कांस-2026, सेक्स वर्कर्स पर बनी भारतीय फिल्म की स्क्रीनिंग होगी:2KM के रेडकार्पेट में आलिया, ऐश्वर्या पहुंचेगीं, यहां चप्पल पहनना, पर्स रखना मना, जानिए फैक्ट्स
दुनियाभर का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल और कल्चरल इवेंट कांस 12-23 मई तक फ्रांस के फ्रेंच रिवेरा में आयोजित हो रहा है। देश-दुनिया की कई बड़ी हस्तियां कांस के भव्य रेड कार्पेट पर अपने स्टाइल से छाप छोड़ेंगी, वहीं दुनियाभर की कई फिल्मों की स्क्रीनिंग भी यहां रखी जाएगी। फेस्टिवल के आगाज के साथ जानिए, इस साल भारत के कौन से सेलेब्स रेड कार्पेट पर पहुंचेंगे, कौन सी फिल्में दिखाई जाएंगी, भारत की कांस में क्या अचीवमेंट्स हैं और क्या है कांस का भव्य इतिहास। साथ ही देखेंगे इंडियन सेलेब्स के कांस से कुछ चुनिंदा लुक्स- ये इंडियन सेलेब्स कांस में हो रहे हैं शामिल इस साल भारत से आलिया भट्ट, ऐश्वर्या राय, मौनी रॉय, अदिति राव हैदरी और एहसास चन्ना कांस के रेड कार्पेट में पहुंचेंगी। एक्ट्रेस तारा सुतारिया भी कांस रेड कार्पेट पर डेब्यू करने वाली हैं। आलिया भट्ट, लोरियल पेरिस की तरफ से कांस में आई हैं। कांस 2026 में छाएगा भारत का रीजनल सिनेमा कांस में इंडो-अमेरिकन फिल्म बॉम्बे स्टोरीज की स्क्रीनिंग भी कांस में होगी। ये फिल्म मंटों के उपन्यास पर बनी है, जो 1930 के दशक की बॉम्बे में रहनेवालीं सेक्स वर्कर्स की कहानी दिखाती है। फिल्म को राहत शाह काजमी ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान एक्ट्रेस मौनी रॉय कांस में मौजूद रहेंगी। इसके क्लासिकल सेगमेंट में 40 साल पुरानी मलयाली फिल्म अम्मा अरियन की भी कांस में स्क्रीनिंग होगी। रीजनल सिनेमा की ये फिल्में भी कांस पहुंचीं- पंजाबी सिनेमा- पॉपुलर सिंगर और एक्टर एमी विर्क की फिल्म चारदिकला की स्क्रीनिंग कांस में होनी है। इसकी स्क्रीनिंग के लिए एमी विर्क कांस में डेब्यू करेंगे। उनके साथ को-स्टार रूपी गिल भी कांस में पहुंचेंगी। मलयाली सिनेमा- मलयाली फिल्ममेकर चिदंबरम की फिल्म बालनः द बॉय की स्क्रीनिंग कांस में होनी है। गुजराती सिनेमा- एक्ट्रेस मानसी पारेख इस साल प्रोड्यूसर पार्थिव गोहिल के साथ कांस में शामिल होने वाली हैं। गुजराती फिल्म लालोः कृष्णा सदा सहायते की भी कांस में स्क्रीनिंग होगी। मराठी सिनेमा- मराठी फिल्म इंडस्ट्री से एक्टर अशोक सराफ, निवेदिता सरफा, एक्ट्रेस प्राजक्ता माली और प्रोड्यूसर केदार जोशी कांस का हिस्सा बनेंगे। पायल कपाड़िया ज्यूरी बनीं, आशुतोष गोवारिकर ऑफिशियल डेलिगेट्स लगान बना चुके आशुतोष गोवारिकल इस साल भारत के ऑफिशियल डेलिगेट बनकर कांस का हिस्सा बनेंगे। 2021 और 2024 में कांस के दो अवॉर्ड ग्रैंड प्रिक्स और गोल्डन आई अवॉर्ड जीत चुकीं पायल कपाड़िया इस साल ज्यूरी बनकर कांस में शामिल हो रही हैं। वो क्रिटिक्स वीक कैटेगरी की ज्यूरी रहेंगी। कांस की ज्यूरी बनने वाली पहली इंडियन एक्ट्रेस रहीं ऐश्वर्या राय हर साल दुनियाभर के चुनिंदा लोगों को ज्यूरी में शामिल किया जाता है। मृणाल सेन पहले भारतीय थे, जिन्हें 1982 में ज्यूरी में शामिल किया गया था। इसके अलावा ज्यूरी बनने वाली पहली भारतीय महिला डायरेक्टर मीरा नायर रहीं। ऐश्वर्या राय पहली इंडियन एक्ट्रेस हैं, जिन्हें कांस में ज्यूरी बनाया गया। हालांकि अब दीपिका पादुकोण, विद्या बालन और शर्मिला टैगोर भी इस लिस्ट में शामिल हैं। सेरेमनी के आखिरी दिन मिलेगा पाम डिओर पाम डिओर, कांस का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित अवॉर्ड है। यह पुरस्कार फेस्टिवल की मुख्य प्रतियोगिता में चुनी गई सर्वश्रेष्ठ फिल्म को दिया जाता है। इसे कांस का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इस साल 12-23 मई तक चलने वाले इस फेस्टिवल में 23 मई को पाम डिओर अवॉर्ड दिया जाएगा। कांस के इतिहास में भारत की उपलब्धियां- 80 साल पहले भारत को मिला पहला पाम डिओर, आज भी रिकॉर्ड कायम कांस फिल्म फेस्टिवल में जाने वाली पहली भारतीय फिल्म नीचा नगर थी। चेतन आनंद के निर्देशन में बनी ये फिल्म संयोग से कभी भारत में रिलीज ही नहीं हुई। इसका प्रसारण सिर्फ दूरदर्शन में ही किया गया था। अमीर-गरीब की जिंदगी दर्शाने वाली इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल का सर्वश्रेष्ठ पाम डिओर अवॉर्ड मिला था। नीचा नगर ये अवॉर्ड जीतने वाली भारत की इकलौती फिल्म है। इसके अलावा दो बीघा जमीन (1954), बूट पॉलिश, पाथेर पांचाली, सलाम बॉम्बे, लंच बॉक्स जैसी करीब 21 फिल्मों को कांस फिल्म फेस्टिवल में अलग-अलग कैटेगरी में अवॉर्ड मिले हैं। जबकि अब तक भारत को कुल 38 नॉमिनेशन मिल चुके हैं। नॉमिनेशन हासिल करने वाली फिल्मों में राज कपूर की ब्लॉकबस्टर फिल्म आवारा भी शामिल है। जब कांस के रेड कार्पेट पर ट्रेडिशनल अवतार में पहुंचे सेलेब्स कांस रेड कार्पेट पर सेलेब्स के इन लुक्स का उड़ा मजाक एक नजर कांस के बेहतरीन इतिहास पर- हिटलर की तानाशाही के खिलाफ शुरू हुआ कांस 1938 में वेनिस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत की गई थी, लेकिन उस समय जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर और इटली के तानाशाह मुसोलिनी अपने पसंदीदा लोगों को अवॉर्ड बांट देते थे। इनकी तानाशाही से परेशान होकर कई ज्यूरी मेंबर ने वेनिस फिल्म फेस्टिवल छोड़ दिया और एक फ्री फेस्टिवल शुरू करने का फैसला किया, जिसकी लोकेशन कांस, पेरिस तय हुई। फ्रेंच सरकार ने उसके दस्तावेजों पर साइन कर उसे ऑफिशियल कांस फिल्म फेस्टिवल घोषित कर दिया। पहला फिल्म फेस्टिवल 1-20 सितंबर 1939 को होना था। एक दिन पहले गाला नाइट रखी गई, लेकिन 1 सितंबर को फेस्टिवल शुरू हुआ तो हिटलर द्वारा पौलेंड पर हमला करने से सेरेमनी में हंगामा मच गया और सेरेमनी 10 दिनों के लिए टालनी पड़ी। माहौल सुधरने के बदले और बिगड़ गए जब फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के बीच युद्ध का ऐलान हुआ। दूसरे विश्व युद्ध से कांस फिल्म फेस्टिवल 6 सालों तक टला था। वर्ल्ड वॉर 2 से 6 साल के इंतजार के बाद पहली सेरेमनी 20 सितंबर- 5 अक्टूबर 1946 को हुई, जिसमें 20 देशों ने हिस्सा लिया। 1947 में मैनेजमेंट खराब होने पर महज 16 देशों ने हिस्सा लिया। अगले साल 1948 में बजट की कमी के कारण सेरेमनी हुई ही नहीं। 1949 में फिर इवेंट मैनेजमेंट से लोग निराश हुए। 1950 में खर्च न उठा पाने पर फिर फिल्म फेस्टिवल हुआ ही नहीं। 1951 से लेकर अब तक सिर्फ कोरोना महामारी के चलते 2020 में सेरेमनी रद्द की गई थी। 18 कैरेट गोल्ड से बना अवॉर्ड, कीमत करीब 18 लाख रुपए 1955 में फेस्टिवल कमेटी ने पाम डिओर (Palm D’or) अवॉर्ड लॉन्च किया, जो इस सेरेमनी का हाईएस्ट अवॉर्ड है। 1964 में पाम डिओर को ग्रैंड प्रिक्स से रिप्लेस किया गया था, हालांकि 1975 से फिर पाम डिओर अवॉर्ड दिया जाने लगा। इसे स्विस ज्वेलरी फर्म चोपार्ड द्वारा तैयार किया गया है। इसे 18 कैरेट यलो गोल्ड और एमराल्ड कट डायमंड से तैयार किया गया है। इस एक अवॉर्ड की कीमत 27 हजार डॉलर यानी 18 लाख रुपए है। डिनर में खर्च किए जाते हैं 2.8 करोड़ रुपए कांस फिल्म फेस्टिवल के समय कांस शहर का होटल बेरियर ले मैजेस्टिक (Hotel Barrière Le Majestic) मेहमानों के लिए ओपनिंग और क्लोजिंग इवेंट के लिए खाने की जिम्मेदारी उठाता है। मेहमानों के डिनर के लिए ही 3 लाख 47 हजार डॉलर यानी 2.8 करोड रुपए खर्च किए जाते हैं। 2000 कैकड़ों से बनता है स्पेशल डिनर वेबसाइट बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक होटल डिनर के लिए 770 पाउंड यानी 340 किलोग्राम फोए ग्रास नाम की डिश तैयार करता है, जो बतख के लिवर से बनने वाली एक स्पेशल फ्रेंच डिश है। इसके अलावा यहां 110 पाउंड्स यानी 49 किलो केवियर बनता है, जो दुनिया की सबसे महंगी डिशेज में से एक है। इस डिश में करीब 1,32,000 डॉलर यानी 1 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इस डिनर के लिए हर साल 2000 किलो कैकड़े (लॉबस्टर) इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें 39 लाख रुपए लगते हैं। 18500 बोतल वाइन-शैंपेन पी जाते हैं गेस्ट्स सेलेब्स के लिए रखे गए डिनर में वाइन और शैंपेन भी सर्व होती है। पूरे कांस फेस्टिवल के दौरान करीब 18,500 बोतल वाइन और शैंपेन परोसी जाती है। वेबसाइट द हॉलीवुड रिपोर्टर के अनुसार सेरेमनी में ज्यादातर 1990 शैटो पेट्रस (1990 Chateau Petrus) वाइन सर्व की जाती है। जिसकी एक बोतल की कीमत 9390 डॉलर है, ये दुनिया की छठी सबसे महंगी वाइन है। हॉलीवुड रिपोर्टर के अनुसार, डिनर के अलावा दूसरे मौकों पर लगने वाली ड्रिंक्स, खाने, लेजर लाइट, फोटोग्राफ और म्यूजिक में भी 1,50,000 डॉलर यानी 1 करोड़ 23 लाख खर्च किए जाते हैं। कांस शहर सिर्फ याच को रेंट पर देकर कमाता है 3 हजार करोड़ रुपए कांस शहर याच पार्टी के लिए भी फेमस है। फेस्टिवल में पहुंचने वाले दुनियाभर के कई सेलेब्स फेस्टिवल के दौरान याच पार्टी का भी हिस्सा बनते हैं। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार याच पार्टी से सालाना कांस शहर की 3 हजार करोड़ रुपए कमाई होती है, जो सेलेब्स खुद खर्च करते हैं। हील्स की जगह फ्लैट चप्पल पहनी तो रेड कार्पेट पर एंट्री बैन रेड कार्पेट के नियमों के अनुसार, सेरेमनी में पहुंचने वाली फीमेल सेलिब्रिटीज का हील्स पहनना जरूरी है। ये नियम 2015 में बनाया गया है। अगर कोई सेलेब्स बिना हील्स के यहां पहुंचता है तो उसे सेरेमनी में नहीं आने दिया जाता। 2015 में ऐसा ही एक मामला विवादों से घिर गया, जहां कुछ फीमेल सेलेब्स को हील्स न पहनने पर अंदर नहीं जाने दिया। एक्ट्रेस क्रिस्टेन स्टीवर्ट और जूलिया रॉबर्ट्स भी इस नियम का विरोध करते हुए रेड कार्पेट पर अपनी हील्स रिमूव कर चुकी हैं। हैंडबैग और सेल्फी पर पाबंदी रेड कार्पेट के लिए कोई निर्धारित ड्रेस कोड नहीं है, हालांकि यहां आने वाले हर सेलेब को ग्लैमरस लगना अनिवार्य है। हैरानी की बात ये है कि रेड कार्पेट पर हैंडबैग ले जाना सख्त मना है। यहां आने वाले सेलेब्स क्लच या हाथ में दूसरा कोई भी बैग नहीं पकड़ सकते। रेड कार्पेट की रूल बुक पर लिखा हुआ है कि कृपया अपने हैंडबैग अपने होटल में ही छोड़कर आएं। रेड कार्पेट पर फोटो या सेल्फी लेने की भी सख्त मनाही है, कोई भी सेलेब रेड कार्पेट पर सिर्फ और सिर्फ पैपराजी से ही तस्वीर क्लिक करवा सकता है। 2 किलोमीटर की रेडकार्पेट को दिन में 3 बार बदला जाता है सबसे ज्यादा कांस फिल्म फेस्टिवल में रेड कार्पेट पर आए सेलेब्स चर्चा में रहते हैं।1989 में पहली बार रेड कार्पेट रखी गई थी, जिस पर चलकर तमाम हस्तियां फेस्टिवल का हिस्सा बनी थीं। महंगी ड्रेस और ज्वेलरी पहनकर सेलेब्स इस रेड कार्पेट पर दिन भर वॉक करते हैं, जिसके तीन तरफ पैपराजी और मीडिया की भीड़ रहती है। ये रेड कार्पेट 2 किलोमीटर लंबा होता है, साफ दिखाने के लिए इसे दिन में 3 बार बदला जाता है। पैपराजी की 5-पीस सूट के बिना एंट्री बैन रेड कार्पेट पर आने वाले सेलेब्स को क्लिक करने पहुंचे पैपराजी के लिए भी कांस फिल्म फेस्टिवल में ड्रेस कोड है। पैपराजी सिर्फ ब्लैक टक्सीडो सूट, टाई/बो और फॉर्मल शूज पहनकर ही आ सकते हैं। अगर ड्रेस कोड में लापरवाही की जाती है, तो उन्हें वहां फोटो क्लिक करने से रोक दिया जाता है। हालांकि, फीमेल पैपराजी को इस ड्रेस कोड में छूट मिली हुई है। कांस फिल्म फेस्टिवल से जुड़ी कुछ जरूरी बातें-
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