'मुझे अपना घर पब्लिक टॉयलेट लगता था':कॉमेडियन राजीव ठाकुर ने बताया- एक कमरे में गुजरा बचपन, 1984 के दंगों में पिता की फैक्ट्री बर्बाद हुई
कॉमेडियन राजीव ठाकुर ने हाल ही में बताया कि उनका परिवार एक कमरे के घर में रहता था, जहां बेडरूम, किचन और बाथरूम, सब कुछ उसी कमरे में था। 1984 के दंगों में उनके पिता की फैक्ट्री बर्बाद हो गई थी, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट में राजीव अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए इमोशनल हो गए। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिंदगी के उस दौर के बारे में ज्यादा बात करना पसंद नहीं करते क्योंकि उन दिनों की यादें आज भी उन्हें दर्द देती हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरा सफर ऐसे हालात में शुरू हुआ, जिन्हें मैं याद भी नहीं करना चाहता। अगर आज मैं लोगों को इसके बारे में बताऊं तो उन्हें यह मनगढ़ंत लग सकता है। कई लोग कहते हैं कि अपने दर्द को स्टैंड-अप कॉमेडी में बदल दो। मैं कभी-कभी ऐसा करता हूं, लेकिन उन जोक्स को सुनाते समय भी दर्द इतना असली होता है कि मैं बैकस्टेज जाकर रो पड़ता हूं।’ पूरा परिवार एक कमरे में रहता था राजीव ने बताया कि उनके माता-पिता की शादी के बाद परिवार की परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई थीं। उनके मुताबिक, पिता को पुश्तैनी घर छोड़ना पड़ा और पूरा परिवार एक कमरे के मकान में रहने लगा। उन्होंने आगे कहा, ‘वही एक कमरा आपका बाथरूम है। वही कमरा किचन है। वही ड्राइंग रूम है। वही बेडरूम है। उस घर में तीन भाई-बहन हुए हैं। आप सोचो कि बाथरूम भी वही है, बेडरूम भी वही है, किचन भी वही है, तो जब कोई अंदर नहा रहा होता था या कुछ भी कर रहा होता था, तब बाकी चार लोग घर के बाहर बैठे होते थे। मुझे अपना घर पब्लिक टॉयलेट लगता था। सिर्फ 2 रुपए नहीं मिल रहे थे बाहर बैठने के।’ दंगों में पिता की फैक्ट्री बर्बाद हुई थी राजीव ने यह भी बताया कि अमृतसर में उनके पिता की धागे की फैक्ट्री थी, जो 1984 के दंगों के दौरान बर्बाद हो गई। इसके बाद पिता बेरोजगार हो गए और परिवार के सामने आर्थिक स्थिति खराब हो गई। उन्होंने कहा कि कई बार किराया देना भी मुश्किल हो जाता था। राजीव ने अपने बचपन की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए बताया कि घर में केवल 40 वॉट का एक बल्ब था। उन्होंने कहा कि उन्हें सफेद रोशनी देखने की इच्छा होती थी क्योंकि उनके घर में ट्यूबलाइट नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि मकान मालिक रात 9 बजे बिजली बंद कर देता था, जिसके बाद परिवार या तो सो जाता था या मिट्टी के तेल के दीये की रोशनी में समय बिताता था। राजीव ठाकुर ने मुंबई आने से पहले अमृतसर में कपिल शर्मा और चंदन प्रभाकर के साथ अपने कॉमेडी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने साल 2007 में 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' (सीजन 3) में भाग लिया था। इस सीजन के विनर कपिल शर्मा बने थे। राजीव ठाकुर ने 'कॉमेडी सर्कस' और 'सजन रे झूठ मत बोलो' जैसे कई अन्य टेलीविजन शोज में काम किया।
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