन्यवाद देता हूं, जो लगातार मुझे इतना प्यार देते हैं। यहां के लोगों को मैं नमन करता हूं। पिछले कुछ साल में एआई और डीपफेक का मिसयूज करते हुए स्कैम हो रहे हैं। कई ऐसे लिंक आते हैं, जिन पर क्लिक करते ही ओटीपी आ जाता है। हम ओटीपी दे देते हैं, इसी से प्रेरित यह फिल्म है। इसका नाम कंट्रोल है। कहने का मतलब यह है कि जिसके हाथ में कंट्रोल है, उसी के हाथ में पावर है। कैसे पावर का गलत इस्तेमाल करके क्या-क्या हासिल किया जाता है और उसके क्या बदलाव आते हैं। यही पूरी फिल्म की कहानी है। कैसे एक व्यक्ति के साथ स्कैम हो जाता है, वह कैसे पांच दिन के अंदर बतौर छुट्टी लेकर इस स्कैम को सॉल्व करता है। कैसे उसका बॉस कौन निकलता है। इसी सस्पेंस को दिखाते हुए फिल्म को तैयार किया गया है। कुछ नया करने को मिला है। रोमियो एस 3 फिल्म में मैं एक पुलिस ऑफिसर का रोल प्ले कर चुका हूं। इससे पहले धर्मरक्षक महावीर छत्रपति संभाजी महाराज कर चुका हूुं। इस फिल्म में एक अलग अवतार में लोग देख पाएंगे। सवाल: आपकी जर्नी के बारे में बताएं, मॉडलिंग, फिटनेस, पायलट और फिर बॉलीवुड एक्टर के इस सफर के बारे में बताएं? ठाकुर अनूप सिंह: बहुत संघर्ष से यहां तक पहुंचा हूं। पायलट और एक्टर का कोई मेल नहीं है। मेरे परिवार का मैं अकेला एक्टर हूं। संघर्ष भी उतने ही आए हैं। मैंने हमेशा यही सोचा था कि जिस काम से प्यार करूंगा, उसमें ही अपना करियर बनाउंगा। एक्टिंग फील्ड में ही मुझे असली मजा आया। महाभारत के धृतराष्ट्र का किरदार था, वह काफी प्रख्यात हो गया। वहां से मुझे लगा कि अब अच्छा काम करने को मिलेगा, लेकिन फिल्मों में काम नहीं मिल पा रहा था। टीवी पर इतना बड़ा शो करने के बाद मुझे कुछ ओर वहां करने का मन नहीं किया। इसलिए मैं साउथ की तरफ चला गया। तमिल, तेलुगू, कन्नड़ जैसी खूबसूरत इंडस्ट्री में काम करने का मौका मिला। बस मेहनत करने का जज्बा चाहिए, सफलता मिल ही जाती है। अच्छे किरदार करने थे और जगह-जगह पहुंचना है। ऐसे करते हुए साउथ की भाषाओं में शुरुआत हुई। सारे स्टेट को कवर करते हुए डबिंग फिल्मों से मुझे प्यार मिलते हुए बॉलीवुड में एंट्री हुई। यहां जयंतीलाल गाढ़ा के ओनर से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझ पर विश्वास जताया। रोमियो एस 3 हो या कंट्रोल फिल्म हो, इनमें आने का श्रेय उन्हीं को जाता है। सवाल: अल्लू अर्जुन के साथ काम करते हुए एक सीन में उन्हें डरना था, किस तरह का एक्सपीरियंस रहा? ठाकुर अनूप सिंह: शूटिंग का पहला दिन था। तेलुगू के डायलॉग थे। मुझे कुछ ज्यादा बताया नहीं गया था। लास्ट मिनट में बताया कि आपका शूट अल्लू अर्जुन के साथ है। आपको उनका गला पकड़ना है। पार्किंग की जगह पर धमकी देनी है। मैंने बोला- अल्लू सर का काम मैं जानता हूं, वे कितने पॉपुलर हैं। बड़े स्टार हैं। कैसे संभव होगा। फिर मैंने खुद से ही प्लान किया कि मैं सिर्फ किरदार के अकॉर्डिंग काम करूंगा। उसमें कोई अलग सा फील नहीं आने दूंगा। मैंने तेलुगू में डायलॉग याद किए थे। मैं फंबल नहीं होना चाहता था। अल्लू बहुत हंबल थे। वे मेरे डायलॉग के बाद खुद सरप्राइज हो गए कि इसने इतनी जल्दी कैसे इतनी बड़ी लाइन डिलीवर कर दी। वहां से बॉन्डिंग डवलप हुई। दोस्ती शुरू हुई। उन्होंने मुझे सलाह भी दी। उन्होंने कहा- तुम खुद के लिए टाइम लेना और विश्वास रखना, तुम्हें जहां पहुंचना है, वहां जरूर पहुंचोगे। उस टाइम पर लगा कि यह उनका बड़प्पन है। लेकिन उनका आशीर्वाद या लोगों के प्यार के दम पर यहां तक पहुंचे हैं। सवाल: महाभारत और संभाजी महाराज के किरदार को खुद के डवलपमेंट करने में कितना योगदान मानते हैं? ठाकुर अनूप सिंह: दोनों मेरे लिए बहुत बड़ी जगह रखते हैं। महाभारत में धृतराष्ट्र का किरदार मेरे लिए स्टेपिंग स्टोन की तरह है। घर-घर में इस किरदार के जरिए पहुंचा हूं। संभाजी महाराज के किरदार ने मुझे हर एक भारतीय के दिल में जगह दिलवाई है। जो भी व्यक्ति देश से प्रेम करता है, उसने मुझे इस किरदार के रूप में प्यार दिया है। वीर संभाजी महाराज, वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप, दुर्गादास राठौड़ के विचारों से जुड़े लोगों के मन तक मैं इस किरदार के जरिए पहुंचा। मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है कि मुझे ये के किरदार करने काे मिले। लोगों से जो रेस्पॉन्स मिला है, उसी का परिणाम है कि आज मैं अपनी दूसरी फिल्म के साथ यहां खड़ा हूं। सवाल: राजस्थान से आपका जुड़ाव है, आपका परिवार उदयपुर से ताल्लुक रखता है, किस तरह का अनुभव रखते हैं? ठाकुर अनूप सिंह: मुझसे अक्सर लोग पूछते हैं कि पहली बार जयपुर या राजस्थान आए हो। तब मैं हस देता हूं। मैं इसलिए हंस देता हूं कि मेरे पूर्वज बांसवाड़ा के हैं।, हम राजपूत है। यही कारण है कि मुझे यहां आते ही यह फील आता है कि मैं यहां पिछले जन्म में किसी न किसी जगह का राजा रहा होगा। जब भी आता हूं, अपने फोन साइड में रखकर खिड़की के बाहर देखने लगता हूं। यहां के आर्किटेक्चर की खूबसूरती को निहारता हूं। क्यों इस शहर को पिंकसिटी कहते हैं, इसे देखने लगता हूं। रात में जाकर आमेर किले का टूर मार लेता हूं। मेरी आत्मा यहीं बसी हुई है। मैं यह इसलिए नहीं कह रहा क्योंकि जयपुर में हूं। इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि मुझे कई बार यहां आने का मौका मिला।

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पंजाबी सिंगर राजवीर जवंदा अब भी वेंटिलेटर पर:हालत नाजुक, CM मान ने हाल जाना, परिवार से बात की; पिंजौर में हुआ था बाइक हादसा

हरियाणा के पिंजौर में सड़क हादसे का शिकार हुए पंजाबी सिंगर राजवीर जवंदा को अभी भी मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि जवंदा की हालत अब भी नाजुक है। उनकी देखभाल फोर्टिस अस्पताल, मोहाली की विशेषज्ञ टीम कर रही है। इसमें न्यूरोसर्जरी और क्रिटिकल केयर के डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी और इलाज कर रहे हैं। रविवार दोपहर को सीएम भगवंत मान ने भी अस्पताल पहुंचकर जवंदा का हाल जाना। डॉक्टरों से भी उनकी हेल्थ की अपडेट ली। इसके बाद उन्होंने कहा कि कल (शनिवार) से उनकी हालत बेहतर है। रविवार को जवंदा से मिलने कई पंजाबी सिंगर भी पहुंचे थे। उन्होंने बताया था कि जवंदा रिकवर कर रहे हैं। हर कोई उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ की अरदास करे। बता दें कि राजवीर जवंदा अपने 4 अन्य दोस्तों के साथ बाइक से राइड पर जा रहे थे। इस दौरान अचानक पशु सामने आ जाने से उनकी बाइक बेकाबू हो गई, जिसमें वे हादसे का शिकार हुए हैं। सड़क पर सिर लगने से उन्हें गंभीर चोट लगी है। मोहाली लाए जाने से पहले ही उन्हें कार्डियक अटैक भी आया था। परिवार और डॉक्टरों से मिलकर CM ने क्या कहा... लड़ते सांडों को बचाने के चक्कर में हादसा हुआ जानकारी के अनुसार, पिंजौर-नालागढ़ रोड पर एचएसवीपी सेक्टरों के सामने रोड पर शनिवार को जवंदा का एक्सीडेंट हो गया। वह बाइक पर बद्दी से शिमला जा रहे थे। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, रोड पर लड़ते सांडों को बचाते हुए जवंदा की बाइक जीप से टकरा गई। लोगों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल जवंदा को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शौरी अस्पताल के डॉक्टर विमल ने बताया कि जवंदा की हालत नाजुक थी, इसलिए उन्हें बाहर ही आकर चेक किया गया था। वह बेसुध थे और पल्स धीमी थी। उन्हें प्राथमिक उपचार देकर पंचकूला रेफर कर दिया गया था। वहां से मोहाली के फोर्टिस अस्पताल भेजे गए। सिविल अस्पताल में हार्ट अटैक आया शनिवार रात मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर बताया था कि राजवीर जवंदा को 27 सितंबर को रेफर किया गया था। दोपहर पौने 2 बजे बेहद गंभीर हालत में उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। सड़क दुर्घटना में उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई थीं। फोर्टिस अस्पताल लाने से पहले सिविल अस्पताल में उन्हें हार्ट अटैक भी आया। जवंदा के अस्पताल पहुंचते ही इमरजेंसी और न्यूरोसर्जरी टीमों ने तुरंत उनकी जांच की। डिटेल्ड जांच और चेकअप किए गए। जवंदा को अभी वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत की कड़ी निगरानी कर रही है। सेहत पर उनके दोस्त क्या बोल रहे...

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'मेरी दूसरी शादी की अंगूठी पहली पत्नी ने खरीदी':बोनी कपूर ने बताया- मोना कपूर ने श्रीदेवी को भी दी थी शादी की रिंग

फिल्म प्रोड्यूसर बोनी कपूर ने हाल ही में बताया कि उनकी पहली पत्नी मोना ने उनकी दूसरी शादी के लिए अंगूठी खरीदी थी। बोनी कपूर ने चंदा कोचर को दिए इंटरव्यू में कहा, "मेरी पहली पत्नी, मैंने उन्हें सब बताया था। देखिए यह अंगूठी जो मैं पहन रहा हूं और वह अंगूठी जो श्रीदेवी पहनती थी, दोनों मोना ने खरीदी थी। मैंने उन्हें सब खुलकर बताया। इसी तरह उन्होंने बच्चों को पाला, मेरे और अन्य बच्चों के प्रति किसी भी प्रकार की नफरत पैदा किए बिना।" बता दें कि साल 1996 में बोनी ने श्रीदेवी से शादी की थी। इसके बाद वह अपने पहले परिवार से अलग हो गए। बोनी कपूर ने कहा कि उस समय उनके बच्चे अर्जुन और अंशुला को तकलीफ हुई थी। अर्जुन ने उन्हें एक चिट्ठी भी लिखी थी। उन्होंने कहा, "मेरे पास अर्जुन की चिट्ठी है, जिसमें उसने लिखा था- आप घर क्यों नहीं आते? मुझे बुरा लगता था। मैं बंटा हुआ था। एक तरफ पत्नी श्रीदेवी थीं, दूसरी तरफ बच्चे। श्रीदेवी को मैं अकेला नहीं छोड़ सकता था। उनके माता-पिता का निधन हो चुका था और वह अकेली थी, लेकिन यहां बच्चे, उनकी मां और दादा-दादी के साथ थे।" बोनी ने आगे यह भी कहा, "मैं अपने बच्चों से बहुत प्यार करता हूं। उस समय और भी ज्यादा करता था। मुझे हालात संभालने के लिए मजबूत रहना पड़ा क्योंकि मैं सभी बच्चों से प्यार करता हूं। मैं अपनी पहली पत्नी की भी इज्जत करता हूं, क्योंकि उन्होंने कभी बच्चों को मेरे खिलाफ नहीं किया। बच्चे बुरा मानते थे क्योंकि वे अपनी मां को दुखी नहीं देखना चाहते थे। अब मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि चारों बच्चे साथ हैं।"

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Rare Gold ring brooch found at Troy

A gold brooch that is one of only three known examples in the world and the best preserved of them has been unearthed at Troy. The delicate piece features a long, tapered pin with four spiral rings at the top.

The pin was found in the layer that dates to 2,500 B.C. Another extremely rare find was made in the same context: a flat jade stone that may have originally been part of a ring or jewel. A luxury import traded from distant lands, jade is very uncommon on the archaeological record of Early Bronze Age Anatolia. A bronze pin was also found in this layer.

The brooch was unearthed in the layers of Troy II, one of the early settlement phases of the site.

Scholars have long debated the beginning of this period, with estimates ranging between 2,300 and 2,200 B.C. The discovery has now provided clear evidence, dating the layer firmly to around 2,500 B.C.

This breakthrough helps refine the chronology of Troy’s early history, which has been central to archaeological research for decades.

The gold pin, jade stone, bronze pin and other objects found in this season’s excavation will go on display at the Troy Museum in Çanakkale



* This article was originally published here

World Heart Day 2025: WHO Warns 8 Deaths Every Minute From Heart Diseases In THIS Region

On World Heart Day 2025, the WHO revealed alarming statistics, eight people die every minute from cardiovascular diseases in South-East Asia, half of them below 70. Despite recent progress in managing hypertension and diabetes, major gaps remain in awareness, prevention, and policy enforcement. Experts urge lifestyle changes and stronger government action under this year’s theme, “Don’t Miss a Beat.”  

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Prince William shares a pint with Schitt's Creek star Eugene Levy

The Prince of Wales invites Schitt's Creek star Eugene Levy to Windsor Castle for his travel show.

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Prince William shares a pint with Schitt's Creek star Eugene Levy

The Prince of Wales invites Schitt's Creek star Eugene Levy to Windsor Castle for his travel show.

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Roman mosaic found during in Tivoli

A Roman mosaic floor from the early Imperial period has been discovered during fiberoptic cable installation in Tivoli, 20 miles north of Rome. The mosaic features black and white tiles arranged in geometric patterns.

The mosaic emerged in the excavation for the laying of cable near the church of Sant’Andrea. The discovery spurred an archaeological investigation of the wider area unearthed remains from the ancient city that were converted into tombs, likely in the Middle Ages, although the chronology has yet to be established.

The origins of the ancient city of Tibur go back to the 13th century B.C., and it was prominent in the Etruscan period as the seat of the Tiburtine Sibyl. It maintained its religious significance under Roman rule, and its proximity to Rome, natural beauty and convenient location on the Via Tiburtina, the road that crossed the Apennines made it a desirable destination for country villas of wealthy Romans.

The artistry of the mosaic floor, the technique in the geometric patterning, points to it having been created by high-end craftsmen, comparable to the mosaic work in public buildings and the luxury private homes. The area where the floor was found is known for important structures, including ones with elaborate mosaic floors.

The agreement between cable company FiberCop and the Superintendency of Archaeology, Fine Arts, and Landscape for the metropolitan area of ​​Rome and the province of Rieti ensures that any archaeological finds are .

The operational model includes preventive verification of historical and archaeological information and ongoing monitoring. If any discoveries are made, work is immediately suspended, with targeted extension of investigations, documentation, and site safety measures. When necessary, alternative technical solutions, such as replanning routes or on-site protection, are adopted to avoid impacting the ancient deposits.

The agreement also applies to protected areas, transforming excavations for underground utilities into opportunities for understanding, protecting, and updating the city’s archaeological map. Data and materials will be transferred to the Superintendency’s archives for further scientific analysis and the possible implementation of safeguards aimed at protecting and conserving the assets, contributing to more informed urban planning and future enhancement efforts.



* This article was originally published here

How US megastar Luke Combs helped Britain fall in love with country music

The star looks forward to country music's famous Grand Ole Opry relocating from Nashville to London.

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भविष्यवाणी के बाद हुई एक्ट्रेस की मौत सवालों में रही:देर रात छत की मुंडेर पर कैटवॉक कर रही थीं, 24 दिन कोमा में रहकर तोड़ा दम

ये अनसुनी दास्तान है साउथ की पॉपुलर एक्ट्रेस निवेदिता जैन की। वो एक रोज देर रात अपने घर की छत पर थीं। घरवालों से उन्होंने कह रखा था कि वो छत पर कैटवॉक की प्रैक्टिस करने जा रही हैं। कुछ ही देर हुई थी कि घरवालों को कुछ गिरने की जोरदार आवाज आई। परिवार हड़बड़ाहट में बाहर पहुंचा तो देखा कि एक्ट्रेस निवेदिता खून से लथपथ फर्श पर पड़ी कराह रही थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। ब्रेन इंजरी के चलते उनकी सर्जरी की गई। अगले दिन उन्हें होश आया, लेकिन फिर वो कोमा में चली गईं। 24 दिनों तक कोमा में रहने के बाद निवेदिता ने दम तोड़ दिया। निवेदिता की मौत के बाद एक डायरेक्टर ने खुलासा किया था कि एक ज्योतिष ने 2 साल पहले ही उनकी अकाल मृत्यु की भविष्यवाणी की थी, जिससे एक्ट्रेस डरी हुई रहती थीं। एक्ट्रेस की महज 19 साल की उम्र में हुई मौत सवालों में रही। आखिर छत पर ऐसा क्या हुआ, जिससे वो दूसरी मंजिल से गिर गईं। क्या ये मुमकिन था कि उन्होंने आत्महत्या के लिए दूसरी मंजिल से छलांग लगाई थी। ये महज हादसा था, आत्महत्या या कोई साजिश, जानिए आज अनसुनी दास्तान के 3 चैप्टर्स में- निवेदिता जैन का जन्म 9 जून 1979 को बैंगलोर, कर्नाटक में हुआ था। उनके पिता राजेंद्र जैन आर्मी कैप्टन थे और मां का नाम गौरी प्रिया था। देखने में बेहद खूबसूरत निवेदिता का बचपन से ही ग्लैमरस वर्ल्ड की तरफ झुकाव था। यही वजह रही कि कम उम्र में हुनर आजमाने के लिए उन्होंने ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। निवेदिता महज 15 साल की थीं, जब उन्होंने मिस बैंगलोर का खिताब हासिल किया था। इसके बाद से ही उन्हें कई मॉडलिंग प्रोजेक्ट मिलने लगे। कन्नड़ सुपरस्टार राजकुमार ने नजर पड़ते ही बनाया हीरोइन निवेदिता महज 16 साल की थीं, जब उन पर कन्नड़ सुपरस्टार राजकुमार की नजर पड़ी। उन्होंने पहली नजर में ही निवेदिता का हुनर परख लिया, जिसके बाद उनके होम प्रोडक्शन हाउस ने निवेदिता को दो फिल्मों के लिए साइन किया। निवेदिता की पहली फिल्म 1996 में रिलीज हुई शिवा-रंजनी रही, जिसके प्रोड्यूसर कन्नड़ स्टार राजकुमार थे। इस फिल्म में उनके बेटे राघवेंद्र राजकुमार को कास्ट किया गया था। इसके ठीक बाद उसी साल निवेदिता ने राजुकमार के प्रोडक्शन की दूसरी फिल्म शिवा-सैन्या में काम किया, जिसमें उनके अपोजिट शिवा राजकुमार को कास्ट किया गया था। दोनों ही फिल्में हिट रहीं, जिनसे निवेदिता को कन्नड़ सिनेमा में अच्छी-खासी पहचान मिल गई। इन दो फिल्मों की बदौलत निवेदिता को तमिल और तेलुगु फिल्में भी ऑफर होने लगीं। बढ़ती पॉपुलैरिटी के साथ ही निवेदिता की साल 1997 में एक-दो नहीं बल्कि 5 फिल्में रिलीज हुईं। उन्होंने रमेश अरविंद स्टारर 1997 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म अमृत वर्षिनी में कैमियो भी किया था। इसके अलावा वो नी मुदिदा मालिगे, बालिदा माने, तोकालेनी पिट्टा और प्रेमा रागा हाडू गेलाथी में भी नजर आईं। तबू के साथ की थी फिल्म साल 1998 में निवेदिता जैन की 3 फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें थाइन मनिकोणी, बालिना दारी, सुत्रधार शामिल रहीं। फिल्म थाइन मनिकोणी में निवेदिता ने अर्जुन सरजा और तबू के साथ स्क्रीन शेयर की थी, जो काफी हिट रही थी। इसी फिल्म के बाद निवेदिता को अर्जुन सरजा के साथ पॉपुलर डायरेक्टर सेल्वा की फिल्म थेनाली राजा में लीड रोल दिया गया था, हालांकि कुछ दिक्कतों के चलते ये फिल्म बंद कर दी गई। फिल्म थेनाली राजा के बंद होने के बाद निवेदिता ने फिल्मों से ब्रेक ले लिया। उन्होंने नई फिल्में साइन करना बंद कर दिया और मिस इंडिया बनने का बचपन का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने दोबारा मॉडलिंग की तरफ रुख कर लिया। वो मिस इंडिया ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेना चाहती थीं, जिसके लिए उन्हें तैयारी की जरूरत थी। लुक्स के बाद इस पेजेंट के लिए सबसे जरूरी थी उनकी वॉक। यही वजह थी कि वो समय मिलते ही हमेशा कैटवॉक की प्रैक्टिस शुरू कर देती थीं। निवेदिता बैंगलोर के पॉश इलाके राजेश्वरी नगर के दो मंजिला घर में रहती थीं। 17 मई 1998 की बात है निवेदिता ने रात को खाना खाया और छत पर चली गईं। उनका घर दो मंजिला था, जिसकी ऊंचाई 35 फीट थी। उन्होंने घरवालों से कहा था कि वो छत पर कैटवॉक की प्रैक्टिस करेंगी। कुछ ही देर बाद घरवालों ने एक जोरदार आवाज सुनी। बाहर निकलकर देखा तो निवेदिता खून से लथपथ कराह रही थीं। हड़बड़ी में परिवार कुछ समझ नहीं सका। उन्हें तुरंत माल्या हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां पता चला कि उन्हें मल्टीपल हेड इंजरी हुई हैं, साथ ही उनके शरीर में मल्टीपल फ्रैक्चर भी हुए हैं। हॉस्पिटल के बेस्ट डॉक्टर्स ने उनकी अर्जेंट सर्जरी की। 24 घंटों तक निवेदिता को होश नहीं आया। फिक्रमंद होकर उनके पिता ने कुछ गुरुओं से बात की और उनकी सलाह पर बेटी का नाम निवेदिता जैन से निवेदिता रिंकी कर दिया। उनसे कहा गया था कि नाम बदलने से उनकी बेटी की हालत में सुधार आ सकता था, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि किसी बात का कोई असर नहीं हुआ। ठीक एक दिन बाद निवेदिता कुछ समय के लिए होश में आईं, लेकिन फिर उन्होंने रिस्पॉन्स देना बंद कर दिया, जिसके बाद वो कोमा में चली गईं। निवेदिता पूरे 24 दिनों तक कोमा में रहीं और 10 जून 1998 की सुबह 11 बजे डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। निवेदिता की मौत को उनके परिवार ने हादसा कहा। परिवार ने कहा कि वो छत की मुंडेर पर चलकर कैटवॉक की प्रैक्टिस करते हुए नीचे गिरी होंगी। हालांकि कई लोगों ने उनकी मौत को हादसा मानने से इनकार कर दिया। एशिया नेट की रिपोर्ट के अनुसार, निवेदिता जैन के गिरने के समय ही उनके घर के पास तेज रफ्तार से जाती हुई सफेद लग्जरी कार देखी गई थी, जो एक राजनेता की थी। तब ये खबरें थीं कि निवेदिता की मौत के पीछे किसी बड़े राजनेता का हाथ हो सकता है। वहीं, ये भी खबरें रहीं कि निवेदिता ने आत्महत्या की थी। फैंस के ये आरोप भी रहे कि परिवार ने ही निवेदिता की हत्या की साजिश रची थी, लेकिन पुलिस जांच में इन सभी दावों को बेबुनियाद कहा गया और इसे एक्सीडेंटल डेथ करार दिया गया। एक ज्योतिष ने की थी अकाल मृत्यु की भविष्यवाणी निवेदिता जैन की मौत के बाद कन्नड़ सिनेमा के पॉपुलर डायरेक्टर रघुराम ने ब्लॉग शेयर कर बताया था कि उनकी मौत से कुछ समय पहले ही एक ज्योतिष ने उनकी अकाल मृत्यु की भविष्यवाणी कर दी थी। उन्होंने ब्लॉग में लिखा कि कोल्लूर में निवेदिता ने फिल्म प्रेमा राग गद्दा गेलाथी की शूटिंग की थी, जिसे सुनील कुमार देसाई ने डायरेक्ट किया था। उस समय शूटिंग के सेट पर एक ज्योतिष आया था, जिसके पास एक तोता था। वो तोते की मदद से लोगों को उनका भाग्य बता रहा था। जब निवेदिता को इस तोता शास्त्र के बारे में पता चला तो वो भी उस ज्योतिष के पास गईं। ज्योतिष ने काफी देर तक निवेदिता के हाथों की रेखाएं देखीं और कहा कि आपके पास ज्यादा समय नहीं है। आपकी जो भी इच्छाएं हैं वो आप जल्द से जल्द पूरी कर लीजिए। ये सुनकर निवेदिता काफी परेशान हुईं। उन्होंने यही बात अपने दोस्तों से भी शेयर की थी। इसके अलावा उन्होंने सीनियर जर्नलिस्ट विजय सारथी से भी इसे साझा किया था, जिन्होंने बाद में ये बात डायरेक्टर रघुराम को बताई थी। रघुराम ने कहा था कि उन्होंने निवेदिता के परिवार को ढूंढने की काफी कोशिश की, लेकिन दो साल की मशक्कत के बावजूद उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल सकी। ये अपनी तरह का इकलौता मामला नहीं है, जब किसी फिल्मी हस्ती का निधन इस तरह ऊंचाई से गिरने से हुआ है। दिव्या भारती- बॉलीवुड स्टार दिव्या भारती की मौत भी उनके पांचवी मंजिल के अपार्टमेंट की बालकनी से गिरने से हुई थी। निकिता- ओडिया एक्ट्रेस निकिता की भी साल 2019 में अपने घर की छत से गिरने से मौत हुई थी। एक्ट्रेस छत पर थीं, जब उनकी पति से किसी बात पर बहस हुई और फिर हाथापाई होने लगी। झगड़े में ही निकिता छत से गिर गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। पार्क सू रयून- कोरियन एक्ट्रेस पार्क सू रयून की भी साल 2023 में सीढ़ियों से गिरकर मौत हुई थी। एक्ट्रेस महज 29 साल की थीं। एन्ना पोली- ओनली फेम मॉडल और एक्ट्रेस एना पोली की इसी साल बालकनी से गिरकर मौत हुई है। वो अपार्टमेंट में दो को-स्टार्स के साथ एक मूवी शूट कर रही थीं, तभी बैलेंस बिगड़ने से हादसा हो गया। यू मेंगलोंग- चीनी एक्टर और सिंगर यू मेंगलोंग का भी इसी साल बीजिंग की ऊंची इमारत की पांचवीं मंजिल से गिरने से निधन हुआ है। 17 सितंबर को दोस्तों के साथ डिनर करने के बाद एक्टर अपने कमरे में गए थे। सुबह जब दोस्त उठे तो वो कहीं दिखे नहीं। दोस्तों ने छानबीन की तो देखा कि उनके कमरे की खिड़की टूटी हुई है। बाद में पता चला कि वो कमरे की खिड़की से नीचे गिर गए।

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How US megastar Luke Combs helped Britain fall in love with country music

The star looks forward to country music's famous Grand Ole Opry relocating from Nashville to London.

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Largest lamassu discovered in Mosul

What may be the largest recorded Neo-Assyrian winged bull (aka lamassu) has been uncovered at Tell Nabi Yunus in Mosul, Iraq, the famed ancient city of Nineveh. Located in the remains of the throne room built by King Esarhaddon (681-669 B.C.), the lamassu is six meters (20 feet) high, towering over the renown examples at the British Museum and the Louvre which reach between 3.5 and 4.2 meters (11.5-13.8 feet) in height.

According to [Iraq’s Minister of Culture, Ahmed Fakkak al-Badrani], the palace’s architecture includes multiple adjoining halls leading to the throne room, each guarded by lamassu pairs at their entrances. Archaeologists believe the newly revealed statue was one of a matching pair flanking the main gate to the throne hall.

This is not the first lamassu to be uncovered at the site. A smaller specimen was found in the 1990s on the left side of the palace, measuring just under four meters. In 2021, Iraqi authorities announced the discovery of another large winged bull, though smaller than the new find. The most recent excavation, however, has brought to light the largest ever recorded, making the site a focal point for the study of Assyrian monumental sculpture.

Son of the Sennacherib and father of Ashurbanipal, Esarhaddon became one of the most powerful rulers of the Neo-Assyrian Empire. He was appointed heir by his father, even though he was the youngest son, and had to fight his elder brother to claim his throne after his brother assassinated their father. He was an able general, conquering Egypt and Syria and increasing the size of the Neo-Assyrian Empire to its greatest extent in his brief decade of rule.

Inscriptions found at Nebi Yunus dating to the reign of Sennacherib (705-681 B.C.) and Esarhaddon indicate it was built by the former as a military palace astride the southwest wall of the city facing the Tigris River. It was used as a royal residence, armory, stables, barracks, parade ground where horses, mules, chariots and equipment were mustered for battle. Archaeological remains of courtyards, workshops, administrative offices and barracks have been found, and on the other side of the building, a throne room suite and state apartments decorated “in the Hittite style,” as an inscription of Sennacherib’s describes it. Esarhaddon added significantly to the palace and its courtyards, expanding the residential area so that it was comparable in size to the other residential palaces.

Peter Nicholas, an archaeologist at Heidelberg University, told the Iraqi News Agency (INA) that excavation teams also uncovered numerous cuneiform tablets inscribed with the writings of kings Sennacherib, Esarhaddon, and Ashurbanipal–three of the most prominent rulers of the Neo-Assyrian Empire. Additional artifacts appear to represent spoils of war taken from Egypt and the Levant, offering a richer picture of Assyria’s far-reaching campaigns.

Nebi Yunus was revered for millennia as the tomb of the Prophet Jonah. In early Christian times, there was a church on the site, and records mention the Jonah Mosque there already in the 10th century. There was also a small village and an associated cemetery, so even as Nineveh began to be excavated in the 19th century, Tell Nebi Yunus was not available to archaeologists. Only a few limited digs were allowed between homes, and one notable excavation by the Ottoman governor Helmi Pasha which uncovered the entrance to the throne room.

In July of 2014, the mosque was blown up by Islamic State. Claiming the mosque had become “a place for apostasy, not prayer,” they demolished the tomb, cleared all of the rubble and graded the site flat, ensuring that it could never be reconstructed. The destruction above must have caused damage to the Neo-Assyrian layers below, and the Islamic State’s greed to fund their wars and terrorism with the cultural patrimony of the locations under their control caused even more damage. They tunneled under the mosque seeking out saleable antiquities to loot, even as they pretended to destroy everything contrary to their faith.

The Institutes of Assyriology and Ancient Near Eastern Archaeology at Heidelberg University in cooperation with the Iraqi State Board of Antiquities and Heritage began a new project of excavations in 2018. They began exploring IS’ looting tunnels. In 2019, the project expanded to excavate and preserve the Assyrian remains of Nineveh, including the Nebi Yunus mound.



* This article was originally published here

Rihanna gives birth to first daughter with A$AP Rocky

The celebrity pair announced the birth of Rocki Irish Mayers on Instagram in a post that included a miniature pair of boxing gloves.

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प्रोसेनजीत चटर्जी बोले- शाहरुख भी करें बंगाली सिनेमा:अमिताभ-दिलीप से मिलती है ऊर्जा, हिंदी स्टार्स से रीजनल फिल्मों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

बंगाली सिनेमा के फेमस एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी पिछले दिनों फिल्म ‘देवी चौधुरानी’ को लेकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। इस दौरान एक्टर ने कहा कि अगर रीजनल फिल्मों में हिंदी सिनेमा के बड़े स्टार्स काम करें तो रीजनल सिनेमा को बहुत बढ़ावा मिलेगा। एक्टर ने शाहरुख खान को शानदार इंसान बताते हुए कहा कि उन्हें बंगाली फिल्में करनी चाहिए। चाहे वो एक्टिंग करें या फिर प्रोड्यूस करें। साथ ही प्रोसेनजीत ने बताया कि अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार की जिंदगी से उन्हें हमेशा ऊर्जा, ताकत और आत्मविश्वास मिलता है। सवाल: आपके एक गाने में कई बड़े स्टार्स को स्क्रीन शेयर करते देखा गया। क्या कभी ऐसा होगा कि आप सब मिलकर साथ में कोई फिल्म करें? जवाब: क्यों नहीं, जरूर करेंगे। यह बहुत अच्छा होगा अगर इंडस्ट्री और रीजनल फिल्मों के सारे सीनियर स्टार्स एक साथ आएं। पहले भी ऐसी फिल्म मनमोहन देसाई ने बनाई थी, जिसमें अमिताभ बच्चन और उत्तम कुमार जैसे बड़े कलाकार थे। वैसा फिर से हो सकता है, बस किसी को पहल करनी होगी। सवाल- आपने अमिताभ बच्चन का नाम लिया। उनके साथ आपकी मुलाकात का कोई किस्सा शेयर करेंगे? जवाब- अमित जी मेरे लिए हमेशा एक बड़े मेंटर रहे हैं। उनके साथ-साथ सुमित्रा चटर्जी और उत्तम कुमार भी मेरे प्रेरणा स्रोत हैं। मेरी किताब मैंने अमित जी और सुमित्रा चटर्जी को समर्पित की है। असल में, मैं मानता हूं कि सिर्फ फैन मोमेंट से ज्यादा जरूरी है हमारे अपने देश के सुपरस्टार्स की जिंदगी को समझना। अमित जी और दिलीप कुमार सर की जिंदगी से मुझे हमेशा ऊर्जा, ताकत और आत्मविश्वास मिलता है। सवाल: शाहरुख का भी आपका कोलकाता से बहुत गहरा संबंध है। आपसे उनकी मुलाकात भी होती रहती होगी। क्या कभी आप दोनों आपस में बात करते हैं कि साथ मिलकर कुछ किया जाए? जवाब: मैं यही कहूंगा कि अगर उन्हें कभी समय मिले तो एक बंगाली फिल्म का चैप्टर जरूर होना चाहिए। चाहे वह उसमें अभिनय करें या उसे प्रोड्यूस करें। हम सब उन्हें बहुत चाहते हैं। वह बेहद शानदार इंसान हैं। सवाल: आपका गाना ‘तुझे देखा..." बहुत वायरल हुआ है। यह गाना असल में मोहब्बत और जज्बात को बहुत खूबसूरती से दिखाता है। इसका असर इतना गहरा है कि जब इसका बंगाली वर्जन भी सुनते हैं तो वही जादू महसूस होता है? जवाब: बस वही मिल जाए, तो बहुत है। उसी के लिए तो मैं हूं।

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चंकी पांडे @63, दसवीं फेल एक्टर:जिसने अक्षय कुमार को एक्टिंग सिखाई, सलमान-आमिर और शाहरुख की वजह से छोड़ा बॉलीवुड, बने बांग्लादेश के सुपरस्टार

सुयश पांडे से चंकी पांडे बनने तक का सफर बेहद दिलचस्प और उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। चंकी पांडे का जन्म 26 सितंबर 1962 को मुंबई में हुआ था। बचपन में उनकी नैनी उन्हें प्यार से 'चंकी' कहकर बुलाती थीं और यही नाम आगे चलकर उनके साथ जुड़ गया। माता-पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन पढ़ाई में इंटरेस्ट न होने के कारण उन्होंने अभिनय की ट्रेनिंग शुरू की और अक्षय कुमार जैसे सितारों को भी एक्टिंग और डांस सिखाया। शुरुआती करियर में उन्हें कई रिजेक्शन झेलने पड़े, यहां तक कि एक प्रोड्यूसर के ऑफिस से उन्हें निकाल भी दिया गया। हालांकि निर्माता पहलाज निहलानी से हुई मुलाकात उनके फिल्मी करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई और 1987 में फिल्म ‘आग ही आग‘ से उन्होंने बॉलीवुड में डेब्यू किया। 1988 की ‘तेजाब ‘ फिल्म में उनके किरदार ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई, लेकिन 90 के दशक में सलमान, आमिर और शाहरुख जैसे सितारों के आगे उनका करियर धीमा पड़ गया। इसके बाद उन्होंने बांग्लादेशी फिल्मों की ओर रुख किया, जहां उन्हें सुपरस्टार का दर्जा मिला। बाद में भारत लौटने पर उन्हें फिल्म हाउसफुल सीरीज में आखिरी पास्ता के मजेदार किरदार से नई पहचान और लोकप्रियता मिली। चंकी पांडे की कहानी इस बात का सबूत है कि असफलताओं और बदलावों के बावजूद कड़ी मेहनत और धैर्य से इंसान अपनी जगह बना सकता है। आज चंकी पांडे के 63वें जन्मदिन पर आइए जानते हैं, उनके जीवन और करियर जुड़ी कुछ और खास बातें.. सुयश पांडे से चंकी पांडे बनने की कहानी 26 सितंबर 1962 को बॉम्बे (अब मुंबई) में जन्मे चंकी पांडे का असली नाम सुयश पांडे है। उनका नाम चंकी पांडे बनने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। बचपन में उनकी देखभाल करने वाली नैनी उन्हें 'चंकी' कहकर बुलाती थी, क्योंकि उस समय वे गोल-मटोल थे। धीरे-धीरे यह नाम पूरे घर में प्रचलित हो गया और लोग उनके असली नाम की बजाय उन्हें चंकी कहने लगे। आगे चलकर वे चंकी पांडे के नाम से ही मशहूर हो गए। मां-बाप डॉक्टर बनाना चाहते थे फिल्मों में आने से पहले चंकी पांडे पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद एक्टिंग की ट्रेनिंग लेने लगे थे। चंकी के माता-पिता (डॉ.स्नेहलता पांडे-डॉ. शरद पांडे) डॉक्टर थे, इसलिए उन पर डॉक्टर बनने का दबाव था, लेकिन वह एक्टिंग की ओर झुके। 10वीं क्लास में कई बार फेल होने के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़कर एक्टिंग क्लास में दाखिला लिया। उन्होंने 1986 में डेजी ईरानी के स्कूल में अभिनय और डांस की ट्रेनिंग ली। वहीं उन्होंने बतौर इंस्ट्रक्टर भी काम किया और अक्षय कुमार जैसे कई स्टार्स को डांस और एक्टिंग सिखाई। चंकी पांडे ने यह बात साइरस ब्रोचा के साथ एक इंटरव्यू में कही थी। चंकी पांडे ने कहा था- एक्टिंग स्कूल में सीनियर होने के नाते उन्होंने अक्षय कुमार को कुछ डांस मूव्स और डायलॉग डिलीवरी सिखाई थी। चंकी पांडे ने यह भी बताया कि अक्षय कुमार मजाक में कहते हैं कि उनकी सिखाई हुई बातें ही उनके शुरुआती करियर में फिल्मों के फ्लॉप होने का कारण थीं। प्रोड्यूसर के ऑफिस से निकाले गए इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान चंकी पांडे ने करियर के शुरुआती दिनों के बारे में बात करते हुए कहा था कि कैसे एक प्रोड्यूसर ने उन्हें ऑफिस से बाहर निकाल दिया था। चंकी पांडे ने कहा था- उस दौर में कोई कास्टिंग डायरेक्टर या डिजिटल माध्यम नहीं था, इसलिए प्रोड्यूसर्स से मिलने के लिए लंबी लाइनों में खड़े रहना पड़ता था। कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। एक बार एक बड़े प्रोड्यूसर-डायरेक्टर के ऑफिस गया। वे रोमांटिक फिल्में बनाते थे। टॉयलेट में ऑफर हुई थी पहली फिल्म चंकी पांडे ने 1987 में प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी की फिल्म ‘आग ही आग' से डेब्यू किया था। इस फिल्म में काम मिलने का बहुत ही मजेदार किस्सा है। जिसके बारे में चंकी पांडे ने साइरस ब्रोचा के शो में बताया था। चंकी ने कहा था- मैं एक शादी में चूड़ीदार पजामा पहनकर गया था। मुझे उसका गांठ बांधना तो आता था, लेकिन उसे खोलना मेरे बस के बाहर था। ज्यादा बीयर पीने की वजह से मुझे बाथरूम जाना पड़ा, लेकिन अंदर जाने के बाद मैं अपने नाड़े को खोल ही नहीं पाया। बाथरूम के अंदर खड़े-खड़े जोर से मदद के लिए आवाज लगाई। वहां मौजूद लोग इसे मजाक समझकर हंस रहे थे। मगर तभी एक शख्स मदद के लिए आगे बढ़े, वो फिल्ममेकर पहलाज निहलानी थे। बस फिर क्या था, गांठ खुलने के साथ ही हमारी दोस्ती हो गई। हमारे बीच घंटों बातें हुईं। मैंने बताया कि मॉडलिंग करता हूं और फिल्मों में काम ढूंढ रहा हूं। पहलाज निहलानी ने बताया कि गोविंदा के साथ अभी फिल्म बनाई है। यह सुनकर मैं दंग रह गया। कुछ दिनों बाद पहलाज ने मुझे ऑफिस बुलाया और पहली फिल्म आग ही आग (1987) के लिए साइन किया। इस फिल्म के बाद उन्होंने पाप की दुनिया में भी काम दिया। एक्ट्रेस फराह नाज ने जड़ दिया था थप्पड़ चंकी पांडे को थप्पड़ मारने वाली घटना फराह नाज ने 1988 में फिल्मफेयर को दिए एक इंटरव्यू में बताई थी। उन्होंने बताया था कि 1989 में फिल्म 'कसम वर्दी की' के सेट पर चंकी पांडे ने उन्हें "I am the man" कहकर चिढ़ाया था, जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आया। गुस्से में उन्होंने क्रू के सामने चंकी पांडे को थप्पड़ मार दिया था। बाद में फराह नाज ने इस घटना के लिए माफी भी मांगी थी। यह घटना उस समय सुर्खियों में रही थी। कंजूसी के लिए मशहूर रहे हैं चंकी चंकी पांडे के बारे में कंजूसी और फिल्म 'त्रिदेव' से निकाले जाने के कुछ दिलचस्प किस्से सामने आए हैं। बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर राजीव राय ने इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताया था। डायरेक्टर ने बताया था कि वे फिल्म 'त्रिदेव' में चंकी पांडे को कास्ट करने के लिए 20-25 बार उनके घर भी गए, लेकिन चंकी 1-2 लाख रुपए की रकम पर बार-बार बहस करते थे। इस वजह से उन्होंने चंकी को फिल्म से बाहर कर दिया, किसी और को कास्ट कर लिया। राजीव ने यह भी बताया कि चंकी पांडे बहुत ही कंजूस नेचर के हैं और वो अपनी आदतों से मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म 'विश्वात्मा' की शूटिंग के दौरान चंकी अपने पास सिर्फ एक सिगरेट रखते थे ताकि कोई उनसे सिगरेट न मांग सके। सलमान-आमिर और शाहरुख की वजह से बॉलीवुड में सफल नहीं हुए चंकी पांडे ने अपने करियर पर असर डालने वाले कारणों को लेकर कई इंटरव्यू में खुलासा किया है कि जब शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान जैसे बड़े सितारे बॉलीवुड में आए, तो उनके करियर की चमक फीकी पड़ गई। यह बात उन्होंने हाल ही में स्क्रीन से किए गए एक इंटरव्यू में कही थी, जिसमें उन्होंने बताया कि 1987 में अपने डेब्यू फिल्म ‘आग ही आग' के बाद उनका करियर अच्छा चल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे ये नए स्टार्स इंडस्ट्री में आते गए, उन्हें खुद को खोया हुआ महसूस किया। चंकी ने कहा कि 1988 उनका शानदार साल था, इसके बाद सब कुछ फीका पड़ गया। चंकी पांडे ने यह भी बताया कि उस वक्त अजय देवगन, अक्षय कुमार, सलमान खान, आमिर खान और शाहरुख खान जैसे स्टार्स लगातार इंडस्ट्री में एंट्री ले रहे थे जिसकी वजह से उन्हें अपनी जगह बनाना मुश्किल हो गया। बॉलीवुड में उतार-चढ़ाव भरा रहा करियर चंकी पांडे का हिंदी सिनेमा में सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने अपनी शुरुआत 1987 में फिल्म 'आग ही आग' से की थी और जल्द ही 'तेजाब' (1988) में अनिल कपूर के दोस्त के रोल से खास पहचान बनाई। हालांकि पांडे को हिंदी फिल्मों में मुख्य नायक के रूप में उतना बड़ा स्टारडम नहीं मिला, बल्कि उनके सहायक और साइड रोल ज्यादा सफल रहे। 1990 के दशक के मध्य तक आते-आते फिल्मों में उनकी मांग कम होने लगी, क्योंकि उस वक्त आमिर खान, शाहरुख खान, सलमान खान जैसे बड़े सितारे उभर रहे थे। इस वजह से चंकी पांडे ने अपने अभिनय करियर को बनाए रखने के लिए बांग्लादेश के फिल्म उद्योग का रुख किया, जहां वह रातोंरात सुपरस्टार बन गए। बांग्लादेश के शाहरुख और अमिताभ कहलाए चंकी पांडे ने The Quint के साथ बातचीत में कहा था कि 1990 के दशक के मध्य में जब उनको हिंदी फिल्मों में बढ़ियां रोल नहीं मिल रहे थे तो उन्होंने बांग्लादेश की फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि उन्हें बंगाली भाषा नहीं आती थी इसलिए उनकी आवाज डब की जाती थी, लेकिन इसके बावजूद वह वहां के दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गए। चंकी को बांग्लादेश का शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन कहा जाने लगा। उन्होंने लगभग 4-5 साल तक वहां फिल्मों में काम किया और काफी सफल रहे। बाद में चंकी अपनी बीवी के मनाने पर फिर से भारत लौटे। कैसे हुई चंकी पांडे की भावना से शादी? चंकी पांडे ने 17 जनवरी 1998 को भावना पांडे से शादी की थी। शादी से पहले भावना कॉस्ट्यूम डिजाइनर थीं। दोनों की मुलाकात एक नाइट क्लब में हुई थी, जहां चंकी ने भावना और उनकी दोस्त से बातचीत की थी। शादी से पहले चंकी और भावना काफी समय तक साथ थे और डेटिंग करते रहे। हालांकि भावना के पिता को शुरू में चंकी पसंद नहीं थे क्योंकि उनकी एक कैसेनोवा वाली इमेज थी और उन्हें बॉलीवुड की दुनिया ठीक से समझ नहीं आती थी। पर धीरे-धीरे वे मान गए और आज दोनों का रिश्ता बहुत मजबूत और प्यार भरा है। आखिरी पास्ता के किरदार से मिली नई पहचान चंकी पांडे ने बॉलीवुड में 2003 में फिल्म 'कयामत' से वापसी की, जिसमें उन्होंने वैज्ञानिक का निगेटिव किरदार निभाया। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, जिनमें 'पेइंग गेस्ट', 'हाउसफुल' सीरीज, 'बुलेट राजा' और 'बेगम जान' शामिल हैं। चंकी पांडे को 'हाउसफुल' सीरीज में आखिरी पास्ता के किरदार से खास पहचान मिली। इस किरदार के कारण उन्हें फैंस काफी पसंद करते हैं और उनकी बोलने की स्टाइल भी लोकप्रिय है। वे इस भूमिका में शुरू से ही नजर आ रहे हैं और इसे लेकर उन्हें कई बार चर्चा में भी देखा गया है। 'हाउसफुल 5' हाल ही में रिलीज हुई है। एक्टिंग के अलावा चंकी और क्या करते हैं? एक्टिंग के अलावा चंकी पांडे बॉलीवुड इलेक्ट्रिक नामक एक इवेंट कंपनी चलाते हैं जो स्टेज शो आयोजित करती है। इसके अलावा अपनी पत्नी भावना पांडे के साथ मिलकर मुंबई में एक हेल्थ फूड रेस्टोरेंट (Elbo Room) भी चलाते हैं। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें महिमा चौधरी@52, सुभाष घई पर करियर बर्बाद का आरोप लगाया:दो मिसकैरेज, रोड एक्सीडेंट से चेहरे में घुसे कांच के 67 टुकड़े; कैंसर से जीतीं महिमा चौधरी बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस हैं। वह कम उम्र से ही एक्ट्रेस बनने का सपना देखती थीं। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और मॉडलिंग से करियर की शुरुआत की। पूरी खबर पढ़ें..

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प्रीति जिंटा ने हिमाचल आपदा प्रभावितों को दी राहत राशि:किंग्स-XI पंजाब की तरफ से की मदद, आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था को ट्रांसफर किए रुपए

हिमाचल की बेटी, बॉलीवुड एक्ट्रेस और पंजाब किंग्स की सह-मालकिन प्रीति जिंटा ने आपदा प्रभावितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रभावितों की मदद को 30 लाख रुपए का अंशदान दिया है। प्रीति जिंटा ने किंग्स-XI पंजाब की ओर से यह आर्थिक मदद की है। बॉलीवुड एक्ट्रेस ने यह राशि हिमाचल बेस्ड आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था को ट्रांसफर की है। संस्था के संस्थापक सरबजीत बॉबी ने इस मदद के लिए प्रीति जिंटा का आभार जताया है। उन्होंने बताया कि इस राशि से कुल्लू और मंडी के आपदा प्रभावितों की मदद की जाएगी। बॉबी ने बताया- 10 दिन से पैसे ट्रांसफर का प्रोसेस चल रहा था। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बीते शनिवार को यह राशि आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था के खाते में आ गई है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था इस राशि से कुल्लू में आपदा प्रभावितों को 50 लाख रुपए देगी। 25-25 हजार रुपए की राशि प्रति परिवार दी जाएगी। प्रीति का परिवार सेवा के काम में लगा रहता है: बॉबी सरबजीत ने बताया कि प्रीति जिंटा का परिवार समय समय पर सेवा के काम में लगा रहता है। 2 दिन पहले ही प्रीति की माता और भाई शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में संस्था द्वारा चलाए जा रहे लंगर में शामिल हुए थे। शिमला के रोहड़ू की रहने वाली हैं प्रीति जिंटा प्रीति जिंटा हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के रोहड़ू से संबंध रखती हैं। उन्होंने, शिमला से ही कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। वह, बीच बीच में शिमला और रोहड़ू आती रही हैं। उन्होंने 29 फरवरी 2016 को ही अमेरिका निवासी जीन गुडइनफ से शादी की। सराज आपदा प्रभावितों को दिए 1 करोड़ आलमाइटी ब्लेसिंग संस्था इससे पहले मंडी जिला के सराज विधानसभा क्षेत्र में 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता प्रभावित परिवारों की कर चुकी है। इस संस्था ने प्रत्येक आपदा प्रभावित परिवार को 25-25 हजार रुपए ट्रांसफर किए हैं। यह संस्था कई सालों से शिमला IGMC समेत कई जगह मुफ्त लंगर लगा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के प्रभावित परिवारों को भी 1 करोड़ दे चुकीं हिमाचल में आपदा प्रभावितों की मदद से पहले प्रीति जिंटा ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए दान कर चुकी हैं। पंजाब के आपदा प्रभावितों को भी प्रीति जिंटा 33 लाख रुपए दान कर चुकी हैं। बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से मदद की अपील सरबजीत बॉबी ने बॉलीवुड इंडस्ट्री से जुड़े हिमाचल के दूसरे लोगों से भी आपदा प्रभावितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आपकी मदद से हिमाचल के आपदा प्रभावितों के दर्द को कुछ कम किया जा सकता है। हिमाचल से कई कलाकार बॉलीवुड इंडस्ट्री में काम करते हैं। इनमें कंगना रनोट, यामी गौतम, अनुपम खेर, प्रीति जिंटा के अलावा रुबीना दिलैक इत्यादि शामिल हैं।

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Lost in the Kennedy Files

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Love Islander's vodka ad pulled for targeting under-18s

Lucinda Strafford's TikTok ad for Swansea's Au Vodka broke advertising rules, the regulator finds.

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What’s ‘Nightmare Bacteria’? Why Drug-Resistant Superbugs Are Spreading Like Wildfire In US

Health experts warn that bacteria with the NDM gene are spreading fast in the United States, rendering even last-resort antibiotics ineffective.

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The Heroic Remains of Homer’s Odyssey

The Heroic Remains of Homer’s Odyssey JamesHoare

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Jimmy Kimmel show to return after suspension over Charlie Kirk comments

The late-night comic's show will return to air after Disney said it had "thoughtful conversations" with him.

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‘The Medieval Moon’ by Ayoush Lazikani review

‘The Medieval Moon’ by Ayoush Lazikani review JamesHoare

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Dame Prue's parachute dress and Romeo Beckham's runway debut - London Fashion week in pictures

Fifteen of the most striking looks from the event's opening shows.

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Dame Prue's parachute dress and Romeo Beckham's runway debut - London Fashion week in pictures

Fifteen of the most striking looks from the event's opening shows.

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The Battle of Stamford Bridge

The Battle of Stamford Bridge JamesHoare

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'अगर स्क्रिप्ट अच्छी नहीं बनी, तो मैं इसे नहीं बनाऊंगा':प्रियदर्शन बोले- 'हेरा फेरी 3' तभी बनाएंगे, जब यह पहले पार्ट के बराबर मजेदार होगी

फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ का फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसमें अक्षय कुमार, परेश रावल और सुनील शेट्टी लीड रोल में होंगे। हाल ही में फिल्म के डायरेक्टर प्रियदर्शन ने कहा कि अगर स्क्रिप्ट सही होगी, तो ही वह फिल्म 'हेरा फेरी 3' बनाएंगे। पिंकविला के साथ बातचीत में प्रियदर्शन ने कहा, ' मैं यह नहीं कह रहा कि मैं तीसरा पार्ट कर रहा हूं, जब तक कि मैं ऐसी फिल्म नहीं बना लूं जो पहले पार्ट के बराबर हो। अगर मैं तीसरा पार्ट बनाऊं, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि यह पहले पार्ट को देखने वाले लोगों के लिए मजेदार और सही हो। जब तक पूरी फिल्म का नहीं होती, मैं तीसरा पार्ट शुरू नहीं करूंगा।' उन्होंने आगे कहा, अगर स्क्रिप्ट मेरी उम्मीद के अनुसार अच्छी नहीं बनी, तो मैं फिल्म नहीं बनाऊंगा। मैंने अपने करियर में कुछ ऊंचाइयां हासिल की हैं, जहां से मैं बुरी तरह गिरना नहीं चाहता।' दरअसल, फिल्म 'हेरा फेरी 3' बीते साल अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल के साथ अनाउंस हुई थी। सभी कलाकारों ने इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। हालांकि, इस साल मई में अचानक परेश रावल ने घोषणा की कि वह फिल्म छोड़ रहे हैं। इसके बाद फिल्म प्रोड्यूसर अक्षय कुमार ने उन्हें लीगल नोटिस भेजा था। परेश रावल ने जवाब में फिल्म का साइनिंग अमाउंट लौटाया। फिर कुछ दिन बाद, परेश रावल ने फिल्म से फिर जुड़ने का फैसला किया। इसके बाद से ही खबरें थीं कि लीगल नोटिस और फिल्म छोड़ने की खबरें पब्लिसिटी स्टंट हैं। हालांकि, अक्षय कुमार ने इस पर सफाई दी थी। जब हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में अक्षय कुमार से पूछा गया था कि क्या परेश रावल का फिल्म छोड़ना पब्लिसिटी स्टंट था। इसके जवाब में एक्टर ने कहा था कि नहीं, ये पब्लिसिटी स्टंट नहीं था। ये लीगल हो गया था। जब लीगल चीजें इन्वॉल्व होती हैं, तो हम इसे पब्लिसिटी स्टंट नहीं कह सकते। ये रियल था। अक्षय ने आगे कहा था, लेकिन अब सब कुछ ठीक हो गया है। जल्द ही एक अनाउंसमेंट हो सकती है। हां, कुछ ऊंच-नीच जरूर हुई थी, लेकिन अब सब ठीक हो चुका है और हम फिर साथ आ चुके हैं और हमेशा साथ रहेंगे। बस इतना ही।

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सिंगर हनी सिंह बोले- मेरा नाम लेकर मशहूर मत हो:यह दाढ़ी धूप में सफेद नहीं हुई; रफ्तार ने कहा था- वह रैप नहीं जानते

हिंदी और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के चर्चित रैपर हनी सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हनी सिंह ने हाल ही में लाइव आकर अपनी आने वाली एल्बम की घोषणा की है। इसमें 51 गाने हैं और यह एल्बम 26 सितंबर को रिलीज होगी। इस दौरान हनी सिंह ने बिना नाम लिए बॉलीवुड रैपर रफ्तार और बादशाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि हनी सिंह को रैप करना नहीं आता, उन्हें अब उनके गानों से असली रैप का मतलब पता चलेगा। लाइव सेशन के दौरान हनी सिंह का अंदाज बेबाक और तीखा नजर आया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनकी दाढ़ी धूप में सफेद नहीं हुई। रैपर हनी सिंह ने और क्या-क्या कहा... नई एल्बम में विरोधियों को जवाब देने की झलक हनी सिंह की नई एल्बम 26 सितंबर को आ रही है। इसमें 51 गाने रहेंगे। न केवल म्यूजिक लवर्स, बल्कि पूरी इंडस्ट्री की इस एल्बम पर नजर है। हनी सिंह ने जिस अंदाज में अपने विरोधियों को जवाब दिया है, उससे साफ है कि उनके गानों में भी कहीं न कहीं इस विवाद की झलक दिख सकती है। हनी सिंह, रफ्तार और बादशाह का रिश्ता इंडस्ट्री में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। तीनों कभी एक साथ म्यूजिक की दुनिया में धूम मचाने वाले गायक रहे हैं, लेकिन वक्त के साथ उनके बीच दूरियां बढ़ गईं। हनी सिंह और बादशाह के बीच ये है विवाद... रैपर रफ्तार ने कहा था- हनी सिंह को रैप करना नहीं आता रफ्तार कई बार इंटरव्यू और पॉडकास्ट में यह कहते नजर आए कि हनी सिंह को रैप की गहराई नहीं आती। उन्होंने कहा था कि हनी सिंह की पॉपुलैरिटी रियल हिप-हॉप से अलग है। इस पर हनी सिंह पहले कभी सीधे प्रतिक्रिया नहीं देते थे, लेकिन अब उन्होंने बिना नाम लिए रफ्तार को जवाब दिया है। रफ्तार ने कहा था, 'मैंने विरोध को हमेशा अपने ऐल्गोरिद्म (लयबद्धता) में एक बढ़त के तौर पर देखा है।' पॉडकास्ट में जब उनसे पूछा गया कि ऐसा कौन सा कलाकार है, जो बोलता है कि वह अपने लिरिक्स खुद लिखता है, लेकिन लिखता नहीं है? इस पर रफ्तार ने हनी सिंह का नाम लिया था। इस बात का जवाब हनी सिंह ने अपने लाइव में दिया।

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इरफान खान ने नसीरुद्दीन शाह-ओम पुरी को दी थी गाली:रिटेक से हो गए थे गुस्सा, दीपक डोबरियाल ने बताया मकबूल की शूटिंग का किस्सा

विशाल भारद्वाज की फिल्म 'मकबूल' भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है। शेक्सपियर के नाटक 'मैकबेथ' पर आधारित यह फिल्म न सिर्फ इरफान खान के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई, बल्कि ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, तब्बू, पंकज कपूर और पीयूष मिश्रा जैसे दिग्गज कलाकारों के दमदार एक्टिंग के लिए भी याद की जाती है। इस फिल्म में दीपक डोबरियाल ने भी काम किया था। हाल ही में स्क्रीन के साथ बातचीत में दीपक डोबरियाल ने फिल्म 'मकबूल' के सेट पर बिताए पलों को शेयर किया। उन्होंने एक किस्सा बताया कि क्यों इरफान खान ने नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी को गाली दे दी थी। दीपक ने बताया कि जब पीयूष मिश्रा के किरदार की मौत वाले सीन की शूटिंग हो रही थी। इस सीन में ओम पुरी को 'हवेली' शब्द बोलना था, लेकिन उनके शब्द के उच्चारण पर सभी हंस पड़े। डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने मजाक में कहा कि इसमें पंजाबी टच आ गया है। इसके बाद ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह ने जानबूझकर उस शब्द को और मजाकिया अंदाज में बोलना शुरू कर दिया। दीपक ने आगे बताया कि बार-बार हंसी और रीटेक की वजह से शूटिंग अटक गई। इरफान, जो इमोशनल सीन की तैयारी में गहराई से डूबे थे, अचानक गुस्से में ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह को गाली दे दी। फिर तुरंत माफी मांगते हुए बोले- ‘मुझे लगा गाली देकर एक्टिंग हो जाएगी।’ इस वाकये के बाद पूरा सेट अचानक सीरियस हो गया और आखिरकार सीन सफलतापूर्वक शूट हो गया। दीपक डोबरियाल ने कहा, “उस पल के बाद किसी को और मजाक करने की हिम्मत नहीं हुई।” बता दें कि दीपक डोबरियाल हाल ही में फिल्म जुगनुमा: द फेबल में नजर आए हैं, जो इस समय सिनेमाघरों में चल रही है।

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'भट्ट साहब ने मुझे एक लाइफलाइन दी है':अनु मलिक ने बताया कि कैसे महेश भट्ट ने उन्हें म्यूजिक में वापसी का मौका दिया

फिल्ममेकर महेश भट्ट और म्यूजिक डायरेक्टर अनु मलिक की अपकमिंग फिल्म ‘तू मेरी पूरी कहानी’ 8 सितंबर 2025 को रिलीज होगी। फिल्म का डायरेक्शन सुहृता दास ने किया है। वहीं, कहानी महेश भट्ट और श्वेता बोथरा लिखी और म्यूजिक अनु मलिक ने दिया। फिल्म में मेल और फीमेल वर्जन के साथ 10 से ज्यादा गाने हैं। इन गानों में पापोन, राघव चैतन्य, आनंदी जोशी, विशाल मिश्रा और अनमोल मलिक जैसी सिंगरों की आवाज शामिल है। हाल ही में फिल्ममेकर महेश भट्ट और म्यूजिक डायरेक्टर अनु मलिक से दैनिक भास्कर ने फिल्म के गानों और उनके अनुभव को लेकर खास बातचीत की। सवाल: महेश जी और अनु जी, सालों बाद एक साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा? जवाब: महेश भट्ट: जब आदमी फ्लॉप होता है, जब पिक्चर नहीं चलती, तो इंडस्ट्री उसे कौड़ी की तरह ट्रीट करती है। मगर अनु में कुछ खास चमक थी, उसके चेहरे में जो आज भी नजर आती है। हमारा रिश्ता काफी गहरा है। इंडस्ट्री में कहते हैं कि कलाकार की जिंदगी में तीन मौसम होते हैं- 'बड़ा पोटेंशियल', 'पहुंच गया मंजिल तक', और 'फिनिश्ड'। बहुत कम लोगों के लिए चौथा मौसम आता है- 'ही इज बैक' और अनु बिल्कुल इसी तरह लौटे हैं। यह कोई कमबैक नहीं, यह हिट बैक है। अनु मलिक: मुझे लगता है कि भट्ट साहब के साथ मेरा रिश्ता किसी पिछले जन्म का है, चाहे कोई माने या न माने। इस फिल्म के गानों के लिए उनके कॉल से ही मेरे अंदर एक अलग उत्साह और दिल की धड़कनें बढ़ गईं। मैंने महसूस किया कि यह वही मौका है, जब दुनिया ने मुझे छोड़ दिया था, लेकिन भट्ट साहब ने मुझे एक लाइफलाइन दी। कहानी सुनने के बाद जब मैंने पहला गाना रिकॉर्ड किया, भट्ट साहब मेरे सामने खड़े हुए और बोले, 'ट्रैक ऑन करो।' मैंने अपनी आंखें बंद की। जब उन्होंने गाना सुना, तो उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा- ऐसे ही काम करना। सवाल: आजकल कहा जाता है कि जेन-जी के दौर में मेलोडी वाले गाने नहीं चलते। आप इस धारणा को कैसे देखते हैं? जवाब: अनु मलिक: मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं। जेन-जी मेलोडी को बहुत प्यार करती है। हम हिंदुस्तानी हैं और यहां लोग हमेशा से मेलोडी को पसंद करते आए हैं। हाल ही में किसी ने मुझे मेरे गाने पर कॉम्लीमेंट दिया कि, "ये गाना हमें इसलिए पसंद आ रहा है क्योंकि हम इसे गुनगुना पा रहे हैं।" यही मेलोडी की असली ताकत है। महेश भट्ट: देखिए, मार्केट हमेशा डर के आधार पर काम करता है, लेकिन आर्टिस्ट का दिल डर से नहीं, प्यार से काम करता है। अगर धुन में प्यार है, तो वही लोगों तक पहुंचेगी। जब कोई डर से गाना बनाएगा, तो उसमें डर झलकेगा, लेकिन जब दिल टूटा हो या प्यार से भरा हो, तब असली आर्ट निकलता है। लोग कहते हैं कि नई पीढ़ी में गहराई नहीं है, लेकिन मेरा मानना है कि यह बिल्कुल गलत धारणा है। हमारे बच्चों में बहुत गहराई है। यह वाकई एक शानदार पीढ़ी है। सवाल: अनु जी, इस फिल्म में आपकी बेटी अनमोल ने भी गाना गाया उनकी एंट्री कैसे हुई ? जवाब: देखिए, गाने का आइडिया आया तो सबसे पहले यह डिस्कशन हुआ कि हमें एक अलग आवाज चाहिए। रोमांटिक हो, लेकिन जेन-जी को अपील करे। मैंने सोचा क्यों न किसी लड़की को ट्राय करूं। तब मैंने अपनी बेटी अनमोल को बुलाया। जब भट्ट साहब ने उसकी आवाज़ सुनी, तो उन्होंने तुरंत कहा -“ये कुछ नया लेकर आई है।” आप मानिए, मैं ऐसे ही किसी सिंगर को पास नहीं करता, लेकिन अनमोल ने गाया, तो मुझे भी हैरानी हुई। गाना पूरा होते ही भट्ट साहब ने उसे गले लगा लिया। तब मुझे समझ आया कि हां, सही रास्ते पर हैं। सवाल: अनु जी, इस गाने को लेकर ऑडियंस की शुरुआती प्रतिक्रिया कैसी रही? जवाब: शानदार! मेरी बेटी ने मुझे फोन करके कहा, “पापा, बगल वाली गाड़ी में आपका गाना फुल वॉल्यूम पर बज रहा है।” और यह रिलीज के अगले दिन की बात थी। इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है? इस गाने को लोगों ने दिल से अपनाया है। टूटे दिल वालों ने इसे सीने से लगा लिया है। सवाल: अनु जी, आपने कुछ बड़े सिंगर्स के नाम भी सुझाए थे। उस पर क्या चर्चा हुई थी? जवाब: हां, मैंने सोचा था कि बड़े नाम जुड़ेंगे तो म्यूजिक कंपनी को बेचना आसान होगा। मैंने एक मशहूर मेल सिंगर और एक टॉप फीमेल सिंगर के नाम लिए, लेकिन भट्ट साहब मुस्कुरा कर बोले- “ना होगा, ना वो तेरे लिए गाएंगे। अपने आप को स्ट्रगलर समझ, अब तेरा इम्तिहान शुरू है।” उनकी ये बात मुझे अंदर तक हिला गई, लेकिन शायद यही सच्चा मार्गदर्शन था।

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Early medieval Slavic boat reassembled

The wreck of an early medieval Slavic boat discovered in 1984 is being pieced back together by conservators at the Kamień Land History Museum in Kamień Pomorski, northwestern Poland.

It dates to the second half of the 12th century and was in use for a hundred years before meeting its demise in the late 13th century, a period when Kamień Pomorski was an important center of trade and government in the Duchy of Pomerania. Estimates put its original dimensions at 12.1 meters (39.7 feet) long, 2.84 meters (9.3 feet) wide and one meter (3.3 feet) high. About half of its length — just under six meters (19.7 feet) — has survived, and 2.32 meters (7.6 feet) of its width.

The boat’s hull was discovered during drainage work, its timbers well-preserved by the waterlogged environment. A part of the hull was cut by an excavator during the land improvement works before the crew realized they had found a historic shipwreck, but archaeologists were able to remove the surviving section of hull and transport it to an archaeological pool in Szczecin to prevent the timbers from drying out.

In December of 2022, 38 years after the ship’s discovery, conservators embarked on a complex conservation program. The oak timbers were analyzed, sampled and freeze-dried to stabilize them for handling.

“The work of assembling the fragments requires enormous precision and patience, but the end result – a presentation of such a well-preserved example of Slavic shipbuilding – will be impressive,” [Grzegorz Kurka, director of the Kamień Land History Museum] emphasizes. The director admits that it’s currently difficult to say how long the entire process of assembling the boat will take, but the results of the work will soon be on display at the museum.

He also emphasizes that the wreck has enormous historical value and is a source for research on the history of shipbuilding and navigation, both in the context of the development of maritime connections in Northern Europe and in relation to regional Slavic navigation.

“The boat could have served two purposes, depending on the needs. It could have been a trading vessel, but it could also have been used in combat. However, we lean towards the idea that it was a trading vessel, perhaps belonging to a local nobleman, but that’s just our theory,” says the museum director.



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'I could've cheated too': Cardi B gets personal on long-awaited second album

The US rapper references her 2024 divorce and a beef with another female rapper on Am I The Drama?

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Joy Crookes 'let go' of perfectionism - her music is better for it

The singer says she avoided the second-album slump as she "has always got something to say".

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Medieval leper hospital burials found in Lübeck

Graves connected to a medieval leprosarium have been discovered in Lübeck, Schleswig-Holstein, Germany. A human bone was encountered last week during construction of a new “bicycle superhighway” on Ratzeburger Allee just outside the medieval city gates. The police were called at first, and when they determined it was not a criminal issue, archaeologists stepped in to excavate. They found the graves were part of the cemetery of St. Jürgen Siechenhaus (St. Jürgen’s infirmary).

The former Lübeck St. Jürgen leper house, with its associated chapel and cemetery, was located directly in front of the outer Mill Gate in the south of the Hanseatic city. The complex probably originated after 1260, when Bishop John III of Tralau issued a general order for the lepers of the Diocese of Lübeck. This was likely done at the request of the Lübeck Council to prepare for such a leper colony in Lübeck. This is consistent with the decree issued by Bishop Burchard in 1294, which stated that the lepers were to be kept “extra muros civitates Lubicenses murantibus” (outside the walls of the city of Lübeck). The complex was destroyed in the so-called Wullenwever Revolt of 1534 and not rebuilt until 1540 and 1542, before being completely demolished approximately 90 years later, making way for the reinforced city fortifications.

Several previous excavations of the area, usually spurred by utility or construction work, have encountered graves from the leper house cemetery. The skeletal remails were removed, examined and analyzed, but surprisingly, DNA and osteological analyses have not uncovered any direct evidence of leprosy. The skeletons found in the cemetery represent a demographic cross-section of the city, not any one particular group, age or gender dominates. Archaeologists believe St. Jürgen may have had a second role as a hospital for terminally ill patients, not just for lepers.

The previous burials were discovered in 2018, and while construction work has been ongoing since then, there have been no new graves found until this month. The new discoveries prove that the cemetery stretched much farther east than realized.

These are individual, as far as is known, west-east oriented grave pits about 1.30 meters below the current surface. The faint remains of wood suggest that the dead were buried in sawn logs. As in 2018, the graves will be scientifically documented, excavated, and examined in more detail. Only then will it become clear whether these burials were laid down at the same time as those excavated then and whether they confirm or supplement the findings, or provide further new insights.



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एक्ट्रेस दिशा पाटनी के घर की रेकी करने वाला गिरफ्तार:सोनीपत का रहने वाला; बरेली में हुई मुठभेड़; तमंचा-कारतूस और बाइक बरामद

बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी के बरेली स्थित घर पर हुई फायरिंग मामले में सोनीपत के अनिल को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की सख्त कार्रवाई के बीच इस केस से जुड़े कई आरोपी पकड़े जा चुके हैं। ताजा घटनाक्रम में राजस्थान का कुख्यात बदमाश रामनिवास उर्फ दीपक और हरियाणा के सोनीपत का रहने वाला अनिल मुठभेड़ के बाद पुलिस के हत्थे चढ़ गए। अनिल के पकड़े जाने के बाद उसके परिवार ने अनिल को बेकसूर बताया है। ​कौन है अनिल बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी के घर के बाहर हुई फायरिंग से पहले की गई रेकी में सोनीपत के एक युवक अनिल का नाम सामने आया है। अनिल सोनीपत के राजपुर गांव का रहने वाला है और पेशे से एक कार मैकेनिक है। जिसने केवल 8वीं तक की पढ़ाई की है। इसके बाद उसने गाड़ियों की मरम्मत का काम सीखना शुरू कर दिया था। वह शादीशुदा है और उसके परिवार में उसकी मां, पत्नी और तीन बच्चे हैं। परिवार के अनुसार, करीब 5 साल पहले एक दुर्घटना में अनिल की दोनों हंसली टूट गई थीं, जिससे वह अब बाइक नहीं चला पाता। वह गाड़ियों की मरम्मत के अलावा कभी-कभी टैक्सी बुकिंग का काम भी करता था, जिससे उसके परिवार का गुजारा चलता है। ​परिवार ने बताया बेकसूर ​अनिल के परिजनों का कहना है कि वह बुधवार को घर से निकला था और तीन दिन से वापस नहीं आया था। उन्होंने तुरंत कहा कि उनका बेटा बेकसूर है और ऐसा कोई काम नहीं कर सकता। अनिल के पिता सतीश की भी करीब 10-12 साल पहले मौत हो चुकी है, जिसके बाद से अनिल ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है। बरेली पुलिस की मुठभेड़ में बड़ी कार्रवाई शुक्रवार शाम बरेली के शाही थाना क्षेत्र के दुनका-बिहारीपुर रोड स्थित किच्छा नदी पुल के पास एसओजी और पुलिस की संयुक्त टीम की 2 बदमाशों से मुठभेड़ हुई। इस दौरान 25 हजार के इनामी बदमाश रामनिवास उर्फ दीपक के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। वहीं, अनिल पुत्र सतीश निवासी राजपुर, सोनीपत को भी गिरफ्तार किया गया। हथियार और बाइक बरामद पुलिस ने अनिल के पास से .315 बोर का तमंचा, दो जिंदा और चार खोखे बरामद किए। वहीं घटनास्थल से स्प्लेंडर प्लस बाइक भी मिली, जिस पर नंबर प्लेट नहीं लगी थी। जांच में सामने आया कि इस बाइक का इस्तेमाल दिशा पाटनी के घर की रेकी में हुआ था। राजस्थान-हरियाणा कनेक्शन पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं। रामनिवास राजस्थान के ब्यावर जनपद के ग्राम बेडकला का रहने वाला है, जबकि अनिल हरियाणा सोनीपत का निवासी है। पुलिस का कहना है कि ये अपराधी संगठित गिरोह बनाकर बॉलीवुड हस्तियों को टारगेट कर रहे थे। पहले गाजियाबाद और दिल्ली में हुई थी कार्रवाई इससे पहले गाजियाबाद में यूपी एसटीएफ ने इस केस से जुड़े शूटर रविंद्र और अरुण को मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। दिल्ली पुलिस नकुल और विजय को गिरफ्तार कर चुकी है। अब रामनिवास और अनिल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को पूरा नेटवर्क उजागर होने की उम्मीद है।

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'मेरी तुलना हमेशा मेरे पिता अनीस बज्मी से होगी':पोस्टमैन' डायरेक्टर फैजान बज्मी ने फिल्मी परिवार होने की चुनौतियों और फायदों के बारे में बताया

डायरेक्टर अनीस बज्मी के बेटे फैजान बज्मी की शॉर्ट फिल्म ‘पोस्टमैन’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। इस फिल्म में एक्टर संजय मिश्रा लीड रोल निभा रहे हैं। फिल्म में संजय मिश्रा एक पोस्टमैन के किरदार में हैं, जो कारगिल युद्ध के समय अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर एक बेहद जरूरी चिट्ठी की हिफाजत करता है। फिल्म की कहानी भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि पर आधारित है। हाल ही में फिल्म के डायरेक्टर फैजान बज्मी ने दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत में अपनी फिल्म, शूटिंग, और अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के बारे में बात की। सवाल: जब आप डायरेक्शन में आ रहे थे, तब आपके पिता अनीस बज्मी ने आपको क्या टिप्स दीं? जवाब: जब मैंने डायरेक्शन की शुरुआत करने का फैसला किया, तो पापा ने सबसे पहले यही कहा कि अगर तुम्हें इस काम के लिए सच्चा पैशन है तभी इसमें आना, वर्ना यह बहुत मुश्किल रास्ता है। उन्होंने समझाया कि जो लोग पैशनेट नहीं होते, उनके लिए इस फील्ड में टिकना आसान नहीं होता। पापा ने कहा था कि अगर तुम्हें रोज फिल्में देखनी पसंद हैं, लगातार पढ़ाई करनी है, नई-नई चीजें सीखनी हैं और यह जानना है कि दुनिया में क्या नया हो रहा है, तभी तुम इस पेशे में कामयाब हो सकते हो। वर्ना यह रास्ता और भी कठिन हो जाएगा। सवाल: जब आपने पहली बार फिल्म का आइडिया संजय मिश्रा को सुनाया, तब उनका क्या रिएक्शन था? जवाब: उन्होंने बहुत प्यार से कहा था- “बहुत अच्छा लिखा है बेटा।” संजय जी ने शुरू से ही मुझे सपोर्ट किया। यह पहली बार था जब मैं किसी सीनियर और इतने बड़े एक्टर को नरेशन देने गया था। सच कहूं तो थोड़ा नर्वस भी था, क्योंकि हर कोई जानता है कि संजय जी कितने कमाल के एक्टर हैं। लेकिन जैसे ही मैंने नरेशन शुरू किया, वो बहुत ध्यान से सुनते रहे और बीच-बीच में पॉइंट्स भी बताते रहे। इससे मुझे लगा कि वो कहानी में गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं। सवाल: इस शॉर्ट फिल्म में आपको क्या बातें लगती हैं जो दर्शकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करेंगी? जवाब: सबसे पहले मैं यही कहूंगा कि जब आप यह फिल्म देखेंगे, तो केवल परफॉर्मेंस पर ध्यान मत दीजिएगा। परफॉर्मेंस तो हैं ही, लेकिन इसके साथ आपको इसमें एक सच्चाई मिलेगी। हमने पूरी ईमानदारी के साथ कहानी कहने की कोशिश की है। अभी आपको यह विषय थोड़ा सेंसिटिव लग सकता है, लेकिन शायद फिल्म देखने के बाद महसूस होगा कि यह सिर्फ संवेदनशील मुद्दा नहीं, बल्कि हमारी हकीकत है। इसके भीतर हमने कई अलग-अलग लेयर्स डाली हैं, जिन्हें अभी बताना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे फिल्म का मजा कम हो जाएगा। असल में यह कहानी एक पोस्टमैन और एक आदमी की जिंदगी को छूती है। सवाल: इंडिया-पाकिस्तान के रिश्तों पर पहले भी कई फिल्में बनी हैं। आपकी फिल्म में पहले से अलग क्या है? जवाब: हमारी फिल्म हकीकत के ज्यादा करीब होगी, लेकिन मैंने हमेशा एक बात ध्यान में रखी है कि हमें किसी भी जगह के बारे में नफरत नहीं फैलानी चाहिए। सबसे पहले, वहां के रहन-सहन के हालात क्या हैं? और हर जगह अच्छे और बुरे लोग होते हैं, दोनों जगह पर आप देखिए। इसलिए हमने इस फिल्म में कभी नफरत फैलाने की कोशिश नहीं की। यह एक पोस्टमैन की कहानी है जो एक हालात से गुजर रहा है, और यह उसी पर आधारित है। तो आपको वह देखने को मिलेगा। सवाल: फिल्म के लीड एक्टर संजय जी और आपके पिता अनीस जी का फिल्म देखने के बाद क्या फीडबैक था? जवाब: फिल्म देखने के बाद संजय जी करीब दो मिनट तक बिल्कुल चुप रहे। उस वक्त मैं घबरा गया कि पता नहीं फिल्म उन्हें पसंद आई या नहीं। फिर अचानक उन्होंने कहा, “अरे, बहुत बढ़िया है…। ये फिल्म ऐसी है जो 2-5 मिनट के लिए आपको शांत कर देगी।” उसके बाद उन्होंने मुझे कहा, “बहुत मजा आया बेटा, बहुत अच्छा फिल्म बनाई है।” मेरे पापा ने भी फिल्म देखी और उन्हें भी बहुत पसंद आई। उन्होंने कहा, “अगर तुमने इतने कम रिसोर्सेज में इतनी अच्छी फिल्म बनाई है तो सोचो, जब तुम्हें और अच्छे रिसोर्सेज और समय मिलेगा, तो तुम और भी शानदार काम करोगे।” सवाल: अनीस जी का सलमान खान और अक्षय कुमार से बहुत गहरा रिश्ता रहा है। आपके अपने अनुभव इन दोनों सितारों के साथ कैसे रहे? जवाब: सलमान सर के साथ मेरा पहला अनुभव बचपन का है। 2011 में जब फिल्म ‘रेडी’ की शूटिंग श्रीलंका में हो रही थी, मैं भी पापा के साथ वहां था। उसी दौरान होटल में भारतीय क्रिकेट टीम भी रुकी हुई थी। मैंने मजाक में कहा कि मुझे बैटिंग करनी है और सलमान सर बॉलिंग करेंगे। सलमान सर ने तुरंत क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को बुलाया और खुद मेरे साथ मैदान में उतर गए। वो बॉलिंग कर रहे थे, मैं बैटिंग कर रहा था और फील्डिंग खुद सलमान सर कर रहे थे। यह पल मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा। सवाल: अनीस जी द्वारा बनाई गई आपकी पसंदीदा फिल्में व जॉनर कौन-से हैं? जवाब: पापा की बनाई मेरी पर्सनली फेवरेट फिल्म ‘वेलकम’ है और सच कहूं तो यह लगभग हर किसी की फेवरेट है। मुझे भी कॉमेडी फिल्में बहुत पसंद हैं, लेकिन मैं ज्यादा उन फिल्मों की तरफ खिंचता हूं जिनमें कॉमेडी और एंटरटेनमेंट के साथ-साथ एक मैसेज भी हो और कॉमर्शियल एंगल भी बना रहे। अगर अपनी दो पसंदीदा फिल्मों की बात करूं, तो एक है ‘वेलकम’ और दूसरी है राजकुमार हिरानी की ‘थ्री इडियट्स’ है। सवाल: भविष्य में आप किन एक्टर्स के साथ काम करने चाहते हैं? जवाब: बहुत सारे एक्टर्स हैं जिनके साथ काम करना चाहूंगा। सलमान सर, शाहरुख सर, आमिर सर ये तो मेरे पर्सनल फेवरेट हैं ही। नए एक्टर्स में कार्तिक आर्यन भी बहुत अच्छे लगते हैं। बहुत सारे और एक्टर्स हैं जो जिनके साथ मैं काम करना चाहूंगा। आपके पिता फिल्म इंडस्ट्री से हैं, इसका आपको क्या फायदा और क्या नुकसान मिलता है? जवाब: हर चीज के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। फिल्म इंडस्ट्री की फैमिली से होने का फायदा यह है कि लोग आपको थोड़ा-बहुत जानते हैं, पहचानते हैं, लेकिन अगर आपका काम अच्छा नहीं है तो यह पहचान किसी काम की नहीं है। नुकसान यह है कि हमेशा आपकी तुलना आपके पिता से होगी। यह मुश्किल तो है, लेकिन इसके लिए तैयार रहना पड़ता है। हर इंडस्ट्री में ऐसा होता है कि अगर आपके पिता वही काम करते हैं तो तुलना तो होगी ही, लेकिन समय के साथ आपका काम ही आपकी पहचान बनाता है।

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महेश भट्ट @77, खाते समय मां ने कसा तंज:भूखे पेट नौकरी की तलाश में निकले, 15 की उम्र से आज भी काम कर रहे

बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर महेश भट्ट आज 77 साल के हो गए हैं। आशिकी, सारांश और सड़क जैसी हिट फिल्में देने वाले भट्ट का निजी जीवन भी हमेशा चर्चा में रहा। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बचपन की मुश्किलों, करियर की शुरुआत और आज की सोच पर खुलकर बात की। मां का अकेलापन देखा है बचपन की यादें और फिल्मों में आने की प्रेरणा के बारे में बात करते हुए महेश भट्ट ने कहा- बचपन की जो सबसे बड़ी याद है, वह मेरी मां का अकेलापन है। फिल्मों में आने की प्रेरणा की बात करूं तो जब इंसान अकेला होता है, तो वह खुद से बातें करने लगता है। मैं भी तन्हाई में अपने मन से कहानियां सुनाता था। असल में कला का जन्म तन्हा जहन में ही होता है। बचपन से ही हर तरह का सिनेमा देखता आया हूं। 8-9 साल की उम्र में जब गुरु दत्त साहब की फिल्म 'प्यासा' देखी। ऐसा लगा कि मैं गुरु दत्त की रूह को जानता हूं। आसिफ साहब की 'मुगल-ए-आजम' देखी, तो लगा कि अदा और हिम्मत हो तो वैसी हो। 'मदर इंडिया' देखने के बाद यह महसूस हुआ कि इससे बड़ी फिल्म भारत में नहीं बनी है। बचपन में ही इन फिल्मों का असर मेरे खून में घुल गया, जिसकी गूंज आज तक मेरे काम में सुनाई देती है महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट उनके साथ कभी नहीं रहे। उनके मां-बाप की शादी नहीं हुई थी। दरअसल, महेश भट्ट के पिता पहले से ही शादीशुदा थे। इसलिए उन्होंने कभी महेश भट्ट की मां को पत्नी का दर्जा नहीं दिया। इस वजह से महेश भट्ट को भी बहुत कुछ झेलना पड़ा। लोग उन्हें नाजायज औलाद कहकर बुलाते थे। महेश भट्ट ने ई टाइम्स को बताया था कि उनके पिता का एक अलग परिवार था। वह घर आते थे, तो कभी जूते नहीं उतारते थे, क्योंकि वह उनके साथ कभी ठहरते नहीं थे। लेकिन फिर भी उनके मां-बाप के बीच प्यार बहुत था। पिता बेटे महेश भट्ट और उनकी मां की सिर्फ आर्थिक रूप और अन्य चीजों के जरिए मदद करते थे। महेश भट्ट भी गुजारे के लिए स्कूल के दिनों में छोटे-मोटे काम करके पैसे कमाते थे। यहां तक कि उन्होंने कुछ प्रोडक्ट्स के विज्ञापन भी बनाए थे। 15 साल की उम्र से आज तक काम कर रहा हूं दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान महेश भट्ट ने बताया कि उनकी मां 15 साल की उम्र में नौकरी करने को क्यों कहा था? महेश भट्ट बताते हैं- मां ने एक दिन साफ-साफ कह दिया—बेटा, तुझे खाते हुए अच्छा नहीं लगता, तेरी बहनें काम करती हैं और तू यहां खाना खा रहा है। उस समय खाना छोड़कर हाफ पैंट में निकल गया। मां ने रोका नहीं। एक दोस्त के पास पहुंचा और कहा कि कोई भी नौकरी दिलवा दे। ऐसे मैं 15 साल की उम्र से काम कर रहा हूं। आज 77 साल का हो गया हूं। शून्य से शुरुआत करना सबसे बड़ी बात महेश भट्ट ने करियर की शुरुआत राज खोसला के असिस्टेंट के तौर पर की। राज खोसला से मुलाकात का किस्सा शेयर करते हुए महेश भट्ट ने बताया कि कैसे उनकी सोच का उनके करियर पर असर पड़ा है? महेश भट्ट कहते हैं- 19 साल का था जब राज खोसला साहब से मिला। उनके कमरे में गुरु दत्त की तस्वीर लगी थी। उन्होंने मुझसे पूछा कि फिल्म मेकिंग के बारे में क्या कुछ जानते हो? मैंने साफ कहा कि जी, नहीं। इस पर उन्होंने हंसकर कहा—बहुत अच्छा, शून्य से शुरू करना सबसे बड़ी बात है। उनकी यह बात मेरी जिंदगी में आज तक बनी हुई है। मैं किसी को कुछ नया नहीं देता महेश भट्ट ने इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक टैलेंट को लॉन्च किया है। महेश भट्ट से जब पूछा गया कि जब किसी नए कलाकार को मौका दिया, तो उनका टैलेंट कैसे पहचानते हैं? महेश भट्ट ने कहा- हम एक लाइट हाउस की तरह हैं। समुद्र में जो जहाज भटकते हैं, उन्हें लाइट हाउस रास्ता दिखाता है। मैं जाकर किसी को पकड़ता नहीं हूं, लेकिन जिसे मेरी रोशनी दिखती है, वह खुद आ जाता है। असल में, मेरे अंदर से लोग अपना ही स्वाद पहचानते हैं। मैं किसी को कुछ नया नहीं देता, बस उनके भीतर का बीज बचाता हूं। जैसे माली बीज बोता नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करता है। इंसान अपने आप में संपूर्ण है, बस उसे याद दिलाने की जरूरत होती है कि उसमें ताकत पहले से मौजूद है लोगों को पहचाना और ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करना है अपने जन्मदिन की सबसे खूबसूरत याद और 77 साल की उम्र में अपने सबसे बड़े लक्ष्य के बारे में बात करते हुए महेश भट्ट कहते हैं- अब जो भी आएगा, वही सबसे खूबसूरत जन्मदिन की याद होगा। अब मेरा लक्ष्य नए लोगों को पहचानना और उन्हें उनकी ऊंचाई तक पहुंचने में मदद करना है। जैसे बगीचा तभी खूबसूरत बनता है जब उसमें अलग-अलग फूल खिलते हैं। महेश भट्ट ने अपनी जिंदगी से प्रेरित फिल्में बनाई महेश भट्ट अकेले ऐसे फिल्ममेकर हैं, जिन्होंने हर तरह की फिल्में बनाईं। फिल्मों के लिए जितना चर्चाओं में रहे, उतना ही विवादों के कारण सुर्खियों में छाए। ये एकमात्र डायरेक्टर हैं जिन्होंने अपनी ही जिंदगी से प्रेरित 6-7 फिल्में बनाईं। इनमें से 3 एक्ट्रेस परवीन बाबी के साथ उनके संबंधों पर थीं। महेश भट्ट के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘अर्थ' विशेष रूप से परवीन बाबी के साथ उनके रिश्ते से प्रेरित थी। यह फिल्म पति और पत्नी के रिश्ते की जटिलताओं और मानसिक स्वास्थ्य के संवेदनशील विषयों को दर्शाती है, जिसमें फिल्म का मुख्य संदेश यह है कि कुछ विवाहों को लंबे समय तक चलने की आवश्यकता नहीं होती है। इस फिल्म में शबाना आजमी और स्मिता पाटिल ने दमदार महिला किरदारों की भूमिका निभाई थी, जो अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ावों का सामना करती हैं। इस फिल्म के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर हमेशा परेशानी भरे होते हैं और कुछ रिश्तों को समाप्त करना ही बेहतर होता है। इस फिल्म के लिए शबाना आजमी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का नेशनल और फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। शादीशुदा होते महेश भट्ट का परवीन बाबी के साथ रिश्ता था। महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य के विषयों को उठाती थी, जो उस दौर में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर को लेकर समाज के रूढ़िवादी विचारों के विपरीत थी। 'डैडी' महेश भट्ट के जीवन के अनुभव पर आधारित फिल्म 'डैडी' महेश भट्ट के निजी अनुभवों पर आधारित थी, जिसमें उनकी बेटी पूजा भट्ट ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। यह फिल्म बाप और बेटी के रिश्ते की जटिलताओं को दर्शाती है, जिसमें पिता का शराब से संघर्ष और बेटी का उसे रोकने का प्रयास शामिल था। फिल्म के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई थी कि रिश्ते की जटिलताओं और संवेदनशीलता को आने वाली पीढ़ी के लिए समझना जरूरी है। यह फिल्म दूरदर्शन पर रिलीज हुई थी। पूजा भट्ट के पिता का किरदार अनुपम खेर ने निभाया था। 'आशिकी' महेश भट्ट की पहली पत्नी के साथ उनके प्यार भरे रिश्ते से प्रेरित थी महेश भट्ट ने एक बार खुलासा किया था कि 'आशिकी' उनके पहले प्यार, उनकी पहली पत्नी किरण भट्ट के साथ उनके वास्तविक जीवन के रिश्ते से प्रेरित थी। महेश भट्ट ने किरण को एक संस्थान में दाखिला दिलाया था, जहां उन्हें टाइपिस्ट और शॉर्टहैंड सिखाया गया था, जो फिल्म का एक मुख्य पहलू है। महेश भट्ट की पहली पत्नी का नाम पहले लॉरेन ब्राइट था। शादी के बाद किरण भट्ट रख लिया। फिल्म में दीपक तिजोरी द्वारा निभाया गया दोस्त का किरदार महेश भट्ट के एक दोस्त की भूमिका से प्रेरित था, जिसने उस समय महेश भट्ट की मदद की थी। ‘फिर तेरी कहानी याद आई’ लिव-इन रिलेशनशिप के अनुभवों से प्रेरित ‘फिर तेरी कहानी याद आई’ परवीन बॉबी के साथ महेश भट्ट के लिव-इन रिलेशनशिप के अनुभवों से प्रेरित थी। इस फिल्म में परवीन बाबी के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों और ब्रेकअप के भावनात्मक पहलुओं को दर्शाया गया है। इस फिल्म में पूजा भट्ट और राहुल रॉय की लीड भूमिका थी। पूजा भट्ट ने परवीन बाबी और राहुल रॉय ने महेश भट्ट से प्रेरित किरदार निभाया था। यह फिल्म महेश भट्ट के लिए अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने का एक तरीका थी महेश भट्ट की मां के जीवन से प्रेरित थी ‘जख्म’ फिल्म ‘जख्म’ महेश भट्ट के जीवन की सबसे निजी फिल्मों में से एक थी। यह फिल्म उनके पिता नानाभाई भट्ट और मां शिरीन मोहम्मद अली के रिश्ते को भी दर्शाती है, जिसमें मां मुस्लिम और पिता हिंदू थे। फिल्म में एक धर्मनिरपेक्ष महिला की कहानी को दिखाया गया है, जो एक हिंदू से प्यार करती है और अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए संघर्ष करती है। इस फिल्म में पूजा भट्ट ने महेश भट्ट की मां शिरीन मोहम्मद अली का किरदार निभाया था। इस फिल्म को राष्ट्रीय एकता पर आधारित सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का नरगिस दत्त पुरस्कार मिला। इस फिल्म के लिए अजय देवगन को पहली बार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। परवीन बाबी के जीवन से प्रेरित एक और फिल्म परवीन बाबी और महेश भट्ट के साथ रिश्ते से प्रेरित एक और फिल्म ‘वो लम्हे’ बनी। यह फिल्म परवीन बाबी को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाई गई थी। यह फिल्म परवीन बाबी के जीवन, उनके सिजोफ्रेनिया के संघर्ष, और महेश भट्ट के साथ रिश्ते से प्रेरित थी। इस फिल्म में कंगना रनौत ने सिजोफ्रेनिया से पीड़ित अभिनेत्री का किरदार निभाया था। फिल्मों के माध्यम से अपने जीवन की सच्चाई सामने लाए फिल्म ‘हमारी अधूरी कहानी' महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट, मां शिरीन मोहम्मद अली और उनकी सौतेली मां हेमलता भट्ट की प्रेम कहानी से प्रेरित थी। इस फिल्म को महेश भट्ट ने प्रोड्यूस किया था जबकि फिल्म के डायरेक्टर मोहित सूरी थे। इस फिल्म में विद्या बालन, इमरान हाशमी और राजकुमार राव की लीड भूमिका थी। महेश भट्ट ने कई मौकों पर कहा है कि उनका अधिकांश काम उनके व्यक्तिगत जीवन से ही प्रेरित रहा है। वह अपनी फिल्मों के माध्यम से अपने जीवन की सच्चाइयों को सामने लाना चाहते हैं।

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Watch: Take That megafans 'super excited' ahead of surprise BBC performance

The band announced plans to take their Circus Live tour back on the road next summer.

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Saint Augustine: An African in the City of God

Saint Augustine: An African in the City of God JamesHoare

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तमिल एक्टर रोबो शंकर का निधन:एक दिन पहले शूटिंग के दौरान फिल्म सेट पर हुए थे बेहोश, कमल हासन ने जताया दुख

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कॉमेडियन और एक्टर रोबो शंकर का गुरुवार, 18 सितंबर को निधन हो गया। वह 46 साल के थे। शंकर चेन्नई में एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे। लाइव मिंट जैसे संस्थानों की मीडिया रिपोर्ट्स पर लिखा गया कि उन्हें गुर्दे की समस्या थी। बुधवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया। गुरुवार रात करीब 8:30 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। 17 सितंबर को शंकर के सेट पर बेहोश भी हो गए थे। उनके निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दुख जताया। एक यूजर ने लिखा – रोबो शंकर सर के उस मशहूर सीन की अलग ही फैन फॉलोइंग है। बहुत जल्दी चले गए! ॐ शांति दूसरे यूजर ने लिखा – रोबो न, आपको ऐसे नहीं जाना चाहिए था। आपको यहीं होना चाहिए था। कुछ खोने से सिर्फ दुख नहीं होता, गुस्सा भी आता है। इंसान पर, वक्त पर और अलविदा के ख्याल पर भी। वहीं, एक्टर कमल हासन ने एक्स पर लिखा, रोबो शंकर। रोबो तो बस एक उपनाम है। मेरी नजर में तुम इंसान हो। तुम मेरे छोटे भाई हो। क्या ऐसे ही मुझे छोड़कर चले जाओगे? तुम्हारा काम पूरा हो गया, तुम चले गए। मेरा काम अभी अधूरा है। तुम हमारे लिए कल चले गए। इसलिए, कल हमारा है। रोबोट-स्टाइल डांस मूव्स से ‘रोबो’ नाम मिला शंकर का जन्म मदुरै में हुआ था। उन्हें 'रोबो' नाम उनके खास रोबोट-स्टाइल डांस मूव्स की वजह से मिला था। उन्होंने 2000 के दशक में छोटे रोल्स से करियर की शुरुआत की। बाद में स्टार विजय के शो 'कलक्का पोवथु यारु' से उन्हें पहचान मिली। यहां उनकी कॉमेडी टाइमिंग और बॉडी लैंग्वेज काफी पसंद की गई। शंकर को फिल्मों में बड़ा मौका 'इधारकुठाने' , 'आसाइपट्टई बालाकुमारा' और 'वायै मूडी पेसावम' से मिला। इसके बाद उन्होंने 'वेलैनु वंधुट्टा वेल्लईकरन', 'मारी', 'विश्वसम' और कोबरा जैसी फिल्मों में काम किया। कुछ साल पहले, उन्हें लंबे समय तक पीलिया रहा था। इस दौरान उनका वजन भी कम हो गया था। हालांकि, इलाज के बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की थी। शंकर के परिवार में उनकी पत्नी और एक्ट्रेस प्रियंका शंकर हैं। उनकी बेटी इंद्रजा शंकर फिल्मों के साथ सोशल मीडिया पर भी एक्टिव रहती हैं। रोबो शंकर गूगल पर ट्रेंड कर रहे हैं

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दिशा पाटनी के घर पर हमला केस:रविंद्र नाम बदल-बदलकर अलग-अलग होटलों में रुका, CCTV में दिखे

यूपी के बरेली में बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पाटनी के घर पर फायरिंग करने वाला मुख्य आरोपी रविंद्र नाम बदल-बदलकर अलग-अलग होटलों में रुका था। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है। उसने बरेली में अपनी असली पहचान रविंद्र के नाम से होटल में रूम लिया, तो रामपुर में दो अलग-अलग नाम से रूम बुक किया। लेकिन योगी की पुलिस से वो बच नहीं सका। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि बदमाश अगर पाताल में भी छिपे होंगे तो पुलिस उन्हें ढूंढ निकालेगी। बरेली से रामपुर तक बदली पहचान दरअसल, रविंद्र बरेली के शिकलापुर में रोडवेज बस स्टैंड के पास स्थित प्रीत गेस्ट हाउस में 10 सितंबर को रुका था। 11 सितंबर की सुबह उसने चेक आउट किया और फिर रामपुर पहुंचा, जहां उसने रामनिवास के नाम से होटल में आईडी दी। अगले दिन यानी 12 सितंबर को वह अपने साथी अरुण के साथ बरेली लौटा और करीब साढ़े तीन बजे दिशा पाटनी के घर पर ताबड़तोड़ फायरिंग करके फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक रविंद्र ने तीन अलग-अलग आईडी पर होटलों में रूम लिए, जिनमें उसने अपना नाम रामनिवास और सागर बताया। खुला चेहरा, नहीं था कोई खौफ रविंद्र ही मुख्य आरोपी था जिसने फायरिंग की, जबकि अरुण बाइक चला रहा था और हेलमेट पहने हुए था। लेकिन रविंद्र के चेहरे पर कोई खौफ नहीं था। उसने न तो चेहरा छिपाया और खुलेआम फायरिंग की। इस वजह से सीसीटीवी कैमरों में उसका चेहरा साफ आ गया। पुलिस ने बरेली शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे 1320 कैमरों की मदद से उसकी पूरी कुंडली खंगाल ली। SSP ने बताया जांच का तरीका एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि एसपी ट्रैफिक मुहम्मद अकमल और ICCC स्टाफ की मदद से सभी कैमरों को कई बार चेक किया गया। जिन दो शूटरों ने फायरिंग कर दहशत फैलाई थी, वे झुमका चौराहे से बाइक से शहर में आते हुए कैमरे में कैद हो गए। आगे की जांच में पुलिस होटल तक भी पहुंच गई, जहां रविंद्र और अरुण रुके थे। शूटरों का होटल कनेक्शन रविंद्र और अरुण अलग-अलग होटलों में ठहरे थे। रविंद्र अकेले प्रीत गेस्ट हाउस में रुका, जबकि अरुण, नकुल और विजय स्टेशन रोड स्थित हिंद गेस्ट हाउस में रुके। चारों शूटर 10 सितंबर को बरेली आए और 11 को लौट गए। पहले दिन नकुल और विजय को फायरिंग के लिए भेजा गया, लेकिन वे दिशा पाटनी के घर को पहचान नहीं पाए और घर के बाहर हवाई फायर कर लौट गए। पहला प्लान फ्लॉप हो गया रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ इंतजार में थे कि घटना के बाद कोई प्रतिक्रिया होगी। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होगी या मीडिया में चर्चा होगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पहले दिन की घटना फ्लॉप हो गई। जगदीश पाटनी ने भी उस दिन की घटना को हल्के में लिया और नजरअंदाज कर दिया। पुलिस से लेकर मीडिया तक किसी को इसकी जानकारी नहीं हुई। दूसरे दिन हत्या की साजिश अगले दिन कुख्यात शूटर रविंद्र और अरुण को भेजा गया। इस बार गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का मकसद सिर्फ दहशत फैलाना नहीं था, बल्कि दिशा पाटनी की बहन खुशबू पाटनी और उनके पिता रिटायर्ड डीएसपी जगदीश सिंह पाटनी की हत्या करना था। शूटरों को पता था कि बाप-बेटी दोनों सुबह योगा करते हैं। इसी वजह से रविंद्र ने 12 राउंड फायरिंग की। इसमें जगदीश सिंह पाटनी बाल-बाल बच गए। एनकाउंटर के बाद नई धमकी रविंद्र और अरुण के एनकाउंटर के बाद रोहित गोदारा ने धमकी दी। इस पर जगदीश पाटनी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि योगी राज में अगर कोई कानून हाथ में लेगा तो उसका हश्र वही होगा, जो रविंद्र और अरुण का हुआ। CM योगी और पुलिस का जताया आभार जगदीश पाटनी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहा- मैं सर्वप्रथम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने मुझे और मेरे परिवार को निडर जीवन का विश्वास दिलाया और आज उसे साकार कर दिखाया है। भयमुक्त समाज और जीरो टॉलरेंस का जो नारा उन्होंने दिया था, उसे पुलिस ने अंजाम तक पहुंचाया है। जब से मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कमान संभाली है, पूरा प्रदेश भयमुक्त होकर अमन-चैन की सांस ले रहा है। उन्होंने आगे कहा- अब कोई भी अपराधी जो समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल है, या तो खत्म हो चुका है या प्रदेश छोड़कर भाग गया है। मुख्यमंत्री ने जो कार्य समाज के लिए किया है, वह कोई और नहीं कर सकता। आज के इस कदम के लिए मैं और मेरा परिवार सदा उनका ऋणी रहेगा। पुलिस टीम की सराहना पाटनी ने पुलिस अधिकारियों का नाम लेकर धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा- मैं डीजीपी राजीव, एडीजी अमिताभ यश, एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा, डीआईजी अजय कुमार साहनी, एसएसपी अनुराग आर्य और पूरी टीम का आभार व्यक्त करता हूं। पिछले 5-6 दिनों से पुलिस ने सिर्फ इसी मामले पर दिन-रात मेहनत की और आखिरकार अपराधियों को अंजाम तक पहुंचा दिया। मैं एसटीएफ टीम को भी धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मुख्यमंत्री का भरोसा पूरी तरह जीत लिया है। जब मुख्यमंत्री योगी, डीजीपी और पूरी पुलिस मेरे साथ है, तो मुझे किसी तरह का डर नहीं है। आगे की कार्रवाई भी पूरी तरह अंजाम तक पहुंचेगी।

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